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शिव सेना ने कहा, अपेक्षित जीत हासिल नहीं कर सकी बीजेपी

गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजों पर तंज कसते हुए शिव सेना ने सोमवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपेक्षित जीत हासिल नहीं कर सकी है।

शिव सेना सांसद और प्रवक्ता संजय राउत ने मीडिया से कहा, ''भाजपा को गुजरात में जीतना ही था। .. वह राज्य में 22 वर्षों से सत्ता में है। उन्होंने धन बल का इस्तेमाल किया और अभियान के दौरान 14 मुख्यमंत्रियों को भेजा।''

राउत ने कहा, ''उनकी जीत पहले से तय थी, लेकिन भाजपा को उस तरह से जीत नहीं मिली, जिसकी उसे उम्मीद थी।''

उन्होंने कहा, ''देश में माहौल बदल रहा है और शिव सेना कांग्रेस को एक प्रमुख विपक्षी दल के रूप में देखती है।''

उन्होंने आगे कहा, ''हम भाजपा और कांग्रेस दोनों को बधाई देते हैं। गुजरात के नतीजे पूरे देश की सोच निर्धारित करेंगे।''

शिव सेना ने सोमवार को कहा कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाली कांग्रेस चुनाव में ''असली विजेता'' के तौर पर सामने आई है।

शिवसेना नेता संजय राउत ने कहा कि सत्ता में आना कोई ''बड़ी बात'' नहीं है। कांग्रेस चुनाव बेशक हार गई है, लेकिन उसने भाजपा को ''हरा'' दिया।

राउत ने कहा, ''आपने देखा कि भाजपा सत्ता में आ रही है, लेकिन असली विजेता कांग्रेस पार्टी है। वे बेशक हार गए हैं, लेकिन उन्होंने भाजपा को हरा दिया है।''

उन्होंने कहा कि भाजपा पिछले 20 वर्षों से अधिक समय से गुजरात में सत्ता में है। राउत ने कहा, ''सत्ता में आना बड़ी बात नहीं है।'' शिव सेना नेता ने यह भी कहा कि भाजपा का गुजरात मॉडल विफल हो गया है।

राउत ने दावा किया, ''भाजपा को देश में सत्ता की राह पर लाने वाला मॉडल विफल हो गया है। इसका कारण यह है कि आपने (भाजपा ने) राज्य और देश को जो सपने दिखाए, उनमें से कोई भी पूरा नहीं हुआ।''

राज्यसभा सदस्य ने कहा कि भाजपा ने नोटबंदी से गरीबों की पॉकेटों को खाली कर उन्हें और गरीब बना दिया। उन्होंने पत्रकारों से कहा, ''इसका नतीजा गुजरात में देखा गया।''

उन्होंने कहा कि चुनाव नतीजे दिखाते हैं कि गुजरात में लोग भाजपा से खुश नहीं है। शिवसेना नेता ने कहा कि भाजपा 'गुजरात के विकास मॉडल' की बात करते हुए देश में सत्ता में आई थी।

उन्होंने कहा, ''अगर गुजरात में आवाम भाजपा से खुश नहीं हैं तो उनका मन-मानस समझें, समझें कि देश में लोग क्या महसूस करते हैं। भाजपा को गुजरात के लोगों का मन-मानस तथा उनके खुश नहीं होने का कारण समझना चाहिए।''

राज्यसभा सदस्य ने दावा किया कि चाहे वह सुरक्षा का मामला हो या कश्मीर, पाकिस्तान, नोटबंदी, बेरोजगारी अथवा किसान आत्महत्या का मुद्दा, नरेंद्र मोदी की सरकार ने किसी भी मुद्दे पर सफलता नहीं पाई है।

राउत की यह टिप्पणी शिवसेना द्वारा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी की तारीफ करने के बाद आई है।

शिवसेना ने राहुल की तारीफ करते हुए कहा है कि वह नतीजे की परवाह किए बगैर गुजरात में चुनावी जंग लड़ रहे थे और यही आत्मविश्वास राहुल को आगे ले जाएगा।

उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी ने कहा कि अमेठी से सांसद 47 वर्षीय राहुल गांधी ने बेहद नाजुक मोड़ पर इस सबसे पुरानी पार्टी की बागडोर संभाली है। शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में प्रकाशित एक संपादकीय में लिखा है, ''राहुल गांधी ने बेहद नाजुक मोड़ पर कांग्रेस अध्यक्ष के तौर पर जिम्मेदारी स्वीकार की है। उन्हें शुभकामना देने में कोई हिचक नहीं होनी चाहिए।''

गुजरात में बीजेपी को बड़ा झटका: मोदी के घर में हार गई पार्टी

गुजरात विधानसभा चुनाव 2017 में जीत हासिल करने के बाद बीजेपी भले ही राज्य में 6वीं बार सरकार बनाने की तैयारी कर रही है, लेकिन इस चुनाव में पार्टी को एक ऐसा जोरदार झटका लगा है जिसके बारे में खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी कोई कल्पना नहीं की होगी।

पीएम मोदी के गृहनगर वडनगर के तहत आने वाली ऊंझा विधानसभा सीट पर बीजेपी कब्जा नहीं कर सकी। इस सीट पर कांग्रेस ने जीत हासिल की है। कांग्रेस की उम्मीदवार डॉ. आशा पटेल ने 81797 वोट हासिल करते हुए बीजेपी उम्मीदवार पटेल नारायणभाई को हराया है, वहीं नारायणभाई को 62268 वोट मिले हैं।

साल 2012 में नारायण पटेल ने इसी सीट पर आशा को हराया था। पांच सालों में ही यहां मतदाताओं का मन बदल गया। यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि ऊंझा सीट के करीब 40 फीसदी वोटर्स पाटीदार समुदाय से संबंध रखते हैं, ऐसे में कहा जा रहा है कि इन लोगों ने बीजेपी के विरोध में वोटिंग की होगी।

दरअसल दो साल पहले पाटीदारों ने आरक्षण की मांग करते हुए जो आंदोलन शुरू किया था, उसमें 14 युवाओं की मौत हो गई थी, जिसमें से एक युवा ऊंझा से ही था। इस इलाके के पाटीदार समुदाय के लोगों में बीजेपी को लेकर इतना ज्यादा रोष है कि पार्टी ने 2015 में हुए निकाय चुनावों में एक भी उम्मीदवार नहीं उतारा था।

आज भी विधानसभा चुनाव में लोगों की बीजेपी से नाराजगी साफ दिखाई दे रही है। हालांकि बीजेपी ने इस इलाके के मतदाताओं का दिल जीतने की काफी कोशिश, लेकिन ऐसा हो नहीं सका।

वहीं कांग्रेस ने लोगों की नाराजगी को पहचानते हुए इस इलाके में काफी ज्यादा ध्यान दिया और पार्टी अध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी नवसर्जन यात्रा के तहत इन इलाकों में जोरदार प्रचार-प्रसार किया।

उन्होंने यहां लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि पीएम मोदी चुनाव प्रचार में सभी मुद्दों को भुलाकर केवल खुद के बारे में ही बात कर रहे हैं।

राहुल ने यहां आयोजित एक रैली में कहा था, ''आपने मोदी जी का भाषण सुना होगा। पहली बार उन्होंने अपने भाषण में गुजरात के भविष्य के बारे में कोई बात नहीं की, ना ही भ्रष्टाचार के मुद्दे पर कोई बात की और ना ही किसानों को लेकर कुछ कहा। पीएम मोदी ने केवल पीएम मोदी के बारे में बात की। मोदी जी मैं आपको बताना चाहता हूं कि यह चुनाव आपके बारे में नहीं है और ना ही मेरे बारे में है। बीजेपी और कांग्रेस के बारे में भी यह चुनाव नहीं है। यह चुनाव गुजरात की जनता के भविष्य के बारे में है। अगर आप भाषण दे रहे हैं तो आप गुजरात की जनता के भविष्य के बारे में कुछ कहिए।''

सीएम ममता बनर्जी बोलीं, भाजपा को 'अस्थायी' और 'लाज बचाने वाली' जीत मिली है

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को भाजपा की गुजरात विधानसभा चुनाव में जीत को 'अस्थायी' और 'लाज बचाने वाली' बताया। ममता ने भाजपा की जीत को 'नैतिक हार' करार दिया।

