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गुजरात दंगा: माया कोडनानी नहीं दिलवा सकीं अमित शाह की गवाही

गुजरात सरकार की पूर्व मंत्री माया कोडनानी के पास अमित शाह को गवाही के लिए बुलाने का आखिरी मौका बचा है। विशेष अदालत ने बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह को अदालत में गवाही के लिए लाने के लिए माया कोडनानी को आखिरी मौका दिया।

माया कोडनानी अपने पक्ष में अमित शाह को गवाही देने के लिए अदालत बुलाना चाहती है, इसके लिए वो कोर्ट से समय भी मांग चुकी है, लेकिन माया कोडनानी अब तक अपने पक्ष में गवाही के लिए अमित शाह को कोर्ट आने के लिए राजी नहीं कर सकी है।

ये मामला गुजरात दंगों के दौरान नरोदा पटिया हत्याकांड से जुड़ा हुआ है। अदालत ने कहा कि अगली तारीख तक अगर माया कोडनानी अमित शाह को गवाही के लिए कोर्ट में पेश नहीं कर पाती हैं तो मुकदमे की सुनवाई टाली नहीं जाएगी।

माया कोडनानी ने अदालत से और वक्त मांगा है ताकि वो अमित शाह का एड्रेस पता कर सके और उन्हें कोर्ट के सामने पेश होने के लिए कह सके।

माया कोडनानी ने सोमवार (4 सितंबर) को विशेष कोर्ट से कहा था कि उसे अमित शाह से संपर्क करने के लिए अधिक वक्त चाहिए ताकि उन्हें समन दिया जा सके और अदालत में हाजिर होने के लिए कहा जा सके।

अदालत को लिखे अपने आवेदन में माया ने कहा था कि अमित शाह के व्यस्त कार्यक्रमों की वजह से उनसे संपर्क साधना मुश्किल हो रहा है।

माया ने कहा था कि उन्हें ये तय करने में कठिनाई हो रही है कि अमित शाह को किस पते पर समन भेजा जाए। माया कोडनानी ने अदालत से इसके लिए 12 सितबंर तक का समय मांगा था।

विशेष जज पीबी देसाई ने उन्हें अमित शाह को गवाही के लिए पेश करने के लिए 8 सितंबर तक का समय दिया था। शुक्रवार 8 सितंबर को भी माया कोडनानी उन्हें अदालत के सामने नहीं ला सकी। इसके बाद उन्होंने अदालत से और भी वक्त मांगा है।

पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने विशेष न्यायालय को आदेश जारी कर कहा था कि नरोदा पटिया हत्याकांड की सुनवाई 4 महीनें में पूरी कर दी जाए।

नरोदा पटिया हत्याकांड की आरोपी माया कोडनानी ने ये साबित करने के लिए कि, 28 फरवरी 2002 को जिस दिन गुजरात दंगे भड़के थे, उस दिन वो घटनास्थल पर मौजूद नहीं थी, अमित शाह समेत 14 लोगों की गवाही की मांग की थी।

इसमे से 12 लोग माया कोडनानी के पक्ष में गवाही दे चुके हैं। इनमें उनके पति सुरेन्द्र कोडनानी, बीजेपी के पूर्व पार्षद दिनेश मकवाना, पूर्व बीजेपी विधायक अमरीश गोविंद भाई शामिल है।

इस घटना में मुस्लिम समुदाय के 11 लोगों की मौत हो गई थी। इस केस में 82 लोग आरोपों का सामना कर रहे हैं इनमें से माया कोडनानी भी एक हैं।

2012 में नरोदा पाटिया हत्याकांड में अदालत माया कोडनानी को उम्र कैद की सजा सुना चुका है। माया और दूसरे 31 आरोपियों ने इस फैसले को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी है।

रेलमंत्री पीयूष गोयल की बड़ी परेशानी: एक दिन में तीन-तीन ट्रेन हादसे

भारत के नए रेलमंत्री पीयूष गोयल की शुरुआत कुछ ठीक नहीं हुई है। उनके पद संभालने के एक दिन बाद ही तीन-तीन ट्रेनें पटरी से उतर गईं।

