भारत

गुजरात में जहरीला चारा खाने से 65 गायों की मौत

गुजरात के कच्‍छ जिले में शुक्रवार-शनिवार (30 जून-1 जुलाई) की रात को 65 गायों, बछड़ों की मौत हो गई थी। घटना रापर तालुका के एक गौशाला में हुई।

अब पोस्‍टमॉर्टम में सामने आया है कि गायों की मौत की वजह सायनाइड के जहर की वजह से हुई है। पहले यह माना जा रहा था कि बाढ़ की वजह से गायों की मौत हुई, मगर अब अधिकारियों का कहना है कि इसका पिछले सप्‍ताह हुई भारी बारिश से कोई लेना-देना नहीं है। साल भर में इतनी बड़ी संख्‍या में गायों की मौत की यह दूसरी घटना है।

इंडियन एक्‍सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, घटना रातर कस्‍बे से करीब 7 किलोमीटर दूर श्री जिवदया मंडल (एसजेएम) के गौशाला में हुई। शनिवार रात को भारी बारिश हुई थी। शाम साढ़े सात बजे के आसपास चरवाहों ने पाया कि कुछ गायें अचानक बेहोश हो जा रही हैं।

एसजेएम के मैनेजर राजेन्‍द्र कोठारी ने इंडियन एक्‍सप्रेस से बातचीत में कहा, ''जैसे ही हमारे लोगों ने बताया कि मवेशी बेहोश हो रहे हैं, हमनें पशु-चिकित्‍सकों को मौके पर भेजा और करीब 80 गायों व बछड़ों का इलाज शुरू कर दिया। दुर्भाग्‍य से हम सिर्फ 30 को बचा पाए, जबकि 65 की मौत हो गई।''

एसजेएम एक ट्रस्‍ट है जो रापर में तीन गौशाला चलाता है, संस्‍था करीब 8,000 पशुओं की देशभाल करती है। बीते गुरुवार को रापर में 7 इंच बारिश हुई थी, उसके बाद अगले दो दिन बारिश जारी रही।

पशु चिकित्‍सकों ने साफ कर दिया है गायों की मौत बारिश की वजह से नहीं हुई। रापर के सरकारी वेटरिनरी ऑफ‍िसर शैलेष चौधरी ने कहा, ''गायों के पोस्‍टमॉर्टम से स्‍पष्‍ट हो गया कि उनकी मौत सायनाइड के जहर की वजह से हुई थी जो कि हरे बाजरे में पाया गया, यह उन्‍हें शनिवार की दोपहर को खिलाया गया था। चारे में सायनाइड की मात्रा अधिक थी और उसके बाद मवेशियों का पानी पीना जानलेवा साबित हुआ। हालांकि, इन मौतों का बारिश से लेना-देना नहीं है।''

कोठारी के अनुसार, मवेशियों के लिए चारा पड़ोसी गांवों से आता है। उन्‍होंने कहा, ''हमें रोज करीब 10 ट्रक चारे की जरूरत होती है। शनिवार को सभी जानवरों को हरे बाजरे का चारा दिया गया था। लेकिन वेटरिनरी डॉक्‍टररों ने बताया कि सायनाइड मिला चारा खाने के बाद पानी पीना घातक साबित हुआ। इसलिए जिन गायों ने बाजरा खाने के बाद पानी पिया, वे प्रभावित हुईं और उनमें से 65 की मौत हो गई।''

कच्छ के कई इलाकों में गुजरात सरकार टोकन दरों पर चारा मुहैया कराती है। रापर में ममलतदार प्रमुख हमीर वाघेला ने कहा, ''चारा वितरण रापर में भी चल रहा है। फतेहगढ़ में भी घास डिपो है। हालांकि सभी लोग यहां से घास नहीं खरीदते।''

कच्‍छ की यह घटना गुजरात सरकार की गायों के प्रति संवेदनशीलता दिखाने के कुछ ही दिन बाद हुई है। हाल ही में बीजेपी सरकार ने गुजरात पशु संरक्षण अधिनियम में बदलाव कर गायों की हत्‍या पर उम्रकैद की सजा का प्रावधान किया है। इसके अलावा बीफ की बिक्री, भंडारण और ढुलाई को लेकर भी सजा बढ़ाई गई है।

