भारत

ब्र‍िटिश अखबार का दावा: अडानी समूह की कंपनी ने 1500 करोड़ की टैक्‍स चोरी की

ब्रिटिश अखबार द गॉर्डियन को मिले दस्तावेज के अनुसार, भारतीय कस्टम विभाग के डॉयरेक्टरेट ऑफ रेवन्यू इंटलीजेंस (डी आर आई) ने मशहूर कारोबारी घराने अडानी समूह पर फर्जी बिल बनाकर करीब 1500 करोड़ रुपये टैक्स हैवेन (टैक्स चोरों के स्वर्ग) देश में भेजने का आरोप लगाया है।

गॉर्डियन के पास मौजूद डी आर आई के दस्तावेज के अनुसार अडानी समूह ने महाराष्ट्र की एक बिजली परियोजना के लिए शून्य या बहुत कम ड्यूटी वाले सामानों का निर्यात किया और उनका दाम वास्तविक मूल्य से कई गुना बढ़ाकर दिखाया ताकि बैंकों से कर्ज में लिया गया पैसा विदेश भेजा सके।

रिपोर्ट के अनुसार, अडानी समूह ने दुबई की एक जाली कंपनी के माध्यम से अरबों रुपये का सामान महाराष्ट्र की एक बिजली परियोजना के लिए मंगाया और बाद में कंपनी ने वही सामान अडानी समूह को कई गुना ज्यादा कीमत पर बेच दिया।

रिपोर्ट के अनुसार, अडानी समूह ने इन सामान की कीमत बिल में औसतन चार गुना ज्यादा दिखायी। डी आर आई ने ये रिपोर्ट साल 2014 में तैयार की थी।

गॉर्डियन के अनुसार, डी आर आई की 97 पन्नों की ये कथित रिपोर्ट स्क्राइब डॉट कॉम पर उपलब्ध हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, अडानी समूह ने दक्षिण कोरिया और दुबई की कंपनियों के माध्यम से मारीशस स्थित एक ट्रस्ट को पैसा पहुंचाया जिस पर अडानी समूह के सीईओ गौतम अडानी के बड़े भाई विनोद अडानी का नियंत्रण है।

रिपोर्ट के अनुसार, अडानी समूह ने जो पैसा विदेश भेजा है, उसका बड़ा हिस्सा भारतीय स्टेट बैंक और आई सी आई सी आई बैंक से लोन के तौर पर लिया गया था। डी आर आई ने दोनों बैंकों पर किसी भी गैर-कानूनी गतिविधि का आरोप नहीं लगाया है।

हालांकि अडानी समूह ने द गॉर्डियन को भेजे एक बयान में इन आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। कंपनी के बयान में कहा गया है कि अडानी समूह को डी आर आई द्वारा चल रही जांच के बारे में पूरी मालूमात है और वो जांच में पूरा सहयोग कर रहा है।

रिपोर्ट के अनुसार, अडानी समूह के खिलाफ बिजली परियोजना के लिए आयात किए गए सामान का कीमत कई गुना बढ़ाकर बताने की रिपोर्ट ई पी डब्ल्यू पत्रिका के 14 मई 2016 अंक में परंजय गुहा ठाकुरता ने दी थी।

परंजय गुहा ठाकुरता हाल ही में तब चर्चा में आए थे, जब अडानी समूह ने ई पी डब्ल्यू की दो रिपोर्ट के खिलाफ पत्रिका को कानूनी नोटिस भेजा था।

अडानी समूह ने पत्रिका को भेजे नोटिस में कहा था कि अगर ये रिपोर्ट नहीं हटाए गईं तो मानहानि का मुकदमा करेगा। पत्रिका ने नोटिस के बाद रिपोर्ट हट ली और ठाकुरता ने पत्रिका के संपादक पद से इस्तीफा दे दिया।