खबर है कि महाराष्‍ट्र के खंडाला में एक मालगाड़ी के दो डिब्‍बे ट्रैक से उतर गए हैं। इससे पहले दोपहर 12 बजे के आस-पास झारखंड के रांची से नई दिल्ली आ रही राजधानी एक्सप्रेस के दो डिब्बे गुरुवार को मिंटो ब्रिज स्टेशन के पास पटरी से उतर गए।

हालांकि, इस घटना में कोई घायल नहीं हुआ। उत्तरी रेलवे के प्रवक्ता नीरज शर्मा ने आई ए एन एस को बताया कि झारखंड के रांची से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन आते समय गुरुवार पूर्वाह्न 11.45 बजे रेलगाड़ी का इंजन और पावर डिब्बा बेपटरी हो गया।

उससे भी पहले, उत्तर प्रदेश के सोनभद्र के पास गुरुवार को शक्तिपुंज एक्सप्रेस के सात डिब्बे पटरी से उतर गए। हादसे में किसी के घायल होने की खबर नहीं है।

रेल अधिकारियों के मुताबिक, यह दुर्घटना सुबह करीब छह बजे ओबरा के निकट हुई। रेलगाड़ी पश्चिम बंगाल के हावड़ा से मध्य प्रदेश के जबलपुर जा रही थी।

पूर्वी मध्य रेलवे के प्रवक्ता राजेश कुमार ने बताया कि प्रभावित डिब्बों में फंसे सभी यात्रियों को रेलगाड़ी के अन्य डिब्बों में
स्थानांतरित करके मध्यप्रदेश के सिंगरौली पहुंचाया गया है। राजेश कुमार ने कहा, ''रेलगाड़ी यात्रियों के साथ सुबह करीब 7.30 बजे दुर्घटना स्थल से रवाना कर दी गई।''

पीयूष गोयल ने रविवार को कैबिनेट फेरबदल के बाद सोमवार को रेलमंत्री का पदभार संभाला था। उन्‍होंने 2019 के चुनाव से पहले तक का अपना एजेंडा तय किया था जिसमें स्‍पीड पर फोकस था।

गोयल ने ट्रेनों की स्पीड बढ़ा कर उन्हें सुपर फास्ट कैटेगरी में शामिल करने के निर्देश दिए हैं। सभी ट्रेनों से इंडियन टॉयलेट हटने जा रहे हैं, जनवरी 2018 तक सभी बोगियों में आपको बॉयो-टॉयलेट दिखेंगे। सभी रूटों के इलेक्ट्रिफिकेशन पर जोर दिया जा रहा है।

रेलवे के सामने सबसे बड़ी चुनौती मैनपावर ढूंढ़ने की है। वैसे तो ट्रेनों में बॉयो टॉयलेट लगाने के लिए डेडलाइन 2019-20 है, लेकिन पीयूष गोयल इसे जनवरी 2018 तक पूरा कर देना चाहते हैं।

ट्रेनों की रफ्तार बढ़ाना एक ऐसा मुद्दा है जिस पर पीएम मोदी और पीएमओ भी जोर दे चुके हैं।

रेल मंत्रालय से मिली खबरों के मुताबिक, निकट भविष्य में लगभग 700 ट्रेनों को अपग्रेड किया जाएगा। कई पैसेंजर्स ट्रेन को मेल या एक्सप्रेस में बदला जाएगा और कई एक्सप्रेस ट्रेनों को सुपरफास्ट ट्रेनों में बदला जाएगा।

भारत के सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत पर चीन भड़का

चीन ने भारतीय थल सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत के उस बयान पर ऐतराज जताया है, जिसमें उन्होंने 'देश को दो मोर्चो पर लड़ाई के लिए तैयार रहने' के लिए कहा था।

चीनी सरकार ने गुरुवार को कहा कि सेना प्रमुख का यह बयान इस सप्ताह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी-जिनपिंग की मुलाकात के दौरान पैदा हुई सहयोग की भावना के खिलाफ है।

चीनी सरकार के प्रवक्ता जेंग शुआंग ने कहा, ''दो दिन पहले राष्ट्रपति शी-जिनपिंग ने प्रधानमंत्री को संकेत दिए थे कि दोनों देश एक-दूसरे के लिए खतरा नहीं, बल्कि विकास के विकल्प हैं।''

