भारत

नकदी संकट को लेकर बैंक यूनियन ने आंदोलन की धमकी दी

भारत में नकदी संकट को लेकर अब बैंक यूनियन ने आंदोलन की धमकी दी है। यूनियन का कहना है कि गलती आर बी आई और सरकार की है, लेकिन कस्टमर की गालियां बैंक कर्मचारियों को सुननी पड़ रही हैं।

अखिल भारतीय बैंक कर्मचारी संघ के महासचिव सी एच वेंकटाचलम ने गुरुवार (19 अप्रैल) को चेतावनी देते हुए कहा कि समस्या के निदान के लिए तत्काल कदम नहीं उठाने पर बैंककर्मी आंदोलन करने को मजबूर होंगे।

उन्होंने कहा, ''सिर्फ बयान देने से कुछ नहीं होगा। नोटों की आपूर्ति के लिए तत्काल ठोस कदम उठाने होंगे।''

पिछले कुछ सप्ताहों में खासकर उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक में नकदी की भारी किल्लत हो गई है। इसके कारण ए टी एम से भी पैसे नहीं निकल रहे हैं, लिहाजा लोगों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

वेंकटाचलम ने बताया कि नकदी की भारी कमी के कारण आमलोगों का गुस्सा बैंक कर्मचारियों को झेलना पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि कस्टमर बैंककर्मियों पर चिल्ला रहे हैं और उनके साथ गाली-गलौच कर रहे हैं।

भारत के विभिन्न हिस्सों में लोगों को नकदी की समस्या से दो-चार होना पड़ रहा है, लेकिन आर बी आई ने पर्याप्त मात्रा में नकदी होने का दावा किया है। वहीं, सरकार ने निकासी में अप्रत्याशित वृद्धि को नकदी संकट के लिए जिम्मेदार ठहराया है।

वेंकटाचलम ने करेंसी की कमी के लिए केंद्र और आर बी आई दोनों को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2016 में नोटबंदी की घोषणा के बाद 2000 रुपये के नोट छापने के फैसले के बाद से ही यह समस्या शुरू हो गई थी।

वेंकटाचलम ने कहा, ''काला धन और नकदी की जमाखोरी रोकने के लिए 1000 और 500 के नोट वापस लिए गए थे। ऐसे में 2000 नोट के अमल में आने से स्वाभाविक तौर पर दोनों काम आसान हो गए हैं।''

उन्होंने आर बी आई को कमजोर नकदी प्रबंधन के लिए भी जिम्मेदार ठहराया है। बैंक यूनियन के महासचिव सी एच वेंकटाचलम ने कहा, ''आर बी आई गवर्नर ने कहा था कि पर्याप्त मात्रा में नोट छापे गए हैं, लेकिन वे गए कहां? क्या इनकी जांच नहीं होनी चाहिए? क्या यह सुनिश्चित करने की जरूरत नहीं है कि बैंकों के पास पर्याप्त मात्रा में कैश हो, जिससे ग्राहकों की मांग को पूरा किया जा सके?''

उन्होंने आरोप लगाया कि नोटबंदी के 16 महीने बाद भी कई ए टी एम को अब तक नए नोटों के अनुकूल नहीं बनाया जा सका है।

जज लोया केस: कांग्रेस का आरोप - फैसले की कॉपी रविशंकर प्रसाद के पास पहले ही पहुंच गई

जज लोया के मौत के केस में सुप्रीम कोर्ट ने एस आई टी जांच कराने की इजाजत देने से इनकार कर दिया है। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद प्रतिक्रियाओं की भरमार आ गई है।

कांग्रेस पार्टी ने अदालत के फैसले पर नाखुशी जताई है तो भाजपा ने कांग्रेस को घेरना शुरू कर दिया है। बीजेपी नेता और केंद्रीय कानून मंत्री ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा कि कांग्रेस को राजनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए अदालती गलियारों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए।