जहरीले चारे से गायों की मौत की यह दूसरी घटना है। पिछले साल अप्रैल में, पश्चिमी कच्‍छ के नारायण सरोवर गांव की गौशाला में मक्‍के का जहरीला चारा खाने से 24 गायों और बछड़ों की मौत हो गई थी। मक्‍के को खेत से काटने के बाद पर्याप्‍त हवा नहीं मिली जिससे उसमें नाइट्राइट जहर बन गया था।

नीतीश ने कहा, उत्तर प्रदेश की सड़कों पर बिहार से कहीं ज्‍यादा गायें हैं

बिहार के मुख्‍यमंत्री नीतीश कुमार ने लालू प्रसाद यादव की पार्टी राष्‍ट्रीय जनता दल (आरजेडी) के साथ मतभेदों पर चुप्‍पी तोड़ी है। नीतीश के आरजेडी की अगले महीने प्रस्तावित रैली में भाग लेने को लेकर अटकलों का दौर चल रहा था।

रविवार को पटना में नीतीश ने मीडिया से कहा, ''आरजेडी रैली पर टिप्‍पणी करने की जरूरत नहीं है। सबके अपने कार्यक्रम होते हैं। अगर आरजेडी बुलाएगी तो रैली में जाऊंगा।''

राष्‍ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्‍मीदवार को समर्थन करने पर विपक्ष के तानों पर नीतीश ने कहा, ''हम किसी के पिछलग्‍गू नहीं हैं जो होना होगा सो होगा। हमारा एक सिद्धांत है, हमारा सिद्धांत अटल है।''

नीतीश ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा, ''सिद्धांत मैं नहीं, आप (कांग्रेस) बदल रहे हैं .... लोहिया जी ने कांग्रेस को 'सरकारी गांधीवादी' कहा था।''

गाय को लेकर बीजेपी की राजनीति पर हमला बोलते हुए नीतीश ने कहा कि बिहार से ज्‍यादा गाएं उत्तर प्रदेश की सड़कों पर हैं। उन्‍होंने कहा, ''बीजेपी गायों की बात करती हैं। वे सड़कों पर घूम रहीं गायें ले क्‍यों नहीं जाते? उत्तर प्रदेश की सड़कों पर बिहार से कहीं ज्‍यादा गायें हैं।''

जेडीयू ने फैसला लिया है कि समाजवादी आंदोलन के नायक राम मनोहर लोहिया, लोक नायक जयप्रकाश नारायण, जन नायक कर्पूरी ठाकुर, भीम राव अम्बेडकर की जयंती-पुण्य तिथि कार्यक्रम को पंचायत स्तर तक आयोजित किया जायेगा।

जेडीयू प्रवक्‍ता संजय ने कहा कि जीएसटी पर उनकी पार्टी का रुख आइने की तरह साफ है और हम इसका पूर्ण रुप से समर्थन करते हैं।

मोदी ने कहा था, भारत में जीएसटी कभी कामयाब नहीं होगा

जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स (वस्तु एवं सेवा कर) 30 जून की मध्यरात्रि से संपूर्ण भारत (जम्मू-कश्मीर को छोड़कर) में लागू हो चुका है।

भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घंटा बजाकर देशभर में सबसे बड़े कर सुधार की शुरुआत की जिसके तहत एक जुलाई से देशभर में 'एक कर, एक देश, एक बाजार' के सिद्धांत की शुरुआत हो गई है।

दूसरी तरफ प्रमुख विपक्षी दल कांग्रेस सहित कई दलों ने आधी रात को संसद सत्र बुलाने का विरोध करते हुए इसका बॉयकॉट किया।

साथ ही देशभर में जीएसटी लागू होने के कुछ घंटे बाद कांग्रेस ने ट्विटर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक पुराना वीडियो शेयर किया है जिसमें पीएम मोदी कह रहे हैं कि जीएसटी कभी कामयाब नहीं हो सकता, ये नामुमकिन है।