साथ ही उन्होंने कहा, ''हम नहीं जानते कि उन्होंने जो बयान दिया है, उसके लिए उन्हें अधिकृत किया गया है या फिर उन्होंने अचानक ये बयान दे दिया या फिर उनका यह बयान भारतीय सरकार का रुख जाहिर करता है।''

बता दें, बुधवार को सेना प्रमुख ने एक प्रोग्राम के दौरान कहा था कि देश को दो मोर्चो पर लड़ाई के लिए तैयार रहना चाहिए क्योंकि चीन ने आंख दिखाना शुरु कर दिया है, जबकि पाकिस्तान के साथ सुलह की भी कोई गुजाइंश नजर नहीं आती है।

सेना प्रमुख ने चेतावनी दी कि उत्तरी सीमा पर यह स्थिति धीरे-धीरे एक बड़े संघर्ष का रुप ले सकती है।

उन्होंने कहा कि ऐसी संभावना है कि ये संघर्ष एक स्थान और समय तक सीमित रहें या ऐसा भी हो सकता है कि ये पूरे सीमा क्षेत्र में एक पूरे युद्ध का रूप ले लें। और ऐसे में पाकिस्तान इस स्थिति का फायदा उठाने की फिराक में रहेगा।

जनरल बिपिन रावत ने कहा था, ''हमें तैयार रहना होगा। हमारे संदर्भ में, युद्ध जैसी स्थिति हकीकत के दायरे में है। बाहरी सुरक्षा खतरों का सफलतापूर्वक मुकाबला करने के लिए तीनों सेवाओं में सेना की सर्वोच्चता बनी रहनी चाहिए।''

सेना प्रमुख की टिप्पणी ऐसे समय में आयी है जब एक दिन पहले ही भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग डोकलाम संघर्ष को पीछे छोड़ते हुए भारत-चीन संबंध पर आगे बढ़ने पर सहमत हुए।

जनरल रावत ने कहा था कि भारत चीन के खिलाफ अपनी चौकसी कम करने का जोखिम नहीं ले सकता। जहां तक उत्तर की बात है तो आंख दिखाना शुरू हो गया है। हमें उन स्थितियों के लिए तैयार रहना होगा जो धीरे-धीरे संघर्ष में तब्दील हो सकती हैं।

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के बाद बिहार में भी पत्रकार को मारी गोली

वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के दो दिन बाद बिहार के अरवल जिले में एक स्थानीय पत्रकार को दो बदमाशों ने दिनदहाड़े गोली मार दी। पत्रकार पंकज मिश्रा राष्ट्रीय सहारा अखबार के लिए काम करते हैं। अभी पत्रकार की हालत गंभीर बताई जा रही है।

अरवल जिले के पुलिस अधीक्षक दिलीप कुमार के मुताबिक, पंकज मिश्रा पर हमला उस वक्त हुआ, जब वह बैंक से एक लाख रुपए कैश लेकर निकल रहे थे। हमला करने वाले मोटरसाइकिल पर सवार दोनों अपराधी उन्हीं के गांव के बताए जा रहे हैं। गोली मारने वाले एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। एसपी ने साथ ही मामले को आपसी दुश्मनी करार दिया है।

मंगलवार को कन्नड़ की वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की कुछ बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। गौरी लंकेश कन्नड़ भाषा की एक साप्ताहिक पत्रिका निकालती थीं। अपने पत्रिका में वे हिंदुत्व की राजनीति और सांप्रदायिकता का विरोध करती थीं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भारतीय जनता पार्टी पर भी वह निशाना साधती थीं।  

गौरी ने अपने आखिरी लेख में भी फेक न्यूज को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, उनके मंत्री, भारतीय जनता पार्टी, उनके नेता और आरएसएस पर निशाना साधा था। गौरी ने कहा था कि फेक न्यूज के जरिए आरएसएस और बीजेपी के लोग झूठ फैला रहे हैं।

गौरी लंकेश की हत्या के बाद भारत के अलग-अलग हिस्सों में विरोध प्रदर्शन हुए। लोगों ने गौरी लंकेश की हत्या को भारतीय लोकतंत्र पर हमला बताया है। गौरी लंकेश की हत्या का विरोध कर रहे लोगों ने मामले में जल्द से जल्द आरोपियों को पकड़ने की मांग की है।

