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राहुल गांधी का वसुंधरा राजे पर तंज: हमलोग 21वीं सदी के 2017 में जी रहे हैं, 1817 में नहीं

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने विवादास्पद अध्यादेश पर राजस्थान की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे पर तंज कसा है। उन्होंने सोशल मीडिया ट्विटर पर लिखा है कि मैडम चीफ मिनिस्टर, यह 2017 है, साल 1817 नहीं।

इंडियन एक्सप्रेस की खबर शेयर करते हुए राहुल गांधी ने लिखा है, ''मैडम चीफ मिनिस्टर, विनम्रतापूर्वक कहना है कि हमलोग 21वीं सदी के 2017 में जी रहे हैं, 1817 में नहीं।''

बता दें राजस्थान सरकार सोमवार (23 अक्टूबर) से शुरू होने जा रहे विधान सभा सत्र में जजों, मजिस्ट्रेटों और अन्य सरकारी अधिकारियों, सेवकों को सुरक्षा कवच प्रदान करने वाला बिल पेश करेगी।

यह बिल हाल ही में लाए गए अध्यादेश का स्थान लेगी। इसके मुताबिक, ड्यूटी के दौरान उठाये गये किसी भी कदम के खिलाफ राज्य के किसी भी कार्यरत जज, मजिस्ट्रेट या सरकारी अधिकारियों के खिलाफ कोई भी शिकायत सरकार की इजाजत के बगैर दर्ज नहीं की जा सकेगी।

ट्विटर पर इसके खिलाफ जबर्दस्त गुस्सा देखने को मिल रहा है।

कांग्रेस के अलावा आम आदमी पार्टी समेत कई विपक्षी दलों का आरोप है कि राज्य सरकार का ये बिल भ्रष्ट अधिकारियों को कानूनी संरक्षण देने की सरकारी साजिश है।

ट्विटर पर वसुंधरा राजे के खिलाफ तुगलकी महारानी ट्रेंड कर रहा है।

सोशल मीडिया राजस्थान सरकार के इस प्रस्तावित कानून को फ्री स्पीच का भी उल्लंघन भी बता रहा है।

जीएसटी दरों में आमूल-चूल बदलाव की जरूरत: राजस्‍व सचिव

भारत के राजस्व सचिव हसमुख अधिया ने कहा कि जीएसटी लागू किए जाने के बाद अब लघु और मझौले उद्योगों के बोझ को कम करने के लिए कर दरों में पूरी तरह बदलाव करने की जरूरत है।

न्यूज़ एजेंसी 'भाषा' को दिए साक्षात्कार में राजस्व सचिव ने कहा कि जीएसटी प्रणाली को स्ठिर होने में करीब एक साल लगेगा। जीएसटी में एक दर्जन से अधिक केंद्रीय और राज्य लेवी जैसे उत्पाद शुल्क, सेवा कर और वैट समाहित कर दिए गए हैं।

जीएसटी लागू हुए करीब चार महीने हो गए हैं। इस नई अप्रत्यक्ष कर प्रणाली से कुछ प्रारंभिक परेशानियां और अनुपालन से जुड़े मुद्दे उभरे हैं। जीएसटी परिषद ने कई मुद्दो का समाधान निकाला भी है। जीएसटी परिषद इन प्रणाली में सर्वोच्च निर्णायक निकाय है।

जीएसटी परिषद ने लघु और मझौले कारोबारों को करों का भुगतान करने और जीएसटी दाखिल करने को आसान बनाने के लिए इसके कई पहलूओं में हल्के बदलाव किए हैं।

इसके अलावा निर्यातकों के रिफंड प्रक्रिया को भी आसान बनाया है तथा 100 से अधिक वस्तुओं पर जीसटी की दरों को तर्कसंगत बनाया है।

अधिया ने कहा, ''इसमें आमूल-चूल बदलाव की जरुरत है ... हो सकता है कि एक ही अध्याय में कुछ वस्तुएं बांट दी गई हों। वस्तुओं के अध्याय वार वस्तुओं की सूची संगत बनाने की जरूरत है। और जहां दिखे कि यह लघु और मझौले उद्योगों तथा आम आदमी पर बोझ ज्यादा पड़ रहा है, वहां हम उसे कम करते हैं तो अनुपालन सुधरेगा।''

