भारत

लोकसभा में पास हुआ तीन तलाक बिल

भारत में तीन तलाक देने को अपराध के दायरे में लाने वाला कानून लोकसभा से पास हो गया है। इससे पहले गुरुवार को संसद में इस बिल पर वोटिंग हुई। बिल में कुछ संशोधनों को लेकर यह वोटिंग हुई थी।

एआईएमआईएम चीफ असदुद्दीन ओवैसी ने भी वोटिंग की मांग की थी। सदस्यों ने उनके संशोधनों को पूरी तरह से खारिज कर दिया। एक संशोधन पर हुई वोटिंग में तो ओवैसी के पक्ष में सिर्फ 2 वोट पड़े। जबकि, इसके खिलाफ 241 वोट पड़े। दूसरे प्रस्ताव में भी उनके पक्ष में सिर्फ 2 वोट पड़े। वहीं, 242 लोगों ने उनके प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया।

हालांकि, इससे पहले उनके संशोधन के प्रस्ताव को लोकसभा के सदस्यों ने ध्वनि मत से खारिज कर दिया था। सदन में इससे पहले इस बिल पर विस्तृत चर्चा हुई।

आपको बता दें कि यह बिल बगैर किसी संशोधन के पास हुआ है। सभी संशोधन खारिज कर दिए गए। बिल को लेकर कुछ संशोधन रखे गए थे, जिनमें दो संशोधन ओवैसी ने आगे बढ़ाए थे। जबकि, एक संशोधन बीजू जनता दल के भर्तृहरि महताब ने बढ़ाया था। वहीं, कांग्रेस की ओर से सुष्मिता देव और सीपीआईएम के ए. संपत ने संशोधन आगे बढ़ाए थे, जिन्हें संसद में नकार दिया गया। अब यह बिल राज्यसभा में जाएगा।

इससे पहले तीन तलाक को प्रतिबंधित करने और विवाहित मुस्लिम महिलाओं के अधिकार सुरक्षित करने से संबंधित 'मुस्लिम महिला (विवाह अधिकार संरक्षण) विधेयक, 2017 ' गुरुवार को सरकार ने लोकसभा में पेश किया था। विधेयक पर सदन में चर्चा भी हुई।

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने इस विधेयक को पेश किया था। उन्होंने कहा था कि यह कानून ऐतिहासिक है और उच्चतम न्यायालय द्वारा 'तलाक-ए-बिदत' को गैर कानूनी  घोषित किए जाने के बाद मुस्लिम महिलाओं को न्याय दिलाने के लिए इस सदन द्वारा इस संबंध में विधेयक पारित करना जरूरी हो गया है।

उन्होंने इस संबंध में कुछ सदस्यों की आपत्तियों को खारिज करते हुए कहा कि यह कानून किसी मजहब से जुड़ा नहीं बल्कि नारी सम्मान से जुड़ा है।

वहीं, एआईएमआईएम के असदुद्दीन ओवैसी ने इसे पेश किए जाने का विरोध किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि यह विधेयक संविधान की अवहेलना करता है और कानूनी रूपरेखा में उचित नहीं बैठता।

उन्होंने यह भी कहा कि मुस्लिम महिलाओं के साथ अन्याय के मामलों से निपटने के लिए घरेलू हिंसा कानून और आईपीसी के तहत अन्य पर्याप्त प्रावधान हैं और इस तरह के नए कानून की जरूरत नहीं है।

कांग्रेस सांसद ने स्‍क्रीनशॉट देकर कहा, तीखे सवाल पूछे तो सुषमा स्‍वराज ने ट्विटर पर ब्‍लॉक कर दिया

कांग्रेस के एक सांसद को सवाल पूछने पर भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने सोशल मीडिया पर ब्लॉक कर दिया। बुधवार को इस बात की जानकारी सांसद ने अपने टि्वटर हैंडल से दी।