ममता ने ट्वीट किया, ''मैं गुजरात के मतदाताओं को इस दौर में बहुत ही संतुलित फैसले के लिए बधाई देती हूं। यह अस्थायी व लाज बचाने वाली जीत है, लेकिन यह भाजपा की नैतिक हार को दिखाती है।''

उन्होंने कहा, ''गुजरात ने आम लोगों पर हुए अत्याचारों, व्यग्रता व अन्याय के खिलाफ वोट दिया। गुजरात ने 2019 का आगाज कर दिया।''

सत्तारूढ़ भाजपा गुजरात में सत्ता बरकार रखने में सफल रही है और हिमाचल प्रदेश में जीत दर्ज की है।

वहीं, गुजरात विधानसभा चुनाव के नतीजों पर तंज कसते हुए शिव सेना ने सोमवार को कहा कि भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) अपेक्षित जीत हासिल नहीं कर सकी है। शिव सेना सांसद और प्रवक्ता संजय राउत ने मीडिया से कहा, ''भाजपा को गुजरात में जीतना ही था। .. वह राज्य में 22 वर्षों से सत्ता में है। उन्होंने धन बल का इस्तेमाल किया और अभियान के दौरान 14 मुख्यमंत्रियों को भेजा।''

एक्टर प्रकाश राज ने पीएम मोदी से पूछा, 150 प्लस का क्या हुआ?

बॉलीवुड अभिनेता प्रकाश राज ने सोमवार को गुजरात चुनावों में भगवा पार्टी की जीत पर उसकी तारीफ की, लेकिन साथ ही पूछा कि पार्टी 150 से ज्यादा सीट लाने के अपने लक्ष्य को हासिल क्यों नहीं कर पाई? राज ने एक ट्वीट कर भाजपा की जीत के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को बधाई दी, लेकिन उन्होंने कहा, ''क्या आपको अपने विकास के साथ सूपड़ा साफ नहीं करना चाहिए था? 150 प्लस का क्या हुआ? उन्होंने कहा कि क्या मोदी एक पल रुककर यह सोचेंगे कि विभाजनकारी राजनीति काम नहीं आई।

अभिनेता ने कहा, ''हमारे देश के पास पाकिस्तान, धर्म, जाति, धमकाने वाले समूहों का समर्थन करना और आपसी रंजिश निकालने की तुलना में बड़े मुद्दे हैं। हमारे पास वास्तविक ग्रामीण मुद्दे हैं।'' उन्होंने कहा कि किसान, गरीब और ग्रामीण भारत की नजरअंदाज की गई आवाज और तेज हो गई है। उन्होंने प्रधानमंत्री से पूछा कि क्या वह ये आवाज सुन सके। प्रकाश राज ने पहले वरिष्ठ पत्रकार और कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या पर मोदी की चुप्पी पर सवाल उठाए थे। वह गौरी लंकेश के करीबियों में से थे।

वहीं, पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने सोमवार को भाजपा की गुजरात विधानसभा चुनाव में जीत को 'अस्थायी' और 'लाज बचाने वाली' बताया। ममता ने भाजपा की जीत को 'नैतिक हार' करार दिया। ममता ने ट्वीट किया, ''मैं गुजरात के मतदाताओं को इस दौर में बहुत ही संतुलित फैसले के लिए बधाई देती हूं। यह अस्थायी व लाज बचाने वाली जीत है, लेकिन यह भाजपा की नैतिक हार को दिखाती है।''

कांग्रेस की बागडोर संभालने वाले नेहरू-गांधी परिवार के छठे सदस्‍य बने राहुल

कांग्रेस पार्टी की लंबे समय से लंबित मांग पूरी करते हुए राहुल गांधी ने शनिवार को कांग्रेस अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाल ली। पार्टी अध्यक्ष के रूप में उनकी नियुक्ति ऐसे समय में हुई है, जब पार्टी अस्तित्व के संकट से जूझ रही है। उनके सामने 2019 के लोकसभा चुनाव के रूप में सबसे बड़ी चुनौती खड़ी है।

