भारत

मुख्तार अंसारी को जेल में दिल का दौरा पड़ा, अस्पताल में भर्ती

बांदा जिला जेल में बंद बहुजन समाज पार्टी के विधायक मुख्तार अंसारी को मंगलवार को दिल का दौरा पड़ा जिसके बाद उन्हें तुरंत जिला अस्पताल ले जाया गया। अंसारी (55 वर्षीय) अनेक आपराधिक मामलों के कारण बांदा जेल में बंद हैं। बाद में उन्हें इलाज के लिए लखनऊ रेफर कर दिया गया।

विधायक के एक सहयोगी ने बताया कि अंसारी की हालत स्थिर बनी हुई है। प्रमुख सचिव (गृह) अरविंद कुमार ने बताया कि मैंने बांदा के पुलिस अधीक्षक और जिलाधिकारी से बात की, उन्होंने मुझे विधायक को दिल का दौरा पड़ने के बारे में बताया। मैंने इस मामले में उनसे रिपोर्ट मंगवाई है। विधायक को अच्छी चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

मीडिया की खबर है कि अंसारी की पत्नी को भी दिल का दौरा पड़ा है, इस पर कुमार ने कहा कि वह इस खबर की अभी पुष्टि नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि वह इस बारे में तभी कुछ जानकारी दे सकते हैं, जब वहां से रिपोर्ट आ जाएगी। उन्होंने कहा कि विधायक को अच्छी चिकित्सा सुविधाएं दिए जाने के निर्देश दिए गए हैं।

बांदा से मिली जानकारी के मुताबिक, जेल अधीक्षक राम सेवक चौधरी ने बताया कि विधायक जब अपनी पत्नी से मुलाकात कर रहे थे, तभी उनके सीने में अचानक दर्द उठा। इसके बाद उनकी पत्नी को भी सीने में दर्द उठा। इसके बाद दोनों को लखनऊ के अस्पताल में भेज दिया गया। मऊ विधानसभा सीट से विधायक अंसारी विभिन्न आपराधिक मामलों में 2015 से उत्तर प्रदेश की विभिन्न जेलों में बंद हैं।

गौरतलब है कि कुछ वक्त पहले यूपी की विधानसभा में संदिग्ध पाउडर मिला था। शुरुआत में दावा किया गया कि पाउडर एक विस्फोटक था। इस मामले में उच्चस्तरीय जांच के आदेश भी दिए गए थे। वहीं, अंसारी ने यह कहकर सनसनी फैला दी थी कि विस्फोटक उनको मारने के लिए लाया गया था। दरअसल, वह सदन की कार्यवाही में शामिल होने के लिए विधानसभा पहुंचे थे।

सिनेमाहॉल में राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य नहीं : सुप्रीम कोर्ट

भारत में फिल्म से पहले सिनेमा हॉल में राष्ट्रगान बजाने की अनिवार्यता को सुप्रीम कोर्ट ने खत्म कर दिया है। इससे पहले, कोर्ट ने पिछले आदेश में ऐसा करना अनिवार्य बना दिया था। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को अपने आदेश में संशोधन किया।

पिछले महीने कोर्ट ने अपने ही आदेश पर सवाल उठाया था। कोर्ट ने पूछा था कि क्या बाध्यता लगाकर लोगों पर देशभक्ति थोपी जा सकती है? कोर्ट ने मंशा जाहिर की थी कि अगर सरकार पहल करे तो वह अपने आदेश में बदलाव कर सकता है।

बता दें कि 30 नवंबर, 2016 को सुप्रीम कोर्ट ने सभी सिनेमाघरों में फिल्म का प्रदर्शन शुरू होने से पहले अनिवार्य रूप से राष्ट्रगान बजाने की मांग वाली श्याम नारायण चोकसी की जनहित याचिका पर यह निर्देश दिए थे। केंद्र की मोदी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में सोमवार (08 जनवरी) को हलफनामा देकर कहा था कि सिनेमाघरों में राष्ट्रगान की अनिवार्यता को फिलहाल स्थगित कर दिया जाय और नवंबर 2016 से पहले की स्थिति बरकरार रखी जाय। मोदी सरकार ने कोर्ट को बताया था कि एक अंतर मंत्रालयी कमेटी बनाई गई है, जो छह महीने में अपना सुझाव देगी। कमेटी से सुझाव मिलने के बाद सरकार तय करेगी कि राष्ट्रगान की अनिवार्यता पर सर्कुलर या नोटिफिकेशन जारी किया जाए या नहीं।

