भारत

शंकर सिंह वाघेला को पार्टी से निकाला नहीं गया था: कांग्रेस

गुजरात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वाघेला ने कांग्रेस पार्टी से इस्तीफा देने का ऐलान किया। उससे पहले वाघेला ने कहा कि उनको पार्टी ने 24 घंटे पहले ही निकाल दिया है।

वाघेला के इन आरोपों को कांग्रेस ने गलत बताया। कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा, वाघेला जी के खिलाफ कोई एक्शन नहीं लिया गया है। उन्हें पार्टी से निकाले जाने की बात भी बेबुनियाद है। वाघेला जी चाहते थे कि इस वक्त जो राज्य में कांग्रेस अध्यक्ष हैं उनको हटा दिया जाए। लेकिन पार्टी हमेशा किसी भी एक शख्स से बड़ी होती है।

गुजरात कांग्रेस के वरिष्ठ नेता शंकर सिंह वाघेला ने शुक्रवार (21 जुलाई) को अपने 77वें जन्मदिन पर आयोजित एक कार्यक्रम में कांग्रेस से निकाले जाने की बात कही थी। गुजरात के गांधीनगर में आयोजित कार्यक्रम में वाघेला ने बताया कि उन्हें 24 घंटे पहले पार्टी से निकाला जा चुका है।

वाघेला ने कहा, ''कांग्रेस ने मुझे 24 घंटे पहले निकाल दिया, ये सोचकर कि पता नहीं मैं क्या कहता, विनाश काल विपरीत बुद्धि।''

हालांकि कुछ देर बाद वाघेला ने मीडिया से कहा कि उन्होंने कांग्रेस केे सभी पदों से इस्तीफा दे दिया है। वाघेला ने गुजरात विधान सभा में नेता विपक्ष के पद से भी इस्तीफा दे दिया है।

वाघेला ने कहा है कि वो किसी अन्य राजनीतिक पार्टी से नहीं जुड़ेंगे। वाघेला ने साफ किया कि वो राजनीति में सक्रिय रहेंगे।

गुजरात में इस साल के अंत में चुनाव होने वाले हैं। वाघेला ने अपने समर्थकों के बीच जन्मदिन का केक काटते हुए कहा कि वो 77 नॉट आउट पर खेल रहे हैं और उनका संन्यास लेने का कोई इरादा नहीं है।

दूसरी तरफ वरिष्ठ कांग्रेस नेता अंबिका सोनी ने पार्टी की हिमाचल प्रदेश प्रभारी पद से इस्तीफा दे दिया है। हिमाचल प्रदेश में भी इस साल के अंत में चुनाव होने हैं।

शंकर सिंह वाघेला ने कार्यक्रम में मौजूद समर्थकों से कहा कि उन्होंने भगवान शिव से विष को अपने गले में धारण करना सीखा है।

वाघेला कांग्रेस में शामिल होने से पहले बीजेपी के वरिष्ठ नेता थे। वो गुजरात के 12वें मुख्यमंत्री रहे हैं। वाघले केंद्र सरकार में भी मंत्री रह चुके हैं।

वाघेला और कांग्रेस के बीच अनबन की खबर पिछले कई महीनों से आ रही थी। इस अनबन की शुरूआत तब हुई, जब वाघेला ने कुछ महीने पहले ट्विटर पर कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी को अनफॉलो कर दिया था।

वाघेला ने कई मौकों पर कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और राहुल गांधी की आलोचना की। उन्होंने राहुल गांधी के नेतृत्व क्षमता पर भी सवाल उठाया था।

उसके बाद से ही इस बात की अटकल लगाई जा रही थी कि उन्हें या तो पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए निकाल दिया जाएगा या वो खुद पार्टी छोड़ देंगे।

वाघेला ने जून के आखिरी हफ्ते में कहा था कि गुजरात में कांग्रेस आत्मघाती रास्ते पर चल रही है और ऐसा ही रहा तो वो उसके पीछे नहीं जाएंगे।

इसी बीच ये खबर भी आई कि वाघेला शरद पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) और नीतीश कुमार की जदयू के साथ मिलकर गुजरात में एक तीसरा मोर्चा बना सकते हैं।

माना जा रहा है कि गुजरात विधान सभा चुनाव में वाघेला ज्यादा बड़ी भूमिका चाहते थे जो कांग्रेस आलाकमान उन्हें नहीं दे रहा था इस वजह से वो पार्टी और नेतृत्व से नाराज चल रहे थे।

