भारत

मोदी के मंत्री ने कॉरपोरेट स्टाइल में घूस ली, 5 लाख की कंपनी 48 करोड़ में बेची : कांग्रेस

भारत में कांग्रेस ने रेल मंत्री पीयूष गोयल पर कॉरपोरेट स्टाइल में घूस लेने का आरोप लगाया है और पी एम नरेंद्र मोदी से उन्हें मंत्रिमंडल से हटाने की मांग की है।

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने आरोप लगाया कि गोयल की कंपनी द्वारा किया गया वित्तीय लेन देन ''लाभ पहुंचाने की दागदार कथा, शुचिता का घोर उल्लंघन तथा हितों का टकराव'' है।

वहीं भाजपा ने इन आरोपों को आधारहीन तथा दुर्भावनापूर्ण करार देते हुए खारिज कर दिया।

कांग्रेस नेता पवन खेड़ा ने दावा किया कि नवीन एवं अक्षय ऊर्जा मंत्री के रूप में पद संभालने के चार माह बाद गोयल ने फ्लैशनेट इन्फो सॉल्यूशन्स (इंडिया) लिमिटेड की अपनी पूर्ण हिस्सेदारी पीरामल ग्रुप को बेच दी। उन्होंने कहा कि गोयल और उनकी पत्नी के स्वामित्व वाली हिस्सेदारी को पीरामल समूह की कंपनी को करीब 1000 प्रतिशत प्रीमियम पर बेचा गया और इस समूह का अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में रूचि है। गोयल ने इस कंपनी को साल 2000 में पांच लाख रुपये की पूंजी से खड़ा किया था, लेकिन 2014 में उसे 48 करोड़ रुपये में बेच दिया।

उन्होंने आरोप लगाया कि गोयल ने मंत्री बनने के तुरंत बाद पी एम ओ की वेबसाइट में अपनी संपत्ति में इसका जिक्र नहीं किया और यह ''हितों के टकराव का स्पष्ट मामला है।''

खेड़ा ने संवाददाताओं से कहा कि यह मोदी सरकार के वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों में से एक मंत्री की यह ''लाभ पहुंचाने की दागदार कथा, शुचिता का घोर उल्लंघन तथा हितों का टकराव'' है। उन्होंने प्रश्न किया, ''प्रधानमंत्री नारा लगाते हैं कि 'न खाऊंगा और न ही खाने दूंगा'। क्या प्रधानमंत्री इस बात का जवाब देंगे कि क्यों उनके पसंदीदा कैबिनेट मंत्री तथा कर्नाटक प्रभारी के तौर पर पीयूष गोयल और उनकी पत्नी ने मिल कर संदेहास्पद वित्तीय लेन देन किया। क्या वह भारत की जनता को इसका जवाब देंगे?''

भाजपा ने इन आरोपों को खारिज किया है। बीजेपी ने एक बयान जारी कर कहा, ''पिछले माह कांग्रेस पार्टी ने पीयूष गोयल के वैध व्यापारिक लेन देन के खिलाफ दुर्भावनापूर्ण आरोप लगाते हुए उन्हें निशाना बनाया था।'' बयान में कहा गया है, ''जिस दिन वह मंत्री बने, उन्होंने सभी पेशेवर /  व्यापारिक गतिविधियां बंद कर दीं, निदेशक पदों से इस्तीफ दे दिया और अपने सभी निवेश को बेचने की प्रक्रिया शुरू कर दी।''

कांग्रेस ने मोदी सरकार से पूछा, क्या आप सालाना लालकिला पर पांच करोड़ भी खर्च नहीं कर सकते हैं

भारत में कांग्रेस ने दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला के रख रखाव की जिम्मेदारी डालमिया को दिये जाने पर नाराजगी जाहिर की है और मोदी सरकार से सवाल पूछा है कि क्या आपके पास धनराशि की इतनी कमी पड़ गई है कि आप सालाना इस ऐतिहासिक धरोहर पर पांच करोड़ भी खर्च नहीं कर सकते हैं?

कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा ने नई दिल्ली में प्रेसवार्ता कर कहा, ''वे ऐतिहासिक धरोहर को एक निजी उद्योग समूह को सौंप रहे हैं। भारत और उसके इतिहास को लेकर आपकी क्या परिकल्पना है और प्रतिबद्धता है? हमें पता है कि आपकी कोई प्रतिबद्धता नहीं है, लेकिन फिर भी हम आपसे पूछना चाहते हैं।'' उन्होंने सवाल किया, ''क्या आपके पास धनराशि की कमी है। ए एस आई (भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण) के लिए निर्धारित राशि क्यों खर्च नहीं हो पाती? यदि उनके पास धनराशि की कमी है तो राशि खर्च क्यों नहीं हो पाती है?''

कुछ ही दिन पहले एक उद्योग घराने ने पर्यटन मंत्रालय के साथ 'धरोहर को गोद लेने' की उसकी योजना के तहत एक समझौते पर हस्ताक्षर किया था। सहमति ज्ञापन के तहत द डालमिया भारत समूह धरोहर और उसके चारों ओर के आधारभूत ढांचे का रखरखाव करेगा। समूह ने इस उद्देश्य के लिए पांच वर्ष की अवधि में 25 करोड़ रूपये खर्च करने की प्रतिबद्धता जतायी है। इस परियोजना के लिए इंडिगो एयरलाइंस और जी एम आर समूह दौड़ भी में थे।

भारत के केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के अनुसार, डालमिया समूह ने 17 वीं शताब्दी की इस धरोहर पर छह महीने के भीतर मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने पर सहमति जतायी है। इसमें पेयजल कियोस्क, सड़कों पर बैठने की बेंच लगाना और आगंतुकों को जानकारी देने वाले संकेतक बोर्ड लगाना शामिल है। समूह ने इसके साथ ही स्पर्शनीय नक्शे लगाना, शौचालयों का उन्नयन, जीर्णोद्धार कार्य करने पर सहमति जतायी है। इसके साथ ही वह वहां 1000 वर्ग फुट क्षेत्र में आगंतुक सुविधा केंद्र का निर्माण करेगा। वह किले के भीतर और बाहर 3 डी प्रोजेक्शन मानचित्रण, बैट्री चालित वाहन और चार्ज करने वाले स्टेशन और थीम आधारित एक कैफेटेरिया भी मुहैया कराएगा।

खेड़ा की टिप्पणी पर पर्यटन राज्य मंत्री के जे अल्फोंस ने कहा कि गत वर्ष शुरू की गई योजना के तहत मंत्रालय धरोहर स्मारकों को विकसित करने के लिए जन भागीदारी पर गौर कर रहा है। उन्होंने कहा, ''इस परियोजना में शामिल कंपनियां केवल पैसा खर्च करेंगी, पैसा कमाएंगी नहीं। वे आने वाले पर्यटकों की संख्या बढ़ाने के लिए उनके लिए शौचालय और पेयजल जैसी सुविधाएं मुहैया कराएंगी। वे यह बताने के लिए बाहर में बोर्ड लगा सकती हैं कि उन्होंने मूलभूत सुविधाएं विकसित की हैं। यदि वे राशि खर्च कर रही हैं तो उसका श्रेय लेने में कुछ गलत नहीं है।''

इस वर्ष 31 मार्च तक की स्थिति के अनुसार संभावित स्मारक मित्रों का चयन किया गया है। इनका चयन निरीक्षण एवं दृष्टि समिति द्वारा किया गया है ताकि 95 धरोहर स्मारकों पर पर्यटकों के अनुकूल सुविधाओं का विकास किया जा सके। इन 95 स्मारकों में लाल किला, कुतुब मीनार, हम्पी (कर्नाटक), सूर्य मंदिर (ओडिशा), अजंता गुफा (महाराष्ट्र), चार मीनार (तेलंगाना) और काजीरंगा राष्ट्रीय उद्यान (असम) शामिल हैं।

