बाबा रहीम को सजा होने के बाद उस एक लड़की ने मीडिया के सामने आकर बयान दिया जिसकी वजह से बाबा जेल पहुंचा। अपनी पहचान छिपाते हुए लड़की ने बताया कि वह सबसे पहले 2009 में कोर्ट गई थी।
द हिंदू से बात करते हुए लड़की ने बताया कि उस दिन राम रहीम भी कोर्ट में मौजूद था। लेकिन वह ना तो तब डरी थी और ना ही अब डरती है।
फैसले के बाद महिला ने कहा कि आज मुझे न्याय मिल गया। वह महिला अब 40 साल की हो चुकी है। उसने शादी कर ली थी। फिलहाल उसके दो बच्चे भी हैं। महिला सिर्फ 2009 में कोर्ट गई। उसके बाद उसके पिता ने कार्यवाही को देखा।
लड़की के पिता के मुताबिक, डेरे की तरफ से केस वापस लेने का काफी दवाब बनाया गया था। वे लोग मुंह मांगी कीमत देने को भी तैयार थे। सीबीआई ने कुल 18 महिलाओं से बात की थी कि जिन्होंने बाबा से जुड़ी बात बताएं। जिनमें से कुल दो सामने आईं।
महिला का भाई राम रहीम के डेरे में जाता था। लेकिन बहन द्वारा बाबा की सच्चाई बताने पर उसने डेरा छोड़ दिया था। फिर 2002 में भाई का कत्ल हो गया।
कहा जाता है राम रहीम ने ही उसको मरवाया था क्योंकि उसको शक था कि बहन द्वारा लिखा गया पत्र उसने ही हर जगह पोस्ट किया था। मर्डर केस की भी जांच चल रही है। इसपर 16 सितंबर को फैसला आना है।
हालांकि, यह साफ नहीं है कि वह पत्र किसने लिखा था?
महिला 2002 से पुलिस की सुरक्षा में रह रही है। उसी साल पंजाब हरियाणा हाईकोर्ट ने मामले का संज्ञान लिया था। बिना किसी नाम वाला एक पत्र प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी, हाई कोर्ट आदि के नाम पर सामने आया था। वह पत्र राम रहीम के आश्रम की एक साध्वी का था। साध्वी ने राम रहीम पर बलात्कार और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाया था।
भारत में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को गुजरात उच्च न्यायालय के उस आदेश को खारिज कर दिया जिसमें गोधरा दंगों के बाद वर्ष 2002 के दौरान क्षतिग्रस्त हुए धार्मिक स्थलों के पुर्निनर्माण एवं मरम्मत के लिये राज्य सरकार को पैसों के भुगतान करने के लिये कहा गया था।
भारत के प्रधान न्यायाधीश दीपक मिश्रा और न्यायमूर्ति पी सी पंत की एक पीठ ने उच्च न्यायालय के फैसले को चुनौती देने वाली गुजरात सरकार की अपील स्वीकार कर ली और उच्च न्यायालय के उस फैसले को निरस्त कर दिया जिसमें कहा गया था कि दंगों के दौरान क्षतिग्रस्त हुए धार्मिक ढांचों के फिर से निर्माण एवं मरम्मत के लिये गुजरात सरकार को पैसों का भुगतान करना चाहिए।
गुजरात सरकार की तरफ से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने बताया कि हमारी याचिका को मंजूर कर लिया गया है।
इसके अतिरिक्त गुजरात सरकार ने अदालत से यह भी कहा कि राज्य सरकार दंगों के दौरान क्षतिग्रस्त हुए विभिन्न धार्मिक ढांचों, दुकानों एवं घरों की मरम्मत तथा फिर से निर्माण कार्य के लिये अनुग्रह राशि का भुगतान करने की इच्छुक है।
तुषार मेहता ने कहा, ''सरकार की इस योजना को स्वीकार कर लिया गया है।''
सुप्रीम कोर्ट गुजरात उच्च न्यायालय के आदेश के खिलाफ गुजरात सरकार की ओर से दायर याचिका की सुनवाई कर रही थी।
