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शरद यादव ने नहीं खोले पत्ते, विपक्षी नेताओं के साथ सम्मेलन करेंगे

नीतीश कुमार के महागठबंधन को छोड़ बीजेपी से हाथ मिलाने को पार्टी के वरिष्ठ नेता शरद यादव ने दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है।

सोमवार (31 जुलाई) को उन्होंने महागठबंधन से नीतीश के अलग होने को दुर्भाग्यपूर्ण बताया, लेकिन माना जा रहा है कि उन्होंने अभी तक अपने सभी पत्ते नहीं खोले हैं।

सूत्रों के मुताबिक, शरद यादव के करीबी नेताओं का इशारा है कि वह 19 अगस्त को होने वाली जनता दल यूनाइटेड की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक से पहले, दिल्ली में सभी विपक्षी नेताओं के साथ सम्मेलन में शिरकत करेंगे।

सूत्रों के मुताबिक, बिहार इकाई से इतर जनता दल यूनाइटेड की 20 अन्य इकाई भी नीतीश कुमार और शरद यादव को पत्र लिखेगी।

इस पत्र के जरिए पार्टी की अन्य इकाई नीतीश के बीजेपी से हाथ मिलाने को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर करेगी।

शरद यादव ने नीतीश के बीजेपी से हाथ मिलाने पर कहा था, ''बिहार में स्थिति ठीक नहीं है। राज्य के 11 करोड़ मतदाताओं ने महागठबंधन को चुना था। मैं गठबंधन सरकार के टूटने से दुखी हूं। गठबंधन टूटना नहीं चाहिए था। इस टूट से दुखी हूं और पार्टी के लोगों से बात कर रहा हूं। इससे ज्यादा अभी कुछ कहना मैं ठीक नहीं समझता।''

इसी बीच जनता दल यूनाइटेड महासचिव केसी त्यागी का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि कोई भी पार्टी को क्षति पहुंचाने या उस तोड़ने की कोशिश नहीं करेगा। त्यागी ने कहा, ''शरद जी एक लोकतांत्रिक व्यक्ति हैं और वह पार्टी के फैसले या लोगों के खिलाफ नहीं जाएंगे।''

सूत्रों के मुताबिक, शरद यादव पार्टी की राष्ट्रीय कार्यकारिणी बैठक में शामिल होंगे, लेकिन वह बीजेपी के साथ गठबंधन पर भी अपनी बात कहेंगे। विपक्षी नेताओं के साथ सम्मेलन, इसी महीने के दूसरे हफ्ते में होने की उम्मीद है।

मुफ्ती ने कहा, या तो राम रहेंगे या रहीम, ये दोनों साथ नहीं रह सकते

बिहार की नीतीश सरकार के मंत्री खुर्शीद आलम द्वारा 'जय श्री राम' कहने से विवाद बढ़ने पर उन्होंने माफी मांग ली है, लेकिन मंत्री के खिलाफ जारी फतवा और उसे जारी करने वाले इमारत-ए-शरिया के मुफ्ती सोहेल कासमी के बयान पर अभी भी बहस जारी है।

रविवार (30 जुलाई) को टीवी चैनल 'आज तक' पर डिबेट के दौरान मुफ्ती ने कहा कि या तो राम रहेंगे या रहीम, ये दोनों साथ नहीं रह सकते।

मुफ्ती ने बार-बार इस बात की तस्दीक की कि मंत्री खुर्शीद आलम ने यह कहा था कि वो राम और रहीम की पूजा एक साथ करते हैं। जब एंकर ने उनसे यह पूछा कि क्या खुर्शीद आलम के जय श्री राम कहने पर आपको कोई आपत्ति है तो मुफ्ती ने कहा, इससे हमें कोई परहेज नहीं है, लेकिन राम और रहीम की पूजा एक साथ नहीं हो सकती।

मुफ्ती ने साफ किया कि सिर्फ जय श्री राम का नारा लगाने की वजह से खुर्शीद आलम के खिलाफ फतवा जारी नहीं किया गया है बल्कि उन्होंने यह बयान दिया कि वो राम और रहीम की पूजा एकसाथ करते हैं, इस जुमले की वजह से उनके खिलाफ फतवा जारी किया गया है। मुफ्ती ने कहा कि इस्लाम में बुनियादी कलमा है, लाइलाहइलल्ला ... यानी इस्लाम में अल्लाह ही सबसे ऊपर है।

