जम्मू एवं कश्मीर सरकार ने मंगलवार को बस चालक शेख सलीम को 3 लाख रुपये का नकद इनाम देने की घोषणा की, जिसने सोमवार रात आतंकवादी हमले के दौरान अपनी सूझबूझ, साहस और वाहन चलाने की दक्षता से कई लोगों की जान बचाई।
पुलिस के एक प्रवक्ता ने कहा कि बस में 61 यात्री सवार थे, जिनमें सभी अमरनाथ तीर्थयात्री थे। बस को गुजरात निवासी शेख सलीम चला रहा था। सलीम पिछले कई वर्षो से अमरनाथ यात्रा के तीर्थयात्रियों को घाटी ला रहा था। जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर खानाबल इलाके में आतंकवादियों द्वारा बस पर हमले में सात तीर्थयात्रियों की मौत हो गई, जबकि 32 अन्य घायल हो गए।
वहीं कश्मीर में नागरिक संगठनों ने मंगलवार को राजधानी श्रीनगर में अमरनाथ यात्रियों पर हुए आतंकवादी हमले को लेकर विरोध व्यक्त किया। प्रदर्शनकारियों ने यहां प्रताप पार्क में शाम 5.30 बजे विरोध-प्रदर्शन किया। इस विरोध-प्रदर्शन के आयोजकों ने एक बयान जारी कर कहा, ''आइए, साथ मिलकर स्पष्ट रूप से और दृढ़तापूर्वक मृतकों के प्रति एकजुटता प्रदर्शित करें और इस घटना की तथा जम्मू एवं कश्मीर में हुए सभी अपराधों की विश्वसनीय जांच कराए जाने की मांग करें।''
इस आतंकवादी हमले की कश्मीर में भी चारों ओर से निंदा हो रही है, जिसमें मुख्यधारा और अलगाववादी समूहों के नेताओं से लेकर व्यापारी, अध्यापक, पेशेवर, बुद्धिजीवी और आम जनता भी शामिल है। मंगलवार को विपक्ष ने तीर्थयात्रियों को सुरक्षा प्रदान करने में नाकामी के लिए केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार तथा महबूबा मुफ्ती के नेतृत्व वाली राज्य सरकार की आलोचना की।
कांग्रेस ने आतंकवादी हमले को अमानवीय और बर्बर करार देते हुए कहा कि मोदी सरकार तीर्थयात्रियों को सुरक्षा प्रदान करने में असफल रही है। कांग्रेस ने इस घटना में शामिल लोगों के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई की मांग की है।
कांग्रेस के प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने संवाददाताओं से कहा, ''कांग्रेस पवित्र यात्रा के लिए सभी तीर्थयात्रियों की सुरक्षा की मांग करती है। इस संबंध (आतंकवादी हमला) में सरकार क्या कदम उठा रही है, इस बारे में प्रधानमंत्री तथा मुख्यमंत्री को बताना चाहिए।''
उन्होंने आरोप लगाया कि आतंकवादी हमला सरकार तथा सुरक्षा बलों की तरफ से सुरक्षा में बरती गई गंभीर लापरवाही है।
सुरजेवाला ने कहा, ''यह समय है कि सरकार जागे और शब्दों व बैठकों को छोड़कर काम करे तथा आतंकवाद के खिलाफ निर्णायक कार्रवाई करे।''
उन्होंने कहा कि आतंकवादियों ने कश्मीर की मिली-जुली संस्कृति पर हमला किया है।
उन्होंने कहा, ''अमरनाथ तीर्थयात्रियों पर आतंकवादी हमले से राष्ट्र चकित और अत्यधिक दुखी है। मौजूदा सरकार क्या कर रही है, यह एक मूक सवाल है?''
