बिहार के चर्चित सृजन एनजीओ घोटाले में अब तक 10 एफआईआर दर्ज हो चुकी है। इसके साथ ही गबन का आंकड़ा 884 करोड़ रुपए तक पहुंच चुका है।
साथ ही बैंक ऑफ बड़ौदा के भागलपुर शाखा के मैनेजर रैंक के सेकंड मैन अतुल कुमार समेत कुल 12 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है। जेल भेजने के पहले पुलिस की एसआईटी और आर्थिक अपराध शाखा की टीम ने इन लोगों से गहन पूछताछ की।
ताजा जानकारी के मुताबिक, सुपौल के सहकारिता अधिकारी पंकज कुमार झा समेत भागलपुर के सुभाष कुमार और बांका के सहकारिता अधिकारी संजय मंडल को भी हिरासत में लिया गया है, लेकिन नीतीश सरकार ने इस बीच सबको आश्चर्य में डालते हुए इस घोटाले की जांच कर रहे आईएएस अधिकारी अमित कुमार का तबादला कर दिया है।
अमित कुमार को लखीसराय का जिलाधिकारी बनाया है। ये अब तक भागलपुर के उप विकास आयुक्त के पद पर पदस्थापित थे। हालांकि, इन्हें पदोन्नति देकर तबादला किया जा रहा है।
भू-अर्जन विभाग के 74 करोड़ रूपए का चेक बाउंस होने से पहले नजारत का 10 करोड़ 26 लाख का चेक बैरंग लौटते ही जिला पदाधिकारी आदेश तितिरमारे ने उप विकास आयुक्त अमित कुमार से ही जांच कराई थी। इनकी जांच से ही परत दर परत घोटाले के भेद खुले। बहरहाल, इनके तबादले से लोगों के बीच गलत संदेश जा रहा है।
बता दें कि 48 करोड़ रुपए सृजन के खाते में ट्रांसफर कर दिए जाने की एफआईआर सेंट्रल कॉपरेटिव बैंक लिमिटेड ने भी दर्ज कराई है। सृजन के खाते से यह रकम गायब है।
सुपौल के सहकारिता अधिकारी पंकज कुमार झा पहले भागलपुर सेन्ट्रल कॉपरेटिव बैंक में साल 2007 से 2014 तक प्रबंध निदेशक पद पर तैनात थे। इसी वजह से वो हिरासत में लिए गए है।
सबसे ज्यादा धन भू-अर्जन विभाग का गबन हुआ है। सूत्रों के मुताबिक, इसकी रकम 350 करोड़ रुपए से ज्यादा है।
इधर, प्रखंड, अंचल से लेकर जिलों तक के तमाम विभाग अपने लेन-देन और बैंक खातों के मिलान में जुटे हुए हैं।
लिहाजा, फर्जीवाड़े की रकम में और इजाफा होने से इनकार नहीं किया जा सकता।
सृजन घोटाले से सत्ताधारी राजनैतिक दलों में भी खलबली मची है। बीजेपी प्रदेश किसान मोर्चा के उपाध्यक्ष विपिन शर्मा के तार सृजन घोटाले से जुड़ने की वजह से पार्टी उन्हें बाहर का रास्ता दिखा चुकी है।
सूत्र बताते हैं कि जनता दल यूनाइटेड के युवा मोर्चा के भागलपुर जिला अध्यक्ष शिव मंडल को भी निलंबित करने की तैयारी हो चुकी है। मसलन, सभी अपना पल्ला झाड़ने में लगे है।
शिव मंडल कल्याण विभाग के गिरफ्तार नाजिर महेश मंडल का बेटा है। शिव मंडल का आय कर रिटर्न तो शून्य है, मगर हैसियत करोड़ों रुपए की है। आर्थिक अपराध इकाई की टीम इनके जायजाद का आकलन करने में जुटी है। जल्द ही संपति जब्त करने की कार्रवाई भी शुरू की जाएगी।
हालांकि, अभी तक सृजन की सचिव प्रिया कुमार और उसके पति अमित कुमार, डिप्टी कलेक्टर रैंक के पूर्व भू-अर्जन अधिकारी राजीव रंजन, गिरफ्तार कल्याण अधिकारी अरुण कुमार की पत्नी इंदु गुप्ता की गिरफ्तारी भी नहीं हो सकी है।