अब कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाल ने भारत के कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद पर बड़ा गंभीर आरोप लगाया है।

रणदीप सुरजेवाला ने ट्वीट कर सवाल उठाया है कि सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट की कॉपी कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद के पास कैसे आई? जबकि इसकी कॉपी अभी तक ना तो प्रेस को मिली है और ना ही वकीलों को, और सुप्रीम कोर्ट का वेबसाइट हैक भी है।

इससे पहले जस्टिस बी एच लोया की मौत की जांच एस आई टी से कराने से संबंधित एक याचिका की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता के वकीलों को फटकार लगाई।

अदालत ने जस्टिस लोया की मौत की जांच एस आई टी से कराए जाने की मांग खारिज कर दी और कहा कि देखने में आ रहा है कि व्यापार और राजनीतिक हित साधने के लिए सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिकाएं दाखिल की जा रही हैं और ऐसी याचिकाओं से अदालत का काफी समय बर्बाद हो रहा है। कोर्ट ने इस केस के याचिकाकर्ता दुष्यंत दवे, इंदिरा जयसिंह और प्रशांत भूषण को फटकार लगाते हुए कहा कि आप लोगों ने इस केस के बहाने न्यायपालिका पर सीधा हमला करना शुरू कर दिया है।

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के बाद वरिष्ठ वकील और याचिकाकर्ता प्रशांत भूषण ने इसे सुप्रीम कोर्ट के लिए काला दिन करार दिया। उन्होंने कहा कि जस्टिस लोया के मौत की स्वतंत्र जांच कराई जा सकती थी। इधर जैसे ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का बहुप्रतीक्षित फैसला आया, उसके कुछ ही समय बाद सुप्रीम कोर्ट की वेबसाइट के हैक होने की खबर भी मीडिया में चलने लगीं। इस हैकिंग में ब्राजील के हैकर्स की संलिप्ता का अंदेशा जताया गया है।

लेकिन सवाल उठता है कि जज लोया की मौत से संबंधित फैसला आने के बाद ब्राजील के हैकर्स भारत के सुप्रीम कोर्ट का वेबसाइट हैक क्यों करेंगे, इससे उनके किस प्रकार के हित की पूर्ति होगी! जो लोग ब्राजील के हैकर्स की संलिप्ता का अंदेशा जता रहे हैं, उनको हवा में बात करने के बजाय सबूत पेश करनी चाहिए।

बता दें कि हाल में भारत के गृह मंत्रालय की वेबसाइट भी हैक हुई थी।

जज लोया केस: राहुल गांधी ने कहा, ज्‍यादातर भारतीय अमित शाह का सच समझते हैं

भारत में सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार (19 अप्रैल) को केंद्रीय जांच ब्यूरो (सी बी आई) के विशेष न्यायाधीश बी एच लोया की कथित रहस्मय मौत के मामले में विशेष जांच दल (एस आई टी) से जांच कराने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया। न्यायाधीश लोया सोहराबुद्दीन शेख फर्जी मुठभेड़ मामले की सुनवाई कर रहे थे।

याचिका में कोई दम नहीं होने की बात कहते हुए प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर व न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की पीठ ने कहा कि न्यायाधीश लोया की मौत स्वाभाविक थी।

न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने फैसला सुनाते हुए जनहित याचिका दाखिल करने के तरीके और मामले की सुनवाई के दौरान बंबई उच्च न्यायालय के प्रशासकों की समिति और सर्वोच्च न्यायालय के न्यायाधीशों पर संदेह करने को लेकर नाराजगी जताई।

विपक्ष ने सीधे तौर पर फैसले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी, मगर कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी ने इशारों में भारतीय जनता पार्टी अध्‍यक्ष अमित शाह पर निशाना साधा। गांधी ने एक ट्वीट में कहा, ''भारतीय बहुत बुद्धिमान हैं। ज्‍यादातर भारतीय, जिनमें से कई भाजपा में भी हैं, अमित शाह का सच समझते हैं। उनके जैसे लोगों को पकड़ने का सच का अपना तरीका होता है।''

