भारत

तेजस्वी यादव ने कहा, अगर नीतीश कुमार में हिम्मत थी तो वह मुझे बर्खास्त करते

बिहार में राष्ट्रीय जनता दल के विधायक हाथों में पोस्टर बैनर लेकर नीतीश कुमार को कुर्सी कुमार कहते हुए विधानसभा के बाहर प्रदर्शन कर रहे हैं। नीतीश कुमार ने विश्वासमत का प्रस्ताव किया।

विधानसभा में तेजस्वी यादव का भाषण खत्म हो चुका है। अब कांग्रेस नेता सदानंद सिंह अपना पक्ष रख रहे हैं।नीतीश कुमार को बॉस करकर संबोधित किया नेता विपक्ष तेजस्वी यादव।

तेजस्वी यादव ने कहा कि अगर नीतीश कुमार में हिम्मत थी तो वह मुझे बर्खास्त करते। वो मेरे आत्मविश्वास से डर गए।

विधानसभा में उन्होंने कहा कि नीतीश जी आपको सुशील मोदी जी के पास बैठने में शर्म नहीं आई। हमने नीतीश कुमार पर कभी दवाब नहीं बनाया।

जनता दल यूनाइटेड और बीजेपी गठबंधन के मुताबिक, नीतीश को 132 विधायकों का समर्थन हासिल है। बिहार में 243 विधानसभा की सीट में उन्हें बहुमत के लिए 122 विधायकों की जरूरत पड़ेगी। जनता दल यूनाइटेड के पास 71 और बीजेपी के पास 58 विधायक मिलकर 129 तक पहुंच जाते हैं। बिहार विधानसभा में भले ही सबसे अधिक सीटें लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल के पास 80 सीटें हैं।

लालू भी जनता दल यूनाइटेड के कुछ विधायकों को तोड़कर बहुमत साबित करने से रोक सकते हैं। सूत्रों के अनुसार, जनता दल यूनाइटेड के यादव और मुस्लिम विधायकों से बात भी की जा रही है। राष्ट्रीय जनता दल के पास 81 विधायक हैं और कांग्रेस के 27 विधायक मिलकर उनकी संख्या 107 हो जाती है। ऐसे में लालू इन संभावनओं के लिए भी पूरी कोशिश करेंगे।

शरद यादव के एक इशारे पर आज ही गिर सकती है नीतीश की नई सरकार

बिहार विधान सभा में शुक्रवार (28 जुलाई) को नीतीश कुमार अपना बहुमत साबित करेंगे। बुधवार शाम से हुए सूबे की सियासी फिजा में तेजी से आए बदलाव के बीच जोड़तोड़ की राजनीति के भी संकेत मिलने लगे हैं।

कुछ मीडिया रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है कि बहुमत परीक्षण में सबसे अहम रोल शरद यादव का है। अगर शरद यादव खिलाफ चले गए तो नीतीश की ये सरकार एक दिन बाद ही गिर सकती है।

बिहार में कुल 243 विधान सभा सीटें हैं। लालू यादव की राष्ट्रीय जनता दल के पास 80, जनता दल यूनाइटेड के पास 71, एनडीए (बीजेपी और उसके साझेदार) के पास 58 और कांग्रेस के पास 27 सीटें हैं। अन्य सात सीटें भाकपा (माले) और निर्दलियों के पास हैं।

बहुमत के लिए 122 का विधायकों का समर्थन चाहिए। एनडीए और जनता दल यूनाइटेड के विधायकों को मिलाकर आंकड़ा 129 हो जाता है। नीतीश ने 132 विधायकों के समर्थन का दावा किया है।

लेकिन तेजस्वी यादव ने दावा किया है कि जनता दल यूनाइटेड के 24 विधायक उनके संपर्क में हैं। जनता दल यूनाइटेड में 11 यादव और पांच मुस्लिम विधायक हैं जिनके ऊपर राष्ट्रीय जनता दल से हाथ मिलाने का संदेह जताया जा रहा है।

इनके अलावा जनता दल यूनाइटेड के ऐसे विधायक जो शरद यादव के करीबी हैं उनको लेकर भी ऊहापोह की स्थिति बनी हुई है। जनता दल यूनाइटेड सांसद अली अनवर ने खुलकर नीतीश के फैसले का विरोध किया। पार्टी के राज्य सभा सांसद बिरेंद्र कुमार भी राष्ट्रपति चुनाव के समय नीतीश के रामनाथ कोविंद को समर्थन देने के फैसले का विरोध कर चुके हैं।

