भारत

नागालैंड में भड़की हिंसा, बुलाई गई सेना

नागालैंड में शहरी निकाय चुनाव में महिलाओं को 33 फीसदी आरक्षण के विरोध में जारी प्रदर्शन हिंसक हो गया है। महिला आरक्षण का विरोध कर रहे प्रदर्शनकारियों ने राज्य निर्वाचन आयुक्त के कार्यालय में तोड़फोड़ की और कोहिमा नगर पालिका परिषद व जिला कमिश्नर के ऑफिस में आग लगा दी।

वहीं हालात बेकाबू होता देख नगालैंड पुलिस की मदद के लिए सेना की पांच टुकड़ि‍यां भेजी गई हैं।

एक प्रत्यक्षदर्शी के अनुसार, गुस्साई भीड़ ने क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय और एक्साइज विभाग के दफ्तर में भी आग लगा दी। हालांकि इन सभी घटनाओं की पुलिस ने फिलहाल पुष्टि नहीं की है।

प्रदर्शनकारी मुख्यमंत्री टी.आर. जेलिआंग और उनके पूरे मंत्रिमंडल के इस्तीफे की मांग कर रहे थे। प्रदर्शनकारी शहरी निकाय चुनाव में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने का विरोध कर रहे हैं। वे इस बात पर गुस्से में थे कि प्रभावशाली आदिवासों समूहों के विरोध के बावजूद जेलिआंग सरकार शहरी निकाय के चुनाव करा रही थी।

इससे पहले गुरुवार को विभिन्न आदिवासी संगठनों की प्रतिनिधि संस्था नगालैंड ट्राइब्स एक्शन कमेटी (एनटीएसी) ने जेलिआंग सरकार को शाम चार बजे तक इस्तीफा देने, दीमापुर के पुलिस कमिश्नर को हटाने और जारी चुनाव प्रक्रिया को समाप्त करने का अल्टीमेटम दिया था।

एनटीएसी ने राजभवन को एक ज्ञापन भी सौंपा है। हालांकि राज्यपाल पीबी आचार्य इटानगर में थे। उनके पास अरूणाचल प्रदेश के राज्यपाल का भी प्रभार है। अब कोहिमा पहुँच चुके है। राज्य कैबिनेट और आदिवासी समूहों से बैठक कर स्थिति को नियंत्रण में करने का प्रयास कर रहे हैं। मंगलवार को दीमापुर में दो प्रदर्शनकारियों के पुलिस फायरिंग में मारे जाने के बाद से ही राज्य में माहौल तनावपूर्ण हो गया था। बुधवार को जब उनका शव कोहिमा में लाकर रखा गया तो स्थिति और तनावपूर्ण हो गई।

अब शव का अंतिम संस्कार किया जा चुका है।  

एनटीएसी के दबाव में जेलिआंग ने चुनाव प्रक्रिया को रद्द कर दिया है और दीमापुर के पुलिस कमिश्नर का ट्रांसफर कर दिया है ताकि फायरिंग की घटना की निष्पक्ष जांच हो सके।

हालांकि मुख्यमंत्री की घोषणाएं चार बजे की समय सीमा समाप्त होने के पहले ही हुई थी, फिर भी भीड़ हिंसक हो गई।

बजट 2017-18: सरकार ने की प्रशंसा, विपक्ष ने आलोचना की

भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने लोकसभा में विपक्ष के हंगामे के बीच बजट 2017-18 पेश किया। इस बजट में जेटली ने नोटबंदी की मार से जूझ रहे वेतनभोगी मध्यवर्ग और छोटे कारोबारियों को राहत देते हुए इनकम टैक्स स्लैब में बदलाव किए हैं।

अब तीन से पांच लाख रुपये तक की सालाना व्यक्तिगत आय वालों पर टैक्स की मौजूदा 10 प्रतिशत दर को घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया। इसके साथ ही 50 करोड़ रुपये तक का वार्षिक कारोबार करने वाली छोटी इकाइयों के लिए टैक्स की दर घटाकर 25 प्रतिशत कर दी।