सुरजेवाला ने सवाल करते हुए कहा, ''क्या प्रधानमंत्री बयान देंगे और देश को आश्वासन देंगे कि सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा को सुनिश्चित करने के क्या निर्णायक कदम उठाएगी और यह हर कीमत पर सुरक्षित होगी।''
उन्होंने कहा, ''अगर 25 जून को ही खुफिया जानकारी मिल गई थी कि अमरनाथ यात्रा पर हमला किया जाएगा, तो इसे रोकने के उपाय क्यों नहीं अपनाए गए? इसे असफल करने के लिए क्या उपाय किए गए थे? क्या हम एक बार फिर बैठकों और पूछताछ में ही इस तरह के एक महत्वपूर्ण मुद्दे को गवां देंगे या फिर निर्णायक कार्रवाई करते हुए दोषियों को सजा दिलाएंगे जिन्होंने देश की सबसे पवित्र धार्मिक यात्रा पर आतंकवादी हमला करने की हिम्मत की है।"
भारत में सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार (11 जुलाई) को कहा कि बिक्री के लिये मवेशियों की खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगाने संबंधी केन्द्र की अधिसूचना पर मद्रास उच्च न्यायालय की अंतरिम रोक बरकरार रहेगी और यह पूरे देश पर लागू होगी।
सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश जगदीश सिह खेहर और न्यायमूर्ति धनंजय वाई चन्द्रचूड़ की पीठ ने केन्द्र सरकार के इस बयान का संज्ञान लिया कि इस मामले में विभिन्न पक्षों की तमाम आपत्तियों और सुझावों के मद्देनजर अधिसूचना पर पुर्निवचार किया जा रहा है और वह अब एक संशोधित अधिसूचना लायेगी।
पीठ ने कहा कि मद्रास उच्च न्यायालय की मदुरै पीठ द्वारा दिये गये अंतरिम निर्देश प्रभावी रहेंगे और पूरे देश में इन्हें लागू किया जा रहा है।
इसके साथ ही पीठ ने केन्द्र सरकार की 23 मई की अधिसूचना की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली अखिल भारतीय जमीयतुल कुरैशी एक्शन समिति की याचिका का निबटारा कर दिया। इससे पहले, केन्द्र की ओर से अतिरिक्त सालिसीटर जनरल पी एस नरसिम्हा ने कहा कि हाल में जारी अधिसूचना वैसे भी उस समय तक प्रभावी नहीं होगी, जब तक इसके अंतर्गत राज्य सरकारें मवेशियों की खरीद-फरोख्त के लिये स्थानीय बाजार को चिन्हित नहीं करती हैं।
उन्होंने कहा, ''पर्यावरण एवं वन मंत्रालय और दूसरे संबंधित प्राधिकरण अधिसचूना को लेकर दिये गये तमाम सुझावों और आपत्तियों पर गौर कर रहे है और एक संशोधित अधिसूचना जारी की जायेगी।''
उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार मद्रास उच्च न्यायालय के आदेश पर रोक लगाने का अनुरोध नहीं कर रही है और वह न्यायालय को मौजूदा स्थिति से अवगत करा रही है। शीर्ष अदालत ने केन्द्र सरकार के कथन पर विचार किया और उससे कहा कि प्रभावित पक्षों को पर्याप्त समय दिया जाये ताकि वे यदि कोई समस्या हो तो फिर से न्यायालय जा सकें।
केन्द्र की मोदी सरकार ने 23 मई को एक अधिसूचना जारी करके मवेशी बाजार से पशुओं के वध के लिये उनकी खरीद-फरोख्त पर प्रतिबंध लगाने संबंधी अधिसूचना जारी की थी।
मोदी सरकार के इस कदम से मांस और चमड़े के कारोबार और निर्यात पर असर पड़ने की संभावना थी।
पर्यावरण एवं वन मंत्रालय ने पशुओं के प्रति क्रूरता की रोकथाम कानून के तहत सख्त प्रावधान वाले पशुओं के प्रति कू्रता की रोकथाम (मवेशी बाजारों का नियमन) नियम, 2017 अधिसूचित किये थे।
