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सीआईसी का आर्डर - पीएम बताएं, 2014 से 2017 तक अपने साथ किन-किन को ले गए विदेश

भारत में केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने प्रधानमंत्री कार्यालय को पीएम नरेंद्र मोदी की विदेश यात्रा में सरकारी खर्च पर उनके साथ जाने वाले लोगों की सूची देने को कहा है। पीएमओ सुरक्षा कारणों का हवाला देकर लगातार ऐसे लोगों की सूची देने से इनकार करता रहा है। लेकिन, अब मुख्‍य सूचना आयुक्‍त आर के माथुर ने सूचना का अधिकार कानून (आर टी आई) के तहत दाखिल अर्जी पर ऐसे लोगों की सूची सौंपने को कहा है जो वर्ष 2014-2017 के बीच प्रधानमंत्री की आधिकारिक यात्रा पर उनके साथ गए थे। उन्‍होंने सरकार की आपत्तियों को खारिज कर दिया है।

नीरज शर्मा ने आरटीआई कानून के तहत पिछले साल जुलाई में अर्जी दाखिल कर ऐसे लोगों की सूची मांगी थी, लेकिन उन्‍हें लिस्‍ट नहीं सौंपी गई थी। नीरज ने सरकारी खर्च पर पीएम मोदी के साथ जाने वाले निजी कंपनियों के सीईओ, मालिक, पार्टनर और अन्‍य अधिकारियों की सूचना मांगी थी। उन्‍होंने पीएम के साथ जाने वाले प्रतिनिधिमंडल का हिस्‍सा बनने वाले लोगों के चयन के तौर-तरीकों के बारे में भी जानकारी मांगी थी।

नीरज ने जुलाई, 2017 में आरटीआई कानून के तहत आवेदन कर जानकारी मांगी थी। प्रधानमंत्री कार्यालय ने 1 सितंबर, 2017 को जवाब दिया था। इसमें कहा गया था, ''प्रधानमंत्री के देश और विदेश की यात्राओं के बारे में पीएमओ की वेबसाइट पर जानकारी उपलब्‍ध है। उनके साथ जाने वाले प्रतिनिधिमंडल के सदस्‍यों के बारे में सुरक्षा कारणों के चलते जानकारी नहीं दी जा सकती है। आरटीआई कानून, 2005 के तहत भी ऐसी सूचना नहीं देने की व्‍यवस्‍था है।''

सदस्‍यों के चयन के तौर-तरीकों पर पीएमओ ने कुछ नहीं कहा था। प्रधानमंत्री कार्यालय के रवैये से नाखुश नीरज शर्मा ने 29 सितंबर, 2017 को दूसरी बार आवेदन किया था। इसमें उन्‍होंने पीएमओ द्वारा सूचना देने में जानबूझ कर देरी करने का आरोप लगाया था।

उन्‍होंने कहा था कि यदि पीएमओ के पास ऐसी जानकारी नहीं है तो उसे आरटीआई आवेदन को लंबित नहीं रखना चाहिए था। साथ ही , नीरज ने सीआईसी को बताया था कि वेबसाइट पर भी इसके बारे में किसी तरह की जानकारी उपलब्‍ध नहीं थी। मुख्‍य सूचना आयुक्‍त आर के माथुर ने नीरज शर्मा की अर्जी स्‍वीकार करते हुए पीएमओ को सूचना मुहैया कराने का आदेश दिया है।

पीएमओ के रवैये से नाराज नीरज शर्मा ने कहा कि डॉक्‍टर मनमोहन सिंह की सरकार मोदी सरकार से ज्‍यादा पारदर्शी थी।

सरकार के विकास कार्यों को कवर करना एक पत्रकार का नैतिक कर्तव्य : राष्ट्रीय जांच एजेंसी

भारत के जम्मू-कश्मीर में पत्थरबाजी की घटनाओं में शामिल होने के आरोप में कामराम यूसुफ को गिरफ्तार किया गया था। कामरान यूसुफ का दावा है कि वह पेशे से एक पत्रकार है, जबकि राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) ने अपनी चार्जशीट में गुरुवार (15 फरवरी) को कहा है कि उसके खिलाफ मिले साक्ष्यों से पता चलता है कि वह पेशेवर पत्रकार नहीं है और जो साक्ष्य मिले हैं, वे उसके देश विरोधी गतिविधियों के समर्थन को बयान करते हैं।