इस बार के आम बजट में रेलवे बजट को भी मिलाया गया है। इस लिहाज से यह ऐतिहासिक बजट है। इसके साथ ही आमतौर पर फरवरी के अंत में बजट पेश किया जाता है, लेकिन इस बार इसे फरवरी माह के शुरू में ही पेश किया गया।

वित्त मंत्री ने टैक्स छूट के लिए न्यूनतम आय की सीमा को 2.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 3 लाख रुपये कर दिया है। इससे अब 3 लाख रुपये की वार्षिक आय पर कोई टैक्स नहीं लगाया जाएगा।

तीन लाख से 5 लाख रुपये की सालाना आय पर टैक्स की दर 10 से घटाकर 5 प्रतिशत की गई। 50 लाख रुपये से एक करोड़ रुपये सालाना कमाने वाले लोगों को 10 प्रतिशत टैक्स देना होगा। एक करोड़ रुपये से अधिक की वार्षिक आय पर 15 प्रतिशत टैक्स जारी रहेगा।

इस बजट में महिला और बाल कल्याण के लिए आवंटन एक लाख 56 हजार 528 करोड़ रुपये से बढ़ाकर एक लाख 84 हजार 632 करोड़ रुपये किया गया है। सरकार ने ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए 500 करोड़ रुपए के आवंटन से गांवों में महिला शक्ति केंद्र स्थापित करने की घोषणा की है। यह राशि ग्रामीण महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए कौशल विकास, रोजगार, डिजिटल साक्षरता, स्वास्थ्य और पोषण के अवसरों के लिए 'वन स्टॉप' सामूहिक सहायता पर खर्च की जाएगी।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि गर्भवती महिलाओं को वित्तीय सहायता प्रदान करने की राष्ट्रव्यापी योजना के अंतर्गत छह हजार रुपए सीधे ऐसी गर्भवती महिला के बैंक खाते में जमा किए जाएंगे जो किसी भी चिकित्सा संस्थान में बच्चे को जन्म देगी और अपने बच्चों का टीकाकरण कराएगी।

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने बताया कि इस वर्ष मनरेगा का बजट बढ़ाकर 48000 करोड़ रुपए किया जा रहा है जो अब तक की सबसे बड़ी वृद्धि है। पिछले वर्ष मनरेगा का बजट 38500 करोड़ रुपए था।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2019 में महात्मा गांधी की 150वीं जयंती पड़ रही है। इस मौके पर सरकार एक करोड़ परिवारों को गरीबी से निजात दिलाकर 50,000 ग्राम पंचायतों को गरीबी मुक्त करेगी।

सरकार ने कृषि क्षेत्र की विकास दर चार प्रतिशत से अधिक करने के उद्देश्य से कृषि ऋण 10 लाख करोड़ निर्धारित करने का प्रस्ताव दिया है। इसके अलावा सिंचाई के लिए 40 हजार करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। किसानों के फसल बीमा योजना के प्रति बढ़ते आकर्षण के बावजूद 2016-17 में कुल फसल क्षेत्र का 30 प्रतिशत हिस्सा ही बीमित था जिसे 2017-18 में बढ़ाकर 40 प्रतिशत और 2018-19 में बढ़ाकर 50 प्रतिशत करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। सरकार ने देश के सभी 648 कृषि विज्ञान केन्द्रों में नई लघु प्रयोगशालाएं स्थापित करने का निर्णय लिया है।

सरकार उच्च शैक्षणिक संस्थानों में छात्रों के दाखिले के लिए राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का गठन करेंगी और देश के स्तरीय शैक्षणिक संस्थानों को स्वायत्तता देने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नियमों में सुधार लाएगी।

इसके अलावा वह माध्यमिक शिक्षा का स्तर बढ़ाने और लैंगिक समानता लाने के लिए नवाचार कोष की भी स्थापना करेगी और स्कूलों में पढ़ाई से छात्रों के ज्ञान के आकलन के लिए एक प्रणाली विकसित करेगी।

जेटली ने आज संसद में 2017-18 का बजट पेश करते हुए भारत में शिक्षा सुधारों को लेकर यह घोषणा करते हुए बताया कि छात्रों के लिए सूचना प्रौद्योगिकी के बेहतर इस्तेमाल से ऑनलाइन पढ़ाई की सुविधा के वास्ते 'स्वंय' नामक एक प्लेटफार्म भी बनाया जाएगा।  

