भारत में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने आक्रामक राजनीति करने के संकेत दिए हैं। उन्होंने इस बार भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सीधे हमला करते हुए राफेल डील घोटाले का ठीकरा फोड़ा है। राहुल गांधी ने कहा कि आखिर क्या वजह है कि रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण राफेल एयरक्राफ्ट खरीदने के लिए भुगतान की गई राशि का खुलासा नहीं कर रहीं हैं। इसका मतलब सिर्फ और सिर्फ घोटाला है। राहुल ने मोदी पर हमला बोलते हुए कहा कि पूरा देश जानता है कि वे निजी रूप से पेरिस गए थे। उन्होंने वहां पुराने सौदे को बदल दिया।
दरअसल रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को संसद में बताया था कि फ्रांस के साथ राफेल एयरक्राफ्ट का सौदा दो देशों के बीच समझौता है, इस नाते इसे गोपनीय रखा जाएगा। इसके साथ ही सीतारमण ने ये भी कहा था कि इस सौदे में कोई भी सार्वजनिक या निजी कंपनी शामिल नहीं है। जिस पर विपक्ष ने सवाल उठाया था कि आखिर सरकार डील की राशि का खुलासा करने से क्यों दूर भाग रही है। राहुल गांधी ने रक्षामंत्री के संसद में दिए बयान के आधार पर प्रधानमंत्री को घेरने की कोशिश की।
गौरतलब है कि राफेल लड़ाकू विमानों के सौदे में काफी समय से कांग्रेस घोटाले का आरोप लगा रही है। कांग्रेस का आरोप है कि फ्रांस से 36 लड़ाकू विमानों की खरीद में भारी अनियमितता हुई। तय से ज्यादा कीमत चुकाए गए। यही नहीं, मोदी सरकार ने यूपीए सरकार में हुए सौदे की शर्तों में भारी फेरबदल की। पूर्व के सौदे में कई विमान भारत में तैयार करने की शर्त शामिल थी।
हालांकि रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने विपक्ष के सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया है। रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने भारत और फ्रांस की सरकारों के बीच राफेल एयरक्राफ्ट की खरीद से जुड़े अंतरसरकारी समझौते के आर्टिकल 10 का हवाला देते हुए इसे गोपनीय करार दिया था।
संसद भवन परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान राहुल गांधी ने मीडिया पर भी सवाल उठाए। राहुल ने कहा कि वह जानते हैं कि आप लोग डरते हैं, दबाव रहता है, लेकिन कभी तो सच्चाई का साथ दीजिए। राहुल गांधी ने #TheGreatRafaleMystery हैशटैग के साथ ट्वीट के जरिए भी राफेल डील पर सवाल उठाए।
भारत में कांग्रेस पार्टी केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार पर लगातार हमले कर रही है। संसद के उच्च सदन राज्य सभा में सोमवार (5 फरवरी) को कांग्रेस के नेता गुलाम नबी आजाद ने राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा के दौरान मोदी सरकार पर हमला बोलते हुए कहा कि यह सरकार नई विकास योजनाएं लागू करने की बजाय कांग्रेस और यूपीए शासन काल में लागू योजनाओं का नाम बदल रही है।
उन्होंने तंज कसा कि बीजेपी की मोदी सरकार गेम चेंजर नहीं बल्कि नेम चेंजर है। आजाद ने कहा कि साल 1985 के बाद यूपीए सरकार द्वारा जितनी भी योजनाएं लॉन्च की गई थीं, मौजूदा मोदी सरकार ने उनका नाम बदल दिया है।