जानकार बताते हैं कि सही से जांच होने पर आरोपियों की सूची लंबी हो सकती है क्योंकि ऐसे एक दर्जन से ज्यादा बड़ी मछलियां हैं जिनका नाम सृजन के रजिस्टर में दर्ज है।
इनके अलावा एक दर्जन से ज्यादा आईएएस भी इसमें शामिल रहे हैं जो इस वक्त राज्य के कई अहम पदों पर आसीन हैं।
बहरहाल, देर से जागा प्रशासन अब सबौर प्रखंड परिसर में सृजन को पट्टे पर दी गई जमीन को भी रद्द करने की तैयारी में है।
बिहार के 15 जिले इन दिनों भयानक बाढ़ से जूझ रहा है। वहां की करीब एक करोड़ आबादी इस आपदा से प्रभावित हुई है। उन्हें जहां-तहां शरण लेना पड़ा है। बाढ़ ने अब तक 120 लोगों की जिंदगी लील ली है।
बाढ़ प्रभावित जिले अररिया से गुरुवार (17 अगस्त) को दिल दहला देनेवाला एक वीडियो सामने आया। वीडियो में एक नदी पर बने पुल के ढह जाने से एक महिला अपने दो बच्चों समेत बाढ़ में बह गई। तबाही वाले इस वीडियो के बाद अररिया से ही एक ऐसा फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है जिसने सभी के रोंगटे खड़े कर दिए हैं। फोटो के मुताबिक, अररिया के मीरगंज पुल से लाशों को नदी में फेंका जा रहा है। फोटो वायरल होने के बाद अररिया के जिलाधिकारी हिमांशु शर्मा ने जांच के आदेश दिए हैं।
आज तक के मुताबिक, मीरगंज पुलिस ने मंगलवार को इन छह लाशों को पुल से फेंका था। इससे पहले यह खबर आई ती कि जिन लाशों की पहचान नहीं हो पाई है, उसे प्रशासन मिट्टी में दबा रहा है। इस वीडियो और फोटो के वायरल होने से राज्यभर में हाहाकार मचा है।
अररिया में अबतक बाढ़ से 20 से ज्यादा लोगों की मौत हो चुकी है। पुलिस के मुताबिक, पिछले शनिवार को आई बाढ़ में बहकर 15 लाशें आई थीं जिनमें से 13 की पहचान हो गई थी जबकि दो लाशों की शिनाख्त नहीं हो सकी थी। पुलिस के मुताबिक, पांच लाशें नेपाल से बहकर आई थीं, जिसके बारे में नेपाल पुलिस ने भी संपर्क किया था।
बिहार राज्य आपदा प्रबंधन के मुताबिक, अभी तक करीब चार लाख लोगों को दूसरी जगहों पर शरण दिया गया है ,जबकि करीब 2.15 लाख लोगों को करीब 500 राहत शिविरों में पहुंचाया गया है। राज्य के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार लगातार हवाई सर्वेक्षण कर रहे हैं। केंद्र की तरफ से भी एन डी आर एफ की कई टीमें राज्य के बाढ़ प्रभावित इलाकों में भेजी गई हैं।
गौरतलब है कि इस समय भारत के 9 राज्यों में बाढ़ का कहर जारी है। राष्ट्रीय आपदा राहत बल (एन डी आर एफ) के मुताबिक बिहार, असम, उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, त्रिपुरा, ओडिशा, हिमाचल प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश और गुजरात के आपदा प्रभावित इलाकों में राहत और बचाव कार्य के लिए करीब 113 टीमें तैनात की गई हैं।
बिहार में सात मुसलमानों को बीफ खाने के शक में गुरुवार को भीड़ ने बेरहमी से पिटाई कर दी। पिटाई करने वालों की जगह पुलिस ने पीड़ित सातों मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार कर लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिहार के चम्पारण में बीफ खाने के शक में तथाकथित गौरक्षकों ने घर में घुसकर मुस्लिमों की पिटाई कर दी। गौरक्षकों की भीड़ में विश्व हिंदू परिषद के कई लोग शामिल थे।