हालांकि, उन्होंने कहा कि बदलाव के लिए फिटमेंट कमेटी को गणना करने की जरूरत होगी, जो यह तय करेगा कि किस वस्तु की दर को तर्क संगत बनाने की जरूरत है।

जीएसटी व्यवस्था पहली जुलाई को लागू की गई।

अधिया ने कहा कि समिति अपने सुझावों को जीएसटी परिषद के सामने जल्द रखेगी। जीएसटी परिषद की 23वीं बैठक भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली के नेतृत्व में गुवाहाटी में 10 नवंबर को होनी है।

उन्होंने कहा कि हम जितनी जल्दी हो सके, इसे करने के लिए उत्सुक हैं, लेकिन यह इस बात पर निर्भर करता है कि फिटमेंट कमेटी इस पर काम करने के लिए कितना समय लेती है।

अधिया से जब पूछा गया कि जीएसटी को स्थिर होने में कितना समय लगेगा तो उन्होंने कहा कि इसमें एक साल लगेगा, क्योंकि यह सभी के लिए नई व्यवस्था है। जीएसटी में कर प्रणाली में पूरा बदलाव होना है इसलिए एक साल की आवश्यकता है।

गुजरात में बीजेपी के खिलाफ राहुल गांधी को मिल रहा है व्यापक जन समर्थन

गुजरात के ठाकुर समुदाय के युवा नेता अल्पेश ठाकुर विधान सभा चुनाव से पहले कांग्रेस में शामिल होने जा रहे हैं। अल्पेश ठाकोर ने शनिवार (21 अक्टूबर) को गुजरात कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं से मुलाकात के बाद ये घोषणा की।

23 अक्टूबर को अहमदाबाद में एक रैली में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की मौजूदगी में अल्पेश ठाकुर कांग्रेस में शामिल होंगे। अल्पेश ठाकुर ओबीसी एकता मंच के नेता है।

सूत्रों के मुताबिक, अल्पेश ठाकोर बनासकांठा जिले के वाव सीट से कांग्रेस के टिकट पर चुनाव लड़ सकते हैं।

बता दें कि गुजरात विधानसभा चुनाव में ओबीसी वोटर्स का बड़ा रोल है। गुजरात में ओबीसी मतदाताओं की संख्या 54 फीसदी है, लिहाजा हर पार्टी इस समुदाय को अपने पक्ष में करना चाहती है।

अल्पेश ठाकोर ने दावा किया है कि 23 अक्टूबर की रैली में 5 लाख लोग जुटेंगे।

इससे पहले कांग्रेस ने सत्तारूढ़ बीजेपी को हराने के लिए आज पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल, ठाकुर समुदाय के नेता अल्पेश ठाकुर और दलित नेता जिग्नेश मेवानी को पार्टी के साथ हाथ मिलाने के लिए आमंत्रित किया था।

इन नेताओं के अलावा कांग्रेस ने शरद पवार के नेतृत्व वाली राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी और गुजरात से जनता दल यूनाइटेड के एकमात्र विधायक छोटू भाई वसावा को साथ लाने के लिए चुनावपूर्व गठबंधन का संकेत दिया है।

संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए गुजरात कांग्रेस प्रमुख भरत सिंह सोलंकी ने भरोसा जताया कि इन नेताओं के 'समर्थन और आशीर्वाद' से पार्टी कुल 182 सीटों में से 125 से ज्यादा सीटें आसानी से जीत जाएगी।

सोलंकी ने संवाददाताओं से कहा, ''हालांकि बीजेपी चुनाव जीतने के लिए पूरी कोशिश कर रही है, लेकिन गांधीनगर के लिए कांग्रेस के विजय मार्च को रोकने में उसे सफलता नहीं मिलेगी।''

उन्होंने कहा, ''जिस कारण के लिए हार्दिक पटेल लड़ रहे हैं, हम उसका सम्मान और अनुमोदन करते हैं। मैं हार्दिक से चुनावों के दौरान कांग्रेस का समर्थन करने की अपील करता हूं। अगर वह भविष्य में चुनाव लड़ना चाहें तो हम उन्हें टिकट देने के लिए भी तैयार हैं।''