बता दें कि मोदी सरकार ने सबसे पहले योजना आयोग का नाम बदलकर नीति आयोग कर दिया था। अभी हाल ही में मोदी सरकार ने मुगलसराय रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर पंडित दीन दयाल उपाध्याय रेलवे स्टेशन कर दिया था। प्रधानमंत्री आवास जिस सड़क पर है, उसका नाम रेस कोर्स रोड से बदलकर लोकनीति मार्ग कर दिया था।
इनके अलावा केंद्र सरकार की कई ऐसी योजनाएं हैं, जिनका नाम बदलकर मोदी सरकार ने उसे रिलॉन्च किया है। प्रधानमंत्री जन धन योजना को भी पूर्ववर्ती यूपीए सरकार की योजना बताया जा रहा है। कुछ दिनों पहले कांग्रेसी नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री शशि थरूर ने ट्वीट कर बताया था कि मोदी सरकार द्वारा लॉन्च की गई 23 में से 19 योजनाएं पूर्ववर्ती यूपीए सरकार द्वारा लाई गई थीं जिसे मोदी सरकार ने नाम बदलकर दोबारा लागू किया है।
उन्होंने लिखा था कि यूपीए की बेसिक सेविंग बैंक डिपॉजिट अकाउंट को ही पीएम मोदी ने जन धन खाता के रूप में लॉन्च किया। इनके अलावा नेशनल गर्ल चाइल्ड डे प्रोग्राम की जगह मोदी सरकरा ने बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना लागू किया है। उन्होंने मौजूदा सरकार की प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना, दीन दयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना, प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना, मेक इन इंडिया, डिजिटल इंडिया, स्किल इंडिया, पहल, मिशन इंद्रधनुष समेत कई योजनाओं को पूर्व की यूपीए सरकार की योजना बताया था।
भारत में कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने कॉरपोरेट स्टाइल में काम करना शुरू कर दिया है। इस साल कई राज्यों में विधानसभा चुनावों और अगले साल होने वाले लोकसभा चुनावों को देखते हुए राहुल गांधी ने डाटा एनालिटिक्स डिपार्टमेंट के नए हेड की नियुक्ति की है। पार्टी अध्यक्ष ने इनवेस्टमेंट बैंकर और टेक्नोक्रेट प्रवीण चक्रवर्ती को इसकी जिम्मेदारी सौंपी है। पिछले साल विश्वजीत सिंह की मौत के बाद से ही यह पद रिक्त था। प्रवीण इनवेस्टमेंट बैंक का सीईओ रहने के साथ ही कॉरपोरेट एडवाइजर के तौर पर भी सक्रिय रहे हैं। वह 'इंडियास्पेंड' के संस्थापक ट्रस्टी भी हैं। ऐसे में डाटा एनालिसिस के क्षेत्र में उन्हें व्यापक अनुभव हासिल है।
राहुल ने ट्वीट किया, ''मैं प्रवीण चक्रवर्ती के नेतृत्व में डाटा एनालिटिक्स डिपार्टमेंट की घोषणा करते हुए बहुत रोमांचित महसूस कर रहा हूं। बिग डाटा का प्रभावी तरीके से इस्तेमाल किया जा सकेगा।''
राहुल गांधी ने पिछले कुछ दिनों में मीडिया सेल समेत पार्टी के कई विभागों में बदलाव किए हैं। इसका उद्देश्य पार्टी के प्रचार तंत्र को और मजबूत करना है। साल के शुरुआत में राहुल के कमान संभालने के बाद पार्टी की रिसर्च टीम और सोशल मीडिया यूनिट को और दुरुस्त करने का फैसला लिया गया था। मीडिया रिपोर्टों में कहा गया था कि राहुल इन बदलावों के जरिये कांग्रेस पार्टी के अंदर एक मजबूत 'थिंक टैंक' बनाना चाहते हैं, ताकि आंकड़ों के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर न रहना पड़े।