पुलिस ने कहा है कि इन सातों मुस्लिम युवकों पर हमला करने वालों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता क्योंकि उनके खिलाफ अभी तक किसी ने कोई शिकायत दर्ज नहीं करवाई है।
शुक्रवार को बीफ कानून तोड़ने के आरोप में पुलिस ने उन सातों मुस्लिम युवकों को गिरफ्तार किया है। इन पर समुदाय की भावनाओं को आहत करने का आरोप है। इसमें खुदुश कुरैशी, नसरुद्दीन, मुस्तफा, जहांगीर, असलम अंसारी, बबलू और रिजवान को हिरासत में लिया गया है। हमले में बुरी तरह घायल हुए 4 लोगों को नजदीक के अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।
आपको बता दें कि अभी कुछ दिनों पहले भी बिहार के आरा जिले में एक मुस्लिम शख्स को बीफ ट्रांसपोर्ट करने के शक में बुरी तरह से पीटा गया था। बिहार के अलावा भारत भर में ऐसी कई घटनाएं सामने आई हैं जिनमें गौरक्षा के नाम पर मुसलमानों को भीड़ ने अपना निशाना बनाया है।
बिहार के पूर्व डिप्टी सीएम और आरजेडी नेता तेजस्वी यादव कानूनी पचड़े में फंसते दिख रहे हैं। तेजस्वी यादव पर देश के राष्ट्रगीत वंदे मातरम् के अपमान का आरोप लगा है। इस बावत तेजस्वी यादव पर बिहार के दरभंगा में केस दर्ज किया गया है। उनपर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया गया है।
बता दें कि 13 अगस्त को तेजस्वी यादव ने एक ट्वीट किया था। इस ट्वीट में तेजस्वी यादव ने उमाशंकर सिंह नाम के शख्स के ट्वीट के पर टिप्पणी की थी।
उमाशंकर सिंह ने लिखा था, 'बंदे मारते हैं हम।' इस ट्वीट को रिट्वीट करते हुए तेजस्वी यादव ने लिखा था, 'सही कहा इनका वंदे मातरम् = बंदे मारते हैं हम।'
तेजस्वी यादव की इस टिप्पणी पर जनता दल यूनाइटेड तकनीकी प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष इकबाल अंसारी ने सीजीएम कोर्ट में याचिका दायर की है और कहा है कि तेजस्वी यादव ने 13 अगस्त के एक ट्वीट से राष्ट्रगीत का अपमान किया है। और उनके इस ट्वीट से भारतीय और भारतीयता को ठेस पहुंची है। इस केस में जनता दल यूनाइटेड नेता ने उमाशंकर सिंह को भी अभियुक्त बनाया है।
इन दोनों पर आईपीसी की धारा 124 (A) (राष्ट्रद्रोह), 120 (B) भारतीय दण्ड विधान, 501 (B) भारतीय दण्ड विधान, प्रिवेंशन ऑफ इंसल्ट टू नेशनल ऑनर एक्ट 69 (1971) के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।
याचिका में कहा गया है कि एक पूर्व उपमुख्यमंत्री के ऐसे राष्ट्रविरोधी ट्वीट से यह बात साबित हो जाती है कि इनको अपना राजनीतिक स्वार्थ साधने के लिए न तो राष्ट्र के सम्मान की चिंता है और न ही राष्ट्र की छवि की।
इकबाल अंसारी ने कहा कि इस ट्वीट पर कड़ी आलोचना होना के बावजूद तेजस्वी यादव ने ना तो इस ट्वीट को डिलीट किया और ना ही इसके लिए माफी मांगी। आर जे डी नेता के रवैये से राहत होकर उन्हें अदालत की शरण में आना पड़ा।