गुरुवार (27 जुलाई) को दिल्ली में शरद यादव की बिरेंद्र कुमार और अली अनवर से बैठक हुई। उससे पहले राहुल गांधी ने शरद यादव से बात की थी। लालू यादव ने भी मीडिया से कहा कि वो शरद यादव को फोन करेंगे। ऐसे में सभी को उम्मीद थी कि शरद यादव की तरफ से भी बागी सांसदों के साथ बैठक के बाद बड़ा फैसला हो सकता है, लेकिन उन्होंने मीडिया से केवल इतना कहा कि वो कुछ दिन में अपना फैसला बताएंगे। माना जाता है कि शरद यादव पिछले साल जनता दल यूनाइटेड अध्यक्ष पद से हटाए जाने की वजह से नीतीश से नाराज हैं। नीतीश शरद को हटाकर खुद अध्यक्ष बने थे।

ऐसे में कई राजनीतिक जानकार अटकल लगा रहे हैं कि अगर लालू यादव को शरद यादव का साथ मिल गया तो एक बड़े नेता का साथ पाकर असंतुष्ट जनता दल यूनाइटेड विधायक लामबंद हो जाएंगे। अगर ऐसा हुआ तो नीतीश कुमार की ये सरकार बनने के 24 घंटे के अंदर गिर जाएगी।

हालांकि मीडिया में ये खबरें भी आ रही हैं कि राष्ट्रीय जनता दल के 17 विधायक और कांग्रेस के सात विधायक जनता दल यूनाइटेड के संपर्क में हैं।

नीतीश के ल‍िए खतरा: 20 व‍िधायक के बागी होने का डर, नहीं रह पाएंगे सीएम

छठी बार बिहार के मुख्यमंत्री बनने वाले नीतीश कुमार के लिए शुक्रवार (28 जुलाई) का दिन अहम है। उन्हें बिहार विधानसभा में बहुमत साबित करना है।

हालांकि, कहा जा रहा है कि नीतीश कुमार बीजेपी और उनके सहयोगी दलों के समर्थन से विश्वास मत परीक्षण जीत लेंगे, लेकिन इस बीच कयास यह भी लगाए जा रहे हैं कि जनता दल यूनाइटेड के कुछ बागी विधायक उनका खेल बिगाड़ सकते हैं।

243 सदस्यों वाली बिहार विधान सभा में जनता दल यूनाइटेड के 71 विधायक हैं जबकि बीजेपी और सहयोगी दलों के कुल 58 विधायक हैं। इन दोनों के जोड़ से आंकड़ा 129 तक जा पहुंचता है जो बहुमत के लिए जरूरी 122 मतों से सात ज्यादा है, लेकिन घात-प्रतिघात की आशंकाओं के बीच जरूरी आंकड़े कम ना पड़ जाएं इसलिए पहले से ही कोशिशें जारी हैं। इसी क्रम में दो निर्दलीय विधायकों का भी समर्थन पहले से ही हासिल किया जा चुका है।

इधर, जनता दल यूनाइटेड के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव, राज्यसभा सांसद अली अनवर और वीरेन्द्र कुमार अपनी-अपनी नाराजगी जाहिर कर चुके हैं। माना जा रहा है कि इन नेताओं के विश्वस्त विधायक विश्वास मत परीक्षण में खेल कर सकते हैं। जिन विधायकों के बारे में बागी होने की खबरें हैं उनमें से अधिकांश मुस्लिम और यादव हैं।

पश्चिम बंगाल जनता दल यूनाइटेड के अध्यक्ष भी कह चुके हैं कि बीजेपी के साथ गठबंधन करने से जनता दल यूनाइटेड के मुस्लिम विधायक पार्टी से किनारा कर सकते हैं।

खबरें हैं कि जनता दल यूनाइटेड के बीस विधायक बागी हो सकते हैं। हालांकि, डैमेज कंट्रोल की कोशिशें जारी हैं। बावजूद, इसके अगर 10 विधायक भी बागी हुए तो नीतीश कुमार के लिए विश्वास मत जीतना मुश्किल हो सकता है।