मक्का मस्जिद ब्लास्ट: एनआईए के वकील का एबीवीपी से रहा है जुड़ाव

मक्का मस्जिद धमाके के मामले में नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी (एन आई ए) के वकील एन हरिनाथ का जुड़ाव अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ए बी वी पी) से था। वह हैदराबाद में छात्र के रूप में इस संगठन से जुड़े हुए थे।

नेशनल इन्वेस्टिगेशन एजेंसी के वकील एन हरिनाथ ने मंगलवार (17 अप्रैल) को स्वीकार किया कि उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आर एस एस) से संबद्ध इस छात्र संगठन की तब कुछ कार्यक्रमों के आयोजन कराने में मदद की थी।

आपको बता दें कि 2007 में हैदराबाद की मक्का मस्जिद धमाके के मामले में सोमवार (16 अप्रैल) को नामपल्ली स्थित एन आई ए के स्पेशल कोर्ट ने स्वामी असीमानंद समेत सभी पांच आरोपियों को बरी कर दिया था।

मक्का मस्जिद धमाकों में नौ लोगों की जान चली गई थी, जबकि 50 से अधिक लोग बुरी तरह जख्मी हुए थे।

मक्का मस्जिद धमाके मामले में साल 2015 में ट्रायल शुरू हुआ था, जिसके बाद हरिनाथ को एन आई ए की ओर से वकील बनाया गया था। उन्होंने बताया, ''यह उन दिनों की बात है, जब मैं वकालत की पढ़ाई कर रहा था। मैं सेकंड ईयर में था, तभी मैं ए बी वी पी में शामिल हो गया था। लेकिन मेरा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) से कोई लेना-देना नहीं रहा है। मैं उसी दौर से ए बी वी बी के कार्यक्रमों की मदद के लिए चंदा दे रहा हूं और उनकी मदद कर रहा हूं।''

हरिनाथ को इस मामले में एन आई ए का वकील बनाने के सवाल पर एजेंसी ने जवाब देने से इनकार कर दिया। वकील ने यह भी बताया कि मामले को हलका करने को लेकर अभी तक उन्हें किसी प्रकार के दवाब का सामना नहीं करना पड़ा।

बकौल हरिनाथ, ''पहले दिन से हम मामले में दोष सिद्ध करने को लेकर काम कर रहे हैं। 2015 में जब मैं आया था, तब ट्रायल शुरू होने वाला था। मेरे आवेदन पर हुई स्क्रूटनी की प्रक्रिया के बाद मैं एन आई ए से जुड़ गया था। मैंने तब अपने पिछले केसों की सूची मुहैया कराई थी। मैं साल 1994 से क्रिमिनल कोर्ट में प्रैक्टिस कर रहा हूं और 2011 से प्रवर्तन निदेशालय में खास वकील हूं।''

स्‍वामी चिन्‍मयानंद को बचा रही है योगी सरकार: पीड़‍िता

भारत के पूर्व केंद्रीय गृह राज्यमंत्री स्वामी चिन्मयानंद पर दर्ज बलात्कार के मुकदमे को वापस लेने की खबर के बीच पीड़िता ने चुप्पी तोड़ी है। स्वामी चिन्मयानंद की पूर्व सहयोगी और साध्वी रही पीड़िता ने कहा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से करीबी रिश्ते के चलते चिन्मयानंद पर दर्ज केस वापस लिया जा रहा।

पीड़िता ने आरोप लगाया है कि उसके नाम  से चिन्मयानंद ने फर्जी हलफनामा भी कोर्ट में पेश किया है। पीड़िता ने ए डी जी को शिकायत भेजकर मुकदमा वापसी का विरोध करते हुए कार्रवाई की मांग की है।