दरअसल, 23 अक्टूबर, 2017 को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से यह तय करने को कहा था कि सिनेमाघरों या अन्य स्थानों पर राष्ट्रगान बजाना अनिवार्य हो या नहीं, इस पर सरकार नियामक तय करे और इस संबंध में सर्कुलर भी जारी करे। इसके साथ ही कोर्ट ने कहा था कि सर्कुलर जारी करते वक्त इस बात का भी ख्याल रखा जाय कि सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश प्रभावित ना हों।

सर्वोच्च अदालत ने केंद्र सरकार को यह भी सुनिश्चित करने को कहा था कि सिनेमाघर में लोग मनोरंजन के लिए जाते हैं, ऐसे में देशभक्ति का क्या पैमाना हो, इसके लिए कोई रेखा तय होनी चाहिए? सुप्रीम कोर्ट ने यह भी कहा था कि इस तरह के नोटिफिकेशन या नियम बनाना संसद का काम है, इसे कोर्ट पर क्यों थोपा जा रहा है?

सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार से पूछा, दूसरे देशों में मौत की सजा देने के क्या तरीके हैं?

भारत में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को केंद्र सरकार से कहा कि दूसरे देशों में मृत्यु दंड पाने वाले कैदियों की सजा पर अमल के प्रचलित विभिन्न तरीकों से उसे अवगत कराया जाए। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने इसके साथ ही स्पष्ट किया कि शीर्ष अदालत यह निर्णय नहीं करेगा कि भारत में मृत्यु दंड पाने वाले कैदियों की सजा पर अमल करने का कौन सा तरीका होना चाहिए।

खंडपीठ ने कहा, ''हम नहीं कह सकते कि क्या तरीका होना चाहिए। हमें बताएं कि दूसरे देशों में क्या हो रहा है।'' केन्द्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल पिंकी आनंद ने मृत्यु दंड पाने वाले कैदी को फांसी पर लटकाने के कानूनी प्रावधान निरस्त करने के लिए दायर याचिका का जवाब देने के लिए कुछ समय देने का अनुरोध किया।

इस याचिका पर संक्षिप्त सुनवाई के दौरान आनंद ने कहा कि ऐसे कैदी को फांसी पर लटकाना एक व्यावहारिक तरीका है क्योंकि प्राणघातक इंजेक्शन देना कारगर नहीं है। पीठ ने अधिवक्ता ऋषि मल्होत्रा की जनहित याचिका पर केन्द्र को जवाब देने के लिए चार सप्ताह का वक्त दे दिया। इस याचिका में विधि आयोग की 187वीं रिपोर्ट का भी हवाला दिया गया है जिसमें मौत की सजा देने के मौजूदा तरीके को कानून से हटाने की सिफारिश की गई थी।

इस याचिका पर न्यायालय ने पिछले साल छह अक्तूबर को केन्द्र से जवाब मांगा था। इस याचिका में संविधान के अनुच्छेद 21 में प्रदत्त जीने के अधिकार का जिक्र करते हुए कहा गया है कि मृत्यु दण्ड पाने वाले कैदी का भी गरिमा पूर्ण तरीके से सजा पर अमल का अधिकार है ताकि मौत कम पीड़ा दायक हो। याचिका के अनुसार, विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अनेक देशों ने मौत की सजा पर अमल के लिए फांसी के फंदे पर लटकाने का तरीका खत्म करके बिजली का करेन्ट देना, गोली मारने या घातक इंजेक्शन देने के तरीके अपनाए हैं। याचिका में कहा गया है कि गरिमा के साथ मौत भी जीने के अधिकार का ही हिस्सा है और फांसी के फंदे पर लटकाने का मौजूदा तरीका कैदी की पीड़ा को लंबा खींचता है।

