भारत

टॉटेम इंफ्रा ने आठ बैंको को ठगा, 1394 करोड़ का फर्जीवाड़ा किया

बैंकों को ठगने का सिलसिला थम नहीं रहा है। हीरा कारोबारी नीरव मोदी द्वारा पंजाब नेशनल बैंक को ठगने के बाद लगातार ऐसे मामले आ रहे हैं। नया मामला यूनियन बैंक ऑफ इंडिया (यू बी आई) के साथ ही सात अन्य बैंकों के एक कंसोर्टियम से जुड़ा है। टॉटेम इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड ने आठ बैंकों के समूह से कुल 1,394.43 करोड़ रुपये का कर्ज लिया था। 30 जून, 2012 में इसे एन पी ए (नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स) घोषित कर दिया गया था।

यू बी आई की इंडस्ट्रियल ब्रांच ने टॉटेम इंफ्रा को अकेले 313 करोड़ रुपये का लोन दिया था। यू बी आई ने गुरुग्राम स्थित कंस्ट्रक्शन कंपनी के प्रमोटर और डायरेक्टर सलालिथ टॉट्टेमपुड़ी और कविता टॉट्टेमपुड़ी के खिलाफ सीबीआई में शिकायत दी थी। जांच एजेंसी ने इस मामले में एफ आई आर दर्ज कर ली है। कंपनी के प्रमोटर और डायरेक्टर से पूछताछ की जा रही है।

बता दें कि कंपनी द्वारा कर्ज की अदायगी नहीं करने पर इनको दिए लोन को एन पी ए में डाल दिया गया था।

मालूम हाे कि पी एन बी घोटाला सामने आने के बाद वित्तीय फर्जीवाड़े के कई मामले सामने आ चुके हैं। दिल्ली, राजस्थान, हरियाणा, महाराष्ट्र और तमिलनाडु से विभिन्न कंपनियों द्वारा बैंकों को ठगने का मामला सामने आ चुका है।

दिल्ली स्थित द्वारका दास सेठ इंटरनेशनल ने ओरिएंटल बैंक ऑफ कॉमर्स के 390 करोड़ रुपये का  फर्जीवाड़े किया।

वहीं, तमिलनाडु में कनिष्क गोल्ड प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर भूपेश कुमार जैन ने 13 बैंकों का 824 करोड़ रुपये ठग लिया। बैंकों के कंसोर्टियम की अगुआई एस बी आई ने की थी। भूपेश ने बैंक अधिकारियों को पत्र लिखकर फर्जी दस्तावेज के आधार पर लोन लेने की बात भी स्वीकार की थी। शुरुआत में उसने आठ बैंकों को ब्याज का भुगतान नहीं किया था। बाद में सभी 13 बैंकों का भुगतान रोक दिया गया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, भूपेश अपनी पत्नी नीता जैन के साथ मॉरिशस में है। एस बी आई ने 25 जनवरी को भूपेश और उसकी पत्नी नीता के खिलाफ सीबीआई में शिकायत दी थी। इससे पहले एस बी आई ने उसके खातों को फर्जी करार दे दिया था। बाद में सभी बैंकों को यह कदम उठाना पड़ा था। आर बी आई को भी इसकी सूचना दी गई थी।

भारत ने लड़ाकू विमान के जरिए ब्रह्मोस मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया

भारत ने गुरुवार को पहली बार स्वदेशी सीकर का इस्तेमाल कर लड़ाकू विमान के जरिए एक ब्रह्मोस मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण किया। यह परीक्षण पोखरण टेस्ट रेंज से किया गया। भारत की रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने परीक्षण की सफलता के लिए डी आर डी ओ, सशस्त्र बलों व रक्षा उद्योग को बधाई दी।

रक्षा मंत्री ने ट्वीट किया, ''सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल ब्रह्मोस का राजस्थान के पोखरण परीक्षण रेंज से सुबह 8.42 बजे सफलतापूर्वक परीक्षण किया गया।'' उन्होंने कहा, ''भारत निर्मित सीकर के साथ सटीक प्रहार करने वाले हथियार ने अपने निर्दिष्ट प्रक्षेप पथ पर उड़ान भरा और पिन प्वाइंट एक्यूरेसी के साथ लक्ष्य को निशाना बनाया।''