उन्होंने कहा, ''इसी तरह हमने जिग्नेश मेवानी को भी कांग्रेस के साथ हाथ मिलाने के लिए आमंत्रित किया है। मैंने छोटू वसावा को भी कांग्रेस का समर्थन करने के लिए आमंत्रित किया है जिन्होंने राज्य सभा चुनावों में हमारी मदद की थी।''

उन्होंने कहा कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने राज्यसभा चुनावों में कांग्रेस को धोखा दिया था, लेकिन वो गुजरात से बीजेपी को उखाड़ फेंकना चाहते हैं तो कांग्रेस के दरवाजे अभी भी उनके लिए खुले है।

आधार को बैंक खातों से लिंक करने का कोई न‍िर्देश आरबीआई ने जारी नहीं क‍िया

सार्वजनिक और निजी क्षेत्र के सभी बैंक खाताधारकों को अपने अकाउंट से आधार लिंक कराने को कह रहे हैं।

इस बीच, सूचना का अधिकार (आरटीआई) के जवाब में भारत के केंद्रीय बैंक और सभी बैंकों को नियंत्रित करने वाले भारतीय रिजर्व बैंक ने इस तरह के किसी भी आदेश-निर्देश से इनकार किया है।

पत्रकार योगेश सापकले द्वारा दाखिल आरटीआई अप्लीकेशन के जवाब में रिजर्व बैंक ने कहा है कि उसकी तरफ से इस तरह का कोई भी आदेश बैंकों को जारी नहीं किया गया है।

रिजर्व बैंक ने साफ किया है कि इस तरह का निर्णय केंद्र सरकार का है।

योगेश ने आरबीआई से पूछा था कि बैंक खातों से आधार लिंक कराने वाले नोटिफिकेशन/निर्देश या सर्कुलर उपलब्ध कराया जाय जिसके तहत खाताधारकों को ऐसा करने को कहा जा रहा है।

इसके जवाब में आरबीआई ने लिखा है, ''1 जून 2017 को केंद्र सरकार ने मनीलॉन्ड्रिंग रोकथाम ( रिकॉर्ड्स का रख रखाव), दूसरा संशोधन नियम 2017 गजट में जीएसआर 538 (ई) में प्रकाशित किया था जिसके तहत आधार को (उन व्यक्तियों के लिए जो कि बैंक खाते खोलने के लिए) स्थायी नंबर (पैन) बनाने और बैंक खाता खोलने के लिए अनिवार्य किया है। इस संबंध में यह ध्यान देने योग्य बात है कि आरबीआई ने इससे संबंधित कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किया है।''

आवेदनकर्ता ने दूसरे सवाल में आरबीआई से उस फाइल नोटिंग्स की मांग की थी जिसके तहत आधार को बैंक खातों से लिंक करने को कहा गया था।

इसके जवाब में आरबीआई ने साफ किया है कि रिजर्व बैंक ने आधार को बैंक खातों से लिंक करने का कोई निर्देश जारी नहीं किया है, इसलिए आरबीआई इस स्थिति में नहीं है कि इस तरह की किसी फाइल नोटिंग्स की कॉपी उपलब्ध कराई जाय।

एक अन्य सवाल के जवाब में आरबीआई ने कहा है कि उसकी तरफ से सुप्रीम कोर्ट में इस तरह की कोई याचिका दायर नहीं की गई है।

चुनाव आयोग ने मोदी को ही गुजरात चुनाव की तारीखों का ऐलान करने के लिए अधिकृत कर दिया है: पी चिदंबरम

भारत के पूर्व केंद्रीय वित्त मंत्री और गृह मंत्री पी चिदंबरम ने गुजरात में चुनाव की तारीखों का ऐलान नहीं किए जाने पर चुनाव आयोग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तंज कसा है।

उन्होंने सोशल मीडिया ट्विटर पर पोस्ट किया है कि चुनाव आयोग ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ही गुजरात चुनाव की तारीखों का ऐलान करने के लिए अधिकृत कर दिया है और कहा है अपनी आखिरी रैली में इसकी घोषणा कर लीजिएगा और हमें भी बता दीजियेगा।

