बीजेपी के गुजरात के 'विकास का मॉडल' होने के दावे पर सोशल मीडिया पर मजाक उड़ाया जा रहा है।
सोशल मीडिया पर 'विकास पागल हो गया है' हैशटैग के साथ कई मजेदार ट्वीट किए जा रहे हैं।
इन टिप्पणियों के साथ गुदगुदाने वाले कई वीडियो और फोटो लगाए गए हैं जिनमें लोग सेल्फी ले रहे हैं या मोटरसाइकिल पर सवार हैं।
कुछ लोगों का मानना है कि एक पाटीदार युवक सागर सावलिया ने फेसबुक पर एक फोटो डाली और इसके बाद से यह सब शुरू हुआ। इस पोस्ट में एक सरकारी बस और टूटे हुए टायर दिख रहे हैं।
इसमें गुजराती में कैप्शन लिखा है, ''सरकारी बसें हमारी हैं, लेकिन इनमें चढ़ने के बाद आपकी सुरक्षा की जिम्मेदारी आपकी है। जहां है, वहीं रहिए विकास पागल हो गया है।''
20 साल के सागर सावलिया इंजीनियरिंग छात्र हैं और वे बेफामन्यूज नाम से वेबसाइट चलाते हैं। वे पाटीदार अनामत आंदोलन समिति के सक्रिय सदस्य हैं और हार्दिक पटेल के करीबी हैं।
गुजरात में बीजेपी का मुख्य राजनीतिक मुद्दा विकास है,जहां इस वर्ष चुनाव होने जा रहे हैं।
बीजेपी के शीर्ष नेता गुजरात को अकसर देश के सर्वाधिक विकसित राज्य के तौर पर पेश करते हैं।
गुजरात कांग्रेस ने तुरंत ही इस मौके को भुनाते हुए सैंकड़ों लतीफे बना डाले। इसकी टैगलाइन है, 'विकास पागल हो गया है।'
गुजरात विधानसभा के चुनाव इसी साल होने हैं और इससे पहले इस तरह से सोशल मीडिया पर पार्टी के मजाक उड़ने से बीजेपी का सिरदर्द बढ़ा दिया है। 'विकास पागल हो गया है' के हैशटैग के साथ लोग बीजेपी पर निशाना साध रहे हैं।
वरिष्ठ टीवी पत्रकार रवीश कुमार ने आरएसएस समर्थकों पर जाने से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया है। रवीश ने यह आरोप लगाते हुए अपने फेसबुक अकाउंट पर एक पोस्ट लिखी है।
पोस्ट में उन्होंने कहा है कि एक व्हॉट्सऐप ग्रुप में मुझे जबरन शामिल किया गया है। मैं उस ग्रुप को डिलिट कर देता हूं, लेकिन मेरा नंबर फिर उस ग्रुप में शामिल कर दिया जाता है।
रवीश ने कहा कि इस ग्रुप में हर तरह की धमकी और गालियां दी जाती हैं। रवीश ने ग्रुप की चेट के कुछ स्क्रिनशॉट्स भी फेसबुक पर शेयर किए हैं। इनमें साफ तौर पर देखा जा सकता है कि किस तरह के अपशब्दों का इस्तेमाल किया जाता है।
रवीश ने साथ ही पोस्ट में लिखा है कि मेरे इस मैसेज को आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत तक पहुंचाया जाए और उनसे पूछा जाए कि क्या उन्होंने संघ के स्वयंसेवकों को ऐसी भाषा बोलने की अनुमति दी है।
रवीश का कहना है कि ग्रुप में शामिल सभी लोग अपने आपको आरएसएस का कार्यकर्ता होने का दावा करते हैं।
रवीश ने फेसबुक पोस्ट में लिखा है, ''एक व्हाट्स अप ग्रुप है ऊँ धर्म रक्षति रक्षित:। इसमें से कई लोग ख़ुद को आरएसएस के होने का दावा करते हैं।
जब भी कुछ विवाद होता है, ये एक्टिवेट होता है और मुझे अनाप शनाप कहने लगता है। हर तरह की धमकी और गाली दी जाती है। मुझे पता नहीं क्या करना चाहिए।
डिलिट करता हूँ तो फिर जोड़ लेते हैं। Dharm RSS Dharm 2 RSS और आकाश सोनी इसके ग्रुप एडमिन हैं। कई हैं।
क्या कोई संघ प्रमुख मोहन भागवत तक ये मेसेज पहुँचा सकता है कि क्या उन्होंने संघ के स्वयंसेवकों को ऐसी भाषा की अनुमति दी है?