इससे पहले मुफ्ती ने खुर्शीद आलम के खिलाफ फतवा जारी कर कहा था कि ''जो मुसलमान जय श्री राम का नारा लगाए और ये कहे कि मैं रहीम के साथ-साथ राम की भी पूजा करता हूं .... मैं भारत के सभी धार्मिक स्थान पर माथा टेकता हूं ....  ऐसा व्यक्ति इस्लाम से खारिज और मुस्तद है। उसकी पत्नी उसके निकाह से बाहर हो गई। ऐसे व्यक्ति पर दोबारा ईमान कबूल करना एवं दोबारा निकाह करना और तौबा करना आवश्यक है। और जब तक वह ऐसा नहीं करे, तब तक मुस्लिमों को उससे किसी तरह का संबंध रखना स्थाई तौर पर जायज नहीं है। ऐसे शख्स से खुद भी बचें और मुसलमानों को भी बचाएं।''

बिहार के गन्ना और अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खुर्शीद उर्फ फिरोज अहमद ने एक मुफ्ती की आलोचना के बाद रविवार को माफी मांग ली।

शुक्रवार को राजग सरकार के विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने के बाद फ़िरोज़ अहमद ने जय श्रीराम का नारा लगाया था। बिहार में सत्ताधारी जनता दल यूनाइटेड के पश्चिम चंपारण जिले के सिकटा विधानसभा क्षेत्र से विधायक खुर्शीद ने नीतीश कुमार नीत प्रदेश की नवगठित राजग सरकार के गत शुक्रवार को बिहार विधानसभा में विश्वास मत हासिल करने के बाद सदन परिसर में पत्रकारों से बातचीत के दौरान जय श्रीराम के नारे लगाए थे।

खुर्शीद ने रविवार को कहा कि अगर उनके किसी भी बयान से किसी को तकलीफ पहुंची है, तो उसके लिए वे माफी मांगते हैं। उन्होंने उक्त कथन को तोड़-मरोड़कर पेश करने और साजिश रचने का आरोप लगाया।

मोदी सरकार वीएचपी, बजरंग दल और गौरक्षकों को उकसाती है: खड़गे

भारतीय संसद के मानसून सत्र का आज 11वां दिन है। आज भी संसद के दोनों सदनों में हंगामा जारी है। उच्च सदन राज्यसभा में जहां गुजरात में कांग्रेस विधायकों की खरीद-फरोख्त का मुद्दा उठा, वहीं लोकसभा में नेता विपक्ष मल्लिकार्जुल खड़गे ने गौरक्षा के नाम पर हो रही हिंसा का मुद्दा उठाया।

खड़गे ने केंद्र की भाजपा सरकार पर आरोप लगाया कि वह देश की आबो-हवा बिगाड़ना चाहती है और भय का माहौल बनाना चाहती है।

खड़गे ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भले ही भाषणों में गौरक्षा के नाम पर हिंसा को बर्दाश्त नहीं करने की बात करते हों, लेकिन असल में उनकी सरकार के मंत्री, सांसद और उनकी पार्टी के विधायक और अन्य नेता ही गौरक्षा के नाम पर भीड़ द्वारा हत्या को प्रोत्साहित करते हैं। उन्होंने कहा कि आज पूरे देश में भय और आतंक का माहौल है। भीड़ द्वारा हत्याओं का सिलसिला थम नहीं रहा है।

नेता विपक्ष ने कहा कि मोदी सरकार परोक्ष रूप से विश्व हिन्दू परिषद (वीएचपी), बजरंग दल और गौरक्षकों की मदद कर रही है। उन्होंने कहा कि बीजेपी शासित राज्य खासकर झारखंड और मध्य प्रदेश मॉब लिंचिंग सेन्टर बन चुके हैं। खड़गे ने अपने भाषण में सहारनपुर और नई दिल्ली से पलवल के बीच चलती ट्रेन में जुनैद की भीड़ द्वारा पीट-पीटकर की गई हत्या का भी जिक्र किया।

खड़गे ने पीएम मोदी पर हमला करते हुए कहा कि आप एक्शन की बात करते हैं, लेकिन क्या आप बता सकते हैं कि आपने इन बहशी तथाकथित गौरक्षकों पर क्या कार्रवाई की है? उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने जिस दिन हिंसक भीड़ द्वारा हत्या की आलोचना की और कार्रवाई की बात कही, उसी दिन ऐसी घटनाएं फिर घटीं।

खड़गे ने कहा कि पीएम ने इस मामले में शीघ्र और कठोर कार्रवाई की बात कही थी, लेकिन कुछ नहीं हुआ। उन्होंने सीधे-सीधे प्रधानमंत्री से पूछा, आप सदन को बताएं कि इस संबंध में आप ने क्या कदम उठाए हैं?