गुजरात उच्च न्यायालय ने अपने आदेश में राज्य सरकार को वर्ष 2002 के गुजरात दंगों में क्षतिग्रस्त हुए करीब 500 से अधिक धार्मिक स्थलों को मुआवजे की राशि का भुगतान करने का निर्देश दिया था।
रामपाल को दो केसों में बरी कर दिया गया है। रामपाल पर दो क्रिमिनल केस थे। पहले केस लोगों को बंधक बनाने का था। दूसरा केस पुलिस पर हमला करने का था।
लेकिन देशद्रोह और हत्या का मुकदमा उस पर चलता रहेगा। सतलोक आश्रम में जब रामपाल को पुलिस पकड़ने आई थी तब वहां पुलिस पर हमला हुआ था। उसके बाद जिन लोगों को बाहर निकाला गया था। उन्होंने रामपाल पर बंधक बनाने का आरोप लगाया था।
विवाद 2006 में शुरू हुआ था। जब रामपाल ने सत्यार्थ प्रकाश (आर्य समाज की किताब) के कुछ हिस्से पर आपत्ति जताई थी। इसकी वजह से रामपाल और आर्य समाज को मानने वाले कुछ लोगों में झड़प हो गई।
आर्य समाज के लोगों ने रोहतक में मौजूद रामपाल के आश्रम को बंद करने की कोशिश की। फिर कथित रूप से रामपाल के समर्थकों ने गोलियां चला दी। जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई और 160 जख्मी हो गए। रामपाल पर इस पूरे मामले की साजिश रचने का आरोप है।
राम रहीम के मामले में तो उसके दोषी घोषित होने के बाद हिंसा हुई, लेकिन रामपाल को तो पकड़ना भी पुलिस के लिए आसान नहीं था।
बात 2014 की है। हत्या मामले में रामपाल को 43 बार कोर्ट में हाजिर होने के लिए कहा जा चुका था, लेकिन वह नहीं आया। इसके बाद उसे गिरफ्तार करने के लिए पुलिस हिसार के बरवाला वाले आश्रम पहुंची थी। वह जगह चंडीगढ़ से 200 किलोमीटर दूर है। वहां बाबा के 15,000 समर्थक मौजूद थे जिन्होंने पुलिस पर हमला कर दिया। पुलिस अंदर नहीं जा पा रही थी।
लगभग दो हफ्ते तक बड़े से गेट से बंद आश्रम के पीछे लोग छिपे रहे। फिर पुलिस ने वहां बिजली और पानी की सप्लाई काट दी। उसके बाद जब खाना खत्म होने लगा तब लोग धीरे-धीरे बाहर आने लगे।
कई लोगों का तो कहना था कि उनको अंदर कैद कर लिया गया था और मानव ढाल की तरह इस्तेमाल किया गया था। पूरी घटना में 200 लोग जख्मी हुए थे। छह लोग मारे गए थे। जिसमें पांच महिलाएं और एक बच्चा भी शामिल था। रामपाल के समर्थकों ने अंदर से पुलिस पर गोलियां, पत्थर सब चलाए थे। पेट्रोल बम और एसिड बम भी फेंके गए थे।
रामपाल फिलहाल जेल में है। उसे 2014 में गिरफ्तार किया गया था। 67 साल के रामपाल पर मर्डर का भी एक केस है। खट्टर सरकार आने के बाद पहली बार राज्य में ऐसी घटना हुई थी। इस पर बीजेपी की काफी किरकिरी हुई थी।
फिलहाल रामपाल जेल में ही रहेगा क्योंकि उस पर बाकी केस अभी चल रहे हैं। रामपाल पर फैसला आने के बाद उसके वकील ने इसे सच्चाई की जीत बताया।
भारत में सुप्रीम कोर्ट द्वारा एक बार में तीन तलाक या तलाक-ए-बिद्दत को असंवैधानिक घोषित किए जाने के बाद उत्तर प्रदेश के मदरसों में मुसलमानों को वाजिब तरीके से तलाक देना सिखाने की तैयारी की जा रही है।
बरेलवी सुन्नी मुसलमानों के संगठन जमात रजा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय जनरल सेक्रेटरी मौलाना शाहबुद्दीन रजवी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा, ''सर्वोच्च अदालत के तीन तलाक पर फैसले के बाद हम मदरसों से जुड़े मौलानाओं की एक बैठक कर रहे हैं और उन्हें छात्रों, जुम्मे के नमाज और अन्य धार्मिक जलसों के माध्यम से लोगों को तलाक का सही तरीका बताने की अपील की है।''