एनआईए ने सरकार के द्वारा किए जाने वाले विकास कार्यों, अस्पताल या स्कूल के उद्घाटन या किसी सत्तारूढ़ पार्टी के नेता का बयान कवर नहीं करने को साक्ष्यों के तौर पर सूचीबद्ध किया है और कहा है कि ये बातें जाहिर करती है कि कामरान यूसुफ असल पत्रकार नहीं है। एनआईए ने 18 जनवरी को कश्मीर में टेरर फंडिंग और पत्थरबाजी की घटनाओं के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। चार्जशीट में 12 लोगों के नाम हैं, जिनमें कामरान यूसुफ भी शामिल है।

कामरान यूसुफ स्वतंत्र पत्रकार होने का दावा करता है, उसे कथित तौर पर पत्थरबाजी की घटनाओं में शामिल होने के आरोप में 5 सितंबर को गिरफ्तार किया गया था। गुरुवार (15 फरवरी) को अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश तरुण शेरावत के समक्ष एनआईए ने कामरान यूसुफ की जमानत के लिए हुई सुनवाई के दौरान साक्ष्य पेश किए। इस मामले में अगली सुनवाई 19 फरवरी को होनी है।

चार्जशीट में एनआईए ने 'एक पत्रकार के नैतिक कर्तव्य' को सूचीबद्ध किया है और कामराम यूसुफ के पत्रकार होने पर संदेह जताया है। एनआई की तरफ से कहा गया है, ''क्या वह पेशे से पत्रकार या स्ट्रिंगर है, अगर ऐसा है तो वह कम से कम एक नैतिक कर्तव्य निभा चुका होता, जैसे कि अपने अधिकार क्षेत्र में होने वाली गतिविधियों और घटनाओं (अच्छी-बुरी) को कवर करता। उसने कभी सरकार या किसी एजेंसी द्वारा किए जाने वाले विकास कार्यों, अस्पताल, स्कूल भवन, सड़क, पुल का उद्घाटन, किसी सत्तारूढ़ दल का बयान या भारत सरकार या राज्य सरकार द्वारा कोई अन्य सामाजिक या विकासशील गतिविधि को कवर नहीं किया।''

चार्जशीट में सेना और अर्ध-सैनिक बलों के द्वारा कश्मीर घाटी में रक्त-दान शिविर, मुफ्त चिकित्सा जांच, कौशल विकास कार्यक्रम और इफ्तियार पार्टी आयोजन जैसे सामाजिक कार्यों का उल्लेख किया गया है। चार्जशीट में कहा गया है कि कामरान यूसुफ ने शायद ही ऐसी गतिविधियों का कोई वीडियो या तस्वीरें ली हों, उसके मोबाइल और लैपटॉप से मिली तस्वीरें बताती हैं कि उसका इरादा देशद्रोही गतिविधियों को कवर करने और उन तस्वीरों से पैसे कमाने का था। एनआईए के मुताबिक, यूसुफ पेशेवर नहीं था क्योंकि उसने किसी संस्थान से पत्रकारिता का प्रशिक्षण नहीं लिया है। वहीं कोर्ट में यूसुफ की वकील वारीशा फारासात ने कहा कि वह पत्रकार होने के मानदंड पूरा करता है।

पंजाब नेशनल बैंक घोटाला: क्‍या मोदी सरकार सोई हुई थी?

भारत में पंजाब नेशनल बैंक में हजारों करोड़ रुपये के घोटाले पर विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने मोदी सरकार की कड़ी आलोचना की है। कांग्रेस के नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है। कांग्रेस नेता ने केंद्र पर हमला बोलते हुए कहा क‍ि 'लूटो और भाग जाओ' मोदी सरकार का चाल, चरित्र और चेहरा बन गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जुलाई, 2016 में ही वित्‍तीय फर्जीवाड़े की जानकारी दी गई थी, इसके बावजूद क्‍या मोदी सरकार सोई हुई थी?