कांग्रेस नेता चिदंबरम ने दूसरे ट्वीट में लिखा है कि चुनाव आयोग को इस बात के लिए भी याद किया जाएगा कि उसकी विस्तारित छुट्टियों ने गुजरात सरकार को कई मुफ्त की चीजें देने और लोकलुभावन घोषणाएं करने का वक्त दे दिया है।

चिदंबरम के इस ट्वीट पर गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रुपाणी ने कहा कि पूरी कांग्रेस पार्टी और पी चिदंबरम गुजरात चुनावों को लेकर डरे हुए हैं, इसलिए इस तरह की भाषा बोल रहे हैं। इनके अलावा कई यूजर्स ने भी मिलीजुली प्रतिक्रिया दी है।

एक यूजर ने लिखा है कि कांग्रेस जीतकर आएगी तो एक साल में ही गुजरात को बर्बाद कर देगी। इस पर दूसरे यूजर ने लिखा है, ''मोदी जी गुजरात को बर्बाद करने के लिए अच्छा काम कर रहे हैं। कांग्रेस को इस पिक्चर में क्यों शामिल कर रहे हो। सुषमा जी भी देश का अच्छा विकास कर रही हैं।'' कुछ यूजर्स ने टिप्पणी की है कि चुनाव आयोग भी रिजर्व बैंक की राह पर चल रहा है।

बता दें कि गुजरात विधानसभा चुनाव से पहले राज्य सरकार ने शिक्षकों, नगर निकायों के कर्मियों एवं अन्य के लिए कई सौगात की घोषणा की है। सरकार ने कहा कि सरकारी सहायता प्राप्त माध्यमिक एवं उच्चतर माध्यमिक स्कूलों के 'तय वेतन वाले' शिक्षकों के वेतन में अच्छी-खासी बढ़ोत्तरी की जाएगी। राज्य के 105 नगर निकायों के कर्मियों को सातवें वेतन आयोग के प्रावधानों के मुताबिक वेतन दिया जाएगा। गुजरात सरकार ने गंभीर बीमारियों के लिए दो लाख रुपए तक के नि:शुल्क मेडिकल इलाज के लिए चलाई जा रही 'मा-वात्सल्य' योजना के लिए वार्षिक आय की सीमा को डेढ़ लाख से बढ़ाकर ढाई लाख रुपए कर दिया है।

अगर पार्टी मेघालय में सरकार बनाती है तो बीफ बैन नहीं किया जाएगा: बीजेपी

भारतीय जनता पार्टी ने मेघालय के मतदाताओं से वादा किया है कि अगर पार्टी राज्य में सरकार बनाती है तो बीफ बैन नहीं किया जाएगा।

मेघालय बीजेपी ने कांग्रेस के इस दावे को भी गलत करार दिया कि केन्द्र देश भर में जानवरों को काटने पर रोक लगा दी है।

मेघालय में अगले साल विधानसभा के चुनाव होने हैं। मेघायल बीजेपी के उपाध्यक्ष जे ए लिंगदोह ने कहा, ''केन्द्र द्वारा बनाए गये कानून से किसी भी स्तर पर गायों को काटने पर रोक नहीं है।''

लिंगदोह के मुताबिक, सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को भारत से बाहर जानवरों के स्मगलिंग पर रोक लगाने के लिए दिशा निर्देश बनाने को कहा है।

उन्होंने कहा कि इस बारे में केन्द्र की ओर से जारी अधिसूचना का मकसद जानवरों के खरीद-बिक्री बाजार को नियंत्रित करना है।

जे ए लिंगदोह के मुताबिक, गायों के काटने पर प्रतिबंध पूर्णरूप से नहीं है।

इंडिया टाइम्स डॉट काम की रिपोर्ट के मुताबिक, लिंगदोह ने कहा, ''कानून ऐसा नहीं कहता है , यदि ऐसा कहता भी है तो इसे हाई कोर्ट या सुप्रीम कोर्ट द्वारा अवैध करार दे दिया जाएगा।''

बता दें कि केन्द्र सरकार ने गौमांस पर रोक लगाने के लिए बाजार से गौवध के लिए गाय खरीदने पर रोक लगा दी है। इस नये नियम के दायरे में गाय के आलावा गोवंश के दूसरे पशु भी हैं।