सांसद और पंजाब में कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष रहे प्रताप सिंह बाजवा का आरोप है कि विदेश मंत्री ने उन्हें कड़े सवाल पूछने पर ब्लॉक कर दिया। यही नहीं, सांसद ने सोशल मीडिया पर इससे जुड़ा एक स्क्रीनशॉट भी साझा किया, जिसमें साफ लिखा था कि सुषमा ने उन्हें ब्लॉक कर दिया।

बता दें कि विदेश मंत्री माइक्रो ब्लॉगिंग साइट पर खासा लंबे वक्त से सक्रिय हैं। एक क्लिक पर वह लोगों को मदद का आश्वासन देती हैं। चाहे विदेश में भारतीय नागरिकों के फंसने का मसला हो या फिर इमरजेंसी में पासपोर्ट की जरूरत से जुड़ी बात हो। वह हमेशा लोगों की मदद के लिए आगे आती है।

प्रताप बावजा ने भी इसी क्रम में उनसे इराक में लापता भारतीय नागरिकों के बारे में सवाल किया था, जिसके बाद उन्हें ब्लॉक कर दिया गया।

कांग्रेसी सांसद ने बुधवार को इस बाबत एक ट्वीट किया। उन्होंने सख्त लहजे में पूछा, ''यही तरीका है विदेश मंत्रालय चलाने का? क्या इराक में गायब 39 भारतीयों को लेकर कड़े सवाल पूछने के लिए सुषमा स्वराज जी के दफ्तर को किसी सांसद को ब्लॉक करना ठीक है?''

दरअसल, कांग्रेसी सांसद ने विदेश मंत्री से इराक में लापता 39 भारतीयों के बारे में पूछा था। उन्होंने कहा, इसी मसले को लेकर कहा था कि भारतीय विदेश मंत्री की तरफ से इराक में लापता 39 भारतीय नागरिकों के बारे में बोले गए झूठ का पर्दाफाश हो चुका है। मंत्री ने लोगों को गुमराह किया है। उन्होंने कहा था कि 39 भारतीय बादुश की जेल में है। जबकि, सच्चाई कुछ और है। कुख्यात आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने वह जेल पहले ही तबाह कर दी थी।

बाजवा के मुताबिक, विदेश मंत्री ने ऐसा कर पीड़ितों के परिजन से गलत किया है। उन्होंने झूठ बोला है और उन्हें ठेस पहुंचाई है। वह इसके खिलाफ संसद में विशेष अधिकार प्रस्ताव भी पेश करेंगे।

AIMIM नेता ने हेगड़े की जुबान काटकर लाने वाले को 1 करोड़ रुपए इनाम देने का ऐलान किया

भारत के केंद्रीय कौशल विकास राज्‍यमंत्री अनंत कुमार हेगड़े ने धर्मनिरपेक्षता पर विवादास्‍पद बयान दिया है। कर्नाटक में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए उन्‍होंने कहा कि धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील होने का दावा वे लोग करते हैं, जिन्‍हें अपने मां-बाप के खून का पता नहीं होता है।

केंद्रीय मंत्री ने लोगों को खुद की पहचान धर्मनिरपेक्ष के बजाय धर्म और जाति के आधार पर करने की वकालत भी की। साथ ही कहा कि इस सोच के साथ संविधान में बदलाव भी किया जा सकता है और इसीलिए हमलोग यहां हैं।

इस बयान पर काफी हंगामा हुआ। अब AIMIM के नेता गुरुशांत पट्टेदार ने हेगड़े की जुबान काटकर लाने वाले को 1 करोड़ रुपए इनाम में देने का ऐलान किया है।

गुरुशांत पट्टेदार ने स्थानीय मीडिया से बात करते हुए कहा कि अनंत कुमार हेगड़े ने पिछड़ी जाति और अल्पसंख्यकों के लिए बेहद अपमानजनक बातें कही हैं। आज मंगलवार को मैं ऐलान करता हूं कि जो कोई भी दिन खत्म होने से पहले हेगड़े की जुबान काट कर लाएगा, उसे मैं 1 करोड़ रुपए दूंगा।

