मुंबई पुलिस ने बुधवार को शिवसेना नेता सुनील सिताप को गिरफ्तार किया है। सिताप को मुंबई के घाटकोपर इलाके में चार मंजिला एक आवासीय इमारत के ढह जाने की घटना के बाद गैर इरादतन हत्या के मामले में गिरफ्तार किया है।
मंगलावर को इमारत के ढह जाने की घटना में मलबे से पांच और शव बरामद होने के बाद मरने वालों की संख्या बढ़कर 17 हो गई। महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इस मामले में जांच के आदेश दिए हैं।
जानकारी के मुताबिक, यह बिल्डिंग सिताप के नाम पर है और स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर में स्थित नर्सिंग होम में रिनोवेशन का काम किया जा रहा था जिस वजह से बिल्डिंग गिरी है।
पुलिस ज्वाइंट कमिश्नर (कानून एवं व्यवस्था) ने कहा कि शुरुआती जांच में पता लगा है कि बिल्डिंग में अवैध रूप से रिनोवेशन कराया जा रहा था। मामले की जांच की जा रही है।
न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक, एक स्थानीय शख्स ने कहा, ''बिल्डिंग में नवीनीकरण का काम किया जा रहा था। बिल्डिंग के ग्राउंड फ्लोर पर शिवसेना नेता का नर्सिंग होम है। इसका नाम सिताप नर्सिंग होम है। इसमें चल रहे काम को रुकवाने के लिए सोमवार को स्थानीय लोगों ने मीटिंग भी की थी।''
चश्मदीदों के मुताबिक, सुबह 10.43 बजे के आस-पास इमारत अचानक ढह गई और धूल के गुबार के बीच उन्होंने कराहने व मदद के लिए चिल्लाने की आवाजें सुनीं। मुंबई अग्निशमन विभाग, बीएमसी बचाव दल, राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (एनडीआरएफ) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एस डी आर एफ) 14 दमकलों, बचाव वाहनों, एंबुलेंस, जेसीबी तथा मेटल कटर के साथ घटनास्थल पर पहुंचे।
यह इमारत बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के खतरनाक इमारकों की सूची में शामिल थी और छह महीने पहले ही उसे खाली करने का नोटिस जारी किया गया था। दिल्ली में मौजूद महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने मामले की जांच का आदेश दिया है और निगम आयुक्त अजय मेहता से 15 दिनों के अंदर रिपोर्ट सौंपने को कहा है।
एनडीए में बीजेपी की सहयोगी पार्टी शिवसेना ने केंद्र की मोदी सरकार पर एक बार फिर से हमला किया है। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने मंगलवार को कहा कि चीन को उकसाने से पहले देश को अपनी रक्षा तैयारियों को ध्यान में रखना चाहिए।
उद्धव ठाकरे ने कहा कि चुनाव तो झूठे वादों की दम पर जीते जा सकते हैं, लेकिन जंग खुद की प्रशंसा करके नहीं जीती जा सकती।
उद्धव ठाकरे ने शिवसेना के मुखपत्र 'सामना' को दिए इंटरव्यू में कहा, ''पाकिस्तान और चीन की ओर से मिलने वाली धमकियों में हाल के दिनों में वृद्धि हुई है और हमारे पास उनसे लड़ने के लिए पर्याप्त गोला-बारूद नहीं है।''
उद्धव ने बीजेपी से सवाल पूछते हुए कहा कि तीन साल में इस ताकतवर सरकार ने क्या किया?