लिंगदोह ने इसी साल मई में केन्द्र की मोदी सरकार के इस नियम का विरोध किया था और कहा था कि ''हम पशुओं की खरीद-फरोख्त और उनके वध को लेकर जारी किए गए नए आदेश को स्वीकार नहीं कर सकते। हम अपनी खाने-पीने की आदतों के खिलाफ नहीं जा सकते हैं।''

लिंगदोह के मुताबिक, केन्द्र के इस कानून की गलत व्याख्या की गई है। उन्होंने बताया कि राज्य के जनजातियों की खान-पान की आदतों पर किसी भी हालत में प्रहार नहीं किया जाएगा।

बता दें कि मेघालय की आबादी लगभग 32 लाख है। यहां की जनसंख्या का ज्यादा हिस्सा क्रिश्चयन है। राज्य की दो मुख्य जनजातियां खासी और गारो हैं, जो गोमांस खाती हैं। ये दोनों जनजातियां राज्य की आबादी का तीन चौथाई हिस्सा हैं।

बता दें कि इसी साल एक स्थानीय बीजेपी नेता ने कहा था कि अगर बीजेपी सत्ता में आती है तो पार्टी लोगों को सस्ते बीफ की सप्लाई करेगी। लेकिन केन्द्र द्वारा नया कानून लाने के बाद इस बीजेपी नेता ने पार्टी से इस्तीफा दे दिया था।

पटना एम्स में बिना इलाज के बच्ची मर गई, कंधे पर लाश लेकर घूमता रहा बाप

बिहार की राजधानी पटना में रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। पटना के अखिल भारतीय चिकित्सा संस्थान (एम्स) में एक बच्ची की वक्त पर इलाज नहीं मिलने की वजह से मौत हो गई।

इतना ही नहीं, अस्पताल की तरफ से शव ले जाने के लिए एंबुलेंस भी नहीं दी गई, जिसकी वजह से बच्ची के मां-बाप उसका शव कंधे पर लेकर ही घूमते रहे।

एएनआई की रिपोर्ट्स के मुताबिक, बिहार के लखीसराय के रहने वाले दंपत्ति ने अपनी बेटी इसलिए गवां दी क्योंकि उन्होंने आवश्यक कागजी कार्रवाई पूरी नहीं की थी, जिसकी वजह से समय पर बच्ची का इलाज नहीं हो सका। बच्ची पिछले 6 दिनों से तेज बुखार से जूझ रही थी।

पिता का कहना है कि उन्होंने अधिकारियों से गुहार लगाई थी कि उनकी बच्ची की हालत बहुत गंभीर है इसलिए पहले इलाज कर दिया जाए, वह पेपर वर्क बाद में पूरा कर देंगे, लेकिन उनकी गुहार को अनदेखा करते हुए इलाज के लिए पर्ची नहीं काटी गई, जिसकी वजह से बच्ची की मौत हो गई।

दंपत्ति का कहना है कि कोई भी उनकी मदद के लिए आगे नहीं आया। लखीसराय निवासी रामबालक और उनकी पत्नी अपनी 9 साल की बेटी के इलाज के लिए उसे एम्स लेकर आए थे।

इस मामले में जब पटना एम्स के डायरेक्टर डॉ प्रभात के सिंह से सवाल किया गया, तब उन्होंने कहा कि वह फिलहाल घटना को पूरी तरह समझने में असमर्थ हैं। उन्होंने कहा, ''मैं समझ नहीं पा रहा हूं कि आखिर हुआ क्या? किसी को भी इस घटना के बारे में कुछ पता नहीं है। ये कैसे हो सकता है?''

डायरेक्टर ने मरीज की मौत पर सवाल उठाते हुए कहा, ''मुझे शंका है कि बच्ची की मौत कब हुई? कहीं ऐसा तो नहीं कि लंबी लाइन देख कर मरीज खुद चला गया हो और रास्ते में मौत हो गई हो?''