भारत में अरुणाचल प्रदेश के पापम में भारी बारिश के चलते तबाही की खबर आ रही है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, तेज हवा और बारिश के चलते वहां भूस्खलन हुआ है, जिससे 14 लोगों की मौत हो गई है। वहीं कई लोगों के घायल होने की भी खबर है।
बता दें कि बीते माह ही 19 जून को भी अरुणाचल प्रदेश में लैंडस्लाइड ने तबाही मचाई थी। जब आर्मी जवानों ने अरुणाचल प्रदेश के भालुकपोंग के पास एक भूस्खलन स्थल से 70 महिलाओं और 50 बच्चों सहित सोमवार को कुल 200 लोगों को बचा लिया था। उस इलाके में मौजूद सेना की टुकड़ी के कमांडर, चिकित्सा अधिकारी और दो जेसीओ और 20 अन्य कर्मियों के साथ भूस्खलन स्थल के लिए रवाना हुए थे। जहां पर जवानों की टुकड़ी ने घाटी व नदी की तलहटी के रास्ते भूस्खल के चारों ओर एक रास्ता तैयार किया, और इस तरह सोमवार सुबह 11 बजे फंसे नागरिकों को वहां से निकाला जा सका। उन्होंने कहा कि लोगों को वहां से सुरक्षित तरीके से निकाल लिया गया। इससे पहले 1 जून को भी राज्य में भूस्खलन की घटना सामने आई थी। भूस्खलन की वजह से पांच लोगों की मौत हो गई। इसमें चार लोग घायल भी हो गए थे। भूस्खलन अरुणाचल प्रदेश के पश्चिमी कामेंग जिले में हुआ है। इस दौरान कम से कम 5 लोगों की मौत और कईयों के घायल होने की खबर थी।
अमरनाथ यात्रियों पर आतंकवादी हमले की निंदा करते हुए ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने मंगलवार को मोदी सरकार से पूछा कि जब यात्रियों पर हमले की आशंका की खुफिया सूचना थी, फिर वह उन्हें बचाने में क्यों नाकाम रही?
असदुद्दीन ओवैसी ने संवाददाताओं से कहा कि वह हमले की कड़ी भर्त्सना करते हैं क्योंकि किसी की जान लेने का किसी को अधिकार नहीं है। ओवैसी ने कहा कि भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के सत्ता में आने के बाद अमरनाथ तीर्थयात्रियों पर दूसरी बार हमला हुआ है और उन्होंने मांग की कि सरकार को इस बात का जवाब देना चाहिए कि हमले की आशंका की खुफिया सूचना के बावजूद वह उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करने में क्यों नाकाम रही? इससे जुड़ी खबर मीडिया में भी 26 जून को आई थी।
ओवैसी ने कहा, ''केंद्र में बीजेपी की सरकार सत्तारूढ़ है और जम्मू एवं कश्मीर में भी पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) के साथ उसकी गठबंधन सरकार है। सरकार की नैतिक जिम्मेदारी बनती है कि वह लोगों को बताए कि वह क्यों नाकाम रही।''
उन्होंने कश्मीर के आतंकवादी सैयद सलाहुद्दीन द्वारा 'द टेलीग्राफ' को दिए गए उस साक्षात्कार की ओर इशारा किया, जिसमें उसने इस तरह के हमले के संकेत दिए थे।
ओवैसी ने कहा, ''यही समय है, जब केंद्र में बीजेपी अपनी दिशा में सुधार करे।'' उन्होंने आरोप लगाया कि लश्कर-ए-तय्यबा तथा पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई के साथ मिलकर सलाहुद्दीन कश्मीर घाटी में 2008 जैसे हालात पैदा करना चाहता है।
निर्दोष श्रद्धालुओं की मौत पर राजनीतिक रोटियां सेंकने का प्रयास करने वाले लोगों की आलोचना करते हुए ओवैसी ने कहा कि उन्हें लश्कर और आईएसआई को समस्याएं खड़ी करने की अनुमति नहीं देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमें यह भी ध्यान में रखना चाहिए कि चीन सिक्किम सीमा पर क्या कर रहा है?