उन्‍होंने आरोप लगाया कि पंजाब नेशनल बैंक (पी एन बी) के डीजीएम ने सीबीआई के ज्‍वाइंट डायरेक्‍टर को पत्र लिखकर हीरा व्‍यवसायी नीरव मोदी के भारत से भागने की आशंका जताई थी और कार्रवाई की मांग की थी। सुरजेवाला ने सवाल उठाया कि इसके बावजूद नीरव मोदी 11000 करोड़ रुपया लूटकर देश से कैसे भाग गया ? इसके लिए कौन जिम्‍मेदार है? नीरव मोदी को किसका संरक्षण प्राप्‍त है? पूरा सिस्‍टम कैसे बाइपास कर दिया गया? कांग्रेस नेता ने कहा कि प्रधानमंत्री को इस पर जवाब देना चाहिए।

उन्‍होंने इसे 30,000 हजार करोड़ रुपये का घोटाला बताया है। उन्‍होंने कहा कि इसमें पी एन बी के साथ कई अन्‍य बैंकों का पैसा डूबा है।

सुरजेवाला ने सवाल उठाया कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने घोटाले पर कार्रवाई करने में 15 दिन क्‍यों लगाए, जबकि 29-30 जनवरी को ही यह मामला सामने आया गया था? उन्‍होंने पूछा कि इस मामले में पंजाब नेशनल बैंक ने इतनी देरी से केस क्‍यों दर्ज कराया? ईडी ने छापा मारने में 15 दिन क्‍यों लगा दिए? सरकार ने इस मामले को महत्‍व क्‍यों नहीं दिया?

सुरजेवाला ने कहा क‍ि वर्ष 2016 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को नीरव मोदी और मेहुल चौकसी के बारे में जानकारी दी गई थी और पीएम से कार्रवर्इ की मांग भी की गई थी। उनके मुताबिक, पीएमओ ने शिकाय‍त को कार्रवाई के लिए रजिस्‍ट्रार ऑफ कंपनीज के पास भेज दिया था। इसके बावजूद न तो पीएमओ ने कुछ किया और न ही वित्‍त मंत्रालय ने कदम उठाया। इस बीच, छोटे मोदी (नीरव मोदी) 11,000 करोड़ रुपये की चपत लगाकर देश से भाग गए।

सुरजेवाला ने कहा, ''प्रधानमंत्री कार्यालय को घालमेल की सूचना दस्‍तावेज के साथ 26 जुलाई, 2016 को दी गई थी, इसके बावजूद यह सब कैसे चल रहा था? इसमें सुब्रत रॉय, विजय माल्‍या और राजू (सत्‍यम) की तर्ज पर वित्‍तीय फर्जीवाड़े को अंजाम देने का उल्‍लेख किया गया था। शिकायत में मेहुल चौकसी द्वारा भारतीय धन को विदेशों में ले जाने की भी जानकारी दी गई थी। पीएम मोदी से देश को इससे बचाने का भी आग्रह किया गया था।''

भीख मांगना भी भारत के 20 करोड़ लोगों का रोजगार है : आरएसएस

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के इंद्रेश कुमार ने रोजगार पर विवादस्पद बयान दिया है। इंद्रेश कुमार ने कहा कि भीख मांगना भी एक तरह का रोजगार है। पत्रिका अखबार की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इंदौर में 'कलाम का भारत' विषय पर आयोजित एक बैठक के दौरान आरएसएस के इंद्रेश कुमार ने कहा, ''भीख मांगना भी देश के 20 करोड़ लोगों का रोजगार है, जिन्हें किसी ने रोजगार नहीं दिया, उन लोगों को धर्म में रोजगार मिलता है, जिस परिवार में पांच पैसे की कमाई भी न हो, उस परिवार का दिव्यांग और दूसरे सदस्य धार्मिक स्थलों में भीख मांगकर परिवार का गुजारा करता है, ये छोटा काम नहीं है।''

इंद्रेश कुमार 13 फरवरी को एक कार्यक्रम में बोल रहे थे। कार्यक्रम में इंद्रेश कुमार ने भारत के पीएम नरेंद्र मोदी के पकौड़ा वाले बयान पर भी अपनी राय रखी। आरएसएस नेता ने कहा कि पकौड़े तलना देश के 15 करोड़ से ज्यादा लोगों का व्यवसाय है, और इसे हीन काम नहीं समझना चाहिए। उन्होंने कहा कि अगर पकौड़े बेचने को भी लोग हीन काम समझते हैं तो ये बेहद दुखद है।