बता दें कि तेजस्वी यादव इस वक्त बिहार में नीतीश सरकार के खिलाफ जनादेश अपमान यात्रा कर रहे हैं। बुधवार रात को ही तेजस्वी यादव को भागलपुर में सभा की इजाजत नहीं दी गई। जिस जगह पर सभा होनी थी प्रशासन ने वहां धारा-144 लागू कर दी। इससे नाराज तेजस्वी यादव भागलपुर रेलवे स्टेशन पर ही धरने पर बैठ गये थे।
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी का जादू बरकरार है। हाल ही में हुए सात नगर निकाय चुनावों में उनकी पार्टी तृणमूल कांग्रेस ने सभी पर जीत हासिल की है।
गुरुवार (17 अगस्त) को जारी चुनाव परिणामों में टीएमसी ने सबसे बड़ी नगरपालिका दुर्गापुर के साथ-साथ हल्दिया और कूपर्स कैम्प नोटिफाइड एरिया में क्लीन स्विप हासिल कर लिया। इन तीनों नगर निकायों में विपक्षी पार्टी बीजेपी अपनी मौजूदगी भी दर्ज नहीं करा सकी।
काफी जोर आजमाइश करने के बाद भी विपक्षी बीजेपी को धुपगुरी नगरपालिका में 16 में से चार सीटें मिलीं। इसके अलावा बीजेपी को पंसकुड़ा और बुनियादपुर नगरपालिका में भी एक-एक सीट से ही संतोष करना पड़ा।
उधर, सीपीएम की अगुवाई वाले लेफ्ट फ्रंट ने नलहट्टी नगरपालिका में जीत दर्ज की है, जबकि कांग्रेस एक भी सीट जीतने में नाकाम रही है।
सभी सात नगरपालिका की कुल 148 सीटों में से 140 पर तृणमूल कांग्रेस और 6 पर बीजेपी जबकि एक-एक सीट पर लेफ्ट फ्रंट और निर्दलीय उम्मीदवार की जीत हुई है।
टीएमसी के महासचिव पार्थ चटर्जी ने कहा, ''राज्य में विपक्ष ने कोई सकारात्मक और सृजनात्मक भूमिका नहीं निभाई। वे सिर्फ नकारात्मक राजनीति के जरिए सत्तारूढ़ दल पर सिर्फ राजनीतिक आक्रमण और ममता सरकार की निंदा करते रहे। वे लोगों को सरकार के खिलाफ उकसाते रहे, मगर नतीजा सब के सामने है। हमारी पार्टी ने सभी नगरपालिकाओं में जीत दर्ज की है क्योंकि हमलोग विकास की बात करते हैं और सब जगह विकास करते हैं।''
दुर्गापुर नगर निगम चुनावों में टीएमसी ने 43 वार्डों में जीत दर्ज की है। यहां के चुनाव प्रभारी और ममता सरकार में खेल मंत्री अरूप विश्वास ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि सीएम ममता बनर्जी ने पश्चिमी बर्दवान में विकास की रफ्तार तेज करने के लिए उसे अलग जिला बनाने का ऐलान किया है। यहां के जनमानस ने मुख्यमंत्री पर भरोसा जताया है।
उन्होंने कहा कि वो इस जीत के लिए वहां के लोगों का आभार प्रकट करते हैं। मंत्री ने कहा कि लोगों ने बीजेपी की नकारात्मक राजनीति और दंगे की कोशिशों को खारिज कर दिया है और बिहार-झारखंड से भाड़े पर लाए गए लोगों के प्रयासों को कुचल दिया है।
भारत में सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के उन दो वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को फौरन नौकरी छोड़ने का हुक्म दिया है जो रिटायरमेंट के बाद फिर से नौकरी कर रहे थे। इन दोनों अफसरों पर फर्जी मुठभेड़ में भी शामिल होने के आरोप हैं।
आरोपी अफसरों में एन के अमीन और टी ए बरोट शामिल हैं। इन दोनों अफसरों ने कोर्ट में गुरुवार (17 अगस्त) को कहा कि वे लोग आज से ही अपना-अपना पद छोड़ देंगे।