दलित लड़की एस अनीथा के आत्महत्या के बाद विभिन्न संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया

भारत में नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट यानी नीट के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करने वाली तमिलनाडु के अरियालुर जिले की दलित लड़की एस अनीथा के आत्महत्या के बाद देश के विभिन्न संगठनों ने विरोध प्रदर्शन किया।

द हिंदू के मुताबिक, अनीथा ने कुझुमुर गांव में स्थित अपने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या की। दैनिक मजदूर की 17 वर्षीया बेटी अनीथा ने तमिलनाडु स्टेट बोर्ड की बारहवीं की परीक्षा में 1200 में से 1176 नंबर प्राप्त किये।  जिसके आधार पर उनका एडमिशन एम बी बी एस में हो जाता, लेकिन नीट परीक्षा के चलते ऐसा संभव नहीं हुआ। नीट की परीक्षा में अनीथा को केवल 86 नंबर ही मिले थे।

गौरतलब है कि पिछले साल तक तमिलनाडु में मेडिकल कॉलेज में दाखिल बारहवीं में प्राप्त अंकों के आधार पर हो जाता था। हालांकि नीट परीक्षा का आयोजन केंद्र सरकार ने पिछले साल भी किया था, लेकिन तब तमिलनाडु को इससे छूट मिल गई थी। इस साल भी तमिलनाडु सरकार ने अध्यादेश लाकर नीट परीक्षा से बाहर होने का प्रयास किया था, लेकिन 22 अगस्त को सुप्रीट कोर्ट ने इसे खारिज कर दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने तमिलनाडु में एम बी बी एस और बी डी एस पाठ्यक्रमों में नामांकन के लिए तमिलनाडु सरकार को नीट के तहत मेडिकल काउंसलिंग कराने का निर्देश दिया था।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि काउंसलिंग प्रक्रिया 4 सितंबर तक पूरी हो जानी चाहिए। इसके बाद केंद्र ने भी कहा था कि इस मामले में तमिलनाडु को छूट नहीं जा सकती है।

इससे पहल केंद्र सरकार ने तमिलनाडु को इस पर राहत देने की बात कही थी। केंद्र ने कहा था कि सरकार इस तरह के अनुरोध पर सिर्फ एक साल के लिए विचार कर सकती है, लेकिन बाद में केंद्र अपने इस बयान से पीछे हट गई।

बता दें कि नीट का आयोजन मेडिकल और डेंटल कॉलेज में एम बी बी एस और बी डी एस कोर्सेस में प्रवेश के लिए किया जाता है। इस परीक्षा के द्वारा उन कॉलेजों में प्रवेश मिलता है जो मेडिकल कांउसिल ऑफ इंडिया और डेटल कांउसिल ऑफ इंडिया के द्वारा संचालित किया जाता है।

दलित भारत की होनहार छात्रा एस अनिथा को श्रद्धांजलि देने के लिए दलित इंडियन स्टूडेंट ऑर्गनाइज़ेशन की महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा, महाराष्ट्र यूनिट ने विश्वविद्यालय में 5 सितम्बर को शाम 6 बजे एक शांतिपूर्व तरीके से कैंडल मार्च का आयोजन किया। इस मार्च में विश्वविद्यालय के कई छात्र-छात्राओं ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।

कैंडल मार्च नजीर हाट से शुरू होकर विश्वविद्यालय का चक्कर लगा कर गांधी हिल्स पर पहुंची। गांधी हिल्स पर मार्च के बाद एस अनिथा के आत्महत्या के मुद्दे पर कई लोगो ने अपने विचार रखे।

आदिवासी चिंतक प्रदीप सूबेदार ने इस विषय पर अपने बहुमूल्य विचार सबको दिये। कई विद्यार्थीयों ने भी अपनी भावनाएँ इस विषय पर सबके सामने रखी, जिसमें सुधीर ज़िंदे, नरेश साहू , रजनीश अंबेडकर, नीरज कुमार, अस्मिता राजुरकर, आकाश खोब्रागड़े, अनिल कुमार, सतवन्त यादव आदि छात्र शामिल थे। अंत में दो मिनट का मौन रख सबने एस अनिथा को श्रद्धांजलि दी।

