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भारत में केंद्र सरकार ने युवाओं को नौकरी देने का कोई लक्ष्य नहीं तय किया है : केंद्रीय श्रम मंत्री

केंद्र सरकार ने युवाओं को नौकरी देने का कोई लक्ष्य नहीं तय किया है। भारत के केंद्रीय श्रम मंत्री संतोष कुमार गंगवार ने लोकसभा में एक सवाल के जवाब में लिखित रूप से यह बात कही है। इंडियन नेशनल लोकदल के सांसद दुष्यंत चौटाला के सवाल पर उन्होंने लोकसभा को यह जानकारी दी।

सांसद चौटाला ने पिछले तीन साल में रोजगार सृजन से जुड़े सवाल पूछे थे। जिस पर मंत्री गंगवार ने कहा, सरकार ने कोई टारगेट नहीं तय किया है। लेकिन रोजगार पैदा करना सरकार की प्राथमिकता है और इसको लेकर सरकार गंभीर भी है।

केंद्रीय श्रम मंत्री ने अपने जवाब में बताया कि सरकार ने प्राइवेट सेक्टर को प्रोत्साहन देकर नौकरियों के सृजन के लिए कदम उठाए हैं। प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्रामीण कौशल योजना में पर्याप्त निवेश कर रोजगार को बढ़ावा दिया जा रहा है।

सांसद चौटाला ने इंटरनेशनल लेबर आर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि भारत में बेरोजगारी 2017 में 18.3 के मुकाबले बढ़कर 18.6 हो गई , वहीं 2019 में यह बढ़कर 18.9 हो जाएगी। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसी अवधि के दौरान बेरोजदारी दर 3.5 प्रतिशत पर स्थिर रहने की उम्मीद है।

सांसद चौटाला ने सरकार से पिछले तीन साल में पैदा हुए रोजगार के आंकड़े मांगने के साथ इस दिशा में किए गए प्रयासों की जानकारी मांगी।

केंद्र सरकार ने 2016-17 और 2017-18 में बेरोजगारी के आंकड़े नहीं दिए।

गंगवार ने पी एम ई जी पी के तहत 1017-18 में कम नौकरियां मिलने की बात स्वीकार की। आंकड़ों के मुताबिक, इस योजना के तहत जहां 2016-17 में 4.07 लाख लोगों को रोजगार मिला, वहीं 2017-18 में यह आंकड़ा गिरकर 2.31 लाख तक पहुंच गया।

सरकारी आंकड़ों से जाहिर हुआ कि कौशल प्रशिक्षण और प्लेसमेंट में मंदी का दौर है।

नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री ने राहुल की बात का समर्थन किया, कहा - व्यापक बेरोजगारी से अंत हो सकता है भारत गाथा का

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने 19 मार्च को कहा कि नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन ने भारत में व्यापक बेरोजगारी के बारे में वहीं बातें कही हैं जो पार्टी पिछले दो साल से कह रही है तथा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इससे इनकार करते आये हैं।

राहुल ने आज ट्वीट कर कहा, ''नोबेल पुरस्कार से सम्मानित अर्थशास्त्री पॉल क्रुगमैन ने उस बात की पुष्टि की है जिसे हम पिछले दो साल से कहते आ रहे हैं। भारत के समक्ष व्यापक बेरोजगारी सबसे बड़ी चुनौती है।'' उन्होंने कहा, ''दुर्भाग्यवश हमारे प्रधानमंत्री ऐसे हैं जो लगातार इंकार करते रहते हैं। इस बात का डर है कि उनके 'अच्छे दिन' को कहीं इससे नुकसान न पहुंचे।''

राहुल ने अपने इस ट्वीट के साथ एक अंग्रेजी अखबार की खबर टैग की, जिसका शीर्षक है, ''नोबेल विजेता पॉल क्रुगमैन ने आगाह किया कि व्यापक बेरोजगारी से अंत हो सकता है भारत गाथा का।''

राहुल ने कल संपन्न हुए पार्टी के 84वें महाधिवेशन में अपने समापन भाषण को देश के युवाओ में व्यापक स्तर पर बेरोजगारी पर केन्द्रित रखा और इसे लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार पर तीखा हमला बोला।

राहुल ने कहा था कि पीएम मोदी और भाजपा ने पिछले चार साल में लोगों से सिर्फ झूठ बोला है। उन्होंने 2 करोड़ लोगों को सालाना नौकरी देने की बात कही, किसानों की आय दोगुनी करने की बात कही, लेकिन सब झूठ साबित हुए।