वैसे ग्रुप के लोगों को किसी बात से फर्क नहीं पड़ता। आप इस ग्रुप की भाषा पढ़ेंगे तो काँप जायेंगे। इतनी नफरत कौन भर रहा है इनमें।
'लिंच मॉब' की तरह बर्ताव करते हैं। मैं संघ के कई लोगों को जानता हूँ। पहले भी बताया था, पर अब लगता है सार्वजनिक कर देना चाहिए।
ताकि आपको पता रहे कि हम किस हालात में काम कर रहे हैं। गुज़ारिश है कि आप एक-एक तस्वीर देखें और अपने देश के बारे में सोचें। भाषा की शालीनता अनुमति नहीं देती कि इन्हें यहाँ पोस्ट करूँ, लेकिन आप जानेंगे कैसे कि हम क्या-क्या झेल रहे हैं?
ये लोग फोन करके गालियाँ भी देते रहते हैं। कोई मोहन भागवत को जानता है? पता करके बता सकता है कि क्या इसी भाषा से धर्म की रक्षा होगी या उन्हें यही बता दे कि कोई संघ का नाम बदनाम कर रहा है?
क्या इसी संस्कृति के लिए हम बौराए हुए हैं? क्या इन्हीं लोगों के दम से भारत विश्व गुरु बनेगा?
क्या ये आकाश सोनी संघ का नहीं है?
जब मैंने इस पोस्ट में आकाश का नाम लिया तो झट से ग्रुप से हटा दिया।
चर्चा चल रही थी कि आकाश सोनी का नंबर किसने सेव कर दिया तो एक कहता है कि उससे सेव हो गया था। उसके भी स्क्रीन शॉट दे रहा हूँ।''
सबसे बड़ा सवाल कि रवीश कुमार को जान से मारने की धमकी देने वाले आरएसएस समर्थकों पर भारत की मोदी सरकार कानूनी कार्यवाही करेगी!


एनडीटीवी ने बीएसई लिमिटेड को आज (22 सितम्बर) को एक पत्र भेजा है, जिसमें एनडीटीवी ने कहा है कि वह अपना शेयर किसी को बेचने नहीं जा रहा है। इससे स्पस्ट हो जाता है कि एनडीटीवी के बिक्री की खबर गलत थी।
ऐसी खबर आ रही थी कि टीवी चैनल एनडीटीवी को जल्दी ही नया मालिक मिल सकता है। इंडियन एक्सप्रेस को सूत्रों ने बताया कि स्पाइसजेट के सह-संस्थापक और मालिक अजय सिंह एनडीटीवी के सबसे बड़े शेयर धारक बनने जा रहे हैं।
अजय सिंह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साल 2014 के चुनाव प्रचार की कोर टीम में शामिल थे। इंडियन एक्सप्रेस ने जब एनडीटीवी के सूत्र से पूछा कि क्या चैनल स्पाइसजेट के अजय सिंह को बेचा जा चुका है? तो जवाब मिला, ''हाँ, सौदा पक्का हो चुका है और संपादकीय अधिकार के साथ चैनल का नियंत्रण अजय सिंह के हाथ में होगा।''
एनडीटीवी के प्रमोटरों प्रणय रॉय, राधिका रॉय और प्रमोटर संस्था आर आर पी आर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड की सीबीआई वित्तीय लेन-देन के एक मामले में जांच कर रही है। इसी साल पांच जून को सीबीआई ने रॉय दंपति के निवास और दफ्तर पर कथित तौर पर बैंक लोन न चुकाने से जुड़े मामले में छापा मारा था।
एनडीटीवी ने छापे के बाद जारी बयान में सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया था।
सूत्रों के अनुसार, स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह के पास एनडीटीवी के करीब 40 प्रतिशत शेयर होंगे।
प्रणय रॉय और राधिका रॉय के पास करीब 20 प्रतिशत शेयर होंगे।
बॉम्ब स्टॉक एक्सचेंज के जून 2017 तक के आंकड़ों के अनुसार, एनडीटीवी में प्रमोटरों के पास 61.45 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं 38.55 प्रतिशत हिस्सेदारी सार्वजनिक शेयरधारकों के पास है।
सूत्रों के अनुसार, अजय सिंह एनडीटीवी का 400 करोड़ रुपये का कर्ज भी वहन करेंगे।
कुल सौदा करीब 600 करोड़ रुपये में हुआ बताया जा रहा है।
सौदे में करीब 100 करोड़ तक नकद रॉय दंपति को मिल सकता है।