सरकार ने स्व रोजगार को बढ़ावा देने और रोजगार के नए अवसर सृर्जित करने के लिए 50 करोड़ रुपए तक का कारोबार करने वाली छोटी कंपनियों राहत देते हुए इनका आयकर घटाकर 25 प्रतिशत करने की घोषणा की है।

उन्होंने बताया कि वर्ष 2015-16 के आंकड़ों के अनुसार 6.94 लाख कंपनियां रिटर्न दाखिल कर रही हैं जिसमें से 6.67 लाख कंपनियां इस श्रेणी में आती हैं इसलिये इस प्रावधान से 96 प्रतिशत कंपनियां कम टैक्स का लाभ उठाएंगी। इससे बड़ी कंपनियों की तुलना में छोटे उद्योगों का क्षेत्र अधिक प्रतिस्पर्धी बनेगा। इससे 7,200 करोड़ रुपये प्रति वर्ष का राजस्व प्राप्त होने का अनुमान है।

वित्त मंत्री ने कालेधन के खिलाफ अपने अभियान को आगे बढ़ाते हुये तीन लाख रुपये अथवा इससे अधिक के नकद लेनदेन पर रोक लगा दी है।

इसी प्रकार राजनीतिक दलों को मिलने वाले चंदे में पारदर्शिता लाने के लिये 2,000 रुपये से अधिक का कोई भी चंदा केवल चेक अथवा ऑनलाइन लेनदेन के जरिये ही लिया जा सकेगा। राजनीतिक दल अब किसी व्यक्ति से केवल 2,000 रुपये ही नकद चंदा ले सकेंगे।

रेल क्षेत्र में हाल के समय में कई हादसे हुए हैं। इसी के मद्देनजर सरकार ने बजट 2017-18 में रेलवे के लिए एक लाख करोड़ रुपये के विशेष सुरक्षा कोष की स्थापना का प्रस्ताव किया है। इसके तहत ट्रैक और सिग्नल प्रणाली का उन्नयन किया जाएगा और मानवरहित क्रॉसिंग को समाप्त किया जाएगा।

इस बार रेल बजट को आम बजट में मिला दिया गया है। इसमें 3,500 किलोमीटर की नई लाइनें चालू करने का भी प्रस्ताव है।

2016-17 के लिए यह लक्ष्य 2,800 किलोमीटर का है। रेलवे को नए वित्त वर्ष में बजट से सकल 55,000 करोड़ रुपये की सहायता मिलेगी। वित्त मंत्री अरण जेटली ने अगले वित्त वर्ष के लिए रेलवे का योजना आकार 1,31,000 करोड़ रुपये रखने का प्रस्ताव किया है। चालू वित्त वर्ष के लिए यह 1,21,000 करोड़ रुपये है।

नाकामियों को छुपाने की कोशिश में लगी मोदी की अनुभवहीन सरकार: विपक्ष

भारत में विपक्षी दलों ने राष्ट्रपति के अभिभाषण में मोदी सरकार के आर्थिक विकास और गरीबों और वंचितों के कल्याण के लिए किए गए कामों और वायदों को झूठ का पुलिंदा करार देते हुए कहा कि यह एक अनुभवहीन सरकार की अपनी नाकामियों को छुपाने की कवायद भर है।

भारत के राष्ट्रपति के अभिभाषण पर प्रतिक्रिया वक्त करते हुए कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा कि देश के लिए रोजगार सृजन सबसे अहम मुद्दा है, लेकिन सरकार इस मोर्चे पर नाकाम साबित हुई है।

कांग्रेस प्रवक्ता रेणुका चौधरी ने कहा कि सरकार आज जिन नीतियों और समाज कल्याण योजनाओं को लेकर अपनी पीठ थपथपा रही है, वह सब कांग्रेस के शासन काल में शुरू की गई योजनाएं है। भाजपा सरकार ने अपनी ओर से कुछ नहीं किया है सिवाय लोगों से झूठे वादे करने और उन्हें भ्रमजाल में फंसाए रखने के।

