भारत

तेजस्‍वी यादव का आरोप, नीतीश जासूसी करवा रहे हैं, जहर देकर मारने की कोशिश कर रहे हैं

बिहार के पूर्व उपमुख्‍यमंत्री तेजस्‍वी यादव ने मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार पर गंभीर साजिश रचने का आरोप लगाया है। बुधवार (22 फरवरी) को तेजस्‍वी ने ट्वीट कर कहा, ''नीतीश कुमार हमारी संविधान बचाओ न्याय यात्रा को मिल रहे अपार जनसमर्थन से घबराकर बौखलाहट में है। विश्वस्त सूत्रों से ज्ञात हुआ है नीतीश सरकार द्वारा मेरे ख़िलाफ गंभीर साज़िश की जा रही है।''

एक अन्‍य ट्वीट में उन्‍होंने कहा, ''फ़ोन टैपिंग के बाद अब सर्किट हाउस में मेरे ठहरने से लेकर, खाने-पीने की चीज़ों में नशीले और विषैले पदार्थ मिलाने की कोशिश के साथ-साथ सभास्थल तक पीछा कर जासूसी करवाई जा रही है। छवि बिगाड़ने और जानमाल का नुक़सान पहुँचाने का कुचक्र रचा जा रहा है।''

तेजस्‍वी ने नीतीश पर बड़ा आरोप लगाते हुए ट्वीट किया, ''देश जानता है नीतीश कुमार अलोकतांत्रिक प्रवृति के नकारात्मक एवं अवसरवादी व्यक्ति है जो विरोधियो को निपटाने के लिए किसी भी स्तर तक जा सकते है। मुझे यह समझ में नही आ रहा है एक 28वर्ष के नौजवान ने उनका क्या बिगाड़ा है? उल्टा उन्होंने हमारे सहयोग से बहुमत प्राप्तकर जनादेश की डकैती की है।''

बिहार में आलू उत्पादक किसानों की भिखारी जैसी हालत

बिहार में आलू उत्पादक किसानों की भिखारी जैसी हालत हो गई है। आलू उत्पादन की लागत 1700 रुपये प्रति कट्ठा है, वहीं किसानों को आलू की बिक्री से 1250 रुपये प्रति कट्ठा की कमाई हो रही है। बिहार में किसानों को प्रति कट्ठा 500 रुपये का नुकसान हो रहा है। समस्तीपुर के ताजपुर प्रखंड में किसान महासभा और भाकपा (माले) की टीम ने किसानों से मुलाकात की और खेतों का जायजा लिया।

अखिल भारतीय किसान महासभा और भाकपा (माले) की टीम में किसान नेता ब्रहमदेव प्रसाद सिंह, राजदेव प्रसाद सिंह एवं माले प्रखंड सचिव सह इनौस जिला अध्यक्ष सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने आज फतेहपुर, ताजपुर, रामापुर महेशपुर आदि पंचायतों के आलू उत्पादक किसानों से मुलाकात की और आलू के खेतों का जायजा लिया।

दशरथ सिंह, हितनारायण सिंह, रवींद्र प्रसाद सिंह, रामरतन सिंह, रामवरण सिंह समेत अन्य किसानों ने कहा कि प्रति कट्ठा आलू की खेती में 400 रुपये की 20 किलो खल्ली, रोपाई 150 रुपये, 75 रुपये की 3 किलो डी ए पी खाद, 25 रुपये की 2 किलो पोटाश, 16 रुपये की 2 किलो यूरिया, खेत जूताई 150 रुपये, 200 रुपये की 30 किलो बीज, पटवन 100 रुपये, निकौनी 250 रुपये, खोदाई 250 रुपये कुल मिलाकर करीब 1700 रुपये प्रति कट्ठा से अधिक का लागत आता है। अगर पाला से बच गया तो बेहतर फसल होने की स्थिति में अधिकतम उपज 2 क्विंटल 50 किलो होता है। अभी बिक्री 500 रुपये प्रति क्विंटल है। प्रति कट्ठा 1250 रुपये की आमदनी है। इस हिसाब से प्रति कट्ठा करीब 500 रुपये किसान को नुकसान उठाना पडता है। इस वजह से किसान का हाल भिखारी जैसा है।