ए डी जी को भेजे पत्र में पीड़िता ने कहा कि उसने 30 नवंबर 2011 को शाहजहांपुर कोतवाली में स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ दुष्कर्म आदि धाराओं में केस दर्ज कराया था। पुलिस ने केस की विवेचना के बाद न्यायालय में आरोपपत्र दाखिल कर दिया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए चिन्मयानंद उच्च न्यायालय चले गए। 2012 में उच्च न्यायालय ने स्टे ऑर्डर देते हुए जिला न्यायालय की कार्रवाई पर रोक लगा दी। अब स्टे ऑर्डर खत्म हो गया है, मगर सरकार ने मुकदमा वापस लेने की तैयारी शुरू कर दी।

पीड़िता ने शिकायत में कहा है कि उसने न्यायालय में इस बाबत आपत्ति दर्ज कर वारंट जारी करने की मांग की है। पीड़िता के मुताबिक, संज्ञान में आया है कि चिन्मयानंद ने प्रार्थिनी के नाम से फर्जी हलफनामा बनवाया है। जिसमें सहमति दर्शायी गई है, इस नाते सहमति पत्र को फर्जी माना जाए। फर्जी हलफनामा बनवाने वाले दोषियों के खिलाफ केस दर्ज कर कार्रवाई की जाए।

उधर पीड़िता ने एक न्यूज चैनल से बातचीत में कहा कि वह आगामी सुनवाई के दौरान कोर्ट में केस वापसी का विरोध करेगी। पीड़िता के मुताबिक, 25 फरवरी को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ स्वामी चिन्मयानंद के आश्रम आए थे। उनके साथ कार्यक्रम में भाग लिए थे। इन सब करीबी रिश्तों की वजह से ही शासन स्वामी चिन्मयानंद पर दर्ज बलात्कार का केस वापस लेने की कोशिश में हैं। जिसमें पीड़िता की कोई सहमति नहीं है।

आजादी के 70 साल बाद भी ऐसी घटना होना शर्मनाक: रामनाथ कोविंद

भारत के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद जम्मू एवं कश्मीर के दो दिवसीय दौरे पर बुधवार को कड़ी सुरक्षा के बीच यहां पहुंचे। इस दौरान उन्होंने जम्मू के कठुआ में 8 साल की बच्ची के साथ हुए गैंगरेप पर भी अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की।

लोगों को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति कोविंद ने कहा कि देश की आजादी के 70 साल बाद भी ऐसी घटनाओं का होना बेहद शर्मनाक है। उन्होंने कहा कि सोचना होगा कि आखिर हम किस प्रकार के समाज का निर्माण कर रहे है।

कोविंद ने कहा कि यह सुनिश्चित करना हम सबकी जिम्मेदारी है कि आगे से किसी भी महिला और बेटी के साथ ऐसी घटनाएं न हों। उन्होंने कहा कि देश की बेटियां अपनी जीत का परचम लहराकर दुनिया में हमारे देश का नाम रोशन कर रही हैं।

कॉमनवेल्थ गेम्स का जिक्र करते हुए प्रेसिडेंट ने कहा कि CWG 2018 में ही देश की कई बेटियों ने मेडल जीता है, जिनमें मेरी कॉम, मोनिका बत्रा, संगीता चानू, मीराबाई शामिल हैं। दूसरी ओर, देश की कुछ बेटियों को ऐसी घटनाओं का शिकार होना पड़ रहा है।

राष्ट्रपति की राज्यपाल एन एन वोहरा और मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने अगवानी की। इसके बाद वे राजभवन के लिए रवाना हो गए, जहां से वे कटरा में श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में हिस्सा लेने जाएंगे। जम्मू के अमर महल लॉन में कोविंद के सम्मान में एक रिसेप्शन का आयोजन किया जाएगा।