कुछ गलत रिपोर्टिंग होने पर मीडिया को मानहानि के लिए नहीं पकड़ा जाना चाहिए : सुप्रीम कोर्ट

भारत में सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी की है कि प्रेस की बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी पूर्ण होनी चाहिए और कुछ गलत रिपोर्टिंग होने पर मीडिया को मानहानि के लिए नहीं पकड़ा जाना चाहिए। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की तीन सदस्यीय खंडपीठ ने ये बातें एक पत्रकार और मीडिया हाउस के खिलाफ मानहानि की शिकायत निरस्त करने के पटना उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर विचार करने से इंकार करते हुए कहीं।

खंडपीठ ने कहा, ''लोकतंत्र में, आपको (याचिकाकर्ता) सहनशीलता सीखनी चाहिए। किसी कथित घोटाले की रिपोर्टिंग करते समय उत्साह में कुछ गलती हो सकती है। परंतु हमें प्रेस को पूरी तरह से बोलने और अभिव्यक्ति की आजादी देनी चाहिए। कुछ गलत रिपोर्टिंग हो सकती है। इसके लिए उसे मानहानि के शिकंजे में नहीं घेरना चाहिए।''

न्यायालय ने मानहानि के बारे में दंण्डात्मक कानून को सही ठहराने संबंधी अपने पहले के फैसले का जिक्र करते हुए कहा कि यह प्रावधान भले ही सांविधानिक हो, परंतु किसी घोटाले के बारे में कथित गलत रिपोर्टिंग मानहानि का अपराध नहीं बनती है। इस मामले में एक महिला ने एक खबर की गलत रिपोर्टिंग प्रसारित करने के लिए एक पत्रकार के खिलाफ निजी मानहानि की शिकायत निरस्त करने के पटना उच्च न्यायालय के आदेश को चुनौती दी थी। महिला का कहना था कि गलत रिपोर्टिंग से उसका और उसके परिवार के सदस्यों की बदनामी हुई है।

यह मामला बिहार औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा बिहिया औद्योगिक क्षेत्र में इस महिला को खाद्य प्रसंस्करण इकाई लगाने के लिए भूमि आबंटन में कथित अनियमिताओं के बारे में अप्रैल 2010 में प्रसारित खबर को लेकर था।

वहीं सुप्रीम कोर्ट ने एक अन्य फैसले में 2013 की केदारनाथ आपदा से नष्ट हुई सड़कों और पुलों के निर्माण कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने के उत्तराखंड उच्च न्यायालय के आदेश पर मंगलवार को रोक लगा दी। प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनन्जय वाई चन्द्रचूड की पीठ ने 19 नवंबर, 2016 के आदेश पर रोक लगाने के साथ ही उच्च न्यायालय में याचिका दायर करने वालों को नोटिस जारी की।

राहुल गांधी कांग्रेस में व्‍यापक पैमाने पर बदलाव लाने की तैयारी में जुटे

कांग्रेस के नवनिर्वाचित अध्‍यक्ष राहुल गांधी कांग्रेस में व्‍यापक पैमाने पर बदलाव लाने की तैयारी में जुटे हैं। इसके लिए सबसे पहले पार्टी की रिसर्च टीम और सोशल मीडिया यूनिट को और मजबूत करने का फैसला किया गया है। खासकर रिसर्च टीम को ब्रिटेन की लेबर और अमेरिका की डेमोक्रेट पार्टी की तर्ज पर तैयार करने की योजना है। इसका उद्देश्‍य पार्टी के अंदर एक मजबूत 'थिंक टैंक' बनाना है, ताकि पार्टी को तथ्‍यों के लिए बाहरी स्रोतों पर निर्भर न रहना पड़े। केंद्र में सत्‍तारूढ़ भाजपा पहले से ही अपनी मीडिया टीम को मजबूत कर चुकी है। मालूम हो कि इस साल कर्नाटक, मध्‍य प्रदेश और राजस्‍थान समेत आठ राज्‍यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। इसके अलावा 2019 में लोकसभा का चुनाव होगा।