लश्कर के साथ संपर्क पर उत्तर प्रदेश के संदीप कुमार की गिरफ्तारी की ओर इशारा करते हुए असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि इसने एक अहम सवाल खड़ा किया है।
उन्होंने अमरनाथ यात्रा को हज यात्रियों के साथ जोड़ने के लिए शिवसेना की आलोचना की। ओवैसी ने कहा कि अगर शिवसेना आतंकवादी हमले को लेकर गुस्से में है तो उसे अपना गुस्सा सरकार पर उतारना चाहिए।
जम्मू-कश्मीर के अनंतनाग में आतंकी हमले में मारे गये 7 में से 5 श्रद्धालु गुजरात के थे।
गुजरात के नेता हार्दिक पटेल ने कई ट्वीट करके बीजेपी सरकार की कड़ी आलोचना की हैं और इन हमलों पर कुछ सवाल उठाये हैं।
हार्दिक पटेल ने इस हमले को गुजरात चुनाव से जोड़कर देखा है और पूछा है कि क्या ये हमला सुरक्षा में चूक का मामला है या फिर साजिश?
हार्दिक पटेल ने ट्वीट किया, ''गुजरात में इस साल चुनाव हैं, अमरनाथ यात्रियों पर हुए हमले में मरने वाले सभी गुजरात के हैं, सुरक्षा पर सवाल या फिर साज़िश?''
''कायराना हमला, कायरना हमला यह बोलना बंद करो और हिंदुस्तान की ताक़त बताओ। दूसरों को कोसना बंद करो, हम क्या है वो बताओ। जय हिंद''
हार्दिक पटेल ने ट्वीट करते हुए लिखा है, ''आतंकवादी हमले की जैसे ही बीजेपी सरकार ने निंदा की और कहा कि हमलावरों को बक्शा नही जाएगा, ऐसा नही लगता है कि वही पुरानी कैसेट फिर से बज रही है।''
''कब तक देश में निर्दोष लोगों को कभी सरकारों के द्वारा और कभी आतंकवादियों के द्वारा मौत के घाट उतार दिया जाएगा?''
''मोदी जी, अगर चीन को जवाब नहीं दे सकते तो कम से कम सरदार पटेल जी की जो 3600 करोड़ की मूर्ति का ओर्डर है, वो क़ैंसिल कर दो।''
हार्दिक पटेल ने लिखा, ''मैं सच बोलता हूँ और बोलता रहूँगा, भक्तों को पसंद आए या ना आए, मुझे कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता, जिसको जो करना है कर ले।''
''मरने वालों में आज कोई और हैं, कल आप या मैं !!! देश और देश की जनता के साथ धोखा एवं गंदी राजनीति कब तक ?''
आगे हार्दिक पटेल ने ट्वीट किया है कि, 'सच बोल दिया तो बयानबाजी लगती है। ना बोले तो देशद्रोही लगते हैं। आपके देशभक्ति के सर्टिफ़िकेट की ज़रूरत नहीं हैं।'
''आतंकवादी को छोड़ेंगे नहीं, पहले पकड़ो तो सही !!! बोलने का समय नहीं है एक्शन लो !!''
