गुजरात चुनाव से पहले पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल को गुजरात की स्थानीय अदालत ने बड़ी राहत दी है। उनके खिलाफ साल 2015 के एक मामले में गैर जमानती वारंट जारी किया गया था।
2015 में बीजेपी नेता ऋषिकेश पटेल के कार्यालय पर हार्दिक पटेल के समर्थकों ने हमला किया था, इसी मामले पर कोर्ट ने बुधवार को यह वारंट जारी किया।
पटेल के वकील ने हार्दिक की अदालत में पेशी से छूट की मांग की थी जिसे अदालत ने खारिज कर दिया था।
हार्दिक ने बुधवार रात को कहा था, ''अगर पुलिस मुझे गिरफ्तार करना चाहती है तो मैं आत्मसमर्पण को तैयार हूं।''
हार्दिक अदालत में अपने 5 सहयोगियों के साथ पहुंचे थे। हार्दिक लगातार दूसरी तारीख पर हाजिर नहीं हुए थे, तब अदालत ने गैर जमानती वारंट जारी किया था। हार्दिक को देशद्रोह के एक मामले में सेशन्स कोर्ट, अहमदाबाद में भी पेश होना है।
पटेल ने मंगलवार को अहमदाबाद के एक होटल में सोमवार को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की खबर को गलत बताया और इस खबर के साथ समाचार चैनलों पर दिखाए गए सीसीटीवी फुटेज पर आश्चर्य जताते हुए कहा कि एक पांच सितारा होटल का सीसीटीवी फुटेज लीक कैसे हो सकता है?
हार्दिक ने ट्वीट कर कहा, ''मैंने राहुल गांधी से मुलाकात नहीं की है, लेकिन मैं जब भी राहुल गांधी से मिलूंगा, पूरे हिंदुस्तान के सामने घोषणा करके मिलूंगा। मैं उनसे उनके अगले गुजरात दौरे के दौरान मिलूंगा। भारत माता की जय !''
हार्दिक इससे पहले गुजरात में कांग्रेस पार्टी महासचिव अशोक गहलोत से मिले थे। उन्होंने उन्हें कांग्रेस का एजेंट कहने वाले भारतीय जनता पार्टी के नेताओं पर प्रहार किया।
एक अन्य ट्वीट कर उन्होंने कहा, ''जो यह कहते हैं कि मैं कांग्रेस का एजेंट हूं, वे वास्तव में बीजेपी के एजेंट हैं। बीजेपी के नेता क्या कहते हैं, मैं इस पर ध्यान नहीं देता।''
गुजरात में वर्ष 2015 में पाटीदार आरक्षण आंदोलन की अगुवाई करने वाले हार्दिक पटेल ने आश्चर्य जताते हुए कहा कि कैसे गुजरात पुलिस या राज्य सरकार उम्मेद होटल का सीसीटीवी फुटेज मांग सकती है?