रेणुका चौधरी ने कहा किसानों की बात करने वाली मोदी सरकार के काल में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। युवा बेरोजगार हो गए है। नोटबंदी ने हजारों घर तबाह कर दिए। छोटे कारोबार खत्म हो गए। गरीब मर रहे हैं। यह सिर्फ नोटबंदी नहीं, बल्कि गला बंदी और देश बंदी भी है। सबको डरा कर चुप करा दिया गया है। मीडिया भी कुछ बोलने से डर रहा है। राष्ट्रपति भी मजबूर हैं। संवैधानिक मजबूरी है जो सरकार ने लिख कर दिया है उसे पढ़ना पढ़ रहा है।

पश्चिम बंगाल से कांग्रेस के सांसद अधीर रंजन चौधरी ने कहा कि राष्ट्रपति के अभिभाषण में सरकार ने जो कुछ कहा है वह भाजपा का चुनावी घोषणा पत्र जैसा है। कोरी बाते हैं जिन पर न तो अमल किया गया है और न ही किया जाएगा।

राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के तारीक अनवर ने कहा कि आर्थिक सर्वेक्षण में कोई नई नीति, कोई नई बात कुछ नहीं है। न इसमें रोजगार की बात है, न मंहगाई दूर करने की बात है।

रेवल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी के एन प्रेमचंद्रन ने कहा कि नोटबंदी को लेकर इतना हल्ला मचाया गया, लेकिन अभिभाषण में इसका कहीं कोई जिक्र नहीं था। यह भी नहीं बताया गया कि इसके जरिए कितना काला धन बाहर आया? कितने पुराने नोट जमा हुए? सरकार ने इस मुद्दे पर चुप्पी साध ली है। बाकी सब पुरानी नीतियां और बाते हैं। बस एक नयी बात सरकार ने जो की है, वह लोकसभा और विधानसभा चुनाव एक साथ कराए जाने से संबंधित है।

पंजाब के बठिंडा में कार बम विस्फोट में 3 मरे, कई घायल

भारत के पंजाब के शहर मौर मंडी के पास कांग्रेस के एक उम्मीदवार की रैली के करीब एक कार में हुए शक्तिशाली विस्फोट में कम से कम तीन लोगों की मौत हो गई है।

पुलिस ने कहा कि जिस समय विस्फोट हुआ, उस समय कांग्रेस उम्मीदवार हरमिंदर जस्सी मौर मंडी के पास एक सभा को संबोधित कर रहे थे। सभा स्थल के पास हुए इस विस्फोट में कम से कम 15 लोग घायल भी हो गए हैं।

पुलिस अधिकारी घटनास्थल पर पहुंच गए हैं। विस्फोट की यह घटना ऐसे समय में हुई है, जब राज्य विधानसभा चुनाव के लिए चार फरवरी को मतदान होने हैं।

जानकारी के अनुसार, बठिंडा के उपायुक्त घनश्याम थोरी ने कहा कि विस्फोट रात करीब 9 बजे हुआ। मारे गए लोगों में दो वयस्क और एक बालक शामिल है। उनकी पहचान अभी तक नहीं हुई है। घटना के कारणों का पता नहीं चला है। पुलिस प्रशासन और फोरेंसिंक टीम भी मौके पर पहुंच गई है।

बताया जा रहा है कि जहां यह हादसा हुआ वहां से 100 मीटर की दूरी पर कांग्रेसी उम्मीदवार हरमिन्दर सिंह जस्सी की रैली हो रही थी। फिलहाल घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा रहा है और राहत कार्य जारी है।

भारत के आर्थिक सर्वेक्षण में इंडस्ट्री ग्रोथ रेट घटने का अनुमान

भारत के वित्त मंत्री अरुण जेटली ने आर्थिक सर्वेक्षण की रिपोर्ट संसद में पेश की है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जारी वैश्विक मंदी के बावजूद यह मजबूती बनी रही है।

आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2016-17 में इंडस्ट्री सेक्टर में ग्रोथ रेट घटकर 5.2 प्रतिशत पर आने का अनुमान है। पिछले वित्त वर्ष में यह 7.4 प्रतिशत थी।