हार्दिक पटेल ने ट्वीट किया, ''एक मुसलमान ने जान ली और एक मुसलमान ने जान बचाई। प्रश्न धर्म में नहीं है, देश में हैं।''
बता दें कि 10 जुलाई को हुए अमरनाथ आतंकी हमले में 7 लोग मारे गये थे जिनमें से 5 गुजरात के हैं।
अमरनाथ हमले को लेकर जम्मू-कश्मीर पुलिस ने केंद्रीय गृह मंत्रालय को रिपोर्ट सौंपी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अमरनाथ यात्रियों की बस पर दो बार हमला किया गया था।
जम्मू कश्मीर में सोमवार (10 जुलाई) को अमरनाथ यात्रा के दौरान हुए आतंकी हमले में सात लोगों को मौत हो गई और 30 लोग घायल हो गए। मारे गए ज्यादा लोग गुजरात के थे।
यह हमला अनंतनाग जिले के श्रीनगर-जम्मू नेशनल हाईवे पर रात को 8 बजकर 10 मिनट के करीब हुआ था।
कहा जा रहा है कि आतंकी पुलिस बंकर को निशाना बनाना चाहते थे, लेकिन बस बीच में आ गई।
यह भी कहा जा रहा है कि बस का रजिस्ट्रेशन नहीं था और वह बिना सिक्योरिटी के आगे बढ़ रही थी।
केंद्रीय गृह राज्य मंत्री हंसराज अहीर जम्मू-कश्मीर जाएंगे। आतंकी हमले के बाद अनंतनाग में सुरक्षा और कड़ी कर दी गई है।
जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती की अध्यक्षता में कैबिनेट और सिक्योरिटी मीटिंग की जा रही है।
भारत में जर्मन दूत मार्टिन ने कहा, जम्मू-कश्मीर में कल हुए अमरनाथ आतंकवादी हमलों की कड़ी निंदा करते हैं। पीड़ितों के परिवारों के लिए मेरी संवेदनाएं।''
अमरनाथ हमले के बाद उत्तर प्रदेश के इलाहाबाद रेलवे स्टेशन पर सुरक्षा बढ़ाई गई।
गुजरात के मुख्यमंत्री ने ड्राइवर सलीम की तारीफ की और कहा कि वीरता पुरस्कार के लिए सलीम का नाम भेजा जाएगा। इसके अलावा गुजरात के मृतकों को 10 लाख रुपए के मुआवजे का ऐलान किया गया।
बस के ड्राइवर सलीम ने कहा, ''अल्लाह ने मुझे इतनी क्षमता दी थी कि मैं लगातार बस चलाता रहा। लगातार फायरिंग हुई। मैं इसलिए रुका नहीं। बस चलाता रहा।''
सेना प्रमुख बिपिन रावत श्रीनगर पहुंचे। वह आतंकी हमले के बाद जायजा लेने पहुंचे हैं।
सूरत में गुजरात के मुख्यमंत्री विजय रूपाणी ने अमरनाथ यात्रा के हमले में घायल हुए लोगों से मुलाकात की। हमले में मारे गए ज्यादा लोग गुजरात के थे।
बीएसएफ के डायरेक्टर जनरल की ऑफिस से सनसनीखेज खुलासा हुआ है। पिछले महीने बीएसएफ के वर्तमान महानिदेशक के के शर्मा के ऑफिस से जारी दो पन्नों के एक आदेश के मुताबिक, बीएसएफ में लगभग सभी पद और नियुक्तियां संवेदनशील पाई गईं हैं और इनमें करप्शन की आशंका है।
यह आदेश बीएसएफ के उस विभाग द्वारा जारी किया गया है जो जवानों की सर्विस से जुड़े मुद्दे को देखता है, इस विभाग को एचआर विभाग भी कहा जा सकता है। अंग्रेजी वेबसाइट इंडिया टुडे डॉट इन की रिपोर्ट के मुताबिक, इस आदेश में ऐसी संभावना के लिए कोई तार्किक कारण, अन्य जवाब, या फिर इस संभावित दोष को दूर करने के लिए कोई उपाय नहीं सुझाये गये हैं।
बता दें कि अक्टूबर 2015 में बीएसएफ के पूर्व डीजी डी के पाठक ने कहा था कि जिस फोर्स की अगुवाई वो कर रहे हैं उसमें नाम मात्र का ही भ्रष्टाचार के कुछ मामले हैं। लेकिन 20 महीने के अंदर ही हालात में अविश्वसनीय बदलाव देखा गया है। भारत की सीमा की निगरानी का जिम्मा संभालने वाले रक्षा बल के बारे में ऐसी रिपोर्ट निश्चित रुप से चिंता जनक है। इस आदेश को समर्थ अधिकारी द्वारा अप्रूव भी किया गया है।