इसके बाद राज्यपाल वोहरा उनके सम्मान में राज भवन में रात्रिभोज का आयोजन करेंगे। सूत्रों ने बताया कि गुरुवार को दिल्ली लौटने से पहले कोविंद ऐतिहासिक स्थल मुबारक मंडी का दौरा करेंगे। इस दौरान राष्ट्रपति की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उनके मार्ग में अतिरिक्त पुलिस बल और अर्धसैनिक बल तैनात रहेंगे।

तमिलनाडु: सवाल पूछा तो महिला पत्रकार के गाल सहलाने लगे राज्‍यपाल

मंगलवार शाम को तमिलनाडु के राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया था। यह प्रेस कॉन्फ्रेंस उस विवाद को लेकर आयोजित की गई थी, जिसमें एक महिला असिस्टेंट प्रोफेसर का एक ऑडियो टेप सामने आया था, जिसमें महिला असिस्टेंट प्रोफेसर छात्राओं से अच्छे अंक पाने के लिए प्रोफेसरों के लिए सेक्सुल फेवर देने की बात कह रही थी।

अब इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कुछ ऐसा हुआ, जिससे नया विवाद खड़ा हो गया है। दरअसल इस प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान एक महिला पत्रकार ने जब राज्यपाल पुरोहित से सवाल किया तो राज्यपाल उसका जवाब देने के बजाए महिला पत्रकार का गाल सहलाने लगे। इस घटना को लेकर विवाद हो गया है।

महिला पत्रकार लक्ष्मी सुब्रमण्यन ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के बाद ट्वीट कर कहा कि मैने राज्यपाल बनवारी लाल पुरोहित से सवाल किया था, लेकिन उन्होंने बिना मेरी सहमति के मेरे गाल सहलाना शुरु कर दिया। अपने दूसरे ट्वीट में महिला पत्रकार ने राज्यपाल द्वारा उसके गाल सहलाने को गलत आचरण बताया और कहा कि किसी भी महिला को बिना उसकी सहमति के छूना गलत है। महिला पत्रकार ने कहा कि वह काफी कोशिश के बाद भी इससे छुटकारा नहीं पा सकी हैं।

महिला पत्रकार के इस ट्वीट के बाद कई लोग भी महिला पत्रकार के समर्थन में आ गए हैं। डी एम के की राज्यसभा सांसद कनीमोझी ने भी इस मामले पर अपनी राय जाहिर की है और इस घटना को लेकर राज्यपाल की आलोचना की है।

कनीमोझी ने कहा कि भले ही उनका कोई गलत इरादा नहीं था, लेकिन जो व्यक्ति किसी सार्वजनिक पद पर है, उसे डिकोरम का ध्यान रखना चाहिए। कनीमोझी ने आगे लिखा कि एक महिला पत्रकार की निजता का उल्लंघन करना प्रतिष्ठा नहीं दर्शाता है। इसके अलावा सोशल मीडिया पर भी कई लोग महिला पत्रकार के समर्थन में आ गए हैं।

विश्व हिन्दू परिषद चुनाव: प्रवीण तोगड़िया युग का अंत

विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने जस्टिस वी सदाशिव कोकजे को अपना नया अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिया है। विहिप के इतिहास में पहली बार आज (14 अप्रैल को) हुए चुनाव में जस्टिस कोकजे को मौजूदा अध्यक्ष राघव रेड्डी की जगह चुना गया है। नई दिल्ली से सटे गुरुग्राम के पी डब्ल्यू डी गेस्ट हाउस में विहिप के 273 में से 192 प्रतिनिधियों ने वोट डाले।

विश्व हिन्दू परिषद की स्थापना 1964 में हुई थी। माना जा रहा है कि इस चुनाव में विहिप के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया का कद घटाने के लिए यह चुनाव कराए गए हैं। तोगड़िया के रिश्ते पीएम नरेंद्र मोदी, बीजेपी और संघ से अच्छे नहीं चल रहे हैं। शायद इसीलिए चुनाव से ऐन पहले जस्टिस कोकजे को मैदान में उतारा गया। मौजूदा अध्यक्ष राघव रेड्डी तोगड़िया के करीबी समझे जाते हैं। इसलिए तीसरी बार उनकी ताजपोशी नहीं हो सकी।

