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जम्मू-कश्मीर: कुपवाड़ा के माछिल सेक्टर में हिमस्खलन, तीन जवान शहीद, एक घायल

भारत में जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के माछिल सेक्टर में हिमस्खलन की चपेट में आर्मी पोस्ट आ गई, जिसमें तीन जवान शहीद हो गए, जबकि एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया। सेना के एक अधिकारी ने बताया, ''माछिल सेक्टर में सेना ने तीन जवानों को खो दिया है।'' अधिकारी ने कहा कि तीनों जवानों के शव बरामद कर लिए गए हैं। शहीद जवानों में हवलदार कमलेश सिंह, नायक बलवीर और सिपाही राजिंदर शामिल हैं।

बताया जा रहा है कि माछिल सेक्टर के सोना पंडी गली के पास स्थित 21 राजपूत सेना की चौकी पर शाम करीब साढ़े चार बजे हिमस्खलन हुआ, जिसकी चपेट में आर्मी चौकी आ गई। हालांकि, सेना ने तीन दिन पहले ही हिमस्खलन को लेकर चेतावनी जारी की थी। खबरों के मुताबिक, इस हिमस्खलन में सेना के जवानों ने अपने आपको बचाने की कोशिश की, लेकिन वह खुद को बचा नहीं पाए। वहीं घायल जवान को गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती करा दिया गया है।

वहीं अफगगानिस्तान-ताजिकिस्तान बॉर्डर पर 6.2 तीव्रता के झटके महसूस किए गए थे और भूंकप के बाद बर्फीले तूफान की चेतावनी जारी की गई थी। यह चेतावनी दो दिन पहले कुपवाड़ा, बांदीपुर, शोपियां और कारगिल के जिलों में जारी की गई थी।

बता दें कि बीते वर्ष के आखिर (दिसंबर) में जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले के गुरेज सेक्टर में हिमस्खलन हुआ था। उस हिमस्खलन में एक सैन्य चौकी चपेट में आ थी और भारतीय सेना के 6 जवान लापता हो गए थे। हालांकि कुपवाड़ा में आए हिमस्खलन में सेना के जवान के लापता होने की कोई खबर नहीं है।

नीतीश कुमार के बलात्‍कार राज की प्राथमिकताएं सिर्फ कुर्सी बचाना है : तेजस्‍वी यादव

बिहार के पूर्व उपमुख्‍यमंत्री तेजस्‍वी यादव ने नीतीश कुमार सरकार पर बड़ा हमला बोला है। राष्‍ट्रीय जनता दल (राजद) के नेता ने मुंगेर के असरगंज थाना क्षेत्र में एक छह वर्षीया मासूम बच्‍ची की दुष्‍कर्म के बाद हत्‍या के मामले पर प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की है।

तेजस्‍वी ने ट्वीट किया, ''नीतीश कुमार के बलात्‍कार राज में छह साल की बिटिया के साथ जघन्‍य दुष्‍कर्म कर उसकी हत्‍या कर दी गई और आदरणीय मुख्‍यमंत्री हैं कि अपनी कुर्सी बचाने के चक्‍कर में बीजेपी की परिक्रमा कर रहे हैं। जनादेश का बलात्‍कार करने के बाद सरकार की प्राथमिकताएं सिर्फ कुर्सी बचाना है।''

लोगों ने भी घटना पर तीखी प्रतिक्रिया व्‍यक्‍त की है। बृंद कुमार ने ट्वीट किया, ''नीतीश कुमार जी को कुर्सी प्‍यारी लगती है, छह साल की बिटिया नहीं। इसीलिए संघ की परिक्रमा कर रहे हैं ताकि कुर्सी सुरक्षित रहे।'' ऋतेश ने लिखा, ''मंगलराज चल रहा है ..... कोई नहीं बोलेगा अब।'' दीपक ने ट्वीट किया, ''बलात्‍कार, चोरी, डकैती ये सब तो गुंडाराज में होता है। आपका राज तो रहा नहीं, पर गुंडे तो होंगे ही।'' नीतीश ने लिखा, ''साहब अब मुख्‍यमंत्री कम और विधायक ज्‍यादा लगते हैं। सृजन (घोटाले) से बचने के लिए मोदी-शाह के दरबार में लौट गए हैं।''