सीकर मिसाइल को उसके लक्ष्य को भेदने के लिए राह बताता है।

ब्रह्मोस ए एल सी एम (एयर लांच क्रूज मिसाइल) का वजन 2.5 टन है। यह मिसाइल के जमीन व समुद्री संस्करणों से हल्का है, जिनका वजन करीब 3 टन है, लेकिन यह भारत के सू-30 विमान में तैनात किए जाने वाला सबसे भारी हथियार है। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (एच ए एल) द्वारा हथियार की ढुलाई के लिए विमान में परिवर्तन किया गया।

ब्रह्मोस भारत के डी आर डी ओ व रूस के एन पी ओ मशिनोस्टोयेनिया के बीच संयुक्त उद्यम है।

इस मिसाइल को 500 से 14,000 मीटर (1640 से 46,000 फीट) ऊंचाई से छोड़ा जा सकता है। इसे छोड़ने के बाद मिसाइल स्वतंत्र रूप से 100 से 150 मीटर तक गिरती है और फिर क्रूज फेज में 14000 मीटर और अंत में अंतिम चरण में 15 मीटर जाती है।

गोमांस के शक में भीड़ द्वारा हत्या के मामले में बीजेपी नेता को उम्रकैद, अन्य दोषियों को भी उम्रकैद

झारखंड के रामगढ़ की फास्ट ट्रैक कोर्ट ने गोमांस के शक में भीड़ द्वारा अलीमुद्दीन अंसारी की पीट-पीटकर हत्या करने के एक मामले में नौ महीने के अंदर सजा सुनाई है। कोर्ट ने मामले में आरोपी 11 लोगों को दोषी करार देते हुए उम्र कैद की सजा सुनाई है। सजा पाने वालों में बीजेपी का एक स्थानीय नेता नित्यानंद महतो भी शामिल है।

गोमांस के शक में भीड़ द्वारा पीट-पीटकर हत्या करने के आरोपियों को सजा सुनाने का यह भारत का पहला मामला है। बीते साल 29 जून को गौरक्षा समिति से जुड़े लोगों की भीड़ ने रामगढ़ जिले में 55 साल के अलीमुद्दीन अंसारी पर गोमांस ले जाने का आरोप लगाकर उनकी हत्या कर दी थी। भीड़ ने अलीमुद्दीन अंसारी की गाड़ी को भी आग के हवाले कर दिया था। यह वाकया तब हुआ था, जब ठीक एक दिन पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोगों से गौरक्षा के नाम पर कानून अपने हाथ में नहीं लेने की अपील की थी।

फास्ट ट्रैक कोर्ट ने पिछले सप्ताह 11 आरोपियों को आई पी सी की धारा 147, 148, 427/149, 435/149, 302/149 के तहत दोषी करार दिया था और दीपक मिश्रा, संतोष सिंह और छोटू वर्मा को मुख्य अभियुक्त ठहराया था। इन्हें अन्य धाराओं के साथ-साथ 120बी के तहत भी दोषी पाया गया है। मामले में एक 12वां आरोपी भी है, जिस पर कोर्ट ने अभी फैसला नहीं लिया है क्योंकि उसके वयस्क होने पर अभी विवाद है। संभवत: उसकी उम्र 16 से 18 साल के बीच है।

यह मुकदमा झारखंड उच्च न्यायालय की निगरानी में चला। मुकदमे के दौरान अभियोजक ने 19 गवाह व 59 दस्तावेज प्रस्तुत किए। आरोपियों को भारतीय दंड संहिता की विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया गया। बीते साल बच्चों का अपहरण करने व गोमांस ले जाने के आरोप में झारखंड में दर्जन भर लोगों को पीट-पीटकर मार दिया गया था।

फेसबुक डाटा स्कैंडल: सुरजेवाला ने कहा ,बीजेपी ने कैम्ब्रिज एनालिटिका का फायदा उठाया

ब्रिटिश कंपनी 'कैम्ब्रिज एनालिटिका' द्वारा डाटा के दुरुपयोग को लेकर उठा विवाद भारत पहुंच गया है। इसको लेकर बीजेपी और विपक्षी कांग्रेस पार्टी आमने-सामने है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रवि शंकर प्रसाद ने कैम्ब्रिज एनालिटिका से कथित संबंधों को लेकर कांग्रेस की तीखी आलोचना की है।