माना जा रहा है कि इन विधायकों के सामने समस्या यह आ गई है कि उनलोगों ने साम्प्रदायिक शक्तियों का विरोध कर चुनाव जीता था, लेकिन अब उनकी पार्टी ने उन्हीं ताकतों के साथ मिलकर सरकार बना ली है। ऐसे में इन नेताओं को अपने वोटरों को यह समझाने में काफी परेशानी हो सकती है। लगे हाथ दोबारा चुनाव जीतने में भी उन्हें मुश्किल हो सकती है। लिहाज, ये विधायक नीतीश के खिलाफ बागी होकर हर तरह की मुश्किल झेलने को तैयार हो सकते हैं, लेकिन साम्प्रदायिक शक्तियों के सामने घुटने टेकने को तैयार नहीं हो सकते।

राजनीतिक जानकारों की मानें तो सीमांचल से आनेवाले अधिकांश मुस्लिम विधायकों के साथ-साथ यादव विधायक भी नीतीश सरकार के विश्वास मत परीक्षण में खेल कर सकते हैं।

हालांकि, नीतीश ने पहले ही राजनीतिक चाल चलते हुए विधान सभा अध्यक्ष की कुर्सी पर अपने नजदीकी विजय कुमार चौधरी को बैठा दिया था। ताकि ऐसी स्थिति में वो उनका भरपूर साथ दे सकें। यानी, बागी होने की सूरत में जनता दल यूनाइटेड विधायकों की सदस्यता खतरे में पड़ सकती है। बावजूद इसके कहा जा रहा है कि कुछ विधायक नीतीश के खिलाफ बागी रुख अख्तियार कर सकते हैं।

महाराष्‍ट्र जनता दल यूनाइटेड प्रमुख और विधानपरिषद सदस्‍य कपिल पाटिल नीतीश कुमार के फैसले से खफा हैं। उन्‍होंने कहा कि वह पार्टी बैठक में भविष्‍य पर विचार करेंगे।

वामपंथी नेता सीताराम येचुरी ने कहा है कि ''हर कुछ सालों में नीतीश कुमार विभिन्‍न गठबंधन की मदद से सीएम पद की शपथ लेते हैं। गजब का रिकॉर्ड है। सीधा-सीधा राजनैतिक अवसरवाद।''

जनता दल यूनाइटेड नेता अली अनवर का कहना है कि पूरे घटनाक्रम से वे हैरान हैं। उन्‍होंने कहा, ''शरद जी और हमें पता नहीं था कि रातोंरात इतना सबकुछ हो जायेगा।''

जनता दल यूनाइटेड नेता अरुण कुमार का कहना है कि 'शरद जी नीतीश कुमार के फैसले को लेकर चिंतित हैं। एक-दो दिन में शरद जी सभी राष्‍ट्रीय पार्टियों के नेताओं से बात करेंगे।'

जनता दल यूनाइटेड सांसद वीरेंद्र कुमार और अली अनवर पार्टी के वरिष्‍ठ नेता शरद कुमार से उनके दिल्‍ली स्थित आवास पर मीटिंग की।

क्या जनता दल यूनाइटेड में बगावत के नायक शरद यादव होंगे?

बिहार जिसके होनी की आशंका पिछले कुछ महीनों से जतायी जा रही थी, वो बुधवार (26 जुलाई) रात हो गई। सांप्रदायिक ताकतों को रोकने के लिए नीतीश कुमार ने साल 2015 में पुराने राजनीतिक दुश्मन लालू प्रसाद यादव से हाथ मिलाया था, तो अपनी सरकार के दो साल पूरे होने से पहले ही भ्रष्टाचार के खिलाफ लड़ने के लिए नए दोस्त का हाथ झटक दिया।

नीतीश और लालू के ब्रेक-अप के पहले से ही मीडिया में खबरें आ रही थीं कि जनता दल यूनाइटेड टूट सकती है। लालू यादव और उनके पुराने साथियों पर जनता दल यूनाइटेड विधायकों से तोल-मोल के आरोप लगे।

अब जब नीतीश बीजेपी के समर्थन से दोबारा मुख्यमंत्री बन चुके हैं तो एक बार फिर ये आशंका जतायी जा रही है कि विश्वास मत प्राप्त करना उनके लिए टेढ़ी खीर होगी और जनता दल यूनाइटेड टूट जाएगी।