कांग्रेस में डाटा एनालिटिक्स डिपार्टमेंट को कंप्यूटर सेल भी कहा जाता है। रिसर्च टीम को मजबूती प्रदान करने में इस विभाग की भूमिका बेहद अहम होती है। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि कांग्रेस इसके लिए पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के साथ मिलकर काम कर रही हैं। इसका लक्ष्य भाजपा को टक्कर देने के साथ ही बेहतर आंकड़ों के साथ मीडिया में पार्टी की छवि को बेहतर करना है।
कांग्रेस में जुलाई, 2017 में रिसर्च डिपार्टमेंट का विस्तार किया गया था। राज्यसभा सदस्य राजीव गौड़ा को रिसर्च टीम का प्रमुख बनाया गया था और उन्हें 15 लोगों की टीम दी गई थी। इस टीम के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का गृह राज्य गुजरात पहली बड़ी चुनौती थी। राहुल ने इसके साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर भाजपा को चुनौती देने के लिए विशेष टीम गठित की थी। हाल में संपन्न हुए दो राज्यों के विधानसभा चुनावों में इसका असर भी दिखा था।
अमित शाह के भाजपा अध्यक्ष बनने के बाद पार्टी में कई बदलाव किए गए थे। उन्होंने कॉरपोरेट स्टाइल में करना शुरू किया। इसके तहत रिसर्च टीम के साथ सोशल मीडिया यूनिट को भी एक्टिव किया गया, ताकि सरकार और पार्टी की नीतियों को संगठित तरीके से जनता के बीच प्रस्तुत किया जा सके। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों के दौरान अमित शाह ने बूथ लेवल तक मैनेजर तैनात कर अपनी कार्यशैली का परिचय भी दिया था। भाजपा नेताओं की मानें तो एक चुनाव खत्म होते ही पार्टी अध्यक्ष दूसरे की तैयारी में जुट जाते हैं। इसके लिए मीडिया और सोशल मीडिया में बिना समय गंवाए अभियान की शुरुआत भी कर दी जाती है। इसके साथ ही सभी की जिम्मेदारियां भी तय कर दी जाती हैं। राहुल गांधी के अध्यक्ष बनने के बाद कांग्रेस में इसी मॉडल को लाने की कोशिश शुरू कर दी गई है।
सांप्रदायिक हिंसा की आंच से झुलसे कासगंज में स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो ही रही थी कि सोमवार (5 फरवरी) को दोबारा से माहौल बिगड़ने के हालात पैदा हो गए। ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, सोमवार (5 फरवरी) को यहां एक धार्मिक स्थल का दरवाजा जला मिला, जिसके बाद भीड़ इकट्ठी हो गई। यह घटना गंजडुंडवारा कस्बे में हुई। सब्जी मंडी के नजदीक स्थित इस धार्मिक स्थल का दरवाजा आग से जल गया।
जानकारी के मुताबिक, सुबह पांच बजे गंजडूंडवारा कस्बे में स्थित धार्मिक स्थल के लकड़ी के दरवाजे में आग लगने की खबर मिली। मौके पर पहुंचने के बाद पुलिस ने आग को बुझाया। घटना की सूचना मिलते ही डीएम, एसपी और कई बड़े अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। घटना के बाद इलाके में ऐहतियात के तौर पर अतिरिक्त सुरक्षाबल की तैनाती कर दी गई है। फिलहाल यह साफ नहीं हो पाया है कि दरवाजे में आग कैसे लगी? अज्ञात लोगों के खिलाफ केस दर्ज करके मामले की जांच हो रही है।
यूपी के राज्यपाल राम नाइक ने कासगंज सांप्रदायिक दंगा को उत्तर प्रदेश के लिए कलंक बताया था। मामले को लेकर राजनीति भी जारी है। विपक्षी पार्टियों ने इस मामले को लेकर योगी आदित्यनाथ सरकार की तीखी आलोचना की है। वहीं, सरकार के एक मंत्री ने विवादास्पद बयान देकर सरकार को ही बैकफुट पर ला दिया। मंत्री सत्यदेव पचौरी ने कहा कि कासगंज में हुई हिंसा 'छोटी-मोटी घटना' थी। उन्होंने कहा था, ''ऐसी छोटी-मोटी घटनाएं अक्सर होती रहती है ..... हर जगह होती हैं। ज्यादा ध्यान देने की जरूरत नहीं है।''