132 साल पुरानी कांग्रेस पार्टी की बागडोर संभालने वाले 47 वर्षीय राहुल गांधी नेहरू-गांधी परिवार के छठे सदस्य हैं। शीर्ष स्तर पर यह फेरबदल ऐसे वक्त में हुआ है, जब गुजरात विधानसभा चुनाव की मतगणना सोमवार को होने वाली है। यह समय राहुल गांधी की अग्नि परीक्षा से कम नहीं है, क्योंकि गुजरात चुनाव में प्रचार अभियान की उन्होंने अगुआई की है। दरअसल, 2014 के लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी को लगातार हार का समान करना पड़ा है। लेकिन इस साल हुए पंजाब विधानसभा चुनाव में पार्टी ने जीत दर्ज की थी।

राहुल के सामने 2018 में होने वाले विधानसभा चुनाव भी बड़ी चुनौती लेकर आने वाले हैं। अगले साल पहले कर्नाटक, मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में चुनाव होने हैं, जो उनके लिए काफी महत्वपूर्ण रहने वाले हैं। उसके बाद लोकसभा चुनाव राहुल के लिए सबसे बड़ी चुनौती रहने वाली है। राहुल गांधी के सामने खड़ी चुनौतियों में से एक चुनौती कांग्रेस में नई शक्ति का संचार करना और जान फूंकना है, जो 2014 लोकसभा चुनाव के बाद से मिली हार के बाद डांवाडोल-सी नजर आ रही है। राहुल के समक्ष कांग्रेस को जमीनी स्तर पर मजबूत करने की भी चुनौती है, ताकि मोदी की अगुआई वाली भाजपा और पार्टी प्रमुख अमित शाह जैसे चुनावी रणनीतिकारों से टक्कर ली जा सके।

गांधी के सामने 2019 लोकसभा चुनाव के मद्देनजर एक बड़ा विपक्ष तैयार करने की भी चुनौती होगी। उन्हें मोदी के खिलाफ लड़ने के लिए विभिन्न पार्टियों के समर्थन के साथ खुद को एक विकल्प के रूप में पेश करना होगा। 2014 में हुए लोकसभा चुनाव में राहुल कांग्रेस का चेहरा रहे थे। विदेशों में अपनी कुछ लंबी यात्राओं के चलते गांधी को एक अनिच्छुक राजनेता के रूप में माना जाता था। साथ ही पार्टी प्रमुख की भूमिका में देरी, संप्रग सरकार के दोनों कार्यकाल में मंत्री पद की जिम्मेदारी नहीं संभालने और कुछ मुद्दों पर उचित तरीके से प्रतिक्रिया न करने से उनकी छवि को नुकसान पहुंचा है।

हालांकि बाद में मोदी और भाजपा पर उनके तेज और आक्रामक हमलों ने इस धारणा को बदला और यह दिखाया कि वे उनका सामना करने में सक्षम हैं। अपनी एक अमेरिका यात्रा के दौरान उन्होंने थिंक टैंकों के साथ बातचीत की थी, जिससे उनकी छवि में आमूलचूल बदलाव आया। गुजरात में सफलता कांग्रेस के लिए एक बड़ा मनोबल बढ़ाने वाली घटना हो सकती है। गांधी एक व्यापक सामाजिक गठबंधन बनाने में सफल रहे और उन्होंने मोदी को प्रतिक्रिया देने के लिए मजबूर कर दिया।

राहुल के सामने अन्य बड़ी चुनौती उत्तर प्रदेश में पार्टी की खिसके जनाधार को दोबारा हासिल करने की होगी। राज्य में सबसे अधिक लोकसभा सीट (80) हैं। गांधी ने विधानसभा चुनाव में दो बार पार्टी के प्रचार अभियान का नेतृत्व किया, लेकिन दोनों बार असफलता ही हाथ लगी। हाल ही में हुए स्थानीय निकाय चुनाव में अमेठी और रायबरेली में पार्टी अपनी छवि के अनुरूप प्रदर्शन नहीं कर सकी थी। अमेठी और रायबरेली राहुल गांधी और उनकी मां सोनिया गांधी के लोकससभा क्षेत्र हैं।