लाल किला ठेका: निकम्मी औलाद पुरखों की विरासत बेच देती है

भारत में मुगल शासक शाहजहां द्वारा बनाये गये लाल किला के देखरेख की जिम्मेदारी एक निजी समूह को दिये जाने पर आम आदमी पार्टी नेता कुमार विश्वास ने बेहद तल्ख टिप्पणी की है। कुमार विश्वास ने तंज कसते हुए कहा है कि अगर औलाद निक्कमी हो तो पुरखों की विरासत को भी बेचने में संकोच नहीं करती है।

कुमार विश्वास ने अपने गुस्से को जाहिर करने के लिए ट्विटर प्लेटफॉर्म का सहारा लिया। कुमार विश्वास ने कहा कि सत्ता की हनक इंसान की सच सुनने की आदत को खत्म कर देती है। उन्होंने ट्वीट किया, ''हनक सत्ता की सच सुनने की आदत बेच देती है, हया को, शर्म को आखिर सियासत बेच देती है, निकम्मेपन की बेशर्मी अगर आंखों पे चढ़ जाए, तो फिर औलाद, ''पुरखों की विरासत'' बेच देती है!''

कुमार विश्वास ने इस ट्वीट को रेड फोर्ड हैशटेग के साथ डाला है। बता दें कि भारत में केन्द्र की मोदी सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने कुछ दिन पहले ही राष्ट्रीय महत्व के धरोहरों को विकसित करने और देख रेख करने के लिए एक पॉलिसी शुरू की थी। इसे 'धरोहर को गोद लेने' की योजना नाम दी गई थी।

इस योजना के तहत केन्द्र ने द डालमिया भारत समूह को लाल किला को सौंपा है। यह समूह लाल किले और उसके चारों ओर के आधारभूत ढांचे का रखरखाव करेगा। समूह ने इस उद्देश्य के लिए पांच वर्ष की अवधि में 25 करोड़ रूपये खर्च करने की प्रतिबद्धता जतायी है।

पर्यटन मंत्रालय के अनुसार, डालमिया समूह ने 17 वीं शताब्दी की इस धरोहर पर छह महीने के भीतर मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने पर सहमति जतायी है। इसमें पेयजल कियोस्क , सड़कों पर बैठने की बेंच लगाना और आगंतुकों को जानकारी देने वाले संकेतक बोर्ड लगाना शामिल है। समूह ने इसके साथ ही स्पर्शनीय नक्शे लगाना, शौचालयों का उन्नयन , जीर्णोद्धार कार्य करने पर सहमति जतायी है। इसके साथ ही वह वहां 1000 वर्ग फुट क्षेत्र में आगंतुक सुविधा केंद्र का निर्माण करेगा। वह किले के भीतर और बाहर 3 डी प्रोजेक्शन मानचित्रण, बैट्री चालित वाहन और चार्ज करने वाले स्टेशन और थीम आधारित एक कैफेटेरिया भी मुहैया कराएगा।

बीजेपी को हराने के लिए शरद यादव ने नई पार्टी लोकतांत्रिक जनता दल बनाई

भारत में जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के बागी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शरद यादव अगले महीने अपनी पार्टी का ऐलान करेंगे। चुनाव आयोग ने उनकी पार्टी के नाम को हरी झंडी दे दी है। शरद गुट ने चुनाव आयोग को पार्टी का नाम लोकतांत्रिक जनता दल और समाजवादी जनता दल सुझाया था।

सूत्रों के मुताबिक, चुनाव आयोग ने लोकतांत्रिक जनता दल नाम का आवंटन कर दिया है, लेकिन चुनाव चिह्न का आवंटन अभी नहीं हो सका है। हालांकि, शरद यादव फिलहाल इस पार्टी में कोई पद नहीं संभालेंगे, लेकिन वो इसके संरक्षक बने रहेंगे। सुशीला मोराले को पार्टी का महासचिव बनाया गया है। अगले महीने 18 मई को दिल्ली के तालकटोरा स्टेडियम में पार्टी के पदाधिकारियों के नाम का ऐलान होगा। साथ ही, पार्टी गठन की औपचारिक घोषणा भी की जाएगी। शरद यादव समर्थकों का एक सम्मेलन बुलाया गया है।

