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नीतीश कुमार एनडीए में शामिल हो सकते हैं

बिहार के मुख्यमंत्री और जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष नीतीश कुमार एनडीए में शामिल हो सकते हैं। रिपोर्ट्स के मुताबिक पटना में 19 अगस्त को जनता दल यूनाइटेड कार्यकारिणी की प्रस्तावित बैठक में नीतीश कुमार अपनी पार्टी जनता दल यूनाइटेड को एनडीए का हिस्सा बनाने की घोषणा कर सकते हैं। इसके एवज में नीतीश कुमार को एनडीए में बड़ी जिम्मेदारी दी जा सकती है।

रेडिफ डॉट कॉम की खबर के मुताबिक, नीतीश कुमार को राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का संयोजक बनाया जा सकता है। इसके अलावा जनता दल यूनाइटेड के दो नेताओं को नरेन्द्र मोदी सरकार में जगह मिल सकती है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, इनमें से एक नेता को कैबिनेट रैंक का मंत्री बनाया जा सकता है, जबकि दूसरे नेता को राज्यमंत्री बनाया जा सकता है।

हालांकि जनता दल यूनाइटेड को इस वक्त पार्टी के दो वरिष्ठ नेताओं की बगावत का सामना करना पड़ रहा है। राज्य सभा सांसद शरद यादव और अली अनवर नीतीश कुमार के फैसले के खिलाफ हैं। जनता दल यूनाइटेड ने अली अनवर को पार्टी के संसदीय दल से सस्पेंड कर दिया है। जबकि पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद यादव को राज्य सभा में पार्टी के संसदीय दल के नेता पद से हटा दिया है। इनके स्थान पर जनता दल यूनाइटेड ने आर सी पी सिंह को राज्यसभा में पार्टी का नया नेता नियुक्त किया है। आर सी पी सिंह नीतीश कुमार के करीबी माने जाते हैं।

सूत्रों के मुताबिक, नीतीश गुट अब राज्यसभा से इन दोनों नेताओं की विदाई चाहता है।

राज्यसभा में इस वक्त जनता दल यूनाइटेड के 10 सदस्य हैं। नीतीश कुमार और शरद यादव के बीच मतभेद तब सामने आए थे, जब पिछले महीने नीतीश ने कांग्रेस और राजद के साथ संबंध खत्म कर बिहार में नई सरकार बनाने के लिए बीजेपी से हाथ मिला लिए थे।

हाल ही में बिहार दौरे के दौरान शरद यादव ने कहा था कि उनका अभी भी यही मानना है कि वह राजद और कांग्रेस के साथ महागठबंधन का हिस्सा हैं। जनता दल यूनाइटेड केवल नीतीश कुमार की ही पार्टी नहीं है बल्कि उनकी भी पार्टी है।

इधर बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने शनिवार को कहा कि उन्होंने नीतीश कुमार को एनडीए में शामिल होने का न्यौता दिया है।

नीतीश की नई चाल: नीतीश गुट ने शरद यादव को राज्य सभा में नेता पद से हटाया

जनता दल यूनाइटेड में अब आर-पार की स्थिति आ गई है। नीतीश कुमार गुट ने एक अहम चाल चलते हुए शरद यादव को ठिकाने लगाने की कोशिश की है। उन्हें राज्य सभा में पार्टी संसदीय दल के नेता के पद से हटा दिया है।

राज्यसभा में जनता दल यूनाइटेड के सांसदों ने आज (12 अगस्त को) सभापति वेंकैया नायडू से मिलकर आर सी पी सिंह को सदन में पार्टी का नया नेता बनाने का आधिकारिक पत्र सौंपा। राज्य सभा सभापति को लिखे पत्र में जनता दल यूनाइटेड सांसदों ने कहा है कि उन लोगों ने सर्वसम्मति से आर सी पी सिंह को सदन में पार्टी का नया नेता चुना है।

