भारत

अब सूरत में सांप्रदायिक हिंसा भड़की, 6 लोग बुरी तरह घायल

रामनवमी के दिन (25 मार्च, 2018) पश्चिम बंगाल और बिहार में भड़की सांप्रदायिक हिंसा के बाद अब गुजरात में दो समुदायों के बीच झड़प होने का मामला सामने आया है। न्यूज चैनल ए बी पी न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, गुरुवार (29 मार्च, 2018) देर रात सूरत के अमरेली में भड़की हिंसा में छह लोग बुरी तरह घायल हो गए।

चौंकाने वाली बात यह है कि पुलिस हस्तक्षेप के बावजूद भी इस हिंसा को रोका नहीं जा सका। बाद में हिंसा की आग और भड़कती देख बड़ी तादाद में पुलिसकर्मियों को घटनास्थल पर भेजा गया। इस पर उपद्रवियों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। पुलिस ने लोगों को तितर-बितर करने के लिए चार बार हवाई फायर किया और आंसू गैस के गोले छोड़े।

मामले में स्थानीय प्रशासन ने बताया कि 40 लोगों को हिरासत में लिया गया है, जबकि सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने वाले आरोपियों की धर-पकड़ के लिए जांच शुरू कर दी गई है। पुलिस ने बताया कि हिंसा की वजह अभी पता नहीं चल सकी है।

हालांकि, सूत्रों का कहना है कि अलग-अलग समुदाय के दो लोगों के बीच हुए छोटे से विवाद ने हिंसा का इतना बड़ा रूप ले लिया। इसकी वजह पास में स्थित मस्जिद की दीवार पर पत्थर लगना बताई गई। वहीं, हालात देखते हुए पुलिस ने घटना स्थल पर बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों को तैनात कर दिया है।

बता दें कि सांप्रदायिक हिंसा के बाद बिहार और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकों में स्थिति अभी भी तनावपूर्ण बनी हुई है। हालांकि, बीती रात से दोनों राज्य में हिंसा का कोई नया मामला देखने को नहीं मिला। दूसरी तरफ, सांप्रदायिक हिंसा के मामले में दो स्थानीय भाजपा कार्यकर्ताओं सहित 50 लोगों को बिहार के समस्तीपुर और नालंदा जिले से गिरफ्तार किया गया है। वहीं, हिंसा को बढ़ावा देने के आरोप में पश्चिम बंगाल में 60 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है।

बिहार : नवादा में सांप्रदायिक हिंसा, पुलिस ने की हवाई फायरिंग

रामनवमी के बाद बिहार के कई जिलों में भड़की सांप्रदायिक हिंसा की चिंगारी अब नवादा पहुंच गई है। शुक्रवार सुबह नवादा से हिंसक बवाल की खबरें सामने आ रही हैं। बताया जा रहा है कि नवादा बाईपास के पास एक धार्मिक स्थल में तोड़-फोड़ की गई। जिससे लोग आक्रोशित हो गए और उन्होंने जमकर बवाल किया। इस दौरान कई दुकानों को आग के हवाले कर दिया गया है और कई वाहनों में तोड़-फोड़ की गई है।

बवाल की सूचना पर पहुंची पुलिस को प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए हवाई फायरिंग भी करनी पड़ी। फिलहाल पुलिस और प्रशासन के कई आला अधिकारी मौके पर पहुंच गए हैं। इलाके के धार्मिक स्थलों की सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दी गई हैं और इंटरनेट सेवाएं भी बंद कर दी गई हैं। स्थिति को संभालने के लिए घटनास्थल पर भारी संख्या में पुलिस बल भी तैनात कर दिया गया है।

नवादा के डीएम ने बताया कि धार्मिक स्थल पर मूर्ति तोड़े जाने के बाद दो संप्रदाय आमने-सामने आ गए थे, जिससे हिंसा भड़क उठी। फिलहाल भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर तैनात कर दिया गया है और स्थिति नियंत्रण में है।

बता दें कि रामनवमी के बाद से बिहार के भागलपुर, औरंगाबाद, समस्तीपुर, नालंदा और मुंगेर इलाके सांप्रदायिक हिंसा की आग में जल रहे हैं। सभी जगह हालात तनावपूर्ण हैं। अब नवादा की हिंसा ने प्रशासन की चिंता बढ़ा दी है।