इस मामले में राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) ने कड़ी जांच की मांग की है।

योगी सरकार धर्म विशेष की सरकार की तरह काम कर रही है: बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी

बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी (बीएमएसी) ने बुधवार को उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार द्वारा अयोध्या में सरकारी खर्च से दिवाली मनाए जाने पर सवाल उठाया और आरोप लगाया कि यह सरकार एक धर्म विशेष के मानने वालों की सरकार बनकर काम कर रही है।

कमेटी के संयोजक जफरयाब जिलानी ने बताया कि लखनऊ में हुई कमेटी की बैठक में इस बात पर चिन्ता व्यक्त की गई कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार खुद को एक धर्म विशेष के मानने वालों की सरकार समझकर कार्य कर रही है, जबकि भारत के संविधान के अनुसार सरकार का सम्बन्ध किसी धर्म विशेष से नहीं होता।

उन्होंने बताया कि कमेटी ने योगी सरकार के अयोध्या में इस वर्ष सरकारी स्तर पर दिवाली मनाने तथा सरकारी खर्च से भगवान राम की विशाल मूर्ति बनाने के फैसले को भी देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप तथा संविधान के अनुच्छेद 27 की सरासर अवहेलना माना है।

जिलानी ने बताया कि कमेटी ने मुस्लिम कौम से कहा है कि हालांकि उपरोक्त सभी कार्य असंवैधानिक तथा गैरकानूनी हैं, लेकिन मुसलमानों की ओर से इन कार्यों को रोकने या उनमें किसी प्रकार से व्यवधान उत्पन्न करने का प्रयास ना किया जाए।

उन्होंने बताया कि बैठक में अयोध्या के विवादित ढांचा मामले में सुप्रीम कोर्ट में चल रहे मुकदमे को लेकर भविष्य की रणनीति तय करने के लिए उन्हें अधिकृत किया गया है।

उल्लेखनीय है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार को ही केन्द्र की नरेन्द्र मोदी सरकार के कार्यों को 'राम राज्य' स्थापित करने की दिशा में उठाए गए कदम करार देते हुए कहा कि केन्द्र सरकार के कार्यों से देश के आम नागरिक को जो सुख मिलेगा, वही 'राम राज्य' होगा। योगी ने आध्यात्मिक नगरी अयोध्या में दीपावली के भव्य आयोजन के अवसर पर कहा कि प्रधानमंत्री का सपना है कि हर परिवार के सिर पर छत हो। वर्ष 2019 तक अपना व्यक्तिगत शौचालय हो, बिजली हो। यही रामराज्य है।

मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि उनका संकल्प है कि एक ऐसा भारत बने जो गंदगी, गरीबी, जातिवाद, सम्प्रदायवाद, आतंकवाद, नक्सलवाद से मुक्त हो।

उन्होंने कहा, ''आज इस देश को जिस दिशा में प्रधानमंत्री ले जा रहे हैं। निरन्तर विकास की योजनाएं चल रही हैं।''

सच्चाई ये है कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत की अर्थव्यवस्था बरबाद हो गई है। भारत की जीडीपी विकास दर 3.7 फीसदी या उससे भी कम हो गई है। भारत की अर्थव्यवस्था मंदी की चपेट में आ चुकी है।

बाबरी मस्जिद की तरह ताजमहल को भी डायनामाइट से उड़ा दिया जाएगा: आजम खान

समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान ने ताजमहल पर चल रहे विवाद के बीच एक नया बयान दिया है। आजम खान ने कहा है कि बाबरी मस्जिद की तरह ताजमहल को भी डायनामाइट से उड़ा दिया जाएगा।

साथ ही कहा कि यह लीपापोती इसलिए हो रही, क्योंकि पूरी दुनिया का दबाव है। टीवी चैनल टाइम्स नाउ से बात करते हुए आजम खान ने कहा, ''पूरे देश में जिस तरह का माहौल बाबरी मस्जिद टूटने और ढहाने से पहले बना था। यह माहौल एक दिन में नहीं बना था, यह माहौल कई वर्षों तक चला। इंसाफ पसंद लोगों को याद होगा कि सुप्रीम कोर्ट का स्टे था, हाईकोर्ट का स्टे था, उस वक्त के उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री का कोर्ट में हलफनामा था, लेकिन इसके बाद भी 6 दिसंबर 1992 को बाबरी मस्जिद को डायनामाइट से उड़ा दिया गया।''

