भारत

शशिकला को बड़ा झटका, सेल्वम खेमे में शामिल हुए पांडिराजन

तमिलनाडु में चल रहे राजनीतिक संकट के बीच अब सबकी नजरें राज्यपाल सी वद्यासागर राव पर टिक गई हैं। उधर एआईएडीएमके की महासचिव वी के शशिकला ने राज्यपाल को पत्र लिख कर उनसे मिलने का समय मांगा। वहीं कार्यवाहक मुख्यमंत्री ओ पनीरसेल्वम के खेमे में एक मंत्री के शामिल होने से उन्हें मजबूती मिली है।

एआईएडीएमके की महासचिव वी के शशिकला नटराजन को बड़ा झटका देते हुए उनके समर्थक और राज्य मंत्री के पांडिराजन ओ पनीरसेल्वम के खेमे में शामिल हो गए। पनीरसेल्वम ने अपने कैंप में उनका स्वागत किया।

उन्होंने कहा कि मेरा समर्थन मुख्यमंत्री पनीरसेल्वम को है और हमारा मकसद सिर्फ पार्टी को एकजुट रखना है। बता दें कि पांडिराजन को शशिकला का वफादार माना जाता है।

इससे पहले तमिलनाडु से ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (एआईएडीएमके) के दो लोकसभा सांसद शनिवार को राज्य के कार्यवाहक मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम के खेमे में शामिल हो गए थे। अशोक कुमार कृष्णागिरि और सुंदरम नमाक्कल से सांसद हैं। उन्होंने अपनी पूर्ववर्ती दिवंगत मुख्यमंत्री जे जयललिता के पॉयस गार्डन स्थित आवास को स्मारक में तब्दील कर देने के लिए एक हस्ताक्षर अभियान भी शुरू किया है। इससे पहले राज्यसभा सदस्य वी मैत्रेयन भी पन्नीरसेल्वम गुट के साथ हो गए थे।।

शशिकला ने राज्यपाल को चिट्ठी लिखकर अपने विधायकों संग उनसे मिलने का समय मांगा है। शशिकला ने गवर्नर को लिखी चिट्ठी में शपथ ग्रहण समारोह में होने वाली देरी पर भी सवाल उठाए हैं। शशिकला ने राव से कहा कि उन्हें यकीन है कि वह संविधान और लोकतंत्र की संप्रभुता को बचाने के लिए तुरंत ही कदम उठाएंगे ।

पनीरसेल्वम ने सात फरवरी को शशिकला के खिलाफ खुला विद्रोह कर दिया था। इससे दो दिन पहले ही शशिकला के मुख्यमंत्री बनने का रास्ता साफ करने के लिए उन्हें विधायी दल का नेता चुना गया था।

पनीरसेल्वम ने आरोप लगाया था कि शशिकला के मुख्यमंत्री बनने का मार्ग प्रशस्त करने के लिए उन्हें इस्तीफा देने पर मजबूर किया गया।

भारत में पीडीवी मिसाइल का सफल परीक्षण

भारत ने आज ओडिशा के तट से अपनी इंटरसेप्टर मिसाइल का सफलतापूर्वक प्रायोगिक परीक्षण किया और द्विस्तरीय बैलिस्टिक मिसाइल रक्षा प्रणाली विकसित करने की दिशा में एक अहम उपलब्धि हासिल की।

इस इंटरसेप्टर को आईटीआर के अब्दुल कलाम द्वीप (व्हीलर द्वीप) से सुबह सात बजकर 45 मिनट पर प्रक्षेपित किया गया। रक्षा अनुसंधान विकास संगठन के एक अधिकारी ने कहा कि पीडीवी नामक यह अभियान पृथ्वी के वायुमंडल से 50 किमी ऊपर बाहरी वायुमंडल में स्थित लक्ष्यों के लिए है।

उन्होंने कहा, पीडीवी इंटरसेप्टर और दो चरणों वाली लक्ष्य मिसाइल का सफलतापूर्वक परीक्षण हुआ। लक्ष्य को दरअसल 2000 किमी से अधिक दूरी से आती शत्रु बैलिस्टिक मिसाइल के तौर पर विकसित किया गया। इसे बंगाल की खाड़ी में एक पोत से दागा गया।