भारत की ओर से चीन को यह बताने पर कि अब वह 1962 वाला भारत नहीं है, पर निशाना साधते हुए उद्धव ठाकरे ने कहा कि जब हम चीन को बताते हैं कि आज का भारत, 1962 के भारत से अलग है, तो हमें अपना मुंह खोलने से पहले अपने पास मौजूद गोला-बारूद को याद रखना चाहिए।
केंद्र और महाराष्ट्र में बीजेपी सरकार की सहयोगी शिवसेना ने कहा, ''कोई भी झूठे वादों और आत्म-प्रशंसा पर चुनाव जीत सकता है लेकिन युद्ध नहीं।''
साथ ही ठाकरे ने कहा कि सरकार लोगों को रोजगार उपलब्ध कराने के अपने वादे में असमर्थ साबित हुई है। उन्होंने कहा कि नोट बंदी के बाद के 4 महीनों में 15 से 16 लाख लोगों ने अपनी नौकरी गंवाई और भविष्य में स्थितियां और खराब होने वाली है।
महाराष्ट्र निकाय चुनाव में बीजेपी की जीत पर शिवसेना सुप्रीमो ने कहा कि यह सिर्फ महाराष्ट्र में हुआ है और गोवा तथा पंजाब जैसे राज्यों में पार्टी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर पाई है।
उन्होंने कहा कि गोवा में कांग्रेस की ओर से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी समेत पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने प्रचार नहीं किया था, जबकि पीएम मोदी ने पार्टी के लिए प्रचार किया था। कांग्रेस ने चुनाव में कोई भी बड़ा चेहरा नहीं उतारा था, लेकिन बीजेपी से ज्यादा सीटें जीतने में कामयाब रही। वहीं, पंजाब में बीजेपी का नाश हो गया।
भारत के 14वें राष्ट्रपति के रूप में मंगलवार (25 जुलाई) को शपथ ग्रहण करने वाले राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) समर्थित देश के पहले राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद अपने पहले भाषण में ही संघ परिवार को पसंद आने वाले विचारकों का जिक्र करना नहीं भूले।
राष्ट्रपति कोविंद अपने भाषण में देश की राजनीति के ऐसे दिग्गजों का जिक्र करने से साफ-साफ बचते दिखे, जिनका संबंध कांग्रेस से था और जिनका जिक्र किया भी, उन्हें कहीं न कहीं भगवा ताकतें पसंद करती हैं।
कोविंद ने भारतीय जनसंघ के संस्थापक पंडित दीन दयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद का भी जिक्र किया। इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस ने राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आलोचना की है और उन पर अपने पहले ही भाषण में देश और गांधी का अपमान करने के आरोप लगाए हैं।
वहीं कांग्रेस ने भाषण में देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू या किसी अन्य कांग्रेसी नेता का जिक्र नहीं करने पर भी राष्ट्रपति की आलोचना की है। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में कांग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद ने कहा, ''पंडित दीन दयाल उपाध्याय की महात्मा गांधी से तुलना और जवाहरलाल नेहरू का जिक्र नहीं करना देश का अपमान है। यह महात्मा गांधी और अन्य स्वतंत्रा सेनानियों का भी अपमान है। यह बात भाषण में नहीं होनी चाहिए थी।''
उन्होंने आगे कहा, ''हमें उम्मीद थी कि वह अब देश के राष्ट्रपति हैं न कि बीजेपी के उम्मीदवार, राष्ट्रपति सबके होते हैं। मगर यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि देश के पहले प्रधानमंत्री का जिक्र नहीं हुआ। नेहरू एक स्वतंत्रता सेनानी के पुत्र थे। उनकी बेटी और पोते ने देश के लिए जान दी। मोतीलाल नेहरू से लेकर राजीव गांधी तक, किसी का भी जिक्र नहीं किया गया। यह जानबूझकर किया गया।''