गुरुवार (27 जुलाई) को नीतीश ने सीएम की और बीजेपी नेता सुशील मोदी ने डिप्टी-सीएम पद की शपथ ली। लेकिन शरद यादव शपथ-ग्रहण में नहीं पहुंचे। वहीं जनता दल यूनाइटेड के राज्य सभा सांसद अली अनवर ने मीडिया में खुलकर अपनी नाराजगी जाहिर कर दी। अली अनवर ने समाचार एजेंसी एएनआई से कहा, ''नीतीश ने अपनी आत्मा की आवाज पर बीजेपी के साथ जाने का फैसला किया, लेकिन मेरा जमीर गंवारा नहीं करता।''

इससे पहले जब नीतीश ने विपक्षी एकता तो झटका देते हुए एनडीए के राष्ट्रपति उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को समर्थन देने की घोषणा की थी तो केरल से जनता दल यूनाइटेड सांसद वीरेंद्र कुमार ने पार्टी की राय को दरकिनार कर दिया। वहीं शरद यादव तेजस्वी यादव के इस्तीफे की मांग को गैर-जरूरी बता चुके हैं, जबकि बिहार के रंगमंच पर खेले गए इस नाटक की धुरी तेजस्वी के इस्तीफे की मांग को बनाई गई है।

खबरों में दावा किया गया कि जनता दल यूनाइटेड के 71 विधायकों में से एक दर्जन से ज्यादा विधायक और करीब आधा दर्जन सांसद (पार्टी के पास कुल 12 सांसद हैं) बीजेपी के साथ गठबंधन करने पर पार्टी से बगावत कर सकते हैं। एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, सरफराज आलम, मुजाहिद आलम, सरफुद्दीन आलम और नौशाद आलम जैसे जनता दल यूनाइटेड विधायक बागी हो सकते हैं।

जनता दल यूनाइटेड और बीजेपी के फिर से हमराह होने के बाद शरद यादव और अली अनवर के रुख से बगावत के अंदेशों को हवा मिल रही है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने शरद यादव से चर्चा की है। गुरुवार को ही लालू यादव ने भी कहा कि वो शरद यादव से बात करेंगे। तो क्या सचमुच जदयू में बगावत होगी और शरद यादव उसके नायक होंगे?

जनता दल यूनाइटेड के दोनों शीर्ष नेताओं के बीच मतभेद की ताजा वजह साल 2016 में नीतीश द्वारा शरद को जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से बेदखल किए जाने को बताया जाता है। जाहिर है शरद के लिए ये अपमानजनक रहा होगा। लेकिन शरद को पता है कि नीतीश ही जनता दल यूनाइटेड का एकमात्र स्वीकार्य चेहरा हैं और उनके बिना पार्टी का वजूद ही खतरे में होगा।

राजनीतिक अंदरखाने में ये भी चर्चा है कि जनता दल यूनाइटेड और बीजेपी का गठजोड़ बिहार के अलावा केंद्र में भी रंग दिखाएगा। जिस तरह अटल बिहारी वाजपेयी सरकार में नीतीश कुमार और शरद यादव मंत्री थे, उसी तरह नरेंद्र मोदी सरकार में भी जनता दल यूनाइटेड के दो नेताओं को मंत्री पद दिया जा सकता है। शरद यादव की हालिया नाराजगी और एनडीए सरकार में मंत्री पद के अनुभव को देखते हुए अगर केंद्रीय कैबिनेट में एक सीट उन्हें मिले तो किसी को हैरत नहीं होगी। और ऐसा हुआ तो शायद शरद को भी नीतीश से कोई शिकायत नहीं होगी।

जनता दल यूनाइटेड के कुछ नेताओं का दावा है कि जब नीतीश बीजेपी से अलग हुए थे तो शरद उसके खिलाफ थे। लेकिन अब शरद नीतीश के खिलाफ चले भी जाते हैं तो बिहार और पार्टी के अंदर उनकी सीमित ताकत को देखते हुए उनके लालू के साथ जाने से जनता दल यूनाइटेड की सेहत पर ज्यादा असर नहीं पड़ेगा।

जनता दल यूनाइटेड में नीतीश कुमार के खिलाफ बगावत

बिहार में पल-पल सियासी घटनाक्रम तेजी से बदल रहा है। 24 घंटे के अंदर महागठबंधन छोड़कर बीजेपी के साथ सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार के लिए आगे की राह आसान नहीं नजर आ रही है। अभी भी उनकी सरकार पर संकट मंडरा रहा है।

माना जा रहा है कि उनकी ही पार्टी के कुछ नाराज विधायक विश्वास मत परीक्षण के दौरान नीतीश सरकार के खिलाफ वोट कर सकते हैं। इसके लिए आज (27 जुलाई को) शाम पांच बजे जनता दल यूनाइटेड के नाराज विधायकों की बैठक हो रही है। इस बैठक में ही आगे की रणनीति पर चर्चा होगी।