इंद्रेश कुमार ने कहा कि आप अपने परिवार के साथ निकलते हैं और बाजार में पकौड़े के ठेले पर पकौड़ा खाकर खुश होते हैं, अगर इस काम को भी हीन समझा गया तो हिन्दुस्तान का कुछ नहीं हो सकता है।

बता दें कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि अगर कोई शख्स पकौड़ा बेचकर भी अपनी जिंदगी चलाता है तो यह भी एक किस्म का रोजगार है। कांग्रेस ने पीएम मोदी के इस बयान की कड़ी आलोचना की थी।

इंद्रेश कुमार ने इस कार्यक्रम में कहा कि खेती भी एक बड़ा रोजगार है। इंद्रेश ने कहा कि आप कितने भी बड़े हो जाएं, खेती आप नहीं छोड़ सकते हैं, उन्होंने कहा कि यूनानी, रोमन और ग्रीक सभ्यताओं को खेती को हीन भावना की दृष्टि से देखने की कीमत चुकानी पड़ी। यहां के लोगों के सामने ऐसी स्थिति आ गई थी कि इन्हें जानवर खाना पड़ा।

इंद्रेश कुमार यूनानी, रोमन और ग्रीक सभ्यताओं के माँसाहारी लोगों के बारे ऐसे कह रहे हैं कि जैसे वे लोग शाकाहारी थे। यूनानी, रोमन और ग्रीक सभ्यताओं के लोग पूर्णतया माँसाहारी थे और उनके लिए जानवर खाना आम बात था।

इंद्रेश कुमार को राजनीति और समाज सेवा पर भी अपने विचार व्यक्त करने चाहिए। यह बताना चाहिए कि भारत में जो लोग राजनैतिक दलों और सामाजिक संगठनों से जुड़े हुए है और तथाकथित रूप से जन सेवा और समाज सेवा करने का दावा करते हैं। इस पर इंद्रेश कुमार कुछ कहेंगे।

वास्तव में भारत में राजनीति और समाज सेवा रोजगार बन गया है। क्या इंद्रेश कुमार भारत में राजनीति और समाज सेवा को रोजगार मानते हैं ? इंद्रेश कुमार खुद आरएसएस के लिए काम करते है। उनका खुद का काम रोजगार की श्रेणी में आता है या समाज सेवा की श्रेणी में, यह इंद्रेश कुमार को बताना चाहिए। अगर इंद्रेश कुमार समाज सेवा करते हैं तो उनका परिवार कैसे चलता है? यह बड़ा सवाल है। इसका जवाब इंद्रेश कुमार को देना चाहिए।

नीतीश सरकार के लिए सिर्फ नोट और वोट की अहमियत है : शहीद के परिजन

भारत में जम्मू एवं कश्मीर के श्रीनगर के करन नगर इलाके में आतंकियों से मुकाबला करते हुए बिहार के भोजपुर जिले के पीरो के शहीद मुजाहिद खान को बुधवार (14 फरवरी) को लोगों ने नम आखों से अंतिम विदाई दी। उनके पार्थिव शरीर को पीरो के एक कब्रिस्तान में राजकीय सम्मान के साथ सुपुर्द-ए-खाक किया गया।

शहीद के परिजनों ने राज्य सरकार द्वारा भेजे गए पांच लाख रुपये का चेक लेने से इनकार कर दिया। अपने देश की खातिर प्राण न्योछावर करने वाले मुजाहिद खान के जनाजे में जनसैलाब उमड़ पड़ा। शहीद जवान को अंतिम विदाई देने के लिए उनके गांव के अलावा आसपास के गांवों से हजारों लोग पीरो पहुंचे, लेकिन केंद्र या राज्य सरकार का कोई मंत्री नहीं पहुंचा। बिहार सरकार ने पांच लाख रुपये का चेक जरूर भिजवा दिया।

शहीद मुजाहिद खान के परिजनों का कहना है कि सरकार में शामिल लोगों में कोई संवेदना नहीं है, उनके लिए सिर्फ नोट और वोट की अहमियत है।

पीरो के ऐतिहासिक पड़ाव मैदान में शहीद मुजाहिद के जनाजे की नमाज पढ़ी गई, जिसमें हजारों लोगों ने भाग लिया। पीरो के दुकानदारों ने अपनी दुकानों को बंद रखा और शहीद के जनाजे में शामिल हुए। जनाजे में शामिल लोगों ने 'पाकिस्तान मुर्दाबाद' के नारे भी लगाए।