आर्थिक सर्वेक्षण में इंडस्ट्री सेक्टर के नेगेटिव एक्सपोर्ट ग्रोथ रेट का रुझान 2016-17 (अप्रैल-दिसम्‍बर) के दौरान कुछ हद तक बदली है और निर्यात 0.7 प्रतिशत बढ़कर 198.8 बिलियन तक पहुंच गया। निर्यात में दर्ज की जा रही नेगेटिव ग्रोथ का रुख कुछ हद तक वर्ष 2016-17 (अप्रैल-दिसंबर) में सुधार के लक्षण दर्शाने लगा क्‍योंकि निर्यात 0.7 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 198.8 अरब अमेरिकी डॉलर के स्‍तर पर पहुंच गया। वहीं वर्ष 2016-17 (अप्रैल-दिसंबर) के दौरान आयात 7.4 प्रतिशत घटकर 275.4 अरब अमेरिकी डॉलर के स्‍तर पर आ गया।

वर्ष 2016-17 (अप्रैल-दिसंबर) के दौरान व्‍यापार घाटा कम होकर 76.5 अरब अमेरिकी डॉलर रह गया, जबकि इससे पिछले वित्‍त वर्ष के दौरान यह 100.1 अरब अमेरिकी डॉलर आंका गया था। बहरहाल, व्यापार घाटा में कमी तो आई है, लेकिन व्यापार घाटा अभी भी हो रहा है।      

साल 2016-17 की प्रथम छमाही में चालू खाता घाटा (सीएडी) कम होकर जीडीपी के 0.3 प्रतिशत पर आ गया, जबकि वित्‍त वर्ष 2015-16 की प्रथम छमाही में यह 1.5 प्रतिशत और 2015-16 के पूरे वित्‍त वर्ष में यह 1.1 प्रतिशत रहा था।

प्रत्‍यक्ष विदेशी निवेश की तेज आवक और विदेशी पोर्टफोलियो निवेश की शुद्ध आवक सीएडी के वित्‍त पोषण के लिहाज से पर्याप्‍त रहीं जिसके परिणामस्‍वरूप वित्‍त वर्ष 2016-17 की प्रथम छमाही में विदेशी मुद्रा भंडार में वृद्धि का रुख रहा।

वित्‍त वर्ष 2016-17 की प्रथम छमाही में भारत के विदेशी मुद्रा भंडार में बीओपी के आधार पर 15.5 अरब अमेरिकी डॉलर की वृद्धि दर्ज की गई।

वर्ष 2016-17 के दौरान रुपये का प्रदर्शन अन्‍य उभरती बाजार की अर्थव्‍यवस्‍थाओं की मुद्राओं के मुकाबले बेहतर रहा है।

11 मार्च के बाद हम पार्टी बनाएंगे, मरते दम तक नेताजी के साथ रहेंगे: शिवपाल

समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव के चाचा और समाजवादी पार्टी के अपदस्थ राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव के छोटे भाई शिवपाल यादव ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश विधान सभा चुनाव के बाद नई पार्टी बनाने की घोषणा की।

उन्होंने इटावा में बोलते हुए कहा, ''11 मार्च को नतीजे आएंगे, उसके बाद हम पार्टी बनाएंगे।''  

शिवपाल ने जसवंतनगर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी प्रत्याशी के रूप में नामांकन दाखिल करने के बाद नुमाइश पंडाल में आयोजित जनसभा में यह ऐलान किया।

शिवपाल यादव ने कहा कि जो चाहे मुझसे ले लो, लेकिन नेताजी का अपमान बर्दाश्त नहीं कर सकते। मरते दम तक नेताजी के साथ रहेंगे और उनका आदेश मानेंगे।

उन्होंने कहा कि मेहरबानी हो गई कि टिकट दे दिया, नहीं तो फिर निर्दलीय ही चुनाव लड़ना पड़ता।

शिवपाल यादव ने कहा कि अभी हमने पर्चा भर दिया है। कल तक बहुत सी अटकलें लगाई जा रही थी, लेकिन हमने साईकिल और समाजवादी पार्टी से पर्चा भर दिया है।

शिवपाल ने मुलायम सिंह यादव के बारे में भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि आज हम जो भी हैं, नेताजी की वजह से ही हैं। इसके अलावा बहुत से लोगों ने कहा कि वो जो कुछ भी हैं, नेताजी की वजह से ही हैं, लेकिन आज उन्हीं लोगों ने नेताजी को अपमानित करने का काम किया है।