नरेन्द्र मोदी सरकार देश के संविधान को पंगु बनाना चाहती है: राहुल गांधी

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी और आरएसएस पर फिर से हमला बोला है। कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में भारत के संविधान निर्माता बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर से जुड़े एक कार्यक्रम में राहुल गांधी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी, पीएम मोदी और आरएसएस आजकल एक एक कर देश की संवैधानिक संस्थाओं पर कब्जा कर रही है।

राहुल गांधी ने अपने भाषण में छात्र रोहित वेमुला का जिक्र किया। उन्होंने कहा, ''लोग कहते हैं कि रोहित वेमुला ने आत्महत्या कर ली थी, मैं इसे हत्या कहता हूँ, उसने जो अपमान सहे, उसकी वजह से उसकी हत्या हुई, वो मारा गया क्योंकि वो दलित था।''

राहुल गांधी ने अपने भाषण में कथित तौर पर गोमांस रखने के लिए मारे गये अखलाक का भी जिक्र किया। राहुल ने कहा कि वे लोग कहते हैं कि अखलाक इसलिए मारा गया क्योंकि उसने एक गाय चुराई थी, ये झूठ है। राहुल ने कहा कि अखलाक की हत्या पर सवाल उठाने के बजाय वे लोग इस पर बहस कर रहे हैं कि फ्रिज में रखा गया मांस मटन था या बीफ।

राहुल गांधी ने कहा कि नरेन्द्र मोदी और आरएसएस चाहती है कि हिन्दुस्तान इनके सामने अपनी आवाज को सरेंडर कर दे।

राहुल ने आरोप लगाया कि देश को जो संविधान बाबा साहेब ने दिया है मोदी सरकार उसे खत्म कर देना चाहती है, पंगु बना देना चाहती है।

राहुल ने बाबा साहेब का जिक्र करते हुए कहा कि सच्चाई और सत्ता एक चीज नहीं है, अम्बेडकर इसलिए महान हुए क्योंकि उन्होंने सच का साथ दिया।

राहुल यहीं नहीं रुके। उन्होंने कहा कि शहंशाह पूरी तरह से नंगा है, लेकिन उसके आस पास मौजूद किसी भी व्यक्ति को ये सच्चाई कहने की हिम्मत नहीं है।

राहुल गांधी ने किसानों, मजदूरों और नोटबंदी को लेकर भी सरकार पर हमला किया। राहुल ने कहा कि सरकार सार्वजनिक मंचों पर भले ही नोटबंदी को मास्टर स्ट्रोक बताती है, लेकिन बंद कमरों में सरकार भी ये स्वीकार करती है कि ये एक बड़ी गलती थी।

वित्त मंत्री को नहीं पता विदेशों में कितना काला धन जमा है

भारतीयों ने विदेशों या विदेशी बैंकों में कितना कालाधन जमा कर रखा है, उस बारे में भारत सरकार के पास कोई आधिकारिक अनुमान नहीं है। लोकसभा में एक सवाल का लिखित में जवाब देते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री अरूण जेटली ने यह बात कही।

हालांकि उन्होंने बताया कि वित्त मामलों पर स्थायी समिति की सिफारिशों के आधार पर भारत सरकार ने देश के अंदर और बाहर इस तरह के धन का अनुमान लगाने के लिए एक अध्ययन शुरू कराया है। उन्होंने बताया कि यह अध्ययन राष्ट्रीय लोकवित्त एवं नीति (एनआईपीएफपी), राष्ट्रीय आर्थिक प्रयुक्त अनुसंधान परिषद (एनसीएईआर) और राष्ट्रीय वित्त प्रबंध संस्थान (एनआईएफएम) द्वारा किया जा रहा है।

इन संस्थानों की रिपोर्टों के नतीजों पर सरकार की प्रतिक्रिया वित्त मामलों की स्थायी समिति के समक्ष जल्द ही रखी जाएगी। उन्होंने बताया कि स्विट्जरलैंड में एचएसबीसी के बैंक खातों में 628 भारतीयों के बैंक खाते होने की सूचना भारत सरकार को फ्रांस सरकार से दोहरे कराधान से बचाव समझौते (डीटीएसी) के तहत मिली थी। इन मामलों की जांच के जरिए 8,437 करोड़ रूपये की अघोषित आय को मई 2017 तक कर के दायरे में लाया गया।