जनता दल यूनाइटेड के बिहार प्रदेश अध्यक्ष वशिष्ठ नारायण सिंह ने मीडिया को इसकी जानकारी दी। इससे एक दिन पहले शरद यादव के करीबी राज्य सभा सांसद अली अनवर को नीतीश खेमे ने पार्टी के संसदीय दल से निलंबित कर दिया था।

इधर, पार्टी में चल रहे आंतरिक कलह पर पार्टी अध्यक्ष और बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने शुक्रवार (11 अगस्त) को अपनी चुप्पी तोड़ी। नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात के पहले उन्होंने कहा, ''शरद यादव अपना फैसला लेने के लिए आजाद हैं। वह अपनी राह चुनने के लिए स्वतंत्र हैं। वह किसके प्रति वफादार रहना चाहते हैं, इसका फैसला खुद कर सकते हैं। बीजेपी के साथ गठबंधन का फैसला पूरी पार्टी की सहमति से लिया गया है।''

दूसरी तरफ, बिहार में कार्यकर्ताओं से संपर्क अभियान पर निकले शरद यादव ने दावा किया है, ''असली जनता दल (यूनाइटेड) उनके साथ है, जबकि सरकार पार्टी नीतीश के साथ है। असली जनता दल यूनाइटेड धर्मनिरपेक्ष ताकतों के साथ मिलकर आम चुनाव में सरकार बनाएगी।''

बता दें कि शरद गुट के लोगों को पार्टी में साइड लाइन करने का सिलसिला पांच दिन पहले ही शुरू हो गया था। इससे पहले मंगलवार (8 अगस्त) को पार्टी महासचिव पद से अरुण श्रीवास्तव को बर्खास्त कर दिया गया था। श्रीवास्तव पर आरोप लगाया गया था कि उन्होंने गुजरात राज्यसभा चुनावों में पार्टी के एक मात्र विधायक छोटू भाई वासवा को पार्टी नेतृत्व के फैसले से अवगत कराने में कोताही बरती थी और पार्टी विरोधी काम किया था।

नीतीश कुमार ने 19 अगस्त को पार्टी कार्यकारिणी की पटना में बैठक बुलाई है, लेकिन उससे पहले ही नीतीश गुट शरद यादव के करीबियों को पार्टी से किनारा करने में जुटी हुई है। अरुण श्रीवास्तव के बाद अली अनवर पर निलंबन की कार्रवाई और अब शरद यादव को राज्यसभा में पार्टी के नेता पद से हटाना, उसी कड़ी का हिस्सा है।

शरद यादव इन दिनों बिहार के सात जिलों के तीन दिवसीय दौरे पर हैं। आज उनकी यात्रा संपन्न हो रही है। इस बीच वो जगह-जगह कहते रहे कि असली जनता दल यूनाइटेड उनके साथ है। यानी पार्टी का बंटवारा तय है। ऐसा होता है तो जनता दल यूनाइटेड पर वर्चस्व की लड़ाई चुनाव आयोग पहुंच सकती है। इस बीच, बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने जनता दल यूनाइटेड को एनडीए में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया है। माना जा रहा है कि 19 अगस्त को जनता दल यूनाइटेड कार्यकारिणी की बैठक में इस पर औपचारिक तौर पर मुहर लगेगी।

ओवैसी ने लालू से कहा, सांप्रदायिक ताकतों से आप अकेले नहीं लड़ सकते

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने आरजेडी सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की ओर दोस्ती का हाथ आगे बढ़ाया है। ओवैसी ने बीजेपी और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (आरएसएस) पर निशाना साधते हुए कहा कि सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ मिलकर मजबूती से लड़ना होगा।

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, ओवैसी ने कहा, ''लालू यादव साहब आप सांप्रदायिक ताकतों के खिलाफ अकेले नहीं लड़ सकते, अगर आपको उनसे लड़ना है तो मजबूती से लड़ना होगा।