चर्चा है कि राजस्थान के नेता फतह सिंह और प्रोफेसर रतन लाल को पार्टी में कोई बड़ा पद दिया जा सकता है। ए बी पी न्यूज से प्रोफेसर रतन लाल ने कहा है कि नई पार्टी का गठन करने के पीछे मुख्य उद्देश्य बीजेपी को केंद्र की सत्ता से बाहर करना है और देशभर में दलितों, पिछड़ों, अल्पसंख्यकों और महिलाओं से जुड़े मुद्दे पर राजनीतिक लड़ाई लड़ना है। शरद यादव तकनीकी कारणों से फिलहाल इस पार्टी में पदधारी नहीं होंगे।

बता दें कि पिछले साल जुलाई में जब नीतीश कुमार ने बिहार में महागठबंधन तोड़कर बीजेपी के साथ गठबंधन कर सरकार बना ली थी, तब शरद यादव ने खुलेआम नीतीश की आलोचना शुरू कर दी थी। बाद में काफी सियासी रार के बाद जदयू अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शरद यादव के 21 समर्थकों को पार्टी से निकाल दिया गया था और जदयू नेताओं द्वारा संदेश दिलवाया था कि लालू यादव की पटना रैली में शामिल न हों, लेकिन शरद यादव ने वैसा नहीं किया। इसके बाद जदयू ने राज्य सभा के सभापति को पत्र लिखकर राज्य सभा में पार्टी का नेता पद से भी हटवा दिया था और राज्यसभा की सदस्यता रद्द करने की अर्जी दी थी। इसके बाद 5 दिसंबर को शरद यादव और दूसरे जदयू सांसद अली अनवर की राज्य सभा सदस्यता रद्द कर दी गई थी।

सभापति के इस फैसले को शरद यादव ने दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। फिलहाल यह मामला दिल्ली हाईकोर्ट में लंबित है।

राहुल गांधी बड़ी विमान दुर्घटना का शिकार होने से बच गए

भारत में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी और उनके साथी गुरुवार (26 अप्रैल) को दिल्ली से कर्नाटक की विमान यात्रा के दौरान कथित तौर पर बड़ी दुर्घटना का शिकार होने से बाल-बाल बच गए। समाचार एजेंसी ए एन आई के मुताबिक, कर्नाटक पुलिस से इस मामले की शिकायत की गई है।

कर्नाटक पुलिस की डायरेक्टर जनरल और इंस्पेक्टर जनरल नीलमनी एन राजू को लिखे गए एक शिकायत में जिक्र किया गया है कि दिल्ली से उड़ान भरने वाले विशेष विमान में कुछ गड़बड़ी महसूस की गई।

शिकायत पत्र में यहां तक लिखा गया है कि इस घटना से यात्रियों की जान पर बन आई थी। खास विमान में पांच लोग सवार थे, जिनमें कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी शामिल थे। बाकी यात्रियों में रामप्रीत, राहुल रवि, राहुल गौतम और कौशल विद्यार्थी शामिल थे। विमान ने कर्नाटक के हुबली के लिए उड़ान भरी थी। विमान ने सुबह करीब 9.20 बजे पर उड़ान भरी थी जिसे हुबली 11.45 बजे पहुंचना था। शिकायत्र पत्र के अनुसार, 10.45 बजे के करीब विमान बाई ओर झुकने लगा और भयानक कंपन के साथ तेजी से नीचे आने लगा।

दिन के मौसम की भविष्यवाणी और यात्रियों के अनुभव के अनुसार बाहर मौसम सामान्य था, धूप खिली थी और हवा भी नहीं चल रही थी। विमान के एक हिस्से से किसी चीज के जोर से खड़खड़ाने की आवाज आ रही जिसे सभी के द्वारा सुना जा रहा था।

शिकायत पत्र में कहा गया है कि विमान का ऑटोपायलट भी काम नहीं कर रहा था। हुबली में विमान को उतारने की तीन बार कोशिशें की गई और आखिरकार तीसरी बार में यह लैंड हो सका।