उन्होंने पीएम मोदी को भ्रष्टाचार का पर्याय बताया और बीजेपी को कौरव करार दिया। लगभग एक घंटे लंबे भाषण में राहुल गांधी ने बीजेपी और बीजेपी अध्यक्ष पर हमला किया। राहुल ने कहा कि लोग हत्या के आरोपी एक शख्स को बीजेपी के अध्यक्ष के रूप में स्वीकार कर लेंगे, लेकिन वही लोग इसी बात को कांग्रेस में स्वीकार नहीं करेंगे क्योंकि वे लोग कांग्रेस पार्टी को आदर की दृष्टि से देखते हैं।

लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने की सिफारिश मंजूर

कर्नाटक में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस ने बड़ा दांव खेला है। सिद्धारमैया सरकार ने लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने की सिफारिश मंजूर कर ली है। लिंगायत समुदाय वर्षों से हिंदू धर्म से अलग होने की मांग करता रहा है। समुदाय की मांगों पर विचार के लिए नागमोहन दास समिति गठित की गई थी। राज्य कैबिनेट ने समिति की सिफारिशों को स्वीकार कर लिया है। कर्नाटक ने इस प्रस्ताव को अंतिम स्वीकृति के लिए केंद्र के पास भेजा है।

राज्य की कांग्रेस सरकार ने लिंगायत समुदाय को अलग धर्म का दर्जा देने का फैसला ऐसे समय किया है, जब अप्रैल-मई में विधानसभा के चुनाव होने हैं। लिंगायत समुदाय दशकों से भाजपा का समर्थन करता रहा है। हिंदू से अलग धर्म का दर्जा देने पर राज्य में भाजपा का मजबूत वोट बैंक खिसक सकता है। लिंगायत को कर्नाटक में फिलहाल ओबीसी का दर्जा मिला हुआ है। कर्नाटक में इस समुदाय की आबादी 10 से 17 फीसद है। लिंगायत का विधानसभा की तकरीबन 100 सीटों पर प्रभाव माना जाता है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता बी एस येदियुरप्पा इसी समुदाय से आते हैं। शिवराज सिंह चौहान भी लिंगायत हैं।

लिंगायत समुदाय के प्रतिनिधि रविवार (18 मार्च) को मुख्यमंत्री से मिलकर समिति की सिफारिशों को लागू करने की मांग की थी, जिसे सोमवार (19 मार्च) को स्वीकार कर लिया।

भाजपा लिंगायत को हिंदू धर्म से अलग करने की मांग का विरोध करती रही है। येदियुरप्पा कांग्रेस पर लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देकर समुदाय में फूट डालने की कोशिश करने का आरोप लगाते रहे हैं।

अखिल भारत वीरशिवा महासभा ने इस मांग को लेकर पिछले साल 15 जुलाई में एक सभा का आयोजन किया था। इसके बाद संस्था ने मुख्यमंत्री सिद्धारमैया को ज्ञापन सौंप कर लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा देने की मांग की थी।

महासभा पूर्व में दो बार केंद्र से ऐसी मांग कर चुकी है, लेकिन दोनों बार इसे ठुकरा दिया गया था। पिछले साल ही 20 जुलाई को लिंगायत समुदाय ने बीदर में जबरदस्त रैली कर भाजपा और कांग्रेस दोनों को चौंका दिया था।

अलग धर्म का दर्जा देने का अंतिम अधिकार केंद्र सरकार के पास है। राज्य सरकारें इसको लेकर सिर्फ अनुशंसा कर सकती हैं। लिंगायत को अलग धर्म का दर्जा मिलने पर समुदाय को मौलिक अधिकारों (अनुच्छेद 25-28) के तहत अल्पसंख्यक का दर्जा भी मिल सकता है। इसके बाद लिंगायत समुदाय अपना शिक्षण संस्थान भी खोल सकता है। फिलहाल मुस्लिम, सिख, ईसाई, बौद्ध, पारसी और जैन को अल्पसंख्यक का दर्जा हासिल है।

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार केदारनाथ सिंह नहीं रहे

पिछले कई दिनों से बीमार चल रहे हिंदी के वरिष्ठ साहित्यकार केदारनाथ सिंह का आज शाम दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में निधन हो गया। उन्हें पेट में संक्रमण की शिकायत पर एम्स में भर्ती किया गया था, जहां इलाज के दौरान आज (सोमवार) शाम तकरीबन 5 बजकर 40 मिनट पर उन्होंने अंतिम सांस ली।

ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित केदारनाथ सिंह के जाने से हिंदी साहित्यकारों और पाठकों के बीच शोक व्याप्त है। 1934 में उत्तर प्रदेश के बलिया जिले में जन्में केदारनाथ सिंह ने बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से 1956 में हिंदी में एम ए और 1964 में पी एच डी की उपाधि प्राप्त की थी। वह जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में भारतीय भाषा केंद्र में आचार्य और अध्यक्ष पद पर भी सेवारत रह चुके थे।

केदारनाथ सिंह नई कविता के अग्रणी कवियों में शुमार किए जाते हैं। अज्ञेय द्वारा संपादित तीसरा सप्तक के कवियों में शामिल केदारनाथ सिंह को 2013 में साहित्य के सबसे बड़े सम्मान ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया था। वह यह पुरस्कार पाने वाले हिंदी के 10 वें लेखक थे। इसके अलावा वह साहित्य अकादमी पुरस्कार, व्यास सम्मान, जीवन भारती सम्मान, दिनकर पुरस्कार, कुमारन आशान पुरस्कार और मैथिली शरण गुप्त पुरस्कार से सम्मानित किए जा चुके हैं।

अभी बिल्कुल अभी, जमीन पक रही है यहां से देखो, अकाल में सारस आदि उनकी प्रमुख रचनाएं काफी लोकप्रिय रहीं।

भागलपुर में सांप्रदायिक तनाव : केंद्रीय मंत्री के बेटे पर एफआईआर, इंटरनेट बंद

भागलपुर में शनिवार शाम फैले सांप्रदायिक तनाव के बाद नाथनगर इलाके में फिलहाल हिंसा की कोई घटना सामने नहीं आई है। हालांकि, हालात अभी भी सामान्य नहीं हो सके हैं। प्रशासन और सामाजिक संगठनों की ओर से लगातार अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की जा रही है।

उधर, पुलिस ने इस मामले में दो एफ आई आर दर्ज की हैं। एक मामला तो बिना इजाजत जुलूस निकालने का है। वहीं, दूसरा केस उपद्रव मचाने का है। पहले मामले में आठ लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया है। इनके नाम हैं - अरिजीत चौबे, देवकुमार पांडे, अनुपलाल साह, प्रणव साह, अभय घोष सोनू, प्रमोद शर्मा, निरंजन सिंह, संजय भट्ट। इन पर बगैर इजाजत जुलूस निकालने का आरोप है।

अरिजित चौबे केंद्रीय मंत्री अश्विनी चौबे का बेटा है। अरिजित ने कहा कि एस एस पी को सूचना देकर जुलूस निकाला गया। यदि यह गैरकानूनी था तो पुलिस ने रोका क्यों नहीं? उसके मुताबिक, भागलपुर का माहौल बिगाड़ने की कोशिश की गई है, जिसे प्रशासन ने नाकाम कर दिया। अब ऐसे लोगों की पहचान कर कार्रवाई की जानी चाहिए।

इस मामले में दूसरी एफ आई आर उपद्रव मचाने वाले पांच सौ अज्ञात लोगों के खिलाफ लिखी गई है। इनकी शिनाख्त कर धड़पकड़ की जा रही है। कमिश्नर, आई जी, डी आई जी, डी एम, एस एस पी, डी डी सी, एस डी ओ, नगर आयुक्त जैसे अधिकारी नाथनगर में कैंप कर रहे हैं।

हिंदू नव वर्ष के मौके पर निकाले गए मोटरसाइकिल जुलूस के दौरान यहां दो समुदायों के बीच झड़प हो गई थी। इसमें कुछ पुलिसवालों समेत कई लोग घायल हो गए थे। रिपोर्ट के मुताबिक, उपद्रवियों के पथराव में आठ पुलिसकर्मियों समेत डेढ़ दर्जन लोगों को चोटें आईं थीं। पुलिस के एक जवान को गोली भी लगी, जिसका इलाज जवाहरलाल नेहरू भागलपुर मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। बताया जा रहा है कि भीड़ में से कुछ लोगों ने गोली और बम से भी हमला किया।

बता दें कि इलाके का माहौल उस वक्त बिगड़ा है, जब कुछ दिन बाद ही रामनवमी मनाई जानी है।