जब स्पाइसजेट से एनडीटीवी से हुए सौदे के बारे में पूछा गया तो उसके अधिकारियों ने इसे पूरी तरह बेबुनियाद और गलत बताया।
एनडीटीवी को भेजे गये ईमेल और मोबाइल मैसेज का कोई जवाब नहीं आया।
अजय सिंह ने जनवरी 2015 में स्पाइसजेट की कमान संभाली थी और उसे सफल बनाया था। नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार के दौरान 'अबकी बार मोदी सरकार' जुमले का श्रेय अजय सिंह को दिया जाता है। वो अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान प्रमोद महाजन के ओएसडी रह चुके हैं। उस दौरान उन्होंने डीडी स्पोर्ट्स और डीडी न्यूज को लॉन्च करने में प्रमुख भूमिका निभायी थी।
अजय सिंह साल 1996 में दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बोर्ड में रहे थे। उन्होंने डीटीसी के कायाकल्प की योजना बनायी थी। उनके कार्यकाल में डीटीसी बसों की संख्या 300 से 6000 हो गई थी।
दिल्ली के सेंट कोलंबा से पढ़े अजय सिंह आईआईटी दिल्ली से बीटेक हैं। उन्होंने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है और दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की भी पढ़ाई की है।
अंत में सबसे बड़ा सवाल कि प्रमोद महाजन के ओएसडी के रूप में अपना कैरियर शुरू करने वाले अजय सिंह के पास इतना पैसा कहाँ से आया?
एनडीटीवी ने बीएसई लिमिटेड को आज (22 सितम्बर) को एक पत्र भेजा है, उसकी प्रति नीचे संलग्न किया जा रहा है। जिसमें एनडीटीवी ने कहा है कि वह अपना शेयर किसी को बेचने नहीं जा रहा है। इससे स्पस्ट हो जाता है कि एनडीटीवी के बिक्री की खबर गलत थी।

टीवी चैनल एनडीटीवी को जल्दी ही नया मालिक मिल सकता है। इंडियन एक्सप्रेस को सूत्रों ने बताया कि स्पाइसजेट के सह-संस्थापक और मालिक अजय सिंह एनडीटीवी के सबसे बड़े शेयर धारक बनने जा रहे हैं।
अजय सिंह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के साल 2014 के चुनाव प्रचार की कोर टीम में शामिल थे। इंडियन एक्सप्रेस ने जब एनडीटीवी के सूत्र से पूछा कि क्या चैनल स्पाइसजेट के अजय सिंह को बेचा जा चुका है? तो जवाब मिला, ''हाँ, सौदा पक्का हो चुका है और संपादकीय अधिकार के साथ चैनल का नियंत्रण अजय सिंह के हाथ में होगा।''
एनडीटीवी के प्रमोटरों प्रणय रॉय, राधिका रॉय और प्रमोटर संस्था आर आर पी आर होल्डिंग प्राइवेट लिमिटेड की सीबीआई वित्तीय लेन-देन के एक मामले में जांच कर रही है। इसी साल पांच जून को सीबीआई ने रॉय दंपति के निवास और दफ्तर पर कथित तौर पर बैंक लोन न चुकाने से जुड़े मामले में छापा मारा था।
एनडीटीवी ने छापे के बाद जारी बयान में सभी आरोपों को बेबुनियाद बताया था।
सूत्रों के अनुसार, स्पाइसजेट के चेयरमैन अजय सिंह के पास एनडीटीवी के करीब 40 प्रतिशत शेयर होंगे।
प्रणय रॉय और राधिका रॉय के पास करीब 20 प्रतिशत शेयर होंगे।
बॉम्ब स्टॉक एक्सचेंज के जून 2017 तक के आंकड़ों के अनुसार, एनडीटीवी में प्रमोटरों के पास 61.45 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वहीं 38.55 प्रतिशत हिस्सेदारी सार्वजनिक शेयरधारकों के पास है।
सूत्रों के अनुसार, अजय सिंह एनडीटीवी का 400 करोड़ रुपये का कर्ज भी वहन करेंगे।
कुल सौदा करीब 600 करोड़ रुपये में हुआ बताया जा रहा है।
सौदे में करीब 100 करोड़ तक नकद रॉय दंपति को मिल सकता है।
जब स्पाइसजेट से एनडीटीवी से हुए सौदे के बारे में पूछा गया तो उसके अधिकारियों ने इसे पूरी तरह बेबुनियाद और गलत बताया।