जानकारी के मुताबिक, बुधवार (31 जनवरी) सुबह सात बजे छह साल की मासूम घर से कुछ सामान लेने के लिए निकली थी, लेकिन बहुत देर बाद तक भी वह वापस नहीं लौटी। बच्‍ची के माता-पिता ने बहुत खोजबीन के बाद थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। परिजनों को 1 फरवरी को पास के ही एक तालाब में एक बच्‍ची का शव मिलने की जानकारी मिली, जिसे परिजनों ने पहचान लिया। इस घटना से गुस्‍साए ग्रामीणों ने सुल्तानगंज-देवघर मुख्य मार्ग को जाम कर दिया और आगजनी की थी। नाराज प्रदर्शनकारियों ने असरगंज थाना में घुसकर पथराव और तोड़फोड़ शुरू कर दी थी। हंगामा कर रहे ग्रामीण और परिजन आरोपी को गिरफ्तार करने की मांग कर रहे थे। गुस्‍साए लोगों ने एक वाहन में आग भी लगा दी थी। पुलिस अधिकारियों द्वारा हत्‍यारोपियों को जल्‍द से जल्‍द गिरफ्तार करने के आश्‍वासन के बाद प्रदर्शनकारी शांत हुए थे।

राजस्थान उपचुनाव परिणाम 2018: अपने ही गढ़ में बुरी तरह से हारी भाजपा, तीनों सीटों पर कांग्रेस का कब्जा

राजस्‍थान उपचुनाव में कांग्रेस ने बड़ी जीत दर्ज की है। अलवर सीट से कांग्रेस उम्‍मीदवार करण सिंह यादव ने भाजपा के जसवंत सिंह यादव को 1,56,319 वोट से हरा दिया है। अजमेर में भी कांग्रेस के रघु शर्मा ने जीत दर्ज की है। इसके अलावा मांडलगढ़ विधानसभा सीट पर कांग्रेस उम्‍मीदवार विवेक धाकड़ ने भाजपा के शक्ति सिंह को 12,976 मतों से हरा दिया है।

हालांकि पूर्व में अजमेर लोकसभा क्षेत्र से कांग्रेस के रघु शर्मा को भाजपा के राम स्वरूप लांबा से चुनौती मिल रही थी, लेकिन बाद भाजपा उम्मीदवार पिछड़ गया। राज्य में इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं। कांग्रेस पार्टी के नेता और पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि उपचुनाव के ये नतीजे 2019 लोकसभा चुनाव की झलक हैं।

गहलोत ने संवाददाताओं से कहा, ''यह उपचुनाव भाजपा की विभाजनकारी राजनीति के खिलाफ हैं।'' वहीं उप चुनाव नतीजें आने के बाद भाजपा ने अपनी हार स्वीकार कर ली है।

राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। ट्विटर पर उन्होंने लिखा है, ''जनता की सेवा का जो प्रण चार साल पहले लिया था, उसे पूरा करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। आज तीनों निर्वाचन क्षेत्रों में जो फैसला जनता ने दिया है, वह सिर आंखों पर।''

एक अन्य ट्वीट में उन्होंने लिखा, ''हम राजस्थान के विकास के लिए प्रतिबद्ध हैं और रहेंगे। मैं भाजपा प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं और नेताओं का आभार व्यक्त करती हूं, जिन्होंने इन चुनावों में मेहनत की, लेकिन अब हमें और कड़ी मेहनत करने की जरूरत है।''

दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस ने नोआपारा विधानसभा सीट पर जीत दर्ज कर ली। दोनों निर्वाचन क्षेत्रों में भाजपा नंबर दो की पार्टी बनकर उभरी है और कांग्रेस बुरी तरह से पिछड़कर चौथे स्थान पर है। नोआपारा में कांग्रेस विधायक मधुसूदन घोष के निधन के कारण उपचुनाव हुआ। यहां तृणमूल के सुनील सिंह ने अपने प्रतिद्वंद्वी भाजपा के संदीप बनर्जी को 63,000 से ज्यादा मतों से मात दी। मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) की उम्मीदवार गार्गी चटर्जी तीसरे स्थान पर रहीं। कांग्रेस चौथे स्थान पर रही और उसकी जमानत जब्त हो गई। उलुबेरिया लोकसभा सीट पर तृणमूल की सजदा अहमद ने भाजपा के अनुपम मलिक को 4,07,270 मतों से हरा दिया। यह सीट सजदा के पति सुल्‍तान अहमद के निधन के बाद खाली हुई थी।

कश्‍मीर: अब सेना ने पुलिस पर एफआईआर की

भारत के जम्मू-कश्मीर में शोपियां फायरिंग मामले में नया मोड़ आ गया है। जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस के बाद अब सेना ने काउंटर एफआईआर दर्ज कराई है। इसमें किसी के नाम का उल्‍लेख नहीं है। सेना का कहना है क‍ि सेना के काफिले पर पत्‍थरबाजी करने वालों की पहचान करना पुलिस का काम है। सेना के उत्‍तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल देवराज अनबु ने बुधवार (31 जनवरी) को बताया कि आंतरिक जांच में जवानों की कोई गलती सामने नहीं आई है।

कमांडर के मुताबिक, जवानों को अंतिम कदम उठाने के लिए उकसाया गया था, जिसके बाद आत्‍मरक्षा और सरकारी संपत्ति को बचाने के लिए फायरिंग करनी पड़ी थी। जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस ने बिना कुछ सोचे-समझे समय से पहले ही एफआईआर दर्ज कर ली।

27 जनवरी को सेना की फायरिंग में दो युवाओं की मौत हो गई थी। इसके बाद शोपियां में हिंसा भड़क गई थी। इसमें अब तक कुल तीन लोगों की मौत हो चुकी है। इस घटना के बाद पुलिस ने रविवार (28 जनवरी) को सेना की गढ़वाल यूनिट के 10 जवानों के खिलाफ धारा 302 (हत्‍या) और 307 (हत्‍या का प्रयास) के तहत केस दर्ज कर लिया था। एफआईआर में सैन्‍य काफिले का नेतृत्‍व करने वाले मेजर का नाम भी शामिल था। इसके बाद जम्‍मू-कश्‍मीर पुलिस के कदम की आलोचना होने लगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सेना के 30 ट्रकों का काफिला दक्षिण कश्‍मीर के शोपियां जिले से होकर गुजर रहा था। कुछ ट्रक काफिले से अलग हो गए थे। दो सौ से भी ज्‍यादा पत्‍थरबाजों की भीड़ ने इनमें सवार दस जवानों को घेर लिया था। जवानों ने उन्‍हें समझाने की कोशिश की थी, लेकिन उनका प्रयास सफल नहीं रहा था। एक सीनियर जवान को सिर में गंभीर चोट आने के बाद सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों को तितर-बितर करने के लिए फायरिंग शुरू कर दी थी। इस घटना में आम नागरिकों के मारे जाने के बाद शोपियां में एक बार फिर से हिंसक विरोध-प्रदर्शन शुरू हो गया।

जवानों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के कदम का गठबंधन में शामिल भाजपा ने विरोध शुरू कर दिया। इसकी गूंज विधानसभा में भी सुनाई पड़ी। जम्मू-कश्मीर की मुख्‍यमंत्री महबूबा मुफ्ती को कहना पड़ा कि रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण से बात करने के बाद ही केस दर्ज किया गया था। रक्षा मंत्रालय के प्रवक्‍ता पहले ही कह चुके हैं कि प्रदर्शनकारियों द्वारा जेसीओ को मारने की कोशिश करने के बाद जवानों ने फायरिंग की थी।