उन्होंने आगे कहा कि अगर सीमांचल को उसका अधिकार दिया जाएगा, बिहार के मुस्लिमों के जीवन में बदलाव लाया जाएगा तो ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन तैयार है।

इससे पहले मंगलवार को भी असदुद्दीन ओवैसी ने आरएसएस के नेता इंद्रेश कुमार द्वारा चीन में बनी वस्तुओं के बहिष्कार के आह्वान को आरएसएस का पाखंड बताया था।

ओवैसी ने कहा कि आरएसएस इस तरह के शब्द आडम्बर का इस्तेमाल लोगों का ध्यान वास्तविक मुद्दों से हटाने के लिए कर रहा है।

उन्होंने कहा कि अगर आरएसएस को अपनी ही कही बात पर यकीन है तो उसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से चीन के साथ द्विपक्षीय व्यापार को बंद करने के लिए कहना चाहिए। आरएसएस के नेताओं का मकसद एक झूठ को गढ़ना है ताकि लोग राष्ट्रवाद में बह जाएं और उनका ध्यान वास्तविक मुद्दों से हट जाए।

उन्होंने कहा, ''इंद्रेश कुमार और अन्य आरएसएस नेताओं को प्रधानमंत्री, जोकि खुद भी स्वयंसेवक हैं, के पास जाना चाहिए और कहना चाहिए कि चीन के साथ द्विपक्षीय व्यापार को अविलंब बंद कर दिया जाए।''

बता दें कि लालू यादव 2019 लोकसभा चुनाव में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के जीत के रथ को रोकने के लिए सभी धर्मनिरपेक्ष दलों के एक साथ आने की बात कह चुके हैं। लालू, ममता बनर्जी और कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियां बीजेपी को हराने के लिए एक साथ आने की बात कह चुकी है।

मराठा क्रांति मोर्चा के आंदोलन के आगे फडणवीस सरकार झुकी

मराठा क्रांति मोर्चा के आंदोलन के आगे महाराष्ट्र की देवेंद्र फडणवीस सरकार झुक गई। सरकार ने शिक्षा में छूट देने का ऐलान किया और इस मामले को पिछड़ा आयोग भेजा।

महाराष्ट्र के विभिन्न हिस्सों से मराठा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले हजारों लोगों ने बुधवार को नौकरियों और शिक्षा सहित अन्य विभागों में आरक्षण की मांग लेकर सरकार पर दबाव बनाने के लिए मार्च निकाला।

मुंबई की सड़कों पर उतरे मराठाओं की मांगों पर महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने कुछ बड़े ऐलान किए हैं।

हालांकि उन्होंने आरक्षण की मांग को सीधे तौर पर नहीं माना है।

सीएम ने कहा कि शिक्षा के मामले में मराठा समुदाय के बच्चों को वे सारी सुविधाएं और छूट दी जाएंगी जो अभी ओबीसी छात्रों को मिल रही है। यही नहीं, सरकार ने जमीन और मराठा सुमदाय के बच्चों के लिए हर जिले में छात्रावास बनाने के लिए ग्रांट के रूप में 5 करोड़ रुपए देने का भी ऐलान किया है।

नौकरी में आरक्षण की मांग पर विचार करने के लिए यह मामला सरकार ने बैकवर्ड क्लास कमीशन (पिछड़ा वर्ग आयोग) के पास भेजने की बात कही जो मराठाओं को आरक्षण देने के आधार और संभावनाओं का अध्ययन करेगा।

फडणवीस ने कहा कि वह कमीशन से आग्रह करेंगे कि वह तेजी से प्रक्रिया को पूरा करे और बॉम्बे हाई कोर्ट को अपनी रिपोर्ट सौंपे।