एनडीटीवी को भेजे गये ईमेल और मोबाइल मैसेज का कोई जवाब नहीं आया।
अजय सिंह ने जनवरी 2015 में स्पाइसजेट की कमान संभाली थी और उसे सफल बनाया था। नरेंद्र मोदी के चुनाव प्रचार के दौरान 'अबकी बार मोदी सरकार' जुमले का श्रेय अजय सिंह को दिया जाता है। वो अटल बिहारी वाजपेयी सरकार के दौरान प्रमोद महाजन के ओएसडी रह चुके हैं। उस दौरान उन्होंने डीडी स्पोर्ट्स और डीडी न्यूज को लॉन्च करने में प्रमुख भूमिका निभायी थी।
अजय सिंह साल 1996 में दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के बोर्ड में रहे थे। उन्होंने डीटीसी के कायाकल्प की योजना बनायी थी। उनके कार्यकाल में डीटीसी बसों की संख्या 300 से 6000 हो गई थी।
दिल्ली के सेंट कोलंबा से पढ़े अजय सिंह आईआईटी दिल्ली से बीटेक हैं। उन्होंने कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से एमबीए किया है और दिल्ली विश्वविद्यालय से कानून की भी पढ़ाई की है।
अंत में सबसे बड़ा सवाल कि प्रमोद महाजन के ओएसडी के रूप में अपना कैरियर शुरू करने वाले अजय सिंह के पास इतना पैसा कहाँ से आया?
बिहार के तथाकथित सुशासन बाबू का सुशासन देखिए कि उनके शासन में बाँध का उद्घाटन होने से पहले ही बाँध टूट गया।
इससे बड़ी शर्मिंदगी की बात क्या हो सकती है कि इंजीनियर से पोलिटिशियन बने नीतीश कुमार को उद्घाटन करना था, लेकिन 15 घंटे पहले ही बांध टूट गया, इससे बिहार में नीतीश सरकार की भद पिट गई।
बांध टूटने से ज़िले के आला प्रशासनिक अधिकारियों की नींद उड़ गई है, सभी में हड़कंप मचा है। कोई भी अधिकारी शर्म से फोन रिसीव नहीं कर रहा।
कहलगाँव के एक आला अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर इस खबर की पुष्टि की है।
आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार बुधवार को इस बांध का उदघाट्न करने वाले थे, लेकिन अब यह कार्यक्रम टल गया है।
बिहार के भागलपुर में बीते 40 साल से बन रही बटेश्वर स्थान गंगा पंप नहर योजना का बांध उदघाट्न के ठीक एक दिन पहले मंगलवार शाम को ही टूट गया। यह तो गनीमत रही कि बांध का पानी ग़ांव की तरफ नहीं आया।
ये बांध कहलगाँव एनटीपीसी आवासीय एरिया सीआईएसएफ क्वाटर के नजदीक में करीब छह फीट टूटा है। एक बार जब नहर का पानी जवानों के क्वार्टर में घुसने लगा तो वहां अफरातफरी मच गई।
इस योजना पर 389.31 करोड़ रुपए खर्च हुए है।
पीरपैंती के विधायक रामविलास पासवान ने बांध टूटने की घटना को इंजीनियर और ठेकेदार के गठजोड़ का नतीजा बताया है।
यह योजना लिफ्ट सिंचाई दर्जे की योजना है। इसके तहत भागलपुर के कहलगांव ब्लाक के शेखपुरा ग़ांव के नजदीक गंगा नदी के तट पर स्थित कौआ व गंगा नदी के संगम के नजदीक पंप हाउस नंबर एक बनाया गया है। इससे आगे डेढ़ किलो मीटर शिवकुमारी पहाड़ी के नजदीक पंप हाउस नंबर दो बनाया है। इन दोनों से पानी को दो स्टेज पर 17 और 27 मीटर लिफ्ट कर मुख्य नहर व इससे निकली वितरण प्रणाली को सिंचाई के लिए उपलब्ध कराया जाना है।
इस योजना से भागलपुर ज़िले की 18620 हेक्टेयर और झारखंड के गोड्डा ज़िले की 22658 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई हो सकेगी यानी इससे बिहार और झारखंड को फायदा होगा।
शुरआत में यह योजना 13.88 करोड़ रुपए की थी। 1977 में योजना आयोग ने इसकी मंजूरी दी थी।
