उत्तर प्रदेश सरकार ने पूर्व केंद्रीय गृह राज्य मंत्री और मुमुक्षु आश्रम के प्रमुख स्वामी चिन्मयानंद पर दर्ज बलात्कार का मुकदमा वापस लेने का फैसला किया है। इस आशय की चिट्ठी नौ मार्च, 2018 को जिला मजिस्ट्रेट, शाहजहांपुर के कार्यालय से जारी हुई है। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी को संबोधित पत्र ए डी एम (प्रशासन) के दस्तखत से जारी हुआ है। उसी दिन सक्षम अधिकारी को इस पर अमल के लिए भी लिख दिया गया है। पत्र में लिखा गया है कि शासन ने शाहजहांपुर कोतवाली में स्वामी चिन्मयानंद पर दर्ज धारा-376, 506 आई पी सी का केस वापस लिए जाने का फैसला हुआ है। अतः शासनादेश के तहत कृत कार्रवाई से अवगत कराने का कष्ट करें, ताकि शासन को भी अवगत कराया जा सके।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 25 फरवरी को शाहजहांपुर गए थे। वहां उन्होंने स्वामी चिन्मयानंद के आश्रम में आयोजित मुमुक्ष युवा महोत्सव में भाग लिया था। तीन मार्च को स्वामी चिन्मयानंद के जन्मदिन पर भी कई महत्वपूर्ण लोग बधाई देने आश्रम गए थे। इनमें कई वरिष्ठ अफसर भी शामिल थे। इस दौरान स्वामी के समर्थकों ने उनकी आरती भी उतारी थी। कार्यक्रम का एक वीडियो भी वायरल हुआ था, जिसमें शाहजहांपुर के सी डी ओ और ए डी एम (प्रशासन) जितेंद्र शर्मा भी स्वामी की आरती उतारते देखे जा सकते हैं। इसके छह दिन बाद जितेंद्र शर्मा के ही दस्तखत से जारी पत्र में मुकदमा वापसी की प्रक्रिया शुरू करने के आदेश दिए गए हैं।
जौनपुर से सांसद बनने के बाद स्वामी चिन्मयानंद अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री थे। इस दौरान उनके संपर्क में आई बदायूं निवासी साध्वी चिदर्पिता नामक महिला ने 2011 में उन पर हरिद्वार के आश्रम में बंधक बनाकर दुष्कर्म का आरोप लगाया था।
चिदर्पिता की तहरीर पर स्वामी चिन्मयानंद के खिलाफ शाहजहांपुर कोतवाली में 30 नवंबर 2011 को दुष्कर्म करने और जान से मारने की धमकी देने का केस दर्ज किया था। गिरफ्तारी से बचने के लिए स्वामी ने हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। कोर्ट ने उनकी गिरफ्तारी पर स्टे दिया था। तब से केस लंबित चला आ रहा है। स्वामी चिन्मयानंद के करीबियों के मुताबिक, राजनीतिक साजिश और छवि खराब करने के मकसद से उनके खिलाफ केस दर्ज कराया गया था।
साध्वी चिदर्पिता गौतम के पति बी पी गौतम ने उत्तर प्रदेश सरकार के फैसले को अन्याय बताया। उन्होंने कहा कि बलात्कार पीड़िता को इंसाफ दिलाना किसी सरकार का पहला कर्तव्य होना चाहिए। यह एक महिला से जुड़ा केस है, इसमें सरकार को पीड़ित की मदद करनी चाहिए, न कि केस वापस लेना चाहिए। बी पी गौतम के मुताबिक, उन्होंने केस वापसी के खिलाफ राज्यपाल से लेकर हाई कोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश तक को पत्र लिखकर न्याय की गुहार लगाई है।
बता दें कि पिछले साल योगी आदित्यनाथ सरकार ने राजनीतिक कारणों से दर्ज मुकदमों की वापसी का फैसला लिया था। इसके तहत मुजफ्फरनगर आदि दंगों में दर्ज बीजेपी नेताओं पर से केस वापस लिए जाने की प्रक्रिया शुरू की गई है।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में सोमवार को एक स्कूल बस के एक खाई में गिरने से 26 विद्यार्थियों सहित कुल 29 लोगों की मौत हो गई। पुलिस अधीक्षक संतोष पटयाल ने मौतों की पुष्टि की है।
सभी मृत बच्चों की आयु 10 साल से कम है। इसके अलावा दुर्घटना में बस चालक और दो शिक्षकों की भी मौत हो गई। हादसे पर भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक व्यक्त किया है।