मराठा क्रांति मोर्चा ने कड़ी सुरक्षा व्यवस्था में सुबह बायकुला में जीजामाता उद्यान से मौन मार्च निकाला। मार्च में शामिल होने वाले लोग भगवा झंडे लिये थे। निजी वाहनों के साथ-साथ सार्वजनिक वाहनों से लोग सवेरे से ही यहां पहुंचने लगे थे। पुलिस और यातायात कमिर्यों को भारी संख्या में आने वाले लोगों और मुंबई में वाहनों को नियंत्रित करने के लिए तैनात किया गया था।

मुंबई के मशहूर 'डब्बावाले' लोगों में से अधिकांश लोग मराठा समुदाय से ताल्लुक रखने वाले लोग हैं और उन्होंने भी मार्च में हिस्सा लिया। औरंगाबाद में इस तरह के पहले प्रदर्शन के ठीक एक साल बाद यह मराठा समुदाय का 58 वां मार्च था।

चंडीगढ़ छेड़छाड़ केस: विकास बराला गिरफ्तार, अपहरण की कोशिश का मामला दर्ज

आईएएस अफसर की बेटी के साथ छेड़छाड़ के मामले में हरियाणा बीजेपी के अध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे मुख्य आरोपी विकास बराला को बुधवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। विकास और उसके दोस्त आशीष को आज पुलिस ने लंबी पूछताछ के बाद गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस के मुताबिक, इस मामले में अपहरण की कोशिश का भी मामला दर्ज किया गया है। विकास बराला और उसके साथी को गुरुवार को कोर्ट के सामने पेश किया जाएगा और पुलिस कोर्ट से आरोपी के रिमांड की मांग करेगी। गिरफ्तारी से पहले दोनों आरोपी कड़ी सुरक्षा के बीच पुलिस के सामने मामले की जांच के लिए हाजिर हुए थे।

चंडीगढ़ पुलिस के डीजीपी ने छेड़छाड़ मामले पर बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि दोनों आरोपियों से लंबी पूछताछ की गई जिसके बाद उनके खिलाफ दो और धाराएं जोड़ने का फैसला किया गया।

उन्होंने कहा कि आरोपियों पर अपहरण की कोशिश के मामले में दो धाराएं 365 और 511 लगाई गई है। इसके बाद हमने दोनों आरोपियों को कल कोर्ट में पेश करने से पहले गिरफ्तार किया।

पुलिस पर राजनीतिक दबाव के सवाल पर अधिकारी ने कहा कि हमारे ऊपर किसी भी तरह का राजनीतिक दबाव नहीं है। हम जो भी कर रहे हैं, वो पूरी तरह से पेशेवर और निष्पक्ष है।

इससे पहले चंडीगढ़ पुलिस ने आईएएस अधिकारी की बेटी का पीछा करने के आरोप में बुधवार को हरियाणा बीजेपी के अध्यक्ष सुभाष बराला के बेटे विकास बराला को समन जारी किया था। विकास बराला को चंडीगढ़ के सेक्टर-26 के पुलिस स्टेशन में हाजिर होने के लिए कहा गया था।

सुभाष बराला के सेक्टर सात में स्थित आधिकारिक आवास के गेट पर बुधवार को समन नोटिस चिपकाया गया था। नोटिस चिपकाने वाले पुलिस अधिकारी ने कहा था कि ऐसा इसलिए किया गया है क्योंकि आरोपी नोटिस लेने के लिए मौजूद नहीं है। हालांकि, बराला परिवार का रिश्तेदार होने का दावा करने वाले कृष्णन ने मीडिया को बताया कि नोटिस स्वीकार कर लिया गया था।

पुलिस पर आरोपी विकास बराला और उनके दोस्त को बचाने का आरोप है जिन्होंने शनिवार को हरियाणा के अतिरिक्त मुख्य सचिव वी.एस. कुंडू की बेटी वर्णिका कुंडू का पीछा किया और धमकाया। पुलिस ने विकास और उनके दोस्त को युवती का पीछा करने के मामले में गिरफ्तार किया था। घटना के समय दोनों नशे में थे। पुलिस ने कमजोर धाराओं में मामला दर्ज किया जिससे दोनों कुछ ही घंटे में जमानत पर छूट गए। पीड़िता ने आरोप लगाया कि दोनों ने उसे डराने-धमकाने और अगवा करने की कोशिश की।