रजवी ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि ये कवायद लोगों में शरिया कानून के प्रति जागरुकता बढ़ाने के लिए की जा रही है ताकि एक बार में तीन तलाक पर रोक लगायी जा सके।
रजवी ने कहा कि वो संगठन मुस्लिम महिलाओं से अपील करेगा कि वो अपने निजी मामले लेकर पुलिस या अदालत में न जाएं।
आगरा में एक मदरसा चलाने वाले मुफ्ती मुदस्सर खान ने टाइम्स ऑफ इंडिया को बताया कि सही तरीके से तलाक देने पर पूरा एक अध्याय है और वो छात्रों से दूसरों को भी इस बारे में शिक्षित करने की अपील करेंगे।
रिपोर्ट के अनुसार, अलीगढ़ में करीब 200 और आगरा में करीब 150 मदरसे हैं।
अलीगढ़ स्थित अलबरकत इस्लामिक रिसर्च एंड ट्रेनिंग इंस्टिट्यूट के मौलाना नोमान अहमद अजहरी ने टाइम्स ऑफ इंडिया से कहा कि बहुत से लोगों को शरिया के बारे में सही मालूमात नहीं है और उसका गलत तरीके से पालन करते हैं।
अजहरी ने भी अखबार से कहा कि उनका संगठन छात्रों को इस बारे में जानकारी देता है और उन्हें दूसरों को सही तरीका अपनाने के लिए प्रेरित करने को कहता है।
22 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ ने एक बार में तीन तलाक देने की परंपरा को असंवैधानिक घोषित करते हुए केंद्र सरकार से छह महीने में इस बाबत कानून बनाने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट की इस पीठ की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश जे एस खेहर कर रहे थे। इस पीठ में शामिल पाँच जज पाँच अलग-अलग धर्मों से जुड़े हुए हैं।
इस पीठ में चीफ जस्टिस के अलावा न्यायमूर्ति कुरियन जोसेफ, न्यायमूर्ति आर एफ नरीमन, न्यायमूर्ति यू यू ललित और न्यायमूर्ति एस अब्दुल नजीर शामिल थे।
इस पीठ ने 3-2 के बहुमत से एक बार में तीन तलाक के खिलाफ फैसला दिया।
भारत में सर्वोच्च न्यायालय के तीन तलाक पर दिए गए फैसले का बिहार के राजनीतिक दलों ने स्वागत किया है। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने भी तीन तलाक पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है।
राष्ट्रीय जनता दल (राजद) के अध्यक्ष लालू प्रसाद की पत्नी और पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने सर्वोच्च न्यायालय के तीन तलाक के फैसला का स्वागत करते हुए कहा, ''अदालत ने तीन तलाक को खारिज कर दिया है। अब संसद में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) को कानून बनाना है। अब देखना होगा कि मुस्लिम समुदाय के भाई-बहनों के लिए वे क्या सोचते हैं? अब तो गेंद प्रधानमंत्री व केंद्र सरकार के पाले में है। देखते हैं, ये कैसा कानून बनाते हैं।''
इधर, बिहार के उपमुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने भी इस फैसले को ऐतिहासिक करार देते हुए कहा कि यह फैसला करोड़ों मुस्लिम महिलाओं के हक में है। उन्होंने कहा, ''यह फैसला स्वागतयोग्य है। तमाम राजनीतिक दलों को इसे सकारात्मक रूप में लेते हुए इसका स्वागत करना चाहिए और उस पर किसी तरह की राजनीति नहीं करनी चाहिए।'' उन्होंने कहा कि इस फैसले से महिलाएं सशक्त होंगी।