विपक्ष ने पीएम मोदी के स्‍वतंत्रता दिवस संबोधन को निराशाजनक बताया

भारत की सबसे बड़ी विपक्षी राजनैतिक पार्टी कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के स्वाधीनता दिवस संबोधन को बेहद निराशाजनक करार देते हुए आज कहा कि उन्होंने अपनी सरकार की विफलताओं और अधूरे वादों का उल्लेख नहीं किया, वहीं वाम एवं अन्य विपक्षी दलों ने कहा कि उसमें कुछ भी खास नहीं था।

कांग्रेस के वरिष्ठ प्रवक्ता आनंद शर्मा ने कहा कि मोदी ने गोरखपुर त्रासदी की अन्य प्राकृतिक आपदाओं से तुलना करते समय बच्चों के मारे जाने की घटना के बारे में कोई संवेदनशीलता नहीं दिखायी।

उन्होंने कहा कि किसी ने भी प्रधानमंत्री को कश्मीरियों से गले मिलने या समास्या का समाधान निकालने को नहीं रोका है।

उन्होंने कहा, ''प्रधानमंत्री का स्वाधीनता दिवस पर संबोधन बहुत ही निराशाजनक रहा। तीन साल के बाद उनके लिए यह समय था कि वह अपनी सरकार द्वारा लोगों विशेषकर युवाओं, किसानों एवं कमजोर वर्गों से किये गये वादों को पूरा करने में अपनी विफलताओं का उल्लेख करें।''

कश्मीर के बारे में शर्मा ने कहा, ''कश्मीरियों को गले लगाने से हमने उन्हें नहीं रोका है। उन्हें सभी वर्गों से बात करनी चाहिए और राष्ट्र एवं कश्मीर में आम सहमति कायम करनी चाहिए। सभी को शामिल करने का प्रयास होना चाहिए।''

शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री ने गोरखपुर घटना के प्रति कोई संवेदनशीलता नहीं दिखायी तथा वह इस बात की गंभीरता नहीं समझ रहे कि लापरवाही भरे रवैये के कारण गोरखपुर में बड़ी संख्या में बच्चों की मौत हो गयी।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के राष्ट्रीय सचिव डी राजा ने कहा कि मोदी के भाषण में कुछ भी खास नहीं था। उन्होंने कहा कि जब प्रधानमंत्री विवाद के हल के लिए कश्मीरियों को गले लगाने की बात कर रहे थे, तब उनकी बात में विश्वास नहीं झलक रहा है।

राजा ने कहा, ''वे (सरकार) विवाद का हल निकालने के लिए सैन्य समाधान चाहते हैं। दूसरी तरफ वह गोली और गाली का प्रयोग नहीं कर बल्कि कश्मीरियों को गले लगाकर विवाद का हल निकालने की बात करते हैं। उन्होंने जो कहा उसमें कोई विश्वास नहीं झलक रहा था।''

नेशनल कांफ्रेंस के कार्यकारी अध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने कहा, ''वास्तव में उन्होंने कहा कि कश्मीर मुद्दे का समाधान गोली या गाली से नहीं हो सकता है। मेरा अनुमान है कि इसमें दोनों पक्ष ....  आतंकवादी एवं सुरक्षा बल, आ जाते हैं।

उमर ने कहा, ''गोली एवं गाली के बिना उन टीवी न्यूज स्टूडियो का क्या होगा जो सभी कश्मीरियों के खिलाफ इन हथियारों को तैनात करने के विशेषज्ञ हैं।''

नोटबंदी के बारे में उमर ने कहा, ''यह स्वागतयोग्य खबर है। इसका यह अर्थ आरबीआई नोटबंदी वाले नोटों की गिनती का काम पूरा कर तीन लाख करोड़ रूपये के पक्के आंकड़े पर पहुंच गया है। बहुत शानदार।''

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, ''भय से मुक्ति, धर्मान्धता से मुक्ति, घृणा से मुक्ति, असमानता से मुक्ति होनी चाहिए। प्रेम एवं करूणा सब जगह होनी चाहिए। जय हिन्द।''