आदेश के मुताबिक, बीएसएफ का फोर्स मुख्यालय, कमांड मुख्यालय, ट्रेनिंग संस्थान, सरहदी मुख्यालय, सेक्टर मुख्यालय और बटालियन मुख्यालय इस दायरे में आते हैं। आदेश की स्क्रूटनी से पता चलता है कि विभाग के जूनियर अधिकारी भी भ्रष्टाचार मुक्त नहीं है। उदाहरण के लिए बटालियन मुख्यालयों में जवानों को दिये जाने वाले राशन और कल्याण की जिम्मेदारी संभालने वाले अधिकारी भी अब इस आदेश के दायरे में हैं, यानि की उन पर शक की सूइयां है। इसके अलावा जो अधिकारी भर्ती, पोस्टिंग, निर्माण, नगद, खाता और विजिलेंस से जुड़े हैं, अब उनकी सख्ती से निगरानी की जाएगी।
हालांकि ऐसे संदिग्ध पोस्ट को पहचान करने की प्रक्रिया रुटीन है, लेकिन इस बार जिस तरह से पूरे फोर्स को सवालों के घेरे में लाया गया है, वो निश्चय ही चिंता का विषय है।
बता दें कि इस मामले पर अब तक गृह मंत्रालय और बीएसएफ मुख्यालय की प्रक्रिया नहीं मिल पाई है। बीएसएफ में कई अधिकारी इस घटना को कॉन्स्टेबल तेज बहादुर यादव द्वारा लगाये गये आरोपों के बाद कथित करप्शन को दूर करने की तैयारी से जोड़ कर देख रहे हैं।
बता दें कि तेज बहादुर यादव ने बीएसएफ कैंटीन में खाने-पीने में गड़बड़ी की शिकायत की थी। तेज बहादुर यादव ने जवानों को परोसे जाने वाले खाने का वीडियो सोशल मीडिया पर अपलोड़ कर दिया था। इसके बाद काफी विवाद हुआ था। बाद में एक जांच के बाद इसी साल 19 अप्रैल को तेजबहादुर को नौकरी से निकाल दिया गया था।
राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए के उम्मीदवार का समर्थन किए जाने से कांग्रेस और जनता दल यूनाइटेड के बीच गहरा विवाद संभवत: राहुल गांधी के हस्तक्षेप समाप्त हो गया है। कहा जा रहा है कि उन्होंने अपनी पार्टी के नेताओं से नीतीश कुमार के खिलाफ नहीं बोलने का निर्देश दिया है।
जनता दल यूनाइटेड ने भी इस दिशा में सकारात्मक रुख अपनाते हुए उपराष्ट्रपति चुनाव में विपक्ष के साथ होने के संकेत दिए हैं।
मीडिया में आयी रिपोर्ट के अनुसार, कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने नीतीश कुमार का मजबूती से पक्ष लेते हुए अपने पार्टी के नेताओं से जनता दल यूनाइटेड प्रमुख की आलोचना करने से दूर रहने का निर्देश दिया है।
बिहार प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक चौधरी ने राहुल गांधी के साथ दिल्ली में इस सप्ताह के शुरूआत में मुलाकात होने की पुष्टि की, लेकिन उन्होंने बैठक के बारे में विस्तृत जानकारी देने से इंकार कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राहुल ने बैठक के दौरान चौधरी को नीतीश के खिलाफ बयान जारी करने वाले पार्टी नेताओं के खिलाफ कार्रवाई के संकेत दिये। जिस समय कांग्रेस और जनता दल यूनाइटेड में विवाद गहराया था, राहुल देश के बाहर थे।
कांग्रेस और जनता दल यूनाइटेड के बीच विवाद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता गुलाम नबी आजाद के नीतीश कुमार पर ''बिहार की बेटी'' मीरा कुमार की हार सुनिश्चित करने के लिए आगामी 17 जुलाई को होने वाले राष्ट्रपति चुनाव में राजग उम्मीदवार राम नाथ कोविंद का समर्थन करने का आरोप लगाया।
गुलाम नबी आजाद ने नीतीश पर प्रत्यक्ष रूप से हमला करते हुए कहा था कि जो एक विचारधारा रखते हैं, वह एक निर्णय लेते हैं। जबकि जिनकी कई विचारधारा होती है, वे अलग-अलग निर्णय लेते हैं।
गुलाम नबी आजाद के इस टिप्पणी के बाद बिहार के कुछ कांग्रेस नेताओं ने भी जनता दल यूनाइटेड प्रमुख पर हमला किया था।