कांग्रेस चुनावी रूप से सिकुड़ रही है, पार्टी अब बिहार जैसे राज्य में चौथे पायदान पर है, वहीं पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु समेत दिल्ली में वह तीसरे स्थान पर है। 2014 के बाद से विभिन्न विधानसभा चुनावों में, पार्टी तीसरे या चौथे स्थान पर रही है। पार्टी के मुख्य पक्षों में से एक दलित और अन्य पक्ष पार्टी से दूर चले गए हैं।

राहुल गांधी को एक युवा नेता के रूप में पेश किया गया है, जो युवाओं की भाषा और उनकी आवाज को समझता है। लेकिन मोदी ने इस वर्ग को अपने साथ लाने में सफलता हासिल की है। युवा बड़ी संख्या में चुनाव में अपनी उपस्थिति दर्ज कराते हैं। कांग्रेस को मध्य वर्ग को लुभाने के तरीके भी तलाशने होंगे।

ममता बनर्जी और लालू प्रसाद जैसे वरिष्ठ नेताओं का सोनिया गांधी के साथ एक सहज स्तर रहा है, अब देखना यह होगा कि क्या राहुल गांधी के साथ भी वही रहता है। राहुल गांधी के सामने पार्टी की राज्य इकाइयों में गुटबाजी को समाप्त करने और सभी को एकजुट करने की भी चुनौती होगी। राहुल के सामने कांग्रेस के पुराने नेताओं और युवा नेताओं के बीच संतुलन बनाने की भी चुनौती होगी।

कांग्रेस वर्तमान में पांच राज्यों और एक केंद्र शासित प्रदेश में सत्ता में है। बतौर लोकसभा सांसद राहुल का यह तीसरा कार्यकाल है, और उन्हें 2013 में पार्टी उपाध्यक्ष बनाया गया था।

पाकिस्तान लिंक पर कांग्रेस ने कहा, सबूत दो या माफी मांगो

संसद के ऊपरी सदन में शुक्रवार को शीतकालीन सत्र का पहला दिन था जो कि बहुत ही हंगामेदार रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पर लगाए गए आरोपों और जनता दल यूनाइटेड (जदयू) के नेता शरद यादव को अयोग्य घोषित करने के मुद्दों को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार को घेरा। सदन में हंगामा इतना बढ़ गया कि सदन की कार्यवाही को स्थगित कर दिया गया।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने पीएम मोदी द्वारा मनमोहन सिंह पर पाकिस्तान के साथ रिश्ते होने के आरोप पर कहा, ''यह कोई साधारण आरोप नहीं है। पीएम मोदी द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री, पूर्व उपराष्ट्रपति और कई सेवानिवृत्त राजनयिकों की सत्यनिष्ठा पर सवाल उठाया गया है।''

गुलाम नबी आजाद ने कहा कि 'जो दस साल तक देश के प्रधानमंत्री रहे मनमोहन सिंह, उनपर पीएम नरेंद्र मोदी ने गुजरात के पालनपुर में एक रैली को संबोधित करते हुए पाकिस्तान और उनके नेताओं के साथ मिलकर गुजरात चुनाव में दखलअंदाजी का आरोप लगाया। पीएम मोदी ने मनमोहन सिंह और अन्य लोगों पर आरोप लगाया कि पाकिस्तान के साथ ये लोग मिलकर गुजरात चुनाव में बीजेपी को हराने का षड़यंत्र रच रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस मामले पर सदन में आकर बोलना चाहिए और जो उन्होंने बोला है, उसका सबूत दें। अगर उनके पास सबूत नहीं है तो उन्हें केवल सदन में नहीं बल्कि पूरे राष्ट्र से मांफी मांगनी चाहिए।'

विपक्ष के नेता ने आगे कहा कि यह मुद्दा केवल राष्ट्र का नहीं , अंतरराष्ट्रीय है और इसपर चर्चा होनी चाहिए।

शरद यादव और अली अनवर की सदस्यता रद्द किए जाने के मुद्दे पर गुलाम नबी अाजाद ने कहा, ''शरद यादव ने महागठबंधन नहीं छोड़ा, बल्कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उनके सहयोगियों ने महागठबंधन छोड़ा। वास्तव में, उन लोगों की सदस्यता को रद्द किया जाना चाहिए।''