उधर, हिंसा की घटना में जिन 23 दुकानों के सामानों को नुकसान पहुंचा है, सोमवार को उनके मालिक अपनी शिकायत लिखवाने थाने पहुंचे। डीएम की ओर से यह आश्वासन दिया गया है कि उनके नुकसान का आकलन कराकर मुआवजा दिया जाएगा।

वहीं, रेलवे स्टेशन और नाथनगर की ओर से गुजरने वाली ट्रेनों में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। जी आर पी और आर पी एफ के जवान गश्त करते देखे गए।

प्रशासन की कोशिश है कि जनजीवन जल्द से जल्द सामान्य किया जा सके। वहीं, ऐहतियात के तौर पर दफा 144 लागू है। हालात को देखते हुए 25 से बढ़ाकर 37 जगहों पर मजिस्ट्रेट के साथ सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती की गई है।

सोमवार को ही, पूरे जिले में इंटरनेट सेवा बंद कर दी गई ताकि अफवाहों पर काबू पाया जा सके। एस एस पी मनोज कुमार ने हालात पूरी तरह काबू में बताया है। प्रशासन के आलाधिकारियों ने दोनों पक्षों के लोगों के साथ बैठक कर शांति बहाल करने की अपील की है।

सोमवार को नाथनगर में सड़कों पर लोगों की आवाजाही नजर आई। लोग घरों से अपनी जरूरत का सामान खरीदने बाहर निकले। बाजार आम दिनों की तरह खुले नजर आए।

राज ठाकरे ने 2019 में 'मोदी मुक्त भारत' का ऐलान किया

महाराष्ट्र नव निर्माण सेना के अध्यक्ष राज ठाकरे ने सभी राजनीतिक दलों से मिलकर 'मोदी मुक्त भारत' बनाने की अपील की है। ठाकरे का यह बयान मराठा छत्रप और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार से मिलने के बाद आया है।

शरद पवार भी गैर बीजेपी दलों का गठबंधन चाहते हैं और देश से नरेंद्र मोदी की सरकार उखाड़ फेंकना चाहते हैं। इसके लिए शरद पवार की पार्टी और कांग्रेस के बीच गठबंधन के प्रयास चल रहे हैं। 13 मार्च को दिल्ली में आयोजित सोनिया गांधी के रात्रि भोज में 20 दलों के नेता शामिल हुए थे। इसमें शरद पवार भी शामिल थे। इसी महीने के अंत में शरद पवार भी दिल्ली में 'मोदी मुक्त भारत' की रणनीति पर समान विचारधारा वाली पार्टियों के साथ बैठक करने वाले हैं।

राज ठाकरे ने गुड़ी पड़वा के मौके पर मुंबई के शिवाजी पार्क में पार्टी कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आज की तारीख में बीजेपी के पास एकसूत्री लक्ष्य है कि वो कैसे राम मंदिर के नाम पर देश में दंगा फैलाए ताकि 2019 का लोकसभा चुनाव जीत सके।

ठाकरे की यह रैली राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर आए राजनीतिक समीकरणों में बदलाव को समेटे हुए था। एम एन एस बने 12 साल हो गए। इस दौरान पार्टी ने कभी भी खुलकर कांग्रेस का समर्थन नहीं किया, लेकिन अब गैर बीजेपी दलों के गठबंधन को समर्थन देने के रास्ते पर चल पड़ी है, जिसकी तत्कालीन अगुवाई कांग्रेस कर रही है।

ठाकरे ने कहा कि 2014 में वे लोग मोदी जी के साथ खड़े थे और कांग्रेस मुक्त भारत बनाना चाहते थे, लेकिन मोदी सरकार के चार साल बीत जाने के बाद अब महसूस हो रहा है कि मोदी मुक्त भारत बनाया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार ने देश को बदलने के कई वादे किए थे, लेकिन सभी मोर्चों पर नाकाम रही।

उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार एडॉल्फ हिटलर की किताब पढ़कर मीडिया और ज्यूडिशियरी की आवाज दबाना चाहती है। उन्होंने कहा कि क्या यह आपातकाल से कम है? मोदी सरकार पर हल्ला बोलते हुए राज ठाकरे ने कहा कि नोटबंदी आजादी के बाद का अब तक का सबसे बड़ा घोटाला है।