कांग्रेस नेता ने कहा कि यह शर्मनाक स्थिति है कि सरकार कुछ शरारती तत्वों के आगे बौनी पड़ गई है और उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं कर रही है।

उन्होंने कहा कि सरकार मूकदर्शक बनी बैठी है और गौरक्षा के नाम पर तथाकथित गौरक्षकों की हिंसक घटनाओं को सिर्फ देख रही है।

बीजेपी सांसद हुकुमदेव नारायण यादव ने कहा कि पीएम खुद कई बार मॉब लिचिंग की घटनाओं पर दुख और रोष प्रकट कर चुके हैं। अब राज्यों की जिम्मेदारी बनती है कि वो उसकी अनुपालन करें।

यादव ने कहा कि केंद्र सरकार खुद वहां पारामिलिट्री फोर्स नहीं भेज सकती।

लालू ने कहा, विश्‍वास का खूनी और जनमत का डकैत है नीतीश

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू यादव का बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार पर हमला जारी है। रविवार को लालू यादव ने नीतीश कुमार पर बड़ा हमला किया और उनके लिए कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया।

लालू यादव ने नीतीश कुमार को 'अनैतिक कुमार' बताया। लालू यादव ने एक ट्वीट में लिखा कि नीतीश कुमार भरोसे का खून करने वाले और जनमत के डकैत हैं।

लालू यादव ने लिखा, ''वो नैतिकता, राजनीति, सामाजिक, लोकतांत्रिक भ्रष्टाचार का दुष्ट बॉस है, उसने भरोसे का खून किया है, जनमत का डकैत है, वो अनैतिक कुमार कौन है।''

हालांकि लालू यादव ने अपने ट्वीट में नीतीश का नाम नहीं लिया है। लेकिन ट्वीट की भाषा और संदर्भ बताते हैं कि लालू यादव नीतीश कुमार से बेहद खफा हैं। नीतीश कुमार आरजेडी के साथ 20 महीने पुरानी सरकार को गिराते हुए बीजेपी के साथ नयी सरकार बना ली है।

नीतीश कुमार की राजनीतिक चाल से हतप्रभ लालू यादव अब अपने इस पुराने सहयोगी के खिलाफ नये राजनीतिक आंदोलन की शुरुआत करना चाहते हैं। लालू यादव को इस आंदोलन के लिए अब नीतीश की ही पार्टी के सहयोगी शरद यादव के साथ की दरकार है।

दावा किया जा रहा है कि बिहार के कद्दावर यादव नेता शरद यादव नीतीश-मोदी की इस दोस्ती से ज्यादा खुश नहीं है और पार्टी में बगावत कर सकते हैं। शनिवार 29 जुलाई को भी लालू यादव ने ट्वीट कर शरद यादव से गुहार लगाई थी कि दक्षिणपंथी ताकतों के खिलाफ नयी राजनीतिक लड़ाई में वो उनका साथ दें।

खबर है कि शरद यादव को मनाने के लिए उन्हें केन्द्र में मंत्रीपद दिया जा सकता है। हालांकि वामपंथी नेता डी राजा ने रविवार को शरद यादव से मुलाकात के बाद कहा कि शरद यादव नीतीश कुमार की बीजेपी के साथ नयी दोस्ती से नाखुश हैं।

इनकम टैक्‍स जमा करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई से आगे बढ़ी

भारत में वित्त वर्ष 2016-17 का आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए सोमवार (31 जुलाई, 2017) को आखिरी दिन था जिसमें किसी तरह की ढील देने का कोई प्रस्ताव नहीं था। यानी अगर आपने सोमवार को इनकम टैक्स नहीं दाखिल किया तो फिर आयकर नहीं भर पाएंगे। लेकिन सरकार ने सोमवार (31 जुलाई, 2017) को ताजा बयान में आयकर रिटर्न दाखिल करने के लिए विस्तार दिया है।

एक आधिकारिक बयान के तहत अब वित्त वर्ष 2016-17 का आयकर रिटर्न पांच अगस्त (2017) तक दाखिल किया जा सकेगा।

गौरतलब है कि आयकर विभाग में पहले ही दो करोड़ से ज्यादा लोग अपना रिटर्न दाखिल कर चुके हैं। इससे पहले एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा था आयकर रिटर्न दाखिल करने की अंतिम तिथि 31 जुलाई है। इसे बढ़ाने का प्रस्ताव नहीं है।