शिकायत में आगे कहा गया कि विमान के हुबली में 11.25 बजे उतरने के बाद भी उसमें लगातार कंपन हो रहा और आवाज आ रही थी।

विमान क्रू के सदस्यों ने भी उसमें गड़बड़ी होने बात कबूल की है। शिकायत पत्र के मुताबिक, यह (वी टी - ए वी एच) स्पेशल फ्लाइट थी। इस घटना के बारे में क्या कानूनी कार्रवाई की गई है, यह खबर लिखे जाने तक पता नहीं चला था।

बता दें कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव नजदीक हैं, इसलिए पार्टी के प्रचार अभियान के लिए अक्सर राहुल गांधी  वहां जाते हैं। राज्य में 224 विधानसभा सीटों के लिए 12 मई को एक ही चरण में मतदान होना है, जिसके नतीजे 15 मई को आएंगे।

चुनाव आयोग का दावा, ईवीएम का नया मॉडल पूरी तरह से टैंपर प्रूफ है

भारत में ई वी एम मशीनों में हैकिंग का आरोप झेल रहे चुनाव आयोग ने कर्नाटक चुनाव से पहले थर्ड जेनरेशन के ई वी एम मशीनों को लॉन्च करने जा रही है।

चुनाव आयोग का दावा है कि ये ई वी एम मशीनें पूरी तरह से टैंपर प्रूफ है। इन मशीनों को इलेक्ट्रानिक कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड ने बेंगलुरु में बनाया है। ये दोनों कंपनियां भारत सरकार की हैं।

भारत में चुनाव आयोग का दावा है कि ये मशीनें नयी विशेषताओं से लैस हैं। जैसे कि ये मशीनें अपनी गलती खुद पकड़ती हैं, और इसे खुद सुधार भी सकती हैं। ये मशीनें डिजिटल हस्ताक्षर की सुविधा से लैस है। इस वजह से चंद लोगों के सिग्नेचर से ही ये मशीनें खुलती हैं और टैंपरिंग फ्रूफ है। हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, तीसरी जेनरेशन की ये मशीनें बंगलुरु में सात विधानसभा के 1800 पोलिंग स्टेशन में इस्तेमाल की जाएगी। इन विधानसभाओं में 2700 बैलट यूनिट, 2250 कंट्रोल यूनिट्स और 2350 वीवीपैट का इस्तेमाल किया जाएगा।

रिपोर्ट के मुताबिक, ये ई वी एम मशीनें 24 बैलट यूनिट्स और 384 कैंडिडेट का डाटा रिकॉर्ड कर सकती है। जबकि दूसरी जेनरेशन की मशीनों में 4 बैलट और 64 कैंडिडेट का डाटा रिकॉर्ड कर सकता था।

खास बात यह है कि तीसरी श्रेणी की इन ई वी एम मशीनों के माइक्रोकंट्रोलर चिप को सिर्फ एक बार प्रोग्राम किया जा सकता है। इस मशीन के सॉफ्टवेयर कोड को दोबारा नहीं लिखा जा सकता है। इस ई वी एम को निश्चित रूप से इंटरनेट या किसी और नेटवर्क से संचालित नहीं किया जा सकता है।

चुनाव आयोग का यह भी कहना है कि मशीन पर कोई भी वायरस अटैक नहीं हो सकता है, क्योंकि इसको बनाने में किसी भी ऑपरेटिंग सिस्टम का इस्तेमाल नहीं किया गया है।

इसके अलावा इन मशीनों में बैटरी का सही स्तर भी पता चलता है। इससे पहले की ई वी एम मशीनें बैटरी के बारे में हाई, मीडियम या फिर लो लेवल ही दिखाती थीं।

चुनाव आयोग की योजना है कि 2019 के लोकसभा चुनावों में इन ई वी एम मशीनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया जाए। विधानसभा चुनावों में इसका इस्तेमाल ट्रायल के तौर पर देखा जा रहा है। यही नहीं, ई वी एम के कंट्रोल यूनिट और बैलेट्स यूनिट इलेक्ट्रानिक कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और भारत इलेक्ट्रानिक्स लिमिटेड द्वारा बनाये गये सॉफ्टवेयर और पुर्जे को ही स्वीकार करती है।