गौरतलब है कि काला धन पर रोक लगाने के लिए सूचना के आदान-प्रदान के लिए जनवरी 2017 तक भारत ने 139 देशों (सिंगापुर सहित) विदेशी क्षेत्राधिकारों के साथ कर समझौते किए हैं।

वहीं बीते महीने स्विट्जरलैंड ने भारत और 40 अन्य देशों के साथ अपने यहां संबंधित देश के लोगों के वित्तीय खातों, संदिग्ध काले धन से संबंधित सूचनाओं के आदान-प्रदान की व्यवस्था को शुरू करने की मंजूरी दी थी। टैक्स संबंधी सूचनाओं के स्वत: आदान-प्रदान (ऑटोमैटिक एक्सचेंज ऑफ इन्फर्मेशन) पर वैश्विक संधि को मंजूरी के प्रस्ताव पर स्विट्जरलैंड की संघीय परिषद (मंत्रिमंडल) ने मुहर लगा दी थी। स्विट्जरलैंड सरकार ने इस व्यवस्था को साल 2018 से संबंधित सूचनाओं के साथ शुरू करने का निर्णय लिया है यानी आंकड़ों के आदान-प्रदान की शुरूआत 2019 में होगी।

ममता बनर्जी शुरू करेगी बीजेपी भारत छोड़ो आंदोलन

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने केन्द्र की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी के खिलाफ देशव्यापी आंदोलन शुरू करने की घोषणा की है। ममता बनर्जी ने आज 21 जुलाई को कोलकाता में शहीद दिवस रैली को संबोधित करते हुए कहा कि, टीएमसी 9 अगस्त से 'बीजेपी भारत छोड़ो आंदोलन' की शुरुआत करेगी, और देश से बीजेपी को खदेड़ देगी।

बता दें कि 9 अगस्त ही वो तारीख है जब देश में अंग्रेजो भारत छोड़ो आंदोलन शुरू हुआ था। महात्मा गांधी ने 8 अगस्त 1942 की रात को भारत छोड़ो आंदोलन की शुरुआत की थी और 9 अगस्त से पूरे देश में ये आंदोलन शुरू हो गया था। ममता बनर्जी ने इसी तारीख को बीजेपी के खिलाफ देश व्यापी आंदोलन करने की घोषणा की है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी आज कोलकाता में अपना शक्ति प्रदर्शन कर रही हैं। इस मौके पर कोलकाता के धर्मतल्ला में विशाल रैली का आयोजन किया गया है। पश्चिम बंगाल में टीएमसी और भारतीय जनता पार्टी के बीच काफी दिनों से जबर्दस्त टकराव देखने को मिल रहा है। पिछले कुछ दिनों में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह के पश्चिम बंगाल के लगातार दौरे से राज्य का सियासी तापमान बढ़ा हुआ है। इसी साल अप्रैल में बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने पश्चिम बंगाल के नक्सलबाड़ी में बीजेपी कार्यकर्ताओं को कहा था कि टीएमसी नरेन्द्र मोदी के विजय रथ को नहीं रोक पाएगी। इसका जवाब देते हुए ममता बनर्जी ने कहा था कि वे इस चुनौती को स्वीकार करती हैं और उनकी पार्टी दिल्ली पर कब्जा करेगी।

बता दें कि तृणमूल कांग्रेस हर साल 21 जुलाई को शहीद दिवस मनाती हैं। 21 जुलाई 1993 को सीपीएम के शासनकाल में ममता बनर्जी ने राइटर्स बिल्डिंग का घेराव किया था, इस दौरान पुलिस फायरिंग में ममता के 13 समर्थकों की मौत हो गई थी। इस दौरान ममता बनर्जी भी घायल हो गईं थी। तब से तृणमूल कांग्रेस हर साल 21 जुलाई को शहीद दिवस समारोह का आयोजन करती है।

कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत को अमेरिका और चीन की मदद लेनी चाहिए: फारूक अब्‍दुल्‍ला

जम्मू-कश्मीर के हालात दिन प्रतिदिन बिगड़ते जा रहे हैं। इसे लेकर आए दिन विपक्ष केंद्र और राज्य सरकार पर हमला बोलते हुए कहता है कि न तो केंद्र सरकार इसके लिए कुछ कर पा रही है और न ही बीजेपी गठबंधन वाली राज्य की पीडीपी सरकार।