जनता दल यूनाइटेड के पूर्व अध्यक्ष शरद यादव की नाराजगी की खबरें पहले से ही आ रही हैं। नीतीश द्वारा गठबंधन तोड़ने के बाद जनता दल यूनाइटेड सांसद अली अनवर ने भी बगावती रुख अपना लिया है।

इस बीच शरद यादव ने कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी से मुलाकात की है। इसके बाद शरद यादव, अली अनवर और जनता दल यूनाइटेड के सांसद वीरेन्द्र कुमार दिल्ली में पांच बजे मीटिंग करने वाले हैं। यह मीटिंग शरद यादव के आवास पर होगी।

उधर, लालू यादव रांची में हैं, लेकिन पल-पल के घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए हैं। उन्होंने भी कहा है कि वो शरद यादव से बात करेंगे।

माना जा रहा है कि जनता दल यूनाइटेड के मुस्लिम और यादव समुदाय से आने वाले करीब 20 विधायकों के अलावा 12 में से 6 सांसद नीतीश कुमार के कदम से नाराज हैं।

बिहार के मुख्यमंत्री पद से बुधवार (26 जुलाई) को इस्तीफा देकर गुरुवार (27 जुलाई) को दोबारा भाजपा के साथ मिलकर छठी बार सरकार बनाने वाले नीतीश कुमार से उनके ही पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व अध्यक्ष शरद यादव नाराज बताए जा रहे हैं।

पटना में सुबह 10 बजे हुए शपथ ग्रहण समारोह में शरद यादव नहीं पहुंचे। वो दिल्ली में ही रहे।

पिछले दिनों 18 विपक्षी दलों की दो बैठकों में शामिल होने वाले शरद यादव ने हर वक्त कहा था कि वो और उनकी पार्टी जनता दल यूनाइटेड प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और बीजेपी के खिलाफ लड़ाई लड़ती रहेगी, लेकिन नीतीश कुमार ने उनकी एक नहीं सुनी और आखिरकार 20 महीने तक लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल और कांग्रेस के साथ सरकार चलाने के बाद गठबंधन तोड़ दिया।

नीतीश के इस फैसले से उनकी पार्टी के कई नेता नाराज बताए जा रहे हैं। शरद यादव के अलावा राज्य सभा सांसद अली अनवर का भी नाम नाराज नेताओं में है।

अली अनवर ने कहा था कि नीतीश कुमार अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनकर बीजेपी के साथ सरकार बना रहे हैं, लेकिन मेरी अंतरात्मा इस बात को नहीं मानती है। अगर मुझे अपनी बात कहने का मौका मिलेगा, तो मैं पार्टी के मंच पर अपनी बात जरूर रखूंगा।

नीतीश की बहुत सारी निजी बातें जानता हूं, सुप्रीम कोर्ट जाऊंगा: लालू

बिहार की राजनीति में मचे सियासी भूचाल के बीच नीतीश कुमार ने दोबारा 27 जुलाई को मुख्यमंत्री पद की शपथ ले ली। वहीं उपमुख्यमंत्री का पद अब लालू प्रसाद यादव के बेटे तेजस्वी यादव से छिनकर बीजेपी के सुशील मोदी को मिल चुका है। नीतीश इस्तीफा देने के महज 24 घंटे से भी कम समय में बीजेपी से समर्थन पाकर फिर से सीएम बन गए हैं।

इसी बीच लालू यादव ने अपनी चुप्पी तोड़ी है। लालू ने प्रेस वार्ता कर नीतीश कुमार पर निशाना साधा है। लालू ने कहा, ''नीतीश कुमार जीरो टॉलरेंस की बात करते हैं, लेकिन मैं बता दूं कि यह(नीतीश) 302 के मुद्दाले हैं। मैं नीतीश कुमार के बहुत सारे व्यक्तिगत विवाद जानता हूं, लेकिन कहना अच्छा नहीं लगता।''

लालू ने यह भी कहा कि वह नीतीश और बीजेपी के गठबंधन की सरकार बनाने के खिलाफ अपील करेंगे। उन्होंने कहा, ''हम राज्यपाल के फैसले (नई सरकार के गठन) के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करेंगे।''