इधर, जनता दल (युनाइटेड) ने भी सर्वोच्च न्यायालय के फैसले का स्वागत किया है। जनता दल (यू) के महासचिव क़े सी़ त्यागी ने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय का फैसला स्वागतयोग्य है। अब केंद्र सरकार को सभी धार्मिक संगठनों, सभी राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर ऐसा कानून बनाना चाहिए, जो किसी को थोपा हुआ जैसा न लगे।''
इससे पहले सर्वोच्च न्यायालय ने मंगलवार को ऐतिहासिक फैसला देते हुए तीन तलाक को असंवैधानिक व मनमाना करार देते हुए कहा कि यह इस्लाम का हिस्सा नहीं है।
पांच न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने दो के मुकाबले तीन मतों से दिए अपने फैसले में कहा कि तीन तलाक को संवैधानिक संरक्षण प्राप्त नहीं है।
न्यायालय ने अगले छह माह के लिए तीन तलाक पर रोक लगा दी। साथ ही विभिन्न राजनीतिक दलों से अपील की कि वे अपने मतभेदों को भूलकर इससे संबंधित कानून बनाएं।
भारत में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रिपल तलाक के मुद्दे पर अपना फैसला सुना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताया। साथ ही इसपर छह महीने के भीतर सरकार को कानून बनाना होगा।
इस मामले पर पांच जजों की बेंच ने सुनवाई की। दो जज तीन तलाक के पक्ष में थे, वहीं दो इसके खिलाफ। बहुमत के हिसाब से तीन जजों के फैसले को बेंच का फैसला माना गया।
बेंच में जस्टिस जे एस खेहर, जस्टिस कुरिएन जोसेफ, आर एफ नरीमन, यू यू ललित और एस अब्दुल नज़ीर शामिल थे। इस केस की सुनवाई 11 मई को शुरु हुई थी। जजों ने इस केस में 18 मई को अपना फैसला सुरक्षित रख दिया था।
इससे पहले ही सुनवाई के दौरान कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया था कि यह एक विचार करने का मुद्दा है कि मुसलमानों में ट्रिपल तलाक जानबूझकर किया जाने वाला मौलिक अधिकार का अभ्यास है, न कि बहुविवाह बनाए जाने वाले अभ्यास का।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्वीट कर इस फैसले का स्वागत किया।
शिया मौलवी मौलाना यासूब अब्बास ने कहा कि शिया पर्सनल लॉ बोर्ड 2007 से तीन तलाक के खिलाफ कानूनी लड़ाई लड़ रहा है।
केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी ने भी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुशी जताई।
फैसला आने के बाद मुस्लिम महिलाएं काफी खुश थीं। जिन महिलाओं ने इसके खिलाफ याचिका डाली हुई थी उन्होंने फैसला का स्वागत किया।
जस्टिस नरीमन, ललित और कुरियन ने ट्रिपल तलाक को असंवैधानिक बताया। तीनों ने मिलकर जस्टिस नजीर और चीफ जस्टिस खेहर की बात पर अपनी असहमति जताई।
संसद को छह महीने के अंदर इसके लिए कानून बनाना होगा।
जस्टिस खेहर ने कहा है कि तीन तलाक की प्रक्रिया पर छह महीने तक रोक रहेगी। इस वक्त में सरकार को नया कानून बनाना होगा।
जस्टिस खेहर ने अपने फैसले में अपहोल्ड शब्द का इस्तेमाल किया है। उन्होंने कहा है कि तीन तलाक बना रहेगा।
कांग्रेस नेता सलमान खुर्शीद कोर्ट के मददगार की भूमिका में हैं।
यह मुद्दा 16 अक्टूबर, 2015 में शुरु हुआ था जब सुप्रीम कोर्ट की बेंच द्वारा सी जे आई से कहा गया था कि एक बेंच को सेट किया जाए जो कि यह जांच कर सके कि तलाक के नाम पर मुस्लिम महिलाओं के साथ भेदभाव किया जा रहा है।