पुलिस ने बताया कि बस के मलवे में और बच्चों के फंसे होने के कारण मृतकों की संख्या बढ़ सकती है। बचाव कार्य जारी है। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, आधिकारिक बचाव दल के पहुचने से पहले स्थानीय ग्रामीणों ने बचाव कार्य शुरू कर दिया था।
वजीर राम सिंह पठानिया मेमोरियल पब्लिक स्कूल के लगभग 45 विद्यार्थी स्कूल से अपने घर लौट रहे थे। तभी उनकी बस नूरपुर-चंबा मार्ग पर गुरचल गांव के निकट अनियंत्रित होकर एक खाई में गिर गई।
स्थानीय प्रशासन और राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल के दल बचाव कार्य कर रहे हैं। दुर्घटनाग्रस्त बस में फंसे मृतकों के शवों और घायलों को निकालने के लिए दल को काफी परेशानी का सामना उठाना पड़ा। कुछ घायलों को इलाज के लिए पंजाब के पठानकोट भेज दिया गया है।
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने घटना पर दुख व्यक्त किया है। ठाकुर ने हादसे में मारे गए प्रत्येक व्यक्ति के परिवार को 5 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया है। इस दुर्घटना के जांच के आदेश दे दिए गए हैं।
भारत में सुप्रीम कोर्ट के सीनियर जज जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा है कि अगर जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद जस्टिस रंजन गोगोई को देश का मुख्य न्यायाधीश नहीं बनाया जाता है तब समझ लीजिएगा कि इस साल के शुरू में सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर जो शक जताए थे, वो सच साबित हो गए।
बता दें कि जस्टिस दीपक मिश्रा का कार्यकाल इस साल 2 अक्टूबर को समाप्त हो रहा है। वरिष्ठता के लिहाज से उनके बाद जस्टिस रंजन गोगोई को चीफ जस्टिस बनाया जाना चाहिए क्योंकि दूसरे नंबर पर आने वाले जस्टिस चेलमेश्वर उससे पहले ही 22 जून को रिटायर हो रहे हैं।
हार्वर्ड क्लब ऑफ इंडिया में 'रोल ऑफ ज्यूडिशरी इन ए डेमोक्रेसी' पर आयोजित समारोह में सीनियर जर्नलिस्ट करण थापर से बातचीत में जस्टिस गोगोई ने कहा, ''मुझे उम्मीद है कि ऐसा नहीं होगा, लेकिन अगर ऐसा होता है तो यह उसी बात को सच साबित करेगा जो हमलोगों ने तीन महीने पहले प्रेस कॉन्फ्रेन्स में कही थी।''
बता दें कि इसी साल 12 जनवरी को जस्टिस चेलमेश्वर समेत चार वरिष्ठ जजों (जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस एम बी लोकुर और जस्टिस कुरियन जोसेफ) ने साझा तौर पर एक पत्र देश के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा को लिखा था और सुप्रीम कोर्ट के क्रियाकलाप पर सवाल खड़े किए थे। इन चारों वरिष्ठ जजों ने चीफ जस्टिस द्वारा सुप्रीम कोर्ट के जजों को केस आवंटन करने में भेदभाव का मुद्दा उठाया था। जस्टिस चेलमेश्वर के घर पर इन चारों जजों ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेन्स किया था। यह देश के न्यायिक इतिहास की बड़ी घटना थी, जब चीफ जस्टिस के खिलाफ कॉलेजियम के चार वरिष्ठ सदस्यों ने मोर्चा खोल दिया हो।
जस्टिस दीपक मिश्रा के बाद वरिष्ठता क्रम में दूसरे नंबर पर जस्टिस चेलमेश्वर हैं जो इसी साल जून में रिटायर हो रहे हैं। उनके बाद जस्टिस रंजन गोगोई का क्रम आता है। जब करण थापर ने जस्टिस चेलमेश्वर से पूछा कि क्या आपको इस बात की आशंका है कि चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा के रिटायरमेंट के बाद जस्टिस रंजन गोगोई को पदोन्नति देकर चीफ जस्टिस नहीं बनाया जा सकता है क्योंकि उन्होंने चीफ जस्टिस के खिलाफ आपके साथ मोर्चा खोला था और खत लिखा था? इसके जवाब में जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, ''मैं कोई भविष्यवक्ता नहीं हूं।'' इसके बाद करण थापर ने फिर पूछा कि क्या आपको लगता है कि जस्टिस रंजन गोगोई को दरकिनार किया जा सकता है, जैसा कि पहले भी हो चुका है?