राष्ट्रपति पद की शपथ ग्रहण करने के बाद रामनाथ कोविंद ने अपने भाषण में कहा, ''हमारी स्वतंत्रता, महात्मा गांधी के नेतृत्व में हजारों स्वतंत्रता सेनानियों के प्रयासों का परिणाम थी। बाद में, सरदार पटेल ने हमारे देश का एकीकरण किया। हमारे संविधान के प्रमुख शिल्पी, बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर ने हम सभी में मानवीय गरिमा और गणतांत्रिक मूल्यों का संचार किया।''
राष्ट्रपति ने अपने भाषण में आगे कहा, ''हमें तेजी से विकसित होने वाली एक मजबूत अर्थव्यवस्था, एक शिक्षित, नैतिक और साझा समुदाय, समान मूल्यों वाले और समान अवसर देने वाले समाज का निर्माण करना होगा। एक ऐसा समाज जिसकी कल्पना महात्मा गांधी और दीन दयाल उपाध्याय जी ने की थी। ये हमारे मानवीय मूल्यों के लिए भी महत्त्वपूर्ण है। ये हमारे सपनों का भारत होगा। एक ऐसा भारत, जो सभी को समान अवसर सुनिश्चित करेगा। ऐसा ही भारत, 21वीं सदी का भारत होगा।''
इसके अलावा अपने भाषण के शुरुआत में ही कोविंद ने अपने पूर्ववर्तियों को याद करते हुए कहा, ''मुझे इस बात का पूरा एहसास है कि मैं डॉक्टर राजेंद्र प्रसाद, डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, डॉक्टर ए.पी.जे. अब्दुल कलाम और मेरे पूर्ववर्ती प्रणब मुखर्जी, जिन्हें हम स्नेह से प्रणब दा कहते हैं, जैसी विभूतियों के पदचिह्निों पर चलने जा रहा हूं।''
कोविंद ने दीन दयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद का स्पष्ट जिक्र करते हुए कहा, ''ये हमारे मानवीय मूल्यों के लिए भी महत्वपूर्ण हैं। ये हमारे सपनों का भारत होगा। ऐसा ही भारत 21वीं सदी का भारत होगा।''
भारत के 13वें राष्ट्राध्यक्ष प्रणब मुखर्जी ने सोमवार (24 जुलाई) शाम को आखिरी बार राष्ट्र को संबोधित किया। अपने विदाई भाषण में राष्ट्रपति ने लोकतंत्र के मूल्यों की याद दिलाई और एक बेहतर भविष्य की बुनियाद के सूत्र भी बताए।
राष्ट्रपति ने कहा, ''मैं भारत के लोगों के प्रति कृतज्ञता जाहिर करता हूं जिन्होंने मुझपर इतना विश्वास किया। मैंने इस देश को जितना दिया है, उससे कहीं ज्यादा मुझे वापस मिला है। मैं सदैव भारत के लोगों का ऋणी रहूंगा।''
राष्ट्रपति ने आगे कहा, ''विकास को साकार होने के लिए, देश के गरीबों को यह लगना चाहिए कि वे भी मुख्यधारा का हिस्सा हैं।'' मुखर्जी ने कहा, ''5 साल पहले, जब मैंने राष्ट्रपति पद की शपथ ली थी, तब मैंने संविधान के संरक्षण और रक्षा की कसम खाई थी। इन पांच सालों के हर एक दिन पर, मुझे अपनी जिम्मेदारी का भान था। मैं अपनी जिम्मेदारियां निभाने में कितना सफल रहा, इसका फैसला समय करेगा, इतिहास के चश्मे से। पिछले पचास सालों के सार्वजनिक जीवन में, मेरी पवित्र किताब संविधान रहा है। भारत की संसद मेरा मंदिर रही है और लोगों की सेवा करना मेरा जुनून।''
राष्ट्रपति ने अपने विदाई भाषण में लोकतंत्र में बहस की जरूरत समझाई और हिंसा से दूर रहने की हिदायत दी। उन्होंने कहा, ''भारत की आत्मा बहुवाद और सहिष्णुता में बसती है। सदियों तक विचारों के आदान-प्रदान से हमारा समाज बहुमुखी हो गया है। संस्कृति, विश्वास और भाषा में इतनी विविधता ही भारत को विशेष बनाती है। हमें अपनी ताकत सहिष्णुता से मिलती है, यह सदियों से हमारी सामूहिक चेतना का अंग रहा है। सार्वजनिक जीवन में विभिन्न मत हो सकते हैं, हम बहस कर सकते हैं, हम सहमत हो सकते हैं, हम असहमत हो सकते हैं, मगर हम विभिन्न मतों की मौजूदगी को नजरअंदाज नहीं कर सकते। अन्यथा हमारी सोच का एक मूल चरित्र कहीं गायब हो जायेगा। हमें सार्वजनिक जीवन को किसी भी प्रकार की हिंसा, शारीरिक या जुबानी, से मुक्त करना होगा। सिर्फ एक अहिंसक समाज ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सभी हिस्सों की भागीदारी को सुनिश्चित कर सकता है।''