समाजवादी सरकार में अपने विभाग के बारे में बोलते हुए शिवपाल यादव ने कहा कि पांच साल जो सरकार चली थी, उसमें हमारे विभाग क्या किसी से कम अच्छे चले।

उन्होंने आगे कहा, ''हम जानते हैं कि समाजवादी पार्टी में भी भीतरघात करने वाले लोग हैं। उनसे सावधान रहने की जरूरत है। हम केवल गलत काम रोक रहे थे, गलत काम का विरोध कर रहे थे। तब नेताजी को हटा दिया गया।''

सपा-कांग्रेस गठबंधन पार्टी को खत्म कर देगा: मुलायम सिंह

भारत के प्रान्त उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस और समाजवादी पार्टी गठबंधन का मुखर विरोध करने के बाद समाजवादी पार्टी के अपदस्थ राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव ने रुख और कड़ा कर लिया हैं। उन्होंने पार्टी कार्यकर्ताओं को गठबंधन में कांग्रेस के लिए छोड़ी गई 105 सीटों पर नामांकन दाखिल करने की हिदायत दी है।

मुलायम सिंह यादव ने सोमवार को नई दिल्ली में कार्यकर्ताओं से कहा कि कांग्रेस की सीटों पर नामांकन दाखिल कर चुनाव लड़े। उन्होंने कहा कि सपा को कांग्रेस के खिलाफ लड़कर खड़ा किया है। इसलिए वह गठबंधन के लिए प्रचार नहीं करेंगे।

मुलायम सिंह ने कहा कि वह अभी भी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को इस गठबंधन के खिलाफ समझाने की कोशिश कर रहे हैं।

मुलायम सिंह ने कहा कि यह गठबंधन पार्टी को खत्म कर देगा। क्योंकि कांग्रेस के हिस्से में आई सीटों पर सपा का कोई उम्मीदवार नहीं होगा।

मुलायम सिंह यादव ने कांग्रेस से लड़कर मुस्लिम मतदाताओं का भरोसा जीता था। मुलायम को डर है कि गठबंधन से कांग्रेस मजबूत होती है तो मुस्लिम वोट वापस कांग्रेस के पास चला जाएगा क्योंकि कांग्रेस मुस्लिम की पहली पसंद रही है।

सपा नेता मानते हैं कि इस गठबंधन में सपा के मुकाबले कांग्रेस को ज्यादा फायदा होगा क्योंकि 105 सीट पर कांग्रेस का संगठन मजबूत होगा और पिछले चुनाव के मुकाबले अधिक सीट भी मिल सकती है।

यही मुलायम सिंह की नाराजगी की असल वजह है इसलिए मुलायम सिंह यादव ने गठबंधन में कांग्रेस के हिस्से में आई सीट पर कार्यकर्ताओं को नामांकन करने को कहा है। उनका कहना है कि इन सीट पर हमारे नेता और कार्यकर्ता क्या करेंगे? सब ने मेहनत की है। उनका क्या होगा? वह पार्टी खत्म नहीं होने देंगे।

सपा के नेता हालांकि मान रहे हैं कि मुलायम सिंह के कांग्रेस के हिस्से में आई सीट पर चुनाव लड़ने के ऐलान से बहुत ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा क्योंकि अधिकतर नेता और कार्यकर्ता अखिलेश यादव को अपना नेता मान चुके हैं। मुलायम सिंह यादव के कहने से नेता और कार्यकर्ता कांग्रेस के खिलाफ चुनाव लड़ते हैं तो कांग्रेस उम्मीदवारों की मुश्किल जरुर बढ़ जाएगीं।

पहले दो चरणों के चुनाव के लिए नामांकन प्रक्रिया खत्म हो चुकी है। ऐसे में मुलायम सिंह यादव के निर्देश पर कार्यकर्ता बाकी पांच चरणों के लिए ही नामांकन दाखिल कर सकते हैं। कांग्रेस को गठबंधन में पहले दो चरण में 43 और बाकी चरणों में 62 सीट मिली है।

सर्वेक्षण: उत्तर प्रदेश चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन को बहुमत