पीरो गांव निवासी अब्दुल खैर खान राजमिस्त्री का काम किया करते थे। उनका बेटा मुजाहिद बचपन से ही देशभक्ति की भावना से लवरेज था। वह सितंबर 2011 में सीआरपीएफ के 49वीं बटालियन में भर्ती हुआ था।

इस बीच, राज्य सरकार द्वारा भेजी गई पांच लाख रुपये की सहायता राशि लेने से शहीद मुजाहिद खान के परिजनों ने इनकार कर दिया। परिजनों ने बिहार सरकार के मंत्री, सांसद या जिले के किसी वरिष्ठ अधिकारी के शहीद की अंतिम विदाई के मौके पर नहीं आने पर नाराजगी जताई।

शहीद मुजाहिद खान के भाई इम्तियाज ने सहायता राशि पर सवाल उठाते हुए कहा, ''मेरा भाई देश की खातिर शहीद हुआ है, शराब पीकर नहीं मरा है। मुझे अपने भाई पर गर्व है। इतनी बड़ी कुर्बानी देने वाले परिवार को कम से कम सम्मानजनक राशि तो मिले, जिससे शहीद के माता-पिता इज्जत से अपनी जिंदगी गुजार सकें।''

उल्लेखनीय है कि श्रीनगर के करन नगर सीआरपीएफ कैम्प पर सोमवार को हुए आतंकी हमले में आमने-सामने की गोलीबारी में पीरो का लाल मुजाहिद खान शहीद हो गए थे।

मोहन भागवत में हिम्मत है तो डोक़लाम में भेज दे संघियों को : तेजस्वी यादव

बिहार के पूर्व उप मुख्यमंत्री और नेता विपक्ष तेजस्वी यादव ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख मोहन भागवत को चुनौती दी है कि अगर हिम्मत है तो वो संघ के स्वयंसेवकों को डोकलाम भेजें। तेजस्वी की यह प्रतिक्रिया मोहन भागवत के उस बयान के बाद आई है जिसमें भागवत ने कहा था कि सेना को युद्ध के लिए तैयार होने में छह महीने लग सकते हैं, लेकिन आरएसएस के कार्यकर्ता तीन दिन में ही तैयार हो सकते हैं।

तेजस्वी यादव ने इसी पर प्रतिक्रिया जताते हुए ट्विटर पर लिखा है, ''मोहन भागवत में हिम्मत है तो डोक़लाम में भेज दे संघियों को। क्यों बिल में छुपे है? चीनी हमारे देश में घुसे हुए है। पाकिस्तानी प्रतिदिन हमला करते है। सेना और सैनिकों का अपमान बंद कर अपनी निक्कर गैंग को वहाँ भेजे। थूक के पकौड़े ना उतारे।''

अपने दूसरे ट्वीट में तेजस्वी ने लिखा है, ''किसी एक संघी का नाम बताओ जो सीमा पर शहीद हुआ हो या उसके परिवार से कोई शहीद हुआ हो। सेना का अपमान करना बंद करों। संघियों का देश को आज़ाद कराने में नहीं, ग़ुलाम रखने में योगदान था।'' #ApologiseRSS

बता दें कि रविवार (11 फरवरी) को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने बिहार के मुज्फ्फरपुर में कहा था कि अगर संविधान और कानून इजाजत देगा तो हम तीन दिन के अंदर स्वयंसेवकों को तैयार कर सीमा पर युद्ध के लिए तैनात कर सकते हैं, जबकि सेना को तैयार होने में छह महीने का वक्त लगता है। उन्होंने कहा था कि आएएसएस में अनुशासन है जिसकी वजह से ही ऐसा संभव हो सकता है।