जनता दल यूनाइटेड के शरद यादव खेमे ने गुजरात से विधायक छोटू भाई वसावा को आज (17 सितंबर को) पार्टी का कार्यकारी अध्यक्ष नियुक्त कर दिया।
जनता दल यूनाइटेड नेता अरुण कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि जनता दल यूनाइटेड की कार्यकारिणी की बैठक में यह फैसला किया गया।
हाल ही में गुजरात से राज्य सभा की तीन सीटों पर हुये चुनाव में कांग्रेस उम्मीदवार अहमद पटेल को वसावा के वोट से ही जीत मिल सकी थी।
बैठक के बाद संवाददाता सम्मेलन में श्रीवास्तव ने बताया कि बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की पार्टी अध्यक्ष पद नियुक्ति को रद्द कर वसावा को कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया है।
पार्टी के उपाध्यक्ष के. राजशेखरन की अध्यक्षता में हुई कार्यकारिणी की बैठक में बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार खेमे द्वारा महागठबंधन तोड़ कर बीजेपी के साथ गठजोड़ करने सहित अन्य फैसलों को भी रद्द कर दिया गया।
श्रीवास्तव ने बताया कि बैठक में पार्टी नेता जावेद रजा द्वारा पेश संगठन संबंधी प्रस्ताव में नीतीश कुमार द्वारा पार्टी के चुनाव अधिकारी बनाये गये अनिल हेगड़े की नियुक्ति को रद्द करने के सुझाव को मंजूरी दी गयी। इसके साथ ही हेगड़े द्वारा की गयी पदाधिकारियों की नियुक्ति स्वत: रद्द हो गयी।
उन्होंने बताया कि बैठक में देश भर से जुटे जनता दल यूनाइटेड नेताओं ने नीतीश खेमे द्वारा बीजेपी से गठजोड़ करने को जनादेश का अपमान बताते हुये इस फैसले को रद्द किया है। इसके अलावा हाल ही में नीतीश खेमे द्वारा जनता दल यूनाइटेड पदाधिकारियों को पार्टी से निकालने के फैसले को भी निष्प्रभावी घोषित कर हटाये गये प्रदेश अध्यक्षों और अन्य पदाधिकारियों को उनके पद पर बहाल कर दिया।
श्रीवास्तव ने बैठक में पार्टी की दिल्ली और उत्तर प्रदेश सहित 19 राज्य इकाईयों के अध्यक्षों और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारियों के हिस्सा लेने का दावा करते हुये शरद गुट को ही वास्तविक जनता दल यूनाइटेड बताया।
शरद यादव की भविष्य की भूमिका के सवाल पर उन्होंने कहा कि कार्यकारिणी ने उन्हें समाजवादी विचारधारा वाले दलों को साझी विरासत अभियान के माध्यम से एक मंच पर लाकर भविष्य में महागठबंधन को प्रभावी स्वरूप में गठित करने की जिम्मेदारी सौंपी है।
श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यकारिणी ने नीतीश खेमे के पार्टी विरोधी फैसलों की समीक्षा के लिये अनुशासन समिति का गठन किया है। तीन सदस्यीय इस समिति की अध्यक्षता वह स्वयं करेंगे। जबकि पार्टी के चुनाव चिन्ह सहित अन्य मामलों से जुड़े विवादों पर भविष्य की रणनीति तय करने के लिये जनता दल यूनाइटेड महासचिव जावेद रजा की अध्यक्षता में चुनाव विवाद समिति गठित की गयी है।
उन्होंने बताया कि कार्यकारिणी के फैसलों पर मंजूरी के लिये आगामी आठ अक्टूबर को दिल्ली में जनता दल यूनाइटेड की राष्ट्रीय परिषद की बैठक बुलाई गई है। नीतीश सहित अन्य नेताओं के फैसलों को अनुशासनहीनता के दायरे में लाने के बारे में समिति की सिफारिशों पर अमल का फैसला राष्ट्रीय परिषद की बैठक में किया जायेगा।
श्रीवास्तव ने बताया कि कार्यकारिणी में पारित एक अन्य प्रस्ताव में संगठन की चुनाव प्रक्रिया अगले छह महीने में पूरा करने का फैसला किया गया। इसके लिये कार्यकारी अध्यक्ष वसावा से अगले साल मार्च तक संगठनात्मक चुनाव संपन्न कराने को कहा गया है।