कश्मीर घाटी में बढ़ते तनाव को लेकर राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अबदुल्ला ने शुक्रवार (21 जुलाई) को एएनआई से कहा कि कश्मीर मुद्दे को सुलझाने के लिए भारत को अमेरिका और चीन की मदद लेनी चाहिए।

अबदुल्ला ने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप कह चुके हैं कि वे कश्मीर मुद्दे को खत्म कराना चाहते हैं और साथ ही चीन भी कह चुका है कि वह इस मुद्दे को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच मध्यस्थता करने के लिए तैयार है।

इसके बाद फारूक अबदुल्ला  ने कहा कि जब दोनों देश आगे बढ़कर कश्मीर मुद्दे को सुलझाना चाह रहे हैं तो इस मसले को हल करने के लिए दोस्तों को इस्तेमाल करना चाहिए। सरकार को उनसे बातचीत करनी चाहिए।

इसके बाद अबदुल्ला ने कहा कि एटम बम भारत के पास भी है और पाकिस्तान के पास भी, लेकिन युद्ध से हल नहीं निकाला जा सकता। केवल बातचीत करके इस मामले को सुलझाया जा सकता है। इससे पहले अपने एक बयान में अबदुल्ला ने कहा था कि कश्मीरी युवा अपना जीवन कश्मीर मुद्दों के लिए कुर्बान कर रहे हैं, न कि पर्यटन के लिए।

देश विरोधी नारों से न तो देश टूटा है और न ही टूटेगा। यह बात उन्होंने उत्तर प्रदेश के मेरठ में आयोजित एक कार्यक्रम में कही थी। उन्होंने कहा था कि कश्मीर में इस तरह के नारे लगाए जाना आम बात है।

हाल ही में जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती ने कहा था कि कश्मीर मुद्दे के  लिए चीन जिम्मेदार है। दिल्ली में गृहमंत्री राजनाथ सिंह से मुलाकात के बाद महबूबा ने कहा, ''कश्मीर में समस्या कानून व्यवस्था की नहीं है। बाहरी ताकतों का माहौल बिगाड़ने में हाथ है। विदेशी ताकतों द्वारा घुसपैठ की लड़ाई है और अब तो चीन भी इसमें हाथ डाल रहा है।''

इस पर बात करते हुए फारूक अबदुल्ला ने कहा था कि मुझे नहीं पता कि चीन कश्मीर में दखल दे रहा है या नहीं। उनको ज्यादा जानकारी होगी क्योंकि वह मुख्यमंत्री हैं। मेरा मानना है कि चीन से लड़ाई लेना अच्छा नहीं होगा। हम लोगों को बातचीत से मामले को हल करना चाहिए।

सीएजी का खुलासा: भारतीय रेलवे का खाना इंसानों के खाने लायक नहीं है

नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) ने भारतीय रेलवे द्वारा परोसे जाने वाले खाने को लेकर संसद में जो रिपोर्ट पेश की है। उसके बारे में जानकर होश उड़ जायेंगे। सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में यह खुलासा किया है कि भारतीय रेलवे का खाना इंसानों के खाने लायक नहीं है।

शुक्रवार (21 जुलाई) को सीएजी ने यह रिपोर्ट संसद में पेश की। रिपोर्ट में कहा गया है कि दूषित खाद्य पदार्थों, रिसाइकिल किया हुआ खाना और डब्बा बंद व बोतलबंद सामान का इस्तेमाल एक्सपाइरी डेट के बाद भी किया जाता है।

सीएजी ने यह खुलासा भी किया है कि कैसे खाना बनाने में साफ-सफाई पर बिलकुल भी ध्यान नहीं दिया जाता।

74 स्टेशनों और 80 ट्रेनों के निरीक्षण में सीएजी ने पाया कि खाना तैयार करने के दौरान सफाई पर ध्यान नहीं दिया जाता। खाना या फिर ड्रिंक्स तैयार करने के लिए सीधे नल से अशुद्ध पानी का इस्तेमाल किया जाता है। निरीक्षण के दौरान कूड़ेदानों के ढक्कन गायब पाए गए और यह भी पता चला कि उनकी धुलाई का काम भी नियमित रूप से नहीं किया जाता। मक्खियां-कीड़ों से खाद्य पदार्थों के बचाव के लिए कोई कवर इस्तेमाल नहीं किया जाता। वहीं कुछ ट्रेनों में कॉकरोच और चूहे भी मिले।