उन्होंने कांग्रेस पार्टी से तीन सवाल पूछे हैं। केंद्रीय मंत्री ने कहा, ''क्या कांग्रेस मतदाताओं को रिझाने के लिए डाटा चोरी और आंकड़ों में हेरफेर पर निर्भर है? क्या कांग्रेस कैम्ब्रिज एनालिटिका द्वारा अपनाए गए तौर-तरीकों का समर्थन करती है? राहुल गांधी के सोशल मीडिया प्रोफाइल में कैम्ब्रिज एनालिटिका की क्या भूमिका है?''

फेसबुक को चेतावनी देते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि सोशल मीडिया के दुरुपयोग को बरदाश्त नहीं किया जाएगा। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटिश कंपनी ने चुनाव से पहले सोशल मीडिया के लिए रणनीति तैयार करने को लेकर कांग्रेस से संपर्क साधा था।

रवि शंकर प्रसाद ने आरोप लगाया कि वर्ष 2019 में होने वाले चुनाव से पहले प्रचार अभियान के लिए कांग्रेस ने कैम्ब्रिज एनालिटिका कंपनी से संपर्क किया था। बता दें कि ब्रिटिश कंपनी पर सोशल साइट फेसबुक से लिए गए डाटा का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया गया है।

कांग्रेस ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। कांग्रेस की सोशल मीडिया विभाग की प्रमुख राम्या ने ट्वीट कर कैम्ब्रिज एनालिटिका से पार्टी के संबंधों के आरोप को सरासर झूठ करार दिया है। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने उलटे भाजपा से सवाल पूछे हैं।

रणदीप सुरजेवाला ने भाजपा के आरोपों को फेक न्यूज पर आधारित करार दिया। सुरजेवाला ने कहा कि बीजेपी ने ही इस कंपनी का फायदा उठाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने वर्ष 2009 में कैम्ब्रिज एनालिटिका की सहायक कंपनी ओ बी आई की सेवा ली थी।

कैम्ब्रिज एनालिटिका की करतूत को 'फेसबुक डाटा स्कैंडल' का नाम दिया गया है। अब तक की जांच में कंपनी द्वारा हनीट्रैप, फेक न्यूज कैंपेन और पूर्व जासूसों की मदद से चुनावों को प्रभावित करने की बात सामने आई है। ब्रिटिश कंपनी के अधिकारियों ने क्लाइंट को फायदा पहुंचाने के लिए उठाए गए कदम की जानकारी दी है। उनके अनुसार, विपक्षी उम्मीदवारों को फंसाने के लिए घूस लेने का फर्जी स्टिंग और वेश्याओं तक का इस्तेमाल किया जाता है। बता दें कि कैम्ब्रिज एनालिटिका पर गैरकानूनी तरीके से फेसबुक के लाखों-करोड़ों यूजर्स का डाटा हासिल करने का संगीन आरोप लगाया गया है।

चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने का प्रयास बर्दाश्त नहीं होगा: केंद्रीय कानून और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री

भारत ने बुधवार को सोशल मीडिया के अग्रणी मंच फेसबुक और उसके सी ई ओ मार्क जुकरबर्ग को कथित तौर पर चुनावी प्रक्रिया को प्रभावित करने के लिए डेटा का दुरुपयोग करने को लेकर सख्त कार्रवाई करने की चेतावनी दी है।

बीजेपी नेता, केंद्रीय कानून और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने संवाददाताओं से बातचीत में कहा, ''भारत के कानून मंत्री के रूप में मैं स्पष्ट कर देना चाहता हूं कि हम प्रेस की आजादी, भाषण व अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सोशल मीडिया पर विचारों के स्वतंत्र आदान-प्रदान का पूरा समर्थन करते हैं।''

उन्होंने आगे कहा, ''लेकिन फेसबुक समेत सोशल मीडिया द्वारा अप्रत्यक्ष या प्रत्यक्ष रूप से अवांछित साधनों के जरिए भारत की चुनाव प्रक्रिया को प्रभावित करने के किसी भी प्रयास की न तो सराहना की जाएगी और न ही उसे बर्दाश्त किया जाएगा।''