देश बचाओ, देश बनाओ रैली में उमड़ा जन सैलाब, समाजवादी पार्टी का बीजेपी पर बड़ा हमला

भारत भर में 9 अगस्त के दिन को क्रान्ति दिवस के रूप में मनाया जाता है क्योंकि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने 9 अगस्त 1942 के ही दिन अंग्रेजों को भारत से खदेड़ने के लिए 'भारत छोड़ो आंदोलन' की शुरुआत की थी।

ऐसे में बीजेपी की तानाशाही, सरकारी तंत्र के दुरूपयोग, जनविरोधी नीतियों एवं सांप्रदायिक राजनीति का पर्दाफाश करने के लिए 'अगस्त क्रान्ति दिवस' के ख़ास अवसर पर समाजवादी पार्टी ने उत्तर प्रदेश भर में 'देश बचाओ, देश बनाओ' रैली का आयोजन किया है।

इसी क्रम में मोदी के संसदीय क्षेत्र बनारस में समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं ने पूरे शहर के कोने-कोने से विशाल पदयात्रा निकाली जो शास्त्रीय घाट पर आकर सभा में तबदील हुई।

सभा में समाजवादी पार्टी के महानगर अध्यक्ष राजकुमार जायसवाल, जिलाध्यक्ष डॉ. पीयूष यादव, किशन दीक्षित, लोहिया वाहिनी के जिलाध्यक्ष सिद्धांत जायसवाल, प्रदेश सचिव प्रदीप जायसवाल, पूर्व मंत्री रीबू श्रीवास्तव, जिला पंचायत अध्यक्ष अपराजिता सोनकर, छात्र सभा अध्यक्ष सतीश यादव, डॉ ओपी सिंह ने योगी सरकार को लॉ एंड आर्डर के मामलों में आड़े हाथों लिया। वही, बीजेपी नेताओं के बचकानी हरकतों पर प्रकाश डाला।

समाजवादी पार्टी के नेताओं ने बीजेपी पर आरोप लगाया कि योगी सरकार समाजवादी पार्टी के महत्वाकांक्षी योजनाओं पर पलीता लगाने का काम कर रहे हैं जिसे किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समाजवादी पार्टी गरीबों और मजलूमों के साथ खड़ी है।

संसद में सोनिया गांधी का साम्प्रदायिक संगठनों पर हमला, ऐसे संगठनों का आजादी से कोई लेना देना नहीं था

भारत छोड़ो आंदोलन के 75 साले पूरे होने पर संसद में भाषण दिए गए। इसमें कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने सांप्रदायिक संगठनों पर बड़ा हमला किया।

सोनिया ने कहा कि आजादी के आंदोलन (भारत छोड़ो आंदोलन) के वक्त ऐसे संगठन भी थे जिनका कोई योगदान नहीं रहा।

सोनिया ने कहा कि ऐसे संगठनों का आजादी से कोई लेना देना नहीं था। सोनिया ने कहा, ''हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जिस वक्त भारत छोड़ो आंदोलन चल रहा था उस वक्त ऐसे संगठन और व्यक्ति भी थे जिन्होंने इसका विरोध किया था।''

महात्मा गांधी की अगुवाई में आंदोलन शुरू हुआ था। आंदोलन की शुरुआत में महात्मा गांधी को नजरबंद और नेहरु को गिरफ्तार कर लिया गया था। 940 लोग मारे गए, 1630 घायल, 18 हजार नजरबंद और 60 हजार से ज्यादा लोग गिरफ्तार हुए थे।

दंतेवाड़ा: राखी बँधवाने के कुछ मिनट बाद ही सीआरपीएफ जवानों ने आदिवासी छात्राओं से की छेड़छाड़