हार्दिक और राहुल गांधी सोमवार को इसी होटल में ठहरे थे और दोनों के सीक्रेट बैठक के कयास लगाए जा रहे थे।
भारत में चुनाव आयोग ने बुधवार को गुजरात में विधानसभा चुनाव की तारीखों का ऐलान कर दिया। चुनाव आयोग ने दो चरणों में चुनाव कराने का फैसला किया है।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ए के जोति ने राज्य विधानसभा चुनाव कार्यक्रम घोषित करते हुए बताया कि गुजरात की 182 सीटों के लिये पहले चरण में 89 सीटों पर नौ दिसंबर को चुनाव होंगे। वहीं, दूसरे चरण में 93 सीटों पर 14 दिसंबर को मतदान होगा।
जोती ने बताया कि गुजरात में दोनों चरणों के मतदान के बाद 18 दिसंबर को मतगणना होगी।
निर्वाचन प्रक्रिया की औपचारिक शुरुआत 14 नवंबर को विधानसभा चुनाव की अधिसूचना जारी होने के साथ ही होगी। इसके साथ ही राज्य के कुल 33 जिलों में से 19 जिलों में होने वाले पहले चरण के मतदान से जुड़ी 89 सीटों के लिये उम्मीदवार नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे।
उन्होंने बताया कि दूसरे चरण में शेष 93 सीटों पर चुनाव के लिये 20 नवंबर को अधिसूचना जारी की जायेगी।
चुनाव आयोग द्वारा चुनाव कार्यक्रम की घोषणा किये जाने के साथ ही गुजरात में चुनाव आचार संहिता लागू हो गयी है।
जोती ने बताया कि गुजरात में दोनों चरणों के मतदान के लिये कुल 50128 मतदान केंद्र बनाये गये हैं, इन पर राज्य के 4.33 करोड़ मतदाता वीवीपैट युक्त ईवीएम के जरिये मतदान कर सकेंगे।
चुनाव आयोग ने गुजरात में पूरी तरह से महिलाओं द्वारा संचालित 182 मतदान केंद्र भी बनाये हैं। प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में इस तरह का एक मतदान केंद्र होगा।
उन्होंने बताया कि समूची चुनाव प्रक्रिया में शांतिपूर्ण मतदान सुनिश्चित करने के लिये सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किये गये हैं। इसके अलावा चुनाव आचार संहिता के पालन के लिये सोशल मीडिया और अन्य प्रचार माध्यमों पर भी निगरानी के व्यापक इंतजाम किये गये हैं।
उल्लेखनीय है कि हाल ही में चुनाव आयोग के ऐलान के बाद हिमाचल प्रदेश में विधानसभा चुनाव के लिये निर्वाचन प्रक्रिया 16 अक्तूबर को शुरू हो गयी है। हिमाचल प्रदेश में एक ही चरण में नौ नवंबर को मतदान होगा, जबकि मतगणना गुजरात विधानसभा चुनाव के साथ 18 दिसंबर को ही होगी।
जोती ने बताया चुनाव खर्च की सीमा का पालन सुनिश्चित करने के लिये हर उम्मीदवार को अलग से बैंक खाता खोलना होगा। वहीं शांतिपूर्ण मतदान के लिये चुनाव आयोग द्वारा गठित निगरानी दस्तों को जीपीएस से जोडा जाएगा, जबकि मतदान केंद्रों पर सीसीटीवी कैमरों से निगरानी की जायेगी।
राहुल गांधी ने कर सुधारों और नोटबंदी को लेकर पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए सोमवार (23 अक्टूबर) को जीएसटी को 'गब्बर सिंह टैक्स' बताया। उनके इस बयान के बाद कांग्रेस आईटी सेल तुंरत सक्रिय हो गया और मोदी सरकार के खिलाफ कई पोस्टर जारी कर सरकार को ट्रोल करने की कोशिश की।
पोस्टर पीएम मोदी और बीजेपी की आर्थिक रणनीतियों के खिलाफ जारी किए गए। कांग्रेस ने छह पोस्टर रिलीज किए जिसमें गब्बर सिंह के डायलॉग को मोडीफाई किया गया। पहले पोस्टर में गब्बर सिंह के डायलॉग को 'अरे ओ सांबा कितना इनाम रखे हैं सरकार हमपर?' बदलकर लिखा गया, 'अरे ओ जेटली कितना टैक्स रखा है सरकार ने सब पर?'
दूसरे पोस्टर में लिखा गया है, 'क्या सोचकर आए थे, साहब 15 लाख देगा, साबासी देगा, अब तू दे .... जीएसटी'
गौरतलब है गुजरात दौरे पर पहुंचे राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए कहा था कि गुजरात अनमोल है और इसे खरीदा नहीं जा सकता। उनकी यह टिप्पणी पाटीदार नेता नरेंद्र पटेल के इस दावे के एक दिन बाद आई कि बीजेपी में शामिल होने के लिए उन्हें एक करोड़ रुपए की पेशकश की गई थी।
बीजेपी ने पटेल के आरोप को खारिज कर दिया। वहीं कांग्रेस के पोस्टर वार पर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपानी ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा, ''ये कांग्रेस ही थी जो जीएसटी लागू करना चाहती थी, उन्होंने उस समय आपत्ति क्यों नहीं जताई?''