कांग्रेस के नेताओं ने बताया कि राहुल गांधी रिसर्च टीम को और दुरुस्‍त करने के लिए पार्टी के वरिष्‍ठ नेताओं के साथ मिल कर काम कर रहे हैं। टाइम्‍स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, सोशल मीडिया टीम को भी मजबूत किया जाएगा, ताकि मीडिया में पार्टी को लेकर बेहतर छवि बनाई जा सके।

सूत्रों ने बताया कि रिसर्च टीम के लिए जर्मनी और जापान के राजनीतिक दलों के मॉडल का भी अध्‍ययन किया गया है। कांग्रेस की रिसर्च टीम के मौजूदा प्रमुख और राज्‍यसभा सदस्‍य राजीव गौड़ा फिलहाल 15 युवाओं के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। इस टीम को अप्रैल तक देश के प्रत्‍येक राज्‍य में रिसर्च डिपार्टमेंट गठित करने का निर्देश दिया गया है।

मालूम हो कि सांसदों की मदद करने के लिए जुलाई, 2017 में रिसर्च टीम का विस्‍तार किया गया था। टीम में 12 पूर्णकालिक सदस्‍य हैं, जबकि तीन इंटर्न भी हैं। पंद्रह लोगों की इस टीम के लिए गुजरात चुनाव पहली बड़ी चुनौती थी। फिलहाल ये लोग त्रिपुरा, मेघालय और कर्नाटक विधानसभा चुनाव के लिए काम कर रहे हैं। इसके साथ ही कांग्रेस की रिसर्च टीम पंजाब सरकार के संपर्क में है, ताकि पहले साल के मौके पर उपलब्धियों को बेहतर तरीके से पेश किया जा सके।

अब इस रिसर्च टीम का विस्‍तार अन्य राज्‍यों तक करने की योजना है। जानकारी के मुताबिक, तेलंगाना और मध्‍य प्रदेश कांग्रेस ने रिसर्च टीम से संपर्क साध कर राज्‍य में यूनिट खोलने की मांग की है। बताया जाता है कि तेलंगाना कांग्रेस की सात सदस्‍यीय टीम अनुभव लेने के लिए गुजरात चुनाव के वक्‍त केंद्रीय टीम के साथ थी। सूत्रों का कहना है कि विभिन्‍न राज्‍यों के विधायकों को भी संबंधित राज्‍य की रिसर्च टीम सहयोग देगी। राज्‍यों द्वारा इसके प्रति रुचि दिखाने के बाद यह फैसला लिया गया है।

हिजबुल मुजाहिदीन की धमकी: जो व्‍यक्ति चुनाव में हिस्सा लेगा, उसकी आंखों में तेजाब उड़ेल दिया जाएगा

भारत के जम्‍मू-कश्‍मीर में सक्रिय हिजबुल मुजाहिदीन ने घाटी में पंचायत चुनाव लड़ने वालों को खुलेआम धमकी दी है। आतंकी संगठन ने कहा कि जो व्‍यक्ति चुनाव लड़ेगा, उसकी आंखों में तेजाब उड़ेल दिया जाएगा।

सोशल नेटवर्किंग साइटों पर जारी क्लिप में यह धमकी दी गई है। हिजबुल ने पहली बार सार्वजनिक तौर पर चुनाव में हिस्‍सा लेने वाले लोगों की हत्‍या करने की बात स्‍वीकार की है। लेकिन आतंकी संगठन ने कहा कि इस बार किसी की हत्‍या नहीं की जाएगी।

कश्मीर घाटी में लोकतांत्रिक प्रक्रिया को बाधित करने का हर संभव प्रयास किया जाता है। पूर्व में पंचायत और अन्‍य चुनावों में हिस्‍सा लेने वालों पर हमले की कई घटनाएं हो चुकी हैं। अब एक बार फिर से आतंकी संगठन ने चुनावी प्रक्रिया में शामिल होने वालों के खिलाफ हमले की धमकी दी है।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, वीडियो में हमले की धमकी देने वाला आतंकी हिजबुल का कमांडर रियाज नायकू है। रियाज इसमें कह रहा है, ''आप लोगों ने देखा होगा कि वर्ष 2016 में कितने युवाओं को आंखों की रोशनी गंवानी पड़ी थी। इसे देखते हुए इस बार के चुनाव में हिस्‍सा लेने वालों को उनके घरों से निकाल कर उनकी आंखों में तेजाब (सल्फ्यूरिक एसिड या हाइड्रोक्‍लोरिक एसिड) डाल दिया जाएगा, ताकि वे अपने परिवार पर जिंदगी भर के लिए बोझ बन जाएं।''