ट्विटर पर वीडियो शेयर करते हुए कांग्रेस ने लिखा, ''जीएसटी को लेकर ये है मोदी जी और बीजेपी की सोच।''

वहीं वीडियो में प्रधानमंत्री मोदी कह रहे हैं, ''जीएसटी का सवाल है। भारतीय जनता पार्टी और गुजरात का रवैया शुरू से ही साफ है। जीएसटी कभी सफल नहीं हो सकता।''

वहीं एक अन्य वीडियो शेयर करते हुए कांग्रेस ने लिखा, ''मोदी जी आप कितनी जल्दी भूल जाते हैं खुद के शब्द। उचित बुनियादी ढांचे का विकास किए बना आप जीएसटी को क्यों लागू कर रहे हैं?''

वहीं इस वीडियो में पीएम मोदी कह रहे हैं, ''जीएसटी के संबंध में गुजरात सरकार और भारतीय जनता पार्टी का पक्ष बिल्कुल साफ है। हमने कहा कि जीएसटी का सपना तबतक साकार नहीं हो सकता, जबतक सरकार करदाताओं के साथ आईटी सेक्टर का बुनियादी ढांचा नहीं बनाती। ये नामुमकिन है क्योंकि जीएसटी की रचना ही ऐसी है, हम इसे लागू ही नहीं कर सकते। ये बिल्कुल नामुमकिन है।''

जीएसटी से बढ़ेगा आम आदमी पर बोझ, आसमान छुएगी महंगाई: पी चिदंबरम

भारत के पूर्व केंद्रीय वित्तमंत्री पी. चिदंबरम ने शनिवार को कहा कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) आम आदमी पर बोझ साबित होगा और सूक्ष्म, छोटे व मंझोले व्यापारियों को यह बुरी तरह प्रभावित करेगा क्योंकि जिस कानून को लागू किया गया है, वह वैसा नहीं है, जैसी योजना मूल रूप से बनाई गई थी। इससे कई चीजें महंगी हो जाएंगी।

चिदंबरम ने प्रेस वार्ता में कहा कि नए कानून का मुनाफाखोरी-रोधी प्रावधान अधिकारियों के हाथ में उत्पीड़न के औजार का काम करेगा।

पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि 80 फीसदी वस्तु व सेवाओं पर कर लगेगा और कीमतें बढ़ेंगी। उन्होंने कहा, ''महंगाई बढ़ेगी। सरकार इस बारे में क्या कर रही है?''

चिदंबरम ने कहा कि सूक्ष्म, छोटे तथा मंझोले उद्यमी व व्यापारी बुरी तरह प्रभावित होंगे, क्योंकि नए कानून को अपनाने के लिए उनकी तैयारी नहीं है। उन्होंने कहा, ''व्यापारी वर्ग जीएसटी अपनाने के लिए कुछ समय चाहता था, लेकिन सरकार ने उन्हें वक्त देने से इनकार कर दिया।''

पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि समझौते के नाम पर एक अजीब व्यवस्था बनाई गई है और कानून को जल्दबाजी में लागू कर दिया गया, जबकि कारोबारी ने कुछ और वक्त मांगा था, क्योंकि वे इसके लिए तैयार नहीं थे। नए कानून के नतीजे कुछ वक्त बाद दिखाई पड़ेंगे।

चिदंबरम ने कहा, ''यह असल जीएसटी नहीं है, जिसकी इच्छा कांग्रेस ने जताई थी और जिसे आदर्श रूप में विशेषज्ञों ने तैयार किया था। स्वरूप बदलकर लागू किया जाना दुखद है। इससे बदतर कानून और कोई नहीं हो सकता।''

पूर्व वित्तमंत्री ने कहा कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार ने इस कानून के लिए काफी मेहनत की थी और उस वक्त भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) ने इसका बुरी तरह से विरोध किया था। गुजरात के मुख्यमंत्री रहते खुद नरेंद्र मोदी ने इसका विरोध किया था।