गोलियों या गालियों से कश्मीर समस्या सुलझने वाली नहीं: नरेन्द्र मोदी

अशांति के दौर से गुजर रहे कश्मीर के लोगों को लक्षित कर भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि गोलियों या गालियों से कश्मीर मुद्दे का हल नहीं हो सकता और प्रत्येक कश्मीरी को गले लगाकर ही इसका समाधान किया जा सकता है।

नरेंद्र मोदी ने 71वें स्वाधीनता दिवस के अवसर पर लालकिले की प्राचीर से राष्ट्र को अपने करीब 56 मिनट के संबोधन में इस बात पर बल दिया कि सुरक्षा शीर्ष प्राथमिकता है।

उन्होंने जातिवाद एवं सांप्रदायिकता को खारिज करते हुए कहा कि आस्था के नाम पर हिंसा को स्वीकार नहीं किया जा सकता है।

उन्होंने चौथी बार लालकिले से अपने संबोधन में कश्मीर के लोगों को गले लगाने का आह्वान करते हुए कहा, ''न गाली से, न गोली से, परिवर्तन होगा गले लगाने से .... । समस्या सुलझेगी, हर कश्मीरी को गले लगाने से।''

मोदी ने कहा कि चंद अलगाववादी राज्य में समस्याएं पैदा करने के लिए विभिन्न चालें चलते हैं। किन्तु सरकार कश्मीर को फिर से स्वर्ग बनाने के लिए प्रतिबद्ध है।

मोदी ने कहा कि जम्मू और कश्मीर के लोगों के विकास के सपने को पूरा करने में मदद के लिए जम्मू और कश्मीर सरकार ही नहीं बल्कि पूरा देश उनके साथ है।

प्रधानमंत्री की यह टिप्पणी ऐसे समय में आयी है जबकि कश्मीर घाटी में अशांति एवं हिंसा का दौर पिछले कुछ समय से बना हुआ है।

आतंकवाद के प्रति कोई नरमी नहीं बरते जाने की प्रतिबद्धता जताते हुए उन्होंने कहा कि भारत की सुरक्षा सरकार के लिए शीर्ष प्राथमिकता है।

मोदी ने यह भी कहा कि विश्व में भारत का दर्जा बढ़ रहा है तथा आतंकवाद की समस्या से मुकाबले में कई देश भारत को सहयोग दे रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत किसी भी मोर्चे ... जल, थल, आकाश अथवा साइबर में चुनौतियों का सामना करने में सक्षम है। उन्होंने डोकलाम में चीन के साथ तनातनी की पृष्ठभूमि में यह बात कही।

उन्होंने अपने संबोधन की शुरूआत देश के विभिन्न हिस्सों में प्राकृतिक आपदाओं में मारे गये लोगों, और खासतौर से गोरखपुर के सरकारी अस्पताल में जान गंवाने वालों बच्चों का उल्लेख करते हुए कहा कि समूचे राष्ट्र की संवेदनाएं प्रभावित परिवारों के साथ है।

उन्होंने कहा कि भारत शांति, एकता एवं भाईचारे के पक्ष में है तथा जातिवाद एवं सांप्रदायिकता काम नहीं आएगी। उन्होंने आस्था के नाम पर हिंसा करने वालों की कड़ी भर्त्सना करते हुए कहा कि इसे स्वीकार नहीं किया जाएगा।

गुजरात में दलितों के साथ फिर हुई हिंसा

गुजरात में ऊंची जाति के कुछ लोगों द्वारा एक दलित परिवार की कथित तौर पर बेरहमी से पिटाई का मामला सामने आया है। यहां एक बार फिर से ऊना कांड जैसे मामले को दोहराने की कोशिश की गई है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर के मुताबिक, गुजरात के आणंद जिले के सोजित्रा तालुका के कासोर गांव में कथित रूप से ऊंची जाति के कुछ लोगों ने एक दलित महिला और उसके बेटे को पहले नंगा किया और फिर बेंत से बुरी तरह पिटाई की।

मामला बीते शनिवार 12 अगस्त का बताया जा रहा है। इस घटना में पीड़िता मणिबेन (45) और शैलेश रोहित (21) की भीड़ ने लाठियों से पिटाई की और अपशब्द कहे। इस घटना में गांव के दरबार (क्षत्रिय) समुदाय के लोगों का हाथ बताया जा रहा है।

मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, मणिबेन और उनका बेटा शैलेश मरे हुए मवेशियों के शवों की खाल उतारने का काम करते हैं। पुलिस ने आईपीसी की धारा 323, 506 (2) और एससी-एसटी ऐक्ट के तहत मामला दर्ज कर लिया है।

बता दें कि एक साल पहले ऊना में मरी गाय की खाल निकालने पर चार दलितों की बेरहमी से पिटाई की गई थी। विरोध में दलितों ने गुजरात के सरकारी कार्यालयों के सामने मरी गायें डाल दी थीं। गुजरात समेत पूरे भारत में इस घटना के विरोध में प्रदर्शन हुए थे।

आजादी की 70वीं वर्षगांठ पर चंडीगढ़ में 8वीं की छात्रा से बलात्‍कार, स्‍कूल से घर लौट रही थी

एक बार फिर से चंडीगढ़ में महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। यहां आठवीं कक्षा की एक छात्रा के साथ कथित तौर पर रेप की वारदात को तब अंजाम दिया गया, जब वह स्कूल से स्वतंत्रता दिवस समारोह से वापस घर लौट रही थी। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे जाँच कर रही है।

नौसेना अधिकारियों को छोटे हथियार चलाने की प्रैक्टिस नहीं है: कैग रिपोर्ट

भारतीय नौसेना के पास दिल्ली में अपनी फायरिंग रेंज नहीं होने के कारण राजधानी क्षेत्र में नौसेना के अधिकारियों का छोटे हथियार चलाने का अभ्यास प्रभावित होने को लेकर कैग ने चिंता जतायी है। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) ने हाल में संपन्न संसद के मानसून सत्र में दोनों सदनों में पेश अपनी रिपोर्ट में यह बात कही है।

रिपोर्ट में कहा गया कि अखिल भारतीय नौसेना कर्मियों को सभी प्रकार के छोटे हथियारों को चलाने की कामकाजी जानकारी होनी चाहिए। रक्षा मंत्रालय समन्वित मुख्यालयों ने मई 2010 में इस संबंध में प्रशिक्षण एवं अन्य के लिए उपाय तय किये थे।

इसमें कहा गया कि छोटे हथियारों के लिए प्रारंभिक प्रशिक्षण तथा जहाजों एवं प्रतिष्ठानों के लिए वार्षिक अभ्यास भत्ता (ए पी ए) नौसेना मुख्यालय ने दिसंबर 1978 में अधिसूचित किया था और 2011 में इसे संशोधित किया गया। इसके अनुसार प्रत्येक नौसेना अधिकारी को वर्ष में 5.56 एम एम बाल एम्युनेशन के 65 चक्र का फायरिंग अभ्यास और नौ एम एम बाल एम्युनेशन के 40 चक्र फायरिंग अभ्यास करना जरूरी होता है।

रिपोर्ट में कहा गया कि स्टेशन कमांडर (नौसेना), दिल्ली क्षेत्र इस बात के लिए जिम्मेदार हैं कि इस क्षेत्र में तैनात सभी नौसेना अधिकारियों एवं नाविकों को छोटे हथियारों की फायरिंग का अभ्यास करवाया जाए।

कैग ने कहा कि एक अंकेक्षण पूछताछ में (सितंबर 2015) नौसेना ने बताया कि दिल्ली में जमीन की कमी के चलते भारतीय नौसेना के पास अपनी कोई फायरिंग रेंज नहीं है तथा उसे फायरिंग रेंज के लिए पूरी तरह थलसेना पर निर्भर रहना पड़ता है।

रिपोर्ट में कहा गया कि दिल्ली क्षेत्र में अभ्यास फायरिंग के दौरान अधिकारियों की भागीदारी में कमी वर्ष 2012-13 से 2015-16 के बीच 91.59 प्रतिशत और 99.83 प्रतिशत के बीच रही।