इस मसले पर जम्‍मू-कश्‍मीर में सत्‍तारूढ़ पीडीपी-भाजपा में तनातनी बढ़ गई है। बीजेपी एफआईआर को वापस लेने की मांग कर रही है। पीडीपी ने इसे खारिज कर दिया है। मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा है कि जांच को तार्किक नतीजे तक पहुंचाया जाएगा।

इन सबके बीच सोशल मीडिया पर एफआईआर के दायरे में आए मेजर को बचाने के लिए मुहिम शुरू कर दी गई है। उत्तरी कमान के कमांडर के बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि सेना पूरी तरह से जवानों के साथ खड़ी है।

मालूम हो कि शोपियां पिछले साल भी हिंसक विरोध के केंद्र में था। स्‍कूल और कॉलेज के छात्रों ने भी सुरक्षाबलों के खिलाफ पत्‍थरबाजी की थी।

2014 के मुजफ्फरनगर की तरह 2019 की तैयारी है कासगंज दंगा

भारत में उत्तर प्रदेश के कासगंज में गणतंत्र दिवस पर भड़की हिंसा के बाद राजनीति तेज हो गई है। पक्ष-विपक्ष के साथ कई संगठनों और पूर्व अफसरों ने भी आरोप-प्रत्यारोप लगाने शुरू किए हैं। गुजरात के बर्खास्त आईपीएस अफसर संजीव भट्ट ने उत्तर प्रदेश की कासगंज हिंसा के पीछे राजनीतिक साजिश की ओर इशारा किया है। उनके ट्वीट पर लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएं आ रहीं हैं।

संजीव भट्ट ने 28 जनवरी को 12.52 मिनट पर ट्वीट कर कहा है, ''कासगंज तो शुरुआत है, यह लो-ग्रेड सांप्रदायिक बुखार 2019 के लोकसभा चुनाव तक जारी रहेगा। ठीक उसी तरह जैसे 2014 के लिए मुजफ्फरनगर कांड हुआ था। इस बार यह और बड़े पैमाने पर होगा और इसका असर गहरा होगा।''

उत्तर प्रदेश के छोटे जिले कासगंज में गणतंत्र दिवस के मौके पर उस वक्त हिंसा भडक गई थी, जब विश्व हिन्दू परिषद् और अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद् के कुछ लोग तिरंगा झंडा और भगवा झंडा लेकर तिरंगा यात्रा निकाल रहे थे, जबकि मुस्लिम गणतंत्र दिवस माना रहे थे और तिरंगा झंडा फहराने की तैयारी कर रहे थे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, रास्ता मांगे जाने को लेकर हुई कहासुनी बड़े दंगे में बदल गई। इसी दौरान चली गोली में चंदन गुप्ता नामक युवक की मौत हो गई। चंदन के अंतिम संस्कार के बाद भी कस्बे में हिंसा भड़क उठी और दुकानें और गाड़ियां जलाने की घटना हुई। चार दिन से लगातार कासगंज में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है।

कानून-व्यवस्था की बहाली के लिए पुलिस ने अब तक दोनों पक्षों से 112 लोगों को गिरफ्तार किया है। इस घटना में सात लोगों के खिलाफ नामजद केस दर्ज किया गया है। पुलिस अफसरों के मुताबिक, वीडियो फुटेज के आधार पर हिंसा में शामिल लोगों को चिह्नित कर गिरफ्तार किया जा रहा है। मुख्य आरोपी शकील फरार बताया जाता है। उसके घर से देसी बम और पिस्टल बरामद होने की बात कही जा रही। नवनियुक्त डीजीपी ओपी सिंह ने स्थिति को नियंत्रण में बताया है। उन्होंने कहा है कि कस्बे में तनावपूर्ण शांति है। हिंसा में शामिल लोगों को चिह्नित कर गिरफ्तार किया जा रहा है। कासगंज में नेताओं के जाने पर भी रोक लगा दी गई है ताकि कोई नेता आम जनता की भावनाएं नहीं भड़कायें।