उन्होंने कहा, ''भाजपा जब विपक्ष में थी, तो उसने जीएसटी का पुरजोर विरोध किया था। इस तथ्य से कोई भी इनकार नहीं कर सकता।''

कांग्रेस नेता ने कहा कि जीएसटी का मतलब होता है, एक कर और कांग्रेस ने 15 फीसदी के मानक दर को स्वीकार किया था जिसमें एक फीसदी कम या ज्यादा को तरजीह दी गई थी। उन्होंने कहा, ''हम पहले ही कह चुके हैं कि किसी भी दर पर कर 18 फीसदी से ज्यादा नहीं हो सकता। हमने इस बात को भी स्वीकार किया है कि मौजूदा आर्थिक हालात के मद्देनजर, कर की एक दर नहीं हो सकती।''

चिदंबरम ने कहा कि एक दर की अवधारणा के विपरीत नए कानून में कई दरें हैं- जीरो फीसदी, 2.5 फीसदी, 3 फीसदी, 5 फीसदी, 15 फीसदी, 18 फीसदी, 28 फीसदी तथा 40 फीसदी।

चिदंबरम ने दलील दी कि पेट्रोलियम, बिजली तथा अल्कोहल जैसे कई उत्पाद जीएसटी के दायरे से बाहर हैं। उन्होंने कहा, ''ताज्जुब की बात है कि पेट्रोलियम और बिजली, जो देश की अर्थव्यवस्था का 35-40 फीसदी है, वे जीएसटी के दायरे से बाहर हैं।''

कांग्रेस नेता ने कहा, ''नए कानून का मुनाफाखोरी-रोधी प्रावधान अधिकारियों के हाथ में उत्पीड़न के औजार के तौर पर काम करेगा और हर किसी को पता है कि जब अधिकारियों के हाथ में उत्पीड़न का औजार थमा दिया जाता है, तो क्या होता है।''

चिदंबरम ने कहा कि कांग्रेस जीएसटी के खिलाफ नहीं है, बल्कि जिस तरह और जिस बदले हुए स्वरूप में इसे लागू किया जा रहा है, वह उसके खिलाफ है।

चिदंबरम ने यह भी कहा कि जीएसटी का प्रभाव मुद्रास्फीति पर पड़ेगा। कांग्रेस ने जीएसटी लागू करने को लेकर संसद के सेंट्रल हॉल में आधी रात को हुए समारोह का बहिष्कार किया था।

सिक्किम टकराव के बीच चीन ने भूटान की जमीन पर दावा पेश किया

सिक्किम पर चल रहे तनाव के बीच चीन ने एक नया नक्शा जारी किया है। इस मैप में चीन ने सिक्किम की विवादित क्षेत्र को अपना दिखाया है, साथ ही भारत-चीन-भूटान त्रिकोणीय जंक्शन पर भी चीन ने अपना दावा पेश किया है।

नक्शे में नीले रंग के तीर के जरिए दावा किया गया है कि भारतीय सेना ने डोकलाम इलाके में बॉर्डर क्रॉस किया है।

डोकलाम इलाके को भूटानी क्षेत्र माना जाता है, लेकिन चीन ने इसे अपना बताया है। यह नक्शा शुक्रवार को जारी किया गया था, जिसमें कहा गया है कि डोकलाम इलाका चीन के मवेशियों का पारंपरिक चारागाह रहा है।

उसका कहना है कि भारतीय सेना ने डोकाला सीमा क्षेत्र में मानचित्र का उल्लंघन किया है। चीन ने कहा है कि 1890 में ब्रिटिश-चीन संधि के अंतर्गत यह क्षेत्र दर्शाया गया है।

बता दें कि हाल ही में विवाद तब शुरू हुआ, जब चीनी सैनिकों ने भारतीय इलाके में बने दो अस्थायी बंकरों को नष्ट कर दिया। चीन द्वारा घुसपैठ की ताजा कोशिश को रोकने के लिए भारतीय सैनिकों ने मानव दीवार बनाई थी। भारत के सिक्किम में स्थित विवादित इलाका भूटान और तिब्बत के सीमा के निकट है।