बैठक में शरद यादव के अलावा, पूर्व मंत्री रमई राम, राज्य सभा सदस्य अली अनवर, पूर्व सांसद अर्जुन राय, पूर्व विधान पार्षद विजय वर्मा, पूर्व विधायक परवीन अमानुल्ला, सरोज बच्चन और उदय मांझी भी मौजूद थे।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ और उससे जुड़े संगठनों (बजरंग दल और विश्व हिंदू परिषद) को चेतावनी दी है कि वह दुर्गा पूजा के दौरान माहौल बिगाड़ने की कोशिश ना करें।
ममता ने कहा है कि यह 'आग से खेलने' की तरह होगा। दरअसल, एक दिन पहले ही विश्व हिंदू परिषद ने कहा था कि वे लोग पूरे राज्य में शस्त्र पूजन का कार्यक्रम करेंगे।
ऐसे शस्त्र पूजन कार्यक्रमों पर ममता ने पुलिस से रोक लगाने का आदेश दे रखा है। पिछले महीने ही ममता ने पुलिस को आदेश दिया था कि राज्य में कहीं पर भी बिजोय दशमी नहीं होनी चाहिए।
ममता ने कहा कि उनकी सरकार ने विजयादशमी त्योहार मनाने पर कोई रोक नहीं लगाई है। उन्होंने कहा, ''कुछ संगठन गलत सूचना फैला रहे हैं कि हम पूजा पंडालों और घरों में विजयादशमी के उत्सव को रोक रहे हैं।''
उन्होंने कहा, ''हमने कहा था कि एक अक्तूबर को एकादशी के दिन प्रतिमा विसर्जन नहीं होगा। मुहर्रम मुस्लिम समुदाय के शोक मनाने का अवसर होता है जो उसी दिन पड़ रहा है। प्रतिमा विसर्जन दो से चार अक्तूबर तक चलेगा।''
उन्होंने कहा, ''महिलाएं एक-दूसरे को सिंदूर लगाएंगी और विजयादशमी का त्योहार पहले की तरह मनाया जाएगा। जिन लोगों को बंगाल में दुर्गापूजा और काली पूजा के बारे में जानकारी नहीं है, वे इस तरह की अफवाह फैला रहे हैं।''
ममता ने कहा कि उनकी सरकार आगामी दुर्गापूजा त्योहार के दौरान शांति और सौहार्द बनाए रखने के लिए संकल्पबद्ध है।
उन्होंने कहा कि आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल को शांति भंग नहीं करनी चाहिए और आग से नहीं खेलना चाहिए।
उन्होंने कहा कि बंगाल में दुर्गापूजा पारंपरिक रूप से सौहार्द के साथ मनाई जाती है, जहां लाखों लोग सड़कों पर इस उत्सव को मनाते हैं।
उन्होंने कहा, ''अगर कोई शांति भंग करने का प्रयास करता है, तो प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा।''
ममता ने कहा, ''बीजेपी को सीबीआई, ईडी का इस्तेमाल करके और दंगे कराकर राजनीति नहीं करनी चाहिए।''
मुख्यमंत्री ने कहा कि पुलिस ने हाल में राज्य के एक स्थान पर सांप्रदायिक गड़बड़ी फैलाने के बीजेपी के एक प्रयास को विफल कर दिया और इसके दो सदस्यों को गिरफ्तार किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उनका प्रशासन राज्य में हथियारों के साथ प्रतिमा विसर्जन जुलूस की अनुमति नहीं देगा।
ममता ने कहा, ''यह अवैध है और इस तरह के जुलूस बंगाल की परम्परा में नहीं रहे हैं और हम ऐसा करने की अनुमति नहीं देंगे।''
उन्होंने कहा, ''अगर इस तरह का जुलूस निकालने का प्रयास किया जाता है तो प्रशासन कड़ी कार्रवाई करेगा।''
उन्होंने मुस्लिम समुदाय के सदस्यों से भी मुहर्रम के जुलूस शांतिपूर्वक निकालने की अपील की।
ममता बनर्जी की सरकार पिछले महीने भी सुर्खियों में थी। तब उनकी तरफ से आदेश दिया गया था कि शाम छह बजे के बाद दुर्गा की प्रतिमा का विसर्जन नहीं किया जा सकेगा।
ऐसा इसलिए कहा गया था क्योंकि तीस सितंबर को दुर्गा पूजा है और एक अक्टूबर को मोहर्रम। बीजेपी ने इसका खुलकर विरोध किया था।