ठाकरे ने यह भी कहा कि सरकार ने जानबूझकर राफेल डील पर चुप्पी साधी है। उन्होंने कहा कि अंबानी को नागपुर में रक्षा उत्पादन के लिए जमीन दी गई है। सी एम देवेंद्र फड़ऩवीस और केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी अंबानी की इस कंपनी के भूमि पूजन में मौजूद थे, मगर यह कहते फिर रहे हैं कि उन्हें नहीं पता कि राफेल की सहयोगी कंपनी कौन है? उन्होंने आरोप लगाया कि बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट के जरिए भी मोदी महाराष्ट्र से मुंबई को अलग करना चाहते हैं।

अगले चुनावों में विपक्षी दलों के साथ गठबंधन करने की अपनी दिशा निर्धारित करेगी कांग्रेस

कांग्रेस ने 2019 के आम चुनाव में भाजपा को हराने के लिए आज (17 मार्च को) अपनी रणनीति का खुलासा करते हुए कहा कि वह सभी समान विचारधारा वाले दलों के साथ सहयोग करने के लिए 'साझा व्यावहारिक कार्य प्रणाली विकसित' करेगी। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की अगुवाई में आज दिल्ली में इंदिरा गांधी इंडोर स्टेडियम में पार्टी के 84वें महाधिवेशन के दौरान राजनीतिक प्रस्ताव पेश किये गये।

इस राजनीतिक प्रस्ताव में कांग्रेस ने आगामी आम चुनाव को लेकर अपनी रणनीति का खुलासा किया है। दो दिवसीय महाधिवेशन में इस प्रस्ताव पर विस्तृत विचार-विमर्श कर इसे अपनाया जाएगा। लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे द्वारा पेश किये गये इस प्रस्ताव को बहुत महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि इसी के माध्यम से पार्टी लोकसभा सहित अगले चुनावों में अन्य विपक्षी दलों के साथ गठबंधन करने की अपनी दिशा निर्धारित करेगी।

इस प्रस्ताव में कहा गया है, ''आज हमारे संवैधानिक मूल्यों की बुनियाद पर खतरा पैदा हो गया है। हमारी आजादी खतरे में है। हमारे संस्थानों पर भारी दबाव है और उनकी आजादी से समझौता हो रहा है। हमें, अपने गणराज्य को हर कीमत पर बचाना होगा।'' पार्टी ने इसमें कहा, ''हमारे संविधान के मूल चरित्र की रक्षा के लिए जिस प्रकार के बलिदान की जरूरत होगी, उसे देने के लिए कांग्रेस पार्टी पूरी तरह से तैयार है। हम भाजपा राज के दौरान पतन के कगार पर पहुंच चुकी इस राजनीति की सफाई करेंगे, जो भारत के लोगों से की गयी अपनी प्रतिबद्धताओं को निभाने में नाकाम रही है।''

उत्तर प्रदेश में गोरखपुर एवं फूलपुर के हाल के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस प्रत्याशियों की जमानत नहीं बच पाने के बाद पार्टी पर इस बात का भी दबाव पड़ रहा है कि वह विपक्षी दलों की एकता के लिए अपनी अग्रणी भूमिका के आग्रह छोड़े। वैसे हाल में संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी द्वारा 20 विपक्षी दलों के नेताओं को रात्रिभोज दिये जाने और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी द्वारा राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी प्रमुख शरद पवार से मिलने के लिए जाना, राजनीतिक हल्कों में इस तरह से देखा जा रहा है कि कांग्रेस आम चुनाव से पहले विपक्षी दलों को एकजुट करने के प्रयास तेज करना चाहती है।

कांग्रेस के राजनीतिक प्रस्ताव में लोकसभा एवं राज्य विधानसभाओं के एक साथ चुनाव के प्रस्ताव को 'भाजपा की चाल' बताते हुए इस प्रस्ताव को गलत करार दिया गया है। पार्टी ने इसके लिए राष्ट्रीय सहमति बनाने की आवश्यकता पर बल दिया है। कांग्रेस ने आगाह किया कि एक साथ चुनाव करवाये जाने के गंभीर परिणाम होंगे। पार्टी ने अपने इस प्रस्ताव में चुनाव प्रक्रिया को लेकर भी कुछ आशंकाएं व्यक्त की है। इसमें कहा गया है, ''जनमत के विपरीत परिणामों में हेराफेरी करने के लिए ईवीएम के दुरूपयोग को लेकर राजनीतिक दलों एवं आम लोगों के मन में भारी आशंका है।''