आई बी टी एन न्यूज़ लाइव के लिए वर्धा से धम्म रतन की रिपोर्ट।

लंकेश की हत्या के लिए बीजेपी-आरएसएस की विचारधारा जिम्मेदार

पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या की चौतरफा निंदा के बीच कांग्रेस और वामपंथी दलों ने बुधवार को इस हत्या के लिए बीजेपी-आरएसएस को ठहराया और कहा कि 'असहमति के स्वरों को कुचला जा रहा है।'

भगवा दल ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि न तो भारतीय जनता पार्टी, न ही उसकी सरकार और उससे जुड़ी कोई अन्य संस्था इस हत्या के पीछे है। बीजेपी के विरोधी इस मौके का प्रयोग उस पर हमला बोलने के लिए कर रहे हैं।

उनका कहना है कि लंकेश की हत्या और उससे पहले तर्कवादी सोच रखने वाले नरेंद्र दाभोलकर, गोविंद पानसरे और एम एम कलबुर्गी की हत्या में एक समानता है। यह विरोध के स्वर को दबाने की कोशिश है।

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कहा कि इस हत्या के बारे में जान कर झटका लगा। उन्होंने कहा, ''इसे और सहन नहीं किया जाना चाहिए।''

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी (ए आई सी सी) की ओर से जारी बयान में गांधी ने कहा, ''अपने निडर और स्वतंत्र विचारों के लिए जानी जाने वाली गौरी लंकेश ने इस व्यवस्था के विरोध में असाधारण धैर्य और दृढ़ संकल्प दिखाया था।''

बयान में कहा गया है, ''तर्कवादियों, स्वतंत्र विचारकों और देश के पत्रकारों की हत्याओं की श्रृंखला ने एक ऐसा माहौल पैदा किया है, जिसमें वैचारिक मतभेद हमारे जीवन को खतरे में डाल सकता है। ऐसा नहीं होना चाहिए और इसे बर्दाश्त नहीं किया जाना चाहिए।''

सोनिया गांधी ने कहा, ''यह हमारे लोकतंत्र के लिए एक बहुत ही दुखद क्षण है और असहिष्णुता और कट्टरता हमारे समाज में बढ़ रही है।''

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने एक कदम आगे बढ़ते हुए बीजेपी पर आरोप लगाया कि उसने असंतोष के स्वर को दबाया है। उन्होंने कहा कि यह उनकी विचारधारा का हिस्सा था।

राहुल गांधी ने कहा, “जो कोई भी बीजेपी के खिलाफ बोलता है, उसे चुप करा दिया जाता है। लोग कह रहे हैं कि प्रधानमंत्री चुप हैं और उन्होंने कुछ भी नहीं कहा है। उनकी पूरी विचारधारा का मुख्य बात यही है कि विरोध के आवाजों को दबा दो।''

राहुल ने कहा, ''इस देश का इतिहास अहिंसा का है .... हत्या का औचित्य सही साबित नहीं किया जा सकता है।''

कांग्रेस ने कहा, ''सामान्य नागरिकों की आवाज को दबाना और विरोध के स्वर को खामोश कर देना मोदी सरकार के तहत 'न्यू इंडिया' का नारा है।''

इस हत्या की निंदा करते हुए मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने देश में 'असहिष्णुता और नफरत में बढ़ोत्तरी' के खिलाफ एक मजबूत विरोध प्रदर्शन करने के लिए लोकतांत्रिक ताकतों का आह्वान किया।

मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने एक बयान में कहा है कि लंकेश की हत्या 'आरएसएस और बीजेपी द्वारा नफरत और असहिष्णुता के वर्तमान माहौल के खिलाफ बोलने की हिम्मत करने वाली आवाजों को खामोश कर देने की परिचित पद्धति से मेल खा रही है।'

बयान में कहा गया है कि पानसरे, दाभोलकर, कलबुर्गी और गौरी लंकेश की हत्या सभी परस्पर जुड़े हुए हैं। बयान में कहा गया है, ''वे सभी अंधविश्वास, असहिष्णुता और दक्षिणपंथी हिंदुत्व के सांप्रदायिक एजेंडे के विरोध में मुखर थे।''