किसान नेता ब्रहमदेव प्रसाद सिंह एवं माले नेता सुरेंद्र प्रसाद सिंह ने नीतीश सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि जल्द से जल्द कृषि पदाधिकारी खेतों का दौरा कर सरकार को प्रतिवेदन दें, सरकार किसानों को अनुदान दें, सरकारी स्तर पर आलू की खरीद हो, आलू उत्पादक किसानों को सरकार मुआवजा दें। अगर ऐसा नहीं हुआ तो होली बाद जिला कृषि पदाधिकारी का घेराव करेंगे।

पीएनबी घोटाला: धीरू भाई अंबानी की भतीजी गिरफ्तार

सीबीआई ने पंजाब नेशनल बैंक में 11,400 करोड़ रूपए के घोटाले की जांच के सिलसिले में मुख्य आरोपी नीरव मोदी की फाइव स्टार डायमंड कंपनी के अध्यक्ष (वित्त) और फायर स्टार के सीएफओ विपुल अंबानी को मंगलवार (20 फरवरी, 2018) को गिरफ्तार कर लिया है। सीबीआई ने यह जानकारी देते हुए बताया कि इस मामले में यह पहली बड़ी गिरफ्तारी है।

पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के दो मुख्य आरोपी नीरव मोदी तथा मेहुल चोकसी भारत छोड़ कर जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि इस घोटाला में दर्ज अपनी दो एफ आई आर के सिलसिले में जांच एजेंसी ने चार अन्य वरिष्ठ कार्यपालक अधिकारियों को भी गिरफ्तार किया। विपुल अंबानी को कार्यपालक सहायक कविता मानकीकर तथा वरिष्ठ कार्यपालक अधिकारी अर्जुन पाटिल के साथ, सीबीआई द्वारा दर्ज पहली एफ आई आर के सिलसिले में गिरफ्तार किया गया।

बता दें कि कविता धीरूर भाई अंबामी की भतीजी हैं। इस एफ आई आर के तहत, 6,498 करोड़ रूपए मूल्य के 150 'लैटर्स ऑफ अंडरटेकिंग' (एल ओ यू) की जांच की जा रही है।

एल ओ यू वह गारंटी होता है जो जारीकर्ता बैंक उन भारतीय बैंकों को आवेदक को अल्पकालिक कर्ज देने के लिए देता है जिनकी विदेशों में शाखाएं हैं। कविता मानकीकर तीन कंपनियों डायमंड आर यू एस, स्टेलर डायमंड, सोलर एक्सपोर्ट्स में भी महत्वपूर्ण पदाधिकारी हैं। तीनों कंपनियां 31 जनवरी को जांच एजेंसी द्वारा दर्ज एफ आई आर में आरोपी के तौर पर सूचीबद्ध हैं।

सीबीआई के अधिकारियों ने बताया कि एफ आई आर में हीरा व्यापारी नीरव मोदी, उसकी पत्नी एमी, भाई निशाल और उसके रिश्तेदार मेहुल चोकसी के नाम बतौर आरोपी हैं। ये सभी लोग जनवरी के पहले सप्ताह में भारत छोड़ कर भाग चुके हैं। सूत्रों ने बताया कि शेष दो व्यक्ति कपिल खंडेलवाल और नितेन शाही को जांच एजेंसी द्वारा दर्ज दूसरी एफ आई आर के सिलसिले में मंगलवार (20 फरवरी, 2018) को गिरफ्तार किया गया। सीबीआई ने दूसरी एफ आई आर 15 फरवरी को चोकसी तथा उसकी तीन कंपनियों के खिलाफ दर्ज की थी।