अमीन पिछले साल अगस्त में पुलिस अधीक्षक पद से सेवानिवृत हुए थे। उसके बाद उन्हें गुजरात सरकार ने एक साल के लिए संविदा के आधार पर महिसागर जिले का पुलिस अधीक्षक नियुक्त किया था।
अमीन सोहराबुद्दीन और इशरत जहां फर्जी मुठभेड़ मामले में अदालत में ट्रायल फेस कर चुके हैं।
दूसरे अफसर टी ए बरोट पिछले साल रिटायर होने के एक महीने बाद दोबारा अक्टूबर में वडोदड़ा में वेस्टर्न रेलवे के तहत डिप्टी सुप्रीटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) बनाए गए थे। बरोट को भी संविदा के आधार पर एक साल के लिए नियुक्त किया गया था।
बरोट भी सोहराबुद्दीन फर्जी मुठभेड़ और सादिक जमाल मुठभेड़ केस में आरोपी रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश जस्टिस जे एस खेहर और जस्टिस डी वाई चंद्रचूड़ की खंडपीठ ने उनकी नियुक्ति को चुनौती देने वाली याचिका की सुनवाई करते हुए दोनों पुलिस अफसरों को तुरंत नौकरी छोड़ने का फरमान सुनाया।
इन दोनों दागी पुलिस अफसरों की रिटायरमेंट के बाद हुई पुनर्नियुक्ति के खिलाफ पूर्व आईपीएस अफसर राहुल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी।
इससे पहले गुजरात हाईकोर्ट ने उनकी इस याचिका को खारिज कर दिया था।
याचिका में कहा गया था कि अमीन के खिलाफ सीबीआई ने दो फर्जी मुठभेड़ मामले में चार्जशीट दाखिल किया था और वे करीब आठ साल तक न्यायिक हिरासत में जेल में बंद रहे हैं। बावजूद इसके रिटायर होते ही गुजरात सरकार ने उन्हें एक साल के लिए संविदा पर फिर से एसपी बना दिया।
याचिका के मुताबिक, तरुण बरोट भी हत्या, अपहरण से जुड़े मुकदमे में आरोपी रहे हैं और करीब तीन साल तक न्यायिक हिरासत में जेल में कैद रहे हैं।
पूर्व आईपीएस अफसर ने अपने वकील वरीन्दर कुमार शर्मा के जरिए याचिका में सुप्रीम कोर्ट से गुजरात के शीर्ष पुलिस अधिकारी पीपी पांडेय के उस प्रस्ताव पर मुहर लगाने का भी अनुरोध किया था जिसमें डीजीपी और आईजी पुलिस को पद छोड़ने की सिफारिश की गई थी।
बिहार विधान सभा में विरोधी दल के नेता और पूर्व उप मुख्यमंत्री तेजस्वी यादव ने नीतीश सरकार पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगाया है।
उन्होंने कहा कि पूर्व निर्धारित कार्यक्रम के मुताबिक भागलपुर के सबौर में जनसभा का आयोजन होना था, लेकिन ऐन मौके पर सरकार ने इजाजत देने से मना कर दिया।
तेजस्वी ने आरोप लगाया कि भागलपुर का सृजन एनजीओ घोटाला 2000 करोड़ रुपये की रकम को पार कर जाएगा।
उन्होंने कहा कि यह घोटाला नीतीश कुमार और सुशील मोदी के संरक्षण में चल रहा था इसीलिए ये दोनों नेता घोटाले के मुख्य आरोपियों और अपने चहेतों को बचाने में जुटे हैं।
तेजस्वी ने कहा कि वो किसी भी सूरत में एक एनजीओ की लूट का मामला दबने नहीं देंगे और इसे सड़क से लेकर सदन तक उठाएंगे।
तेजस्वी ने सृजन घोटाले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच कराने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि इस सिलसिले में जल्द ही राजद का प्रतिनिधिमंडल प्रधानमंत्री, प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई निदेशक से मिलकर उन्हें निष्पक्ष जांच के लिए ज्ञापन सौंपेगा।