सीएजी ने ऑडिट में पाया है कि रेलवे की फूड पॉलिसी में लगातार बदलाव होने से यात्रियों को बहुत ज्यादा परेशानियां होती हैं।

इसके अलावा कई नियमों का उल्लंघन भी किए जाने का खुलासा भी इस रिपोर्ट के जरिए हुआ है। खाना या अन्य सामान लेने के बाद कस्टमर को बिल नहीं दिया जाता। खाना तय मात्रा से कम में भी यात्रियों को परोस दिया जाता है।

साथ ही रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अनुमोदित सामान जैसे पीने का पानी भी ट्रेनों में बेचा जाता है। वहीं काफी सामान, बाजार कीमत से ऊंचे दामों पर बिकता हुआ भी पाया गया।

रामनाथ कोविंद भारत के 14वें राष्ट्रपति होंगे

रामनाथ कोविंद भारत के 14वें राष्ट्रपति होंगे। राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार रामनाथ कोविंद को सात लाख दो हजार 644 वोट मिले हैं। वहीं मीरा कुमार को तीन लाख 66 हजार 314 वोट मिले हैं।

रामनाथ कोविंद को 65.35 प्रतिशत वोट मिले, मीरा कुमार को 34.35 प्रतिशत वोट मिले।

सोमवार (17 जुलाई) को भारत के 32 मतगणना स्थलों पर राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग हुई थी। गुरुवार को सबसे पहले संसद में हुए मतदान की पेटी खोली गई। उसके बाद आंध्र प्रदेश और असम की मतपेटियां खोली गई।

राष्ट्रपति पद के लिए एनडीए के रामनाथ कोविंद और कांग्रेस की मीरा कुमार के बीच मुकाबला था। मौजूदा राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी का कार्यकाल 24 जुलाई को खत्म हो रहा है।

भारत के 14वें राष्ट्रपति 25 जुलाई को पद की शपथ लेंगे।

बीजेपी में बगावत: दीव जिला पंचायत की सत्ता गई

दमन और दीव में बीजेपी को दीव नगर निगम चुनावों में मिली हार के बाद पार्टी को बहुत बड़ा नुकसान उठाना पड़ा है। दीव जिला पंचायत अध्यक्ष समेत पांच लोगों ने इस हफ्ते की शुरुआत में बीजेपी से अलग हो गए। इस सामूहिक इस्तीफे के बाद बीजेपी की जिला पंचायत की सत्ता को करारा झटका लगा है।

इस पर बीजेपी राज्य चीफ गोपाल टंडेल का कहना है कि फिलहाल किसी भी बीजेपी नेता का इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है, लेकिन जल्द ही इस मामले को सुलझा लिया जाएगा। दीव जिला पंचायत अध्यक्ष शशिकांत सोलंकी समेत उपाध्यक्ष अश्विनी बामनिया और जिला पंचायत सदस्य पूजा पंजानी, धनीबेन सोलंकी और जेंतीलाल सोमालाल ने सोमवार को दीव प्रदेश अध्यक्ष बिपिन शाह को अपना इस्तीफा दिया। बिपिन शाह ने इन लोगों का इस्तीफा मंजूर करते हुए उसे गोपाल टंडेल के पास भेज दिया। इसके एक घंटे बाद बिपिन शाह ने भी पंचायत चुनाव के हार की जिम्मेदारी अपने सिर लेते हुए दीव यूनिट चीफ पद से इस्तीफा दे दिया।

इस महीने के शुरुआत में दीव में नगर निगम के चुनाव हुए थे जिसमें कांग्रेस ने 13 सीटों में से 10 सीटों पर अपना कब्जा जमाया। इन चुनावों में बीजेपी को केवल तीन सीटों से ही संतुष्ट होना पड़ा था। जिस दिन इन चुनावों के नतीजे आए थे उसी दिन हार की जिम्मेदारी लेते हुए प्रदेश उपाध्यक्ष किरित वजा ने इस्तीफा दे दिया था।

इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान बुधवार को शशिकांत सोलंकी ने कहा, पार्टी मुझे जिला पंचायत के अध्यक्ष पद से हटाना चाहती है, जबकि मैंने नगर निगम चुनावों में पार्टी के सभी उम्मीदवारों का खुलकर समर्थन किया था। हम अब बीजेपी के साथ जुड़े नहीं रह सकते इसलिए हम किसी अन्य राजनीतिक पार्टी में शामिल होने के लिए जा रहे है।