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने लंकेश की हत्या पर चिंता व्यक्त की और न्याय की मांग की। बनर्जी ने ट्वीट किया, ''बेंगलुरू में पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या से मैं बहुत दु:खी हूं। यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है, हम न्याय चाहते हैं।''

गौरी लंकेश के कत्‍ल पर पूरे देश में भड़का गुस्‍सा, अनेक शहरों में विरोध-प्रदर्शन

भारत में वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में पूरे देश में विरोध-प्रदर्शन हो रहे हैं।

मंगलवार (पांच सितंबर) को अज्ञात हमलावरों ने  55 वर्षीया लंकेश को बेंगलुरु स्थित उनके घर के सामने गोली मार दी।

पुलिस के अनुसार, उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

गौरी एक कन्नड़ साप्ताहिक पत्रिका की संपादक थीं। वो दक्षिणपंथी संगठनों और नरेंद्र मोदी सरकार के खिलाफ लगातार लिखती रहती थीं।

सामाजिक कार्यकर्ता गौरी लंकेश की हत्या के लिए दक्षिणपंथी समूहों को जिम्मेदार मान रहे हैं। कर्नाटक में साल 2015 में इसी तरह साहित्यकार एम एम कलबुर्गी की हत्या हुई थी। अभी तक कलबुर्गी की हत्या के दोनों संदिग्ध पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं।

गौरी लंकेश की हत्या के बाद भारत के कई शहरों में विरोध मार्च और श्रद्धांजलि सभाओं का आयोजन किया जा रहा है। बुधवार (छह सितंबर) को सुबह 10.30 बजे बेंगलुरु में हत्या के खिलाफ विरोध मार्च निकाला गया।

मंगलौर में बुधवार शाम चार बजे टाउनहाल में गांधी प्रतिमा के सामने और शाम पांच बजे डी सी ऑफिस के सामने इस हत्या के विरोध में सभा हुई। उडूपी में बुधवार शाम पांच बजे क्लॉक टावर के सामने विरोध प्रदर्शन किया गया।

कर्नाटक के ही धारवाड़ में भी कलबुर्गी के इलाके कल्याण नगर में बुधवार सुबह 10 बजे विरोध प्रदर्शन हुआ। हुबली में सुबह 11 बजे एक सभा हुई जिसमें गौरी लंकेश की हत्या का विरोध किया गया।

नई दिल्ली के रायसीना रोड पर स्थित प्रेस क्लब ऑफ इंडिया में बुधवार दोपहर 12.30 बजे और तीन बजे गौरी लंकेश की हत्या के विरोध में शोक सभा का आयोजन किया गया। चेन्नई के प्रेस क्लब में सुबह 11 बजे शोक सभा हुई। केरल पत्रकार संघ के पत्रकारों ने जंतर-मंतर पर शाम चार बजे विरोध प्रदर्शन किया।

गुरुवार (सात सितंबर) को जंतर-मंतर पर शाम चार बजे विरोध प्रदर्शन होगा।

मुंबई में बुधवार को शाम पांच और छह बजे बांद्रा के कार्टर रोड स्थित एम्फीथिएटर में विरोध प्रदर्शन किया गया। पुणे में सदाशिव पीठ स्थित एस पी कॉलेज में बुधवार शाम चार बजे शोक सभा हुई।

बुधवार को हैदराबाद के सुंदरैया विज्ञान केंद्र पर शाम चार बजे, केरल के त्रिवेंद्रम में मानवीय विधि त्रिवेंद्रम में शाम चार बजे, हाई कोर्ट जंक्शन पर शाम छह बजे विरोध प्रदर्शन किया गया। चंडीगढ़ प्रेस क्लब में बुधवार दोपहर 12 बजे विरोध सभा हुई।

लखनऊ में बुधवार शाम पांच बजे हजरत गंज के गांधी प्रतिमा के निकट विरोध सभा हुई और गुरुवार (सात सितंबर) को जी पी ओ पर शाम 5.30 बजे विरोध सभा होगी। गोरखपुर के पंत पार्क में बुधवार शाम चार बजे विरोध सभा हुई।