एक स्वचालित अभियान के तहत रडार आधारित प्रणाली ने शत्रु की बैलिस्टिक मिसाइल की पहचान कर ली। रडार से मिले आंकड़ों की मदद से कंप्यूटर नेटवर्क ने आ रही बैलिस्टिक मिसाइल का मार्ग पता लगा लिया।

पीडीवी को पूरी तरह तैयार रखा गया था। कंप्यूटर सिस्टम से जरूरी निर्देश मिलते ही इसे छोड़ दिया गया। यह अहम दिशासूचक प्रणालियों की मदद से अवरोधन बिंदू तक पहुंच गई। सभी कार्यों का निरीक्षण विभिन्न स्थानों पर स्थित टेलीमीट्री रेंज स्टेशनों ने तत्काल आधार पर किया।

अन्नाद्रमुक संकट: मधुसूदनन और शशिकला ने एक दूसरे को बर्खास्त किया

अन्नाद्रमुक महासचिव एक ओर सरकार बनाने के लिए विधायकों को अपने पक्ष में रखने के लिए एड़ी-चोटी का बल लगा रही हैं। वहीं दूसरी ओर पार्टी के भीतर विरोधियों पर सख्त कार्रवाई कर कड़ा संदेश देने की कोशिश कर रही हैं।

इसी कड़ी में शशिकला ने शुक्रवार को पार्टी के प्रेसीडियम चेयरमैन ई मधुसूदनन को बर्खास्त कर दिया। इसके जवाब में मधुसूदनन ने शशिकला को महासचिव पद से हटा दिया है।

शशिकला ने चेन्नई में जारी एक बयान में कहा कि मधुसूदनन को पार्टी के सिद्धांतों के खिलाफ जाने और उसकी बदनामी करने के लिए प्राथमिकता सदस्यता के साथ-साथ सभी पदों से बर्खास्त कर दिया गया है। उन्होंने पूर्व मंत्री के ए सेनगोट्टैयन को अन्नाद्रमुक के नए प्रेसिडियम चेयरमैन के पद पर नियुक्ति की भी घोषणा की।

शशिकला ने पार्टी कार्यकतार्ओं से आग्रह किया है कि वे मधूसूदनन के साथ कोई संबंध ना रखें और सेनगोट्टैयन को अपना सहयोग दें।

मधुसूदनन ने गुरुवार को पनीरसेल्वम का समर्थन करते हुए कहा था कि अन्नाद्रमुक को बचाने वाले हर शख्स को पनीरसेल्वम का साथ देना चाहिए।

मधुसूदनन ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए प्रेसीडियम चेयरमैन होने के नाते शशिकला को महासचिव पद से हटा दिया है। उन्होंने कहा कि महासचिव का चुनाव केवल पार्टी कार्यकर्ता कर सकते हैं।

उन्हें अन्नाद्रमुक का महासचिव मानने से इनकार कर दिया है। उन्होंने शुक्रवार को चुनाव आयोग को भेजे आवेदन में शशिकला को बतौर अन्नाद्रमुक महासचिव मान्यता नहीं देने की गुजारिश की है।

मधुसूदनन ने पार्टी संविधान का हवाला देते हुए कहा कि महासचिव पद के लिए जरूरी है कि व्यक्ति कम से कम पांच साल से पार्टी का प्राथमिक सदस्य हो।

अन्नाद्रमुक में अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए शशिकला (चिनम्मा) ने पहले भी कड़े फैसले किए हैं। उन्होंने पनीरसेल्वम को भी पार्टी कोषाध्यक्ष से हटा दिया था। पनीरसेल्वम का साथ देने से नाराज होकर उन्होंने पार्टी के आईटी विंग के सचिव रामचंद्रण की भी छुट्टी कर दी थी।

पट्टाली मक्कल कॉची (पीएमके) ने शुक्रवार को कहा कि तमिलनाडु के राज्यपाल सी. विद्यासागर राव को राज्य में सरकार गठन के लिए अन्नाद्रमुक की महासचिव वी. के. शशिकला को आंखें मूंद कर आमंत्रित नहीं करना चाहिए।