छत्तीसगढ़ के नक्सल प्रभावित दंतेवाड़ा जिले में तैनात केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सी आर पी एफ) के जवानों पर स्कूल के हॉस्टल में घुसकर छात्राओं से छेड़छाड़ करने के आरोप लगे हैं।

छत्तीसगढ़ पुलिस मामले की जांच कर रही है। हॉस्टल के वार्डेन ने इस बारे में पुलिस में लिखित शिकायत दर्ज कराई है।

शिकायत के मुताबिक, दंतेवाड़ा जिला मुख्यालय से 25 किलोमीटर दूर पालनार में यह घटना घटी है।

दंतेवाड़ा के एडिशनल पुलिस अधीक्षक अभिषेक पल्लव ने एच टी मीडिया को बताया कि हॉस्टल के वार्डेन ने पुलिस की वर्दी में आए अनजान लोगों के खिलाफ छात्राओं से छेड़छाड़ का आरोप लगाया है, इसके बाद हमलोगों ने जांच शुरु कर दी है।

पुलिस सूत्रों के मुताबिक, कुओकोंडा थाने में आई पी सी 354 के तहत एफ आई आर दर्ज कर लिया गया है। पीड़ित छात्राओं से बात करने के बाद इस केस में सी आर पी सी की धारा 164 भी जोड़ा जा सकता है। एडिशनल एसपी के मुताबिक, यह मामला काफी गंभीर है।

उन्होंने कहा कि पुलिस जल्द से जल्द छात्राओं का बयान दर्ज कर आरोपियों की पहचान करेगी।

यह मामला तब प्रकाश में आया, जब सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु ने अपने फेसबुक पोस्ट में रविवार को छेड़छाड़ की घटना का जिक्र किया।

पुलिस अधिकारी ने बताया कि 31 जुलाई को हॉस्टल में एक निजी टीवी चैनल द्वारा रक्षाबंधन पर एक कार्यक्रम रखा गया था जिसमें छात्राओं द्वारा सी आर पी एफ जवानों को राखी बांधा जाना था। जब यह कार्यक्रम संपन्न हो गया और कुछ लड़कियां बाथरूम गईं, तब वहीं सी आर पी एफ के जवानों ने उनके साथ छेड़छाड़ की।

उन्होंने बताया कि तलाशी के नाम पर सी आर पी एफ जवानों ने लड़की से छेड़छाड़ की। इसकी शिकायत वार्डेन ने वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से की, लेकिन कुछ कार्रवाई नहीं हुई।

सामाजिक कार्यकर्ता हिमांशु के मुताबिक, पालनार में सी आर पी एफ कैम्प से 100 मीटर की दूरी पर ही हॉस्टल है। वहां पहले भी सी आर पी एफ अधिकारियों द्वारा उत्पीड़न की घटनाएं सामने आती रही हैं।

इस मामले के बाद आदिवासी नेता सोनी सोरी ने स्कूल का दौरा करने की कोशिश की, लेकिन वार्डेन ने उन्हें मना कर दिया।

बता दें कि नक्सल प्रभावित इलाकों में पहले भी सुरक्षा बलों पर मानवाधिकारों का हनन करने और महिलाओं से बलात्कार करने की खबरें आती रही हैं।

फारुख अब्दुल्ला का आरएसएस-बीजेपी पर हमला, अब की बार विरोध और बड़े पैमाने पर होगा

जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अबदुल्ला ने केंद्र की मोदी सरकार पर हमला बोला है। सोमवार (7 अगस्त) को फारुख ने कहा कि बीजेपी और राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ मिलकर जम्मू और कश्मीर की स्वायत्ता को खत्म करना चाहते हैं।

फारुख अबदुल्ला ने कहा कि यह ही संघ का प्लान है। अबदुल्ला ने आगे कहा, महबूबा ने कहा है कि अगर अनुच्छेद 35A से छेड़छाड़ हुई तो वह कुर्सी छोड़ देंगी, उम्मीद है कि वह अपनी बात पर टिकेंगी।