भारत के प्रान्त उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में मुख्य रूप से तीन मुख्य प्रतिद्वंदियों के बीच मुकाबला है। एबीपी न्यूज चैनल और सीएसडीएस ने 17 से 23 जनवरी के दौरान उत्तर प्रदेश में किए चुनावी सर्वेक्षण में समाजवादी पार्टी-कांग्रेस गठबंधन को बहुमत के करीब बताया गया है।

हालांकि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की लोकप्रियता में दिसंबर 2016 के मुकाबले दो फीसदी की गिरावट दर्शायी गई है। वहीं दूसरे स्थान पर बीजेपी गठबंधन को दिखाया गया है। उत्तर प्रदेश में बसपा को सर्वेक्षण में तीसरे स्थान पर खिसकता दिखाया गया है। सपा के झगड़े में अखिलेश यादव पार्टी के सर्वोच्च नेता बनकर उभरे हैं।

अखिलेश यादव की लोकप्रियता में दो फीसदी की गिरावट आई है। दिसंबर में 28 फीसदी की पसंद अखिलेश थे, लेकिन जनवरी में इसी सवाल पर अखिलेश 26 फीसदी वोटरों की पसंद रह गए। मायावती पहले की तरह ही 21 फीसदी पर तो राजनाथ सिंह 03 फीसदी पर बने हुए हैं।

सर्वेक्षण के मुताबिक, मुख्यमंत्री अखिलेश यादव और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोनों से लोग संतुष्ट हैं। सर्वेक्षण की मानें तो प्रधानमंत्री के रूप में मोदी और मुख्यमंत्री के रूप में अखिलेश से संतुष्ट लोगों का प्रतिशत एक समान है।

सपा-कांग्रेस के गठबंधन से फायदे के मामले में कोई स्पष्ट राय नहीं दिखी। करीब 43 प्रतिशत लोगों ने इस पर अपनी कोई राय ही नहीं दी। लेकिन 37 प्रतिशत लोगों ने एसपी को फायदा बताया।

अखिलेश यादव के खिलाफ सत्ताविरोधी रुझान घटा, 43 प्रतिशत देना चाहते हैं दूसरा मौका। झगड़े के लिए शिवपाल यादव को जिम्मेदार मानते हैं 36 प्रतिशत मतदाता। विकास बना मुख्य चुनावी मुद्दा, 32 प्रतिशत मानते हैं इसे मुद्दा। नोटबंदी पर मोदी सरकार का समर्थन बढ़ा 41 प्रतिशत लोगों ने फैसले को सही ठहराया।

एबीपी न्यूज-लोकनीति-सीएसडीएस ने 17 से 23 जनवरी के बीच उत्तर प्रदेश के लोगों की राय ली। इसमें उत्तर प्रदेश की 65 विधानसभा क्षेत्रों के 6481 लोगों से बात की। यह सर्वेक्षण यूरोपियन सोसाइटी फॉर ओपिनियन एंड मार्केटिंग रिसर्च (ESOMAR) के दिशा-निर्देशों का पालन करते हुए किया गया।

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों को लेकर दूसरी ओर एक और न्यूज चैनल टाइम्स नाऊ-वीएमआर ने पोल सर्वे किया। इसमें ठीक उलट 1991 के बाद पहली बार राज्य में भाजपा को बहुमत में दिखाया गया है। टाइम्स नाऊ ने उत्तर प्रदेश के 24 जिलों मे 7500 मतदाताओं को इस सर्वेक्षण में शामिल किया।

भारत की अर्थव्यवस्था बहुत अच्छी नहीं है: मनमोहन सिंह

भारत में आर्थिक समीक्षा जारी होने से ठीक एक दिन पहले कांग्रेस ने मोदी सरकार पर आर्थिक मोर्चे पर विफल रहने का आरोप लगाया है। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने भारत की आर्थिक स्थिति के बारे में एक पुस्तिका जारी करते हुए कहा कि अर्थव्यवस्था बहुत अच्छी नहीं है। रोजगार घट रहा है। निवेश कम हुआ और निर्यात में भी गिरावट आई है।

'द रियल स्टेट ऑफ इकोनॉमी 2017, ए कंपरिहेंसिव मिड टर्म इकोनॉमिक एनालिसिस ऑफ मोदी गर्वमेंट' पुस्तिका जारी करते पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि रेटिंग एजेसिंया लगातार अर्थव्यवस्था के बारे में आगाह कर रही है। ऐसे में यह सोचना जरुरी है कि अर्थव्यवस्था को विकास के पथ पर लाने के लिए क्या ठोस कदम उठाए जाने चाहिए?