मुखर्जी ने कहा, ''हमारे विश्वविद्यालय केवल रट्टा मारने की जगह नहीं, बल्कि बेहतरीन दिमागों का संगम होने चाहिए। हमें गरीब से गरीब को उठाना होगा और यह सुनिश्चित करना होगा कि हमारी नीतियों का लाभ आखिरी व्यक्ति तक पहुंचे। गरीबी के उन्मूलन से खुशहाली को पंख लगेंगे।''
मुखर्जी ने भाषण के अंत में कहा, ''राष्ट्रपति भवन में अपने पांच सालों के दौरान, हमने एक मानवीय और खुशहाल राष्ट्र बनाने का प्रयास किया। कल जब मैं आपसे बात करूंगा तो एक नागरिक की तरह, यह एक तीर्थयात्रा के जैसा है जो भारत को शिखर पर ले जा रही है।''
जम्मू और कश्मीर की मुख्यममंत्री महबूबा मुफ्ती ने कश्मीर मसले को सुलझाने के लिए किसी तीसरे पक्ष की मध्यस्थता का पूरजोर विरोध किया है। महबूबा मुफ़्ती ने कहा है कि अगर अमेरिका कश्मीर के मसले पर दखल देने लगा तो घाटी की वही हालत हो जाएगी जो सीरिया और अफगानिस्तान की है।
बता दें कि जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस नेता फारुख अब्दुल्ला ने शुक्रवार (21 जुलाई) को कहा था कि कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत को अमेरिका और चीन की मध्यस्थता स्वीकार करनी चाहिए। लेकिन जम्मू-कश्मीर में बीजेपी और पीडीपी सरकार की मुखिया महबूबा मुफ्ती ने ऐसी किसी भी कोशिश को सिरे से नकार दिया है।
महबूबा मुफ्ती ने कहा, ''चीन और अमेरिका को अपना घर संभालना चाहिए, हमें आपस में मिलकर बात करनी है तो अमेरिका तुर्किस्तान और इंग्लिस्तान हमारा क्या करेगा।''
महबूबा ने कहा कि अमेरिका ने जहां जहां दखल दिया है वहां क्या हालत हुई है आप सभी जानते हैं। उन्होंने कहा, ''सीरिया, अफगानिस्तान और इराक में आज हालात क्या हैं? क्या फारुख साहब वही हालात कश्मीर में देखना चाहते हैं।''
महबूबा मुफ्ती ने कहा कि कश्मीर मुद्दे को हल करने के लिए भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत होनी चाहिए। इसमें किसी तीसरे पक्ष की जरूरत नहीं है।
महबूबा ने कहा, ''जैसा कि वाजपेयी ने लाहौर समझौते के वक्त कहा था कि कश्मीर मुद्दे का हल निकालने के लिए भारत-पाकिस्तान को बात करनी चाहिए।''
बता दें कि फारुख अब्दुल्ला ने शुक्रवार को कहा था कि दुनिया भर में भारत के कई सहयोगी हैं जिनसे भारत संपर्क कर सकता है और उन्हें कश्मीर विवाद सुलझाने के लिए मध्यस्थता करने को कह सकता है।
जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप भी कह चुके हैं कि वे कश्मीर मुद्दे का समाधान चाहते हैं और साथ ही चीन भी कह चुका है कि वह इस मुद्दे को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने के लिए तैयार है।
बता दें कि कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने भी फारुख अब्दुल्ला की इस पेशकश को ठुकरा दिया है।
भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) ने जल संसाधान मंत्रालय की बाढ़ नियंत्रण एवं प्रबंधन योजनाओं के क्रियान्वयन पर अपनी रिपोर्ट में कहा है कि भारत में निर्मित 4,862 बड़े बांधों में से सिर्फ 349 बांधों के लिए ही आपात आपदा कार्य योजना तैयार है।