जस्टिस कोकजे का पूरा नाम विष्णु सदाशिव कोकजे है। वो वाजपेयी सरकार के दौरान 8 मई 2003 से लेकर 19 जुलाई 2008 तक हिमाचल प्रदेश के गवर्नर रह चुके हैं। जस्टिस कोकजे उससे पहले जुलाई 1990 से अप्रैल 1994 तक मध्‍य प्रदेश हाईकोर्ट के जज और अप्रैल 1994 से सि‍तंबर 2001 तक राजस्‍थान हाई कोर्ट में भी जज रह चुके हैं। वो मूलत: मध्य प्रदेश के इंदौर के रहने वाले हैं। जस्टिस कोकजे भारत विकास परिषद के बी अध्यक्ष रह चुके हैं।

79 साल के जस्‍ट‍िस वी सदाशिव कोकजे का जन्म 6 सितंबर, 1939 को मध्य प्रदेश के धार जि‍ले में दाही तहसील के कुकसी गांव में हुआ था। उन्होंने इंदौर के होल्कर कॉलेज से बी ए किया। इसके बाद क्रिश्चन कॉलेज से समाज शास्त्र में एम ए की डिग्री ली। इंदौर से ही उन्होंने लॉ किया। इसके बाद 1964 से वकालत करने लगे।

ऐसा कहा जा रहा है कि कई मौकों पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना करने वाले विहिप के अंतर्राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष प्रवीण तोगड़िया से बीजेपी और आर एस एस का शीर्ष नेतृत्व नाराज चल रहा है। पिछले साल 29 दिसंबर को भुवनेश्वर में विहिप की बैठक में अंतर्राष्ट्रीय अध्यक्ष पद पर चुनाव के लिए सहमति की कोशिश की गई थी, लेकिन उसमें सफलता नहीं मिल सकी थी। सूत्रों के मुताबिक, बीजेपी और आर एस एस नहीं चाहती थी कि प्रवीण तोगड़िया वी एच पी में हावी रहें क्योंकि अगर ऐसा हुआ तो साल 2019 में मोदी की राह मुश्किल हो सकती थी।

कठुआ गैंगरेप: बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष के कहने पर हिंदू एकता मंच की रैली में गए थे बीजेपी के मंत्री

जम्मू-कश्मीर के कठुआ में नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म और हत्या के बाद मामला लगातार सियासी रंग लेता जा रहा है। पिछले दिनों गैंगरेप के आरोपियों के पक्ष में हिंदू एकता मंच की रैली में भाजपा मंत्रियों के पहुचंने पर पार्टी के राष्ट्रीय नेतृत्व को खासी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा था।

रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में भाजपा आलाकमान ने पार्टी महासचिव राम माधव को जम्मू-कश्मीर भेजा। यहां राम माधव ने राज्य में पार्टी नेताओं से एक उच्च स्तरीय मीटिंग की। सूत्रों के हवाले से टाइम्स नाउ को मिली जानकारी के मुताबिक, इस दौरान भाजपा नेता ने राम माधव से कहा कि वह खुद की मर्जी से हिंदू एकता मंच की रैली में नहीं पहुंचे थे बल्कि भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सत शर्मा के कहने पर वह वहां गए।