कैग ने कहा कि नौसेना अधिकारियों द्वारा छोटे हथियारों की अभ्यास फायरिंग ए पी ए के अनुदेश की तुलना में मामूली है तथा इससे नौसेना अधिकारियों के हथियार संचालित करने की क्षमता प्रभावित हो सकती है।

कैग ने कहा कि इस मामले को दिसंबर 2016 में रक्षा मंत्रालय को संदर्भित किया गया था और उसका जवाब प्रतीक्षित है।

बिहार में बाढ़ की स्थिति भयावह, लोग घर छोड़कर भागे

बिहार में बाढ़ की स्थिति लगातार रविवार को भयावह बनी हुई है, और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बाढ़ से प्रभावित हजारों लोगों के राहत एवं बचाव के लिए सेना और भारतीय वायुसेना की मदद मांगी है।

नीतीश कुमार ने कहा, ''बिहार में बाढ़ की स्थिति भयावह है। राज्य सरकार पूरी तरह सतर्क है और हमने प्रभावित लोगों को बचाने तथा लोगों के बीच राहत सामग्री बांटने के लिए सेना और वायुसेना के हेलीकॉप्टरों की मदद मांगी है।''

मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह से अनुरोध किया है कि प्रभावित लोगों के राहत एवं बचाव के लिए केंद्र से हर संभव मदद मुहैया कराएं।

बिहार में सीमांचल और कोशी इलाके के लगभग आधा दर्जन जिले पिछले तीन दिनों के दौरान हुई भारी बारिश के कारण बुरी तरह प्रभावित हैं। बिहार में सभी प्रमुख नदियां नेपाल एवं बिहार में अपने जलागम क्षेत्रों में हुई भारी बारिश के बाद से उफान पर हैं।

अधिकारियों ने कहा कि सैकड़ों गांव बाढ़ के पानी में डूब गए हैं जिसके कारण हजारों की संख्या में लोग प्रभावित हुए हैं। अभी तक बाढ़ में किसी के मौत की खबर नहीं है। आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार ने अपने कर्मचारियों को सतर्क कर दिया है, और बाढ़ प्रभावित किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार, पश्चिम चंपारण, सहरसा, और सुपौल जिलों में निवासियों को घर खाली करने के आदेश दिए गए हैं।

मुख्यमंत्री कार्यालय में जानकार सूत्रों ने कहा कि पटना के दानापुर छावनी से बिहार रेजीमेंट के 80 सैन्यकर्मी लोगों को बचाने के लिए रविवार शाम किशनगंज और अररिया पहुंच गए।

राज्य सरकार ने एन डी आर एफ और एस डी आर एफ की टीमें इन जिलों में पहले से तैनात कर रखी है। आपदा प्रबंधन विभाग ने निचले इलाकों में रह रहे लोगों को ऊंचाई वाले स्थानों पर चले जाने को कहा है।

राजधानी पटना पहुंच रहीं खबरों में कहा गया है कि सुपौल, सहरसा, बाघा, गोपालगंज, मधुबनी, सीतामढ़ी, खगड़िया, दरभंगा और मधेपुरा जिलों में गांवों में पानी घुसने के बाद सैकड़ों लोग अपने घरों से भाग गए हैं।

जल संसाधन विभाग के एक अधिकारी ने कहा, ''राज्य में और नेपाल के जलागम क्षेत्रों में भारी बारिश के कारण सभी नदियां उफान पर हैं, जिसके कारण इन गांवों में पानी घुस गया है।''

अररिया और किशनगंज में कई रेलवे स्टेशन बाढ़ के पानी में डूब गए हैं, जिसके कारण कई सारे यात्री फंस गए हैं। अधिकारियों के अनुसार, करोड़ों रुपयों की फसलें बर्बाद हो गई हैं और कई स्थानों के लिए जाने वाले मार्ग कट गए हैं।