अबदुल्ला ने अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले का जिक्र करते हुए कहा, याद करो लोग रातो-रात विरोध में खड़े हो गए थे। अब की बार विरोध और बड़े पैमाने पर होगा।

भारत के संविधान के अनुच्छेद 35A के तहत जम्मू-कश्मीर की विधान सभा के पास विशेषाधिकार है कि वह अपने आधार पर स्थायी नागरिक की परिभाषा तय करे, साथ ही उन्हें चिन्हित कर विभिन्न विशेषाधिकार भी दे सके।

गौरतलब है कि भारत के संविधान के अनुच्छेद 370 के द्वारा ही जम्मू-कश्मीर भारतीय संघ से जुड़ा है।

अनुच्छेद 370 जम्मू-कश्मीर को कुछ विशेष अधिकार प्रदान करता है।

1954 में संविधान संशोधन के द्वारा अनुच्छेद 35A को संविधान में जोड़ा गया था।

पिछले दिनों ऐसी खबरें आई थी कि मोदी सरकार इसमें कुछ फेरबदल कर सकती है। इसके लिए मोदी सरकार को संविधान संधोधन विधेयक लाकर अनुच्छेद 35A  में संधोधन करना होगा।

असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान को गिराना गैरकानूनी और मनमानी है

मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुसलमीन (एम आई एम) ने मस्जिद गिराए जाने की निंदा की है। इससे पहले रविवार को कृष्णा जिले के कंकिपुडा मंडल में ईदपुग्गल में स्थित मस्जिद-ए-अली को आंध्र प्रदेश सरकार के राजस्व अधिकारियों ने तोड़ दिया था।

एम आई एम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने कहा, ''मस्जिद, दरगाह और कब्रिस्तान को सड़क चौड़ा करने के नाम पर गिराना गैरकानूनी और मनमानी है।''

उन्होंने कहा, ''कोई भी मस्जिद स्थानांतरित और ढ़ाई नहीं जा सकती है क्योंकि यह अल्लाह की संपत्ति है। यहां तक कि मस्जिद को बनाने वाले शख्स को भी यह अधिकार नहीं है कि वह मस्जिद को शिफ्ट या तोड़ सके।

डेक्कन क्रॉनिकल की रिपोर्ट के मुताबिक, ओवैसी ने आरोप लगाया कि मई 2016 के बाद से राजस्व अधिकारियों ने मस्जिदों, दरगाहों और कब्रिस्तानों को मनमाने ढंग से गिराया। सालों पुरानी मस्जिद-ए-अबु बकर, हजरत शाह जहूर मुसाफिर दरगाह, तारापेट मस्जिद और जन्नातुल फिरदौस कब्रिस्तान को गिराया गया था।''

उन्होंने कहा कि यह धार्मिक स्थानों की सुरक्षा के लिए कानूनों का पूर्ण उल्लंघन है। आंध्र प्रदेश राज्य वक्फ बोर्ड के अनुरोध और स्थानीय मुस्लिमों के विरोध की अनदेखी की गई है।

ओवैसी ने कहा, ''इस संबंध में उन्होंने आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू को मई 2016 और मई 2017 में धार्मिक स्थलों पर राजस्व अधिकारियों की कार्रवाई के खिलाफ चिट्ठी लिखी थी।

रविवार को ओवैसी ने आंध्र प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी दिनेश कुमार से मुलाकात की थी और आंध्र प्रदेश सरकार से मुसलमान के धार्मिक स्थलों को गिराए जाने से रोकने की मांग की थी।

साथ ही उन्होंने राजस्व अधिकारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की थी।

ओवैसी ने गिराई गई मस्जिदों, दरगाह और कब्रिस्तानों के पुनर्निर्माण की मांग की है।