कर्नाटक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रैली पर कांग्रेस ने हमला किया है। कांग्रेस ने ट्वीट कर पीएम नरेंद्र मोदी से पूछा है कि इस बार वह कर्नाटक के लोगों से कौन सा झूठा वादा करने जा रहे हैं? कर्नाटक कांग्रेस के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से एक ट्वीट कर पीएम मोदी पर हमला किया गया है।
कर्नाटक कांग्रेस ने पूछा है, ''2014 के चुनाव प्रचार के दौरान आपने कर्नाटक के लोगों से कई वादे किये, लेकिन एक भी नहीं निभाया, आज आप कौन सा झूठा वादा करने जा रहे हैं श्री नरेंद्र मोदी जी।''
इस ट्वीट के साथ एक वीडियो भी पोस्ट किया गया है। वीडियो में दिखाया गया है कि 2014 के चुनाव प्रचार के दौरान नरेंद्र मोदी ने मंगलुरु के लिए पोर्ट LED का वादा किया था, लेकिन पीएम ने मंगलुरु के लिए कुछ नहीं किया।
कांग्रेस के मुताबिक, पीएम ने कपास पावरलूम और कपास से जुड़ी चीजों के निर्यात का वादा किया था, लेकिन पीएम ने उसे भी नहीं निभाया। कांग्रेस ने कहा है कि नरेंद्र मोदी ने हुबली में मिर्च आधारित एग्री प्रोसेसिंग इंडस्ट्री की स्थापना का वादा किया था, लेकिन उन्होंने इसे भी नहीं निभाया।
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारतीय जनता पार्टी की 90 दिवसीय यात्रा की समाप्ति पर रविवार (4 फरवरी) को बेंगलुरु में आयोजित समापन रैली में शिरकत की। इस यात्रा का नाम 'नव कर्नाटक निर्माण यात्रा' था।
भारत के कर्नाटक में इस साल विधानसभा चुनाव होने हैं। इस लिहाज से भारत के पीएम नरेंद्र मोदी की रैली का बड़ा राजनीतिक महत्व है। कर्नाटक में आगामी अप्रैल-मई में चुनाव होने हैं। भाजपा 2008 में अपने दम पर यहां सत्ता में आई थी, लेकिन पांच साल बाद 2013 के चुनाव में हारकर वह सत्ता से बाहर चली गई। बेंगलुरु की रैली में पीएम नरेंद्र मोदी ने उम्मीद के मुताबिक ही कांग्रेस की आलोचना की। पीएम मोदी ने कहा कि कर्नाटक में कांग्रेस एग्जिट गेट पर खड़ी है। पीएम ने कहा कि आपका जोश दिखाता है कि कांग्रेस को बाहर का रास्ता दिखाने के लिए काउंटडाउन शुरू हो गया है। पीएम ने कहा कि कांग्रेस ने कर्नाटक में विनाश का काम किया है और कर्नाटक को कांग्रेस की जरूरत नहीं है। कर्नाटक में पिछले कुछ दिनों से बीजेपी और कांग्रेस के बीच जबर्दस्त ट्विटर वार चल रहा है।
उत्तर प्रदेश पुलिस पर एक शख्स को फर्जी मुठभेड़ में गोली मारने का आरोप लगा है। यह आरोप लगाया है जितेन्द्र यादव नाम के शख्स के परिवार वालों ने। जितेन्द्र यादव के परिवार वालों का कहना है कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक फेक एनकाउंटर में उसे गोली मारी है। परिवार कहना है कि उसे उसकी जाति की वजह से गोली मारी गई।
समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, शनिवार (3 फरवरी) रात को नोएडा के सेक्टर 122 के पास जितेन्द्र यादव को गोली मारी गई थी। जितेन्द्र यादव को घायल अवस्था में नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अस्पताल के बाहर बड़ी संख्या में पुलिस की तैनाती की गई है। जितेन्द्र यादव के परिवार के आरोपों का समाजवादी पार्टी ने समर्थन किया है। समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता पंखुड़ी पाठक ने ट्वीट कर उत्तर प्रदेश पुलिस पर प्रमोशन के लिए बेगुनाहों को गोली मारने का आरोप लगाया है। पंखुड़ी पाठक ने ट्वीट किया, ''जितेन्द्र यादव नाम के एक बेगुनाह को गर्दन में गोली लगी है, ये उत्तर प्रदेश पुलिस की नोएडा में असफल मुठभेड़ की कोशिश है, उत्तर प्रदेश सरकार इस मुद्दे को मीडिया से दूर रखने की कोशिश कर रही है। शख्स नोएडा के फोर्टिस अस्पताल में जिंदगी की जंग लड़ रहा है, उत्तर प्रदेश पुलिस के अधिकारी प्रमोशन के लिए निर्दोष लोगों का एनकाउंटर कर रहे हैं।''
समाजवादी पार्टी की नेता द्वारा ट्वीट किये जाने के बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने जवाब दिया है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने ट्वीट किया है कि इस बारे में नोएडा पुलिस से जानकारी ली जा रही है। नोएडा के एसएसपी के मुताबिक, ये एनकाउंटर का मामला नहीं है। मामले में एक सब-इंस्पेक्टर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर लिया गया है और उसे गिरफ्तार किया गया है। मामले में कुल चार पुलिसकर्मियों को सस्पेंड किया गया है।
बता दें कि उत्तर प्रदेश पुलिस ने पिछले 48 घंटों में 15 एनकाउंटर किये हैं। पुलिस ने इन मुठभेड़ों में एक बदमाश को मार गिराने और 24 वांछित अपराधियों को पकड़ने का दावा किया है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुजफ्फरनगर, गोरखपुर, बुलंदशहर, शामली, हापुड़, मेरठ, सहारनपुर, बागपत, कानपुर और लखनऊ में बदमाशों को सबक सिखाने का दावा किया है।
फर्जी प्रमाण पत्रों के आधार पर नौकरी पाने वाले महाराष्ट्र सरकार के 11,700 कर्मचारियों की नौकरी पर तलवार लटक रही है। इन सभी की नौकरी जाना लगभग तय माना जा रहा है। हालांकि इतनी बड़ी संख्या में लोगों को नौकरी से हटाने को लेकर देवेंद्र फडणवीस की सरकार पसोपेश में है।
बता दें कि 7 महीने पहले ही भारत के सुप्रीम कोर्ट ने फर्जी प्रमाणपत्रों के जरिए नौकरी पाने वालों पर कार्रवाई के आदेश दिये थे। इसी 7 महीने पुराने आदेश को लागू करने को लेकर महाराष्ट्र सरकार के पसीने छूट रहे हैं।
बताया जा रहा है कि सूबे में करीब 11,700 कर्मचारी ऐसे हैं, जिन्होंने फर्जी जाति प्रमाण पत्रों के आधार पर सूबे में शेड्यूल्ड ट्राइब्स यानी जनजाति कोटे के तहत नौकरी हासिल की थी। सरकारी नौकरियों के लिए फ्रॉड किया जाना कोई नई बात नहीं है, लेकिन महाराष्ट्र प्रशासन के लिए नौकरी में फर्जीवाड़े की इतनी बड़ी संख्या सामने आना आंखे खोलने वाला है। अब एक झटके में इतने लोगों को नौकरी से हटाना अपने आप में बड़ी बात होगी।
यही नहीं, फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नौकरी पाने वाले तमाम ऐसे भी कर्मचारी हैं, जो करीब दो दशक तक नौकरी कर चुके हैं। क्लर्क के तौर पर भर्ती किए गए तमाम लोग ऐसे भी हैं, जो राज्य सरकार में डेप्युटी सेक्रटरी तक के पद पर पहुंच गए। यदि इन कर्मचारियों को हटाया जाता है तो राजनीतिक दल और यूनियन भी इस मसले पर मोर्चा खोल सकते हैं।