पीएमके के प्रवक्ता और वकील एन. विनोबा भूपति ने कहा, भारतीय संविधान निमार्ताओं ने अनुच्छेद 164 का प्रावधान किया, ताकि कोई भी क्षमतावान व लोकप्रिय व्यक्ति पहले मंत्री बन सके और फिर छह माह के भीतर चुनाव लड़कर विधानसभा या विधानपरिषद की सदस्यता ले सके।

उन्होंने कहा कि राज्यपाल को कार्यवाहक मुख्यमंत्री ओ. पन्नीरसेल्वम के आरोप पर भी गौर करना चाहिए, जिनका कहना है कि उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया गया।

शशिकला का तमिलनाडु की सत्ता पर कब्ज़ा

शशिकला का तमिलनाडु की सत्ता पर कब्ज़ा

गुजरात में हार्दिक पटेल शिवसेना के मुख्यमंत्री का चेहरा होंगे: उद्धव ठाकरे

बीजेपी और शिवसेना के गठबंधन में दरार बढ़ती जा रही है। भले ही शिवसेना ने महाराष्ट्र सरकार से समर्थन वापस न लिया हो, लेकिन अब दोनों पार्टियां ने महानगरपालिका के चुनाव अलग-अलग लड़ने का फैसला लिया है।

इतना ही नहीं, उद्धव ठाकरे ने ऐलान किया है कि गुजरात विधानसभा चुनाव में पाटीदार आरक्षण आंदोलन के नेता हार्दिक पटेल शिवसेना की ओर से मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार होंगे।

बताया जा रहा है कि सोमवार रात को हार्दिक पटेल मुंबई पहुंचे और उन्होंने आज शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे से उनके बांद्रा स्थित मातोश्री में मुलाकात की।

इस मुलाकात के बाद उद्धव ठाकरे और हार्दिक पटेल ने साझा प्रेस कॉन्फ्रेंस भी की। इस दौरान जब ठाकरे से पूछा गया कि क्या उनकी पार्टी गुजरात में चुनाव लड़ेंगी तो उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी यूपी में चुनाव लड़ रही है और वह गुजरात में भी चुनाव लड़ेंगी।

इसके बाद उन्होंने कहा कि हार्दिक पटेल उनके सीएम उम्मीदवार हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि यह उनकी हार्दिक के साथ पहली बैठक है इसलिए अभी कई और बातों पर फैसला होना बाकी है।

जब इस बारे में पटेल से पूछा गया कि वह शिवसेना में शामिल होंगे तो पहले उन्होंने कुछ भी नहीं कहा। इसके बाद उन्होंने कहा कि शिवसेना में शामिल होने पर कोई फैसला नहीं लिया है।

शिवसेना बीएमसी चुनावों में हार्दिक पटेल को स्टार प्रचारक बनाना चाहती है।

वहीं जब उद्धव ठाकरे से बीजेपी के साथ गठबंधन के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र की सरकार नोटिस पर चल रही है।

शिवसेना पहले से ही बीजेपी पर हमले कर रही है और पटेल ने भी गुजरात में बीजेपी सरकार पर तल्ख टिप्पणियां की हैं।

पटेल ने हाल ही में गुजरात लौटकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर हमला किया था। उन्‍होंने पीएम मोदी पर निशाना साधते हुए कहा था कि आप दो लाख रुपये का सूट पहनते हैं और खुद को गांधी कहते हैं।

दिल्ली समेत उत्तर भारत में भूकंप के झटके महसूस किए गए

दिल्ली-एनसीआर समेत पूरे उत्तर भारत में सोमवार रात को 10.33 बजे रिक्टर पैमाने पर 5. 8 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप का केंद्र उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में था।

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय की इकाई राष्ट्रीय भूकंप विज्ञान ब्यूरो के ऑपरेशन प्रमुख जेएल गौतम ने बताया कि भूकंप का केंद्र रुद्र प्रयाग जिले में 33 किलोमीटर की गहराई में था।