इन दिनों कांग्रेस ने बीजेपी के खिलाफ सोशल मीडिया पर अभियान चला रखा है। ऐसा पहली बार है, जब सोशल मीडिया पर कांग्रेस बीजेपी से आगे निकल गई है। बीजेपी के खिलाफ कांग्रेस का सोशल मीडिया कैंपेन तब पहली बार कामयाब होता नजर आया, जब 'विकास गांडो थायो छे अर्थात विकास पागल हो गया' वायरल हुआ।
जानकारी के लिए बता दें कि राहुल ने गांधीनगर में ठाकोर समुदाय की रैली को संबोधित करते हुए कहा था, ''उनकी (केंद्र की) जीएसटी, जीएसटी नहीं है। जीएसटी का मतलब है गब्बर सिंह टैक्स। इससे देश को काफी नुकसान हो रहा है। छोटे दुकानदार समाप्त हो गए हैं। लाखों युवक बेरोजगार हो गए। लेकिन वे अब भी सुनने को तैयार नहीं हैं। मौजूदा जीएसटी वह नहीं है जिसकी परिकल्पना कांग्रेस ने की थी।
उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी ने नई कर व्यवस्था के प्रतिकूल प्रभाव के बारे में सरकार को आगाह किया था, लेकिन मोदी सरकार ने उन सुझावों के खिलाफ काम किया। राहुल ने सरकार से नई कर व्यवस्था को सरल बनाने को कहा था।
राहुल ने नोटबंदी को लेकर भी मोदी का उपहास किया। नोटबंदी की घोषणा पिछले साल आठ नवंबर को हुई थी। उन्होंने कहा, ''आठ नवंबर को क्या हुआ, नहीं मालूम, मोदी ने कहा कि 500 और 1000 रुपए के नोट मुझे नहीं पसंद हैं, इसलिए आज रात 12 बजे से वे रद्दी हो जाएंगे। हा हा हा।''
राहुल ने कहा कि पहले दो-तीन दिन तक प्रधानमंत्री को नहीं समझ आया कि क्या हो गया। प्रधानमंत्री ने पांच-छह दिनों बाद अपनी गलती महसूस की।
उन्होंने आरोप लगाया कि नरेंद्र मोदी ने पूरे देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया।



कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने सोमवार (23 अक्टूबर) को जीएसटी को 'गब्बर सिंह टैक्स' बताते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर भारतीय अर्थव्यस्था को बरबाद करने और लाखों लोगों से नौकरी छीनने का आरोप लगाया।
राहुल गांधी ने कहा कि मोदी सरकार ने नोटबंदी और जीएसटी की दो कुल्हाड़ियां बिना सोचे-समझे जनता पर चला दीं। ये रैली कांग्रेस और गुजरात क्षत्रिय ठाकोर सेना के नेता अल्पेश ठाकोर ने मिलकर बुलायी थी।
राहुल गांधी ने रैली में अपने भाषण की शुरुआत, 'जय माता दी', 'जय सरदार' और 'जय भीम' कहकर की। रैली में अल्पेश ठाकोर कांग्रेस में शामिल हुए।
राहुल गांधी ने कहा, ''गुजरात में एक भी समुदाय, एक भी आदमी ऐसा नहीं है जो हाल में हुए आंदोलनों से जुड़ा न रहा हो। पूरा राज्य आंदोलन की राह पर है।''
अल्पेश ठाकोर ने रैली के दौरान श्रोताओं से शांत रहने की अपील की थी।
राहुल ने अल्पेश की तरफ संकेत करते हुए कहा, ''अल्पेश आपसे शांत रहने के लिए कह रहे हैं, लेकिन मुझे पक्का यकीन है कि लोग शांत नहीं रहेंगे क्योंकि मोदीजी ने उन्हें बहुत अधिक सताया है। हार्दिक, जिग्नेश भी चुप नहीं रहेंगे। उनकी आवाज हर गुजराती की आवाज है। और इस आवाज को दबाया नहीं जा सकता, खरीदा नहीं जा सकता। आप उन्हें एक करोड़, पांच करोड़, 100 करोड़, गुजरात का पूरा बजट या पूरे भारत का बजट या पूरी दुनिया की दौलत दे दो, आप इस आवाज को न खरीद सकोगे, न दबा सकोगे।''