रिपोर्ट के अनुसार, इस इलाके खासकर डोका ला में स्थिति कई सालों से गंभीर बनी हुई है। दोनों ही देश अपने सैनिकों को पीछे नहीं हटाना चाहते।

राष्ट्रपति और पीएम ने घंटी बजाकर पूरे देश में जीएसटी लागू किया

जीएसटी यानी गुड्स एंड सर्विस टैक्स (वस्तु एवं सेवा कर) आज (30 जून) की मध्यरात्रि से देश भर (जम्मू-कश्मीर को छोड़कर) में लागू हो चुका है।

नरेंद्र मोदी ने सेंट्रल हॉल में संबोधन के दौरान कहा कि '20 लाख तक का व्यापार करने वालों को जीएसटी से मुक्ति मिलेगी। साथ ही 75 लाख तक के व्यापारी को जीएसटी में राहत मिलेगी।'

जीएसटी भारत की अप्रत्यक्ष कर व्यवस्था में बदलाव लाते हुए एकल बाजार में 2,000 अरब डालर की अर्थव्यवस्था और 1.3 अरब लोगों को जोड़ेगी।

बता दें कि इस समारोह में भारत के राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी, उप राष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, लोकसभा अध्यक्ष सुमित्रा महाजन, सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस जे एस खेहर, वित्त मंत्री अरुण जेटली के अलावा तमाम केंद्रीय मंत्री मौजूद रहे। कांग्रेस सहित विपक्ष ने इस कार्यक्रम का बहिष्कार किया।

पीएम नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने घंटी बजाकर पूरे देश में जीएसटी लागू किया।

राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने कहा कि जीएसटी मेरे लिए भी ऐतिहासिक अवसर है क्योंकि वित्त मंत्री रहते हुए मैंने इसके लिए काफी पहल की थी।

पीएम मोदी ने कहा कि 'जीएसटी पर संसद में पहले के सांसदों और मौजूदा सांसदों ने लगातार चर्चा की और उसी का परिणाम रहा कि आज हम इसे साकार रूप में देख पा रहे हैं।'

नरेंद्र मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि आज देश आगे का रास्ता तय करने जा रहा है। जीएसटी हमारी सांझी विरासत है। ये किसी दल की सिद्धी नहीं है।

अरुण जेटली ने बताया कि जीएसटी से 17 टैक्स समेत 23 सेस खत्म होंगे।

अरुण जटली ने इसे भारत के लिए नई राह की शुरुआत बताई। जेटली ने कहा, ''एक राष्ट्र, एक टैक्स हमारा उद्देश्य। राज्य और केंद्र सरकार एक दिशा में काम करेंगे।''

कांग्रेस ने दिखाया मोदी का 'एंटी जीएसटी' वीडियो, कहा था- हम इसे लागू ही नहीं कर सकते, सिंपल सी बात है

भारत में गुड्स एंड सर्विस टैक्स (जीएसटी) के लॉन्च होने से चंद घंटों पहले शुक्रवार (30 जून) को कांग्रेस ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर एक पुराना वीडियो पोस्ट करके हमला बोला।

उस वीडियो में नरेंद्र मोदी जीएसटी का विरोध करते दिख रहे हैं। वीडियो में मोदी कहते है, ''जहां तक जीएसटी के संबंध में गुजरात सरकार और भारतीय जनता पार्टी का सवाल है तो हमारा स्टैंड बिल्कुल साफ है, जीएसटी के संबंध में हमने कहा है कि आपका जीएसटी का सपना तबतक पूरा नहीं हो सकता, तबतक साकार नहीं हो सकता, जबतक की आप पूरे देश में टैक्स पेयर के साथ आईटी इंफ्रास्ट्रक्चर का नेटवर्क नहीं बनाते, यह जीएसटी की रचना ही ऐसी है कि हम जीएसटी को लागू ही नहीं कर सकते, यह सिंपल सी बात है।