बेंच ने यह बात उस समय कही थी जब वे हिंदू उत्तराधिकार से जुड़े एक केस की सुनवाई कर रहा था। इसके बाद 5 फरवरी, 2016 में सुप्रीम कोर्ट ने अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से कहा था कि वे उन याचिकाओं में अपना सहयोग करें जिनमें ट्रिपल तलाक, निकाह हलाला और बहुविवाह जैसी प्रथाओं को चुनौती दी गई है।
इसके बाद इस मामले पर कई सुनवाई हुईं जिनमें ट्रिपल तलाक जैसे मुद्दों को लेकर कोर्ट ने भी गंभीरता दिखाई।
केंद्र सरकार ने भी ट्रिपल तलाक का कड़ा विरोध करते हुए कोर्ट से कहा कि ऐसी प्रथाओं पर एक बार जमीनी स्तर पर विचार करने की आवश्यकता है।
16 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने इन मुद्दों की सुनवाई के लिए पांच जजों की बेंच का गठन किया था।
सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की संविधान पीठ तीन तलाक पर मंगलवार को अपना फैसला सुना सकती है। इस खंड पीठ में सभी धर्मों के जस्टिस शामिल हैं जिनमें चीफ जस्टिस जे एस खेहर (सिख), जस्टिस कुरियन जोसफ (क्रिश्चिएन), जस्टिस रोहिंग्टन एफ नरीमन (पारसी), जस्टिस यू यू ललित (हिंदू) और जस्टिस अब्दुल नजीर (मुस्लिम) शामिल हैं।
सुप्रीम कोर्ट ये तय करेगा कि तीन तलाक महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों का हनन करता है या नहीं, यह कानूनी वैध है या नहीं और तीन तलाक इस्लाम का मूल हिस्सा है या नहीं?
इस मामले पर शीर्ष अदालत में 11 से 18 मई तक सुनवाई चली थी और फैसले को सुरक्षित रख लिया गया था।
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था कि ऐसे भी संगठन हैं, जो कहते हैं कि तीन तलाक वैध है, लेकिन मुस्लिम समुदाय में शादी तोड़ने के लिए यह सबसे खराब तरीका है और यह अनवांटेड है।
कोर्ट ने सवाल किया कि क्या जो धर्म के मुताबिक ही घिनौना है, वो कानून के तहत वैध ठहराया जा सकता है? जो ईश्वर की नजर में पाप है, क्या उसे शरियत में लिया जा सकता है।
मार्च, 2016 में उतराखंड की शायरा बानो नामक महिला ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करके तीन तलाक, हलाला निकाह और बहु-विवाह की व्यवस्था को असंवैधानिक घोषित किए जाने की मांग की थी।
शायरा बानो ने मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरीयत) एप्लीकेशन कानून 1937 की धारा 2 की संवैधानिकता को चुनौती दी है।
कोर्ट में दाखिल याचिका में शायरा बानो ने कहा है कि मुस्लिम महिलाओं के हाथ बंधे होते हैं और उन पर तलाक की तलवार लटकती रहती है। वहीं पति के पास निर्विवाद रूप से अधिकार होते हैं। यह भेदभाव और असमानता एकतरफा तीन बार तलाक के तौर पर सामने आती है।
साल 2018 में होने जा रहे कर्नाटक विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस के लिए अच्छी खबर है। दरअसल यहां चुनाव से पहले कराए गए सर्वे की माने तो कांग्रेस राज्य में एक बार फिर सरकार बनाने की स्थिति में नजर आ रही है।
सर्वे में बीजेपी के दूसरे स्थान पर रहने की बात कही गई है। सर्वे 'सी फोर' ने कराया है। जिसमें 19 जुलाई से 10 अगस्त (2017) के बीच राज्यभर के लोगों की राय ली गई।
सर्वे के अनुसार, कांग्रेस इस बार 120-132 सीटें जीत सकती है। जो सूबे में एक बार फिर सरकार बनाने के लिए पर्याप्त हैं।