नयी किस्म की मशीनों को ऑपरेट करने में मैनपॉवर की भी अपेक्षाकृत कम जरूरत होती है। इन मशीनों को 4 लोग चला कर सकते हैं, जबकि पुराने मशीनों को चलाने के लिए 5 लोगों की जरूरत होती थी।

वकीलों ने इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति पर रोक की मांग की, चीफ जस्टिस का इनकार

भारत में केंद्र सरकार द्वारा सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश के बावजूद जस्टिस के एम जोसेफ का नाम लौटाने और इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाए जाने के बाद यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक जा पहुंचा है। सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन से जुड़े करीब 100 वकीलों ने दस्तखत कर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी कि तुरंत इस मामले पर सुनवाई हो और इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति पर रोक लगाई जाय।

पूर्व सॉलिसिटर जनरल इंदिरा जय सिंह ने इस मामले की पैरवी सुप्रीम कोर्ट में की, लेकिन चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अदालत ने इस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। मामले में पैरवी करते हुए इंदिरा जय सिंह ने कहा कि उनका मकसद इंदु मल्होत्रा की नियुक्ति को रोकना या टालना नहीं है बल्कि जस्टिस जोसेफ के मामले में केंद्र सरकार के कदम से न्यायपालिका को बांटने की कोशिश से रोकना है।

इससे पहले कानून मंत्रालय द्वारा सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस को लिखी चिट्ठी में कहा गया है कि जस्टिस जोसेफ को प्रोन्नति देने का यह सही समय नहीं है।

सूत्रों के मुताबिक, ऑल इंडिया हाई कोर्ट जस्टिस की लिस्ट में जस्टिस जोसेफ का वरिष्ठता क्रम 42वां है। इसके अलावा हाई कोर्ट के अन्य 11 चीफ जस्टिस भी उनसे सीनियरिटी लिस्ट में आगे हैं।

बता दें कि इस साल की शुरुआत में 10 जनवरी को पांच जजों की कॉलेजियम ने उत्तराखंड हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस के एम जोसेफ और सुप्रीम कोर्ट की सीनियर एडवोकेट इंदु मल्होत्रा को सुप्रीम कोर्ट में जज बनाने के लिए सिफारिश की थी। कॉलेजियम की सिफारिश पर जब कानून मंत्रालय ने कोई पहल नहीं की, तब फिर से कॉलेजियम ने फरवरी के पहले हफ्ते में कानून मंत्रालय को लिखा। इसके बाद कानून मंत्रालय ने प्रक्रिया शुरू की और सिर्फ इंदु मल्होत्रा की फाइल की आई बी जांच पूरी करवाई। केंद्र ने कॉलेजियम को जस्टिस जोसेफ के नाम पर दोबारा विचार करने का अनुरोध करते हुए फाइल फिर से सुप्रीम कोर्ट भेज दी।

कांग्रेस नेता और पूर्व गृह मंत्री पी चिदंबरम ने जस्टिस जोसेफ को प्रोन्नति नहीं देने पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है और पूछा है कि क्या राज्य, धर्म या उत्तराखंड केस में फैसले की वजह से जस्टिस जोसेफ को सुप्रीम कोर्ट नहीं लाया जा रहा है? इधर, केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कांग्रेस पर हमला बोला है और कहा है कि कांग्रेस को न्यायपालिका की संप्रभुता पर सवाल पूछने का कोई नैतिक अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने हमेशा से न्यायपालिका के साथ बुरा बर्ताव किया है। इस वजह से न्यायपालिका को समझौते करने पड़े हैं। उन्होंने कहा कि इसके कई उदाहरण भरे पड़े हैं।