जुलाई, 2017 में दिए अपने एक आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि फर्जी जाति प्रमाणपत्रों के आधार पर नौकरी और शैक्षणिक संस्थान में दाखिला पाने वाले लोगों की जॉब या डिग्री वापस ले ली जानी चाहिए। यही नहीं, शीर्ष अदालत ने ऐसे लोगों की नौकरी छीने जाने के अलावा उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई भी करने का आदेश दिया था।
भारत के नागालैंड में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनजर जारी राजनैतिक उठापटक के बीच कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने एक बार फिर नगा समझौते का मुद्दा उठाया है। राहुल गांधी ने नगा संधि का जिक्र करते हुए भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आलोचना की है।
नगालैंड में चुनावों को देखते हुए कांग्रेस एक बार फिर नगा संधि को लेकर मोदी सरकार की घेराबंदी करने की कोशिश में हैं। राहुल गांधी ने रविवार सुबह एक ट्वीट किया। इस ट्वीट में उन्होंने लिखा, ''अगस्त 2015 में पीएम मोदी ने नगा संधि पर हस्ताक्षर के साथ इतिहास रचने का दावा किया था। अब फरवरी, 2018 है और नगा संधि का कुछ पता नहीं है।'' इसके आगे राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर टिप्पणी की है। राहुल ने लिखा कि मोदी जी देश के इकलौते प्रधानमंत्री हैं, जिनकी बातों का कोई मतलब नहीं है।
बता दें कि नगा शांति समझौते पर केंद्र और एनएससीएन-आईएम ने अगस्त 2015 में दस्तखत किए थे। करीब 18 साल तक चली 80 से ज्यादा दौर की वार्ता के बाद समझौते पर साइन किए गए थे। राहुल गांधी इससे पहले भी नगा संधि को लेकर पीएम पर सवाल उठाते रहे हैं। साथ ही, वो नगा संधि से जुड़ी जानकारी साझा करने की डिमांड भी करते रहे हैं।
भारत के पूर्वोत्तर राज्य नगालैंड में लंबे समय से अलगववादी आंदोलन चल रहा है और ये आंदोलन कई गुटों में बंटा है। केंद्र में मोदी सरकार आने के बाद लंबे वक्त से लटके समझौते को फाइनल किया गया। 3 अगस्त, 2015 को पीएम नरेंद्र मोदी ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह और राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल की मौजूदगी में एनएससीएन के साथ समझौते पर साइन किए थे। हालांकि समझौते का ब्यौरा अब तक सार्वजनिक नहीं किया गया।
भारत में तीन तलाक के खिलाफ प्रस्तावित कानून लोकसभा में पास होने के बाद मोदी सरकार अब राज्यसभा में इस बिल को पास करने की कोशिश में है। राज्यसभा में बहुमत न होने के बावजूद मोदी सरकार की कोशिश रहेगी कि उच्च सदन से भी मुस्लिम महिलाओं से जुड़ा ये बिल पास हो सके।
वहीं, इस कानून का विरोध करने वाला ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल बोर्ड निकाहनामा में बदलाव करने की तैयारी कर रहा है। मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने एक बार में तीन तलाक रोकने के लिए ये कदम उठाया है। इसके तहत एक मॉडल निकाहनामा लाया जा रहा है। जिसमें निकाह के दौरान एक बार में तीन तलाक नहीं देने की भी शर्त होगी।
बोर्ड के प्रवक्ता मौलाना खलीलुर्रहमान नोमानी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि एक मॉडल निकाहनामा लाया जा रहा है। नोमानी ने बताया, ''इस मॉडल निकाहनामे में एक कॉलम और जोड़ा जाएगा। इस कॉलम में लिखा होगा कि मैं तीन तलाक नहीं दूंगा।''