#GSTTamasha हैशटैग के साथ इस वीडियो को पोस्ट करते हुए कांग्रेस के ट्विटर अकाउंट से लिखा गया कि मोदी जी कितनी जल्दी अपने ही शब्द भूल जाते हैं, वह जीएसटी को बिना इंफ्रास्ट्रक्चर का निर्माण किये क्यों लागू कर रहे हैं।

राजद्रोह के झूठे आरोप में गिरफ्तार किये गए 15 मुस्लिमों को कोर्ट ने किया रिहा

चैंपियंस ट्रॉफी में पाकिस्तान के हाथों भारत को मिली करारी हार के बाद खुशियां मनाने के आरोप में गिरफ्तार 15 लोगों पर मध्य प्रदेश पुलिस ने पहले 'राजद्रोह' का मामला दर्ज किया था, लेकिन बाद में कोई सबूत न मिलने पर सभी आरोपियों से केस वापस लेना पड़ा।

करीब 10 दिनों तक जेल में रहने के बाद रिहा हुए इन लोगों ने मीडिया से अपना दर्द साझा करते हुए बताया कि उनसे कारावास में पखाना और नाली साफ करवाए गए और कुछ कैदी उन्हें 'गद्दार' कहते थे।

पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए अनीस बाबू मंसूरी ने हिन्दुस्तान टाइम्स को बताया कि जब उन लोगों को जेल ले जाया गया तो वहां के करीब एक दर्जन पुराने कैदियों ने हर किसी को थप्पड़ मारा और गालीगलौज की। मंसूरी पेशे से दर्जी हैं।

25 वर्षीय मंसूरी ने एचटी को बताया कि पुलिस ने हिरासत में उनकी पिटाई भी की थी। पुलिस द्वारा की गई पिटाई के निशान दिखाते हुए मंसूरी ने अखबार से कहा, ''हम मुसलमान हैं तो हिन्दुस्तानी भी हैं।''

मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल से करीब 350 किलोमीटर दूर बुरहानपुर गांव के रहने वाले इन 15 लोगों पर 18 जून को हुए भारत-पाकिस्तान मैच के बाद मुकदमा दर्ज किया गया था। पुलिस ने आरोप लगाया था कि इन लोगों ने भारत के हारने के बाद पटाखे जलाए थे और पाकिस्तान समर्थक नारे लगाए थे। जब पुलिस को कोई सबूत-गवाह नहीं मिला तो उसने सभी 15 लोगों पर से 'राजद्रोह' (धारा 124-ए ) का केस हटाते हुए सांप्रदायिक विद्वेष फैलाने (धारा 53-ए) का मामला दर्ज कर दिया। सभी लोगों को 27 जून को अदालत से जमानत मिली।

जिन 15 लोगों पर मामला दर्ज किया गया है उनमें से दो को छोड़कर बाकी अनपढ़ हैं और दिहाड़ी मजदूर के तौर पर काम करते हैं। कुछ के घर में न तो टीवी है और न ही मोबाइल।

कुछ गांववालों का आरोप है कि भारत और पाकिस्तान के क्रिकेट मैच के बाद पुलिस दो-तीन दिन गांव में घूमती रही और जिसे मन किया, उसे उठा लिया।

गिरफ्तार किए गए लोगों में कई तडवी उपनाम लगाते हैं। पडो़सी राज्य महाराष्ट्र में तडवी आदिवासी वर्ग में शामिल हैं, लेकिन मध्य प्रदेश में वो अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के तहत आते हैं।

बातों का कोई मतलब नहीं रह जाता, जब कार्रवाई के नाम पर कुछ नहीं होता है: राहुल गांधी

पीएम मोदी द्वारा कथित गौरक्षकों को फटकार लगाये जाने के बाद कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। राहुल गांधी ने कहा है कि पीएम का बयान मामले की गंभीरता के हिसाब से बहुत ही छोटा और बहुत देर से आया है।

राहुल गांधी ने ट्वीट कर कहा कि सिर्फ शब्दों का कोई मतलब नहीं रह जाता है, जब आपकी बातों पर अमल नहीं किया जाता है।