बता दें कि अनंत हेगड़े कर्नाटक में कोप्‍पल जिले के यलबुर्गा में ब्राह्मण युवा परिषद और महिलाओं के एक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्‍होंने कहा, ''जो लोग धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील होने का दावा करते हैं, उन्‍हें अपने मां-बाप और उनके खून के बारे में जानकारी ही नहीं होती है। मुझे बहुत खुशी होगी। यदि कोई व्‍यक्ति खुद की पहचान मुस्लिम, ईसाई, ब्राह्मण, लिंगायत या हिंदू के तौर पर करता है। इस तरह की पहचान से आत्‍मसम्‍मान हासिल होता है। समस्‍या तब उत्‍पन्‍न होती है, जब कोई खुद को धर्मनिरपेक्ष कहता है।''

कर्नाटक के सीएम सिद्दरमैया ने भी इस बयान पर आपत्ति जताते हुए कहा कि अनंत हेगड़े को संस्‍कृति और संसदीय भाषा का ज्ञान ही नहीं है।

भाजपा के कार्यकर्ता अब सिर्फ हत्यारों और पागलों के पार्टी में शामिल होने का विरोध कर सकते हैं : महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष

भाजपा के वरिष्ठ नेता और महाराष्ट्र विधानसभा के अध्यक्ष हरीभाऊ बागड़े ने अपनी ही पार्टी पर निशाना साधते हुए कहा है कि आजकल भाजपा में कोई भी शामिल होकर पद हासिल कर सकता है।

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के जन्मदिन के अवसर पर सोमवार को औरंगाबाद में पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ताओं की एक सभा को संबोधित करते हुए बागड़े ने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ता अब सिर्फ हत्यारों और पागलों को पार्टी में शामिल करने का विरोध कर सकते हैं।

उन्होंने कहा कि पहले राजनीति में शामिल होने वालों की मंशा समाजसेवा की होती थी, अपने स्वार्थ साधने की नहीं। बागड़े ने कहा, ''पहले इस बारे में बहुत सोच-विचार किया जाता था कि किसे पार्टी में शामिल करना है और किसे पद देना है। यह ठीक वैसे ही होता था, जैसे हम अपनी लड़कियों के लिए सही दूल्हा ढूंढते वक्त छानबीन करते हैं।''

उन्होंने कहा, ''लेकिन अब हालात बदल गए हैं। कोई भी आ सकता है और इनाम के तौर पर पार्टी में पद पा सकता है। लोगों में बदलाव के साथ पार्टी में भी बहुत बदलाव आ गया है।'' बागड़े ने कहा कि भाजपा के कार्यकर्ता अब सिर्फ हत्यारों और पागलों के पार्टी में शामिल होने का विरोध कर सकते हैं।

जेडीयू में विद्रोह : नीतीश के करीबी, पूर्व स्पीकर ने किया विद्रोह

बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और राजद अध्यक्ष चारा घोटाले के एक मामले में रांची की जेल में बंद हैं, मगर इसका बुरा असर उनकी पार्टी पर नहीं बल्कि नीतीश कुमार की जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) पर पड़ा है।

नीतीश के करीबी और पूर्व विधान सभा अध्यक्ष उदय नारायण चौधरी ने जेडीयू नेतृत्व के खिलाफ बगावत का झंडा बुलंद कर दिया है और आरोप लगाया है कि नीतीश कुमार ने बीजेपी से मिलकर लालू यादव को जेल भिजवाया है।

ईटीवी से बात करते हुए चौधरी ने कहा कि लालू यादव और उनके परिवार के खिलाफ बदले की नीयत से कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि इस खेल में नीतीश कुमार और बीजेपी के लोग शामिल हैं।

चौधरी ने साफ किया कि भले ही ये लोग बदले की कार्रवाई के तहत लालू को जेल भिजवा दें, मगर इसका राजनीतिक फायदा लालू यादव और उनकी पार्टी को ही मिलेगा।