लालू यादव ने नीतीश कुमार को भस्मासुर और खुद को शंकर भगवान भी बताया। लालू ने कहा, ''हम बोले, शंकर भगवान की तरह जाओ राज करो, पर यह (नीतीश) तो भस्मासुर निकला।''

इसके अलावा उन्होंने कहा, ''नीतीश को जिधर सत्ता दिखती है उधर चले जाते हैं। नीतीश ने कहा था कि मिट्टी में मिलेंगे, लेकिन बीजेपी से नहीं मिलेंगे।''

नीतीश सरकार की शराबबंदी को लेकर भी लालू ने निशाना साधा। लालू ने कहा, ''शराबबंदी एक ढोंग था। दूसरे राज्यों से शराब आ रही थी।''

वहीं लालू यादव ने कुछ मीडिया संस्थानों पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा, ''कुछ मीडिया संस्थान जिन्हें हम अच्छा समझते थे। उन्होंने हमारी सुपारी ले ली। देखिए अमेरिका की मीडिया कैसे ट्रंप से लड़ रही है और यहां पर मीडिया विपक्ष से लड़ रही है। अमित शाह अब सुपर एडिटर बन गए कुछ मीडिया संस्थानों के। वही तय करते हैं क्या खबर चलाई जाएगी। संस्थानों के मालिकों को वही बताते हैं। इसमें रिपोर्टरों और एडिटरों की गलती नहीं है।''

लालू यादव ने नीतीश कुमार को बताया भस्मासुर

जनता दल (यूनाइटेड) के नेता नीतीश कुमार ने गुरुवार को एक बार फिर मुख्यमंत्री पद की शपथ ली। भारतीय जनता पार्टी के साथ बनने वाली सरकार को राज्यपाल केशरी नाथ त्रिपाठी ने सुबह 10 बजे शपथ दिलाई।

नीतीश ने छठवीं बार बिहार के मुख्यमंत्री पद की शपथ लेकर रिकॉर्ड बनाया है। नीतीश कुमार के बाद बिहार बीजेपी के नेता सुशील कुमार मोदी ने डिप्टी सीएम पद की शपथ ली।

गुरुवार को हुए शपथ ग्रहण सामरोह में दो ही नेताओं ने शपथ ली। बुधवार की शाम नीतीश के इस्तीफा के बाद 20 महीने से चल रही महागठबंधन की सरकार गिर गई थी। इसके बाद बुधवार की देर रात नीतीश कुमार को जनता दल (यूनाइटेड) और बीजेपी संयुक्त विधायक दल का नेता चुन लिया गया।

नीतीश ने देर रात ही नई सरकार बनाने का दावा पेश किया। नीतीश कुमार ने राज्यपाल से मिलकर बीजेपी, जनता दल (यूनाइटेड), हिंदुस्तानी अवाम मोर्चा, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी, लोक जन शक्ति पार्टी, दो निर्दलीय सहित कुल 131 विधायकों के समर्थन का पत्र प्रस्तुत किया था।

विपक्षी दलों की एकता को लेकर लालू यादव ने कहा कि अगर नीतीश कुमार बीजेपी के पास चले गए तो क्या हुआ, हम बीएसपी सुप्रीमो मायावती, सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव और टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी को साथ लाएंगे।

नीतीश कुमार 28 जुलाई को बिहार विधानसभा के विशेष सत्र में बहुमत साबित करेंगे।

लालू यादव ने अमित शाह पर निशाना साधते हुए सुपर एडिटर करार दिया। लालू ने कहा कि शाह खबर के बारे में फैसला करते हैं और मीडिया मालिकों को इस बारे में बताते हैं, संपादक को कौन बताता है। रिपोर्टर की गलती नहीं है।

लालू ने कहा कि कई मौकों पर पीएम मोदी के साथ नीतीश कुमार ने मुलाकात की और लंच भी किया। इस समय जो भी हुआ वो पहले से फिक्स था।

लालू यादव ने नीतीश कुमार पर निशाना साधते हुए उन्हें भस्मासुर करार दिया। साथ ही कहा कि कहा कि शराब के नाम पर उन्होंने ढोंग किया है। लालू ने आरोप लगाया कि नीतीश कुमार ने बीजेपी, मोदी और शाह के साथ मिलकर सीबीआई और ईडी की कार्रवाई करवाई।