तेजस्वी भागलपुर के एक होटल में पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे। उनके साथ बांका सांसद जयप्रकाश नारायण यादव, भागलपुर सांसद बुलो मंडल और राजद के भागलपुर जिलाध्यक्ष तिरुपति यादव भी मौजूद थे।
तेजस्वी जनादेश अपमान यात्रा के सिलसिले में समस्तीपुर, बेगूसराय, खगड़िया में सभाएं करते हुए बुधवार की रात एक बजे भागलपुर पहुंचे थे। यहां आने पर उन्हें जानकारी मिली कि उनके प्रस्तावित सभा स्थल सबौर के हाई स्कूल मैदान में जिला प्रशासन ने धारा 144 लगा दी है। सभा गुरूवार को होनी थी।
यहां बताना जरूरी है कि एनजीओ सृजन, सरकारी बैंक के कर्मचारियों और अधिकारी की सांठगांठ से हुए 700 करोड़ रूपए से भी ज्यादा के फर्जीवाड़े की बुनियाद सबौर ही है। सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड का दफ्तर सबौर ब्लॉक की सरकारी जमीन पर है।
तेजस्वी ने कहा कि भागलपुर का सृजन घोटाला व्यापम और पनामा पेपर घोटाले से कम नहीं है। व्यापम की तरह ही इसे भी दबाने की कोशिश जनता दल यूनाइटेड और बीजेपी की बिहार सरकार कर रही है।
उन्होंने इसके पीछे मुख्यमंत्री नीतीश कुमार और उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी को बताया, जिनके जिम्मे वित्त विभाग पहले भी था और अभी भी है।
तेजस्वी ने कहा कि ऐसा हो नहीं सकता कि खजाना लुटता रहे और खबर वित्त मंत्री को न हो। ऐसे में मुख्यमंत्री का फर्ज बनता है कि वो निष्पक्ष जांच कराएं।
तेजस्वी ने कहा कि जांच के नाम पर मुख्यमंत्री अपने चहेते अफसरों को हवाई जहाज से भेजकर जांच कराने का नाटक कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि आज तो हम 27 अगस्त की राजद की बीजेपी भगाओ - देश बचाओ रैली की कामयाबी के लिए आए हैं। इसके बाद राजद सृजन घोटाले को ठीक से उजागर करने और इसमें शरीक बड़े-बड़े लोगों के चेहरे से नकाब उतारने के लिए रैली आयोजित करेगा। सुशील मोदी भागलपुर के सांसद रहे हैं। उस वक्त से सृजन को संरक्षण मिलता रहा है। हम सृजन के दुर्जनों का विसर्जन करके रहेंगे। इसके लिए हमें कुछ भी करना पड़े।
तेजस्वी ने कहा कि लालू प्रसाद और उनके परिवार पर गलत आरोप लगा सीबीआई का छापा पड़वाया गया। नीतीश कुमार ने बीजेपी की गोद में बैठने के लिए ढोंग किया, मगर जाहिर हो चुका है कि यह भ्रष्टाचारियों की सरकार है। इनके 75 फीसदी मंत्री दागी हैं। खुद मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हत्या का मुकदमा चल रहा है। उप मुख्यमंत्री सुशील मोदी पर 5 मुकदमे चल रहे हैं।
बता दें कि तेजस्वी जब बुधवार की आधी रात भागलपुर स्टेशन चौक पर अपने काफिले के साथ पहुंचे, तब उन्हें ना तो ठहरने के लिए सर्किट हाउस में कमरा दिया गया और ना ही सबौर में जनसभा करने की इजाजत। इसके विरोध में वो अंबेदकर प्रतिमा के चबूतरे पर ही धरने पर बैठ गए।
तेजस्वी ने कहा, हम और हमारी पार्टी के लोग कानून का सम्मान करते हैं। इस वजह से काफिले के साथ सबौर जाना ठीक नहीं।