मालूम हो कि हिजबुल आतंकी बुरहान वानी के एनकाउंटर में ढेर होने के कारण घाटी में हिंसा भड़क गई थी। इसके कारण वर्ष 2016 में ग्रामीण निकाय का चुनाव नहीं करवाया जा सका था। अब इसे 15 फरवरी को कराने की योजना है। चुनावों को देखते हुए घाटी की सुरक्षा व्‍यवस्‍था पहले से भी सख्‍त कर दी गई है।

दक्षिण कश्‍मीर के डीआईजी एसपी पाणि ने आतंकी की धमकी पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। डीआईजी ने बताया कि उन्‍होंने फिलहाल वीडियो क्लिप नहीं देखी है, ऐसे में इस पर टिप्‍पणी नहीं की जा सकती है।

रियाज नायकू दक्षिण कश्‍मीर के अवंतिपुरा का रहने वाला बताया जाता है। वीडियो में रियाज कह रहा है, ''चुनाव में हिस्‍सा लेने वालों को पिछले 28 वर्षों से धमकियां दी जा रही हैं, ले‍किन कुछ नहीं हुआ। पिछले चुनावों में कुछ को भारतीय एजेंसियों ने और कुछ को हमने मारा, लेकिन परिणाम क्‍या हुआ? उनलोगों को फायदा ही हुआ।''

वीडियो में रियाज नायकू समीर टाइगर नामक किसी व्‍यक्ति के साथ बात कर रहा है। शोपियां में 16 अक्‍टूबर, 2017 में राज्‍य में सत्‍तारूढ़ पीपुल्‍स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) कार्यकर्ता और पूर्व सरपंच मोहम्‍मद रमजान शेख की हत्‍या कर दी गई थी। घाटी में वर्ष 2011 में पंचायत चुनाव हुए थे, जिसमें 80 प्रतिशत मतदान हुआ था।

धारा 377 की समीक्षा के लिए सुप्रीम कोर्ट तैयार

भारत में एक महत्‍वूपूर्ण घटनाक्रम में, सुप्रीम कोर्ट ने आपसी सहमति से दो वयस्कों के बीच समलैंगिक संबंध को अपराध की श्रेणी से हटाने की मांग करने वाली याचिका को बड़ी पीठ के पास भेजा है। मुख्‍य न्‍यायाधीश दीपक मिश्रा की अगुवाई वाली तीन सदस्‍यीय बेंच ने कहा कि वह धारा 377 की संवैधानिक वैधता जांचने और उसपर पुर्नविचार करने को तैयार हैं। इस कानून के तहत 2013 में समलैंगिक यौन संबंधों को अपराध के दायरे में रखा गया था।

शीर्ष अदालत ने केंद्र को नोटिस भेजकर एलजीबीटी समुदाय के पांच सदस्‍यों की याचिका पर जवाब तलब किया है। याचिका में पांचों ने आरोप लगाया है कि वह अपनी प्राकृतिक यौन पंसद को लेकर पुलिस के डर में रहते हैं।

सुप्रीम कोर्ट के इस स्‍टैंड पर LGBT एक्टिविस्‍ट अक्‍काई ने एएनआई से कहा, ''हमें इसका स्‍वागत करने की जरूरत है। हमें अभी भी भारतीय न्‍याय व्‍यवस्‍था से उम्‍मीद है। हम 21वीं सदी में रह रहे हैं। सभी राजनेताओं और राजनैतिक दलों को अपनी चुप्‍पी तोड़कर व्‍यक्तिगत यौन अधिकारों का समर्थन करना चाहिए।''

ऑल इंडिया महिला कांग्रेस की अध्‍यक्ष सुष्‍मिता देव ने फैसले का स्‍वागत किया। उन्‍होंने कहा, ''कांग्रेस सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का स्‍वागत करती है। सभी को अपनी जिंदगी अपनी तरीके से जीने का समान अधिकार होना चाहिए।''