इस पर बात करते हुए प्रदेश अध्यक्ष गोपाल टंडेल ने कहा कि अभी न तो किसी भी जिला पंचायत से जुड़े व्यक्ति का इस्तीफा मंजूर किया गया है और न ही बिपिन शाह और किरित वजा का इस्तीफा मंजूर हुआ है। प्रदेश की होने वाली अगली बैठक में इस मामले पर चर्चा की जाएगी और तभी इन लोगों के इस्तीफे को लेकर कोई फैसला लिया जाएगा।

बता दें कि  2015 में हुए पंचायत चुनावों में बीजेपी ने सात सीटों पर अपना कब्जा जमाया था, जबकि कांग्रेस के हाथ एक भी सीट नहीं लगी थी।

बाल गंगाधर के परपोते के खिलाफ बलात्कार का केस दर्ज

रोहित तिलक जो कि बाल गंगाधर तिलक के परपोते हैं, उनपर एक महिला ने रेप का आरोप लगाया है।

यह भी आरोप है कि रोहित तिलक ने महिला पर अप्राकृतिक सेक्स करने का दबाव भी बनाया था। सोमवार (17 जुलाई) को रोहित के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था।

रोहित स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक के परपोते हैं। उनके पिता का नाम जयंतराव तिलक था। वह भी कांग्रेस के सीनियर नेता रहे और सांसद भी चुने गए थे।

पुलिस ने बताया कि आरोप लगाने वाली महिला की उम्र 40 साल है। महिला ने शिकायत में लिखवाया कि वह रोहित को तकरीबन दो साल पहले से जानती थी। महिला ने पुलिस को बताया कि रोहित ने शादी का झांसा देकर उससे कई बार बलात्कार किया।

पुलिस ने रेप, अप्राकृतिक सेक्स, जानबूझकर नुकसान पहुंचाना जैसी धाराएं लगाई हैं। रोहित ने 2014 में महाराष्ट्र की केसबा पेठ सीट से लोकसभा चुनाव लड़ा था, लेकिन उन्हें बीजेपी के गिरीश बापत ने हरा दिया था।

हिन्दुस्तान में गंजे को कंघी बेचने की कला अगर किसी के पास है तो वो है नरेंद्र मोदी: संजय सिंह

आम आदमी पार्टी के नेता और उत्तर प्रदेश के प्रभारी संजय सिंह ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला बोलते हुए कहा है कि अगर हिंदुस्तान में गंजे को कंघी बेचने की कला किसी को आती है तो वो हैं नरेंद्र मोदी। संजय सिंह ने ये बयान उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में आयोजित एक कार्यक्रम में दिया।

संजय सिंह ने मोदी को घेरते हुए कहा कि पहले तो उन्होंने नोटबंदी कर जनता की कमर तोड़ी, फिर उसके फायदे बताने लगे। उससे भी मन नहीं भरा तो 28 प्रतिशत जीएसटी का ऐलान कर दिया।

संजय सिंह ने कहा कि पिछली यूपीए सरकार में जब मनमोहन सिंह 14 प्रतिशत जीएसटी ला रहे थे तो इन्हीं नरेंद्र मोदी ने उसे व्यापारियों के लिये नुकसानदायक बताते हुए विरोध किया था। आम आदमी पार्टी नेता ने आगे कहा कि मनमोहन सिंह के 14 प्रतिशत जीएसटी के मुकाबले पीएम मोदी 28 प्रतिशत जीएसटी लाए, शायद उनकी सोच रही होगी कि मैं तो मनमोहन सिंह से डबल हूँ तो जीएसटी भी डबल होना चाहिए।

जीएसटी के मुद्दे पर मोदी की आलोचना करते हुए संजय सिंह ने कहा कि अगर हिंदुस्तान में गंजे को कंघी बेचने की कला किसी को आती है तो वो हैं नरेंद्र मोदी। संजय सिंह ने सिर्फ प्रधानमंत्री को ही निशाने पर नहीं लिया, उन्होंने यूपी के सीएम योगी आदित्य नाथ को भी घेरा।

यूपी विधानसभा में मिले विस्फोटक पर बयान देते हुए संजय सिंह ने कहा कि ये योगी सरकार की सोची समझी साजिश है। संजय सिंह ने कहा कि योगी आदित्य नाथ चाहते ही नहीं हैं कि बजट को लेकर सदन में बहस हो, इस कारण इस तरह की चीजें सामने लाई जा रही हैं।