शुक्रवार को संसद में पेश की गई सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है, ''देश के 4,862 बड़े बांधों में से सिर्फ 349 बांधों के लिए आपात कार्य योजना या आपदा प्रबंधन योजना तैयार है, मतलब मार्च, 2016 तक सिर्फ सात फीसदी बड़े बांधों के लिए आपात कार्य योजना तैयार है। वहीं मार्च, 2016 तक सिर्फ एक बांध पर मॉक ड्रिल की गई।
सीएजी ने यह भी खुलासा किया है कि ऑडिट के लिए चयनित 17 राज्यों या केंद्र शासित क्षेत्रों में से सिर्फ हिमाचल प्रदेश और तमिलनाडु ने मानसून आने से पहले और मानसून के बाद बांधों की जांच-पड़ताल करवाई, जबकि सिर्फ तीन राज्यों ने अंशत: जांच करवाई।
बांधों की सुरक्षा पर सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है कि 2010 में ही बांध सुरक्षा कानून लाने की पहल की गई थी, लेकिन अगस्त, 2016 तक इस पर कोई काम नहीं हुआ।
सीएजी की रिपोर्ट के अनुसार, बांधों की मरम्मत तक के लिए कार्यक्रम नहीं तैयार किया गया है और संरचनागत/मरम्मत कार्यो के लिए पर्याप्त धनराशि भी मुहैया नहीं कराई गई है।
सीएजी की रिपोर्ट में कहा गया है, ''हमने पाया कि पांच बड़े बांधों, जिनमें दो बिहार के, दो उत्तर प्रदेश के और एक पश्चिम बंगाल का है, में विशेषज्ञ समिति द्वारा सुरक्षा समीक्षा के दौरान कुछ खामियां और अपूर्णता पाई गई, लेकिन धनराशि की अनुपलब्धता के चलते उपचारात्मक कदम नहीं उठाए गए।''
भारत बाढ़ के खतरे वाला देश है, जहां 32.9 करोड़ हेक्टेयर के भौगोलिक क्षेत्र में से 456.4 लाख हेक्टेयर इलाका बाढ़ के खतरे वाला क्षेत्र है।
सीएजी ने कहा है कि हर साल औसतन 75.5 लाख हेक्टेयर इलाका बाढ़ की चपेट में आता है, औसतन हर साल बाढ़ के चलते 1,560 जानें जाती हैं तथा फसलों के बर्बाद होने, घरों के क्षतिग्रस्त होने और जन सुविधाओं के ध्वस्त होने से हर साल औसतन 1,805 करोड़ रुपये की हानि होती है।
ओडिशा में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के एक कार्यक्रम को कवर करने के लिए कथित तौर मीडियाकर्मियों को 500-500 रुपए देने का मामला सामने आया है।
खबर के अनुसार, कार्यक्रम का आयोजन नेशनल हाईवे अथोरिटी ऑफ इंडिया (एन एच ए आई) द्वारा किया गया था। आयोजन स्थल पर मौजूद पत्रकार उस दौरान हैरान रह गए, जब वहां मौजूद हर पत्रकार को पांच सौ रुपए का नोट दिया गया।
हालांकि ओडिशा पुलिस और भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एन एच ए आई) ने अंगुल में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के कार्यक्रम में मीडियाकर्मियों को कथित रूप से रिश्वत देने के प्रयास की जांच शुरू कर दी है।
दरअसल मीडियाकर्मी अंगुल के दशहरा ग्राउंड में एक कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी और धर्मेद्र प्रधान के पहुंचने का इंतजार कर रहे थे। इस दौरान कथित रूप से मीडियाकर्मियों को प्रत्येक मीडिया किट में 500 रुपए का नोट दिया गया। पत्रकारों ने यह भी बताया कि एनएचएआई के अधिकारियों द्वारा ये मीडिया किट बांटी गईं थीं।
हालांकि मीडियाकर्मियों ने इसका कड़ा विरोध किया। वहीं एक पत्रकार ने अंगुल थाने में शिकायत दर्ज कराई है। अंगुल के एसपी ब्रिजेश के राई ने बताया कि पुलिस को शिकायत मिली है और हम इसकी जांच कर रहे हैं।
दूसरी तरफ एक पत्रकार ने मीडिया को बताया, ''ऐसा पहली बार नहीं है जब ऐसे किसी कार्यक्रम में पत्रकारों को रिश्वत दी गई हो। कई बार भारत सरकार द्वारा आयोजित इवेंट को भी राज्य में भाजपा ने हाईजैक करने की कोशिश की है। हालांकि हमें खुद नहीं पता कि कार्यक्रमों में कौन इस तरह की हरकत करता है।''