नीतीश ने कांग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा था, ''बिहार की बेटी'' को हरा के लिए क्यों चुना गया?यूपीए सरकार के कार्यकाल में दो बार अवसर आए थे, उस समय क्यों नहीं उन्हें उम्मीदवार बनाया? गुलाम नबी आजाद की टिप्पणी पर जनता दल यूनाइटेड ने भी पलटवार करते हुए कहा कि वह किसी की 'पिछलग्गु' नहीं है।
नीतीश द्वारा एनडीए उम्मीदवार राम नाथ कोविंद का समर्थन करने पर बिहार की महागठबंधन के घटक दलों कांग्रेस, राष्ट्रीय जनता दल और जनता दल यूनाइटेड के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर चला था। राजनीतिक हलकों में नीतीश के साथ बेहतर संबंध रखने वाले राहुल के इस हस्तक्षेप के बाद कांग्रेस और जनता दल यूनाइटेड में मतभेद संभवत: समाप्त हो गए हैं।
इन दोनों दलों के बीच मतभेद समाप्त होने की बात ऐसे समय सामने आयी है, जब विपक्षी दलों की राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार मीरा कुमार अपने तीन दिवसीय दौरे पर आज बिहार आ रही हैं। मीरा गुरुवार को यहां कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के विधायकों और सांसदों से मुलाकात करेंगी, पर उनकी नीतीश के साथ मुलाकात तय नहीं है।
जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय महासचिव के सी त्यागी ने फोन पर आज कहा कि आगामी अगस्त महीने में होने वाले उपराष्ट्रपति चुनाव को लेकर विचार-विमर्श करने के लिए अगर विपक्षी दलों द्वारा अगर उनकी पार्टी को आमंत्रित किया गया तो निश्चित तौर पर हम उसमें भाग लेंगे।
त्यागी ने यह भी कहा कि उनकी पार्टी उपराष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्ष के संयुक्त उम्मीदवार का समर्थन करेगी, अगर इसको लेकर जनता दल यूनाइटेड से संपर्क साधा जाता है और बैठक में बुलाया जाता है।
यह पूछे जाने पर क्या वे उक्त बैठक में शामिल होंगे, त्यागी ने कहा कि इस बारे में उनकी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार और वरिष्ठ नेता शरद यादव निर्णय लेंगे।
बिहार सरकार में शिक्षा मंत्री और कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अशोक चौधरी ने कहा कि हम उम्मीद करते हैं कि जनता दल यूनाइटेड उपराष्ट्रपति चुनाव में हमलोगों के साथ होगी।
कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार (5 जुलाई) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर तीखा हमला करते हुए मंगलवार को उन्हें 'कमजोर प्रधानमंत्री' की संज्ञा दी।
राहुल ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, ''भारत को एक कमजोर प्रधानमंत्री मिला है।''
राहुल ने अपने ट्वीट के साथ उनके हालिया अमेरिका दौरे से संबंधित दो खबरें भी अटैच की हैं। इनमें से एक खबर अमेरिकी विदेश मंत्रालय द्वारा कश्मीर को 'भारत प्रशासित कश्मीर' कहे जाने को भारत द्वारा स्वीकार किए जाने से संबंधित है।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के आतंकवादी संगठन हिजबुल मुजाहिदीन के नेता सैयद सलाहुद्दीन को वैश्विक आतंकवादी घोषित किए जाने वाले आदेश में कश्मीर को 'भारत प्रशासित कश्मीर' कहा था।
वहीं, दूसरी खबर में कहा गया है कि मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ वार्ता के दौरान एच1बी वीजा का मामला नहीं उठाया। इन्हीं दोनों खबरों के साथ राहुल गांधी ने कैप्शन में लिखा, 'India has a weak PM' (भारत के पास एक कमजोर प्रधानमंत्री है।)