जेडीयू नेतृत्व की आलोचना करते हुए चौधरी ने कहा कि पार्टी में लोकतांत्रिक मूल्य अब नहीं रहे। उन्होंने कहा कि जनकल्याणकारी योजनाएं लागू करने वाले नीतीश कुमार अब पीएम नरेंद्र मोदी की राह चल पड़े हैं और गलत फैसले लेकर राज्य के लोगों के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार और नीतीश सरकार जनविरोधी हो चुकी है।

चौधरी ने आरोप लगाया कि जो लोग घुटने नहीं टेकते हैं उन्हें बीजेपी जांच एजेंसियों के जरिए फांसती है। उन्होंने कहा कि बीजेपी ने ही 2जी केस और आदर्श घोटाले में नेताओं को फंसाया था, लेकिन नतीजा सबके सामने है।

उन्होंने कहा कि चारा घोटाले में लालू जी ने क्या किया? 900 करोड़ के इस घोटाले में लालू जी की सीधी संलिप्तता कहीं से नहीं है। बावजूद इसके उन्हें तरह-तरह से परेशान किया जा रहा है क्योंकि वो दलितों-गरीबों की आवाज हैं, उन्होंने सामाजिक न्याय के लिए आवाज बुलंद की है।

बता दें कि लालू प्रसाद यादव को रांची की सीबीआई कोर्ट ने शनिवार (23 दिसंबर) को देवघर ट्रेजरी से अवैध निकासी के एक मामले में दोषी करार दिया था, जिसके बाद से वो रांची के बिरसा मुंडा कारागार में बंद हैं। सजा पर फैसला तीन जनवरी को होगा।

उदय नारायण चौधरी ने इससे पहले भी नीतीश कुमार पर निशाना साधा था और दलितों की अनदेखी करने का आरोप लगाया था।

बीजेपी सांसद सुब्रमण्‍यम स्‍वामी ने भाजपाइयों को दारू छोड़ने की नसीहत दी

बीजेपी के राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है कि भाजपा के सभी मंत्रियों को कोर्ट पैन्ट नहीं पहनना चाहिए क्योंकि पश्चिमी देशों द्वारा थोपा गया यह ड्रेस गुलामी का प्रतीक है।

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा है, ''पश्चिमी परिधान थोपी हुई विदेशी गुलामी का प्रतीक है। बीजेपी को चाहिए कि वो अपने मंत्रियों के लिए एक अनुशासन बनाए जिसके तहत सभी मंत्री भारतीय जलवायु के अनुकूल ही देशी वस्त्र पहनें।''

इसके साथ ही सुब्रमण्यम स्वामी ने भाजपाइयों को दारू छोड़ने की भी नसीहत दी है। उन्होंने लिखा है, ''संविधान की धारा 49 शराब पर प्रतिबंध की बात करता है। हालांकि, मैं इसके दंडात्मक कार्रवाई के खिलाफ हूं। बीजेपी को चाहिए कि वो इसे भी अनुशासन के तहत शामिल करे।''

पश्चिमी परिधान न पहनने पर सुब्रमण्यम स्वामी ने इसके पीछे तर्क दिया है कि इससे भारतीय संस्कृति को न सिर्फ बढ़ावा मिल सकेगा बल्कि देशी अर्थव्यवस्था को भी ताकत मिल सकेगी।

सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा कि कई विदेशी कंपनियां 'मेक इन इंडिया' के तहत भारत में निवेश करने को इच्छुक हैं, मगर वो कार्यरूप में परिणत नहीं हो पा रहा है।

यह पहली दफा नहीं है, जब सुब्रमण्यम स्वामी ने भारतीय संस्कृति और देशी परिधान की वकालत की हो। इससे पहले पिछले साल भी सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट कर केंद्रीय मंत्रियों पर निशाना साधा था और कहा था कि जब वो विदेशी दौरे पर हों तो कोर्ट-पैन्ट छोड़कर देशी कपड़े ही पहनें।