दिग्विजय सिंह ने निशाना साधते हुए कहा, क्या कोई ट्रेन छूटी जा रही थी? जैसे कोई चोरी-डकैती हो रही थी रातों-रात। कोई नैतिकता की बात नहीं थी। नीतीश जी हमेशा नैतिकता की बात करते हैं क्या यही नैतिकता है? जनता ने आपको बीजेपी-संघ के विरोध में वोट दिया था।

शपथ लेने के बाद बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने कहा कि मेरा फैसला बिहार के हित और विकास में है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार के मुख्यमंत्री बनने पर नीतीश कुमार को फिर दी बधाई। इससे पहले बुधवार को भी मोदी ने बधाई थी।

आरजेडी के विधायक भाई बिरेंद्र ने कहा कि आनन-फानन में सरकार बनी, नीतीश कुमार को देश और बिहार की जनता की फिक्र नहीं है, सिर्फ कुर्सी की फिक्र है।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने नीतीश कुमार पर जोरदार हमला बोला है। राहुल ने महागठबंधन टूटने पर कहा कि नीतीश कुमार ने धोखा दिया है। राहुल ने कहा कि 3-4 महीने से हमें पता था कि ये प्लानिंग चल रही है। अपने स्वार्थ के  लिए व्यक्ति कुछ भी कर जाता है। कांग्रेस ने नीतीश कुमार को धोखेबाज बताया।

नीतीश कुमार को होगी उम्रकैद या फांसी, नया नेता चुने महागठबंधन: लालू यादव

राष्ट्रीय जनता दल के अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव ने महागठबंधन टूटने के बाद नीतीश कुमार पर करारा हमला किया है। लालू यादव ने पटना में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि नीतीश कुमार बीजेपी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से मिल गये हैं।

उन्होंने कहा कि नीतीश कुमार हत्या के एक मामले में आरोपी हैं और इस मामले में सजा होने पर उन्हें फांसी या आजीवन कारावास की सजा हो सकती है। लालू यादव ने कहा कि1991 में नीतीश पर मुकदमा दर्ज हुआ। ये मुकदमा आईपीसी की धारा 147, 148, 302, और 307 के तहत हुआ था।

लालू यादव ने कहा कि नीतीश कुमार को मालूम हो गया था कि वे मर्डर केस का मुख्‍य आरोपी है और उसका संज्ञान लिया जा चुका है। लालू ने इस बावत कुछ कानूनी कागजात भी मीडिया को दिखाये।

लालू ने कहा कि नीतीश कुमार को ये पता था कि वे इस मामले में बचने वाले नहीं हैं। इसलिए उन्होंने बीजेपी से मिलकर इस मामले की सेटिंग कर ली।

लालू ने कहा कि इसके बाद इस मामले के जज को प्रताड़ित किया गया।

लालू ने कहा कि हमने महागठबंधन खत्म नहीं किया। लालू यादव प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर भी बरसे और कहा कि जैसे ही नीतीश कुमार ने इस्तीफा दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने उन्हें ट्वीट कर बधाई दी। इससे साफ हो गया कि नीतीश कुमार बीजेपी से मिल चुके हैं।

लालू यादव ने कहा कि अब राष्ट्रीय जनता दल, जनता दल यूनाइटेड और कांग्रेस महागठबंधन का नया नेता चुने। लालू ने ये भी कहा कि वे कोशिश करेंगे कि महागठबंधन नहीं टूटेगा।

इस बीच लालू यादव के घर पर राष्ट्रीय जनता दल विधायकों और राष्ट्रीय जनता दल कार्यकर्ताओं की भीड़ जुटनी शुरू हो गई है। राष्ट्रीय जनता दल कार्यकर्ता नीतीश कुमार मुर्दाबाद, जनता दल यूनाइटेड हाय हाय के नारे लगा रहे हैं। नीतीश के इस्तीफे के बाद राष्ट्रीय जनता दल कार्यकर्ताओं में जबर्दस्त गुस्सा है, राष्ट्रीय जनता दल कार्यकर्ता नीतीश कुमार पर बिहार को मंझधार में छोड़ने का आरोप लगा रहे हैं।

नीतीश कुमार इस्‍तीफा: तेजस्वी ने भी राज्यपाल से मांगा समय, बड़े दल होने के नाते पेश करेंगे दावा

बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के इस्तीफे के बाद राज्य में तेजी से बदल रहे सियासी घटनाक्रम के बीच भारतीय जनता पार्टी ने नीतीश कुमार की सरकार को समर्थन करने की घोषणा की है।