इस घोटाला में जांच 4,886 करोड़ रूपए के 143 एल ओ यू पंजाब नेशनल बैंक के अधिकारियों द्वारा फर्जी तरीके से जारी किए जाने को लेकर की जा रही है। कपिल खंडेलवाल नक्षत्र समूह और गीतांजलि समूह के सी एफ ओ तथा शाही गीतांजलि समूह के मैनेजर हैं। अधिकारियों ने बताया कि सीबीआई ने आज पंजाब नेशनल बैंक के एक कार्यकारी निदेशक तथा नौ अन्य अधिकारियों से 11,400 करोड़ रूपए मूल्य की गारंटी मोदी तथा चोकसी को जारी किए जाने के सिलसिले में पूछताछ की।

दिल्ली पुलिस ने आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान को गिरफ्तार किया

दिल्ली में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी और मुख्य सचिव के बीच पैदा हुआ विवाद बढ़ता ही जा रहा है। दिल्ली पुलिस ने इस मामले में आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्ला खान को हिरासत में लिया है। इससे पहले उन्होंने एक ट्वीट कर कहा था, ''थक कर न बैठ, ए मंजिल के मुसाफिर। मंजिल भी मिलेगी और मिलने का मजा भी आएगा।''

दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ 20 फरवरी को कथित तौर पर आम आदमी पार्टी विधायक द्वारा मारपीट की गई थी। इसको लेकर दर्ज शिकायत में अमानतुल्ला को मुख्य आरोपी बनाया गया है।

आम आदमी पार्टी विधायक ने खुद जामिया नगर थाने में सरेंडर किया। उन्होंने कहा था कि उन्होंने कुछ भी गलत नहीं किया। इससे पहले दिल्ली पुलिस आम आदमी पार्टी के विधायक प्रकाश जरवाल को हिरासत में लिया था। उन पर भी अंशु प्रकाश के साथ मारपीट का आरोप है।

मुख्य सचिव ने अपनी शिकायत में आरोप लगाया कि उन्हें आधी रात को मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के घर पर बुलाया गया था। सीएम की मौजूदगी में उनके साथ मारपीट की गई। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली सचिवालय की लिफ्ट के पास भी मुख्य सचिव पर हमला किया गया था।

जरवाल ने बताया था कि सीएम आवास पर बुलाई गई बैठक में 10 विधायक शामिल हुए थे। आम आदमी पार्टी विधायक के अनुसार, एक विधायक ने मुख्य सचिव से दलित परिवारों के बीच राशन वितरित नहीं होने का मामला उठाया था, जिसके बाद अंशु प्रकाश ने कथित तौर जातिसूचक टिप्पणी की थी।

विधायक अमानतुल्ला खान ने कहा, ''मुख्य सचिव द्वारा लगाया गया मारपीट का आरोप गलत है। वह बीजेपी के इशारे पर बोल रहे हैं। मंत्री और सलाहकार को पीटा गया, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। मैं भी विधायक हूं। इसके बावजूद हमारी बात नहीं सुनी जा रही है। गृह मंत्रालय के दबाव में दिल्ली में हमारे साथ पहले दिन से साजिश रची जा रही है, लेकिन हम डरने वाले नहीं हैं। जनता हमारे साथ है।''

बता दें कि 20 फरवरी को एक अप्रत्याशित घटनाक्रम के तहत दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश और आम आदमी पार्टी विधायकों के बीच नोकझोंक हो गई थी। इसके बाद मुख्य सचिव ने पुलिस के समक्ष विधायकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें अमानतुल्ला को मुख्य आरोपी बनाया गया। सूत्रों की मानें तो एफआईआर में कुछ धाराएं ऐसी हैं, जो जमानती नहीं हैं। ऐसे में आम आदमी पार्टी के गिरफ्तार विधायकों को  कोर्ट से ही जमानत मिलेगी।

एक और घोटाले का खुलासा: रोटोमैक के मालिक ने बैंकों को अरबों का चूना लगाया

भारत में पंजाब नेशनल बैंक (पी एन बी) का 11400 करोड़ रुपए लूट कर फरार हुए नीरव मोदी के मामले की जांच अभी ठीक से शुरू भी नहीं हुई है कि एक अन्य व्यापारी के गायब होने की खबर सामने आ रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अलग-अलग बैंकों से करीब 800 करोड़ रुपए का लोन लेने वाले रोटोमैक पेन कंपनी के मालिक विक्रम कोठारी भी भारत छोड़कर भाग चुका है।