अभी तीन दिन पहले ही सुब्रमण्यम स्वामी ने जीडीपी पर फर्जी आंकड़े की बात कहकर सरकार और बीजेपी के लिए मुश्किलें खड़ी की थीं। सुब्रमण्यम स्‍वामी ने सनसनीखेज आरोप लगाते हुए कहा था कि केंद्र सरकार ने केंद्रीय सांख्यिकी संगठन (सीएसओ) के अधिकारियों पर बेहतर आर्थिक आंकड़े देने के लिए दबाव बनाया था, ताकि यह दिखाया जा सके कि नोटबंदी का अर्थव्‍यवस्‍था और जीडीपी पर प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ा है। उन्‍होंने इन आंकड़ों को फर्जी बताया था। स्‍वामी के इस आरोप से मोदी सरकार की मुश्किलें बढ़ सकती हैं।

सुब्रमण्‍यम स्‍वामी शनिवार को अहमदाबाद में चार्टर्ड अकाउंटेंट के एक सम्‍मेलन को संबोधित करते हुए केंद्र सरकार पर सीएसओ के अधिकारियों पर अच्‍छे आंकड़े देने के लिए दबाव डालने का आरोप लगाया था।

उन्‍होंने कहा था, ''कृपा करके जीडीपी के तिमाही आंकड़ों पर न जाएं। वे सब फर्जी हैं। यह बात मैं आपको कह रहा हूं, क्‍योंकि मेरे पिता ने सीएसओ की स्‍थापना की थी। हाल ही में मैं केंद्रीय मंत्री सदानंद गौड़ा (सांख्यिकी मंत्री) के साथ वहां गया था। उन्‍होंने सीएसओ अधिकारियों को आदेश दिया, क्‍योंकि नोटबंदी पर आंकड़े देने का दबाव था। इसलिए वह जीडीपी के ऐसे आंकड़े जारी कर रहे हैं, जिससे यह पता चल सके कि नोटबंदी का कोई असर नहीं पड़ा।''

देखो, डॉक्‍टर साहब को मुक्‍त कर दिया, हमको सजा दे दिया ... गजब कर दिया : लालू यादव

चारा घोटाले में बिहार के पूर्व मुख्‍यमंत्री लालू यादव को दोषी ठहराया गया। शनिवार को फैसला सुनाए जाते वक्‍त लालू भी सीबीआई की विशेष अदालत में उपस्थित थे। इस घोटाले के एक अन्‍य आरोपी डॉ. जगन्‍नाथ मिश्रा को कोर्ट ने बरी कर दिया।

ऐसे में लालू यादव को भी बरी होने की उम्‍मीद थी, लेकिन निर्णय आने पर वह और उनके बेटे तेजस्‍वी यादव चकित रह गए थे।

वकील ने जब लालू को उनके दोषी होने के बारे में बताया तो लालू ने कहा, ''देखो, उन्‍होंने डॉक्‍टर साहब (जगन्‍नाथ मिश्रा) को मुक्‍त कर दिया और हमको सजा दे दिया ... गजब कर दिया।''

औपचारिक तौर पर हिरासत में लिए जाने से पहले ये लालू के आखिरी शब्‍द थे। इस मामले में तीन जनवरी को सजा सुनाई जाएगी।

चारा घोटाला मामले में शनिवार को रांची की विशेष अदालत ने फैसला सुनाया था। लालू अपने बेटे के साथ खुद झारखंड की राजधानी पहुंचे हुए थे। शुरुआत में सुबह 11 बजे फैसला सुनाया जाना था, लेकिन सीबीआई जज शिवपाल सिंह ने इसे दोपहर बाद तक के लिए टाल दिया। इसके बाद लालू यादव अदालत से सीधे गेस्‍ट हाउस लौट गए थे।