चीफ जस्टिस के मास्टर ऑफ द रोस्टर की भूमिका से जुड़े एक अन्य सवाल के जवाब में जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, ''निश्चित तौर पर चीफ जस्टिस के पास ही यह अधिकार है कि वो बेंच का गठन करें, लेकिन संवैधानिक प्रावधानों के तहत सभी अधिकारों के साथ कुछ जिम्मेदारियां भी जुड़ी हैं।'' जस्टिस चेलमेश्वर ने कहा, ''संवैधानिक अधिकार उसे लागू करने को कहता है इसलिए नहीं कि यह सिर्फ अधिकार है बल्कि इसलिए भी कि इससे जनहित के मुद्दे सुलझें। आप उन अधिकारों का इस्तेमाल सिर्फ इसलिए नहीं कर सकते क्योंकि वो आपके पास हैं बल्कि सुप्रीम कोर्ट ने हमेशा कहा है कि इनका इस्तेमाल हमेशा लोक कल्याण के लिए किया जाना चाहिए।''
जस्टिस चेलमेश्वर ने चीफ जस्टिस के खिलाफ प्रस्तावित महाभियोग पर कहा कि यह समस्या का समाधान नहीं हो सकता है। उन्होंने कहा कि महाभियोग की जगह व्यवस्था को ठीक किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि रिटायरमेंट के बाद वो कोई भी सरकारी पद नहीं लेंगे।
भारत के सरकारी वेबसाइटों की सुरक्षा प्रणाली में लगातार हैकर्स सेंधमारी करने में सफल हो रहे हैं। इस बार हैकर्स ने भारत के रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर ही हमला बोल दिया। शुक्रवार(छह अप्रैल) को शाम करीब चार बजे हैकर्स ने रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट हैक कर ली। जिसके बाद वेबसाइट खोलने पर होम पेज पर चाइनीज भाषा के अक्षर लिखे हुए दिख रहे थे।
बता दें कि भारत में सरकारी वेबसाइट हैक होने का यह पहला मामला नहीं है। इससे पहले नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल की वेबसाइट को पाकिस्तानी हैकर्स हैक कर चुके है।
बीते 23 मार्च को रूसी रक्षा मंत्रालय की वेबसाइट पर हैकर्स ने सात बार हमला किया था। जांच के दौरान पता चला कि पश्चिमी यूरोप, उत्तर अमेरिका और यूक्रेन के हैकर्स का इसमें हाथ है।
जानकारों के मुताबिक, अधिकांश सरकारी वेबसाइट्स में सिक्योर कोडिंग तकनीक नहीं होती। जिससे हैकर्स आसानी से सिस्टम में सेंधमारी करने में सफल हो जाते हैं। सरकार दो साल में एक ही बार सिक्योरिटी ऑडिट करवाती है, लेकिन इसे कई बार कराना चाहिए। वेबसाइट सिक्योरिटी फीचर्स पर विशेष ध्यान नहीं देने पर ही साइट्स हैक होती हैं।
उधर वेबसाइट हैक होने की घटना के बाद रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि कुछ ही समय के भीतर वेबसाइट दुरुस्त कर ली गई। भविष्य में दोबारा ऐसी घटना नहीं हो, इसके लिए वेबसाइट में सुरक्षात्मक उपाए किए जा रहे हैं।
भारत में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बुधवार को एक कमेटी बनाई है जो ऑनलाइन मीडिया और न्यूज पोर्टल्स को विनियमित करने के लिए कानून तय करेगी। इस कमेटी में दस सदस्य होंगे, जिसका नेतृत्व सूचना एवं प्रसारण सचिव द्वारा किया जाएगा। इस कमेटी में सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय सचिव के अलावा इलेक्ट्रॉनिक एवं आई टी मंत्रालय, गृह मंत्रालय के सचिव और MyGov. के सी ई ओ शामिल हैं।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा दिए गए आदेश के अनुसार, कमेटी को ऑनलाइन मीडिया, न्यूज पोर्टल और ऑनलाइन सामग्री प्लेटफॉर्म के लिए उपयुक्त नीति तैयार करने की सलाह देनी होगी।