गौरक्षकों की हिंसा पर सुप्रीम कोर्ट सख्‍त; केंद्र एक्शन क्यों नहीं ले रहा

भारत में सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि गोरक्षकों की हरकतों (काउ विजिलांटिज्म) को रोकना होगा और यह कानून के तहत स्वीकार्य नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों को हर जिले में नोडल अधिकारी तैनात करने के निर्देश दिए जो इस तरह की हिंसा की घटनाओं को रोकने और इसे अंजाम देने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए कदम उठाएं।

भारत के प्रधान न्यायाधीश न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति अमिताव राय व न्यायमूर्ति ए. एम. खानविलकर की पीठ ने कहा, ''इसे रोकना होगा। आप ने क्या कार्रवाई की है? यह स्वीकार्य नहीं है। इस पर कार्रवाई करनी ही होगी।''

सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी वकील इंदिरा जयसिंह द्वारा अदालत का ध्यान सम्पूर्ण भारत में गोमांस के संदेह पर गोरक्षा समूहों द्वारा की जा रही हिंसा पर आकर्षित किए जाने के बाद आई है।

नोडल अधिकारियों की नियुक्ति का निर्देश देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के मुख्य सचिवों को राजमार्ग पर गश्त की तैनाती सहित, मामले में की गई कार्रवाई का हलफनामा दायर करने को कहा है।

सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से पूछा कि क्यों न उसे धारा 256 के तहत इस तरह की घटनाओं को रोकने के लिए जिम्मेदार ठहराया जाए।

सुप्रीम कोर्ट का आदेश तुषार गांधी सहित याचिकाओं के एक समूह पर आया है। तुषार गांधी महात्मा गांधी के पोते हैं।

सुप्रीम कोर्ट में केंद्र की तरफ से गए तुषार मेहता ने कहा, गौ रक्षकों द्वारा की जा रही हिंसा के लिए कानून मौजूद हैं।

इस पर चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा ने कहा कि वह भी जानते हैं कि कानून मौजूद है, पर फिर एक्शन क्यों नहीं लिया जा रहा?

चीफ जस्टिस ने सलाह दी कि प्लान बनाया जा सकता है जिससे ऐसी घटनाएं ना बढ़ें।

पिछले कुछ वक्त से गौ रक्षा के नाम पर कई जगह हिंसा की घटनाएं हुई हैं। जिनमें पीटे गए कुछ लोगों की तो मौत भी हो गई।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी गौ रक्षकों को कानून हाथ में ना लेने की सलाह दे चुके हैं। ऐसे में कुछ संगठन तो मोदी के ही खिलाफ हो गए थे।

नोटबंदी, जीएसटी से छोटे कारोबारी बर्बाद हो गए; विकास दर भी गिरी: राहुल गांधी

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी आज (सोमवार, 04 सितंबर को) गुजरात मिशन पर अहमदाबाद पहुंचे। वहां साबरमती रिवर फ्रंट पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं से संवाद कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि पीएम नरेंद्र मोदी की आर्थिक नीतियों से देश का आर्थिक विकास दर गिरा है। नोटबंदी और जीएसटी ने देशभर के छोटे व्यापारियों की रीढ तोड़ दी है।

उन्होंने कहा कि पीएम मोदी की नोटबंदी विफल रही है। इससे जीडीपी में गिरावट आई है। उन्होंने 28 फीसदी जीएसटी करने की भी आलोचना की और कहा कि इससे छोटे कारोबारी बर्बाद हो गए हैं।

इस साल के अंत तक गुजरात में विधान सभा चुनाव होने हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस ने सभी 182 विधान सभा क्षेत्रों से कार्यकर्ताओं को अहमदाबाद बुलाया था। ताकि वो पार्टी के शीर्ष नेतृत्व के साथ विचार साझा कर सकें।

कांग्रेस ने इसके लिए साबरमती रिवर फ्रंट पर टी शेप में रैम्प का निर्माण कराया था ताकि वहां करीब 10 हजार कार्यकर्ता एक साथ जमा हो सकें और अपने नेता से संवाद कर सकें।