इसी दौरान उनकी बड़ी बेटी और राज्‍यसभा सदस्‍य मीसा भारती और उनके पति के खिलाफ प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) द्वारा एफआईआर दर्ज करने की खबर सामने आ गई। लालू इसके बारे में फोन कर जानकारी लेने के अलावा और कुछ न कर सके।

दोपहर बाद तकरीबन साढ़े तीन बजे बिहार के दो पूर्व मुख्‍यमंत्री लालू यादव और जगन्‍नाथ मिश्रा विशेष अदालत में अपनी बारी का इंतजार कर रहे थे।

कोर्ट ने सबसे पहले झारखंड के वरिष्‍ठ पुलिस अधिकारी पी एस नटराजन से जुड़े मामले में फैसला सुनाते हुए उन्‍हें एक आदिवासी युवती का यौन शोषण करने के आरोपों से बरी कर दिया था।

इसके बाद दो पूर्व मुख्‍यमंत्रियों के साथ 22 अभियुक्‍तों की बारी थी। कोर्ट द्वारा नाम लेने पर सभी ने हाथ खड़े कर अपनी उपस्थिति की पुष्टि की थी। जज ने डॉ. जगन्‍नाथ मिश्रा समेत छह आरोपियों को दोषमुक्‍त कर दिया। जगन्‍नाथ मिश्रा के चेहरे की बेचैनी स्‍पष्‍ट तौर पर देखी जा सकती थी। फैसले के बारे में सुनते ही वह खुशी में तुरंत ही कोर्ट से बाहर निकल गए।

डॉ. जगन्‍नाथ मिश्रा के बरी होने से लालू यादव और उनके बेटे तेजस्‍वी यादव को उम्‍मीद की किरण दिखी। उन्‍हें लगा कि अदालत उनको भी आरोपमुक्‍त कर देगी।

शुरुआत में लालू यादव शायद कोर्ट का फैसला सही से सुन नहीं सके थे, यही वजह है कि वकील ने जब उन्‍हें दोषी होने की बात बताई तो वह चकित रह गए।

हिरासत में लिए जाने से पहले उन्‍होंने कहा, ''देखो, उन्‍होंने डॉक्‍टर साहब को मुक्‍त कर दिया और हमको सजा दे दी। ... गजब कर दिया।''

अदालत द्वारा चारा घोटाले में फैसला आने को लेकर सुरक्षा के पर्याप्‍त इंतजाम किए गए थे। वहां राष्‍ट्रीय जनता दल के कार्यकर्ता भी मौजूद थे।

धर्मयुद्ध में लालू अकेला नहीं, पूरा बिहार साथ खड़ा है : लालू यादव

बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाले में पूर्व मुख्यमंत्री और राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद को सीबीआई की विशेष अदालत ने शनिवार (23 दिसंबर) को दोषी करार दिया है। अदालत ने पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्रा और अन्य छह आरोपियों को इसी मामले में बरी कर दिया। सीबीआई के विशेष न्यायाधीश शिवपाल सिंह तीन जनवरी को इस मामले में सजा सुनाएंगे।

यह मामला देवघर के जिला कोषागार से फर्जी तरीके से 84.5 लाख रुपये निकालने से जुड़ा हुआ है। कोर्ट द्वारा दोषी करार दिये जाने के बाद लालू यादव ने एक के बाद एक कई ट्वीट किये और बीजेपी पर हमला बोला।

लालू यादव ने कहा कि गरीबों और पिछड़ों के लिए धर्मयुद्ध में लालू अकेला नहीं, पूरा बिहार साथ खड़ा है। उन्होंने ट्वीट किया, ''झूठे जुमले बुनने वालों सच अपनी ज़िद पर खड़ा है। धर्मयुद्ध में लालू अकेला नहीं, पूरा बिहार साथ खड़ा है।''

लालू ने बीजेपी पर हमला बोलते हुए ट्वीट किया, ''मरते दम तक सामाजिक न्याय की लड़ाई लड़ता रहूँगा। जगदेव बाबू ने गोली खाई, हम जेल जाते रहते है, लेकिन मैं झुकूँगा नहीं। लड़ते-लड़ते मर जाऊँगा, लेकिन मनुवादियों को हराऊँगा।''