बता दें कि नवादा से सांसद भाजपा के गिरिराज सिंह है। बिहार में सांप्रदायिक हिंसा की शुरुआत बीते सोमवार को हुई थी। दरअसल बिहार के औरंगाबाद शहर के जामा मस्जिद इलाके से रामनवमी का जुलूस निकल रहा था। जुलूस के दौरान लोग हाथों में लाठी डंडे लिए डीजे पर नाच रहे थे। तभी कथित तौर पर जुलूस पर पथराव हुआ और देखते ही देखते हिंसा भड़क गई। इस हिंसा में कई दुकानों में आग लगा दी गई और कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने लाठीचार्ज कर और आंसू गैस के गोले छोड़कर बेकाबू भीड़ को नियंत्रित किया।

औरंगाबाद की हिंसा समस्तीपुर, नालंदा होते हुए मुंगेर तक पहुंच गई। औरंगाबाद में जहां फायरिंग हुई, वहीं नालंदा में उपद्रवियों ने पुलिस पर ही पथराव कर दिया। पुलिस प्रशासन ने सभी जगहों पर काबू पा लिया है, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण बनी हुई है। अब नवादा में भी सांप्रदायिकता की आग फैल गई है।

बता दें कि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने पिछले दिनों कहा था कि कुछ लोग माहौल को खराब करने की कोशिश कर रहे हैं, मगर हम ऐसा नहीं होने देंगे। उप-मुख्यमंत्री सुशील मोदी ने भी साफ कहा कि प्रशासन के बताए रुट पर ही जुलूस और विसर्जन यात्राएं निकाली जाएं और भड़काऊ गाने ना बजाएं। लेकिन लोग सरकार की अपील को नजरअंदाज कर रहे हैं।

आसनसोल हिंसा: बाबुल सुप्रियो के खिलाफ एफआईआर दर्ज

साम्प्रदायिक हिंसा की चपेट में आए आसनसोल में माहौल तनावपूर्ण बना हुआ है। आसनसोल पुलिस ने आज (29 मार्च) इलाके में घुसने की कोशिश कर रहे स्थानीय सांसद और केन्द्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो के खिलाफ एफ आई आर दर्ज कर लिया है।

समाचार एजेंसी ए एन आई के मुताबिक, उत्तर आसनसोल पुलिस स्टेशन में बाबुल सुप्रियो के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। बाबुल सुप्रियो पर धारा-144 तोड़ने और एक आई पी एस अफसर पर हमला करने का आरोप पुलिस ने लगाया है।

हिंसा के मद्देनजर पुलिस ने पूरे इलाके में धारा-144 लगा रखी है। बाबुल सुप्रियो अपने समर्थकों के साथ इलाके का दौरा करने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोक लिया। इस दौरान पुलिस से उनकी बहस भी हुई।

बाबुल सुप्रियो ने रानीगंज की स्थिति की जानकारी देने के लिए राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी से मुलाकात की।

रानीगंज में सोमवार को रामनवमी जुलूस के दौरान दो समूहों के बीच हिंसा भड़क उठी थी। इस दौरान एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि पुलिस उपायुक्त को एक हाथ गंवाना पड़ा।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने इस मामले में 28 मार्च को पश्चिम बंगाल सरकार से बीते दो दिनों में रामनवमी जुलूस के दौरान हुई आगजनी व हिंसा की घटनाओं पर रिपोर्ट मांगी है।

समस्‍तीपुर हिंसा: भाजपा के दो नेताओं सहित 50 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया

बिहार के नालंदा और समस्तीपुर जिले में पिछले दो दिनों के दौरान दो समुदाय के बीच झड़प के मामलों में भाजपा के दो कार्यकर्ताओं सहित 50 लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है। समस्तीपुर जिला के रोसडा बाजार में गत 27 मार्च को चैती दुर्गा पूजा के अवसर पर दो समुदाय के बीच विवाद के बाद पथराव और आगजनी में तीन मोटरसाइकिल जलकर खाक हो गई।