गुजरात कांग्रेस के अध्यक्ष भरत सिंह सोलंकी ने एचटी मीडिया से बात करते हुए कहा कि इस तरह के कार्यक्रम के आयोजन के पीछे मकसद यह था कि पार्टी कार्यकर्ता सीधे राहुल गांधी से संवाद कायम करें।

गुजरात में कांग्रेस को हाल के दिनों में काफी नुकसान उठाना पड़ा है। शंकर सिंह वाघेला समेत कई विधायक पार्टी छोड़कर बीजेपी का दामन थाम चुके हैं।

हालांकि, गुजरात राज्यसभा चुनाव में अहमद पटेल की जीत से पार्टी की साख बरकरार रह गई। पटेल को हराने के लिए बीजेपी ने एड़ी चोटी एक कर दिया था, मगर चुनाव आयोग पहुंची इस चुनाव की लड़ाई में आखिरकार अहमद पटेल को जीत मिली।

जो अपने लोगों को छोड़कर जाता है, उसकी कहीं कद्र नहीं होती: लालू

भारत में जनता दल यूनाइटेड के किसी भी नेता को केंद्र में मोदी कैबिनेट में जगह नहीं दिए जाने पर आर जे डी प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने नीतीश कुमार पर हमला किया है।

लालू ने कहा कि पीएम मोदी ने कैबिनेट फेरबदल में नीतीश कुमार को न्योता तक नहीं दिया। जो अपने लोगों को छोड़कर जाता है, उसकी कहीं कद्र नहीं होती।

वहीं जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने पीएम मोदी की कैबिनेट फेरबदल पर निशाना साधा है।

विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा है कि सरकार की छवि पहले से ही खराब हो चुकी है। कुछ भी करने से छवि सुधारना मुमकिन नहीं है।

शिवसेना ने भी कैबिनेट फेरबदल पर निशाना साधा है। शिवसेना ने इसे सिर्फ बीजेपी का कैबिनेट विस्तार बताया है। शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' में छपे एक लेख में बीजेपी से तीन साल बाद भी अच्छे दिन नहीं आने पर सवाल पूछे हैं।

भारत में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कैबिनेट फेरबदल और विस्तार में सिर्फ बीजेपी नेताओं को जगह दिए जाने पर अब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने प्रतिक्रिया दी है।

सीएम नीतीश ने आज (4 सितंबर) कहा कि कैबिनेट फेरबदल में जनता दल यूनाइटेड नेताओं को शामिल किया जाए, ऐसी कोई पूर्व योजना नहीं थी।

करीब दो सप्ताह पहले महागठबंधन छोड़ एन डी ए में शामिल हुई जनता दल यूनाइटेड को लेकर मीडिया में लगातार कहा जाता रहा है कि पीएम मोदी नीतीश खेमे के कम से कम दो नेताओं को अपनी कैबिनेट में शामिल कर सकते हैं।

हालांकि रविवार को ऐसा कुछ नहीं हुआ। सिर्फ 9 नए लोगों ने मंत्रिपद की शपथ ली, जो बीजेपी से जुड़े थे।

करीबी सूत्रों की मानें तो कहा गया था कि कैबिनेट फेरबदल में पीएम मोदी द्वारा फोन नहीं किए जाने से सीएम नीतीश काफी परेशान थे।

इस पर सीएम नीतीश ने कहा, ''अगर आप (मीडिया) इसे सच सोचते हैं तो ये झूठ है। क्योंकि पीएम मोदी से कैबिनेट फेरबदल को लेकर कोई बात नहीं हुई। हमारे काम करने का तरीका पारदर्शी है।''

बता दें कि इस साल जुलाई में नीतीश कुमार ने कांग्रेस, आर जे डी, जनता दल यूनाइटेड महागठबंधन तोड़ बीजेपी के समर्थन से बिहार में नई सरकार बनाई थी। जबकि बीते महीने जनता दल यूनाइटेड आधिकारिक रूप सें एन डी ए गठबंधन में शामिल हो गई।

खबरों की मानें तो इस दौरान सीएम नीतीश केंद्र में दो मंत्री चाहते थे। जिसमें एक केंद्रीय मंत्री हो। जनता दल यूनाइटेड के वर्तमान में दो लोकसभा और दस राज्यसभा सांसद है।