पश्चिम बंगाल के उत्तरी 24 परगना जिले के बदुरिया और बासिरहाट इलाके में साम्प्रदायिक हिंसा भड़कने के बाद पुलिस ने वहां धारा 144 लगा दिया है। इसके अलावा प्रशासन ने वहां इंटरनेट सेवा पर रोक लगा दी है।
सोशल मीडिया फेसबुक पर एक अपमानजनक पोस्ट के बाद दो समुदायों में हिंसक झड़प हो गई थी। मंगलवार को हिंसक भीड़ ने न केवल पुलिस दल पर हमला किया बल्कि उनकी कई गाड़ियों और दुकानों में आग लगा दी। इसके बाद भारत-बांगलादेश को जोड़ने वाली प्रमुख सड़क को भी जाम कर दिया।
हंगामा देखते हुए पश्चिम बंगाल के बीजेपी अध्यक्ष दिलीप घोष ने राज्य में राष्ट्रपति शासन लगाने की मांग की है। बंगाल पुलिस ने बुधवार को सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक सौहार्द को भंग करने की आशंका वाले अफवाह फैलाने को लेकर चेतावनी जारी की है।
एक दिन पहले ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कहा था कि एक फेसबुक पोस्ट के कारण उत्तर 24 परगना में सांप्रदायिक हिंसा भड़की। मुख्यमंत्री का यह बयान आने के अगले ही दिन पुलिस ने यह चेतावनी जारी की है। पश्चिम बंगाल पुलिस ने ट्वीट के जरिए ही यह चेतावनी जारी की है जिसमें कहा गया है, ''जिम्मेदार लोगों को जिम्मेदारीपूर्वक ही ट्वीट करना चाहिए, न कि अफवाह फैलाने और सांप्रदायिक सौहार्द भंग करने के मकसद से। किसी तरह की अफवाह न फैलाएं। प्रशासन शांति एवं सौहार्द बनाए रखने की पूरी जिम्मेदारी लेता है।''
हालात को देखते हुए राज्य सरकार ने केन्द्र सरकार से मदद की मांग की। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय ने पारामिलिट्री फोर्सेज की तीन कंपनियों को 24 परगना भेजा है। इसके साथ ही गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से इस मामसे में पूरी रिपोर्ट देने को कहा है।
बता दें कि हिंसा एक फेसबुक पोस्ट से शुरू हुई। पुलिस के मुताबिक, दसवीं के एक छात्र ने सोमवार को एक अपमानजनक पोस्ट फेसबुक पर डाला था जो थोड़ी ही देर में वायरल हो गया था। इसके बाद लोग सड़कों पर उतर आए और कई गाड़ियों और दुकानों को आग के हवाले कर दिया।
हालांकि पुलिस ने आरोपी छात्र को तुरंत गिरफ्तार कर लिया। दंगा भड़कने के बाद प्रशासन ने एहतियातन सभी स्कूल-कॉलेजों को बंद करा दिया था। हंगामे के आलम यह था कि दंगाइयों ने लोकल ट्रेनों और बस सर्विस को भी रुकवा दिया था।
पुलिस पर निष्क्रियता का आरोप लगाते हुए बाद में बीजेपी के कार्यकर्ताओं ने भी विरोध-प्रदर्शन करना शुरू कर दिया और जिले के कई इलाकों में सड़क जाम कर दिया। इस घटना के विरोध में 100 किलोमीटर दूर राज्य की राजधानी कोलकाता में विरोध प्रदर्शन कर रहे विश्व हिन्दू परिषद के चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।
उत्तरी 24 परगना जिले की साम्प्रदायिक हिंसा की सियासी जंग मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और राज्यपाल केसरी नाथ त्रिपाठी तक जा पहुंची। इस हिंसा के बाद गवर्नर द्वारा सीएम को बुलाए जाने के अगले दिन तृणमूल कांग्रेस ने राज्यपाल को संविधान और मर्यादा का पालन करने की नसीहत दी है। तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राज्यपाल केसरीनाथ त्रिपाठी ने सीएम के साथ बुरा बर्ताब किया। बीजेपी के एक प्रवक्ता की तरह सीएम को धमकी दी है।