समस्तीपुर के पुलिस अधीक्षक दीपक रंजन ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज के आधार पर शरारती तत्वों की पहचान की जा रही है। अब तक 11 लोगों को पूछताछ के लिए थाना लाया गया है। इसमें दो भाजपा के स्थानीय नेता हैं। पूछताछ के लिए थाना लाए गए लोगों का नाम नहीं बताया गया है। रोसडा बाजार में किसी के प्रवेश पर रोक लगा दिया गया है।

मां दुर्गा की प्रतिमा के विसर्जन करने को ले जा रहे प्रतिमा पर एक समुदाय के कुछ शरारती तत्वों द्वारा चप्पल फेंकने के बाद दूसरे समुदाय के लोगों ने रोसडा बाजार स्थित एक समुदाय के धर्मस्थल मस्जिद पर पथराव किया तथा तीन मोटरसाइकिल में आग लगा दी।

घटना की सूचना मिलने पर स्थिति को नियंत्रित करने के लिए वहां पहुंचे दलसिंहसराय अनुमंडल पुलिस अधिकारी संतोष कुमार और समस्तीपुर नगर इंस्पेक्टर चतुर्वेदी सुधीर कुमार पथराव की चपेट आकर जख्मी हो गए। हालात पर काबू पाने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज करना पड़ा।

दरभंगा प्रमंडल के आयुक्त, पुलिस महानिरीक्षक, उपमहानिरीक्षक और समस्तीपुर के जिलाधिकारी प्रणव कुमार ने अतिरिक्त बल के साथ घटनास्थल पहुंचकर हालात को काबू में किया।

सीबीएसई का ऐलान : 10वीं-12वीं बोर्ड के दो विषयों की परीक्षाएं दोबारा होगी

सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन (सी बी एस ई) 10वीं की गणित और 12वीं की अर्थशास्त्र परीक्षा का दोबारा आयोजन कराएगा। सी बी एस ई ने वेबसाइट https://cbse.nic.in/ पर नोटिफिकेशन जारी कर इसका ऐलान किया है। नोटिफिकेशन के मुताबिक, परीक्षा में पारदर्शिता बनाए रखने और छात्रों के हित में दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया गया है।

10वीं के गणित और 12वीं की अर्थशास्त्र परीक्षा के प्रश्न पत्र लीक होने की रिपोर्ट्स आई थी। ऐसे में बोर्ड ने दोबारा परीक्षा कराने का फैसला लिया। हालांकि अभी परीक्षा की तारीखों का ऐलान नहीं किया गया है। नोटिफिकेशन में उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, एक सप्ताह के अंदर परीक्षाओं की नई डेट्स जारी की जाएंगी।

12वीं की अर्थशास्त्र का कोड 030 और 10वीं की गणित का कोड 041 है। 12वीं के अर्थशास्त्र विषय की परीक्षा 26 मार्च 2018 को हुई थी। वहीं 10वीं की गणित परीक्षा 28 मार्च को होनी थी।

इससे पहले सी बी एस ई ने सोमवार को अर्थशास्त्र की परीक्षा का प्रश्न पत्र लीक होने की खबरों को खारिज कर दिया था। परीक्षा शुरू होने के कुछ घंटे पहले प्रश्न पत्र लीक होकर सोशल मीडिया और व्हाट्स ऐप पर वायरल होने की खबरें आई थी। बारहवीं कक्षा के अकाउंटेंसी विषय की सी बी एस ई बोर्ड परीक्षा का प्रश्न पत्र कथित तौर पर लीक होने की भी खबर आई थी।

दिल्ली के उपमुख्यमंत्री एवं शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में इसकी पुष्टि की थी। हालांकि सी बी एस ई ने अकाउंटेंसी पेपर लीक होने की बात को खारिज कर दिया था। बता दें सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंड्री एजुकेशन की 10वीं-12वीं बोर्ड परीक्षाएं 5 मार्च 2018 से शुरू हुई थी। दसवीं बोर्ड की परीक्षाएं 04 अप्रैल 2018 तक चलेगी। वहीं बारहवीं की परीक्षाएं 13 अप्रैल 2018 तक आयोजित होगी। वहीं सी बी एस ई दोबारा होने वाली परीक्षाओं की नई डेट्स जारी करेगा।