राहुल गांधी ने आगे कहा, ''..... ब्रिटिश ने भी गुजरातियों की आवाज दबाने की कोशिश की थी। पहले दक्षिण अफ्रीका में और फिर भारत में गुजरातियों की आवाज दबाने की कोशिश की थी, लेकिन गांधी और सरदार (पटेल) ने उन्हें सत्ता से उखाड़ फेंका .... मोदीजी ये आवाज बिकाऊ नहीं है। मोदीजी, आप गुजरात की आवाज को खरीद नहीं सकते।''
रविवार (22 अक्टूबर) की रात को पाटीदार अमानत आंदोलन समिति के नेता नरेंद्र पटेल ने मीडिया के सामने आरोप लगाया था कि बीजेपी ने उन्हें पार्टी में शामिल होने के लिए एक करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया था। पटेल ने मीडिया के सामने 10 लाख रुपये नकद भी दिखाए और दावा किया कि बीजेपी ने वो पैसा एडवांस के तौर पर दिया था।
सोशल मीडिया के जरिए आज राजनेता अपनी बातों को जनता तक आसानी से पहुंचा पाते हैं। बीजेपी भी सोशल मीडिया कैम्पन के माध्यम से लोगों तक अपनी बात पहुंचाने का काम कर रही है। पिछले दिनों भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के गृह प्रदेश गुजरात में एक सोशल मीडिया कैम्पेन चलाया गया था जिसमें विकास पर बात की जा रही थी।
हाल ही में टीवी चैनल एनडीटीवी ने एक रिपोर्ट जारी किया है जिसमें कहा गया है कि बीजेपी का सोशल मीडिया कैम्पेन सरकारी पैसे से चलाया जा रहा है।
डेरा सच्चा सौदा गुरमीत राम रहीम को दोषी करार दिए जाने के बाद हरियाणा सीएम एम एल खट्टर हिंसा रोकने में नाकामयाब साबित हुए थे। जिसके बाद उनके इस्तीफे की मांग तेज हो गई थी। मीडिया में सी एम एमएल खट्टर को लेकर कई तरह की खबरें आने लगी। इसके बाद ट्विटर पर #HaryanaWithKhattar के नाम से कैम्पेन चलाया गया।
रिपोर्ट में इस बात का खुलासा किया गया है कि इस कैम्पेन को बीजेपी कार्यकर्ताओं ने चलाया था।
भार्गव जैन जो कि खुद को बीजेपी के सोशल मीडिया मैनेजर बताते हैं। उन्होंने #HaryanaWithKhattar कैम्पेन के तहत 92 मिनट के अंदर 63 ट्विट किए थे।
इसके अलावा वो दिसंबर 2016 से सिल्वर टच टेक्नोलॉजीज के मैनेजर भी हैं। सिल्वर टच टेक्नोलॉजीज नाम की कंपनी अहमदाबाद में 1992 में स्थापित की गई थी। भार्गव जैन जैसे लोगों को कंपनी हायर करती है और फिर उनसे अपना काम कराती है। इस कंपनी के पर्सनल क्लाइंट रिलायंस इंडस्ट्री, अदानी ग्रुप, हिताची और निरमा ग्रुप जैसे मल्टीनेशनल कंपनियां हैं।
नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया ने इस साल सितंबर में कहा था कि पिछले वित्त वर्ष में 53 फीसदी काम लगभग 62.5 करोड़ रुपये के सरकारी कॉन्ट्रैक्ट से मिला था।
कंपनी में काम करने वाले मनोज का कहना है कि यह कंपनी सिर्फ बीजेपी के लिए काम करती हैं। सिल्वर टच नाम की इस कंपनी ने सरकार के आदेश पर इस कॉन्ट्रैक्ट को साइन किया है।
बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने हिंदू धर्म छोड़ने की धमकी दी है। उन्होंने कहा है कि वह शंकराचार्य, भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को हाशिए पर पड़े समाज के सुधार के लिए एक मौका देंगीं। अगर वे इसमें नाकाम रहे, तो फिर वह अंबेडकर के रास्ते पर चलेंगी।