बता दें कि ओडिशा में सड़कों के विकास के लिए एक लाख करोड़ रुपए की स्वीकृति दी गई है जिसे दो साल में बढ़ाकर डेढ़ लाख करोड़ रुपए किया जाएगा। यह बात शुक्रवार (21 जुलाई, 2017) को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री नितिन गडकरी ने राउरकेला (ओडिशा) में कही। वे राउरकेला के बालूघाट में ब्राह्माणी नदी पर सिक्स लेन द्वितीय पुल और फोरलेन बीरिमत्रपुर ब्राह्माणी बाइपास सड़क का शिलान्यास एवं बेलपहाड़ बाइपास के साथ कनकतोरा-झारसुगुड़ा सेक्शन सड़क का लोकार्पण करने के बाद जनसभा को संबोधित कर रहे थे।
गडकरी ने कहा कि अब निर्धारित समय से एक दिन पहले काम पूरा करने पर एक लाख रुपए पुरस्कार तथा एक दिन विलंब होने पर डेढ़ लाख रुपये दंड देना पड़ेगा।
बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार शनिवार शाम को कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात करने पहुंचे। सूत्रों के अनुसार, राहुल और नीतीश के बीच बिहार के वर्तमान राजनीतिक हालातों पर चर्चा हुई। दोनों नेताओं के बीच करीब 40 मिनट तक बातचीत हुई। 12 तुगलक लेन स्थित राहुल गांधी के आवास पर हुई बैठक में उपराष्ट्रपति चुनाव पर चर्चा की बात भी सामने आ रही है।
नीतीश राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के लिए आयोजित विदाई भोज में शामिल होने दिल्ली आए हैं।
नीतीश की राहुल से मुलाकात महागठबंधन में पैदा हुई दरार को दूर करने के इरादे से कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की बिहार के मुख्यमंत्री और राजद अध्यक्ष लालू प्रसाद से बातचीत के कुछ दिनों बाद हो रही थी।
नीतीश दिल्ली में चार दिनों तक रहेंगे। नीतीश प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ओर से दिल्ली के हैदराबाद हाउस में शनिवार की शाम राष्ट्रपति के विदाई सम्मान में आयोजित डिनर पार्टी में शामिल होंगे।
कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार विपक्ष के अकेले ऐसे मुख्यमंत्री होंगे जो प्रधानमंत्री की ओर से दी जा रही डिनर पार्टी में शामिल होने वाले हैं। इसे मोदी और नीतीश की बढ़ी नजदीकियों के तौर पर भी देखा जा रहा है।
मोदी की मेजबानी में आयोजित इस रात्रिभोज में देश के नए निर्वाचित राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद भी उपस्थित रहेंगे। देश की तीनों सेनाओं के प्रमुख मुखर्जी को चीफ्स ऑफ स्टाफ कमिटी ने भी शुक्रवार को विदाई समारोह दी। मानेकशॉ सेंटर में आयोजित इस विदाई समारोह में राष्ट्रपति मुखर्जी ने शीर्ष सैन्य अधिकारियों से बातचीत की। अपने विदाई भाषण में मुखर्जी ने सैन्य बलों के सभी सदस्यों और उनके परिवार वालों को शुभकामनाएं दीं। मुखर्जी ने देश के लिए बलिदान देने वाले शहीदों और उनके परिवार वालों को श्रद्धांजलि भी अर्पित की।
मानेकशॉ सेंटर में आयोजित विदाई समारोह में उप-राष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री अरुण जेटली के अलावा तीनों सेनाओं के प्रमुखों और वरिष्ठ अधिकारियों ने भी शिरकत की।
जनता दल यूनाइटेड, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल बिहार के सत्तारूढ़ महागठबंधन में साझीदार हैं। राजद नेता तेजस्वी यादव को सीबीआई द्वारा आरोपी बनाये जाने के कारण महागठबंधन में राजनीतिक संकट उत्पन्न हो गया है। जनता दल यूनाइटेड ने अपनी भ्रष्टाचार मुक्त छवि पेश करने के लिए तेजस्वी यादव के इस्तीफे की मांग की है जिसे कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल ने ठुकरा दिया है। पिछले सप्ताह हुई नीतीश और तेजस्वी की मुलाकात के बाद भी इसका कोई हल निकलता नहीं दिखाई दे रहा है।