हाशिमपुरा हत्याकांड: 40 मुसलमानों के नरसंहार में शामिल पीएसी जवानों के नामों का पहली बार खुलासा

उत्तर प्रदेश में मेरठ के हाशिमपुरा में 2 मई 1987 को 40 मुस्लिम युवकों की हत्याकांड के 30 साल बाद उत्तर प्रदेश सरकार ने मंगलवार को पहली बार सुबूत के तौर पर एक केस डायरी पेश की है। जिसमें आरोपी पी ए सी कर्मियों के नाम दर्ज हैं। पी ए सी कर्मियों पर 40 मुस्लिमों की हत्या का आरोप है। 78 वर्षीय गवाह रणबीर सिंह बिश्नोई की ओर से तैयार केस डायरी में कथित रूप से आरोपी पुलिसकर्मियों के नाम शामिल हैं।

2015 में इन आरोपी पी ए सी कर्मियों को सुनवाई के दौरान अदालत ने बरी कर दिया था। बिश्नोई मंगलवार(27 मार्च) को तीस हजारी कोर्ट के सेशन कोर्ट में हाजिर हुए और केस डायरी सौंपा।

इस केस डायरी में मेरठ पुलिस लाइंस में 1987 में तैनात पी ए सी कर्मियों के नाम दर्ज हैं। राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की याचिका पर दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेश के बाद केस डायरी को साक्ष्य के तौर पर पेश किया गया। डायरी के कुल पांच पन्ने सुबूत के तौर पर पेश किए गए।

बता दें कि मार्च 2015 में सेशन कोर्ट ने आरोपी 16 पी ए सी कर्मियों को सुबूत के अभाव में बरी कर दिया था। कोर्ट ने कहा था कि यह तो साबित होता है कि हाशिमपुरा मुहल्ले के 40 से 45 लोगों का पी ए सी के ट्रक से अपहरण किया गया और उन्हें मारकर गंग नहर, मुराद नगर और हिंडन नदी में फेंक दिया गया। मगर यह साबित नहीं हुआ कि मारने वाले पी ए सी कर्मी ही थे।

कोर्ट में बिश्नोई ने कुल 17 पी ए सी कर्मियों के नाम लिए। जिसमें प्लाटून कमांडर सुरेंद्र पाल सिंह, हेड कांस्टेबल निरंजन लाल, कमल सिंह, श्रवण कुमार, कुश कुमार, एस सी शर्मा, कांस्टेबल ओम प्रकाश, शमी उल्लाह, जय पाल, महेश प्रसाद, राम ध्यान, लीलाधर, हमबीर सिंह, कुंवर पाल, बुद्ध सिंह, बसंत, बल्लभ, नाइक रामबीर सिंह।

यह सुबूत ऐसे वक्त पर आए हैं, जब ट्रायल कोर्ट की ओर से आरोपियों को बरी करने के फैसले को दिल्ली हाई कोर्ट में मई 2015 में चुनौदी दी जा चुकी है। बता दें कि बिश्नोई ने ही चार्जशीट तैयार की थी। उन्होंने कोर्ट में कहा कि मैने सभी दस्तावेजों की जांच कर ही चार्जशीट दायर की थी। घटना के दिन 22 मई 1987 की जी डी की प्रति से पुलिस लाइंस में तैनात पी ए सी कर्मियों के नाम का पता चला।

मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ जल्द ही संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है

भारत के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ जल्द ही संसद में महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है। समाचार एजेंसी ए एन आई के मुताबिक, कांग्रेस ने महाभियोग से संबंधित एक ड्राफ्ट तैयार कर अन्य दलों के बीच बंटवाया है। उस ड्राफ्ट पर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, तृणमूल कांग्रेस और वाम दलों समेत कई पार्टियों के नेताओं ने दस्तखत किए हैं। एन सी पी नेता डी पी त्रिपाठी ने ए एन आई को बताया है कि उन्होंने भी पार्टी की तरफ से इस ड्राफ्ट पर हस्ताक्षर किए हैं।