आयकर विभाग के पास इलेक्ट्रॉनिक रूप में पहले ही दो करोड़ से अधिक रिटर्न दाखिल किए जा चुके हैं। विभाग ने करदाताओं से समय पर रिटर्न दाखिल करने की अपील की थी। वहीं ई-फाइलिंग की वेबसाइट पर कुछ समस्याएं आने के बारे में अधिकारी ने कहा था कि विभाग की इस वेबसाइट पर कोई बड़ी गड़बड़ नहीं देखी गई है, सिर्फ कुछ समय के लिए इस पर रखरखाव के चलते व्यवधान देखा गया था। कुछ समय के लिए ई-फाइलिंग वेबसाइट http://incometaxindiaefiling.gov.in/ में समस्या आ रही थी, जब मेंटिनेंस के लिए पोर्टल की सेवाओं को बाधित कर दिया गया था।

विभाग की ओर से कुछ दिन पहले भारत के सभी बड़े राष्ट्रीय अखबारों में विज्ञापन जारी करके टैक्स दाताओं को अपनी सही आय और आईटीआर 31 जुलाई या उससे पहले दाखिल करने के लिए कहा था।

जानकारी के लिए बता दें कि करदाताओं को आयकर रिटर्न (आईटीआर) भरने के लिए एक जुलाई से आधार नंबर को पैन कार्ड से लिंक कराना भी अनिवार्य कर दिया गया है। विभाग ने आईटीआर में करदाताओं से नोटबंदी के दौरान पिछले साल 9 नवंबर से 30 दिसंबर के बीच बैंकों में 2 लाख रुपए या उससे ज्यादा कैश जमा कराने की भी जानकारी मांगी है।

नीतीश कुमार के फैसले को शरद यादव ने बताया दुर्भाग्‍यपूर्ण

सोमवार (31 जुलाई) को जनता दल यूनाइटेड के वरिष्ठ नेता शरद यादव और एनडीए में शामिल नेता जीतन राम मांझी ने खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी है।

जहाँ शरद यादव ने बिहार में बीजेपी के साथ मिलकर सरकार बनाने के नीतीश कुमार के फैसले को दुर्भाग्यपूर्ण बताते हुए कहा है कि वो इससे समहत नहीं थे।

वहीं मांझी ने रामविलास पासवान को केंद्र में और उनके भाई को राज्य में मंत्री बनाए जाने के उदाहरण देकर अपने बेटे संतोष सुमन को नीतीश कैबिनेट में जगह देने की मांग की है। शरद यादव ने कहा, ''मैं बिहार में इस फैसले से सहमत नहीं, ये दुर्भाग्यपूर्ण है। जनता ने इसके लिए वोट नहीं दिया था।''

नीतीश कुमार ने 26 जुलाई को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देते हुए लालू यादव की राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस से अपना महागठबंधन तोड़ लिया था। अगले ही दिन नीतीश ने एनडीए के समर्थन से सरकार बना ली और मुख्यमंत्री पद की छठवीं बार शपथ ली। बीजेपी नेता सुशील मोदी को राज्य का डिप्टी सीएम बनाया गया। महागठबंधन के टूटने के बाद से ही कयास लगाया जा रहा था कि शरद यादव नीतीश के फैसले से खुश नहीं हैं।

दूसरी तरफ एनडीए के घटक दल एचएएम (एस) के नेता जीतन राम मांझी नाराज बताए जा रहे थे। खबरों के अनुसार मांझी चाहते हैं कि उनके बेटे संतोष सुमन को बिहार में मंत्री बनाया जाए।

नीतीश कुमार ने शनिवार (29 जुलाई) को 27 सदस्यीय मंत्रिमंडल का  कैबिनेट का गठन किया। नीतीश कैबिनेट में जनता दल यूनाइटेड के 14, बीजेपी के 12 और लोजपा के एक नेता को मंत्री बनाया गया।

लोजपा प्रमुख रामविलास पासवान के भाई पशुपति पासवान न तो एमएलए हैं और न ही एमएलसी फिर भी उन्हें मंत्री बनाया गया। अब पशुपति पासवान को छह महीने के अंदर किसी एक सदन का सदस्य बनना होगा।

एनडीए के घटक दल आरएलएसपी के प्रमुख और नरेंद्र मोदी कैबिनेट में मंत्री उपेंद्र कुशवाहा भी बिहार सरकार में जगह नहीं दिए जाने से नाराज बताए जा रहे हैं।