टाइम्स नाउ को मिली जानकारी के मुताबिक, लाल सिंह और चंदर प्रकाश गंगा ने कहा है कि वह अपनी मर्जी से उस रैली में नहीं पहुंचे थे बल्कि प्रदेश अध्यक्ष के कहने पर वहां गए। दूसरी तरफ चौतरफा घिरे जम्मू-कश्मीर भाजपा अध्यक्ष ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। न्यूज एजेंसी ए एन आई के मुताबिक, सत शर्मा ने कहा है कि कठुआ में आठ साल की बच्ची से रेप और हत्या के जो भी जिम्मेदार हैं, उन्हें पकड़ना चाहिए। शर्मा ने लाल सिंह के इस्तीफे के बाद यह प्रतिक्रिया दी है।

वहीं भाजपा नेताओं से मीटिंग के बाद राम माधव ने कहा है कि राज्य में गठबंधन को लेकर कोई परेशानी नहीं है। ए एन आई से राम माधव ने कहा है कि भाजपा राज्य की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती से बातचीत कर रही है। दोनों पार्टियों के बीच कठिनाई वाली कोई बात नहीं है। पार्टी मुख्यमंत्री के संपर्क में है। राम माधव ने आगे कहा कि पार्टी को अपने विधायकों पर स्टैंड साफ करना चाहिए। इस पर पीएम ने सलाह दी कि उन विधायकों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए।

उन्‍नाव गैंगरेप: हाई कोर्ट ने कहा - सीएम योगी एक्‍शन लेते तो पीड़िता का पिता नहीं मरता

उत्तर प्रदेश के उन्नाव गैंगरेप मामले में इलाहाबाद हाई कोर्ट ने कहा है कि अगर साल भर पहले सी एम योगी आदित्यनाथ के कार्यालय की तरफ से सख्त कार्रवाई होती तो पीड़िता का पिता नहीं मरता। इस टिप्पणी के साथ ही हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस दिलीप बी भोसले ने शुक्रवार को बीजेपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर को गिरफ्तार करने का आदेश सी बी आई को दिया।

उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर आरोपी विधायक को संरक्षण देने के आरोप लग रहे थे। शुक्रवार को ही सी बी आई ने आरोपी विधायक को हिरासत में लेकर पूछताछ की, फिर कोर्ट के आदेश पर गिरफ्तार कर लिया। विधायक के खिलाफ तीन केस दर्ज किए गए हैं।

इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा है कि पीड़ित पक्ष द्वारा पिछले साल 17 अगस्त, 2017 को ही सी एम योगी आदित्यनाथ से आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर की शिकायत की गई थी, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

हालांकि, सी एम योगी के स्पेशल सेक्रेटरी की तरफ से उन्नाव के एस पी को इस बाबत चिट्ठी भेजी गई थी। इधर, सी एम योगी आदित्यनाथ का कहना है कि इस मामले में उन्हें पहली जानकारी इस साल 9 अप्रैल को मिली। इसके बाद तुरंत मामले की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (एस आई टी) का गठन किया गया। फिर बाद में मामले को सी बी आई को सौंप दिया गया।

इधर, केंद्रीय गृह मंत्री और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को एक इंटरव्यू में कहा कि नाबालिग के साथ रेप के मामलों में तुरंत प्राथमिकी दर्ज की जानी चाहिए। राजनाथ सिंह ने कहा कि उन्नाव मामले में अब सी एम ने जांच कमेटी गठित कर दी है कि क्यों इसकी प्राथमिकी दर्ज नहीं हो सकी? उन्होंने इस घटना को शर्मनाक और दुखद करार दिया।

बता दें कि इस मामले में जिन लोगों के कंधों पर जांच करने और कार्रवाई करने की जिम्मेदारी थी, ऐसे लोग आरोपी विधायक कुलदीप सिंह सेंगर के इशारों पर नाच रहे थे। इस मामले में एक डॉक्टर भी जांच के घेरे में है, जिसने पीड़िता के पिता की मेडिकल जांच करने की जगह उसका मजाक बनाया था। पीड़िता के पिता को विधायक के भाई और गुंडों ने पीटा था, जिससे बाद में उनकी मौत हो गई थी।