कानून मंत्री ने कहा, ''फेसबुक बिल्कुल स्पष्ट तौर पर यह जान ले कि अगर जरूरी हुआ तो सख्त कार्रवाई की जाएगी।''

यह चेतावनी उन खबरों के बीच दी गई है, जिनमें बताया गया है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टीम के साथ कार्य कर रही डेटा विश्लेषक कंपनियों ने कथित तौर अमेरिकी मतदाताओं की लाखों फेसबुक प्रोफाइल का उपयोग उनके मतदान की पसंद को प्रभावित करने के लिए किया है।

भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता रविशंकर प्रसाद ने जुकरबर्ग को भारत के सूचना प्रौद्योगिकी कानून की याद दिलाते हुए कहा, ''अच्छा होगा कि आप भारत के आई टी मंत्री के कथनों पर ध्यान दें।''

उन्होंने कहा, ''अगर किसी भी भारतीय का डेटा फेसबुक की मिलीभगत से लीक होगा तो इसे बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। हमें आई टी कानून में जरूरी शक्ति प्राप्त है, जिसके तहत आपको भारत में तलब भी किया जा सकता है।'' रविशंकर ने कहा कि भारतीय फेसबुक यूजर्स की निजता के साथ छेड़छाड़ का आकलन करने के लिए सरकार अमेरिकी फेडरल ट्रेड कमीशन और न्याय विभाग के संपर्क में है।

उन्होंने चेतावनी दी, ''हम भारतीय यूजर्स के डेटा की चोरी का आकलन करने के लिए कंपनी और फेसबुक को तलब करेंगे और सख्त कार्रवाई करेंगे।''

फेसबुक ने कहा है कि करीब 2,70,000 लोगों ने एप डाउनलोड किया और उन्होंने उस पर अपनी निजी जानकारी साझा की। लेकिन कंपनी ने किसी तरह की गड़बड़ी से इंकार किया और कहा कि कंपनी डेटा हासिल करने और उसके इस्तेमाल में सही प्रक्रियाओं का पालन करती है।

मोदी सरकार ने जामिया मिलिया इस्लामिया के अल्पसंख्यक संस्थान के दर्जे का विरोध किया

भारत में केन्द्र सरकार ने दिल्ली हाईकोर्ट में एक हलफनामा दाखिल कर जामिया मिलिया इस्लामिया के अल्पसंख्यक संस्थान के दर्जे का विरोध किया है। मोदी सरकार ने नेशनल कमीशन फॉर माइनॉरिटी एजुकेशनल इंस्टीट्यूशनस (एन सी एम ई आई) के उस फैसले पर असहमति जतायी है, जिसमें एन सी एम ई आई ने जामिया मिलिया इस्लामिया को धार्मिक अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा दिया है।

भारत में केंद्र की पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार में साल 2011 में तत्कालीन मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने एन सी एम ई आई के फैसले का समर्थन किया था और कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर जामिया मिलिया इस्लामिया के अल्पसंख्यक संस्थान होने की बात स्वीकारी थी।

केन्द्र की मोदी सरकार ने अपने स्टैंड के पक्ष में कोर्ट में दाखिल किए गए अपने हलफनामे में अजीज बाशा बनाम भारत गणराज्य केस (साल 1968) का हवाला देते हुए बताया कि इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि जो यूनिवर्सिटी संसद एक्ट के तहत शामिल है, उसे अल्पसंख्यक संस्थान का दर्जा नहीं दिया जा सकता।

मोदी सरकार ने बीते 5 मार्च को यह हलफनामा कोर्ट में दाखिल किया, जिसे 13 मार्च को कोर्ट में रिकॉर्ड किया गया। हलफनामे में कहा गया है कि जामिया मिलिया इस्लामिया के बोर्ड का निर्वाचन होता है और जरूरी नहीं है कि इसमें इस्लाम को मानने वालों की ही अधिकता हो। ऐसे में, जामिया मिलिया इस्लामिया के अल्पसंख्यक संस्थान होने का सवाल ही नहीं उठता। इसके साथ ही हलफनामे में कहा गया है कि जामिया मिलिया इस्लामिया अल्पसंख्यक संस्था इसलिए भी नहीं है, क्योंकि इसे संसद एक्ट के तहत बनाया गया और केन्द्र सरकार इसे फंड देती है।