बीजेपी ने कहा कि नीतीश के नेतृत्व में बनने वाली सरकार में भाजपा शामिल होगी। बीजेपी का समर्थन मिलने के बाद नीतीश रात में ही राजभवन जाकर अपनी सरकार का दावा पेश किया।

मिल रही जानकारी के अनुसार, नीतीश कल मुख्यमंत्री पद की शपथ ले सकते हैं। वहीं पीएम मोदी भी पटना पहुंच कर इस समारोह का हिस्सा बन सकते हैं।

वहीं तेजस्वी यादव ने भी ट्वीट करके जानकारी दी विधानसभा में सबसे बड़ा दल होने के नाते उन्होंने भी राज्यपाल से समय मांगा है और वो भी सरकार बनाने का दावा पेश करने जा रहे हैं।

इस मुद्दे  भाजपा के नेता सुशील कुमार मोदी ने यहां कहा, ''बिहार में नीतीश के नेतृत्व में अगर कोई भी सरकार बनती है, तो बीजेपी उसका समर्थन करेगी। बीजेपी विधानमंडल दल नीतीश कुमार को बतौर नेता विश्वास प्रकट करती है।''

सुशील ने बताया कि इसकी सूचना टेलीफोन के जरिए नीतीश कुमार को भी दे दी है, जिसे उन्होंने स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि बीजेपी भी सरकार में शामिल होगी। उन्होंने बताया कि जल्द ही इस फैसले से राज्यपाल को भी अवगत करा दिया जाएगा।

बिहार में भ्रष्टाचार के एक मामले में फंसे उपमुख्यमंत्री तेजस्वी प्रसाद यादव को लेकर हुए विवाद के बीच बुधवार को मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसके साथ ही महागठबंधन की 20 महीने पुरानी सरकार गिर गई।

तेज बहादुर ने पीएम मोदी को हथियार उठाने की धमकी दी

हर साल की तरह इस साल भी 26 जुलाई को भारत कारगिल विजय दिवस मना रहा है। ठीक 18 साल पहले कारगिल युद्ध में भारत की विजय हुई थी। भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को कारगिल विजय दिवस की शुभकामनाएं दी।

हालांकि इस बीच सेना में खराब खाने की शिकायत करने वाले सैनिक तेज बहादुर यादव का एक और वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में तेज बहादुर पीएम मोदी को धमकी दे रहे हैं कि अगर आरोपियों पर कार्रवाई नहीं हुई तो वह हथियार उठा लेंगे।

वीडियो में तेज बहादुर ने कहा, ''मुझे बहुत मजबूरी में आप लोगों के सामने आना पड़ा है। आप सब जानते हैं कि मैने पूरे भ्रष्टाचार का भांडाफोड़ करके रख दिया था। सरकार और प्रधानमंत्री ने खुद वीडियो देखा था और गृह मंत्री ने जांच के आदेश दिए थे। लेकिन इन लोगों ने (सेना ने) किसी प्रकार की जांच नहीं की। ये सब के सब गद्दार हैं। मैं इन गद्दारों को चेतावनी देता हूं कि मैं आपको एक महीने का समय दे रहा हूं कि एक महीने में यानी ठीक 25 अगस्त तक कोई कार्रवाई नहीं की और सहयोग नहीं किया तो ये तेज बहादुर गद्दारी पर उतर जाएगा।''

पीएम मोदी को भी चेतावनी देते हुए तेज बहादुर ने कहा, ''मोदी जी आपके पास 56 इंच का सीना है और मैं 57 इंच के सीने वाला तेज बहादुर आपको चैलेंज करता हूं कि अगर एक महीने में कोई जांच नहीं की और उचित कार्रवाई नहीं की तो मैं हथियार उठाने को भी तैयार हूं। इसकी जिम्मेदार यह सरकार होगी।''

तेज बहादुर ने वीडियो में आगे कहा कि ''मुझे हर तरह से परेशान किया जा रहा है। पहले हर वकील कह रहा था कि वो मेरा केस लड़ेगा, लेकिन आज वो लोग कहां हैं? मैं हर उस सैनिक से अपील करता हूं जिसके साथ अन्याय हुआ है कि 25 अगस्त को वो भी मेरे साथ हथियार उठाए।''

इस वीडियो को माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्वीटर पर 25 जुलाई को डाला गया है। वीडियो को कांग्रेस नेता संजय निरुपम समेत कई लोगों ने रिट्वीट किया है।