निकाह के दौरान ही इस कॉलम को टिक किया जाएगा और निकाहनामा पर दूल्हे के दस्तखत से इसकी पुष्टि कराई जाएगी। पर्सनल लॉ बोर्ड के मुताबिक, एक बार इस कॉलम पर टिक होने के बाद पुरुष अपनी बीवी को तीन तलाक नहीं दे पाएगा। यानी एक बार में तीन तलाक बोलकर कोई भी पुरुष अपनी बीवी को तलाक देने का हकदार नहीं होगा और अगर वो ऐसा करता है तो तलाक नहीं माना जाएगा।
बोर्ड के प्रवक्ता नोमानी ने बताया कि मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड एक बार में तीन तलाक के सख्त खिलाफ है। लेकिन कुछ परिस्थिति में इसे मान्यता दी गई है। कई मामले ऐसे होते हैं जिसनें महिलाएं खुद एक बार में तीन तलाक की अपील करती हैं।
कासगंज हिंसा को लेकर बरेली के डीएम राघवेंद्र विक्रम सिंह की ओर से डाले गए फेसबुक पोस्ट पर विवाद थमा नहीं था कि अब सहारनपुर की महिला अफसर रश्मि वरुण का पोस्ट वायरल हो रहा है। सहारनपुर में डिप्टी डायरेक्टर रश्मि वरुण ने गणतंत्र दिवस के दिन कासगंज सांप्रदायिक हिंसा में मारे गए 22 वर्षीय चंदन की मौत का जिम्मेदार भगवा रंग को ठहराया है।
उन्होंने लिखा कि चंदन को किसी समुदाय ने नहीं बल्कि भगवा रंग ने मारा। रश्मि ने फेसबुक पर लिखा, ''तो ये थी कासगंज की तिरंगा रैली .... कोई नई बात नहीं है ये, अंबेडकर जयंती पर सहारनपुर सड़क दुधली में भी ऐसी ही रैली निकाली गई थी, जिसमें अंबेडकर गायब थे या कहिए कि भगवा रंग में विलीन हो गए थे। कासगंज में भी यही हुआ, तिरंगा तो शवासन में रहा, भगवा ध्वज शीर्ष (आसन) पर। जो लड़का मारा गया, उसे किसी दूसरे-तीसरे समुदाय ने नहीं मारा, उसे केसरी, सफेद और हरे रंग की आड़ लेकर भगवा ने खुद मारा। जो बताया नहीं जा रहा, वो यह है कि अब्दुल हमीद की मूर्ति या तस्वीर पर तिरंगा फहराने की बजाय इस तथाकथित तिरंगा रैली में चलने की जबरदस्ती की गई और केसरिया, सफेद, हरे और भगवा रंग पे लाल रंग भारी पड़ गया।''
जागरण के मुताबिक, महिला अफसर ने बरेली के डीएम का भी समर्थन किया। उन्होंने आरवी सिंह के माफी वाला फेसबुक पोस्ट शेयर करते हुए लिखा कि सही बात के लिए स्पष्टीकरण देना पड़ता है। रश्मि ने कहा कि सही इंसान को भी माफी मांगनी पड़ रही है।
उन्होंने यह भी कहा कि कासगंज में ना तो पाकिस्तान जिंदाबाद के नारे लगे और ना ही तिरंगा यात्रा रोकी गई। यह सब वाट्सएप यूनिवर्सिटी का खेल है। अपने पोस्ट पर रश्मि वरुण ने कहा कि इसमें कुछ भी गलत नहीं लिखा। उन्होंने कहा, पोस्ट में ऐसी कोई भी बात नहीं लिखी गई जो कि किसी के खिलाफ हो। उन्होंने कहा कि गणतंत्र दिवस मनाने का हक हर किसी को, पहले या बाद में मनाने वाली कोई बात नहीं होती। वाट्सएप पर कोई गलत मैसेज आता है तो उसे रोका नहीं जाता, बल्कि वायरल कर दिया जाता है। ऐसे में ही माहौल बिगड़ता है।
बता दें कि कासगंज में गणतंत्र दिवस के मौके पर सांप्रदायिक हिंसा भड़क गई थी। इस हिंसा में 22 वर्षीय चंदन गुप्ता नाम के युवक को गोली लगी थी, जिससे उसकी मौत हो गई थी। वहीं अकरम नाम के शख्स की एक आंख फोड़ दी गई थी। हिंसा के मामले में अभी तक 118 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। चंदन की हत्या के मुख्य आरोपी सलीम को भी पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।