बिहार में साल 2015 में हुए विधान सभा चुनाव में कुशवाहा, पासवान और मांझी की पार्टियों ने बीजेपी के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। कुशवाहा और पासवान की पार्टी को दो-दो सीटों और मांझी की पार्टी को एक सीट पर जीत मिली थी।

बिहार में एनडीए के पास कुल 58 विधायक हैं। 243 सदस्यों वाली विधान सभा में जनता दल यूनाइटेड के पास 71 विधायक हैं। नीतीश कुमार को विश्वासमत प्रस्ताव के दौरान 131 विधायकों का समर्थन मिला था।

दो निर्दलीय विधायकों ने भी नीतीश सरकार का समर्थन किया था। नीतीश सरकार के विश्वास मत के खिलाफ 108 वोट पड़े थे। राष्ट्रीय जनता दल के पास 80 विधायक हैं और कांग्रेस के पास 27 यानी राजद-कांग्रेस को एक निर्दलीय विधायक का समर्थन मिला था।

कलाम की मूर्ति के हाथ में वीणा और बगल में गीता रखने पर बढ़ा विवाद

भारत के पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम की याद में बनाए गए कलाम मेमोरियल में कलाम की मूर्ति के बगल में भगवद्गीता रखे जाने पर विवाद शुरू हो गया है। डॉ. कलाम के परिजनों सहित कई राजनीतिक पार्टियों ने मेमोरियल में वीणा बजाते हुए कलाम की मूर्ति और उसके पास भगवद्गीता रखे जाने पर विरोध दर्ज कराया है।

आपको बता दें कि 27 जुलाई को कलाम की दूसरी पुण्यतिथि पर पीएम मोदी ने तमिलनाडु के रामेश्वरम में कलाम मेमोरियल का उद्घाटन किया था।

डॉ. कलाम के परिजनों का कहना है कि कलाम की प्रतिमा के पास सभी धर्मों के महान ग्रन्थों के अंश होने चाहिए। वहीं डीएमके नेता स्टालिन ने इस विवाद पर कहा है कि कलाम की प्रतिमा के पास गीता को दिखाकर मोदी सरकार ने सांप्रदायिकता थोपने की कोशिश की है।

वीसीके नेता तिरुमवलन ने तो गीता को हटवाने की मांग करते हुए ये तक कह दिया कि कलाम की प्रतिमा के पास गीता को जगह देकर कलाम को हिंदू धर्म के महान प्रेमी के रूप में पेश किया जा रहा है। इससे मुस्लिमों का भी अपमान हुआ है, इसे तुरंत हटाया जाना चाहिए। एमडीएमके नेता वायको ने इस मुद्दे पर कहा है कि क्या गीता तिरुक्करल से ज्यादा महान ग्रन्थ है? हमें अच्छे से पता है कि बीजेपी इन तरीकों से क्या करना चाह रही है?

आपको बता दें कि कलाम मेमोरियल को बनाने में 15 करोड़ रुपये की लागत आई है और इसके लिये कलाम के गांव पीकारंबू में तमिलनाडु सरकार ने जमीन आवंटित की थी। इस मौके पर प्रधानमंत्री मोदी ने कलाम की लकड़ी से बनी एक प्रतिमा का भी अनावरण किया जिसमें वह वीणा बजाते हुये दिख रहे हैं। पूर्व राष्ट्रपति इस वाद्य यंत्र को बजाने में निपुण थे।

गुजरात तट पर जहाज से पकड़ी गई 3500 करोड़ की हीरोइन

गुजरात तट पर भारतीय तट रक्षक बल ने करोड़ों के ड्रग्स (हीरोइन) ले जा रहे जहाज को पकड़ा है।

आधिकारिक सूत्रों ने रविवार को बताया कि गुजरात तट पर इंडियन कोस्ट गार्ड के जहाज समुद्र पावक ने एक मालवाहक जहाज को इंटरसेप्ट किया। नशीला पदार्थ ले जा रहे मालवाहक जहाज की तलाशी लेने पर उसमें से साढे तीन हजार करोड़ की हीरोइन बरामद की गई है।

जहाज से करीब 1500 किलो हीरोइन मिलने की बात सामने आई है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, यह अब तक जब्त किए गए मादक पदार्थों की सबसे बड़ी खेप है। इंटेलिजेंस से मिली जानकारी के मुताबिक वेसल को 29 जुलाई को 12 बजे इंटरसेप्ट किया गया था।