सूत्रों की मानें तो कोठारी ने भारत के पांच बड़े बैंकों से करीब 800 करोड़ रुपए का लोन लिया था। कोठारी ने यूनियन बैंक ऑफ इंडिया से 485 करोड़ रुपए का लोन लिया था और इलाहाबाद बैंक से 352 करोड़ का लोन लिया था। इन दोनों बैंकों के अलावा भी कोठारी ने बैंक ऑफ इंडिया, बैंक ऑफ बड़ौदा और इंडियन ओवरसीज बैंक से लोन लिया था। एक साल बाद भी रोटोमैक कंपनी के मालिक कोठारी ने न तो लोन का पैसा चुकाया है और न ही ब्याज का पैसा चुकाया है।

वहीं कानपुर सिटी सेंटर रोड स्थित कोठारी के ऑफिस में भी पिछले कुछ हफ्तों से ताला लगा हुआ है। उसके बाद से ही विक्रम कोठारी का भी कुछ पता नहीं चल रहा है। इसी बीच इलाहाबाद बैंक के मैनेजर राजेश गुप्ता ने कहा है कि अगर लोन नहीं चुकाया गया तो कोठारी की प्रॉपर्टी को सील कर दिया जाएगा।

बता दें कि विक्रम कोठारी का मामला नीरव मोदी के फरार होने के तुरंत बाद ही सामने आया है। नीरव मोदी और उनके बिजनेस पार्टनर और अंकल मेहुल चौकसी के ऊपर पंजाब नेशनल बैंक को 11400 करोड़ रुपए का चूना लगाने का आरोप लगा है। दोनों ही इस वक्त फरार हैं। भारत की एजेंसियां नीरव मोदी की तलाश कर रही है। विदेश मंत्रालय ने फिलहाल मोदी और चौकसी के पासपोर्ट को चार हफ्तों के लिए सस्पेंड कर दिया है। साथ ही यह भी कहा गया है कि अगर मोदी और चौकसी विदेश मंत्रालय से सात दिन के भीतर संपर्क नहीं करेंगे तो उनके पासपोर्ट रद्द कर दिए जाएंगे।

राहुल गांधी ने पीएम मोदी से पूछा, इतना बड़ा पीएनबी घोटला क्यों और कैसे हुआ?

भारत में नीरव मोदी से जुड़े पीएनबी घोटाले की अनदेखी करने का आरोप भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर लगाते हुए कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने शनिवार को नई दिल्ली में कहा कि उन्हें (मोदी को) यह बताना चाहिए कि इतना बड़ा पीएनबी घोटला क्यों और कैसे हुआ और वह इस बारे में क्या कर रहे हैं?

कांग्रेस अध्यक्ष ने पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के हवाले से कहा कि इतना बड़ा घोटाला 'ऊपर के संरक्षण के बिना' हो ही नहीं सकता। राहुल ने कांग्रेस की संचालन समिति की बैठक के बाद संवाददाताओं से कहा, ''प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी बच्चों को यह बता रहे हैं कि परीक्षाएं कैसे दी जाएं, लेकिन वह यह नहीं बता रहे हैं कि यह घोटाला कैसे हुआ?''

कांग्रेस अध्यक्ष ने दावा किया, ''इस घोटाले की शुरुआत आठ नवंबर 2016 को तभी हो गई थी, जब प्रधानमंत्री ने 500 और एक हजार रुपए के नोट को चलन से बाहर कर दिया और देश का सारा पैसा बैंकिंग प्रणाली में डाल दिया।'' उन्होंने कहा कि इसी वजह से 22 हजार करोड़ रुपए बैंक से निकाल लिए जाते हैं। उन्होंने पूछा कि जनता के इस पैसे को लेकर हुए इस घोटाले के लिए कौन जिम्मेदार है?