डीएम ने लिखा, मुस्लिम मोहल्लों में जबरन जुलूस ले जाओ, पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाओ, ये रिवाज बन गया है

गणतंत्र दिवस पर उत्तर प्रदेश के कासगंज में हुए साम्प्रदायिक दंगे पर बरेली के जिलाधिकारी राघवेन्द्र विक्रम सिंह ने लिखा है कि आज समाज में इस तरह के बेवजह विवाद खड़े करने का रिवाज बन चुका है। उन्होंने सोशल मीडिया फेसबुक पर लिखा, ''अजब रिवाज बन गया है। मुस्लिम मोहल्लों में ज़बरदस्ती जलूस ले जाओ और पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे लगाओ। क्यों भाई, वे पकिस्तानी हैं क्या? यही यहां बरेली में खैलम में हुआ था।  फिर पथराव हुआ, मुकदमे लिखे गए ...  बता दें कि कासगंज में 26 जनवरी को तिरंगा यात्रा के दौरान दो समुदायों में विवाद हुआ, उसके बाद साम्प्रदायिक हिंसा हुई। धीरे-धीरे पूरा कासगंज सुलग उठा। हालांकि, अब वहां हालात नियंत्रण में है।

जिस फेसबुक अकाउंट से यह लिखा गया है, उसके प्रोफाइल में आर विक्रम सिंह के परिचय के रूप में लिखा गया है कि उन्होंने सेना में भी नौकरी की है। सेना की शॉर्ट सर्विस कमीशन के दौरान उन्होंने जम्मू-कश्मीर, रांची और हैदराबाद में अपनी सेवाएं दी हैं। इसके बाद उन्होंने उत्तर प्रदेश कैडर में सिविल सर्विस में योगदान दिया। आर विक्रम सिंह बहराइच के रहने वाले हैं और गोरखपुर यूनिवर्सिटी से अर्थशास्त्र में एमए हैं।

बता दें कि कासगंज साम्प्रदायिक दंगे को उत्तर प्रदेश के गवर्नर राम नाईक ने उत्तर प्रदेश का कलंक बताया है और इसे शर्मनाक करार दिया है। राज्यपाल ने कहा कि राज्य  की योगी आदित्यनाथ सरकार इस मामले की जांच करवा रही है और सख्त कदम उठा रही है। राज्यपाल ने भरोसा जताया कि राज्य में दोबारा इस तरह की घटना ना हो , इसके लिए सरकार जरूरी कदम उठाए।

चंद्रबाबू नायडू ने कहा, रिश्ते नहीं निभाना चाहती बीजेपी

शिवसेना के बाद अब भारतीय जनता पार्टी को तेलुगू देशम पार्टी की ओर से भी जोरदार झटका लग सकता है। आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री और टीडीपी के अध्यक्ष चंद्रबाबू नायडू ने बीजेपी से रिश्ते खत्म करने की ओर इशारा किया है।

उन्होंने कहा है कि बीजेपी दोस्ती नहीं निभाना चाहती। रविवार को नायडू ने कहा, ''बीजेपी रिश्ते नहीं निभाना चाह रही है। हम अकेले की चुनाव लड़ सकते हैं। हम लोग बीजेपी के साथ मित्र धर्म निभाने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अगर वे लोग इस गठबंधन को आगे नहीं रखना चाहते हैं तो हम अपने अलग रास्ते जाएंगे।''

हालांकि टीडीपी की ओर से अभी तक किसी तरह की आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है, लेकिन नायडू का यह बयान सीधा एनडीए के साथ रिश्ते खत्म करने की ओर इशारा कर रहा है। राज्य में बीजेपी नेताओं द्वारा पिछले कई दिनों से टीडीपी की आलोचना करने की खबरें आ रही थीं। इन आलोचनाओं के बाद रविवार को नायडू ने रिश्ते खत्म करने की बात कही। उन्होंने इन सबके लिए बीजेपी को ही जिम्मेदार ठहराया।