सवाल उठता है कि मोहन भागवत किस हैसियत से भारतीय सेना को चुनौती दे रहे हैं ? जब भारतीय सेना को तैयार होने में छह महीने का वक्त लगता है तो कैसे आरएसएस तीन दिन के अंदर स्वयंसेवकों को तैयार कर सीमा पर युद्ध के लिए तैनात कर सकते हैं ? इसका जवाब मोहन भागवत को देना होगा। मोहन भागवत का कहना है कि आरएसएस में अनुशासन है तो क्या भारतीय सेना में अनुशासन नहीं है ? मोहन भागवत के बयान का क्या अर्थ निकाला जाये ? मोहन भागवत ने काफी गंभीर बयान दिया है। इसे हल्के में नहीं लिया जा सकता। क्या यह माना जाये कि आरएसएस ने भारतीय सेना के सामानांतर अपनी निजी सशस्त्र सेना तैयार कर ली है इसलिए मोहन भागवत भारतीय सेना को चुनौती दे रहे हैं।

राहुल ने कहा, 24 घंटे में पीएम मोदी 450 लोगों को नौकरी देते हैं, लेकिन चीन 50 हजार

भारत में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर आज (12 फरवरी) फिर निशाना साधा है और कहा है कि वो अपने वादे पूरे करने में असफल रहे हैं।

कर्नाटक के रायचूर में कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि पीएम मोदी ने हरेक साल दो करोड़ लोगों को नौकरी देने का वादा किया था, लेकिन उनके शासनकाल के चार साल के दौरान मात्र 450 लोगों को 24 घंटे में नौकरी मिल पा रही है , जबकि चीन में 24 घंटे में 50 हजार लोगों को नौकरी मिल रही है। राहुल ने नौकरियों के मामले में चीन से तुलना करते हुए कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को मित्र कहने वाले मोदीजी को उनसे प्रेरणा लेनी चाहिए।

बता दें कि अभी तक कर्नाटक विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन वहां कांग्रेस और बीजेपी के बीच आरोप-प्रत्यारोप और राजनीतिक छींटाकशी का दौर जारी है। माना जा रहा है कि कर्नाटक में अप्रैल-मई में चुनाव होने वाले हैं। इस बीच कांग्रेस अध्यक्ष लगातार पीएम मोदी की लगातार आलोचना कर रहे हैं। अभी हाल ही में उन्होंने बेंगलुरू की एक सभा में पीएम मोदी की आलोचना करते हुए आंकड़े गिनाए थे कि पीएम मोदी के वादे और असलियत में कितना फर्क है। कितनी नौकरियां देश में सृजित हुई हैं?

बता दें कि भारत में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार इन दिनों बेरोजगारी के मुद्दे पर चौतरफा घिरी हुई है। विपक्ष जहां पीएम नरेंद्र मोदी पर झूठ बोलने और रोजगार देने के वादे पर लोगों से छल करने का आरोप लगा रही है, वहीं भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के लेबर ब्यूरो ने भी वार्षिक रोजगार-बेरोजगार सर्वे में मोदी सरकार को झटके देने वाले खुलासे किए हैं।

भारत सरकार के श्रम मंत्रालय के लेबर ब्यूरो के सर्वे के मुताबिक, पिछले पांच साल में सबसे ज्यादा बेरोजगारी बढ़ी है। लेबर ब्यूरो ने 1 लाख 56 हजार 563 हाउसहोल्ड का सर्वे किया है, जिसमें पता चला है कि बेरोजगारी की दर पिछले पांच सालों के सर्वोच्च पांच फीसदी पर पहुंच गई है।

मोहन भागवत का बयान भारत की सुरक्षा के लिए खतरा

उत्तर प्रदेश के पूर्व कैबिनेट मंत्री और समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत के सेना को लेकर दिए गए बयान की कड़ी आलोचना की है। आजम खान ने सोमवार (12 फरवरी) को कहा कि अब अच्छा है कि देश के पास डबल आर्मी हो गई।

आजम खान के बयान वाला वीडियो ईटीवी भारत यूपी नाम के यूट्यूब पेज पर शेयर किया गया है। करीब एक मिनट के वीडियो में आजम खान कहते दिख रहे हैं, ''मोहन भागवत का स्वागत करेंगे। बहुत अच्छी बात है। डबल आर्मी हो गई देश के पास। इससे अच्छी बात और क्या हो सकती है। अब जो चीन ने जमीन हथिया रखी है, ये डबल आर्मी से चीन और पाकिस्तान दोनों से निपटने में बड़ी सहूलियत हो जाएगी। बस इतना और बता देते भागवत जी कि जो तीन दिन में वो आर्मी अपनी तैयार कर सकते हैं, उसके पास वो हथियार हैं जो दुश्मनों के पास हैं, तो लड़ाई बढ़िया होगी। अब देश में भी डर पैदा होगा देशवासियों में कि एक प्राइवेट आर्मी भी देश में हो गई है। हम स्वागत करते हैं उसका।''