राहुल गांधी के मुताबिक, अब गौरक्षा के नाम पर ऐसी हत्याएं करने वाले लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई किये जाने की जरूरत है ताकि आवाम में कड़ा से कड़ा संदेश जाए, और लोग कानून को हाथ में लेने से पहले सौ बार सोचें।

बता दें कि नरेन्द्र मोदी ने गुरुवार (29 जून) को गुजरात के साबरमती में कहा कि गौरक्षा के नाम पर लोगों की हत्या देश को स्वीकार्य नहीं है। पीएम मोदी ने कहा कि देश में कानून को हाथ में लेने का हक किसी को नहीं है। उन्होंने कहा कि भारत के सबसे बड़े गौरक्षक महात्मा गांधी और विनोबा भावे इसे कभी स्वीकार नहीं करते।

एआईएमआईएम चीफ ओवैसी ने भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी कार्रवाई के नाम पर सिर्फ बयान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि गौभक्ति के नाम पर गुंडागर्दी तबतक चलती रहेगी, जब तक गौरक्षक बीजेपी और आरएसएस से समर्थन पाते रहेंगे।

ओवैसी ने कहा कि जब तक देश में इंसानों से ज्यादा जानवरों की कीमत लगाई जाएगी, लोगों की हत्याएं होती रहेगी, उन्होंने कहा कि गौरक्षक बीजेपी और संघ से प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष समर्थन पाते रहते हैं इसलिए पीएम के कहने के बावजूद जमीनी स्तर पर कुछ भी बदलाव नहीं होने वाला है।

बता दें कि इससे पहले पिछले साल 6 अगस्त 2016 को भी पीएम नरेन्द्र मोदी ने गौरक्षकों को चेतावनी दी थी और कहा था, ''कुछ लोग गौ रक्षा के नाम पर दुकान खोलकर बैठ गये हैं, इस पर मुझे बहुत गुस्सा आता है।'' पीएम मोदी ने ऐसे लोगों के खिलाफ राज्य सरकार से कार्रवाई करने को कहा था। मोदी ने कहा था कि, ''कुछ लोग पूरी रात गलत कामों में शामिल रहते हैं और दिन में गौरक्षक का चोला पहन लेते हैं, मैं राज्य सरकारों से कहता हूं कि वे ऐसे लोगों का डोजियर बनाएं।'' लेकिन मोदी के बयान के बाद भी गौरक्षकों द्वारा की जाने वाली हत्याओं में कोई कमी नहीं आई है। उलटे गौरक्षकों द्वारा की जाने वाली हत्याओं की संख्या में दिनों दिन बढ़ोत्तरी ही होती जा रही है।

झारखंड में बीफ ले जाने के शक में भीड़ ने मुस्लिम शख्‍स को पीटा, मौत

झारखंड के रामगढ़ जिले में गुरुवार को एक व्यक्ति को बीफ ले जाने के आरोप में पीट-पीटकर मार डाला गया।

पुलिस सूत्रों ने कहा कि अलीमुद्दीन उर्फ असगर अंसारी एक मारुति वैन में 'प्रतिबंधित मांस' ले जा रहा था।

सूत्रों ने कहा कि लोगों के एक समूह ने बाजरटांड गांव में उसे रोका और उस पर बेरहमी से हमला किया। उसके वैन को आग के हवाले कर दिया गया। पुलिसकर्मियों ने उसे भीड़ से बचाया और अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई।

अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आर के मलिक ने कहा, ''यह सुनियोजित हत्या है।''

अधिकारी ने कहा, ''असगर के खिलाफ बच्चे को अगवा करने और हत्या करने का आरोप पत्र दाखिल किया गया था।''

उन्होंने कहा कि बीफ के व्यापार में शामिल कुछ लोगों ने उसकी हत्या की साजिश रची।

अधिकारी के मुताबिक, ''हत्यारों की पहचान कर ली गई है।''

बीते तीन दिनों के भीतर झारखंड में इस तरह का यह दूसरा मामला है। गिरिडीह जिले में एक भीड़ ने एक घर के बाहर मृत गाय मिलने के बाद घर के मुस्लिम मालिक की पिटाई की थी और घर में आग लगा दी थी।