इसमें डिजिटल प्रसारण को भी शामिल किया गया है, जिसमें मनोरंजन, इन्फोटेनमेंट, न्यूज और मीडिया एग्रीगेटर शामिल हैं।
इसके अलावा कमेटी को समान नियमों के लिए अंतरराष्ट्रीय परिदृश्य का विश्लेषण भी करना होगा।
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के आदेश के अनुसार, ऑनलाइन सूचना प्रसारण के क्षेत्र को वर्णित करना होगा, जिसे प्रिंट और टेलीविजन मीडिया के समान नियमों के तहत लाया जाना चाहिए।
इसके अलावा, केबल टेलीविजन नेटवर्क्स एक्ट 1995 के प्रोग्राम एंड एडवर्टाइजिंग कोड्स के द्वारा प्राइवेट टेलीविजन चैनल्स के कंटेट को नियंत्रित किया जाएगा, जबकि प्रिंट मीडिया के लिए प्रेस काउंसिल ऑफ इंडिया है, जिसके अपने खुद के मानदंड हैं।
मोदी सरकार का मानना है कि ऑनलाइन मीडिया, न्यूज पोर्टल्स और डिजिटल ब्रॉडकास्टिंग के लिए कोई दिशा-निर्देश और मानदंड नहीं हैं। इन माध्यमों के लिए नियमों की सिफारिश करने से पहले कमेटी को एफ डी आई मानदंड, केबल टेलीविजन नेटवर्क एक्ट और प्रेस काउंसिल द्वारा जारी किए गए मानदंड, न्यूज ब्रॉडकास्ट एसोसिएशन द्वारा बनाए गए कोड ऑफ एथिक्स, इंडियन ब्रॉडकास्टिंग फाउंडेशन द्वारा इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के लिए निर्धारित किए गए मानदंडों को ध्यान में रखना होगा।
आपको बता दें कि इससे पहले स्मृति ईरानी के मंत्रालय द्वारा फेक न्यूज दिखाने वाले पत्रकारों के लिए दिशा-निर्देश जारी किए गए थे। इन दिशा-निर्देशों के अनुसार यह कहा गया था कि अगर कोई भी पत्रकार फेक न्यूज दिखाता है तो उसकी मान्यता रद्द कर दी जाएगी। हालांकि, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के इस प्रस्ताव को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्वीकार नहीं किया था।
भारत में बैंकों में लगातार घोटाले हो रहे हैं। नीरव मोदी के बाद गुजरात के एक और व्यापारी ने एक बड़ा बैंक घोटाला किया है। व्यापारी का नाम है एस एन भटनागर। उनकी बिजली उपकरण निर्माता कंपनी डायमंड पावर इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के खिलाफ सी बी आई ने केस दर्ज किया है। कंपनी अफसरों के ठिकानों पर सी बी आई ने दस्तावेजों की बरामदगी के लिए छापेमारी भी की।
इस लोन घोटाले में भटनागर के बेटे अमित और सुमित भी शामिल हैं। कंपनी में बतौर एक्जीक्यूटिव कार्यरत भटनागर के दोनों बेटों के खिलाफ सी बी आई ने केस दर्ज किया है। कंपनी के निदेशकों पर 2654 करोड़ रुपये धोखाधड़ी कर हासिल करने का आरोप है।
शिकायत के मुताबिक, कंपनी के प्रमोटर एस एन भटनागर ने 11 निजी और सरकारी बैंकों से कुल 2654 करोड़ रुपये का कर्ज लिया। ये कर्ज 2008 से 2016 के बीच लिए गए। मगर भटनागर के स्वामित्व वाली कंपनी ने कर्ज ही नहीं चुकाया। आखिरकार 2016-17 में बैंक ने लोन की धनराशि को एन पी ए घोषित कर दिया।
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि बैंकों ने तब भटनागर की कंपनी को लोन दिया, जबकि रिजर्व बैंक ने कंपनी को डिफॉल्टर घोषित कर रखा था।
इससे लोन घोटाले में बैंक अफसरों की संलिप्तता की ओर से इशारा हो रहा है। सी बी आई में दर्ज हुई एफ आई आर के मुताबिक, बैंक ऑफ इंडिया ने सर्वाधिक 670.51 करोड़, बैंक ऑफ वडोदरा का 348.99 करोड़ और आई सी आई सी आई बैंक का 279.46 करोड़ भटनागर की कंपनी पर बकाया है। यह कंपनी वडोदरा में बिजली उपकरण बनाती है।