इतनी बड़ी मादक पदार्थ की खेप पकड़े जाने पर सभी सुरक्षा और जांच एजेंसियां सतर्क हो गई हैं। इंडियन कोस्ट गार्ड, इंटेलिजेंस ब्यूरो, पुलिस, कस्टम, नौसेना और अन्य एजेंसियां इस मामले में संयुक्त जांच कर रही है। इंडियन कोस्ट गार्ड की इस कार्रवाई को बड़ी कामयाबी मानी जा रही है। हालांकि ड्रग्स के बारे में अभी ज्यादा जानकारी नहीं मिल सकी है।

अमित शाह की संपत्ति में 300 गुना इजाफे की खबर को 'टाइम्स ग्रुप' ने डिलीट किया

बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह की संपत्ति पिछले 5 सालों में 300 गुना बढ़ गई है। इस बात का खुलासा 28 जुलाई को राज्यभा सदस्य पद के नामांकन में हुआ।

बीजेपी के अमित शाह, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी, कांग्रेस छोड़ बीजेपी में शामिल हुए बलवंत सिंह राजपूत और सोनिया गांधी के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल ने बीते शुक्रवार को राज्यसभा चुनाव के लिए गुजरात से नामांकन दाखिल किया।

नामांकन पत्रों में इन चारों उम्मीदवार की संपत्ति में इजाफा देखने को मिला। निर्वाचन आयोग को दिए गए हलफनामे के अनुसार, पिछले पांच सालों में अमित शाह की संपत्ति में करीब 300 गुना की बढ़ोत्तरी हुई है। अमित शाह की संपत्ति में इस भारी बढ़ोत्तरी की खबर अगले दिन शनिवार 29 जुलाई को भारत के कई अखबारों में छपीं। प्रमुख अंग्रेजी अखबारों में से एक 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इकोनॉमिक टाइम्स' ने भी अपने वेबसाइट पर इस खबर को प्रकाशित किया था।

हिमांशु कौशिक और कपिल डवे की इस रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि भारत की केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण और कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी ने इस बार अपने हलफनामे में कबूल किया है कि उन्होंने अभी तक बी कॉम की डिग्री पूरी नहीं की है। टाइम्स ग्रुप की यह रिपोर्ट कुछ घंटों में ही सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी।

खबर के वायरल होने के बाद बिना कोई कारण बताए 'टाइम्स ऑफ इंडिया' और 'इकोनॉमिक टाइम्स' ने अपने-अपने वेबसाइट में इस खबर को डिलीट कर दिए। इस खबर को टाइम्स ग्रुप के हिंदी न्यूज़ पोर्टल 'नवभारत टाइम्स' ने भी अपने वेबसाइट से डिलीट कर दिया।

'जय श्री राम' बोलने पर इस्लाम से निकालने का फतवा जारी

बिहार विधानसभा में 'जय श्रीराम' का नारा लगाने पर नीतीश सरकार के अल्पसंख्यक मंत्री खुर्शीद उर्फ फिरोज अहमद के खिलाफ फतवा जारी किया गया है।

इस्लामी संस्था इमारत-ए-शरिया ने ये फतवा जारी किया है। इमारत-ए-शरिया ने फतवा जारी करते हुए उन्हें इस्लाम से खारिज और मुर्तद करार दिया है।

आपको बता दें कि नीतीश सरकार के फ्लोर टेस्ट में जीत हासिल होने के बाद बिहार विधानसभा में फिरोज अहमद 'जय श्रीराम' के नारे लगाये थे।

साथ ही उन्होंने कहा था कि महागठबंधन टूटने के लिए मनोकामना मंदिर में पूजा की थी। खुर्शीद ने कहा था राम और रहीम एक हैं, बांटने की राजनीति अब नहीं चलेगी।

आपको बता दें कि इस घटना के अगले दिन ही नीतीश कैबिनेट में उन्हें अल्पसंख्यक मंत्री बनाया गया।

इमारत-ए-शरिया द्वारा इस्लाम से बर्खास्त करने के फतवे पर मंत्री फिरोज अहमद ने कहा है कि भगवान जानता है कि 'जय श्री राम' के नारे लगाने के पीछे मंशा क्या थी? मेरा काम बताएगा कि मैं कौन हूं? अगर मुझे बिहार के लोगों के लिए विकास और सामंजस्य के लिए 'जय श्री राम' कहना पड़ता है तो मैं कभी इससे पीछे नहीं हटूंगा। बिहार के लिए मैं 100 बार 'जय श्री राम' बोलूंगा।