हालांकि सर्वे में बीजेपी को पिछले चुनाव की तुलना में इस बार अधिक सीटें मिलने की बात कही गई है। सर्वे की माने तो बीजेपी को 60-72 सीटें जीत सकती है। जबकि जनता दल (एस) को 24-30 सीटें मिलने की बात कही गई है।
सर्वे के अनुसार, कांग्रेस को साल 2018 के विधानसभा चुनाव में संभावित 43 फीसदी वोट मिल सकते हैं, जबकि बीजेपी को 32 फीसदी वोट मिलने की बात कही गई है। वहीं जनता दल (एस) को 17 फीसदी वोट मिल सकते हैं।
इंडिया टुडे के अनुसार, सी फोर का दावा है कि उसने 165 विधानसभा क्षेत्रों में 24,676 लोगों से बात की।
सर्वे में मुख्यमंत्री सिद्धारमैया की 'अन्ना भाग्य' योजना को सबसे ज्यादा पसंद किया गया है। हालांकि राज्य में पीने के पानी की कमी, खराब सड़कें, बेरोजगारी आदि मुद्दों पर लोगों ने सवाल उठाए हैं।
कर्नाटक कांग्रेस चीफ ने कहा, ''पार्टी आंतरिक सर्वे कर रही है, जहां लोगों से सरकार की कार्यशैली को लेकर सवाल पूछे जाएंगे। हालांकि हम जल्द ही एक प्रेस कॉन्फ्रेस करने वाले हैं जहां सूबे के लोगों को सरकार की उपलब्धियों के बारे में बताया जाएगा।''
मध्य प्रदेश के व्यापम घोटाले की तर्ज पर ही बिहार के एनजीओ सृजन घोटाले में आरोपी की भी मौत होनी शुरू हो गई है। कल्याण विभाग के गिरफ्तार नाजिर महेश मंडल की रविवार (20 अगस्त) की आधी रात जेल में ही मौत हो गई। भागलपुर के एसएसपी मनोज कुमार ने इसकी पुष्टि की है।
फिलहाल उसकी मौत की क्या वजह है? इसका खुलासा नहीं हो सका है। लिहाजा, तरह-तरह की शंका जाहिर की जा रही है। सृजन घोटाले में अब तक 18 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इनमें से 11 सरकारी अधिकारी और कर्मचारी हैं, जबकि 4 लोग सृजन महिला विकास सहयोग समिति लिमिटेड के और 3 बैंककर्मी हैं।
पुलिस की एसआईटी ने जिस दिन आरोपी महेश मंडल को उसके गांव के आलीशान एयरकंडीशन्ड कोठी से गिरफ्तार किया था, उसी वक्त से उसकी तबियत बिगड़ने लगी थी।
हालांकि, पुलिस ने एक निजी क्लिनिक में दूसरे ही दिन पुलिस सुरक्षा में महेश मंडल का डायलिसिस कराया था। उसके बाद पुलिस ने दो दिनों तक गहन पूछताछ की थी।
सूत्र बताते हैं कि मंडल के बयान के आधार पर ही कल्याण अधिकारी अरुण कुमार गुप्ता को एसआईटी ने दबोचा था। बाद में इन दोनों ने पुलिस और आर्थिक अपराध शाखा की टीम को कई बड़े-बड़े अधिकारियों और हाई प्रोफाइल लोगों के नाम बताए थे।
हालांकि, महेश मंडल को जेल भेजते वक्त उसकी हालत ठीक थी। एसएसपी कहते हैं कि उन्हें पहले से गंभीर बीमारी थी और साल में तीन बार उन्हें डायलिसिस की जरूरत पड़ती थी। जेल में आधी रात को अचानक उनकी तबियत ज्यादा बिगड़ी और मौत हो गई।
हो सकता है कि मंडल की मौत बीमारी की वजह से हुई हो, मगर पुलिस की बात को लोग रची हुई कहानी बता रहे हैं। लोगों को पुलिस की दलील पर यकीन नहीं हो रहा। महेश मंडल के परिजन मानते हैं कि वे कई गंभीर रोग से पीड़ित थे। बावजूद इसके उनका शक पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही दूर हो सकेगा।