बता दें कि इससे पहले बीजेपी को शिवसेना से जबरदस्त झटका लग चुका है। शिवसेना ने बीजेपी के साथ लंबे समय से चल रही तल्खी के बाद हाल ही में एनडीए से गठबंधन तोड़ने का ऐलान कर दिया। शिवसेना ने कहा कि वह 2019 का चुनाव अकेले ही लड़ेगी और विधानसभा चुनाव में भी अकेले ही मैदान में उतरेगी।

उद्भव ठाकरे ने कहा, कानून को गूंगा और बहरा बनाने की कोशिश की जा रही है

भारत में सुप्रीम कोर्ट से जुड़े जज विवाद में शनिवार को शिवसेना भी कूद पड़ी। शिवसेना प्रमुख उद्भव ठाकरे ने चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) दीपक मिश्रा और न्याय प्रणाली में अनियमितताओं के खिलाफ हुंकार भरने को लेकर जस्टिस जे चेलामेश्वर समेत चार वरिष्ठ जजों की तारीफ की। उन्होंने यह भी कहा कि कानून को गूंगा और बहरा बनाने की कोशिश की जा रही है। सरकार को इस मामले में दखल नहीं देनी चाहिए।

ठाकरे ने इस बाबत पत्रकारों से बातचीत की। उन्होंने कहा, ''उन जजों के फैसले की सराहना की जानी चाहिए। उन चारों के खिलाफ जांच बिठाए जाने की संभावना है। हालांकि, यह जांच निष्पक्ष होनी चाहिए।''

उन्होंने राष्ट्रपति के शहर में आने को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा, ''ऐसा क्या महत्वपूर्ण हो रहा है, जो राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद मुंबई शहर आ रहे हैं?'' ठाकरे ने आगे बताया, ''न्याय तंत्र को गूंगा और बहरा बनाने की कोशिश की जा रही है। ऐसे में सवाल उठता है कि क्या लोग देश के प्रति अपनी जिम्मेदारी को निभा पा रहे हैं? सिर्फ चुनाव जीतना ही प्रशासन करना नहीं है।'' उन्होंने आगे बताया, ''सरकार को इसमें किसी तरह से भी दखल नहीं देना चाहिए। न्याय तंत्र को उसका काम करने दिए जाए।''

कांग्रेस ने पूछा, पीएम ने नृपेंद्र मिश्रा को सीजेआई दीपक मिश्रा के घर क्यों भेजा था?

भारत में सुप्रीम कोर्ट जज विवाद पर कांग्रेस ने शनिवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से सवाल किया। कांग्रेस ने  पूछा कि चार वरिष्ठ जजों के सुप्रीम कोर्ट की अनियमितताओं को लेकर प्रेस कॉन्फ्रेंस करने के अगले दिन उन्होंने प्रिंसिपल सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्रा को चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया (सीजेआई) दीपक मिश्रा के घर क्यों भेजा था?

न्यूज एजेंसी एएनआई ने नृपेंद्र मिश्रा की एक तस्वीर पोस्ट की, जिसमें वह शनिवार को सीजेआई के घर के बाहर अपनी कार में बैठे नजर आ रहे थे। कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने इसी बाबत एक ट्वीट किया। उन्होंने पूछा, ''पीएम के प्रिंसिपल सेक्रेटरी नृपेंद्र मिश्रा सीजेआई के आवास 5 कृष्णा मेनन मार्ग पर मिलने आए थे। पीएम को इस पर जवाब देना चाहिए कि आखिर उन्होंने मिश्रा को क्यों भेजा था?''