लालू ने कहा कि सामंतीवादी ताक़तों, जानता हूं लालू तुम्हारी राहों का काँटा नहीं, आंखों की कील है। पर इतनी आसानी से नहीं उखाड़ पाओगे।

कांग्रेस ने भी अदालत के इस फैसले पर प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेता मनीष तिवारी ने कहा कि लालू यादव 1996 से कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। इसकी शुरुआत तब हुई, जब बीजेपी नेताओं ने पटना हाईकोर्ट में पीआईएल दाखिल किया।

कांग्रेस नेता के मुताबकि, लालू यादव और उनके वकील इस केस में लड़ने के लिए सक्षम हैं।

मनीष तिवारी ने बीजेपी पर हमला करते हुए पूछा कि बिहार के सृजन घोटाले की जांच क्यों नहीं की जा रही है?

बता दें कि मामले की सुनवाई रांची की विशेष सीबीआई अदालत ने 13 दिसंबर को पूरी कर ली थी। इस पूरे मामले में कुल 34 आरोपी थे, जिनमें से 11 की मौत हो चुकी है। जबकि एक आरोपी ने अपना गुनाह कबूल कर लिया और सीबीआई का गवाह बन गया।

2जी स्पेक्ट्रम घोटाला: केन्द्र से 10,000 हजार करोड़ हर्जाना वसूलने की तैयारी में वीडियोकॉन

भारत में दूरसंचार कंपनी वीडियोकॉन टेलीकम्यूनिकेशंस टूजी स्पेक्ट्रम आवंटन मामले में सभी आरोपियों को बरी किये जाने के बाद केंद्र की मोदी सरकार के खिलाफ 10 हजार करोड़ रुपये का मुआवजा दावा करने की योजना बना रही है। कंपनी से जुड़े सूत्रों ने इसकी जानकारी दी।

कंपनी के वरिष्ठ प्रबंधन के करीबी एक सूत्र ने कहा, ''वीडियोकॉन टेलीकम्यूनिकेशंस सरकार के खिलाफ कम से कम 10 हजार करोड़ रुपये के मुआवजे का दावा दायर करने की योजना बना रही है। नुकसान का अनुमान 10 हजार करोड़ रुपये से अधिक का है, कंपनी इसकी गणना कर रही है।''

उसने कहा, ''कंपनी को दूरसंचार सेवा कारोबार के लिए करीब 25 हजार करोड़ रुपये का ऋण लेना पड़ा था। दूरसंचार लाइसेंस रद्द होने से उसे भारी वित्तीय नुकसान उठाना पड़ा।''

उल्लेखनीय है कि 2जी मामले की सुनवाई कर रही विशेष अदालत ने 2008 के टू जी माबाइल फोन सेवा लाइसेंस और स्पेक्ट्रम आवंटन से जुड़े मामले में तत्कालीन दूरसंचार मंत्री ए. राजा समेत सभी आरोपियों को 21 दिसंबर 2017 को बरी कर दिया है।

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने 2012 में एक आदेश में राजा के कार्यकाल के दौरान आवंटित 122 दूरसंचार लाइसेंस रद्द कर दिया था। उनमें से 15 लाइसेंस वीडियोकॉन के थे। उसने इनके लिए 15 सौ करोड़ रुपये का भुगतान किया था। उस फैसले के बाद वीडियोकॉन ने नीलामी में भाग लिया और नवंबर 2012 में उसे 1800 मेगाहर्ट्ज (टू जी) श्रेणी में बिहार, उत्तर प्रदेश (पूर्व), उत्तर प्रदेश (पश्चिम), हरियाणा, मध्य प्रदेश और गुजरात के लिए 2221.44 करोड़ रुपये में लाइसेंस खरीदा था। हालांकि कंपनी स्पेक्ट्रम के बढ़ते खर्च के कारण कारोबार में टिक नहीं सकी और उसने अपना स्पेक्ट्रम पिछले साल एयरटेल को बेच दिया।