प्रस्ताव में कहा गया कि निर्वाचन प्रक्रिया की विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग को मतपत्र के पुराने तरीके को फिर से लागू करना चाहिए क्योंकि अधिकतर दलों एवं आम लोगों के मन में भारी आशंकाएं हैं। कांग्रेस पार्टी ने इस प्रस्ताव के जरिये न्यायिक प्रणाली में तुरंत सुधारों की जरूरत पर भी बल दिया है। इसमें दलबदल को लेकर भी चिंता जतायी गयी है। इसमें कहा गया है कि पार्टी राजनीतिक स्थिरता कायम करने के लिए धन-बल के खुलेआम दुरूपयोग पर रोक लगाकर दल बदलुओं को छह साल के लिए किसी भी चुनाव लड़ने से वंचित करेगी। प्रस्ताव में महिला सशक्तिकरण, सामाजिक न्याय, दलितों, आदिवासियों और अल्पसंख्यकों पर अत्याचार, आरएसएस, भाजपा, भ्रष्टाचार, आंतरिक एवं बाह्य सुरक्षा तथा आंध्र प्रदेश एवं मीडिया के मुद्दों पर भी चर्चा की गयी।

मोदी सरकार ने पिछले चार साल में कांग्रेस को तबाह करने के लिए सत्ता का अहंकारी खेल खेला है : सोनिया

यूपीए अध्यक्ष सोनिया गांधी ने आज आरोप लगाया कि केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पिछले चार साल में कांग्रेस को तबाह करने के लिए सत्ता का अहंकारी खेल खेला है। उन्होंने कहा कि लेकिन सत्ता के अहंकार के आगे कांग्रेस न तो कभी झुकी है और न कभी झुकेगी। उन्होंने इसके साथ ही कहा कि 2014 का 'सबका साथ, सबका विकास' और 'न खाऊंगा और न खाने दूंगा' का उसका नारा दरअसल सत्ता हथियाने के लिए की गई 'राजनीतिक ड्रामेबाजी' थी।

सोनिया ने कांग्रेस के 84 वें महाधिवेशन को संबोधित करते कहा, ''पिछले चार साल में कांग्रेस को तबाह करने के लिए अहंकार और सत्ता के मद में चूर सरकार ने कोई कसर बाकी नहीं रखी। साम-दाम-दंड-भेद का खुला खेल चल रहा है, लेकिन सत्ता के अहंकार के आगे कांग्रेस न तो कभी झुकी है और न कभी झुकेगी।''

उन्होंने कहा, ''मोदी सरकार के तानाशाहीपूर्ण तौर-तरीकों और संविधान की उपेक्षा, उनकी अहंकारी विचारधारा, विपक्ष के खिलाफ गंभीर मुकदमे लगाना और मीडिया को सताना जैसे षड्यंत्रों का पर्दाफाश करने में कांग्रेस आगे रहकर संघर्ष कर रही है।''

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी और उनके सहयोगियों के भ्रष्टाचार को हम सबूतों के साथ उजागर कर रहे हैं। सोनिया ने कहा, ''आप समझ रहे हैं कि 2014 के 'सबका साथ, सबका विकास' और 'मै न खाऊंगा न खाने दूंगा' जैसे उनके वादे सिर्फ और सिर्फ ड्रामेबाजी और वोट हथियाने की चाल थी।''

उन्होंने कहा कि जिन राज्यों में कांग्रेस सत्ता में नहीं है, वहां पार्टी के कार्यकर्ता हर परेशानी और मुसीबत झेल कर राज्य सरकारों के अपराधों को उजागर करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस पार्टी अन्याय के खिलाफ आवाज उठाती है और संघर्ष करती है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष और हमारे सामने जो चुनौतियां हैं, उनका हमें डटकर मुकाबला करना होगा। उन्होंने कहा कि हमें ऐसा भारत बनाना होगा जो सत्ता के भय और मनमानी से मुक्त हो। जिसमें हर व्यक्ति के जीवन की गरिमा बनी रहे। भ्रष्टाचार मुक्त भारत। प्रतिशोध-पक्षपात मुक्त भारत। इसके लिए हर कांग्रेस जन को एक-एक बलिदान देने के लिए तैयार रहना चाहिए।