भारत के जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीर घाटी की स्थिति पर पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी के विवादास्पद बयान का समर्थन किया है। नेशनल कांफ्रेंस के वरिष्ठ नेता ने पाकिस्तानी क्रिकेटर के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, ''कश्मीर में हो रही हत्याओं की हर किसी ने निंदा की है। सभी देश भी इसकी निंदा कर रहे हैं। यह (हत्या) हर हाल में रुकनी चाहिए।''
सुरक्षाबलों द्वारा आतंकियों के एनकाउंटर के बाद विरोध प्रदर्शन पर फारूक ने कहा, ''ये लोग (सुरक्षाबल) बेगुनाहों को मार रहे हैं। .... उनलोगों को भी मारा जा रहा है जो आतंकी नहीं हैं।''
फारूक अब्दुल्ला ने कश्मीर को लेकर पहली बार विवादास्पद बयान नहीं दिया है। फारूक अब्दुल्ला ने पिछले साल पाकिस्तान से बात करने की वकालत की थी। उन्होंने कहा था कि भारत पड़ोसी देश से युद्ध नहीं कर सकता है, क्योंकि पाकिस्तान के पास भी परमाणु बम है। ऐसे में सरकार कितनों को मरवाएगी। साथ ही उन्होंने दोस्तों की मदद लेने की बात कह कर इस विवाद में तीसरे पक्ष को शामिल करने का संकेत दिया था। इसके बाद भाजपा ने फारूक की निंदा की थी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भी उनके बयान को खारिज कर दिया था।
फारूक अब्दुल्ला ने इस साल मार्च में भी कश्मीर को लेकर विवादास्पद बयान दिया था। फारूक ने दोनों देशों की ओर से की जा रही गोलीबारी पर कहा था कि जब तक दोनों देश शांति के बारे में नहीं सोचेंगे, तब तक यह रुकने वाली नहीं है।
पाकिस्तानी क्रिकेटर शाहिद अफरीदी ने 3 अप्रैल को ट्वीट किया था, ''भारत के कब्जे वाले कश्मीर की स्थिति दुखद और चिंताजनक है। वहां दमनकारी सरकार द्वारा बेगुनाहों को गोली मारी जा रही है। इसका मकसद आत्मनिर्णय और आजादी की आवाज को कुचलना है। संयुक्त राष्ट्र और दूसरी अंतरराष्ट्रीय संस्थाएं कहां हैं? ये संस्थाएं खून-खराबा रोकने के लिए कोई कोशिश क्यों नहीं कर रही है?''
अफरीदी ने टीवी चैनलों पर भी भारत के खिलाफ आग उगला था। उन्होंने अपना पक्ष रखते हुए कहा था, ''वहां (कश्मीर में) क्यों बेवजह जानें जा रही हैं? पाकिस्तान और हिन्दुस्तान समझदार मुल्क हैं। इस मसले को वे आराम से बैठकर हल कर सकते हैं। यह इतना बड़ा मुद्दा नहीं है। सबसे पहले कश्मीरियों से पूछा जाना चाहिए कि वो कहां जाना चाहते हैं? वे किस मुल्क के साथ जाना चाहते हैं या किसी देश के साथ नहीं रहना चाहते हैं? क्या वे अपना अलग मुल्क चाहते हैं? ये उन कश्मीरियों से पूछा जाना चाहिए। पाकिस्तान और हिन्दुस्तान बातचीत के जरिये आराम से इस मामले को हल कर सकते हैं।''
भाजपा शासित मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने स्वामी नामदेव त्यागी उर्फ कंप्यूटर बाबा समेत पांच साधुओं को राज्यमंत्री का दर्जा दिया है। कंप्यूटर बाबा अन्य साधु-संतों के साथ मिलकर नर्मदा नदी के संरक्षण और रख रखाव को लेकर शिवराज सरकार के खिलाफ प्रदर्शन करने वाले थे, लेकिन मंत्री का दर्जा मिलते ही उनके सुर बदल गए हैं।
कंप्यूटर बाबा अन्य संतों के साथ मई में 'नर्मदा घोटाला रथ यात्रा' निकालने वाले थे। अब उनका कहना है कि राज्य में घोटाले का तो सवाल ही नहीं उठता है। उन्होंने शिवराज सरकार को 'भगवा की सरकार' करार दिया है। उनके मुताबिक, मध्य प्रदेश सरकार ने उनकी मांगों को मान लिया है और जनजागरण समिति का गठन किया है। इसके तहत वह साधु-संतों के साथ मिलकर राज्यभर का दौरा करेंगे।