राहुल गाँधी ने कहा, ''इस घोटाले के बारे में जिन लोगों को नहीं बोलना चाहिए, वह बोल रहे हैं और प्रधानमंत्री तथा वित्त मंत्री की इस पर बोलने की जिम्मेदारी है, लेकिन वह चुप हैं।''

कांग्रेस नेता ने आरोप लगाया कि इतने बड़े स्तर के घोटाले की प्रधानमंत्री अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि इतना बड़ा घोटाला उच्च स्तर के संरक्षण के बिना किया ही नहीं जा सकता है। यह पूछने पर कि नीरव मोदी के साथ आपके व्यक्तिगत संबंध हैं, तो कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि यह सब इस मामले से ध्यान भटकाने की एक कोशिश है।

वहीं दूसरी तरफ, राहुल गांधी ने शनिवार को पार्टी के पूर्ण अधिवेशन के कार्यक्रम को अंतिम रूप देने के लिए गठित पार्टी की स्टीयरिंग कमेटी की पहली बैठक की अध्यक्षता की। कांग्रेस कार्य समिति (सी डब्ल्यू सी) को भंग करने के बाद इस स्टीयरिंग कमेटी का गठन किया गया था। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी, वरिष्ठ नेता ए के एंटनी, अहमद पटेल, गुलाम नबी आजाद, मल्लिकार्जुन खड़गे सहित कई अन्य नेताओं ने इस बैठक में शिरकत की।

बीजेपी की मंत्री ने कहा, पंजे को वोट दोगे तो हम क्‍यों आपको सुविधाएं देंगे?

भारत के मध्य प्रदेश में बीजेपी की सरकार है। बीजेपी के शिवराज सिंह चौहान सरकार की मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया इन दिनों अपने एक बयान की वजह से काफी चर्चा में हैं। बीजेपी नेता और खेल मंत्री यशोधरा राजे सिंधिया द्वारा मतदाताओं को धमकाने का मामला सामने आया है।

मध्य प्रदेश में कोलारस उपचुनाव में प्रचार के लिए यशोधरा राजे सिंधिया पडोरा गांव गई। वहां यशोधरा राजे सिंधिया ने मतदाताओं से बीजेपी को वोट देने की अपील करते हुए उन्हें धमकी दी। समाचार एजेंसी ए एन आई के मुताबिक, यशोधरा राजे सिंधिया ने वोटरों से कहा कि अगर वे लोग पंजे को (कांग्रेस) को वोट देंगे तो बीजेपी उन्हें सुविधाएं क्यों देगी?

खेल मंत्री ने कहा, ''आपके पास 'चूल्हे की योजना' क्यों नहीं आई? ये भारतीय जनता पार्टी, कमल की योजना है। आप लोग पंजे (कांग्रेस) में वोट दोगे, तो आपके पास ये योजना नहीं आएगी। आप कमल (बीजेपी) को दोगे तो आपके पास ये योजना आएगी। सीधी बात है।'' उन्होंने आगे कहा, ''आप लोग अगर पंजे को वोट दोगे तो हम सुविधाएं पंजे को क्यों देंगे? हम पंजे के हाथ से क्यों देंगे आपको चूल्हा? आपको अपनी समझदारी से ऐसी पार्टी को वोट देना चाहिए जिसकी हर चीज आपके घरों में आ जाए।''

यशोधरा राजे सिंधिया की ओर से इस तरह का बयान दिए जाने के बाद अब मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान की मुश्किलें बढ़ती दिख रही है। यशोधरा राजे सिंधिया के बयान का विरोध करते हुए कांग्रेस ने चुनाव आयोग में उनके खिलाफ शिकायत की है। कांग्रेस ने मुख्यमंत्री चौहान और उनकी मंत्री पर आचार संहिता का उल्लंघन करने का आरोप लगाया है।

आपको बता दें कि 24 फरवरी को कोलारस विधानसभा उपचुनाव होंगे। इस चुनाव में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता ज्योतिरादित्य सिंधिया के खिलाफ बीजेपी ने उनकी बुआ यशोधरा राजे सिंधिया को मैदान में उतारा है।