बता दें कि कि पूर्व सालिसिटर जनरल इंदिरा जय सिंह ने सोशल मीडिया पर लिखा था कि देश के मुख्य न्यायाधीश तब तक इंदु मल्होत्रा को शपथ न दिलाएं , जब तक कि जस्टिस जोसेफ की नियुक्ति न हो जाए।

लड़कियों की तरह यौन शोषण के शिकार लड़कों को भी मुआवजा मिले: मेनका गांधी

भारत में महिला एवं बाल विकास मंत्री मेनका गांधी ने लड़कियों के लिए बने कानून की तर्ज पर कुकर्म या यौन शोषण के शिकार लड़कों को मुआवजा देने के लिए मौजूदा योजना में आज संशोधन का प्रस्ताव रखा। उन्होंने बाल यौन शोषण के पीड़ित लड़कों पर एक अध्ययन की भी घोषणा की। पुरुषों के लिए यह अपनी तरह का खास अध्ययन है।

मेनका ने लड़कों के यौन शोषण पर फिल्म निर्माता इंसिया दरीवाला की चेंज डॉट ओ आर जी पर एक याचिका के जवाब में कहा, ''बाल यौन शोषण का सबसे अधिक नजरअंदाज किए जाने वाला वर्ग पीड़ित लड़कों का है। बाल यौन शोषण में लैंगिक आधार पर कोई भेद नहीं है। बचपन में यौन शोषण का शिकार होने वाले लड़के जीवन भर गुमसुम रहते हैं, क्योंकि इसके पीछे शर्म और कई भ्रांतियां हैं।''

यह गंभीर समस्या है और इससे निपटने की जरूरत है। मंत्री ने कहा कि याचिका के बाद उन्होंने राष्ट्रीय बाल संरक्षण अधिकार आयोग (एन सी पी सी आर) को पीड़ित लड़कों के मुद्दे पर विचार करने के निर्देश दिए हैं।

उन्होंने कहा कि कॉन्फ्रेंस से उठी सिफारिशों के अनुसार सर्वसम्मति से यह फैसला किया गया है कि बाल यौन शोषण के पीड़ितों के लिए मौजूदा योजना में संशोधन होना चाहिए, ताकि कुकर्म या यौन शोषण का सामना करने वाले लड़कों को भी मुआवजा मिल सके। इस कॉन्फ्रेंस के दौरान एन सी पी सी आर ने देशभर में यौन शोषण के शिकार 160 लड़कों के साथ किए गए दरीवाला के प्रारंभिक शोध का अध्ययन किया।

मेनका गांधी ने कहा, ''इस अध्ययन के आधार पर एन सी पी सी आर ने जस्टिस एंड केयर के एड्रियन फिलिप्स के सहयोग के साथ इंसिया को आमंत्रित करने का फैसला किया है कि वे यौन शोषण के शिकार लड़कों पर व्यापक अध्ययन करें और इसकी शुरुआत आॅब्जर्वेशन होम्स और स्पेशल नीड्स होम्स से करें।''

मंत्रालय ने बाल यौन शोषण पर आखिरी बार 2007 में अध्ययन किया था, जिसमें पाया गया था कि 53.2 फीसदी बच्चों ने एक या उससे अधिक तरह के यौन शोषण का सामना किया है। इसमें से 52.8 प्रतिशत लड़के थे।

कांग्रेस ने शेयर किया आसाराम के साथ नरेंद्र मोदी का वीडियो, लिखा- एक आदमी की पहचान उसकी संगति से होती है

नाबालिग से बलात्कार के मामले में आसाराम को दोषी करार दिये जाने के बाद कांग्रेस ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है। कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी का पुराना वीडियो ट्विटर पर शेयर किया है और लिखा है, ''एक आदमी की पहचान उसकी संगति से होती है, ऐसा ईसप कहते हैं।''

बता दें कि ईसप ग्रीक कथाकार थे। कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से शेयर किये गये इस वीडियो में नरेंद्र मोदी कह रहे हैं, ''मेरा सौभाग्य रहा है कि जीवन में जब कोई नहीं जानता था, उस समय से बापू के आशीर्वाद मुझे मिलते रहे हैं।''