माना जा रहा है कि बजट सत्र के अंतिम दिनों में या फिर बाद में मुख्य न्यायाधीश पर महाभियोग प्रस्ताव लाया जा सकता है। चूंकि अभी सदन में नोदी सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने के लिए संघर्ष जारी है, इसलिए संभव है कि सी जे आई के खिलाफ महाभियोग बाद में लाया जाए। बता दें कि पहले कांग्रेस के कई बड़े नेता महाभियोग लाने के खिलाफ थे। हालांकि, कई गैर भाजपाई दल चाहते हैं कि मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ मौजूदा परिस्थितियों में महाभियोग प्रस्ताव लाया जाए।

सी जे आई दीपक मिश्रा पर महाभियोग प्रस्ताव की बात तब सामने आई, जब सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने इस साल के शुरुआत में ही 12 जनवरी को सार्वजनिक तौर पर प्रधान न्यायाधीश पर हमला बोल दिया था और उन पर पक्षपात करने समेत मुकदमों के बंटबारे में नियम का पालन नहीं करने का आरोप लगाया था। चार जजों ने सी बी आई जज लोया की मौत की जांच में भी कोताही बरतने का आरोप सी जे आई पर लगाया था। जस्टिस चेलमेश्वर के आवास पर जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस कुरियन जोसेफ और जस्टिस मदन बी लोकुर ने संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेन्स कर कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में सबकुछ ठीकठाक नहीं चल रहा है।

जजों ने कहा था कि बीते दिनों कई ऐसे वाकये हुए जिस पर उन लोगों ने सी जे आई को समझाने की कोशिश की थी, लेकिन बात नहीं बन सकी। इन जजों ने कहा कि उनलोगों ने एक चिट्ठी भी सी जे आई को लिखी थी, लेकिन जब उस पर भी कार्रवाई नहीं हुई तो अंत में मामले को मीडिया में लाना पड़ा। जजों द्वारा इस तरह से मीडिया में आकर सुप्रीम कोर्ट के अंदर की बात जगजाहिर करना देश के न्यायिक इतिहास की बड़ी और ऐतिहासिक घटना थी। बता दें कि पिछले कुछ दिनों में संसदीय गलियारों में खासकर कांग्रेस, एन सी पी, सी पी आई (एम), टी एम सी के नेताओं के बीच फिर से महाभियोग की चर्चा हो रही थी, लेकिन इसे कब लाया जाय, इस पर फिलहाल कोई फैसला नहीं हो सका है।

अमित मालवीय के जवाब से चुनाव आयोग संतुष्‍ट नहीं, जांच के लिए कमेटी बनाई

भारत में चुनाव आयोग द्वारा कर्नाटक विधान सभा चुनाव की तारीखों का ऐलान से पहले ही बीजेपी के आई टी सेल के हेड अमित मालवीय द्वारा सटीक तारीख ट्वीट किए जाने को मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत ने गंभीरता से लिया है और इसकी जांच के लिए अधिकारियों की एक कमेटी बनाई है। कमेटी को सात दिनों के अंदर रिपोर्ट देने को कहा गया है।

कमेटी को मुख्य चुनाव आयुक्त ने यह जांच का जिम्मा सौंपा है कि चुनाव की तारीख कैसे लीक हुई? बता दें कि आज (27 मार्च को) सुबह करीब 11 बजे अमित मालवीय ने ट्वीट किया था कि कर्नाटक में 12 मई को चुनाव होंगे और नतीजे 18 मई को आएंगे। जब मुख्य चुनाव आयुक्त ओ पी रावत ने प्रेस कॉन्फ्रेन्स में करीब 11.15 बजे के आसपास कर्नाटक चुनाव की तारीखों का ऐलान किया तो अमित मालवीय की बात सही निकली। हालांकि, मतगणना की तारीख में अंतर था। आयोग ने मतगणना की तारीख 15 मई तय की है।