उन्होंने इस दौरान उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर भी तंज कसा। वह बोलीं कि वह (योगी) तो मंदिरों में पूजा से फुर्सत मिलने के बाद ही विकास पर ध्यान देंगे।
मंगलवार को मायावती उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ में थीं। वह यहां रानी की सराय में आजमगढ़, वाराणसी और गोरखपुर के बसपा समर्थकों को संबोधित कर रही थीं।
उन्होंने कहा, ''धर्म बदलने से पहले मैं शंकराचार्यों, हिंदू धर्म से जुड़ी संस्थाओं और भाजपा-आरएसएस को एक मौका दूंगी, ताकि वे दलितों, आदिवासियों, पिछड़े वर्ग और धर्म बदलने वाले लोगों के खिलाफ समाज में जारी कुप्रथाएं और अत्याचार को खत्म करें। अगर वे इसमें नाकाम हुए, तो फिर मेरे पास अंबेडकर के रास्ते पर चलने के सिवाय और कोई रास्ता नहीं है।''
बसपा सुप्रीमो ने उत्तर प्रदेश के सीएम को उनकी कार्यप्रणाली को लेकर घेरा। आरोप लगाया कि योगी आदित्यनाथ कैबिनेट स्तर पर बैठकें और फैसले तो लेते हैं, मगर उनको अमल में लाने पर वह नाकामयाब साबित होते हैं। पूजा-पाठ से उन्हें फुर्सत मिले, तो वह उन फैसलों पर अमल के बारे में भी सोच सकते हैं। वह या तो गोरखनाथ मंदिर में नजर आते हैं या फिर अयोध्या, मथुरा, काशी और चित्रकूट में होते हैं। बाकी राज्यों के मंदिरों में भी जाते हैं। यही वजह है कि विकास का मुद्दा पीछे चला गया है। कानून-व्यवस्था की स्थिति भी ठीक नहीं है। वहीं, आपराधिक घटनाएं उनके शासन में समाजवादी पार्टी की सरकार से भी ज्यादा हुई हैं।
यही नहीं, मायावती ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने नोटबंदी, जीएसटी और चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा नहीं करने के लिए मोदी की आलोचना की।
नोटबंदी को सदी का सबसे बड़ा घोटाला करार देते हुए विपक्ष ने मंगलवार को घोषणा की कि इस फैसले के एक साल पूरे होने पर विपक्षी दल आठ नवंबर को काला दिवस मनाएंगे तथा देश भर में विरोध-प्रदर्शन करेंगे।
नोटबंदी के कारण अर्थव्यवस्था एवं नौकरियों को नुकसान पहुंचा है। राज्यसभा में विपक्ष के नेता गुलाम नबी आजाद ने मंगलवार को संवाददाताओं को संबोधित करते हुए कहा कि पिछले साल आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने 1000 रूपए और 500 रूपए के नोटों को प्रचलन से बंद किए जाने की घोषणा की थी। विपक्ष ने तभी नोटबंदी के फैसले के कारण अर्थव्यवस्था की हालत बुरी होने, बेरोजगारी बढ़ने और सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) कम होने की आशंका जताई थी।
गुलाम नबी आजाद ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने नोटबंदी के कारण जीडीपी में दो प्रतिशत कमी आने की जो आशंका जताई थी, वह पूरी तरह सही साबित हुई।
गुलाम नबी आजाद के साथ संवाददाता सम्मेलन में तृणमूल कांग्रेस के नेता डेरेक ओब्रायन और जनता दल यूनाइटेड के शरद यादव भी मौजूद थे।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा कि विपक्षी दल संसद के भीतर आपसी समन्वय से काम करते हैं। किन्तु पिछले मानसून सत्र के अंतिम दिन विपक्षी नेताओं की बैठक में एक समन्वय समिति बनाने का निर्णय किया गया। समिति के सदस्यों को यह जिम्मेदारी दी गई कि वे दो सत्रों के बीच की अवधि में विभिन्न 18 दलों के नेताओं से बातचीत कर समन्वय करें।