सोनिया ने अपने संबोधन में पार्टी नेताओं एवं कार्यकर्ताओं को निजी स्वार्थों एवं आकांक्षाओं से ऊपर उठने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि यह समय निजी अहं और आकांक्षाओं के बारे में सोचने का नहीं है। इस वक्त तो यह देखना है कि एक-एक व्यक्ति पार्टी के लिए क्या कर सकता है। उन्होंने कहा कि पार्टी की जीत पूरे देश की जीत होगी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस एक राजनीतिक दल नहीं है, बल्कि कहीं आगे की सोच है। यह एक आंदोलन रहा है। आज सबसे महत्वपूर्ण यह है कि कांग्रेस अध्यक्ष के नेतृत्व में कांग्रेस वह पार्टी बने जो एक बार फिर हमारे देश का बुनियादी एजेंडा तय करे। कांग्रेस फिर एक बार वह पार्टी बने जो हमारे विविधतापूर्ण समाज की उम्मीदों और आकांक्षाओं की नुमाइंदी करे। वह एक ऐसी पार्टी बने जो फिर से सार्वजनिक एवं राजनीतिक संवाद की सूत्रधार बने।

उन्होंने उम्मीद जतायी कि कुछ माह बाद कर्नाटक विधानसभा में हमारी पार्टी का इतना शानदार प्रदर्शन हो कि वह फिर से देश की राजनीतिक दिशा तय करे। उन्होंने कहा कि गुजरात, राजस्थान और मध्य प्रदेश में हमारे प्रदर्शन से पता लगता है कि जो लोग देश की राजनीति से हमारे अस्तित्व को मिटाना चाहते थे, उन्हें यह भी अंदाजा नहीं था कि लोगों के दिलों में कांग्रेस पार्टी के लिए कितना गहरा सम्मान है। सोनिया ने संप्रग सरकार के दौरान बनाये गये मनरेगा, शिक्षा का अधिकार, भोजन का अधिकार सहित विभिन्न कानूनों एवं कार्यक्रमों का जिक्र करते हुए कहा कि उन्हें यह देखकर दुख और गहरा अफसोस होता है कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की सरकार इन कार्यक्रमों को कमजोर कर रही है। इनकी अनदेखी कर रही है।

टीवी इंटरव्यू छोड़ कर भागे श्री श्री रविशंकर, लोगों को नरेंद्र मोदी की याद आई

आध्यात्मिक गुरु और आर्ट ऑफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर ने बीच में ही एक इंटरव्यू छोड़ दिया। महिला एंकर इस दौरान अयोध्या मसले पर उनसे सवाल कर रही थी। बेहद स्पष्ट तरीके से सवाल पूछा जाना श्री श्री रविशंकर के समर्थकों को नागवार गुजरा। वे इंटरव्यू के बीच में आ गए और दखल देने लगे। रविशंकर इसके बाद अपना माइक हटाकर कैमरे के सामने से चलते बने।

बाद में इंटरव्यू से जुड़ी इस घटना का वीडियो भी सामने आया। इसे लेकर सोशल मीडिया पर लोगों ने कहा कि महिला एंकर ने श्री श्री को अपने सवालों से पानी पिला दिया। कुछ लोगों ने इसे श्री श्री की इंटरव्यू छोड़ने की कला (आर्ट ऑफ लीविंग एन इंटरव्यू) करार दिया। वहीं, कुछ लोगों को इस घटना पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की याद आ गई। एक यूजर ने लिखा, ''अपने गुरु मोदी जी से कुछ तो सीखेंगे यह।''

आपको बता दें कि पीएम मोदी ने भी कुछ साल पहले इसी तरह इंटरव्यू बीच में छोड़ा था। वह तब गुजरात के मुख्यमंत्री थे। सीएनएन आईबीएन के कार्यक्रम 'डेविल्स एडवोकेट' के लिए वरिष्ठ पत्रकार करण थापर उनका इंटरव्यू ले रहे थे। गुजरात दंगों पर गलती महसूस होने और मोदी की छवि मुस्लिम विरोधी होने के सवाल पर तत्कालीन सीएम ने इंटरव्यू छोड़ दिया था। पहले उन्होंने पानी मांगने का बहाना किया। फिर माइक्रोफोन हटाया और कहा कि वह आगे इंटरव्यू नहीं देंगे।