पिथौरागढ़ के एसपी अजय जोशी ने कहा कि हमें कुछ झटकों की खबरें मिली हैं, लेकिन जानमाल के नुकसान का अभी कोई पता नहीं चला है।

उन्होंने कहा कि हम सूचनाएं एकत्र कर रहे हैं और जरूरत पड़ी तो केंद्र से मदद मांगी जाएगी। देहरादून के अलावा चमोली, रुद्रप्रयाग, पौड़ी, श्रीनगर, टिहरी, उत्तरकाशी, हरिद्वार, रुड़की, हल्द्वानी, पिथौरागढ़, नैनीताल समेत पूरे कुमाऊं मंडल में भी भूकंप के झटके महसूस होते ही लोग डर के मारे घरों से बाहर निकल आए।

भूकंप के झटके पंजाब और हिमाचल में भी महसूस किए गए। चंड़ीगढ़, चंबा, कांगड़ा, पंचकुला, शिमला के लोगों ने करीब 33 सेकेंड तक भूकंप के झटके महसूस किए।

गृह मंत्रालय ने भूकंप को लेकर उत्तराखंड सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी है। जबकि राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) को अलर्ट रहने को कहा गया है। भूकंप के बाद पहाड़ी इलाके में भूस्खलन की आशंका जताई जा रही है।

भूकंप का केंद्र रुद्रप्रयाग में 33 किलोमीटर की गहराई में होने से जानमाल का ज्यादा नुकसान होने की आशंका नहीं है। उत्तराखंड के मुख्य सचिव एस रामास्वामी ने बताया कि सभी जिलाधिकारियों को निर्देश जारी कर एहतियात बरतने को कहा है। डीएफओ और संबंधित अधिकारियों को भी स्थिति पर नजर रखने को कहा गया है।

भूकंप की तीव्रता को लेकर भ्रम की स्थिति रही। भारतीय मौसम विज्ञान के अनुसार, रिक्टर स्केल पर 5.8 की तीव्रता का भूकंप था, जबकि यूएस जियोलॉजिकल सर्वे का कहना है कि भूकंप की तीव्रता 5.6 थी।

भूकंप के बाद राहत एवं बचाव अभियान के लिए एनडीआरएफ की टीमें गाजियाबाद से उत्तराखंड भेजी गई हैं। एनडीआरएफ के महानिदेशक आर के पचनंदा ने बताया कि करीब 90 सदस्यों वाली एनडीआरएफ की दो टीमें रुद्र प्रयाग भेजी गई हैं।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उत्तर भारत में भूकंप के बाद के हालात का जायजा लेने के लिए अधिकारियों से बात की। वहीं गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने उत्तर भारत के कुछ हिस्सों में रात में आए भूकंप पर विस्तृत रिपोर्ट मांगी है।

भूगर्भ विशेषज्ञों का कहना है कि उत्तराखंड भूकंप के लिहाज से जोन 5 में आता है, जहां रिक्टर स्केल पर आठ की तीव्रता से बड़े भूकंप आने की आशंका रहती है। इस क्षेत्र में टेक्टोनिक प्लेटों के टकराने से भूकंप आते हैं। यहां यूरेशियन और भारतीय प्लेटों के बीच टकराहट देखने को मिलती है जिस कारण भूकंप आते हैं। यूरेशियन प्लेट में चीन, कश्मीर का हिस्सा आता है। बद्रीनाथ, केदारनाथ समेत इस इलाके में बड़ा भूकंप आने की आशंका भूगर्भ विज्ञानी काफी समय से जता रहे हैं। लेकिन इस बारे में कोई निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती और इसको लेकर सावधान रहने की जरूरत है।