साथ ही उन्होंने कहा, ''मेरा मानना है कि आज जो भी लीपापोती हो रही है, वह इसलिए हो रही है क्योंकि पूरी दुनिया का दबाव है। यह एक ऐतिहासिक स्मारक है और पूरी दुनिया का सातवां अजूबा है। सिर्फ दुनिया के दबाव की वजह से ताजमहल बचा हुआ है। ताजमहल को डायनामाइट से उड़ाना है। पीएनओ की किताब में जो कुछ भी लिखा गया है, उन सब पर फासिस्ट ताकतों ने अमल किया। आरएसएस ने उस पर अमल किया। उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि यहां शिवजी का मंदिर था। अगर मंदिर के नाम पर बाबरी मस्जिद को उड़ा दिया गया तो कोई भी इबादतगाह या इमारत नहीं बच सकती।''

बता दें, हाल ही में बीजेपी विधायक संगीत सोम ने ताजमहल को भारतीय संस्कृति के नाम पर 'धब्बा' बताया था। साथ ही उसने कहा था कि इसे हिंदुओं का सर्वनाश करने वालों ने बनाया था। ऐसे में यह इतिहास में क्यों दर्ज है।? हम इतिहास बदलने जा रहे हैं। इसके बाद एक नया विवाद खड़ा हो गया। कुछ लोग संगीत सोम के पक्ष में आ गए तो वहीं कुछ लोग उनके खिलाफ बोलने लगे। हालांकि, बीजेपी की योगी सरकार ने उसके बयान से किनारा कर लिया।

भारतीय जनता पार्टी ने कहा कि यह उसका व्यक्तिगत बयान था।

नरेंद्र मोदी के मंत्री ने लालू यादव के साथ की गुप्त बैठक

बिहार के दो राजनीतिक दलों आरजेडी और आरएलएसपी के मुखिया लालू प्रसाद यादव और उपेंद्र कुशवाहा की मुलाकात के बाद राजनीतिक गलियारों में अटकलबाजियों का दौर शुरू हो गया है। आरएलएसपी बीजेपी नीत एनडीए का हिस्सा है। उपेंद्र कुशवाहा नरेंद्र मोदी सरकार में मंत्री हैं।

साल 2014 के लोक सभा चुनाव और 2015 के विधान सभा चुनाव में आरएलएसपी बीजेपी की साझीदार थी। लालू और उपेंद्र ने सोमवार (16 अक्टूबर) को मुलाकात की।

आरजेडी के एक नेता ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को बताया कि दोनों नेताओं ने साल 2019 के लोक सभा चुनाव से जुड़ी संभावनाओं पर चर्चा की। हालांकि किसी भी नेता ने अभी तक इस मुलाकात पर आधिकारिक रूप से कुछ नहीं कहा है।

इसी साल अगस्त में जेडीयू प्रमुख नीतीश कुमार ने आरजेडी और कांग्रेस से गठबंधन तोड़कर बीजेपी से हाथ मिला लिया था। जबकि 2015 का विधान सभा चुनाव जेडीयू, आरजेडी और कांग्रेस ने मिलकर लड़ा था, लेकिन इन दलों का गठबंधन करीब 20 महीने बाद ही टूट गया।

बीजेपी को बिहार में अपना पुराना जोड़ीदार भले वापस मिल गया हो, लेकिन नीतीश की एनडीए वापसी के साथ ही इससे उपेंद्र कुशवाहा के नाराज होने की चर्चा होने लगी थी।

माना जाता है कि उपेंद्र कुशवाहा नीतीश को अपना प्रतिद्वंद्वी मानते हैं और उनके साथ नहीं रहना चाहते।

आरएलएसपी नेता नागमणि ने दो दिन पहले ही ये कहकर बिहार की सियासत में बदलाव के संकेत दिए कि उपेंद्र कुशवाहा को बिहार का अगला मुख्यमंत्री होना चाहिए।

माना जा रहा है कि कुशवाहा लालू यादव से मिलकर ऐसी संभावनाओं को टटोल रहे थे। चर्चा है कि अगर आरजेडी और कांग्रेस कुशवाहा को मुख्यमंत्री पद का उम्मीदवार बनाने को तैयार हो जाएं तो एनडीए का टूटना निश्चित है।