चारा घोटाला फैसला: लालू यादव को साढ़े तीन साल कैद की सजा, 5 लाख का जुर्माना

चारा घोटाले से जुड़े एक मामले में रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने आज (6 जनवरी) लालू प्रसाद यादव को साढ़े तीन साल की सजा और 5 लाख का जुर्माना लगाया है। देवघर ट्रेजरी मामले में फैसला वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनाई गई है। अब लालू यादव को इस अदालत से जमानत नहीं मिल सकेगी। उन्हें जमानत के लिए हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाना होगा। अगर लालू प्रसाद यादव 5 लाख रुपये का जुर्माना नहीं चुकाते है तो उन्हें 6 महीने की अतिरिक्त सजा भुगतनी होगी।

इस मामले में कुल 16 लोगों को दोषी ठहराया गया था। लालू के अलावा फूल चंद, महेश प्रसाद, जुलियस, सुनील कुमार, सुशील कुमार, सुधीर कुमार और राजाराम को भी 3.5 साल कैद व 5 लाख रुपये की सजा दी गई है।

वर्ष 1990 से 1994 के बीच देवघर कोषागार से 89 लाख, 27 हजार रुपये की फर्जीवाड़ा कर अवैध ढंग से पशु चारे के नाम पर निकासी के इस मामले में कुल 38 लोग आरोपी थे, जिनके खिलाफ सीबीआई ने 27 अक्तूबर 1997 को मुकदमा दर्ज किया था और लगभग 21 साल बाद इस मामले में गत 23 दिसंबर को फैसला आया।

सीबीआई की विशेष अदालत ने चारा घोटाले के इस मामले में 23 दिसंबर को लालू प्रसाद समेत तीन नेताओं, तीन आईएएस अधिकारियों के अलावा पशुपालन विभाग के तत्कालीन अधिकारी कृष्ण कुमार प्रसाद, पशु चिकित्साधिकारी सुबीर भट्टाचार्य तथा आठ चारा आपूर्तिकर्ताओं सुशील कुमार झा, सुनील कुमार सिन्हा, राजाराम जोशी, गोपीनाथ दास, संजय कुमार अग्रवाल, ज्योति कुमार झा, सुनील गांधी तथा त्रिपुरारी मोहन प्रसाद को अदालत ने दोषी करार देकर जेल भेज दिया था।

इस केस में दोषियों को रांची की अदालत से जमानत नहीं मिलेगी। उन्हें जमानत के लिए हाई कोर्ट का रुख करना होगा।

जेडीयू नेता केसी त्यागी ने कहा कि हम न्यायालय के इस फैसले का स्वागत करते हैं। यह बिहार की राजनीति के लिए एेतिहासिक फैसला है। यह एक अध्याय का अंत है।

कोर्ट के इस फैसले पर लालू यादव के बेटे तेजस्वी यादव ने कहा कि न्यायपालिका ने अपना काम किया है। हम कोर्ट के फैसले की कॉपी आने के बाद हाई कोर्ट जाकर बेल के लिए अप्लाई करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा, अदालतों को 'सुपर गार्जियन' नहीं बनना चाहिए

भारत में सुप्रीम कोर्ट ने एक लड़की की इच्छा से सहमति जताते हुए कहा है कि वह अब बालिग है और अपनी स्वतंत्रता का उपयोग करने की हकदार है। कोर्ट ने आगे कहा कि अदालतों को 'सुपर गार्जियन' नहीं बनना चाहिए।

दरअसल, इस लड़की को अपने संरक्षण में रखने के लिए अलग रह रहे उसके माता-पिता कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर तथा न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की सदस्यता वाली एक पीठ ने खचाखच भरे अदालत कक्ष में 18 वर्षीया लड़की से बात की। लड़की ने कहा कि वह बालिग हो गई है और कुवैत में पढ़ाई कर रही है तथा अपने पिता के साथ रहना चाहती है।