तेजस्वी ने कहा कि रात में डीएम, एसएसपी, डीजीपी को फोन किया, लेकिन किसी ने फोन रिसीव नहीं किया। फिर ट्वीट किया। तब एसएसपी ने राजद सांसद बुलो मंडल के पास फोन किया। जाहिर है यह सब नीतीश कुमार के इशारे पर हो रहा है। नतीजतन एक निजी होटल में रात गुजारनी पड़ी। नेता प्रतिपक्ष के साथ ऐसा सलूक लोकतंत्र की हत्या है। विरोध की आवाज दबाने की साजिश है।
उत्तरी बिहार में बाढ़ के हालात पर एक सवाल के जवाब में तेजस्वी ने नीतीश सरकार पर सीधा हमला बोला। वे बोले कि सरकारी आंकड़ा 75 मौतों का है। पहले से सरकार ने कोई इंतजाम नहीं किया। नतीजतन यह हालात पैदा हुए। पिछली बाढ़ से भी सबक नहीं ली। दरअसल, नीतीश कुमार को अपनी कुर्सी बचाने की ज्यादा चिंता है। ये तो बीजेपी की गोद में बैठने की जुगत में थे। बाढ़ का अंदेशा के बावजूद इनको कोई फिक्र नहीं है।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने दिल्ली में गुरुवार को केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार और उसके मार्गदर्शक राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर संविधान बदलने की कोशिश करने का आरोप लगाते हुए सभी विपक्षी दलों से इसके खिलाफ एकजुट होकर लड़ने को कहा।
राहुल विपक्षी विपक्षी दलों को एकजुट करने के मकसद से जनता दल-युनाइटेड के बागी नेता शरद यादव द्वारा आहूत 'साझा संस्कृति बचाओ' सम्मेलन में शामिल हुए।
राहुल ने कहा कि आरएसएस सत्ता में आने के बाद तिरंगे को सलाम करने लगा है। यानी जब तक वह सत्ता में नहीं था, तब तक उसका तिरंगा नहीं था, उसका देश नहीं था। ये लोग प्रत्येक संस्थान, नौकरशाही, मीडिया और विश्वविद्यालयों में अपने लोगों को बिठा रहे हैं। जब ये हर जगह अपने लोगों को सेट कर लेंगे, तब कहेंगे कि ये देश हमारा है।
उन्होंने कहा, ''यदि हमें उनसे लड़ना है तो हमें एकजुट होकर लड़ना होगा।''
राहुल ने कहा कि कांग्रेसियों को विश्वास है कि वे देश से जुड़े हुए हैं और कुछ करना चाहते हैं, जबकि बीजेपी और आरएसएस का कहना है कि यह देश सिर्फ उन्हीं का है।
राहुल ने कहा कि आरएसएस के एक प्रमुख नेता ने आजादी के आंदोलन के दौरान ब्रिटिशों को जेल से अपनी रिहाई के बदले माफी मांगने का पत्र लिखा था। उन्होंने कहा, ''वे अपनी आजादी के लिए गुहार लगा रहे थे। आरएसएस को छोड़कर कांग्रेस या किसी अन्य पार्टी के किसी भी नेता ने ब्रिटिशों से गुहार नहीं लगाई।''
राहुल ने बीजेपी और आरएसएस पर पीछे से हमला करने का आरोप लगाया।
राहुल ने गुजरात में अपने काफिले पर पथराव करने की घटना का उल्लेख करते हुए कहा, ''जब मेरे काफिले पर पथराव किया गया और बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा काले झंडे दिखाए गए। मैं उनसे बात करने के लिए वहां रुक गया, लेकिन जैसे ही मैं अपने वाहन से बाहर निकला और उनकी ओर गया। वे भाग गए।''
राहुल ने कहा कि बीजेपी ने हर साल दो करोड़ रोजगारों का सृजन करने और हर शख्स को 15 लाख रुपये देने का वादा किया था, लेकिन सत्ता में आने पर वे अपना वादा पूरा नहीं कर पाए।