उल्लेखनीय है कि साल 2011 में एन सी एम ई आई ने कहा था कि जामिया मिलिया इस्लामिया की स्थापना मुस्लिमों द्वारा मुस्लिमों के फायदे के लिए की गई थी और यह संस्थान अपनी मुस्लिम पहचान को कभी नहीं छोड़ेगा। इसके बाद जामिया ने एस सी, एस टी और ओ बी सी छात्रों को आरक्षण देने से इनकार कर दिया। वहीं, मुस्लिम छात्रों के लिए हर कोर्स में आधी सीटें आरक्षित कर दी। 30 प्रतिशत सीट जहां मुस्लिम छात्रों के लिए, वहीं 10 प्रतिशत मुस्लिम महिलाओं के लिए और 10 प्रतिशत मुस्लिम पिछड़ा वर्ग और मुस्लिम अनुसूचित जनजाति के लिए आरक्षित कर दी गई।

जामिया मिलिया इस्लामिया के इस फैसले के विरोध में कोर्ट में 5 याचिकाएं दाखिल की गईं। इस पर कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा तो तत्कालीन यूपीए सरकार के मानव संसाधन मंत्री कपिल सिब्बल ने कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर एन सी एम ई आई के फैसले का समर्थन किया।

बता दें कि मौजूदा केन्द्र की मोदी सरकार ने जामिया के अल्पसंख्यक दर्जे पर 15 जनवरी, 2016 को सवाल उठाने शुरू कर दिए थे।

साल 1920 में महात्मा गांधी ने अंग्रेज सरकार का विरोध करते हुए लोगों से सभी शैक्षणिक संस्थाओं का बायकॉट करने को कहा था। इस पर मुस्लिम राष्ट्रवादी नेताओं द्वारा अलीगढ़ में जामिया मिलिया इस्लामिया का निर्माण किया गया था। बाद में इसे दिल्ली शिफ्ट कर दिया गया और जामिया मिलिया इस्लामिया रजिस्टर्ड सोसाइटी बना कर इसे चलाया गया। साल 1962 में जामिया मिलिया इस्लामिया को डीम्ड यूनिवर्सिटी का दर्जा दिया गया और 1988 में इसे केन्द्रीय यूनिवर्सिटी का दर्जा दे दिया गया।

बीजेपी पर नीतीश का हमला: करप्शन से समझौता नहीं किया तो साम्प्रदायिकता से क्यों करूंगा

बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड अध्यक्ष नीतीश कुमार ने बीजेपी नेताओं को कहा है कि जब उन्होंने भ्रष्टाचार से समझौता नहीं किया तो साम्प्रदायिकता से भी समझौता नहीं करेंगे। उन्होंने साफ तौर पर कहा कि वो वोट की चिंता नहीं करते हैं।

सीएम ने कहा कि वो राज्य की जनता के प्रति जवाबदेह हैं और इसके लिए वो किसी जाति-धर्म के बंधन में नहीं बंध सकते। नीतीश ने कहा कि कुछ लोग जानबूझकर दरभंगा में हुई हत्या को साम्प्रदायिक रंग दे रहे हैं जबकि यह पूरी तरह जमीन विवाद से जुड़ा मामला है। उन्होंने कहा कि जब डी जी पी से इस बारे में पूछा तो उन्हें बताया गया कि यह जमीन विवाद से जुड़ा मामला है। इसके बाद उप मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने इस बारे में ट्वीट कर लोगों को बताया। बावजूद इसके कुछ लोग इसे मोदी जी के नाम पर चौक का नाम रखने की वजह से हुई हत्या बता रहे हैं, जो गलत है।

बता दें कि पिछले दिनों दरभंगा के बाबू भदवा में असामाजिक तत्वों ने एक शख्स की गला काटकर हत्या कर दी थी। इसके खिलाफ बीजेपी समर्थित लोगों ने शनिवार (17 मार्च) को केंद्रीय मंत्री की मौजूदगी में नारेबाजी की थी। शनिवार को गिरिराज सिंह के अलावा बिहार बीजेपी के अध्यक्ष नित्यानंद राय भी दरभंगा पहुंचे थे। ये नेता राज्य सरकार के दावों से उलट मामले को साम्प्रदायिक रंग देने की कोशिशों में जुटे थे। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह तो एक वीडियो में नारेबाजी कर रही भीड़ को यह कहते हुए दिखाई दे रहे थे कि डी एस पी मुर्दाबाद बोलो।