उन्होंने स्पष्ट किया कि शिवराज चौहान की सरकार संतों की सरकार है, इसलिए सरकार के समक्ष मांगें रखी थीं। राज्यमंत्री का दर्जा मिलने के बाद मुख्यमंत्री के खिलाफ बिगुल फूंकने वाले कंप्यूटर बाबा का कहना है कि सरकार ने बहुत काम किया है।
मंत्री का दर्जा मिलने के बाद कंप्यूटर बाबा ने कहा कि वह नर्मदा को स्वच्छ रखने के लिए काम करेंगे और आमलोगों की मदद से नदी के तटों पर पौधा रोपण कर हरियाली लाने का काम करेंगे।
उन्होंने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान से मुलाकात करने की बात भी स्वीकार की है। उन्होंने खुद का हेलीकॉप्टर होने की बात से इनकार किया है।
कंप्यूटर बाबा ने कहा कि कहीं आने-जाने के लिए भक्त उन्हें हेलीकॉप्टर मुहैया कराते हैं। कंप्यूटर बाबा के अलावा नर्मदानंद जी, हरिहरा नन्द जी, योगेंद्र महंथ जी और भय्यूजी महाराज को राज्यमंत्री का दर्जा दिया गया है।
बता दें कि मध्य प्रदेश में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं, ऐसे में भाजपा साधु-संत समाज को नाराज नहीं कर सकती है। अगले साल लोकसभा चुनाव भी होना है।
राजनैतिक हलकों में इस बात की भी चर्चा है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की नर्मदा यात्रा की काट में शिवराज सिंह चौहान ने यह कदम उठाया है।
भारत में नरेंद्र मोदी की सरकार ने नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स (एन पी ए) को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी दी है। केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने लिखित जवाब में संसद को बताया कि केंद्र सरकार ने पिछले तीन वर्षों में (अप्रैल, 2014 से सितंबर, 2017 के बीच ) 2.41 लाख करोड़ के कर्ज को ठंडे बस्ते में डाल दिया है।
केंद्रीय मंत्री ने राज्यसभा में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा कि एन पी ए या जोखिम वाले कर्ज को ठंडे बस्ते में डालने का कदम नियमित प्रक्रिया का हिस्सा है। बैंक अपने बैलेंस शीट को दुरुस्त करने के लिए अक्सर ऐसा करती रहती है।
केंद्रीय वित्त राज्यमंत्री शिव प्रताप शुक्ला ने कहा, ''ग्लोबल ऑपरेशन पर आर बी आई के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी बैंकों ने वित्त वर्ष 2014 से 2017 (सितंबर) के बीच कुल 2,41,911 करोड़ रुपये के कर्ज को ठंडे बस्ते में डाला। निर्धारित कानूनी प्रावधानों के तहत वसूली की प्रक्रिया भी चल रही है, ऐसे में कर्ज को ठंडे बस्ते में डालने से कर्ज लेने वालों को कोई फायदा नहीं होगा।''
केंद्रीय मंत्री ने आर बी आई का हवाला देते हुए सदन को बताया कि कर्जदारों के बारे में ऐसा कोई ब्यौरा उपलब्ध नहीं है, जिसका खुलासा किया जा सके। उन्होंने स्पष्ट किया कि आर बी आई अधिनियम के तहत कर्जदारों के बारे में बैंकों द्वारा दी गई जानकारी गोपनीय है।
बता दें कि पिछले कुछ वर्षों में सरकारी बैंकों पर एन पी ए का बोझ कम होने के बजाय लगातार बढ़ता ही जा रहा है। आर बी आई के आंकड़ों के मुताबिक, भारत के 21 सरकारी बैंक एन पी ए की गंभीर समस्या से जूझ रहे हैं। 31 दिसंबर तक 8.26 लाख करोड़ रुपये के कर्ज को एन पी ए घोषित किया जा चुका था।