लेकिन अब राज्य सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट में साफ कर दिया है कि रात दस बजे तक मूर्ति विसर्जन किया जा सकेगा। एक अक्टूबर को मूर्ति विसर्जन पर रोक है। लेकिन दो को फिर से इसकी इजाजत है।
भारत में ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने फर्जी मौलानाओं पर शिकंजा कसने की कवायद शुरू कर दी है। इसे लेकर जल्द ही बोर्ड में एक प्रस्ताव लाया जाएगा ताकि इस तरह के लोगों के खिलाफ कार्रवाई हो सके।
ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के कार्यकारी सदस्य मौलाना खालिद राशिद फिरंगी महली ने मीडिया से बातचीत के दौरान ये बातें कही।
उन्होंने कहा कि आजकल टीवी पर बहुत सारे फर्जी मौलाना नजर आ रहे हैं। इन मौलानाओं को इस्लाम और शरीयत कानून के बारे में कुछ भी पता नहीं है। ऐसे मौलवियों और मौलानाओं के खिलाफ शिकंजा कसा जाना चाहिए जो मुस्लिम समुदाय और इस्लाम को बदनाम कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, ''आजकल टीवी पर बहुत सारे मौलाना और मौलवी दिख रहे हैं, जिनकी कोई विश्वसनीयता नहीं है। बस उनका काम ये है कि एक टोपी पहनकर और दाढ़ी बढ़ाकर टीवी परिचर्चा में शामिल हो जाते हैं। ऐसे लोग मुस्लिम समुदाय को बदनाम कर रहे हैं क्योंकि इनके पास इस्लाम और शरिया का कोई ज्ञान नहीं है।''
फिरंगी महली ने कहा कि वह जल्द ही ऐसे फर्जी मौलवी और मौलाना के खिलाफ ऑल इंडिया पर्सनल लॉ बोर्ड के समक्ष एक प्रस्ताव रखेंगे जिससे इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
भारत में सुप्रीम कोर्ट ने पारिस्थितकी रूप से संवेदनशील क्षेत्रों का दायरा 10 किलोमीटर से घटा कर 100 मीटर करने के केंद्र के फैसले पर आश्चर्य जताया है।
साथ ही, शीर्ष न्यायालय ने कहा है कि यह शक्तियों का पूरी तरह से मनमाना इस्तेमाल नजर आता है जो देश में राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों को नष्ट कर सकता है।
दादर एवं नागर हवेली वन्यजीव अभयारण्य के 10 किलोमीटर के दायरे में स्थित एक औद्योगिक इकाई को पर्यावरणीय मंजूरी दिए जाने को चुनौती देने वाले एक मामले में न्यायालय की यह टिप्पणी आई है।
सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति एम बी लोकुर और न्यायामूर्ति दीपक गुप्ता की सदस्यता वाली एक पीठ ने कहा कि यह बहुत आश्चर्यजनक है कि पर्यावरण मंत्रालय ने पारिस्थितिकी रूप से संवेदनशील क्षेत्र का दायरा 10 किलोमीटर से घटा कर 100 मीटर कर दिया है। चूंकि, इस तरह का आदेश देश में राष्ट्रीय उद्यानों और वन्यजीव अभयारण्यों को नष्ट करने में सक्षम है, इसलिए हम इस कटौती (क्षेत्र के दायरे में) की वैधता पर छानबीन करना चाहेंगे।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि पहली नजर में हमें ऐसा लगता है कि पर्यावरण एवं वन मंत्रालय द्वारा यह शक्तियों का पूरी तरह से मनमाना इस्तेमाल है। पीठ ने इस मामले को पर्यावरण मुद्दे से जुड़े अन्य मुद्दों से संबद्ध कर दिया, जिन्हें सोमवार को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र की ओर से पेश हुए अतिरिक्त सॉलीसीटर जनरल ए एन एस नंदकर्णी से पूछा कि क्या सरकार देश के वन्य जीवन, आरक्षित वन, नदियों और अभयारण्यों को नष्ट कर देना चाहती है?
पीठ ने कहा, ''आप (केंद्र) को हमें इस बिंदु पर सहमत करना होगा कि आप वन्यजीवन, पर्यावरण का संरक्षण किस तरह से करने का इरादा रखते हैं? क्या संरक्षित क्षेत्र की अवधारण अब अप्रासंगिक हो गई है?''