संविधान के इजाजत देने के सवाल पर आजम बोले, ''जिसकी सरकार उसका संविधान। सरकार के कंट्रोल में आर्मी होती है, अब डबल आर्मी हो गई सरकार के पास। इसमें बुरा मानने की क्या बात है। क्यों बुरा मान रहे हो? स्वागत होना चाहिए, वेलकम होना चाहिए।''

बता दें कि आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार (11 फरवरी) को बिहार के मुज्फ्फरपुर में कहा था, ''हमारा मिलिट्री संगठन नहीं है। मिलिट्री जैसी डिसीप्लिन हमारी है, और अगर देश को जरूरत पड़े और देश का संविधान-कानून कहे, तो सेना तैयार करने को छह-सात महीना लग जाएगा, संघ के स्वयं सेवकों को बोलेंगे, तीन दिन में तैयार होगा। ये हमारी क्षमता है, लेकिन हम मिलिट्री संगठन नहीं हैं, पैरा मिलिट्री भी नहीं हैं, हम तो पारिवारिक संगठन हैं।''

मोहन भागवत के इस बयान पर मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने ट्वीट कर उनकी कड़ी निंदा की थी। उनके अलावा भी मोहन भागवत अपने इस बयान को लेकर आलोचकों के निशाने पर आ गए।

बड़ा सवाल उठता है कि क्या वाक़ई आरएसएस ने भारतीय सेना के सामानांतर अपनी सशस्त्र निजी आर्मी तैयार कर ली है ? अगर ऐसा है तो यह भारत की सुरक्षा के लिए बड़ी खतरनाक बात है। इसकी जाँच होनी चाहिए।

चिदंबरम ने मोदी सरकार से पूछा- क्या हुआ नौकरी का वादा, 'जुमलों की सुनामी' है बजट

भारत में कांग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने राज्यसभा में आज (08 फरवरी) को बजट को 'जुमलों की सुनामी' करार दिया और कहा कि बजट में की गयी घोषणाएं और अर्थव्यवस्था के बारे में किये गये दावे हकीकत से कोसों दूर हैं।

वित्त वर्ष 2018-19 के आम बजट पर चर्चा की शुरूआत करते हुए चिदंबरम ने मोदी सरकार के चौथे बजट को 'जुमलों की सुनामी' करार दिया और मोदी सरकार से 12 सवाल पूछे। चिदंबरम ने पूछा कि आपने हर साल दो करोड़ नौकरियां देने का वादा किया था, उसका क्या हुआ? उन्होंने सरकार से रोजगार की उसकी अपनी परिभाषा बताने और पिछले चार सालों में सृजित रोजगारों की संख्या का खुलासा करने की मांग करते हुये पूछा कि क्या सरकार आईएलओ को पकौड़ा बेचने को भी रोजगार की परिभाषा में शामिल करने का सुझाव देगी?

सत्ता पक्ष के सदस्यों के भारी शोर शराबे के बीच चिदंबरम ने सरकार पर बीते चार सालों से सिर्फ जुमलों की बारिश करने का आरोप लगाया। उन्होंने बजट की घोषणाओं और अर्थव्यवस्था के बारे में किये गये दावों को हकीकत से दूर बताते हुये कहा कि सरकार के आधारहीन दावों के कारण ही राजकोषीय घाटा अब शीर्ष स्तर पर और विकास दर न्यूनतम स्तर पर आ गयी है।

उन्होंने सरकार पर आंकड़ों को छुपाने का आरोप लगाते  हुए कहा कि पिछले चार सालों में आर्थिक वित्तीय घाटा बढ़ने की दर 3.2 से 3.5 प्रतिशत होने के बाद सरकार की देनदारियां बढ़कर 85 हजार करोड़ रुपये पर पहुंच गयी।