बता दें कि महागठबंधन से हटकर एनडीए की सरकार बनाने के बाद पहली बार नीतीश कुमार ने बीजेपी नेताओं के खिलाफ मुंह खोला है। बिहार उप चुनावों में हार पर भी नीतीश कुमार ने कहा कि बीजेपी के दबाव की वजह से ही उन्होंने जहानाबाद विधान सभा सीट पर प्रत्याशी उतारा था। उन्होंने कहा कि सामान्यत: मौत से खाली हुई सीटों पर वो अपने उम्मीदवार खड़ा करने के पक्ष में नहीं थे, लेकिन बीजेपी बहुत ज्यादा उत्साहित थी और दबाव देकर हमसे उम्मीदवार खड़ा करवाया। उन्होंने कहा कि उस समय हमने सोचा कि अगर बीजेपी के दबाव के बावजूद उम्मीदवार खड़ा नहीं करते हैं तो कल अगर कुछ परिणाम आया तो उसका दोष हमारे ऊपर ही मढ़ा जाएगा। इसलिए हार जानते हुए भी हमने उम्मीदवार उतारा।

राहुल गांधी से मुलाकात के बाद एनडीए का पूर्व सहयोगी यूपीए में शामिल हुआ

एनडीए का साथ एक और सहयोगी पार्टी ने वर्ष 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले छोड़ दिया है। स्‍वाभिमानी शेतकारी संगठन (एस एस एस) ने नरेंद्र मोदी की सरकार पर किसानों से किए गए वादे को पूरा नहीं करने का आरोप लगाया है।

स्‍वाभिमानी शेतकारी संगठन के नेता राजू शेट्टी ने कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेता और महाराष्‍ट्र के पूर्व मुख्‍यमंत्री अशोक चह्वाण के साथ सोमवार (19 मार्च) को नई दिल्‍ली में कांग्रेस अध्‍यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की थी। इसके बाद उन्‍होंने कांग्रेस की अगुआई वाले यूपीए में शामिल होने की घोषणा कर दी।

राहुल से मिलने के बाद स्‍वाभिमानी शेतकारी संगठन के नेता ने कहा, ''बीजेपी ने भारत के किसानों के साथ धोखा किया है। मैं मोदी के उस वादे के बाद एनडीए में शामिल हुआ था, जिसमें उन्‍होंने स्‍वामीनाथन आयोग की सिफारिशों को लागू करने की बात कही थी। वादों पर अमल को तो भूल जाइए, उन्‍होंने तो फसलों की कीमतें भी कम कर दीं। इसलिए किसानों का नेता होने के नाते मैं यह सुनिश्चित करूंगा कि यह पार्टी (बीजेपी) दोबारा सत्‍ता में वापसी न करे।''

स्‍वाभिमानी शेतकारी संगठन और एनडीए के रिश्‍तों में पिछले साल अक्‍टूबर में ही तल्‍खी आ गई थी। एस एस एस ने उसी वक्‍त एनडीए से अलग होने की घोषणा कर दी थी। शेट्टी की पार्टी कांग्रेस के नेतृत्‍व में निकाली गई संविधान बचाओ रैली में भी शामिल हुई थी।

राजू शेट्टी पिछले कुछ महीनों से लगातार सरकार को निशाना बना रहे हैं। खासकर किसानों की स्थिति को लेकर हमलावर रहे हैं। कुछ दिनों पहले ही महाराष्‍ट्र के हजारों किसान अपनी मांग के साथ मुंबई पहुंच गए थे। उन्‍होंने मांगें नहीं माने जाने पर विधानसभा का घेराव करने की घोषणा की थी। ये किसान नासिक से पैदल चलकर मुंबई पहुंचे थे। फड़नवीस सरकार को किसानों की अधिकतर मांगों को मानना पड़ा था। इसके बाद जाकर किसानों का प्रदर्शन थमा था। किसानों के आंदोलन को कई राजनीतिक दलों ने भी समर्थन दिया था।