ताजा मामले में 'द वायर हिंदी' ने श्री श्री का इंटरव्यू किया था। एंकर आरफा खानम शेरवानी इसमें श्री श्री से बात कर रही थीं। अचानक एक सवाल पर आर्ट ऑफ लिविंग के समर्थक भड़क गए। वे इंटरव्यू के बीच में दखल देते हुए एंकर के सामने आ पहुंचे और बोले, ''हमें लगता है कि इसे (शो को) यहीं समाप्त कर देना चाहिए।''

बीच में जबरदस्ती श्री श्री रविशंकर के समर्थकों ने कैमरा बंद करा दिया था, जिसके बाद एक महिला समर्थक एंकर के पास आई। उसने एंकर से कहा, ''आप सकारात्मक चीजें पूछिए न।'' आगे श्री श्री से यह पूछे जाने पर कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी आपसे राम मंदिर के मसले पर सहमत हैं, अचानक से श्री श्री के समर्थक आ जाते हैं और इंटरव्यू वहीं खत्म करने के लिए दबाव डालने लगते हैं। खानम ने इसके जवाब में कहा, ''कम से कम मुझे ऑन एयर (कैमरे के सामने) तो इंटरव्यू पूरा करने दीजिए।''

पीएनबी घोटाला: आरोपी ने वित्त मंत्री की वकील बेटी को मोटी फीस दी, इसलिए चुप थे जेटली - राहुल गांधी

कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने पी एन बी घोटाले को लेकर भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली पर बड़ा हमला बोला है। राहुल गांधी ने कहा है कि अब यह सामने आ चुका है कि पी एन बी घोटाले पर वित्त मंत्री की चुप्पी उनकी वकील बेटी को बचाने को लेकर है।

राहुल ने कहा है कि पीएनबी घोटाले के आरोपी ने पी एन बी घोटाले के सार्वजनिक होने से एक महीने पहले ही बतौर फीस वित्त मंत्री की बेटी को मोटी रकम दी। हालांकि राहुल ने कथित रूप से मोटी फी देने वाले आरोपी का नाम सार्वजनिक नहीं किया है।

राहुल गांधी ने एक ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, ''अब यह सामने आ चुका है कि पी एन बी घोटाले पर हमारे वित्त मंत्री की चुप्पी उनकी वकील बेटी को बचाने को लेकर थी, जिन्हें इस घोटाले के सार्वजनिक होने से मात्र एक महीने पहले आरोपी ने मोटी फीस दी थी। जब आरोपी के दूसरे लॉ फर्मों पर सीबीआई द्वारा छापा मारा जा रहा है, तो उसके लॉ फर्म पर क्यों नहीं?'' राहुल गांधी ने इस ट्वीट के साथ #ModiRobsIndia हैशटैग डाला है।

बता दें कि 11 हजार 580 करोड़ रुपये के पी एन बी घोटाले को लेकर कांग्रेस केन्द्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी इस मामले में लगातार पीएम नरेंद्र मोदी और वित्त मंत्री अरुण जेटली से जवाब मांग रहे हैं।

इस मामले में हीरा कारोबारी नीरव मोदी और उसके रिश्तेदार मेहुल चोकसी पर आरोप है कि इन दोनों ने पी एन बी के अधिकारियों से मिलीभगत कर करोड़ों रुपये के लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग ले लिये। इस लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग के आधार पर इन्होंने विदेशी कंपनियों से व्यापार किया।

नीरव मोदी और मेहुल चोकसी ने गोकुलनाथ और मनोज खरट के साथ मिलकर बिना किसी सिक्योरिटी के लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग जारी कराते रहे थे। गोकुलनाथ के सेवानिवृत्त होने के बाद उनकी जगह पर दूसरे अधिकारी को नियुक्त किया गया था, जिन्होंने बिना सिक्योरिटी के लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग जारी करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद घोटाले का भेद खुला था।

5 फरवरी को पी एन बी की शिकायत पर सीबीआई ने नीरव मोदी, उसकी पत्नी, भाई और मेहुल चोकसी के खिलाफ साजिश रचने और धोखा देने का मुकदमा दर्ज किया था। पी एन बी के ब्रैडी हाउस शाखा से रिटायर्ड हुए गोकुलनाथ शेट्टी और मनोज खरट को गिरफ्तार किया जा चुका है, लेकिन नीरव और मेहुल चोकसी भारत से फरार हैं। सीबीआई अबतक नीरव मोदी के कुछ सौ करोड़ की संपत्ति जब्त कर चुकी है। जबकि नीरव मोदी पी एन बी का हज़ारों करोड़ रुपये लूट चुका है।