59 कोबरा कमांडोज ड्यूटी पर जाते वक्त ट्रेन से गायब

केन्द्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 59 प्रशिक्षु कोबरा कमांडोज के एक साथ ड्यूटी से गायब हो जाने का हैरतअंगेज मामला सामने आया है। यह घटना मुगलसराय स्टेशन की है। जहां जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर में एक प्रशिक्षण केन्द्र में पांच सप्ताह का बेसिक प्रशिक्षण ले कर वापस लौट रहे कोबरा कमांडोज ने अपने गंतव्य स्टेशन गया स्थित 205वें कोबरा यूनिट के मुख्यालय जाने की बजाए अचानक अपनी यात्रा समाप्त करके अपने-अपने घरों की ओर जाने का निर्णय किया।

अधिकारियों ने बताया कि जवानों ने अपने इस फैसले की जानकारी अपने दल के कमांडर को नहीं दी और चुपचाप गायब हो गए। सीआरपीएफ ने इसे अनृधिकत अनुपस्थिति करार देते हुए जवानों के खिलाफ कोर्ट ऑफ इनक्वारी के आदेश दिए हैं।

सीआरपीएफ और कमांडो बटालियन फॉर रेजोयूल्ट एक्शन के वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि इन जवानों को गया स्थित 205वें कोबरा यूनिट के मुख्यालय में आज पहुंचना था। यहां उनकी बिहार में नक्सल विरोधी अभियानों के लिए आगे की नियुक्ति की जानी थी।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षु कमाडोंज के साथ ही यात्रा करने वाले प्रशिक्षकों और हवलदारों ने किसी तरह इनसे संपर्क साध कर इनके बारे में मालुमात हासिल की।

वरिष्ठ अधिकारियों ने बताया कि पूरी जांच के आदेश दे दिए गए हैं। उन्होंने बताया कि यह निर्धारित करने की जरूरत है कि कैसे इन जवानों ने एक साथ गायब होने का निर्णय किया? सारे जवान बिहार और उत्तर प्रदेश के हैं।

सरकार बनी तो युवाओं को ढूंढ़-ढूंढ़कर रोजगार देंगे: राहुल गांधी

अगर हमारी सरकार बनी तो हम युवाओं को ढूंढ़-ढूंढ़कर रोजगार देंगे। युवाओं के लिए अलग घोषणापत्र होना चाहिए। मोदी सरकार 1 लाख 10 हजार करोड़ युवाओं को दे देती तो वे अपनी फैक्ट्री लगा लेते। ये कहना था राहुल गांधी का, जो मथुरा के मांट में प्रत्याशी के समर्थन में सभा कर रहे थे।

उन्होंने कहा कि मैंने अखिलेश से कहा कि क्यों न युवाओं के लिए हाई क्वालिटी का कोचिंग सेंटर यूपी खोले। युवाओं का अलग मैनिफेस्टो होना चाहिए। हिंदुस्तान की सरकार 1 लाख 10 हजार करोड़ रुपया 50 परिवारों को दे दिए। यही पैसे युवाओं को लोन दे देते तो वो अपनी फैक्ट्री लगा लेते। लेकिन मोदी ने नहीं किया। हमारी सरकार आई तो युवाओं को ढूंढ़-ढूंढ़कर लाएंगे। उन्हें रोजगार देंगे।

उन्होंने कहा कि किसानों के नाम पर मोदी चुप्पी साध लेते हैं। कर्जा माफ़ नहीं करेंगे। हमारे पास फसल, जमीन, पानी, गेहूं, फल सब है, लेकिन उप्र का किसान आत्महत्या कर रहा है। उन्होंने सवाल किया क्यों? बाराबंकी की पिपरमिंट, प्रतापगढ़ का आंवला, अमेठी का टमाटर, इलाहबाद सा अमरूद दुनिया में नहीं मिलेगा। फिर भी किसान आत्महत्या कर रहा है। हमने प्रदेश की सूरत बदलने को गठबंधन किया।

'जयललिता की मौत गंभीर इंफेक्शन के कारण हुई थी'

तमिलनाडु की पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता का इलाज करने वाले अपोलो अस्पताल के डॉक्टरों की टीम ने सोमवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि उनकी मौत कैसे हुई थी?