मोदी सरकार द्वारा तीन वर्षों में तकरीबन ढाई लाख करोड़ रुपये की कर्ज माफी से पश्चिम बंगाल की मुख्मंत्री और तृणमूल कांग्रेस प्रमुख ममता बनर्जी भड़क गई हैं। उन्होंने फेसबुके पर पोस्ट लिखकर अपनी नाराजगी जाहिर की।
कर्ज को ठंडे बस्ते में डालने पर ममता ने लिखा, ''मैं यह देख कर (कर्ज को ठंडे बस्ते में डालने के कदम पर) हैरान हूं कि यह कदम ऐसे समय उठाया गया है जब कर्ज के बोझ से दबे किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो रहे हैं और मांग के बावजूद सरकार किसानों का कर्जा माफ करने पर विचार भी नहीं कर रही है। अब सरकार कह रही है कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों द्वारा दिए गए कर्ज का खुलासा भी नहीं किया जा सकता है।''
भारत की राजधानी दिल्ली में राशन घोटाले ने सबको चौंका दिया है। कंट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल (सी ए जी) की रिपोर्ट में इस घोटाले का खुलासा हुआ है। सी ए जी की रिपोर्ट को दिल्ली विधानसभा में उपमुख्यंत्री मनीष सिसोदिया ने रखा।
इस रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली में राशन ढुलाई के लिए स्कूटर और बाइक का इस्तेमाल किया गया। दरअसल जिन गाड़ियों का जिक्र सरकारी काग़ज़ों पर है, उनकी जगह राशन ले जाने और लाने के लिए स्कूटर का इस्तेमाल किया गया। यानी माल ढुलाई के लिए जिन गाड़ियों को दिखाया गया है, वो फर्जी हैं।
ऑडिट जनरल की रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2016-17 के दौरान राशन वितरण केंद्रों पर करीब 1000 क्विंटल से ज्यादा माल की ढुलाई के लिए 9 ऐसी गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया जिनका रजिस्ट्रेशन नंबर मोटरसाइकिल या फिर स्कूटर का था। वित्त वर्ष 2016-17 में माल ढुलाई के लिए करीब 207 गा़ड़ियों का इस्तेमाल किया गया। जिनमें से 42 गाड़ियां दिल्ली परिवहन विभाग में रजिस्टर्ड नहीं हैं। इसके अलावा 10 गाड़ियां अन्य विभागों के नाम पर थीं। 8 गाड़ियां ऐसी थीं जिनका रजिस्ट्रेशन नंबर ही गलत था।
सी ए जी की इस रिपोर्ट ने बिहार के चर्चित चारा घोटाले की याद ताजा कर दी है। बिहार में भी इसी तरह माल ढुलाई के लिए फर्जी गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया था। बहरहाल दिल्ली में सी ए जी की रिपोर्ट से हंगामा मचा हुआ है।
केजरीवाल सरकार इस मामले में सी बी आई जांच करवाने पर भी विचार कर रही है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा है कि इस घोटाले के दोषी किसी भी शख्स को बख्शा नहीं जाएगा औऱ उस पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। जानकारी के मुताबिक, केजरीवाल सरकार इस घोटाले से जुड़े 50 अलग-अलग मामलों की जांच सी बी आई से करा सकती है।
मुख्यमंत्री केजरीवाल ने दिल्ली के उप राज्यपाल अनिल बैजल पर आरोप लगाया है कि उपराज्यपाल ने लोगों के घरों तक राशन पहुंचाने की सरकारी योजना को रोका। उप राज्यपाल पर केजरीवाल ने राशन माफियाओं को बचाने का आरोप भी लगाया।
सी ए जी की रिपोर्ट में राशन घोटाले का खुलासा होने के बाद इस मामले में सियासत भी तेज हो गई है। विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता ने राज्य सरकार के कामकाज पर सवाल उठाया है। उन्होंने कहा कि सरकार का आर्थिक प्रबंधन सिस्टम पूरी तरह से फेल हो चुका है।