भारत के नियंत्रणक एवं महालेखापरीक्षक (कैग) ने रेलवे में विद्युतीकरण के लिए प्रक्रिया, कार्यो को सौंपने व उसे पूरा करने में हुए विलंब के लिए रेलवे को जमकर लताड़ लगाई है। कैग ने कहा है कि निविदा की प्रक्रिया में समय को कम करने के लिए रेलवे ने ई-निविदा प्रणाली को नहीं अपनाया।
शुक्रवार को संसद में पेश अपनी रिपोर्ट में कैग ने कहा है कि विस्तृत जांच के लिए उसने पूरी हो चुकी 14 परियोजनाओं, 15 जारी परियोजनाओं तथा सात नई परियोजनाओं का ऑडिट किया। अपनी रिपोर्ट में कैग ने कहा, ''रेलवे के एक अनुभाग में विद्युतीकरण करना है या नहीं, इसके लिए समय बचाने के उद्देश्य की पूर्ति नहीं की जा रही है, क्योंकि प्रस्तावों की प्रक्रिया तथा संक्षिप्त अनुमान में विलंब किया जा रहा है। 24 परियोजनाओं के लिए 59 महीने का वक्त लगने का अनुमान लगाया गया है।
केंद्रीय ऑडिटर ने कहा, ''कारेपल्ली-भद्राचलम, शकूरबस्ती-रोहतक, झांसी-कानपुर, बरौनी-कटिहार-गुवाहाटी तथा गुनातकाल-कल्लूर की तुलना में परियोजनाओं में भिन्नता 40 फीसदी से अधिक है।''
कैग ने अपनी रिपोर्ट में इसका भी जिक्र किया है कि सालाना कार्य कार्यक्रम में विद्युतीकरण परियोजनाओं को शामिल करने के बाद रेलवे बोर्ड ने विद्युतीकरण की परियोजनाओं को एजेंसियों को सौंपने में विलंब किया।
कैग के मुताबिक, ''सेंट्रल ऑर्गजनाइजेशन फॉर रेलवेज इलेक्ट्रीफिकेशन की 17 परियोजनाओं के संदर्भ में 337 दिन तथा रेल विकास निगम लिमिटेड की छह परियोजनाओं के संदर्भ में 202 दिनों का विलंब किया गया।''
रिपोर्ट के मुताबिक, ''सेंट्रल ऑर्गजनाइजेशन फॉर रेलवेज इलेक्ट्रीफिकेशन को सौंपी गई 27 परियोजनाओं की निविदा जारी करने के लिए 3,177 दिनों का वक्त लिया गया, जबकि रेल विकास निगम लिमिटेड को सौंपी गई सात परियोजनाओं के लिए 12 निविदाएं जारी करने के लिए 915 दिनों का वक्त लिया गया।''
कैग ने कहा कि इससे स्पष्ट होता है कि परियोजना को समय पर पूरा करने को कोई तवज्जो न देते हुए निविदा की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया।
भारतीय जनता पार्टी के नेता शत्रुघ्न सिन्हा ने सेना के गोला-बारूद पर कैग रिपोर्ट सामने आने को चिंताजनक बताया है।
शत्रुघ्न सिन्हा ने कहा कि ऐसे समय में (डोकलाम विवाद) रिपोर्ट का सार्वजनिक होना लोगों को हतोत्साहित कर सकता है।
उन्होंने कहा कि ये बेहद संवेदनशील मुद्दा है और इस बारे में सावधानीपूर्वक बात होनी चाहिए तथा जरूरी कार्रवाई की जानी चाहिए।
चीन और पाकिस्तान से जारी तनाव के बीच कैग ने शुक्रवार को संसद में रखी गई अपनी रिपोर्ट में कहा कि भारतीय सेना के पास कई ऐसे महत्वपूर्ण गोला-बारूद हैं जो सिर्फ 10 दिनों के लिए हैं।
कैग ने रिपोर्ट में कहा है कि आर्मी के पास न्यूनतम 40 दिन का युद्ध रिजर्व होना होना चाहिए। सेना द्वारा इसे 20 दिन किया गया है, मगर वर्तमान में इसके पास 10 दिन तक टिकने के ही हथियार व गोला-बारूद हैं।
कैग रिपोर्ट में गोला-बारूद की खराब स्थिति पर भी सवाल उठाए गए हैं। कैग ने कहा है कि खराब गोला-बारूद का पता लगाकर उन्हें ठिकाने लगाने में काफी वक्त जाया होता है जिससे कई बार डिपो में आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं।