गौरतलब है कि भारतीय वन्य जीव बोर्ड ने 2002 में वन्यजीव संरक्षण रणनीति अपनाई थी जिसके तहत यह कहा गया था कि राष्ट्रीय उद्यान/वन्यजीव अभयारण्यों के 10 किलोमीटर के दायरे में पड़ने वाली भूमि को पर्यावरण संरक्षण अधिनियम के प्रावधानों के तहत पारिस्थितिकी रूप से नाजुक क्षेत्र (इको फ्रेजाइल जोन) के तहत अधिसूचित किया जाना चाहिए।
हालांकि, साल 2015 से पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने कई अधिसूचनाओं के जरिए बफर जोन का दायरा 10 किलोमीटर से घटा कर 100 मीटर तक कर दिया है।
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने 2013 में ओखला पक्षी अभयारण्य के 10 किलोमीटर के दायरे में बनाई जा रही 49 आवासीय परियोजनाओं के निर्माण कार्य पर रोक लगा दी थी। इसने नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ कार्रवाई में नाकाम रहने को लेकर नोएडा प्राधिकरण और पर्यावरण एवं वन मंत्रालय की भी खिंचाई की थी।
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के प्रमुख मोहन भागवत ने कहा है कि भारतीय संविधान में बदलाव कर उसे भारतीय समाज के नैतिक मूल्यों के अनुरूप किया जाना चाहिए।
हैदराबाद में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि संविधान के बहुत सारे हिस्से विदेशी सोच पर आधारित हैं और इसे बदले जाने की ज़रूरत है। उन्होंने कहा कि आज़ादी के 70 साल बाद इस पर ग़ौर किया जाना चाहिए।
भारत में संविधान तो बीच बीच में बदला जाता है, कई बार इसमें संशोधन हुए हैं, लेकिन सवाल ये है कि आरएसएस किस तरह के बदलावों की बात कर रहा है। वो सेक्यूलर संविधान को ख़त्म करके हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं।
इसकी तो इजाज़त ही नहीं है क्योंकि भारत के सुप्रीम कोर्ट ने कई फ़ैसलों में कहा है कि धर्मनिरपेक्षता भारत के संविधान का मूल आधार है और इसमें बदलाव नहीं किया जा सकता।
चाहे उनके पास दो तिहाई बहुमत ही क्यों ना हो, संविधान को इस तरह से नहीं बदला जा सकता कि उसके मूल आधार ही ख़त्म हो जाएं।
धर्मनिरपेक्षता को संविधान का मूल स्तंभ माना गया है।
हर एक व्यक्ति के लिए भारतीय मूल्य की अलग-अलग परिभाषा होती है।
भारतीय मूल्य की आरएसएस की परिभाषा ये है कि गाय के नाम पर लोगों को पीटो, सोशल मीडिया पर लोगों को ट्रोल करो, हिंदू-मुस्लिम के नाम पर लोगों की लड़ाई करवाओ।
आज यही तो समस्या है कि ये सरकार आरएसएस के कहने पर और आरएसएस के दम पर ही चल रही है। इसके चलते हम ये देख रहे हैं कि इतिहास की पुस्तकों में बदलाव किए जा रहे हैं।
ऐसी चीज़ें लिखी जा रही हैं जो कोई भी इतिहासकार या इतिहास समझने वाला व्यक्ति कह सकता है कि झूठी बातें हैं। ऐसा सिर्फ धर्म के आधार पर लोगों को बांटने के लिए किया जा रहा है।
भारत में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण का मानना है कि आरएसएस का कोई व्यक्ति संवैधानिक पद पर नहीं रह सकता क्योंकि ऐसा करने के लिए उन्हें शपथ लेनी होती है कि वो संविधान की रक्षा करेंगे।
ऐसा व्यक्ति जो कहता है कि वो धर्मनिरपेक्षता को मानते ही नहीं हैं, वो संविधान को कायम रखने की शपथ कैसे ले सकते हैं?
संसद के दोनों सदनों यानी लोकसभा और राज्यसभा में संविधान में संशोधन का प्रस्ताव दो-तिहाई बहुमत से पारित करना होता है।
लेकिन धर्मनिरपेक्षता, लोगों में बराबरी, अभिव्यक्ति और असहमति के हक़ जैसी बुनियादी बातों में बदलाव नहीं किया जा सकता।
कई संशोधनों में राज्यों की सहमति की भी ज़रूरत होती है।
लेकिन आरएसएस भारतीय संविधान के मूल आधार को ही बदल देना चाहता है। वो हिंदुस्तान को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं। उनको 100 प्रतिशत बहुमत मिले, तब भी वो ऐसा बदलाव नहीं कर सकते।