हिमाचल प्रदेश में भीषण भूस्खलन की चपेट में आने से 46 लोगों की मौत

हिमाचल प्रदेश में मंडी-पठानकोट राष्ट्रीय राजमार्ग पर हुए भीषण भूस्खलन की चपेट में हिमाचल रोडवेज की दो बसों के आने से कम से कम 46 लोगों की मौत हो गयी और कई अन्य घायल हो गए।

अधिकारियों का कहना है कि मरने वालों की संख्या बढ़ सकती है क्योंकि दोनों बसों में 50 से अधिक लोग सवार थे।

बादल फटने से भीषण भूस्खलन हुआ। एक अधिकारी ने बताया, ''अब तक 46 शव बरामद किए गए हैं और इनमें से 25 की पहचान कर ली गई है।''

उन्होंने कहा कि शाम के समय राहत एवं बचाव अभियान को रोक दिया गया क्योंकि भूस्खलन होने की आशंका थी। बचाव अभियान कल फिर शुरू होगा।

वहीं जो शव बराबद हुए, उनमें से करीब 25 पहचान सिम कार्ड के आधार पर की कई है। शवों से प्राप्त हुए गहने और रुपए रिश्तेदारों को सौप दिए गए हैं।

उधर, रक्षा विभाग के एक प्रवक्ता ने बताया कि सेना की दो टुकड़ियों को बचाव कार्य में लगाया गया है।  राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एन डी आर एफ ), सेना और पुलिस के दल मौके पर पहुंच गए हैं और वहां जेसीबी मशीन भी तैनात की गईं।

राज्य के मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने घटनास्थल का दौरा किया और कहा कि सभी शव बरामद किए जाने तक बचाव अभियान जारी रहेगा।

उन्होंने कहा कि मनाली-कटरा बस में आठ लोग यात्रा कर रहे थे जिनमें तीन लोगों की मौत हो गई और पांच लोगों को बचा लिया गया और उनको मंडी के अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

वहीं प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर भी जारी किया है। मंडी हेल्पलाइन नंबर- 01905226201, 226202, 226203, एच आर टी सी- 01905235538 और 918001051 है।

एक अधिकारी ने कहा कि दूसरी बस में 47 यात्री थे और यह बस मनाली से चम्बा जा रही थी।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार घायलों के इलाज का पूरा खर्च वहन करेगी। उन्होंने पीड़ित परिवारों से मुलाकात कर संवेदना प्रकट की।  स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर, परिवहन मंत्री जी एस बाली और ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा ने भी मौके का दौरा किया।

स्वास्थ्य मंत्री कौल सिंह ठाकुर ने कहा कि मारे गए लोगों के परिजनों को चार-चार लाख रूपये की सहायता राशि दी जाएगी, जबकि परिवहन मंत्री जी एस बाली ने ऐलान किया कि हिमाचल परिवहन निगम की ओर से इन परिवारों को एक-एक लाख रूपये दिये जाएंगे।

गोरखपुर कांड में हीरो बने डॉ कफील अहमद खान को हटा दिया गया

गोरखपुर कांड में हीरो बने डॉ कफील अहमद खान को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के एन आई सी यू विभाग के प्रमुख के पद से योगी सरकार ने हटा दिया गया है। उनकी जगह अब डॉक्टर महेश शर्मा नए प्रमुख होंगे।

गोरखपुर के बीआरडी अस्पताल में मचे कोहराम के दौरान बाल रोग विशेषज्ञ और इंसेफलाइटिस वार्ड के हेड डॉ काफिल खान के रोल की जबर्दस्त तारीफ हो रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अगर संकट की घडी में डॉ काफिल अहमद खान अस्पताल में मौजूद नहीं होते तो मरने वाले बच्चों की संख्या और भी बढ़ सकती थी। अंग्रेजी वेबसाइट डी एन ए इंडिया की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जब अस्पताल में ऑक्सीजन खत्म हो गया तो डॉ कफील अहमद खान ने अपने दोस्त के नर्सिंग होम से ऑक्सीजन सिलेंडर मंगाये।