प्रिंसिपल सेक्रेटरी ने इस बारे में एक चैनल से बात की। उन्होंने कहा कि उनकी मुलाकात सीजेआई से नहीं हुई। रिपोर्ट्स की मानें तो सीजेआई ने अन्य विवाद होने की आशंका के चलते उनसे मिलने से मना कर दिया था।

आपको बता दें कि शुक्रवार को (12 जनवरी) सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। दिल्ली में आयोजित इस कॉन्फ्रेंस में सुप्रीम कोर्ट में दूसरे नंबर के जज जस्टिस जे चेलामेश्वर समेत चार अन्य जजों ने सुप्रीम कोर्ट और सीजेआई दीपक मिश्रा की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाए थे। भारत के इतिहास में इस तरह का घटनाक्रम पहली बार हुआ था।

जस्टिस चेलामेश्वर ने इस दौरान कहा था कि सुप्रीम कोर्ट का प्रशासनिक काम सही से नहीं हो रहा है। उनके मुताबिक, ''हम चारों मीडिया का शुक्रिया अदा करना चाहते हैं। यह किसी भी देश के इतिहास में अभूतपूर्व घटना है, क्योंकि हमें इस तरह की ब्रीफिंग करने के लिए विवश होना पड़ा। हमने यह प्रेस कॉन्फ्रेंस इस वजह से की, ताकि बाद में कोई ये न कहे कि हमनें अपनी आत्मा बेच दी।''

मेरिट में आने वाले आरक्ष‍ित वर्ग के छात्रों का सामान्‍य वर्ग में दाखिला होगा: सुप्रीम कोर्ट

भारत में सुप्रीम कोर्ट ने फैसला सुनाया है कि कॉलेज में दाखिले के समय अगर आरक्षित श्रेणी से आने वाला छात्र/छात्रा अपनी प्रतिभा के दम पर मेरिट में आते हैं तो उनका दाखिला सामान्य श्रेणी में किया जाएगा। इतना ही नहीं, अगर मेरिट में आने वाला छात्र आरक्षित श्रेणी में ही दाखिला कराने का दावा करता है तो भी उसका दाखिला सामान्य श्रेणी में ही होगा। इन परिस्थितियों में उस छात्र की आरक्षित सीट अन्य आरक्षित छात्र को ही दी जाएगी, न कि सामान्य वर्ग के छात्र को दी जाएगी। गुरुवार को जस्टिस अरुण मिश्रा और जस्टिस एम शांतानागौदर की बेंच ने पटना हाई कोर्ट के इस फैसले पर मुहर लगाई।

आपको बता दें कि यह मामला बिहार का था, जहां पर मेडिकल कॉलेज के पोस्ट-ग्रेजुएट छात्र त्रिपुरी शरन ने पटना हाई कोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। कोर्ट ने कहा था कि अगर आरक्षित वर्ग का उम्मीदवार जो कि सामान्य मेरिट में चुना गया है, लेकिन आरक्षित सीट की मांग करता है तो उसके लिए सामान्य वर्ग की सीट पर ही विचार किया जाएगा। इसके साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि ऐसा करने से 50 प्रतिशत आरक्षित सीमा का नियम नहीं टूटेगा। यह केवल कॉलेज में दाखिले के लिए मान्य है, न कि नौकरी के लिए। अगर नौकरी के मामले की बात होती तो स्थिति अलग होंगी।

इतना ही नहीं, कोर्ट ने एक याचिकाकर्ता की उस याचिका को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि सामान्य सीटें केवल सामान्य वर्ग के लोगों के लिए ही रखी जाएं। याचिकाकर्ता का कहना था कि अगर आरक्षित वर्ग के लोगों को सामान्य वर्ग की सीटें दी जाएंगी तो उन लोगों के लिए सीटें कम पड़ जाएंगी। कोर्ट के इस फैसले के बाद यह साफ हो गया है कि किसी भी कॉलेज में कोटा वाले उम्मीदवार अपनी प्रतिभा से मेरिट में आते हैं तो उनका दाखिला सामान्य वर्ग की सीट पर ही होगा।