उन्होंने कहा कि इस समन्वय समिति की बुधवार को पहली बैठक हुई। इस बैठक में तय किया गया कि आठ नवंबर को सभी विपक्षी दल अपने अपने तरह से काला दिवस मनायें।
उन्होंने सरकार के इस फैसले को सदी का सबसे बड़ा घोटाला करार देते हुए कहा कि प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद पूरा देश सड़कों पर आ गया और लोगों को लाइनों में घंटों खड़े रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।
आजाद ने कहा कि नोटबंदी के कारण सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 120 लोग मारे गए, जबकि अनाधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इनकी संख्या 300-400 है। इनमें लाइन में खड़े होने के दौरान दिल का दौरा पड़ने से जान गंवाने वाले व्यक्ति भी शामिल हैं।
उन्होंने कहा, सरकार ने काला धन, जाली मुद्रा और आतंकवादियों के वित्त पोषण पर रोक जैसे जिन उद्देश्यों के लिए नोटबंदी का फैसला किया था, उनमें से कोई भी मकसद पूरा नहीं हुआ क्योंकि 99 प्रतिशत मुद्रा तो वापस आ गई। शेष मुद्रा सहकारी बैंकों तथा पड़ोस के देशों के बैंक में जमा कराई गई है।
आजाद ने स्पष्ट किया कि आठ नवंबर को कांग्रेस की अगुवाई में 18 विपक्षी दल अपने-अपने क्षेत्रों में अपने कार्यक्रमों और योजना के अनुसार नोटबंदी के फैसले का विरोध करेंगे।
तृणमूल नेता डेरेक ओब्रायन ने कहा कि उनकी पार्टी प्रमुख एवं पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने तो पिछले साल आठ नवंबर को ही नोटबंदी का विरोध किया था। उन्होंने कहा कि तृणमूल की ओर से नोटबंदी के बारे में जो भी आशंकाएं जताई गई थीं, सरकार ने आज तक उनमें से किसी का भी जवाब नहीं दिया।
गुलाम नबी आजाद ने स्पष्ट किया कि संसद के आगामी सत्र से पहले भी विपक्षी समन्वय समिति की एक बैठक होगी।
गुजरात चुनाव के लिए कांग्रेस की अगुवाई कर रहे उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने मंगलवार को एक बार फिर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी सरकार पर ट्विटर के माध्यम से हमला बोला है।
राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर शोले फिल्म के विलेन गब्बर के फेमस डायलॉग 'ये हाथ मुझे दे दे ठाकुर' के साथ जीएसटी को लेकर निशाना साधते हुए कहा, ''ये कमाई मुझे दे दे''।
कांग्रेस उपाध्यक्ष ने ट्वीट कर कहा, ''कांग्रेस जीएसटी = जेन्यून सिंपल टैक्स। मोदी जी की जीएसटी = गब्बर सिंह टैक्स = ये कमाई मुझे दे दे।''
इससे पहले भी राहुल गांधी ने सोमवार को गांधीनगर में नवसरजन गुजरात जनादेश रैली में जीएसटी को 'गब्बर सिंह टैक्स' बताया था। राहुल का कहना है कि मोदी सरकार जो जीएसटी लेकर आई है उसका असली मतलब ‘गब्बर सिंह टैक्स' है, जिसका मुख्य लक्ष्य जनता से उनकी कमाई लेना है, लेकिन कांग्रेस के जीएसटी का मतलब 'जेन्यून सिंपल टैक्स' था।
राहुल गांधी के इस ट्वीट पर लोगों ने अपनी प्रतिक्रियाएं देते हुए कहा, ''टैक्स एक है और स्लेब्स चार? बहुत नाइंसाफी है।'
राहुल ने नोटबंदी को लेकर भी पीएम मोदी का मजाक उड़ाया। नोटबंदी की घोषणा पिछले साल आठ नवंबर को हुई थी।