पीएनबी घोटाला: नीरव मोदी को 2017-18 में ही ज्यादातर एलओयू मिले

भारत में पंजाब नेशनल बैंक (पी एन बी) के 11400 करोड़ के घोटाला मामले में बीजेपी और कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है, उधर सीबीआई ने कहा है कि हीरा कारोबारी नीरव मोदी ने ज्यादातर घोटाला 2017-18 में जारी किए गए लेटर ऑफ अंडरस्टेंडिंग (एल ओ यू) के जरिये अंजाम दिया।

सीबीआई ने गुरुवार (16 फरवरी) को कहा कि नीरव मोदी और उनके परिवार वाले एलओयू के जरिये हेराफेरी कर रहे थे, इसलिए 2017 में पुराने एलओयू भी रिन्यू हो गए। सीबीआई ने गुरुवार को मेहुल चोकसी, नीरव मोदी के मामा और उसकी तीन कंपनियों के खिलाफ यह दावा करते हुए केस दर्ज किया कि इन लोगों ने 2017-18 में ही 143 एलओयू जारी करवाते हुए पीएनबी को 4,886.72 करोड़ रुपये का नुकसान पहुँचाया। इस मामले में 31 जनवरी को दर्ज की गई पहली एफआईआर में बताया गया कि 2017 में 8 एलओयू के जरिये 280.7 करोड़ की हेराफेरा हुई। एफआईआर में सीबीआई ने बुधवार को पीएनबी की तरफ से दी गई जानकारी जोड़ी और पहली एफआईआर में कुल नुकसान 6,498 करोड़ का बताया।

हर तरह से पीएनबी को कुल 11400 करोड़ रुपए का नुकसान हुआ। सीबीआई ने यह भी कहा कि जब से इस मामले के आरोपी नीरव मोदी और उनके रिश्तेदार एलओयू को रिन्यू करवाकर हेराफेरी कर रहे थे, उस दौरान 2017 में कई पुराने एलओयू भी रिन्यू कर दिए गए। सीबीआई ने मामले में शुक्रवार को पीएनबी के चार अधिकारियों से पूछताछ की। इन अधिकारियों के द्वारा 2014 से लेकर 2017 के बीच मोदी और उनकी कंपनियों के बीच डील कराने को लेकर जांच की जा रही है।

इनमें मुंबई के नरीमन प्वॉइंट शाखा के मुख्य प्रबंधक बेचू बी तिवारी ने फरवरी 2015 से अक्टूर 2017 के बीच डील करवाई, पीएनबी के मौजूदा डीजीएम और तत्कालीन ब्रैंडी हाउस ब्रांच के एजीएम संजय कुमार प्रसाद ने मई 2016 से मई 2017 के बीच डील कराई, तत्कालीन समवर्ती लेखा परीक्षक मोहिंदर के शर्मा ने नवंबर 2015 से 2017 के बीच डील कराई और तत्कालीन सिंगल विंडो ऑपरेटर मनोज खारात (उस समय ऑफिस चला रहे थे) ने नवंबर 2014 से दिसंबर 2017 के बीच डील करवाई। इन सभी अधिकारियों से सीबीआई पीएनबी घोटाला के बारे में पूछताछ कर रही है।

गुरुवार को चोस्की के खिलाफ दर्ज एफआईआर में कहा गया है कि आरोपी बैंक अधिकारी गोकुलनाथ शेट्टी और मनोज खारात ने आरोपी कंपनियों और निर्देशकों के लिए 2017-18 के दौरान 4886.72 करोड़ रुपये के घोटाले के लिए प्रश्रय दिया। एफआईआर में चोस्की समेत 16 आरोपियों के नाम शामिल हैं।

मद्रास हाईकोर्ट में जज ने कहा, अब वकीलों का एकमात्र उद्देश्य अपनी जेबों को भरना है

भारत में मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को खेद व्यक्त किया कि वकीलों का महान पेशा सबसे खराब स्थिति तक पहुंच गया है और अब वकीलों का एकमात्र उद्देश्य अपनी जेबों को भरना है। न्यायमूर्ति एन किरुबाकरण ने वकीलों भाष्कर मदुरम और लेनिन कुमार की एक रिट याचिका पर सुनवाई करते हुए यह मौखिक टिप्पणी की।