न्यायालय ने कहा कि लड़की ने बेहिचक कहा है कि वह अपना करियर बनाने के लिए कुवैत वापस जाने का इरादा रखती है। ऐसी स्थिति में हमारा यह मानना है कि बालिग होने के नाते वह अपनी पसंद के अनुसार चलने की हकदार हैं तथा न्यायालय इस पहलू पर विचार नहीं कर सकता कि उस पर उसके पिता का दबाव है या नहीं। गौरतलब है कि लड़की की केरल निवासी मां उसे अपने संरक्षण में रखना चाहती है। उसके पिता कुवैत में रहते हैं।

न्यायालय केरल निवासी महिला की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जो उससे अलग कुवैत में रह रहे अपने पति के खिलाफ अवमानना कार्रवाई की मांग कर रही थी। महिला की दलील है कि उसकी बेटी और बेटे के संरक्षण के विषय पर उसके पति न्यायालय के आदेश की अवमानना कर रहे हैं। लड़की अब बालिग हो गई है, जबकि लड़का अब भी नाबालिग है। मामले का निपटारा करते हुए न्यायालय ने कहा कि पिता को अपने बेटे से मिलने के लिए हर यात्रा पर उसकी मां को 50,000 रूपया अदा करना होगा।

एयरलाइन कंपनियां यात्रियों की फ्लाइट जानबूझ कर छुड़वा देती हैं

भारत में एयरलाइन कंपनियां यात्रियों की फ्लाइट जानबूझ कर छुड़वा देती हैं। यहीं नहीं, त्यौहारों, छुट्टियों और प्राकृतिक आपदाओं के दौरान वे उनसे हवाई सफर के लिए मनमाने दाम वसूलती हैं। एयरलाइन कंपनियां ये तरीके अपने मुनाफे को बढ़ाने के लिए अपनाती हैं। ऐसी ही एयरलाइन कंपनियों में से एक नाम सामने आया है, जो इंडिगो एयरलाइन का है। ये बातें संसदीय कमेटी की रिपोर्ट में कही गई है। रिपोर्ट खुलकर एयलाइन सेक्टर में यात्रियों के साथ होने वाले दुर्व्यवहार का मुद्दा उठाती है, इसके साथ ही चौंकाने वाले खुलासे भी करती है।

भारत में गुरुवार को राज्यसभा में संसद की स्टैंडिंग कमेंटी ने एयरलाइन में यात्रियों को दी जाने वाली सुविधाओं से जुड़ी हुई एक रिपोर्ट पेश की। संसदीय कमेटी ने इसमें एयलाइन कंपनियों द्वारा यात्रियों से त्यौहारों, छुट्टियों, प्राकृतिक आपदाओं और राजनीतिक/सामाजिक तनाव के दौरान हवाई सफर के लिए मनमाफिक कीमतें वसूलने की बात कही है।

कमेटी ने यात्रियों के साथ एयरलाइन स्टाफ के दुर्व्यवहार का मुद्दा भी उठाया है। कमेटी के सदस्यों ने एयरलाइन स्टाफ के दुर्व्यवहार की घटनाओं के बारे में बताते हुए (खासकर इंडिगो) माना कि एयरलाइन स्टाफ का रवैया अधिकतर मौकों पर बेहद असभ्य पाया गया। कमेटी ने यह भी पाया कि कुछ निजी एयरलाइन कंपनियां चेकइन काउंटर्स पर लंबी लाइनें लगवाती हैं, ताकि यात्रियों की फ्लाइट छूट जाए। ऐसे में उन्हें दोबारा महंगे दामों पर आगे की फ्लाइट का टिकट लेना पड़ता है, जिससे सीधे तौर पर कंपनी को फायदा होता है।

बता दें कि बीते साल नवंबर में एयरलाइन स्टाफ के दुर्व्यवहार का मामला सोशल मीडिया पर एक वीडियो के जरिए सामने आया था। वीडियो क्लिप में इंडिगो एयरलाइन के दो कर्मचारी एक यात्री से हाथापाई करते पाए गए थे। घटना के दौरान एयरलाइन का एक स्टाफ उस यात्री को पकड़े था और दो कर्मचारी उसे इस पीट रहे थे और गालियां दे रहे थे।