उन्होंने कहा, ''आठ नवंबर को क्या हुआ, नहीं मालूम, मोदी ने कहा कि 500 और 1000 रुपए के नोट मुझे नहीं पसंद है, इसलिए आज रात 12 बजे से वे रद्दी हो जाएंगे। हा हा हा।''
राहुल ने कहा कि पहले दो-तीन दिन तक प्रधानमंत्री को नहीं समझ आया कि क्या हो गया। प्रधानमंत्री ने पांच-छह दिनों बाद अपनी गलती महसूस की।
कांग्रेस उपाध्यक्ष ने कहा कि नरेंद्र मोदी ने पूरे देश की अर्थव्यवस्था को तबाह कर दिया।
भारत में सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को कहा कि देशभक्ति साबित करने के लिए सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के समय खड़ा होना जरूरी नहीं हैं।
सुप्रीम कोर्ट ने इसके साथ ही केंद्र सरकार से कहा कि सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने को नियंत्रित करने के लिए नियमों में संशोधन पर विचार किया जाए।
शीर्ष अदालत ने टिप्पणी की कि अगर कोई व्यक्ति राष्ट्रगान के लिए खड़ा नहीं होता है तो ऐसा नहीं माना जा सकता कि वह 'कम देशभक्त' है।
प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा, न्यायमूर्ति ए एम खानविलकर और न्यायमूर्ति धनंजय वाइ चंद्रचूड़ के तीन सदस्यीय खंडपीठ ने कहा कि समाज को 'नैतिक पहरेदारी' की जरूरत नहीं है।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगली बार सरकार चाहेगी कि लोग सिनेमाघरों में टी शर्ट्स और शार्ट्स में नहीं जाएं क्योंकि इससे राष्ट्रगान का अपमान होगा।
पीठ ने कहा कि वह सरकार को 'अपने कंधे पर रखकर बंदूक चलाने की अनुमति' नहीं देगी।
पीठ ने सरकार से कहा कि वह राष्ट्रगान को नियंत्रित करने के मुद्दे पर विचार करे।
न्यायालय ने संकेत दिया कि सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाने को अनिवार्य करने संबंधी अपने एक दिसंबर, 2016 के आदेश में सुधार कर सकती है और वह इसमें अंग्रेजी के 'मे’'शब्द को 'शैल' में तब्दील कर सकती है।
पीठ ने कहा, लोग सिनेमाघरों में मनोरंजन के लिए जाते हैं। समाज को मनोरंजन की आवश्यकता है। हम आपको हमारे कंधे पर रखकर बंदूक चलाने की अनुमति नहीं दे सकते। लोगों को अपनी देशभक्ति साबित करने के लिए सिनेमाघरों में राष्ट्रगान के समय खड़े होने की आवश्यकता नहीं है।
पीठ ने कहा, अपेक्षा करना एक बात है, लेकिन इसे अनिवार्य बनाना एकदम अलग बात है। नागरिकों को अपनी आस्तीनों पर देशभक्ति लेकर चलने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता और अदालतें अपने आदेश के माध्यम से जनता में देशभक्ति नहीं भर सकती हैं।
शीर्ष अदालत ने सभी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रगान बजाने के लिए पिछले साल श्याम नारायण चोकसी द्वारा दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान ये सख्त टिप्पणियां कीं।
इन टिप्पणियों के विपरीत, न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाले पीठ ने ही पिछले साल एक दिसंबर को सभी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले 'अनिवार्य रूप से' राष्ट्रगान बजाने और दर्शकों को सम्मान में खड़े होने का आदेश दिया था।