इस मौके पर भारत के पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने कहा कि मंगलवार को सरकार अर्थव्यवस्था को मजबूत दिखाने की कोशिश करेंगी। पर कांग्रेस ने इस पुस्तिका के जरिए लोगों के सामने सच्चाई पेश की है। यूपीए सरकार का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि दस वर्ष की औसत विकास दर 7.5 फीसदी थी। पर मौजूदा सरकार इसे बरकरार रखने में विफल रही है।

चिदंबरम ने कहा कि मौजूदा सरकार के ढ़ाई वर्ष के कार्यकाल में रोजगार के अवसर घटे हैं। निजी पूंजी का निवेश नहीं हो रहा है। आधारभूत ढ़ांचा क्षेत्र में निवेश घट रहा है। सरकार प्रतिदिन 30 किमी सड़क बनाने का दावा कर रही है, पर हकीकत में यह छह किमी है। सरकार बुलेट ट्रेन की बात कर रही है, पर रेल के पटरी से उतरने की घटनाएं बढ़ी हैं।

कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार से सामाजिक कल्याण की योजनाओं के आवंटन में कटौती नहीं करने की मांग की है। पी.चिदंबरम मे कहा कि नोटबंदी के बाद मनरेगा की मांग में 60 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। इसलिए सरकार को बजट में सामाजिक कल्याण की योजनाओं में आवंटन बढ़ाना चाहिए। साथ ही अर्थव्यवस्था की हालत सुधारने के लिए घाटा कम करने पर भी ध्यान देना चाहिए क्योंकि सरकार घाटा कम करने का लक्ष्य हासिल करने में नाकाम रही है।

1 फरवरी से एटीएम में कैश विदड्रॉअल लिमिट खत्म होगी!

भारत में नोटबंदी के बाद से लागू एटीएम से कैश विदड्रॉअल लिमिट एक फरवरी से खत्म हो जाएगी। अारबीआई के अनुसार, अब एटीएम मशीन से एक दिन में एक डेबिट कार्ड से 24 हजार रुपये तक निकाल सकते हैं, लेकिन एक हफ्ते में 24 हजार रुपये निकालने की लिमिट बरकरार रहेगी।

रिजर्व बैंक की ओर से जारी एक अधिसूचना में कहा गया है कि चालू खातों, कैश क्रेडिट खातों और ओवरड्राफ्ट खातों से निकासी पर लागू प्रतिबंध हटा लिया गया है। साथ ही एटीएम से पैसे निकाले की लिमिट भी खत्म कर दी गई है, लेकिन बचत खातों पर लगाई गई निकासी सीमा हटाने के बारे में आगे विचार किया जाएगा।

फिलहाल अभी एटीएम से हर दिन 10 हजार रुपये निकल रहे हैं। 16 जनवरी को आरबीआई ने बैंक एटीएम से पैसे निकालने की सीमा हर रोज 4500 रुपए से बढ़ाकर रोजाना 10,000 रुपए कर दिया था। 4500 से पहले एटीएम से केवल 2500 रुपये निकालने की सीमा थी।

हालांकि रिजर्व बैंक ने एक हफ्ते में 24,000 रुपए निकासी की सीमा को बरकरार रखा। यह सीमा केवल बचत खाते को लेकर है।

भारत में केंद्र की मोदी सरकार ने 8 नवंबर 2016 को कालेधन पर रोक लगाने के लिए 500 रुपये और 1000 रुपये के नोटों के चलन पर रोक लगा दी थी। इन पुराने नोटों के स्थान पर 500 रुपये और 2000 रुपये के नये नोट जारी किये गए थे।

फिलहाल, एटीएम से पैसे निकालने की साप्ताहिक सीमा 24,000 है, लेकिन एक दिन में 24,000 रुपये निकाले जा सकते हैं।