जब मीडियाकर्मियों ने इस बावत मुख्य चुनाव आयुक्त से पूछा तो उन्होंने मामले की जांच कराकर दोषियों को कड़ी कार्रवाई की बात कही। आरोपों से घिरा देख अमित मालवीय ने ट्वीट डिलीट कर दिया। बाद में उन्होंने चुनाव आयोग को स्पष्टीकरण का पत्र भी लिखा, लेकिन आयोग उनके जवाब से खुश नहीं है। चुनाव आयोग को लिखे पत्र में मालवीय ने बताया कि उन्‍होंने मीडिया रिपोर्ट देखने के बाद ही चुनाव की तारीख के बारे में ट्वीट किया था। उन्‍होंने आयोग के संवैधानिक अधिकारों के प्रति आस्‍था भी जताई है। अमित मालवीय ने लिखा, ''मैंने कर्नाटक चुनाव की संभावित तिथि को लेकर जो ट्वीट किया था उसको लेकर कुछ शंकाएं पैदा हो गई हैं। मैं यह स्‍पष्‍ट करना चाहता हूं कि मेरी सूचना का स्रोत नेशनल टीवी चैनल 'टाइम्‍स नाउ' पर दिखाई गई रिपोर्ट थी। चैनल ने सुबह 11.08 बजे (27 मार्च) न्‍यूजब्रेक के तौर पर तिथियों के बारे में बताया था।''

अमित मालवीय के बचाव में भाजपा भी उतर आई है। भाजपा के वरिष्‍ठ नेता और केंद्रीय मंत्री मुख्‍तार अब्‍बास नकवी ने एक प्रतिनिधिमंडल के साथ चुनाव आयोग के अधिकारियों से मुलाकात की और कहा कि अमित मालवीय का ट्वीट टीवी चैनल के स्रोत पर आधारित था। इसका उद्देश्‍य आयोग की गरिमा को कम करना नहीं था। भाजपा प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि कर्नाटक के एक नेता ने भी इसी तरह का ट्वीट किया था। भाजपा डेलिगेशन ने कहा कि हमलोग इस बात से सहमत हैं कि अमित मालवीय को इस तरह का ट्वीट नहीं करना चाहिए था।

बिहार: उपद्रवियों ने मस्जिद पर भगवा झंडे लहराए

बिहार के समस्‍तीपुर जिले में कुछ उपद्रवियों ने मस्जिद पर भगवा झंडे लहराए। मिली जानकारी के अनुसार, जिले के रोसड़ा कस्‍बे में कुछ शरारती तत्‍व जामा मस्जिद पर जुट गए और उसपर चढ़कर भगवा झंडे लगा दिए। घटना का एक वीडियो भी सामने आया है। इस वीडियो में एक युवक मस्जिद की मीनार पर चढ़कर भगवा झंडा लहराता दिख रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, प्रशासन इस पूरी घटना के दौरान मूकदर्शक बना रहा। इस पूरी घटना को औरंगाबाद में रामनवमी जुलूस के दौरान हुए विवाद से जोड़कर देखा जा रहा है।

रोसड़ा के गुदरी बाजार स्थित मस्जिद के पास से सोमवार को माता दुर्गा की प्रतिमा विसर्जन को जा रही थी। तब किसी शरारती तत्व ने मूर्ति की ओर चप्‍पल फेंक दी। इसी के विरोध में मंगलवार सुबह सैकड़ों लोग मस्जिद के पास इकट्ठा होकर आरोपी की बलि देने की मांग करने लगे। आस-पास के इलाकों से भी लोग यहाँ इकट्ठा हो रहे हैं। मिली जानकारी के अनुसार, पुलिस पड़ोसी जिलों से फोर्स का बंदोबस्‍त कर रही है क्‍योंकि हालात कभी भी बिगड़ने की आशंका है। स्कूलों में छुट्टियां दे दी गयी हैं।

जब इस संबंध में समस्‍तीपुर के एसपी दीपक रंजन से बात हुई तो उन्‍होंने बताया कि अब हालात सामान्‍य हैं। उन्‍होंने जानकारी दी कि मंगलवार सुबह कुछ उपद्रवी तत्‍व शांति-व्‍यवस्‍था को नुकसान पहुंचाने की नीयत से इकट्ठा हुए थे। उन्‍होंने कहा, ''मंगलवार सुबह एक खास समुदाय के लोग अशांति फैलाने के मकसद से यहां जमा हुए थे। जानकारी मिलने पर पुलिस फौरन पहुंची और हालात को काबू में किया गया।''