इस सम्मेलन में मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) के महासचिव सीताराम येचुरी, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) के डी. राजा, नेशनल कांफ्रेंस के फारूक अब्दुल्ला भी शामिल हुए।
मध्य प्रदेश के स्थानीय निकाय के लिए हुए चुनावों में 43 में से 26 सीटें जीतकर बीजेपी खुद को विजयी महसूस कर रही है, लेकिन इन नतीजों से कांग्रेस भी बेहतर महसूस कर रही है।
कांग्रेस को चुनाव में पांच सीटों का फायदा हुआ है, जबकि बीजेपी को पिछली बार की तुलना में तीन सीटों का नुकसान हुआ है।
मंदसौर जहां कुछ महीने पहले ही आंदोलनरत किसानों पर पुलिस की गोलीबारी में पांच लोगों की मौत हो गई थी। बीजेपी को इस बार तीन सीटें कम मिलीं। कांग्रेस को मंदसौर में तीन सीटों पर जीत मिली।
मध्य प्रदेश में अगले साल विधान सभा चुनाव होने हैं इसलिए स्थानीय निकाय के नतीजों से कांग्रेस उत्साहित है।
कुल 43 नगरपालिकाओं के सीटों में से बीजेपी ने 26, कांग्रेस ने 14 और तीन पर निर्दलीयों ने जीत हासिल की। पिछले साल बीजेपी ने 29 सीटें जीती थीं। वहीं कांग्रेस ने पिछली बार की तुलना में इस बार पांच ज्यादा निकायों पर अपना झंडा फहराया।
मंदसौर जिले के शांगर नगर के दो वार्डों और पंचायत गरोठ के एक वार्ड में बीजेपी को हारना पड़ा। बीजेपी का यहां साल 2003 से ही कब्जा था। लेकिन व्यापम घोटाले और किसानों के आंदोलन की आंच बीजेपी को झेलनी पड़ी है।
बीजेपी ने स्थानीय निकायों में जीत का श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को दिया है। अमित शाह 18 अगस्त को मध्य प्रदेश के तीन दिवसीय दौरे पर जाने वाले हैं। इस साल और अगले साल गुजरात, राजस्थान, मध्य प्रदेश जैसे बड़े प्रदेशों में विधान सभा चुनाव हैं, जहां बीजेपी सत्ता में है।
भारत में सर्वोच्च न्यायालय ने 2016 में केरल में एक हिंदू लड़की के धर्म परिवर्तन और शादी की राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एन आई ए) से जांच कराने का बुधवार को आदेश दिया। सर्वोच्च न्यायालय के सेवानिृवत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर.वी. रविंद्रन जांच की निगरानी करेंगे।
सर्वोच्च न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति जगदीश सिंह खेहर और न्यायमूर्ति डी वाई चंद्रचूड़ की सदस्यता वाली पीठ ने मामले में जांच का आदेश देते हुए अंतिम फैसला लेने से पहले अदालत में लड़की की पेशी की आवश्यकता बताई।
पीठ ने कहा कि अदालत एन आई ए, केरल सरकार और अन्य सभी से इस मामले में विवरण लेने के बाद ही फैसला लेगी।
अदालत ने यह आदेश याचिकाकर्ता शफीन जहां के वकील कपिल सिब्बल के यह कहने के बाद दिया कि अदालत को लड़की से बात करने के बाद ही कोई फैसला लेना चाहिए।
केरल उच्च न्यायालय ने धर्म परिवर्तन करने वाली लड़की शफीन जहां की शादी रद्द कर दी थी। याचिकाकर्ता शफीन जहां ने उच्च न्यायालय के फैसले को शीर्ष न्यायालय में चुनौती दी है।
वरिष्ठ अधिवक्ता इंदिरा जयसिंह ने पीठ से कहा कि यह अंतर-धार्मिक मामला है इसलिए अदालत को इसमें सावधानी बरतनी चाहिए।