तीन साल में भारत बना एशिया का सबसे भ्रष्ट देश, बीजेपी हुई मालामाल: अन्ना हजारे

अन्ना हजारे ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली भाजपा सरकार पर हमला बोलते हुए शुक्रवार को कहा कि पिछले तीन साल के एनडीए शासन काल में भारत एशिया में सबसे ज्यादा भ्रष्ट देशों में शीर्ष स्थान पर आ गया है।

उन्होंने दावे के साथ कहा कि पिछले पांच साल में दान के रूप में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की तिजोरी में 80 हजार करोड़ रुपए की रकम आई है। अन्ना हजारे ने 'फोर्ब्स' पत्रिका के एक आलेख में प्रकाशित ट्रांसपैरेंसी इंटरनेशनल सर्वे का हवाला देते हुए यह बात कही।

उन्होंने कहा, ''मैं यह दावा नहीं कर रहा हूं, लेकिन एशियाई देशों में सर्वेक्षण करवाने के बाद यह फोर्ब्स पत्रिका में प्रकाशित हुआ है।''

हजारे ने कहा, ''पिछले तीन साल से मैं चुप हूं। जब नई सरकार आती है तो हमें उसे अवश्य कुछ समय देना चाहिए। इसलिए मैं चुप रहा, लेकिन अब बोलने का वक्त आ गया है। मजबूत जन लोकपाल और देश के किसानों के लिए अगले साल 23 मार्च से दूसरा आंदोलन शुरू करने जा रहा हूं।''

उन्होंने कहा कि आम जनता अभी भी समस्याओं से जूझ रही है। देश के किसान दुखी हैं। बैंक की ओर से किसानों को जो कर्ज दिया जा रहा है उस पर मनमाना ऊंचा ब्याज दर वसूल किया जा रहा है। भारतीय रिजर्व बैंक को सभी किसानों को दिए जाने वाले ऋण पर ब्याज दर तय करना चाहिए और किसानों के हितों को देखते हुए बैंकों को कृषि ऋण की ब्याज दर तय करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

अन्ना हजारे ने कहा, ''किसानों को उनकी फसलों का मूल्य नहीं मिल रहा है और वे कर्ज अदा करने में खुद को असमर्थ पा रहे हैं। यही कारण है कि किसान आत्महत्या कर रहे हैं।''

हजारे ने कहा कि वह पिछले तीन साल में प्रधानमंत्री को 32 पत्र लिख चुके हैं, लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) से एक भी पत्र का उन्हें जवाब नहीं मिला है।

भारत सरकार ने ट्रिपल तलाक बिल को दी मंजूरी

भारत में ट्रिपल तलाक बिल पर केंद्र सरकार ने मुहर लगा दी है। अब इस बिल को कानूनी शक्ल देने के लिए दोनों सदनों में पास कराया जाएगा। 15 दिसंबर से शुरू हुए शीतकालीन सत्र में इसे पेश किया जाएगा। यह सत्र 5 जनवरी को खत्म होगा।

केंद्र सरकार की ओर से तैयार विधेयक के मसौदे में कहा गया है कि एक बार में तीन तलाक गैरकानूनी होगा और ऐसा करने वाले पति को तीन साल जेल की सजा हो सकती है। किसी भी स्वरूप में दिया गया ट्रिपल तलाक (मौखिक, लिखित या इलैक्ट्रोनिक) गैर कानूनी माना जाएगा। अगर किसी महिला को ट्रिपल तलाक दिया जाता है तो वह महिला खुद और अपने नाबालिग बच्चों के लिए मजिस्ट्रेट से भरण-पोषण व गुजारा-भत्ते की मांग कर सकती है। कितना गुजारा-भत्ता देना है यह मजिस्ट्रेट तय करेगा। नाबालिग बच्चों की कस्टडी के लिए भी पीड़ित मजिस्ट्रेट से गुहार लगा सकती है।

पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक 'मुस्लिम वुमन प्रोटेक्शन ऑफ राइट्स ऑन मैरिज बिल' के ड्राफ्ट को इंटर-मिनिस्टर ग्रुप द्वारा तैयार किया गया है, जिसका नेतृत्व गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने किया था।

गौरतलब है कि 22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक करार देते हुए छह महीने के भीतर सरकार को कानून बनाने का आदेश दिया था। इस मामले पर पांच जजों की बेंच ने सुनवाई की थी। दो जज तीन तलाक के पक्ष में थे, वहीं तीन इसके खिलाफ। बहुमत के हिसाब से तीन जजों के फैसले को बेंच का फैसला माना गया।

बेंच में जस्टिस जे एस खेहर, जस्टिस कुरिएन जोसेफ, आर एफ नरीमन, यू यू ललित और एस अब्दुल नज़ीर शामिल थे। इस केस की सुनवाई 11 मई को शुरू हुई थी। जजों ने इस केस में 18 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख दिया था।

आपको बता दें कि कानून न होने के कारण अब भी मुस्लिम समुदाय में एक बार में तीन तलाक की प्रथा जारी है।

9 दिसंबर को उत्तर प्रदेश में एक शख्स ने अपनी बीवी को इसलिए तलाक दे दिया क्योंकि वह तीन तलाक के समर्थन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को सपोर्ट करने वाली एक रैली में शामिल हुई थी। मामला बरेली के किला क्षेत्र के इंग्लिशगंज मोहल्ले का था, जहां की निवासी सायरा को उसके पति दानिश खान ने न केवल मारा पीटा बल्कि एक साल के मासूम के साथ उसे घर से बाहर निकाल दिया। इससे पहले सायरा गुरुवार (07 दिसंबर) को मेरा हक फाउंडेशन की तरफ से निकाली गई एक रैली में शामिल हुई थी।

प्रधानमंत्री ने स्‍कोर्पिन वर्ग की पहली नौसैनिक पनडुब्‍बी आईएनएस कलवरी राष्‍ट्र को समर्पित की

भारत में प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने नौसैनिक पनडुब्‍बी आईएनएस कलवरी आज राष्‍ट्र को समर्पित की। स्‍कोर्पिन वर्ग की छह पनडुब्बियों में से पहली पनडुब्‍बी को समर्पित करते हुए मोदी ने कहा कि यह देश के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि है।

प्रधानमंत्री ने सवा सौ करोड़ भारतीय नागरिकों के लिए इसे गर्व का क्षण बताया। मोदी ने देश की ओर से भारतीय नौसेना को बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि भारत समुद्री मार्ग के जरिए आतंकवाद से निपटने और समुद्री डकैती, नशीले पदार्थों की तस्‍करी या गैर कानूनी तौर पर मछली पकड़ने पर रोक लगाने में महत्‍वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।

प्रधानमंत्री ने इस क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास यानि सागर योजना को महत्‍वपूर्ण बताया।

इस अवसर पर रक्षा मंत्री निर्मला सीतारामन ने कहा कि पनडुब्बियां आधुनिक समय के युद्ध की दृष्टि से बड़ी मारक और शक्तिशाली होती हैं।

आईएनएस कलवरी को मुम्‍बई की नौसैनिक गोदी में आयोजित एक समारोह में देश को समर्पित किया गया।

दिल्ली सरकार दुर्घटना में घायल लोगों के उपचार का खर्च उठाएगी

दिल्ली सरकार ने एक नई योजना के तहत शहर की सड़कों पर वाहन दुर्घटना, आग लगने और तेजाब हमले में घायल लोगों का निजी अस्पतालों में उपचार का खर्च उठाने का फैसला किया है।

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल की बैठक में यह निर्णय लिया गया।

दिल्ली के स्वास्थ्य मंत्री सत्येन्द्र जैन ने बताया कि ऐसे हादसों के पीड़ितों का निजी अस्पतालों में मुफ्त इलाज किया जाएगा, चाहे वे किसी भी राज्य के हों।

उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पतालों में पहले से ही मुफ्त इलाज की सुविधा दी जा रही है। यह योजना स्वीकृति के लिए उपराज्यपाल अनिल बैजल को भेजी जाएगी।