दीपक ने बताया, ''किसी तरह की अफवाह पर ध्‍यान न दें। जान-माल के नुकसान की सूचना नहीं हैं।'' उनके मुताबिक, जब पुलिस वहां पहुंची तो उन्‍हें भगवा झंडे नहीं मिले, केवल तिरंगा लगा हुआ मिला।'' एसपी के अनुसार, इस मामले में एक व्‍यक्ति को गिरफ्तार किया गया है।

बिहार के औरंगाबाद में रामनवमी के जुलूस के दौरान 25 मार्च को दो समुदायों के बीच भारी झड़प हुई थी। इसी समय एक संप्रदाय के पत्‍थरबाजी करने के बाद दूसरे संप्रदाय के लोगों ने आग लगा दी थी। पुलिस के पहुंचने के बाद हालात काबू हुई। यहां करीब आधा दर्जन दुकानों को आग लगा दी गई। इसके बाद राज्‍य के कई हिस्‍सों से ऐसी ही खबरें आईं।

दिल्ली हाईकोर्ट ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद का फैसला रद्द किया, आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता बहाल की

दिल्ली हाईकोर्ट ने आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों को बड़ी राहत देते हुए उनकी सदस्यता बहाल कर दी है। इसके साथ ही राष्ट्रपति के फैसले को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने चुनाव आयोग को मामले में फिर से सुनवाई करने को कहा है।

बता दें कि लाभ का पद मामले में आम आदमी पार्टी विधायकों ने दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। हाई कोर्ट ने चुनाव आयोग को इस मामले में फैसला आने तक उपचुनाव नहीं कराने का आदेश दिया था।

19 जनवरी 2017 को चुनाव आयोग द्वारा की गई सिफारिश पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने 22 जनवरी को आम आदमी पार्टी के 20 विधायकों की सदस्यता समाप्त कर दी थी। केजरीवाल सरकार ने इन विधायकों को संसदीय सचिवों के पद पर नियुक्ति की थी जिसे चुनाव आयोग ने लाभ का पद मानते हुए उनकी सदस्यता रद्द करने की सिफारिश की थी।

हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाते हुए आम आदमी पार्टी विधायकों ने आरोप लगाया था कि आयोग ने आरोपी विधायकों को अपना पक्ष रखने का अवसर नहीं दिया और एकपक्षीय सुनवाई करते हुए सदस्यता रद्द करने की सिफारिश राष्ट्रपति को भेज दी।

अब हाईकोर्ट ने मामले की फिर से सुनवाई करने का आदेश चुनाव आयोग को दिया है। हाईकोर्ट के फैसले के बाद आम आदमी पार्टी विधायक सौरव भारद्वाज ने बताया कि कोर्ट ने आयोग को फिर से लाभ का पद मामले की सुनवाई करने और आरोपी विधायकों की बात सुनने का आदेश दिया है।

इधर, दिल्ली के मुख्यमंत्री और आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने इस फैसले के बाद बधाई दी है और ट्वीट कर लिखा है, ''सत्य की जीत हुई। दिल्ली के लोगों द्वारा चुने हुए प्रतिनिधियों को ग़लत तरीक़े से बर्खास्त किया गया था। दिल्ली हाई कोर्ट ने दिल्ली के लोगों को न्याय दिया। दिल्ली के लोगों की बड़ी जीत। दिल्ली के लोगों को बधाई।''

हाईकोर्ट के फैसले से जिन विधायकों को राहत मिली है। उनमें अलका लांबा, आदर्श शास्त्री, संजीव झा, राजेश गुप्ता, कैलाश गहलोत, विजेंदर गर्ग, प्रवीण कुमार, शरद कुमार, मदन लाल खुफिया, शिव चरण गोयल, सरिता सिंह, नरेश यादव, राजेश ऋषि, अनिल कुमार, सोम दत्त, अवतार सिंह, सुखवीर सिंह डाला, मनोज कुमार, नितिन त्यागी और जरनैल सिंह (तिलक नगर) शामिल हैं।