इस मामले में सोमवार को सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से अटार्नी जनरल के के वेणुगोपाल ने कहा कि भारत विविधताओं वाला देश है और एकरूपता लाने के लिए देश के सभी सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि यह सरकार के विवेक पर छोड़ देना चाहिए कि क्या सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाया जाना चाहिए और क्या लोगों को इसके लिए खड़ा होना चाहिए।
इस पर न्यायमूर्ति चंद्रचूड़ ने कहा, आपको ध्वज संहिता में संशोधन करने से कौन रोक रहा है? आप इसमें संशोधन कर सकते हैं और प्रावधान कर सकते हैं कि राष्ट्रगान कहां बजाया जाएगा और कहां नहीं बजाया जा सकता। आजकल तो यह मैचों, टूर्नामेंट और यहां तक कि ओलंपिक में भी बजाया जाता है, जहां आधे दर्शक तो इसका मतलब भी नहीं समझते हैं।
इसके बाद न्यायालय ने केंद्र से कहा कि वह देश भर के सिनेमाघरों में राष्ट्रगान बजाने के लिए राष्ट्रीय ध्वज संहिता में संशोधन के बारे में नौ जनवरी तक उसके पहले के आदेश से प्रभावित हुए बगैर ही विचार करे। इस मामले में अब नौ जनवरी को आगे विचार किया जाएगा।
गुजरात विधान सभा चुनावों से ठीक पहले हार्दिक पटेल के साथी पाटीदार नेता ने मीडिया के सामने आरोप लगाया कि बीजेपी उन्हें एक करोड़ रुपये में खरीदना चाहती थी और उन्हें 10 लाख रुपये एडवांस के तौर पर दिये गये थे।
पाटीदार अनामत समिति के संयोजक नरेंद्र पटेल रविवार (22 अक्टूबर) को हार्दिक पटेल के पू्र्व साथी वरुण पटेल के सामने बीजेपी में शामिल हुए थे। वरुण पटेल भी रविवार को ही बीजेपी में शामिल हुए थे।
नरेंद्र पटेल ने आरोप लगाया कि बीजेपी ने उन्हें वरुण पटेल के माध्यम से उसमें शामिल होने पर एक करोड़ रुपये देने का वादा किया था।
एनडीटीवी की रिपोर्ट के अनुसार, वरुण पटेल ने इन आरोपों से इनकार किया है।
गुजरात में 18 दिसंबर से पहले चुनाव होने हैं क्योंकि उस दिन गुजरात और हिमाचल प्रदेश के विधान सभा चुनाव के नतीजे आने की चुनाव आयोग पहले ही घोषणा कर चुका है।
नरेंद्र पटेल ने मीडिया से कहा, ''वरुण पटेल ने मेरे लिए बीजेपी के साथ एक करोड़ रुपये की डील की। उन्होंने मुझे 10 लाख रुपये एडवांस दिए। बाकी 90 लाख रुपये वो मुझे कल देने वाले थे, लेकिन वो मुझे पूरा रिजर्व बैंक भी दे दें तो वो मुझे खरीद नहीं पाएंगे।''
नरेंद्र पटेल ने मीडिया के सामने नोटों के बंडल भी पेश किए जो उन्हें कथित तौर पर एडवांस के रूप में मिले थे।
नरेंद्र पटेल ने दावा किया कि उन्होंने एडवांस रुपये इसलिए लिये ताकि मीडिया के सामने वरुण पटेल और बीजेपी को बेनकाब कर सकें।
वरुण पटेल और उनकी साथी रेशमा पटेल रविवार सुबह बीजेपी में शामिल हुए थे। दोनों ही पाटीदार आंदोलन के नेता थे। दोनों नेताओं ने बीजेपी में शामिल होते समय आरोप लगाया कि हार्दिक पटेल कांग्रेस से मिल गये हैं।
नरेंद्र पटेल के आरोपों के बाद वरुण पटेल ने कहा कि ये आरोप कांग्रेस के कहने पर लगाए जा रहे हैं।
हार्दिक पटेल के नेतृत्व में पाटीदारों के लिए आरक्षण की मांग ने उग्र रूप ले लिया था। माना जाता है कि नरेंद्र मोदी की जगह गुजरात की मुख्यमंत्री बनने वाली आनंदीबेन पटेल की कुर्सी जाने में पाटीदार आंदोलन पर काबू नहीं कर पाना बड़ी वजह थी। आनंदीबेन की जगह गुजरात के मौजूदा सीएम विजय रूपानी ने ली थी।