आंध्र प्रदेश को विशेष राज्‍य का दर्जा देने के मुद्दे पर तेलुगू देशम पार्टी (टी डी पी) ने कुछ दिनों पहले ही एनडीए से नाता तोड़ने की घोषणा की थी। विशेष दर्जे को लेकर आंध्र की विपक्षी पार्टी वाई एस आर कांग्रेस ने नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ अविश्‍वास प्रस्‍ताव लाने का नोटिस दिया था। शुरुआत में एनडीए से अलग न होने की बात करने वाले राज्‍य के मुख्‍यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को आखिरकार केंद्र में सत्‍तारूढ़ गठबंधन से अलग होकर अविश्‍वास प्रस्‍ताव का समर्थन करने का फैसला करना पड़ा।

भाजपा को अल्पसंख्यकों के प्रति अपनी धारणा को बदलना होगा : नीतीश कुमार

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सोमवार (19 मार्च, 2018) को कहा कि वे किसी भी गठबंधन के साथ रहें परंतु उनकी मूल अवधारणा में परिवर्तन नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि वे भ्रष्टाचार और समाज को तोड़ने व विभाजित करने वाली नीति से समझौता नहीं कर सकते। नीतीश कुमार ने पिछले साल जुलाई में भाजपा से गठबंधन  करके सरकार बनाई थी।

सीएम नीतीश ने यह बातें हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा सेक्युलर के एक घड़े के पूर्व मंत्री नरेंद्र सिंह के नेतृत्व में जदयू में विलय के अवसर कहीं।

केंद्रीय मंत्री राम विलास पासवान के एक बयान का समर्थन करते हुए नीतीश कुमार ने कहा कि, ''भाजपा को अल्पसंख्यकों के प्रति अपनी धारणा को बदलना होगा। पासवान बहुत सीनियर नेता है। उन्होंने बहुत सोचने के बाद यह बात कही होगी।''

पटना में संवाददाताओं से चर्चा करते हुए उन्होंने कई मामलों को लेकर बिना किसी का नाम लिए इशारों ही इशारों में विपक्षियों पर निशाना साधा। बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग पर उन्होंने कहा कि बिहार को विशेष राज्य का दर्जा देने की मांग को हम लोगों ने एक दिन के लिए भी नहीं छोड़ा है।

उन्होंने इस मांग को 10 साल पुरानी मांग बताते हुए राष्ट्रीय जनता दल (राजद) पर तंज कसते हुए कहा, ''जो लोग आज तक कभी इसकी चर्चा तक नहीं करते थे, वे भी आज मुझसे विशेष राज्य के दर्जे को लेकर प्रश्न पूछते हैं। आंध्र प्रदेश के लिए यह मांग नई हो सकती है, परंतु बिहार के लिए यह पुरानी मांग है।''

नीतीश ने कहा, ''मैं वोट की नहीं, लोगों की चिंता करता हूं। मैं प्रारंभ से ही सामाजिक सद्भाव का पक्षधर रहा हूं। मेरे 12 साल के काम इसका प्रमाण हैं।''

मुख्यमंत्री नीतीश ने दावा करते हुए कहा कि हम लोगों ने 12 सालों में अल्पसंख्यकों के कल्याण के लिए जो काम किए हैं, इससे पहले यहां कभी नहीं हुए थे। करोड़ों रुपए के चारा घोटाला से जुडे दुमका कोषागार से अवैध निकासी के एक मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद को दोषी तथा पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र को बरी करार दिए जाने के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि अदालत के निर्णय पर वे प्रतिक्रिया नहीं व्यक्त करते।

एक अंग्रेजी दैनिक में छपी इस खबर के बारे में पूछने पर कि सीबीआई की लीगल विंग के यह कहने के बावजूद कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद के रेल मंत्रित्वकाल के दौरान होटल के बदले भूखंड मामले में लालू के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता, सीबीआई ने लालू के खिलाफ मामला दर्ज किया, नीतीश ने कहा कि ये बात तो वे पहले भी कह रहे थे। उन्होंने कहा कि महागठबंधन (जदयू-राजद-कांग्रेस) के समय हमने उनसे कहा था कि इस बारे में मामला स्पष्ट कर दीजिए। यह कहना कि हमें फंसाया जा रहा है समर्थकों के सामने तो चल सकता है, लेकिन आम लोगों के बीच सही संदेश जाना चाहिए।