याचिका में वकीलों के निकाय के चुनाव लड़ने के लिए तमिलनाडु और पुडुचेरी बार काउंसिल द्वारा लाए गए नए दिशा-निर्देशों को चुनौती दी गई है। उन्होंने उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ में दिशा-निर्देशों को चुनौती दी है। न्यायमूर्ति ने कहा कि न्यायमूर्ति आर थारानी और उनकी एक खंडपीठ इस मामले में शुक्रवार को आदेश सुनाएगी। अदालत को पहले इस मामले में 12 फरवरी को फैसला सुनाना था।

पीठ ने कहा, ''वकीलों के एक समूह ने इस पेशे के सम्मान को ठेस पहुंचाई है और पिछले आठ से अधिक वर्षों से इसे पूरी तरह से खराब कर दिया है। यहां तक कि वरिष्ठ अधिवक्ता इस महान पेशे को बचाने के लिए कोई कदम उठाने के बजाय अपनी जेबों को भरने में लगे रहते हैं।'' उन्होंने कहा, ''वकीलों का यह महान पेशा इन दिनों सबसे अधिक खराब स्थिति तक पहुंच गया है और वकीलों का एकमात्र उद्देश्य अपनी जेबों को भरना रह गया है।''

सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला: उम्मीदवारों को चुनाव के लिए नामांकन भरने के दौरान आय के स्रोत का खुलासा करना होगा

भारत में सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार (16 फरवरी) को कहा कि चुनाव लड़ रहे सभी उम्मीदवारों को अपनी पत्नी और बच्चों सहित खुद की आय के स्रोत को भी उजागर करना होगा। न्यायमूर्ति जे चेलमेश्वर की अध्यक्षता में पीठ ने ऐतिहासिक फैसले में कहा कि उम्मीदवारों को चुनाव के लिए नामांकन भरने के दौरान पत्नी और बच्चों की आय सहित खुद की आय के स्रोत का खुलासा करना होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने गैर सरकारी संस्था 'लोक प्रहरी' द्वारा दायर की गई याचिका पर सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को चुनाव सुधारों की दिशा में एक बड़ा कदम बताया जा रहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह फैसला सभी चुनावों पर लागू होगा। 2018 में होने वाले कई राज्यों के विधानसभा चुनावों और 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले की काफी अहमियत है। अब तक चुनाव में हलफनामा भरने के दौरान उम्मीदवार को अपनी जीवनसाथी और आश्रितों की चल-अचल संपत्ति का ब्यौरा देना पड़ता था। लेकिन उम्मीदवारों को आय का स्रोत नहीं बताना पड़ता था। अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद उम्मीदवारों को आय का स्रोत भी बताना पड़ेगा।

बता दें कि गैर सरकारी संगठन लोक प्रहरी ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर कहा था कि सर्वोच्च अदालत को सरकार और चुनाव आयोग को आदेश देना चाहिए कि नामांकन के वक्त प्रत्याशी अपनी और अपने परिवार की आय के स्रोत का खुलासा भी करे।

बता दें कि पिछले साल अप्रैल में अपने हलफनामे में चुनाव सुधारों को लेकर केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि चुनाव के लिए पर्चा भरते वक्त प्रत्याशी द्वारा अपनी, अपने जीवन साथी और आश्रितों की आय के स्रोत की जानकारी सार्वजनिक करने संबंधी प्रस्ताव पर केंद्र तैयार है। तब केंद्र ने कहा कि काफी विचार करने के बाद इस मुद्दे पर वह नियमों में जरूरी बदलाव को तैयार है।

इससे पहले इस मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने सांसद और विधायकों की संपत्ति में 500 गुना बढ़ोत्तरी को लेकर सवाल उठाया था। सुप्रीम कोर्ट ने पूछा था कि जनप्रतिनिधि यह भी बता दें कि उनकी आय और संपत्ति में इतनी तेजी से बढ़ोत्तरी कैसे हुई, किस बिजनेस से हुई, तो यह भी सवाल उठता है कि कोई सांसद और विधायक बिजनेस कैसे कर सकता है?