चिदंबरम ने वित्त मंत्री अरुण जेटली से इन सवालों के जवाब देने की अपेक्षा व्यक्त करते हुए सरकार के तीन जुमलों का जिक्र किया। उन्होंने किसानों को उपज का डेढ़ गुना न्यूनतम समर्थन मूल्य मुहैया कराने के सरकार के दावे को पहला जुमला बताते हुए कहा कि सरकार ने पिछले दो सालों में समर्थन मूल्य में सिर्फ पांच रुपये की बढ़ोत्तरी की। इसे किसानों के साथ धोखा बताते हुए उन्होंने कहा कि संप्रग सरकार के दस साल के कार्यकाल में समर्थन मूल्य में 100 प्रतिशत वृद्धि हुई थी। रोजगार सृजन के आंकड़ों को बजट में छुपाने का आरोप लगाते हुए  चिदंबरम ने कहा कि पिछले चार साल में सरकारी आंकड़ों में लगातार रोज़गार के अवसर बढ़ने का दावा किया गया है, जबकि सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) लगातार घट रहा है। इसे दूसरा जुमला बताते हुए उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का एकमात्र देश बन गया है जिसमें जीडीपी घटे और रोजगार बढ़ें।

चिदंबरम ने बजट में घोषित चिकित्सा बीमा योजना को अब तक का सबसे बड़ा जुमला बताते हुए कहा कि 10 करोड़ परिवारों को पांच लाख रुपये के बीमा में शामिल करने पर 1.50 लाख करोड़ रुपये की प्रीमियम राशि का इंतजाम कहां से करेगी सरकार, इसका बजट में कोई उपाय नहीं बताया है।

सत्तापक्ष की नारेबाजी के बीच चिदंबरम ने लगभग 40 मिनट के अपने भाषण में सरकार की आर्थिक नीतियों को भारत की जनता के साथ धोखा बताते हुए भविष्य में इसके गंभीर प्रभावों की ओर आगाह किया।

भारत के प्रधान न्यायाधीश ने कहा, राम मंदिर-बाबरी मस्जिद मामला पूर्णत: जमीन विवाद

भारत में सुप्रीम कोर्ट के तीन जजों की बेंच में गुरुवार को अयोध्‍या मामले में अंतिम सुनवाई शुरू हो गई है। चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अशोक भूषण और जस्टिस एस. अब्‍दुल नजीर की बेंच 13 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई कर रही है। वरिष्‍ठ वकील व कांग्रेस नेता कपिल सिब्‍बल की ओर से इस मामले की सुनवाई 2019 के लोकसभा चुनाव तक टालने की अपील की गई थी, जिसे शीर्ष अदालत ने ठुकरा दिया।

अयोध्‍या में कुल 2.7 एकड़ की विवादित जमीन पर हिंदुओं और मुसलमानों, दोनों ने दावा ठोंक रखा है। 5 दिसंबर, 2017 को बेंच ने इस मामले की सुनवाई के लिए 8 फरवरी की तारीख तय की थी। कुछ याचिकाकर्ताओं की ओर से कपिल सिब्‍बल, राजीव धवन और दुष्‍यंत दवे जैसे वरिष्‍ठ वकीलों ने भारत के राजनैतिक हालात को देखते हुए सुनवाई टालने की गुहार लगाई थी। हालांकि अदालत ने सुनवाई को टालने से इनकार करते हुए वरिष्‍ठ अधिवक्‍ताओं के व्‍यवहार को शर्मनाक करार दिया था।

चीफ जस्टिस ने कोर्ट में रखी गई कुल 42 किताबों का अनुवाद दो हफ्तों में जमा कराने का दिया निर्देश। मामले में अगली सुनवाई 14 मार्च को होगी।

चीफ जस्टिस ने कहा कि अयोध्या मामला एक भूमि विवाद है।

वरिष्ठ वकीलों कपिल सिब्बल और राजीव धवन ने कहा था कि दीवानी अपीलों को या तो पांच या सात न्यायाधीशों की पीठ को सौंपा जाए या इसे इसकी संवेदनशील प्रकृति तथा देश के धर्मनिरपेक्ष ताने बाने और राजतंत्र पर इसके प्रभाव को ध्यान में रखते हुए 2019 के लिए रखा जाए।

शीर्ष अदालत ने भूमि विवाद में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के 2010 के फैसले के खिलाफ 14 दीवानी अपीलों से जुड़े एडवोकेट आन रिकार्ड से यह सुनिश्चित करने को कहा कि सभी जरूरी दस्तावेजों को शीर्ष अदालत की रजिस्ट्री को सौंपा जाए।