लेकिन उत्तर प्रदेश की योगी सरकार को एक मुस्लिम डॉक्टर की प्रशंसा बर्दाश्त नहीं हुई तो गोरखपुर कांड में हीरो बने डॉ कफील अहमद खान को बीआरडी मेडिकल कॉलेज के एन आई सी यू विभाग के प्रमुख के पद से योगी सरकार ने हटा दिया। उनकी जगह अब डॉक्टर महेश शर्मा को नया प्रमुख बनाया गया।

हद तो तब हो गई, जब डॉक्टर कफील की प्रशंसा से बौखलाए आरएसएस और बीजेपी समर्थकों ने डॉक्टर कफील का सोशल मीडिया पर चरित्र हनन करना शुरू कर दिया।

बी आर डी मेडिकल कॉलेज में 63 बच्चों की मौत पर केंद्र ने योगी सरकार से रिपोर्ट मांगी

भारत के प्रधानमंत्री कार्यालय ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पिछले पांच दिनों के भीतर 60 से अधिक बच्चों की मौतों के बाद पैदा हुए हालात पर नजर बनाए हुए हैं।

प्रधानमंत्री कार्यालय के ट्विटर हैंडल से कहा गया, ''प्रधानमंत्री गोरखपुर में हालात पर नजर बनाए हुए हैं। वह केंद्र तथा उत्तर प्रदेश सरकारों के अधिकारियों के संपर्क में हैं।'' एक अन्य ट्वीट के मुताबिक, ''केंद्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल और स्वास्थ्य सचिव गोरखपुर में हालात का जायजा लेने जाएंगे।''

वहीं इस हादसे पर केंद्र सरकार ने शनिवार को उत्तर प्रदेश सरकार से 60 से अधिक बच्चों की मौतों को लेकर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के एक अधिकारी ने नाम न जाहिर करने की शर्त पर बताया कि राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल तथा स्वास्थ्य सचिव सी के मिश्रा से गोरखपुर जाने और बाबा राघव दास मेडिकल कॉलेज में खामियों का पता लगाने के लिए कहा गया है, जहां बच्चे भर्ती थे।

इस बीच, उत्तर प्रदेश में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार ने बी आर डी मेडिकल कॉलेज अस्पताल प्रमुख को लापरवाही के आरोप में निलंबित कर दिया है।

स्वास्थ्य सचिव मिश्रा गोरखपुर पहुंच गए हैं, जबकि अनुप्रिया जल्द ही वहां पहुंचने वाली है। अधिकारी ने बताया कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली से अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान, सफदरजंग अस्पताल और राम मनोहर लोहिया अस्पताल के चिकित्सकों के एक प्रतिनिधिमंडल को बी आर डी के चिकित्सकों की मदद के लिए भेजने की योजना बनाई है।

गौरतलब है कि अस्पताल में पिछले करीब पांच दिनों में 63 बच्चों की मौत एंसेफेलाइटिस और ऑक्सीजन की आपूर्ति बंद होने के कारण हो गई। इनमें से 30 मौतें 48 घंटे के भीतर हुईं।

बी आर डी मेडिकल कॉलेज को उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा एंसेफेलाइटिस से निपटने के लिए अनुदान के रूप में काफी बड़ी राशि दी जा रही थी।

हालांकि अस्पताल में भर्ती मरीजों के परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया है कि बड़ी मात्रा में सरकारी अनुदान मिलने के बावजूद यहां न तो चिकित्सक हैं और न ही उपचार की उचित व्यवस्था, उचित दवाइयां या ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं।

इससे पहले शनिवार को मुख्यमंत्री योगी ने अपनी सरकार के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह तथा चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन को इस हिदायत के साथ गोरखपुर भेजा कि 'त्रासदी के लिए जिम्मेदार किसी को भी छोड़ा न जाए'।

इस मामले में विपक्ष की कड़ी आलोचना झेल रहे योगी के कार्यालय ने शनिवार दोपहर स्वास्थ्य मंत्री सिंह के हवाले से ट्वीट कर बताया कि चिकित्सा विज्ञान संस्थान के प्रिंसिपल को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है।