बता दें कि 2जी मामले की सुनवाई कर रही एक अदालत ने गुरुवार (21 दिसंबर) को डीएमके प्रमुख एम. करुणानिधि की पत्नी दयालु अम्माल और एस्सार और लूप के प्रमोटरों को 2 जी स्पेक्ट्रम के आवंटन से जुड़े दो अलग-अलग मामलों में बरी कर दिया था।

अदालत ने एस्सार समूह के प्रमोटरों रवि रुइया और अंशुमन रुइया, एस्सार समूह के निदेशक (रणनीति व योजना) विकास श्राफ और लूप टेलीकॉम के प्रमोटरों आई. पी. खेतान और किरण खेतान को भी बरी कर दिया।

यह देखते हुए कि 'दूरसंचार विभाग को धोखा देने का षडयंत्र साबित करने में अभियोजन पक्ष नाकाम रहा'। अदालत ने तीन कंपनियों लूप टेलीकॉम, लूप मोबाइल इंडिया और एस्सार टेली होल्डिंग को भी बरी कर दिया।

2जी मामले में सीबीआई द्वारा दायर आरोप पत्र के तीसरे भाग में आरोप लगाया गया था कि लूप टेलीकॉम को प्राप्त लाइसेंस के असली निवेशक और लाभार्थी एस्सार समूह था, जिसे एस्सार समूह ने एक मुखौटा कंपनी के जरिए 2008 में हासिल किया था।

चारा घोटाला फैसला: लालू यादव समेत 15 आरोपी दोषी करार, 3 जनवरी को सुनाई जाएगी सजा

बिहार के बहुचर्चित चारा घोटाला मामले से जुड़े एक मुकदमे में रांची स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने शनिवार (23 दिसंबर) को फैसला सुनाया। जगन्‍नाथ मिश्रा, ध्रुव भगत, विद्या सागर बरी कर दिए गए हैं।

प्रमुख आरोपी व घोटाले के समय बिहार के सीएम रहे लालू प्रसाद यादव, पीएसी के तत्कालीन अध्यक्ष जगदीश शर्मा, आर के राणा, तीन आईएएस अधिकारी फूलचंद सिंह, बेक जूलियस एवं महेश प्रसाद, कोषागार के अधिकारी एस के भट्टाचार्य, पशु चिकित्सक डा. के के प्रसाद तथा शेष अन्य चारा आपूर्तिकर्ताओं को दोषी ठहराया गया है।

सभी दोषियों को 3 जनवरी को सजा सुनाई जाएगी। तब तक के लिए सभी को जेल भेजने की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। सजा के ऐलान तक दोषी जेल में ही रहेंगे।

देवघर कोषागार से अवैध ढंग से पैसा निकालने के मामले में राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जगन्नाथ मिश्र एवं कई अन्य राजनेताओं तथा आईएएस अधिकारियों समेत 22 आरोपी रांची में सीबीआई की विशेष अदालत में शनिवार सुबह पेश हुए थे।

राजद ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर कहा है कि वह ऊपरी अदालत में फैसले के खिलाफ अपील करेंगे। पार्टी नेताओं का कहना है कि उन्‍हें न्‍याय व्‍यवस्‍था में विश्‍वास है।

राजद के मनोज झा ने कहा कि लालू को जबरन फंसाया गया है। उन्‍होंने कहा कि 'कल तक जो पिंजड़े में तोता था, मगर आज उसे चिप से नियंत्रित किया जा रहा है। जो उनके सामने झुक जाता है, वह बच जाता है जो नहीं झुकता, उसे झेलना पड़ता है।'

अदालत ने लालू समेत कुल 15 आरोपियों को दोषी ठहराया है। पूर्व सीएम जगन्‍नाथ मिश्रा समेत 7 अन्‍य को निर्दोष पाते हुए बरी कर दिया गया है।