वीडियो में आसाराम और नरेंद्र मोदी एक मंच पर खड़े हैं। इस वीडियो के मुताबिक, आसाराम कह रहा है, ''यह कैसा अनोखा संगम है, धर्मसत्ता और राजसत्ता जब मिलती है तो प्रजा का बेड़ा पार हो जाता है। मैं हमेशा से कहता था, लेकिन आज मुझे मेरा शिव मिल गया।''

हालांकि ये वीडियो कब का है, ये अब तक पता नहीं चल पाया है। बता दें कि जोधपुर की अदालत ने नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आसाराम को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है।

आसाराम को नाबालिग लड़की से बलात्कार के जुल्म में उम्र कैद, सजा सुनकर आसाराम रोने लगा

स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को उसके काले कारनामों की सजा बुधवार को मिल ही गई। उम्र कैद की सजा सुनकर उसने अपने सिर से टोपी नोंच ली, सिर पर हाथ रखा और जोर-जोर से रोने लगा। ये सजा उसे जोधपुर कोर्ट ने अपने आश्रम में पांच साल पहले एक मासूम नाबालिग लड़की के साथ दुष्कर्म करने के एवज में दी गई है।

उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर की रहने वाली लड़की आसाराम के मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में बने आश्रम में रहकर पढ़ती थी। अपने बयान में पीड़िता ने आरोप लगाया था कि आसाराम ने 15 अगस्त 2013 की रात में अपने आश्रम में बुलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया था।

विशेष जज मधूसूदन शर्मा का फैसला यौन हिंसा, नाबालिग से दुष्कर्म के ऊपर लम्बी बहस के बाद आया है। पूरे भारत पर असर डालने वाला ये फैसला बुधवार को जोधपुर की सेन्ट्रल जेल में पढ़ा गया। जहां 77 साल का आसाराम पिछले चार सालों से अपने किए कुकर्म की सजा भोग रहा था।

एससी/एसटी मामलों की सुनवाई अदालत ने दो अन्य दोषियों शिल्पी और शरद को 20 साल कैद की सजा सुनाई है। जबकि, कोर्ट ने दो अन्य आरोपियों प्रकाश और शिवा को बरी कर दिया।

जब आसाराम को कोर्ट से बाहर लाया गया तो उसने सिपाही से कहा कि, ''जेल में रहेंगे। खाएंगे, पीएंगे और मौज करेंगे।''

आसाराम को जोधपुर सेन्ट्रल जेल की बैरक नंबर 2 में शिफ्ट कर दिया गया है। लेकिन जल्दी ही उसने सीने में दर्द की शिकायत की।

आसाराम के वकीलों ने कहा कि वे हाईकोर्ट में अपील करेंगे। उनका आरोप था कि कोर्ट ने मीडिया रिपोर्ट के दबाव में ये फैसला दिया है। राजस्थान पुलिस की 1300 पेज की चार्जशीट में आसाराम पर यौन उत्पीड़न, दुष्कर्म और नाबालिग से छेड़खानी के आरोप लगाए गए थे।

आसाराम मामले में बहस सात अप्रैल को पूरी हुई और अदालत ने 25 अप्रैल को सजा सुनाने तक फैसला सुरक्षित रख लिया। आसाराम को उसके इंदौर आश्रम से गिरफ्तार किया गया था और एक सितंबर 2013 को जोधपुर लाया गया था। वह 2 सितंबर 2013 तक न्यायिक हिरासत में था।

आसाराम के खिलाफ गुजरात के सूरत जिले में भी एक दुष्कर्म का मामला चल रहा था। इस मामले में पहले सुप्रीम कोर्ट ने बचाव पक्ष को पांच हफ्ते का वक्त ट्रायल पूरा करने के लिए दिया। इस बीच आसाराम ने जमानत के लिए कुल 12 अर्जियां दाखिल की थीं। इनमें से छह अर्जियों को ट्रायल कोर्ट, तीन को राजस्थान हाई कोर्ट और तीन को सुप्रीम कोर्ट ने खारिज कर दिया था।