उन्होंने कहा कि हमने उनसे बार-बार यह बात कही और कहा कि ऐसी स्थिति में जदयू भी उनका पूरे तौर पर समर्थन करेगा, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। इसी वजह से हमें राजद और कांग्रेस से नाता तोड़ने का निर्णय लेना पड़ा।

रेलवे में नौकरी की मांग कर रहे छात्रों का आंदोलन खत्म

भारतीय रेलवे में नौकरी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने अपना आंदोलन खत्म कर दिया है। हालांकि प्रदर्शनकारी छात्र अभी भी घटनास्थल पर मौजूद हैं, लेकिन पुलिस और जी आर पी द्वारा रेल यातायात सामान्य करा दिया गया है।

आज सुबह सैकड़ों छात्रों ने मुंबई की लाइफ लाइन कही जाने वाली लोकल ट्रेन को रोक दिया था। छात्र रेलवे अप्रेंटिस हैं और रेलवे में नौकरी की मांग को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे थे। छात्रों के विरोध के चलते लोकल ट्रेन में सफर करने वाले लोखों लोग प्रभावित हुए। प्रदर्शनकारी छात्रों ने माटुंगा से छत्रपति शिवाजी टर्मिनस के बीच रेलवे ट्रैक जाम कर दिया था, जिससे कुर्ला से आगे लोकल ट्रेन की आवाजाही पूरी तरह से ठप हो गई थी। फिलहाल पुलिस और जी आर पी ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को सामान्य कर दिया है और ट्रैक पर लोकल ट्रेन की आवाजाही शुरु हो गई है।

खबर के अनुसार, प्रदर्शनकारी छात्र सुबह 7 बजे से रेलवे ट्रैक पर जमे थे, जिससे आम लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ा। ऑफिस या अन्य जरुरी काम के लिए निकले लोग रेलवे लाइन पर ही अटके रहे, लेकिन अब आंदोलन खत्म होने के बाद स्थिति सामान्य हो गई है। बताया जा रहा है कि पहले पुलिस ने प्रदर्शनकारी छात्रों को हटाने के लिए हल्का लाठी चार्ज भी किया, लेकिन इसमें भी पुलिस को सफलता नहीं मिली और प्रदर्शनकारी छात्र रेलवे ट्रैक पर जमे रहे। जिस कारण मुंबई के कुर्ला स्टेशन से आगे कोई ट्रेन आगे नहीं बढ़ पा रही थी।

उल्लेखनीय है कि रेलवे ने हाल ही में बड़े स्तर पर भर्तियां निकालने की घोषणा की थी। रेलवे सेफ्टी को मजबूत करने के लिए अकेले ग्रुप सी और डी में सरकार ने करीब 89000 नई भर्तियां करने का ऐलान किया था। नई भर्तियों की घोषणा पिछले साल सितंबर माह में तब की गई थी, जब रेल मंत्री पीयूष गोयल ने अपना कार्यभार संभाला था।

रेलवे हर साल करीब 5-10 हजार नई भर्तियां करता है। प्रदर्शन कर रहे रेलवे अप्रेंटिस का कहना है कि अप्रेंटिस के लिए लागू 20 प्रतिशत नौकरी का कोटा खत्म किया जाए। रेलवे अप्रेंटिसों का ये भी आरोप है कि पिछले 4 सालों से अप्रेंटिस की रेलवे में भर्ती नहीं की गई है।

गौरतलब है कि जहां एक तरफ मुंबई में छात्र रेलवे में नौकरी को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ दिल्ली में छात्र एस एस सी ऑफिस के बाहर पिछले 2 हफ्ते से भी ज्यादा समय से विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। छात्रों की मांग है कि एस एस सी के लीक पेपरों की जांच की जाए।

एस एस सी के खिलाफ विरोध प्रदर्शन कर रहे छात्रों को राजनैतिक समर्थन भी मिल रहा है। राहुल गांधी समेत कई नेता धरना स्थल पर पहुंचकर छात्रों को समर्थन दे चुके हैं।