बता दें कि सृजन महिला विकास सहयोग समिति ने सरकारी विभाग और दो बैंकों के कर्मचारियों-अधिकारियों की सांठगांठ से फर्जीवाड़ा कर 884 करोड़ रुपए का चूना सरकारी खाते को लगाया है। घोटाले की इस रकम में और इजाफा होने से इनकार नहीं किया जा सकता है क्योंकि अभी दूसरे विभागों में भी पटना से आई वित्त विभाग की टीम रात-दिन ऑडिट करने में जुटी है। एनजीओ सृजन के तार झारखंड के रांची से भी जुड़े हैं। सृजन की संस्थापक मनोरमा देवी और उसकी पुत्रवधू प्रिया कुमार का मायका रांची ही है।
फिलहाल प्रिया ही सृजन की सचिव हैं और फरार हैं। उसके पिता कांग्रेसी नेता हैं, इसलिए कांग्रेस से भी इनके मधुर रिश्ते रहे हैं। रांची के एक बड़े कांग्रेसी नेता जो केंद्र में मंत्री भी रहे हैं, वे भी सृजन के जलसे में शिरकत करते रहे हैं।
मनोरमा देवी के पति अवधेश कुमार रांची में वैज्ञानिक की नौकरी करते थे। वे भागलपुर के गोसाई गांव के थे। इनके निधन के बाद मनोरमा अपने बच्चों के साथ भागलपुर आ गई थी और सबौर में एक किराए के मकान में रहने लगी। यह 1992-1993 की बात है।
बताते हैं कि इसी दौरान मनोरमा ने भागलपुर की एक फर्म से दो सिलाई मशीन किश्तों पर लिया था। इस फर्म के सेल्समैन एनवी राजू थे। बताते हैं कि आज सृजन की कृपा से एनवी राजू की हैसियत करोड़ों की है। टीवी और फ्रीज के कई शोरूम हैं।
इसी तरह विपिन शर्मा का नाम सृजन के दुर्जन की सूची में मिला है। इनकी भी कहानी रंक से राजा की है। सृजन से फायदा लेने वालों की लंबी फेहरिस्त है। सृजन की सचिव प्रिया कुमार और उसके पति अमित कुमार फरार हैं। पुलिस को उनके मोबाइल का लोकेशन रांची में मिला है। एसएसपी के मुताबिक, इनको तलाशने पुलिस टीम रांची गई है। इनकी गिरफ्तारी के बाद बड़े खुलासे होने की उम्मीद है।
2008 में भागलपुर में पदस्थापित जिलाधिकारी विपीन कुमार ने सरकारी धन का सृजन के खातों में हस्तान्तरण देखकर हैरत जताई थी और फौरन इस काम को रोकने की हिदायत दी थी। मगर उनके तबादले के बाद यह खेल फिर से शुरू हो गया। बल्कि यों कहें कि तेजी पकड़ा। विपीन कुमार फिलहाल दिल्ली में बिहार भवन के आयुक्त हैं।
बहरहाल, नाजिर महेश मंडल की मौत पर कई तरह की चर्चा है। व्यापम की तर्ज पर कहीं मौतों / हत्याओं का सिलसिला सृजन में भी न हो। ऐसे खतरे का अंदेशा महेश मंडल की मौत से लगाया जा रहा है।
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में शनिवार (19 अगस्त) की शाम एक बड़ा ट्रेन हादसा हुआ है।
कलिंगा-उत्कल एक्सप्रेस मुजफ्फरनगर के खतौली के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गई।
शाम करीब छह बजे ट्रेन के 14 डिब्बे पटरी से उतर गए । इसके अलावा कई डिब्बे दूसरे डिब्बों के ऊपर भी चढ़ गए हैं।
ट्रेन पुरी से हरिद्वार जा रही थी। हादसे में अब तक 23 लोगों के मरने की खबर है, जबकि 100 से ज्यादा यात्रियों के गंभीर रूप से घायल होने की खबर है।
ट्रेन को 9 बजे हरिद्वार पहुंचना था। अभी तक रेलवे ने इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी है कि दुर्घटना कैसे हुई।
हालांकि दुर्घटना में आतंकी हमले की भी जांच की जा रही है। वहीं राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया गया है।
फिलहाल कोशिश की जा रही है कि घायलों की मदद की जा सके। घायलों को हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है। घायलों की संख्या में और इजाफा हो सकता है।
रेलवे ने ये हेल्पलाइन नंबर जारी किया है – 9760534054/5101