डॉक्टरों ने बताया कि जयललिता की मौत गंभीर इंफेक्शन के कारण हुई थी और इसके चलते उनके अंगों ने काम करना बंद कर दिया था।

चेन्नई में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यूके के डॉक्टर रिचर्ड बील ने कहा कि जयललित को सबसे अच्छा इलाज दिया था, लेकिन उनकी डायबिटिज के चलते इलाज के दौरान कई दिक्कतें आई।

डॉ बील ने बताया कि जब उन्हें अस्पताल में लाया गया था तो उनको सांस लेने में दिक्कत थी। शुरुआत में इंफेक्शन के बाद उनकी हालत में सुधार हो रहा था और वह इशारों में बात कर रही थीं।

डॉक्टरों ने बताया कि 17 नवंबर को तमिलनाडु की एक सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए जब जयललिता ने चुनाव आयोग के दस्तावेज जब दस्तखत के लिए आए थे तो वह होश में थीं।

डॉक्टरों ने बताया कि जयललिता ने दस्तावेज पढ़े थे हालांकि वह काफी कमजोर थी, लेकिन वह पेपर पर दस्तखत नहीं कर सकी तो उन्होंने अंगूठा लगाया।

जयललिता के अस्पताल में भर्ती रहने के दौरान उनकी सेहत को लेकर कई कयास लगाए गए। विरोधियों ने आरोप लगाया कि शशिकला समेत कुछ लोगों की ही जयललिता से ही मिलने की अनुमति थी।

इतना ही नहीं,जब चुनाव आयोग के दस्तावेजों में उनके अंगूठे के निशान को लेकर भी उनके जीवित नहीं रहने का शक पैदा हुआ।

जयललिता के समर्थकों ने मांग की कि उनकी एक तस्वीर खींचकर उन्हें दिखाई क्यों नहीं जाती? तो इन सवालों का जवाब देते हुए डॉक्टरों ने ज़ोर देते हुए कहा कि जो लोग बीमार होते हैं, उनकी तस्वीर लेना उचित नहीं है, इसे दख़लअंदाज़ी कहा जाता है।

'1 साल में सभी मोबाइल नंबर को आधार से जोड़ा जाए'

भारत के सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को केन्द्र सरकार से कहा है कि एक साल के भीतर हर फोन ग्राहक को आधार नंबर से जोड़ा जाए। कोर्ट ने प्री पेड सिम ग्राहकों को भी आधार नंबर से जोड़ने के लिए एक साल का समय दिया है।

भारत के मुख्य न्यायाधीश की पीठ ने जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए केंद्र से वर्तमान मोबाइल उपभोक्ताओं की पहचान के सत्यापन के लिए सालभर के भीतर प्रभावी व्यवस्था तैयार करने को कहा।

कोर्ट ने कहा कि 100 करोड़ से ज्यादा मोबाइल यूजर हैं और इन सभी को एक साल के भीतर आधार नंबर से जोड़ा जाए। इतना ही नहीं, सुप्रीम कोर्ट ने केन्द्र सरकार को कहा है कि प्री पेड सिम धारक जब भी रिचार्ज कराने जाए तो वह उसका फॉर्म जमा कराए जाए।

कोर्ट का कहना है कि अगर केन्द्र सरकार इसको लेकर एक साल के भीतर नियम कानून बनाती है तो सिम कार्ड के मिस यूज को रोका जा सकता है।

कोर्ट का कहना है कि मोबाइल फोन की वैरिफिकेशन बैंकिंग इस्तेमाल के लिए बहुत जरूरी है। इस मामले में पिछली सुनवाई के दौरान कोर्ट ने केन्द्र सरकार से पूछा था कि मोबाइल सिम कार्ड रखने वाले लोगों की वैरिफिकेशन का क्या तरीका है? इस बारे में कोर्ट ने केन्द्र सरकार को दो हफ्तों का समय दिया था।

सुप्रीम कोर्ट में एक समाजसेवी संस्था ने जनहित याचिका दाखिल की थी। इस याचिका में कहा गया था कि केन्द्र सरकार और ट्राई को निर्देश दिया जाए कि मोबाइल सिम धारकों की पहचान, पता और अन्य जानकारी उपलब्ध हों। कोई भी मोबाइल सिम बिना वैरिफिकेशन के न दी जाए।